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मुख्यमंत्री इंदौर में देंगे मेट्रो को लेकर बड़ी सौगात, मेट्रोपॉलिटन एरिया और अंडरग्राउंड रूट पर होगी चर्चा

  इंदौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 14 दिसंबर को रेसीडेंसी कोठी में शहर में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य फोकस इंदौर मेट्रो ट्रेन के अंडरग्राउंड रूट पर रहेगा। इंदौर में यह बैठक सरकार के दो साल पूर्ण होने के बाद हो रही है। इस कारण माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इंदौर को सौगात दे सकते है। बैठक में इंदौर के मेट्रोपाॅलिटन सिटी एरिया की घोषणा हो सकती है। पहले इसका एरिया छह हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में था। बाद में इंदौर विकास प्राधिकरण ने इसका प्रस्ताव 9 हजार वर्गकिलोमीटर एरिया किया है और प्रस्ताव सरकार को भेजा था। इस एरिया में उज्जैन, देवास, महू व धार की पंचायतें, कुछ नगरीय निकाय शामिल होंगे। एरिया की सीमा का खुलासा बैठक के दौरान होगा। मुख्यमंत्री इस बात पर अंतिम फैसला ले सकते हैं कि मेट्रो के रूट में कोई बदलाव किया जाएगा या पुराना रूट ही बरकरार रहेगा। पिछले दिनों मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तय अंडरग्राउंड रुट पर आपत्ति ली थी और मेट्रो को बंगाली काॅलोनी से ही अंडरग्राउंड करने पर जोर दिया था।   मेट्रो के अलावा, बैठक में बीआरटीएस की बस रैलिंग हटाने में हो रही देरी को लेकर भी चर्चा होगी। नौ महीने से अधिक समय तक रैलिंग नहीं हटाए जाने पर हाईकोर्ट ने भी नाराजगी व्यक्त की है। बीआरटीएस पर बनने वाले नए ब्रिजों को लेकर भी फैसला हो सकता है। समीक्षा बैठक में सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर शहर में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा भी की जाएगी। शहर के मास्टर प्लान की 23 सड़कों पर काम शुरू हो चुका है, लेकिन कुछ सड़कों के मार्ग में अभी भी बाधक निर्माण नहीं हटाए गए हैं।   

