samacharsecretary.com

दावोस में मध्यप्रदेश का मजबूत प्रदर्शन: CM मोहन यादव निवेश और ग्रीन ग्रोथ पर ग्लोबल रोडमैप पेश करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF), दावोस के वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं, औद्योगिक क्षमताओं और दीर्घकालिक विकास दृष्टि को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा। दावोस में वैश्विक नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के शीर्ष नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के समक्ष मध्यप्रदेश की स्थिर नीतियां, संसाधन-समृद्ध संरचना और भविष्य उन्मुख विकास मॉडल को प्रमुखता से रखा जाएगा। दावोस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सत्रों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन और ग्रीन ग्रोथ पर राज्य के संतुलित दृष्टिकोण को सामने रखा जाएगा। उपयोगिता-स्तर की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं, स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना और ऊर्जा परिवर्तन से जुड़े मॉडल राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश के भरोसेमंद गंतव्य के रूप में स्थापित करेंगे। उद्योग और विनिर्माण से जुड़े सत्रों में रक्षा उत्पादन, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा। वैश्विक उद्योग प्रतिनिधियों के साथ संवाद के दौरान मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल औद्योगिक नीति, सरल प्रक्रियाएं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की क्षमता को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। डिजिटल तकनीक और नवाचार से जुड़े सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सॉल्यूशंस पर चर्चा होगी। इन विमर्शों में प्रशासन, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में तकनीक के प्रभावी उपयोग को लेकर राज्य का व्यावहारिक और परिणाम-केंद्रित नजरिया सामने आएगा। पर्यटन से जुड़े वैश्विक सत्रों में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, जैव-विविधता, अनुभव-आधारित पर्यटन और बेहतर कनेक्टिविटी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। सतत पर्यटन विकास और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर केंद्रित संवाद राज्य के पर्यटन क्षेत्र में नए निवेश अवसरों को रेखांकित करेंगे। स्वास्थ्य, सामाजिक अवसंरचना और मानव विकास से जुड़े सत्रों में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, तकनीक-समर्थित स्वास्थ्य सेवाओं और मानव-केंद्रित विकास मॉडल पर चर्चा होगी, जिससे सामाजिक विकास को आर्थिक प्रगति से जोड़ने वाले राज्य के दृष्टिकोण को वैश्विक पहचान मिलेगी। दावोस के दौरान विषयगत सत्रों, गोलमेज बैठकों और वन-टू-वन उच्चस्तरीय संवादों के माध्यम से निवेश, औद्योगिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी के ठोस अवसर सामने आने की उम्मीद है। इन प्रयासों से राज्य में पूंजी निवेश, तकनीक हस्तांतरण और रोजगार सृजन के नए आयाम खुलेंगे। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में यह सहभागिता मध्यप्रदेश को एक भरोसेमंद, दूरदर्शी और भविष्य-उन्मुख निवेश गंतव्य के रूप में वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित करेगी।