मप्र में मोहन सरकार के 2 साल: अतीत की सीख, वर्तमान की मजबूती और भविष्य की दिशा

मप्र में मोहन सरकार के दो वर्ष: अतीत, वर्तमान और भविष्य को साथ लेकर चलने का संकल्प भोपाल मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवधि में सरकार ने अतीत के सांस्कृतिक वैभव को पुनर्स्थापित करने, वर्तमान की प्रशासनिक चुनौतियों को साधने और भविष्य की विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में कई पहलें की हैं। मुख्यमंत्रीडॉ. यादव ने अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर से ही प्रदेश की पहचान को सांस्कृतिक और विकासात्मक—दोनों स्तरों पर मजबूत करने की रणनीति अपनाई। काल को तीन खंडों में विभाजित किया जाता रहा है, अतीत, वर्तमान और भविष्य। इन तीनों काल के लिए एक साथ कुछ करने की सामर्थ्य विरले ही व्यक्तित्वों में होती है। लेकिन तीनों कालों के लिए बहुत कुछ करने का चमत्कार बाबा महाकाल की नगरी के डॉ मोहन यादव ने दो साल की अवधि में कर दिखाया है। एक ओर जहां उन्होने मध्यप्रदेश के गौरवशाली अतीत को प्रभावी ढंग से संरक्षित और पुनर्स्थापित किया है, तो महाराज विक्रमादित्य के शासनकाल की झलक इन दो वर्षों के वर्तमान कार्यकाल में देखी जा सकती है। देश के इस हृदय प्रदेश को लेकर उनकी दूरगामी योजनाएं सुनहरे भविष्य के प्रति आश्वस्त करती हैं। अतीत: सांस्कृतिक धरोहर को नया आयाम सरकार ने धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। महाकाल कॉरिडोर के विस्तार कार्यों ने उज्जैन को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। राज्य के प्राचीन धरोहर स्थलों पर संरक्षण गतिविधियाँ तेज की गईं। ओंकारेश्वर क्षेत्र में अद्वैत दर्शन से जुड़े प्रकल्पों को गति दी जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण के चरण मध्यप्रदेश की भूमि पर जिन स्थानों पर पड़े, उन्हे श्रीकृष्ण पाथेय में समाहित कर इनको तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। वर्तमान: प्रशासनिक सुधार और बुनियादी ढांचे पर फोकस दो वर्षों में सरकार ने बुनियादी ढांचे के विस्तार को प्राथमिकता दी है। प्रमुख सड़क मार्गों, औद्योगिक कॉरिडोरों और शहरी सुविधाओं को उन्नत करने के कार्य जारी हैं। ग्रामीण सड़कों का उन्नयन भी अभियान मोड में किया जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी सुधार, रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर काम किया गया है। कृषि क्षेत्र में उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, सिंचाई क्षमता बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। महिलाओं और युवाओं के लिए योजनाओं—जैसे लाड़ली बहना और स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम—के क्रियान्वयन पर भी जोर रहा। भविष्य: निवेश, ऊर्जा और स्वास्थ्य ढांचे की तैयारियाँ राज्य सरकार ने आगामी दशक के विकास को लक्ष्य बनाते हुए कई योजनाएँ तैयार की हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत MSME और बड़े निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। पीथमपुर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन, जल संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहन ढांचे को बढ़ावा देकर हरित ऊर्जा क्षेत्र में कदम तेज हुए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को जिला एवं ग्रामीण स्तर तक मजबूत करने की दिशा में अस्पताल उन्नयन और टेली-मेडिसिन सेवाओं का विस्तार प्रस्तावित है। संतुलित नेतृत्व का संकेत डॉ. मोहन यादव के दो वर्ष का कार्यकाल यह संकेत देता है कि सरकार अतीत के सांस्कृतिक गौरव, वर्तमान की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और भविष्य की विकास योजनाओं—तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। आने वाले समय में इन पहलों का वास्तविक असर प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में दिखाई देगा।                                                                                                                                                   नरेंद्र शिवाजी पटेल  