कृषि आधारित रोजगारपरक उद्योगों पर होगी कृषि कैबिनेट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसान कल्याण एवं स्वाभिमान पर्व मनाएगी सरकार कृषि ग्राम सभा सहित कृषि से जुड़े उपकरणों के क्रेता-विक्रेताओं का कराएं सम्मेलन ग्रामीणों और युवाओं को भावनात्मक रूप से जोड़ें खेती-किसानी से 26 से 30 जनवरी तक मनाया जाएगा कृषि लोकरंग – 2026 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि लोकरंग की तैयारियों को लेकर ली बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेती-किसानी और हमारी संस्कृति आपस में जुड़े हुए हैं। हमारा पारम्परिक जीवन, कलाएं और बहुरूपी मौखिक परंपराएं कृषि के मूल से ही उत्पन्न होते हैं और यही कृषि लोकरंग मनाने का आधार है। उन्होंने कहा कि भोपाल सहित प्रदेश के अन्य संभागों और अंचलों में कृषि लोकरंग – 2026 पूरी गरिमा और भव्यता के साथ मनाया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रदेश में कृषि आधारित रोजगारपरक उद्योगों के समावेशी विकास लक्ष्य को लेकर कृषि कैबिनेट आयोजित की जाएगी। किसान कल्याण,स्वाभिमान एवं पर्व कृषि ग्राम सभा जैसे आयोजन सहित कृ‍षि से जुड़े उन्नत उपकरणों के क्रेता-विक्रेताओं का सम्मेलन, कृ‍षि उत्सव और किसान मेले भी आयोजित किए जाएंगे। किसानों को सरकार की हर योजना का लाभ दिलाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि सभ्यता हमारी परम्पराओं से भीतर तकजुड़ी हुई है, इसलिए ग्रामीणों, युवाओं और विद्यार्थियों को भी भावनात्मक रूप से खेती-किसानी से जोड़ा जाए। सफल किसानों के एग्री बिजनेस मॉडल भी बताए जाएं, ताकि दूसरे किसान भी इनसे प्रेरणा लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में कृषि लोकरंग – 2026 के आयोजन की तैयारियों के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। कृषि लोकरंग आगामी 26 से 30 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि लोकरंग वास्तव में ग्राम पंचायतों एवं विकास खंड स्तर पर नागरिकों और युवाओं को खेती से जोड़ने और इसके व्यापक लोकव्यापीकरण का प्रयास है। लोकरंग के दौरान प्रदेश के बड़े कस्बों और बड़े शहरों में सरकार द्वारा कृषि और किसानों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी सांस्कृतिक एवं नाट्य प्रस्तुतियों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि हमारी सहज परम्पराओं और धार्मिक अनुष्ठानों को भी कृषि से जुड़े विषयों से जोड़ा जाए। कार्यक्रम ऐसे हों, जिसमें जनता का सहज जुड़ाव हो। लोकरंजन के कार्यक्रमों को नीचे से क्रियान्वित कर ऊपर तक लाया जाए, इससे नागरिकों में कृषि के प्रति एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि लोकरंग को जन-जन का उत्सव बनाने के लिए आकर्षक देशी वेशभूषा जैसे पगड़ी, धोती, साफा आदि सहित पुराने देशज बीज संग्रहण/संचयन के प्रोत्साहन से जुड़ी प्रतियोगिता, लखपति किसानों की प्रतियोगिता, अच्छी नर्सरी और बगीचे वालों की प्रतियोगिता और सायकिल प्रतियोगिता जैसे आयोजन भी किए जाएं। किसान कल्याण वर्ष का बनाएं आकर्षक लोगो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' घोषित किया है। इस आयोजन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए इस वर्ष का एक आकर्षक लोगो तैयार करें। सोयाबीन, मूंग, उड़द, मक्का एवं अन्य फसलों का उत्पादन करने वाले किसानों को बुलाकर दूसरे किसानों के समक्ष उनकी सफलता बताने को कहा जाए। बैठक में सचिव, किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री निशांत वरवड़े ने बताया कि कृषि लोकरंग – 2026 के दौरान पारम्परिक ग्रामीण खेलों एवं खेत-खलिहान पर केन्द्रित विभिन्नन गतिविधियां जैसे फसल, मौसम, ऋतुओं, संस्कारों पर गीत-गायन आदि, कृषि के देशज ज्ञान पर आधारित प्रतियोगिताएं, बड़े एवं नवप्रयोगधर्मी किसानों का प्रदेशभर से चयन एवं उनका मुख्यमंत्रीजी से सीधा संवाद, ओपन माइक सत्र सहित मेरा किसान, मेरा अभिमान सत्र आयोजित किए जाएंगे। इस सत्र में किसानों के बच्चे मंच पर जाकर बतायेंगे कि हमारे किसान देश की शान क्यों हैं ? ऐसी अन्य गतिविधियां भी इस दौरान संचालित की जाएंगी। कृषि लोकरंग के आयोजन में संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास भी सहभागिता करेगा। लोकरंग के दौरान कृषि को सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाने का लोक संयोजन किया जाएगा। बैठक में संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, मुख्यमंत्री के सचिव श्री आलोक कुमार सिंह, आयुक्त जनसम्पर्क श्री दीपक कुमार सक्सेना, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री श्रीराम तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

मोहन यादव की ई-कैबिनेट पहल: सभी 31 मंत्रियों को टैबलेट, अब कैबिनेट बैठकें होंगी पेपरलेस

  भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए अपने कैबिनेट के सभी सदस्यों को टैबलेट बांटे. इस कदम का मकसद सिस्टम को पेपरलेस बनाना और समय बचाना है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को टैबलेट दिए गए. CM यादव ने कहा कि कैबिनेट बैठकों से जुड़ी पूरी जानकारी इन टैबलेट के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी. कैबिनेट सदस्यों को संबोधित करते हुए यादव ने कहा, "मध्य प्रदेश में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस पहल में ई-कैबिनेट पहल भी शामिल है. ई-कैबिनेट एप्लिकेशन के संबंध में संबंधित लोगों को ज़रूरी ट्रेनिंग दी जा रही है." यादव ने कहा, "यह एप्लिकेशन एक आधुनिक, पेपरलेस, सुरक्षित और गोपनीय सिस्टम है जिसे मंत्री परिषद अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी, कहीं भी एक्सेस कर सकती है. ई-कैबिनेट एप्लिकेशन मुख्य रूप से कैबिनेट एजेंडा देखने और पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों की कंप्लायंस रिपोर्ट की समीक्षा करने में मदद करेगा." CM ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि कैबिनेट सदस्य पारदर्शिता और समय बचाने के लिए इस नए सिस्टम का पूरा इस्तेमाल करेंगे. शुरुआत में, कैबिनेट बैठक का एजेंडा फिजिकल और डिजिटल दोनों फॉर्मेट में भेजा जाएगा और बाद में, इसे पूरी तरह से डिजिटल रूप से भेजा जाएगा. पेपरलेस होगी एमपी की मोहन कैबिनेट मंत्रिमंडल के सदस्यों को टैब से लैश करने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने  मंत्रिमंडल के सदस्यों को संबोधित करते हुए बताया कि, 'मध्य प्रदेश में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस पहल में ‘ई-कैबिनेट' ऐप भी शामिल है. उन्होंने कहा कि ‘ई-कैबिनेट' आवेदन के संबंध में संबंधित लोगों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है. इससे कागज की खपत और फोल्डर वितरण की आवश्यकता समाप्त होगी। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बताया कि वर्ष 1960 से अब तक के कैबिनेट के सभी निर्णयों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा चुका है। पिछले दो वर्षों के निर्णय एक क्लिक पर उपलब्ध हैं। बैठक के अंत में मंत्रियों को टैबलेट के उपयोग और ई-कैबिनेट एप्लीकेशन की कार्यप्रणाली से संबंधित प्रस्तुतीकरण भी दिया गया।  ‘ई-कैबिनेट' ऐप पर होगी कैबिनेट मीटिंग बकौल सीएम,, 'ई-कैबिनेट ऐप एक आधुनिक, कागज रहित, सुरक्षित और गोपनीय प्रणाली है, जिसे मंत्रिपरिषद कभी भी, कहीं भी अपनी सुविधानुसार इस्तेमाल कर सकती है. ई-कैबिनेट ऐप मंत्रिमंडल के एजेंडे को देखने और पिछली बैठकों में लिए गए निर्णयों की अनुपालन रिपोर्ट की समीक्षा करने की सुविधा प्रदान करेगा. मध्य प्रदेश की मौजूदा मोहन सरकार में कुल 31 मंत्री हैं. सभी मंत्रियों को ई-कैबिनेट ऐप के बारे में जानकारी दी गई. ई-कैबिनेट ऐप मंत्रिमंडल के एजेंडे को देखने और पिछली बैठकों में लिए गए निर्णयों की अनुपालन रिपोर्ट की समीक्षा करने की सुविधा प्रदान करेगा. कैबिनेट का एजेंडा डिजिटल भेजा जाएगा मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि मंत्रिमंडल के सदस्य पारदर्शिता और समय बचाने के लिए नई प्रणाली का पूरी तरह से उपयोग करेंगे. एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में मंत्रिमंडल की बैठक का एजेंडा भौतिक और डिजिटल दोनों प्रारूपों में भेजा जाएगा और बाद में, इसे पूरी तरह से डिजिटल प्रारूप में परिवर्तित कर दिया जाएगा. डिजिटलाइज्ड किए गए मंत्रिमंडल के फैसले राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि 1960 के बाद से लिए गए मंत्रिमंडल के फैसलों को डिजिटल कर दिया गया है. एक अधिकारी ने बताया कि मंत्रिमंडल की बैठक के अंत में एक प्रस्तुति में मंत्रियों को टैबलेट के इस्तेमाल के उद्देश्य, उनकी व्यापक उपयोगिता और उनकी कार्यक्षमता के बारे में बुनियादी जानकारी दी गई. उन्होंने कहा कि इस पेपरलेस सिस्टम – ई-कैबिनेट एप्लिकेशन – की शुरुआत से फिजिकल फोल्डर बांटने, कागज और समय की बचत होगी. राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि 1960 से लिए गए कैबिनेट फैसलों को डिजिटाइज किया गया है. पिछले दो सालों के कैबिनेट फैसलों को एक क्लिक से देखा जा सकता है. एक अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट बैठक के आखिर में, एक प्रेजेंटेशन के जरिए मंत्रियों को टैबलेट के इस्तेमाल के मकसद, उनकी पूरी उपयोगिता और उनकी कार्यप्रणाली के बारे में बेसिक जानकारी दी गई. बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल 31 मंत्री हैं.

मोहन यादव सरकार ने लिया बड़ा फैसला, सरकारी नौकरियों के लिए दो बच्चों की शर्त को समाप्त करने की दिशा में कदम