मोहन सरकार की कृषि नीति का असर: मध्य प्रदेश में 55 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को शुक्रवार को दो वर्ष पूरे हो गए हैं। इन दो वर्षों में कृषि क्षेत्र में प्रदेश ने उत्पादन, उत्पादकता और विविधीकरण के नये रिकॉर्ड बनाए हैं। वर्ष 2023-24 से 2024-25 के बीच खाद्यान्न उत्पादन में 55 लाख टन से अधिक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो सरकार की कृषि नीति, सिंचाई विस्तार और किसान हितैषी योजनाओं की सफलता को दर्शाती है। आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 5.34 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 6.13 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। वहीं, कुल कृषि उत्पादन 7.24 करोड़ टन से बढ़कर 7.79 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। इसमें 55 लाख टन की वृद्धि हुई। यह बढ़ोतरी उन्नत बीज वितरण, फसल बीमा, सिंचाई परियोजनाओं और कृषि यंत्रीकरण का सीधा परिणाम मानी जा रही है। गेहूं, मक्का और धान ने बढ़ाया प्रदेश का मान सरकारी आंकड़ों के अनुसार गेहूं उत्पादन 2023-24 में 3.28 करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में 3.82 करोड़ टन हो गया। मक्का उत्पादन 48.68 लाख टन से बढ़कर 69.37 लाख टन, धान का उत्पादन 1.40 करोड़ से थोड़ा घटकर 1.36 करोड़ टन हुआ। हालांकि, धान की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 3415 किलोग्राम से बढ़कर 3551 किग्रा हो गई। दलहन-तिलहन भी बढ़ा रिपोर्ट के अनुसार सोयाबीन उत्पादन 66.24 लाख टन, मूंगफली उत्पादन 15.47 लाख टन, तिल उत्पादन 1.69 लाख टन हुआ। कुल तिलहन उत्पादन थोड़ी कमी के साथ 94.95 लाख टन पर स्थिर रहा। वहीं, दलहन उत्पादन में चना 35.83 लाख टन से घटकर 22.04 लाख टन, मूंग बढ़कर 21.28 लाख टन और उड़द बढ़कर 1.51 लाख टन रही। उत्पादकता में भी लगातार सुधार सरकार की रिपोर्ट के अनुसार कुल कुल खाद्यान्न उत्पादकता 2023-24 में 3322 किग्रा प्रति हेक्टेयर और 2024-25 में 3650 किग्रा प्रति हेक्टेयर रही। वहीं, कुल कृषि उत्पादकता 2379 से बढ़कर 2627 किग्रा प्रति हेक्टेयर रही। किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस मोहन सरकार ने दो वर्ष में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें एमएसपी पर खरीदी का दायरा बढ़ाया, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा, फसल विविधीकरण नीति लागू करना और ई-उपार्जन और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत किया किया गया है। क्या कहते हैं कि विशेषज्ञ कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में खेती में यह बढ़त केवल अनुकूल मौसम का परिणाम नहीं है, बल्कि नीतिगत निर्णय, समय पर खाद-बीज उपलब्धता और किसानों को त्वरित भुगतान का असर है। खाद्यान्न में नया कीर्तिमान जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति पीके मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में किसानों के लिए भावांतर, सौर ऊर्जा संयंत्र और दुग्ध प्रोत्साहन जैसी योजनाओं ने खेती की लागत कम की है और आमदनी बढ़ाने का रास्ता खोला है। आने वाले समय में इन योजनाओं का प्रभाव तभी टिकाऊ होगा, जब मंडियों, सिंचाई ढांचे और तकनीकी क्षेत्र को और मजबूत किया जाए। साथ ही किसानों की भागीदारी बढ़ाई जाए।  

मोहन सरकार के दो वर्षों में छह लाख को मिली नौकरी, तीन साल में 20 लाख को मिलेगी रोजगार की सुविधा

भोपाल   मोहन सरकार अपने दो वर्ष पूरे कर चुकी है और अब शेष तीन वर्षों के लिए सरकार ने विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है। सरकार ने साफ किया है कि आने वाले वर्षों में उसका मुख्य फोकस रोजगार, शहरी विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर रहेगा। इन सेक्टरों को राज्य के विकास के लिए निर्णायक माना जा रहा है। रोजगार: सबसे बड़ा फोकस राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए रोजगार अवसरों का सृजन है- चाहे सरकारी क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र। सरकार ने आगामी तीन वर्षों में 20 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य तय किया है। विभागों में खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जा रही है और कई विभागों में भर्ती संबंधी विज्ञप्तियां भी जारी हो चुकी हैं। सरकार का दावा है कि पिछले दो वर्षों में 6 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। स्वरोजगार योजनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा और 30,000 नए उद्यमियों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित करने की योजना है। 38 शहरों का नया जीआईएस मास्टर प्लान टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा प्रदेश के 38 शहरों के जीआईएस आधारित मास्टर प्लान तैयार किए जाएंगे। साथ ही महानगर क्षेत्र कानून लागू किया जाएगा। टीडीआर पोर्टल का विस्तार, टीओडी नीति का क्रियान्वयन और सिंहस्थ 2028 के लिए एकीकृत मास्टर प्लान आधारित विकास किया जाएगा। डीपीडीपी कानून के अनुरूप विभागीय पोर्टल का आधुनिकीकरण किया जाएगा। नक्शाविहीन गांवों का डिजिटलीकरण, भू-अर्जन प्रक्रियाओं को एंड-टू-एंड ऑनलाइन करने और नई आबादी की भूमि का चिन्हांकन भी योजना का हिस्सा है। विश्वास-आधारित डायवर्ज़न प्रक्रिया भी लागू की जाएगी। जनजातीय विकासखंड में सांदीपनि स्कूल हर जनजातीय विकासखंड में सांदीपनि स्कूल, एकलव्य विद्यालय, माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर और बालक आदर्श आवासीय विद्यालय की स्थापना की योजना है, जिससे आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दायरा बढ़ेगा। जल जीवन मिशन- लक्ष्य से पहले पूरा करने का दावा प्रदेश सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समयसीमा दिसंबर 2028 तय की है, लेकिन मध्य प्रदेश इसे मार्च 2027 तक पूरा कर देश में मिसाल पेश करेगा। मिशन के संचालन और संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार की जाएगी, ताकि जल आपूर्ति किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो। 