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त हटाने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने विधि विभाग से सलाह के बाद इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस बदलाव से उन कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जो इस नियम के कारण नौकरी के लिए अपात्र हो गए थे या जिनकी सेवाएं समाप्त हो गई थीं। 2001 से लागू था नियम यह नियम 26 जनवरी, 2001 से लागू था, जिसके तहत तीसरा बच्चा होने पर सरकारी नौकरी नहीं मिलती थी और नौकरी में रहते हुए तीसरा बच्चा होने पर सेवा समाप्त कर दी जाती थी। यह नियम तब बनाया गया था जब प्रदेश में प्रजनन दर अधिक थी। हालांकि, सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) बुलेटिन 2023 के अनुसार, मध्य प्रदेश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.4 है, जो भारत की टीएफआर 1.9 से अधिक है। शहरी क्षेत्रों में यह दर 1.8 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.6 है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य पहले ही इस तरह के नियमों को संशोधित कर चुके हैं। इन कर्मचारियों को होगा लाभ इस नए नियम से स्कूल, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और अन्य विभागों के कर्मचारियों को लाभ होगा। हालांकि, जिन कर्मचारियों पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है, उन्हें इस नए नियम से कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि इसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। परिवीक्षा अवधि में भी संशोधन इसके साथ ही, परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि को लेकर भी नियमों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अब कर्मचारी परिवीक्षा अवधि पूरी होने के छह महीने के भीतर नियमित कर दिए जाएंगे, जिससे उनकी वार्षिक वेतनवृद्धि पर पड़ने वाले असर को रोका जा सकेगा। परिवीक्षा अवधि के नियम में भी सरकार संशोधन कर रही है। अब नियुक्ति के बाद दो या तीन साल की परिवीक्षा अवधि पूरी होने के छह महीने के भीतर कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। अभी इसमें देरी होने से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान होता है, क्योंकि उनकी वार्षिक वेतनवृद्धि पर इसका असर पड़ता है। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ लगातार इस बात को उठा रहा था कि परिवीक्षा अवधि समाप्त करने के लिए समितियों की बैठकें नियमित रूप से होनी चाहिए।

मध्य प्रदेश में दूषित पानी की समस्या को लेकर नया कदम, मोहन यादव ने लागू की वाटर सीवर गाइडलाइन

इंदौर  भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के बाद राज्य सरकार ने सभी नगर निगम और नगर पालिका के लिए वाटर सीवर गाइडलाइन लागू करने का फैसला किया है, जिसके तहत शहरी क्षेत्र में पानी की आपूर्ति पाइपलाइन में रिसाव और पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी. सीएम मोहन यादव ने किया गाइडलाइन जारी इंदौर में बीते दिनों दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई थी. जिसके बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश के नगर निगम और नगरीय निकायों के कार्यक्रम के दौरान एक गाइडलाइन जारी किया. केंद्रीय लोक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियंत्रण संगठन (CPHEEO) द्वारा जारी जल आपूर्ति और उपचार नियमावली पर आधारित इस गाइडलाइन का अब शहरी और स्थानीय निकायों को पालन करना होगा. लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई अपर मुख्य सचिव नगरी प्रशासन संजय दुबे द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, अब पाइपलाइन रिसाव की पहचान और जल वितरण प्रणाली को 7 दिनों में सर्वे कर चिन्हांकन किया जाएगा. इसके अलावा पुराने एवं बार-बार लीकेज होने वाली पाइपलाइन और नाली-सीवर के नीचे से गुजरने वाली पाइपलाइनों की पहचान कर 48 घंटे के भीतर मरम्‍मत करना जरूरी होगी. इसके साथ ही जल शोधन संयंत्र (WTP) तथा उच्‍च स्‍तरीय टंकियां की साफ-सफाई का 7 दिवस के अंदर निरीक्षण करना जरूरी होगा. वहीं सभी जल शोधन संयंत्रों, प्रमुख जल स्रोतों तथा उच्‍च स्‍तरीय टंकियों का तत्काल जल नमूना लेकर प्रशिक्षण कराया जाएगा. गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर सख्त एक्शन की चेतावनी वहीं प्लांट अथवा जलप्रपात क्षेत्र में संबंधित अधिकारियों से संपर्क के लिए सूचना पटल और सार्वजनिक बोर्ड प्रदर्शित करने होंगे. जिस पर सभी अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर मौजूद रहेगा. इसके अलावा जल आपूर्ति से संबंधित शिकायतों को इमरजेंसी श्रेणी में रखा जाएगा. जिसका निराकरण 24 से 48 घंटे में किया जाएगा. इसके साथ ही सी.एम हेल्‍पलाईन में गंदा/दूषित पेयजल तथा सीवेज से संबंधित प्राप्‍त शिकायतों के निराकरण को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी जाएगी. इस मामले में नगरी प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि "इंदौर के अलावा प्रदेश भर में साफ-सुथरा पानी मुहैया कराया जा सके. इसके लिए गाइडलाइन तय की गई है. जिसका पालन सभी शहरी नगर निगम और नगर पालिका को करना होगा. गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही होगी." 

शहर के साथ गाँव-गाँव में मिलेगी सुगम लोक परिवहन सेवा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नव वर्ष में शीघ्र ही प्रदेशवासियों को मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके तहत प्रदेश में सरकारी बसों का संचालन होगा, जिससे गाँव-गाँव तक सस्ती और सुविधाजनक बस सेवा नागरिकों को मिलेगी। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में लग्जरी बसे भी चलाई जायेंगी। प्रदेश में नगर वाहन सेवा सहित अंतर्शहरी बस सेवा को सुगम बनाने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा को प्रारंभ करने की स्वीकृति दी जा चुकी है। यात्री परिवहन सेवा प्रारंभ करने के लिये 101 करोड़ 20 लाख रूपये की अंशपूंजी के रूप में स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। वर्तमान में मध्यप्रदेश के 20 शहरों में सार्वजनिक परिवहन के लिये कंपनी एक्ट के तहत SPVs गठित हैं, जिसमें से 16 कार्यरत हैं। उक्त समस्त कंपनियों के साथ संभागीय कंपनी के रूप में मर्ज किये जाने का भी निर्णय लिया गया है। 7 कंपनियों के नियंत्रण के लिये राज्य स्तर पर होल्डिंग कंपनी का गठन प्रदेश में परिवहन व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिये 7 कंपनियों के एकीक्रत नियंत्रण के लिये राज्य स्तर पर कंपनीज एक्ट 2013 के तहत एक होल्डिंग कंपनी का गठन करने का भी निर्णय लिया गया है। कैबिनेट मीटिंग में जिला स्तरीय यात्री परिवहन समिति के गठन की भी स्वीकृति प्रदान की गई है। बस परिवहन अधोसंरचना के लिये पीपीपी मोड पर होगा काम मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा संचालन के लिये बस परिवहन अधोसंरचना के तहत पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) प्रक्रिया से उत्कृष्ट गुणवत्ता एवं मापदंडों का यात्री एवं बस ऑपरेटर के लिये सुविधाओं का‍निर्माण किया जायेगा। बस संचालन एवं संधारण के लिये पीपीपी मोड प्रक्रिया से, निजी बस ऑपरेटर्स को संगठित रूप से एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत संचालित किया जायेगा। परिवहन सेवा की निगरानी के लिये आईटी टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन की स्थापना करते हुए बस ऑपरेशन्स पर प्रभावी निगरानी रखी जायेगी। होल्डिंग कंपनी द्वारा एक कुशल आईटी प्लेटफार्म स्थापित करते हुए उस पर नोटिफाइड रूट अनुसार निजी बस ऑपरेटर्स को अनुबंधित किया जायेगा। साथ क्षेत्रीय सहायक कंपनियों की आय के स्रोत निर्माण के लिये इस योजना में विशेष इंतेजाम किये गये हैं। नवीन परिवहन योजना का सबसे अधिक लाभ यात्रियों को होगा। बस ऑपरेटर्स को बेहतर माहौल और उन्हें कंटिन्यूअज बिजनेस देने का प्रावधान भी इस नवीन परिवहन सेवा योजना में किया गया है।  

मुख्यमंत्री ने प्रबुद्ध महिलाओं, आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं और ड्रोन दीदीयों से की आत्मीय चर्चा

भाई के घर (मुख्यमंत्री निवास) आई बहनों को मिला सम्मान भाई के साथ बहनें मनायेंगी आगामी त्योहार जमीन से आसमान तक सफलतापूर्वक बहनें हैं नंबर वन भाई का वादा, बहनों को मिलेगा और भी ज्यादा सरगम के सुरों ने बांधा समां, मुख्यमंत्री ने दिये 51 हजार रूपये  राज्य सरकार की प्राथमिकता मातृ शक्ति का सशक्तिकरण मुख्यमंत्री निवास पर हुआ "सशक्त और समर्थ नारी" संवाद कार्यक्रम भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश की सभी माताओं-बहनों के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रही है। केंद्र सरकार ने देश की संसद में आधी आबादी को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है। प्रदेश के नगरीय निकायों और शासकीय सेवाओं में भी 35 प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में बहनें आज भारतीय सेनाओं में भी शीर्ष पद प्राप्त करते हुए आगे बढ़ रही हैं। प्रदेश की बहनें आर्थिक-सामाजिक रूप से संपन्न और आत्मविश्वास से भरी हों, इस उद्देश्य से हमारी सरकार ने अनेक कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं को उद्योग स्थापित करने के लिए सब्सिडी दी जाती है। साथ ही अधिक से अधिक बहनें संपत्ति की मालिक बनें, इसके लिए रजिस्ट्री में अतिरिक्त 2 प्रतिशत छूट का लाभ प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को 'सशक्त नारी-समर्थ नारी' संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्यमंत्री निवास पधारी प्रबुद्ध महिलाओं, आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं तथा ड्रोन दीदीयों से आत्मीय चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों के साथ समूह चित्र भी खिंचवाया। बालिका सरगम कुशवाह ने मधुर देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटी सरगम को 51 हजार रूपए की राशि सम्मान और प्रोत्साहन स्वरूप देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बहन-बेटियों से इस प्रकार संवाद का क्रम आगामी माहों में भी जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज महिलाएँ नहीं बहने मेरे घर आयी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की आत्मीयता ने बहनों को भाव विभोर कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी सफलता के लिये बड़ी बहन श्रीमती कलावती यादव को श्रेय देते हुए कहा कि बड़ी बहन ने ही उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित करने के साथ आवश्यक सहयोग व प्रोत्साहन प्रदान किया। मां और बहन के संस्कार, प्रेम और उनके द्वारा दी गई हिम्मत ही उनके आगे बढ़ने का आधार बनी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे परिवार में बहू भी बेटी समान है, और दोनों ही दुलार, स्नेह और सम्मान की बराबर की हकदार हैं। सनातन संस्कृति मातृ सत्ता पर आधारित संस्कृति है। मां ही हम सभी के जीवन मे पहली गुरु होती है। विश्व में भारत ही ऐसा राष्ट्र है, जहां देश को माता के भाव से जोड़ा जाता है। जैसे मां के आंचल में सुख और सुरक्षा का भाव आता है, वैसे ही देश की सत्ता से भी आम आदमी को सुख और सुरक्षा का एहसास हो, यही हमारा उद्देश्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकास के साथ विरासत को संरक्षण प्रदान करते हुए गतिविधियां संचालित की जा रही है। राज्य में औद्योगिक विकास के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है। प्रदेश में जन-निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) पर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल खोलने के लिए लीज पर 25 एकड़ भूमि तक उपलब्ध कराई जा रही है। मध्यप्रदेश देश में यह नवाचार करने वाला पहला राज्य है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।। राज्य सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों की एमबीबीएस की 70 से 80 लाख रुपए तक फीस भर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में देहदान और अंगदान को प्रोत्साहन देने के लिए गार्ड ऑफ ऑनर देने की परंपरा शुरू की गई है। इसका सकारात्मक प्रभाव हुआ है। हमारी सरकार ने ऐलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेदिक एवं पैरामेडिकल क्षेत्र में शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ाया है।    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में महिला उद्यमियों के स्टार्ट-अप में उपलब्ध अवसरों पर चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश वह राज्य है, जो औद्योगिक विकास में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश स्टार्ट-अप्स शुरू करने में अग्रणी हैं। राज्य सरकार ने बीते 2 वर्षों से लगातार स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित कर रही है। इनमें अधिकांश का नेतृत्व प्रदेश की महिला उद्यमी कर रही हैं। राज्य सरकार सूक्ष्म उद्योग, लघु एवं कुटीर उद्योग से लेकर हैवी इंडस्ट्री तक महिलाओं को हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। प्रदेश में लागू की गईं 18 नई नीतियों में महिलाओं को केंद्र में रखा गया है। गुजरात मॉडल पर औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भोपाल में पहली बार जीआईएस का आयोजित की गई। उससे पहले संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की गईं। इन सभी प्रयासों से राज्य को मिले बंपर निवेश और औद्योगिक विकास की संभावनाओं का लाभ महिलाओं को भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत 2 वर्षों में राज्य सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक कार्य किए हैं। इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में दिख रहा है। लाड़ली बहना योजना से घरों के वातावरण में बदलाव आया है। महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) का दायित्व महिलाएं निभा रही हैं।   अनूठा आयोजन – सीधा संवाद प्रदेश की विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही बहनों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीधा संवाद किया। इस अनूठे आयोजन में स्वास्थ्य, शिक्षा, टेक्सटाइल, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय बहनों ने अपने अनुभव, चुनौतियां और नवाचार साझा किए। संवाद की शुरुआत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह केवल संवाद नहीं, बल्कि समाज की उस जीवंत परंपरा का विस्तार है जिसमें बहनें जमीन से आसमान तक हर कदम आगे बढ़ते हुए सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज नारी शक्ति केवल भागीदार नहीं, बल्कि नेतृत्व की सक्रिय भूमिका में है। माँ के दिये संस्कार हैं हमारी धरोहर मुख्यमंत्री डॉ.  यादव ने बहनों से … Read more

श्रीराम जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर हमारी सदियों की आस्था, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीराम मंदिर की प्रतिकृति को किया नमन श्री अयोध्या धाम में श्रीरामलला के विराजमान की द्वितीय वर्षगांठ पर हुआ कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजधानी भोपाल में प्रदेश का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गौरव शामिल करने के उद्देश्य से राजधानी के प्रमुख मार्गों पर द्वारों का निर्माण किया जा रहा है। यह द्वार भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, सम्राट विक्रमादित्य और राजाभोज को समर्पित होंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक पुर्नउत्थान का पर्व जारी है। बनारस, अयोध्या हो या उज्जैन सभी ओर हमारी आस्था और भावना के अनुरूप समृद्ध संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं का प्रकटीकरण हो रहा है। प्रदेश में गीता जयंती पर बड़े पैमाने पर श्रीमद्भगवतगीता पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित किए गए। सभी जिलों में गीता भवन का निर्माण कराया जा रहा है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर हमारी सदियों की आस्था, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्री अयोध्या धाम में पुनर्निमित भव्य श्रीराम मंदिर में श्रीरामलला के विराजमान की द्वितीय वर्षगांठ (तिथि अनुसार) पर मालवीय नगर स्थित युवा सदन के पास निर्मित श्रीराम मंदिर की प्रतिकृति पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां पहुंचकर श्रीराम मंदिर की प्रतिकृति को नमन किया तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विधायक श्री रामेश्वर शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम स्थल पर संत समुदाय तथा स्थानीय जन उपस्थित थे।  

सतना का नया बस स्टेण्ड अटल बिहारी वाजपेयी अंतर्राज्यीय बस अड्डा के नाम से जाना जाएगा

चित्रकूट को बनाएंगे भव्य और दिव्य धाम मध्यप्रदेश में नए साल से चलेंगी सरकारी बसें बरगी नहर परियोजना से सतना जिले की 1.5 लाख हैक्टेयर कृषि भूमि होगी सिंचित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सतना में 652.54 करोड़ रूपए से अधिक लागत के विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हम भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मशती वर्ष मना रहे हैं। अटल जी के जन्मशती वर्ष में ही मध्यप्रदेश का रीयलस्टिक डेवलपमेंट (अभ्युदय) हो रहा है। हम मध्यप्रदेश में सरकार नहीं, परिवार चलाते हैं। प्रदेश के हर घर को परिवार मानकर जनहित के निर्णय ले रहे हैं। हमारे निर्णयों में अंत्योदय भी है और ग्रामोदय भी। सतना जिला भगवान श्रीराम की कर्मभूमि रहा है। इसलिए हमारी सरकार चित्रकूट को भव्य और दिव्य धाम के रूप में विकसित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सतना को स्मार्ट सिटी योजना की सौगात देकर विकास कार्यों की गंगा बहा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सतना के आईएसबीटी परिसर में आयोजित लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 31 करोड़ रूपए की लागत से नवनिर्मित आईएसबीटी का लोकार्पण किया और इसका नामकरण 'अटल बिहारी वाजपेयी अंतर्राज्यीय बस अड्डा' करने की घोषणा की। अटल जी राजनीति में शुचिता और राष्ट्रीयता के प्रतीक है। उन्होंने राष्ट्र, धर्म और जनकल्याण के लक्ष्यों को लेकर सरकार चलाई। भारतीय संसद में 50 वर्षो तक अटल जी की निर्भीक वाणी गूंजती रही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सतना में आईएसबीटी बन चुका है। राज्य सरकार की भी पूरी तैयारी है कि नए साल से प्रदेश में सरकारी बसों का संचालन प्रारंभ हो जाएगा। मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा के नाम से प्रदेश के गांव-गांव तक सस्ती और सुविधाजनक बस परिवहन सेवा प्रारंभ कर दी जाएंगी। शहरों में लग्जरी बसें चलाई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा करते हुए कहा कि सतना विमानतल की एयरस्ट्रिप की वर्तमान लंबाई बढ़ाकर अब 1800 मीटर तक की जाएगी, जिससे यहां जेट विमान भी उतर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सतना जिले का कोना-कोना सिंचित किया जाएगा। बरगी नहर परियोजना का पूरा लाभ सतना जिले को मिलेगा। इससे यहां की डेढ़ लाख हैक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सतना में 652.54 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 12 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इसमें नवीन आधुनिक आईएसबीटी एवं धवारी क्रिकेट स्टेडियम के नवीनीकरण कार्य के लोकार्पण सहित करीब 383 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले 650 बिस्तरीय नवीन अस्पताल का भूमिपूजन भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह तीनों सौगातें सतना के विकास में चार चांद लगाएंगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हितलाभ भी वितरित किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह पूरा सप्ताह मध्यप्रदेश के विकास का ऐतिहासिक सप्ताह रहा है। धार और बैतूल में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन हुआ। ग्वालियर में "अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट" का आयोजन हुआ। कुल 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक के औद्योगिक विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास हुआ। भोपाल मेट्रो शुरू हुई और आज विन्ध्य के विकास को भी नए पंख लग रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि भगवान श्रीराम ने सतना के पास चित्रकूट धाम में 11 वर्ष गुजारे थे। राज्य सरकार चित्रकूट धाम सहित सतना जिले के विकास के लिए संकल्पित है। यहां भगवान कामता नाथ विराजे हैं। देश-दुनिया के पर्यटक मंदाकनी नदी के किनारे चित्रकूट आ रहे हैं। अयोध्या के बाद चित्रकूट का अलग ही महत्व है। भगवान श्रीराम के जीवन से रिश्तों की मर्यादा समझी जा सकती है। उन्होंने सुग्रीव से मित्रता करके आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। श्रीराम और श्रीकृष्ण के जीवन से मित्रता का महत्व सीखने की आवश्यकता है। राज्य सरकार सनातन संस्कृति और राष्ट्र के कल्याण कार्यों को आगे बढ़ाते हुए विरासत का संरक्षण कर रही है। प्रदेश की बहन-बेटियों को लाड़ली बहना योजना के माध्यम से हर माह 1500 रुपए की राशि मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सतना में दिल्ली-मुंबई से भव्य बस स्टैंड बनकर तैयार हो चुका है। राज्य में पहले परिवहन विभाग की लाल बसें चलती थीं। अब गांव-गांव तक प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सड़कें बनवा दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म शताब्दी वर्ष में प्रदेश को अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं की सौगात मिल रही है। अटलजी एक आदर्श राजनेता थे। उन्होंने देश में 24 दलों को मिलाकर सरकार चलाई, लेकिन एक वोट कम होने पर पद भी त्याग दिया। अटलजी की 101वीं जयंती के मौके पर ग्वालियर और लखनऊ में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सतना में 650 बेडेड नए अस्पताल भवन का शिलान्यास हो गया है। अमृत 2.0 योजना के माध्यम से सतना को अनेक विकास कार्यों की सौगात मिली है। यहां 7 करोड़ रूपए की लागत से आधुनिक क्रिकेट स्टेडियम का लोकार्पण भी हुआ है। इसमें डे-नाईट क्रिकेट मैच हो सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के लिए सदैव जनता के साथ खड़ी है। नए साल में बरगी नहर से सतना जिले की डेढ़ लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचित होगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से चित्रकूट को भी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का लाभ मिलेगा। प्रदेश के सभी तीर्थों को भी हम पर्याप्त जल उपलब्ध कराएंगे।  

सतना में बड़ी सौगातें: नवनिर्मित बस टर्मिनल का लोकार्पण और मेडिकल कॉलेज का भूमि पूजन

सतना   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 दिसंबर शनिवार को सतना आ रहे हैं. मुख्यमंत्री यहां 652 करोड़ 54 लाख रु के विकास कार्यो की सौगात देंगे, जिसमें मुख्य रूप से नया व आधुनिक बस स्टैंड, और मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के साथ विभिन्न विकास कार्य शामिल हैं. इसके साथ ही सीएम भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने बीजेपी कार्यालय जाएंगे और फिर विंध्य व्यापार मेले में भी शिरकत करेंगे. दोपहर 12 बजे सतना पहुंचेंगे सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सतना जिले के एक दिवसीय प्रवास पर आ रहे हैं. मुख्यमंत्री निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इंदौर से प्लेन द्वारा रवाना होकर दोपहर 12 बजे सतना एयरपोर्ट पहुंचेंगे. इसके बाद शाम 4.50 बजे सतना एयरपोर्ट से भोपाल के लिए रवाना होंगे. सतना प्रवास पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव सतना शहर को 652 करोड 54 लाख रु की लागत के विकास कार्यो की सौगात देंगे. सतना को मिलेंगी ये सौगातें सीएम डॉ. यादव शहर में 31 करोड़ 15 लाख रु की लागत से नवनिर्मित अंतरराज्यीय बस टर्मिनल सतना और 8 करोड़ 39 लाख रु लागत के धवारी क्रिकेट स्टेडियम के नवनिर्माण कार्य का लोकार्पण करेंगे. साथ ही अंतरराज्यीय बस स्टैंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहर के 168 लाख 33 हजार रु लागत के 6 विकास कार्यो का लोकार्पण और 484 करोड़ 21 लाख रु लागत के 6 अन्य विकास कार्यो का भूमिपूजन करेंगे. वहीं कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के लाभांवित हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण करेंगे. इसके साथ ही शासकीय मेडीकल कॉलेज सतना में आयोजित कार्यक्रम में करोड़ों रु की लागत से बनने वाले 650 बिस्तरीय नवीन चिकित्सालय भवन के निर्माण का भूमिपूजन करेंगे. मुख्यमंत्री डॉ. यादव सतना में आयोजित विंध्य व्यापार मेला के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे. सबसे पहले बस स्टैंड पहुंचेंगे सीएम मामले पर भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष भगवती पांडेय ने बताया, '' सीएम डॉक्टर मोहन यादव जी सतना एयरपोर्ट से सबसे पहले नया बस स्टैंड का उद्घाटन करने पहुंचेंगे, उसके बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल का लोकार्पण होगा. वहां से भाजपा कार्यालय और फिर विभिन्न व्यापार मेला में जाएंगे. उसके बाद पुनः वापस भोपाल के लिए रवाना होंगे.'' सतना सीएसपी देवेंद्र सिंह चौहान ने कहा, '' शनिवार को सीएम डॉ मोहन यादव जी के आगमन पर शहर में सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से जगह-जगह पर पुलिस बल लगाया गया है और बैरिकेडिंग के साथ-साथ पार्किंग व्यवस्था भी की गई है.''