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2 साल की उपलब्धियां गिनाईं, मध्य प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों को मिलेगा ज्यादा वेतन

भोपाल  ''जिस प्रकार से समय बदला है और समय के साथ उर्जा के क्षेत्र में सबसे सस्ती बिजली मध्य प्रदेश दे रहा है. बिजली में ऐसे-ऐसे नए प्रयोग हुए हैं कि लोग भैंचक्के होकर देख रहे हैं कि ये मध्य प्रदेश में क्या हो रहा है. हमारा सबसे लोएस्ट रेट बिजली में गया.'' यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही है. शुक्रवार को राज्य सरकार के दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर सीएम मोहन यादव ने राजधानी के कुशाभाऊ इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में सरकार की उपलब्धियां गिनाई है. इस दौरान उन्होंने बीते दो सालों के साथ आने वाले भविष्य को लेकर भी खुलकर चर्चा की. 6-6 महीने एमपी और यूपी को मिलेगी बिजली सीएम ने कहा कि, ''बिजली में ऐसे-ऐसे नए प्रयोग हुए हैं कि लोग भौचक्के होकर देख रहे हैं कि ये मध्य प्रदेश में क्या हो रहा है. हमारा सबसे लोएस्ट रेट बिजली में गया. हमारे प्रदेश में ओंकारेश्वर, आगर और नीमच में सोलर पार्क की स्थापना की गई है. नीमच में 2 हजार मेगावाट का सोलर प्रोजेक्ट लगाया गया है. वो भी कंपोजिट प्रोजेक्ट है. यानि यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के सहयोग से स्थापित किया जा रहा है.'' पानी के बाद अब बिजली की अदला-बदली सीएम मोहन यादव ने कहा, ''इस सोलर प्रोजेक्ट से 6 महीने मध्य प्रदेश और 6 महीने उत्तर प्रदेश को बिजली मिलेगी. पानी की अदला-बदली के साथ हम दूसरे राज्यों के साथ बिजली की साझेदारी भी कर रहे हैं. मुरैना के बीहड़ वाले जंगलों का बेहतर इस्तेमाल उर्जा के क्षेत्र में कैसे किया जा सकता है, इस पर भी विचार किया जा रहा है. उज्जैन में शिप्रा नदी के पानी से होगा स्नान सीएम ने बताया कि "उज्जैन में शिप्रा नदी का पानी पहले उपलब्ध नहीं था. जिससे श्रद्धालुओं को स्नान करने में समस्या होती थी. पिछली बार भी सिंहस्थ के दौरान साधु-संतों ने मटमैले पानी से स्नान किया था. लेकिन इस बार सिंहस्थ की व्यवस्था जल संसाधन विभाग ने कर दी है. 800 करोड़ रुपये की योजना तैयार किया गया है. जिससे शिप्रा का पानी उज्जैन में लाने की तैयारी है. दो राज्यों के बीच आपसी सहमति से नदी जोड़ने का अभियान भी शुरु किया गया है. इसके तहत गंभीर और खान नदी को जोड़ते हुए जमीन के नीचे टनल बनाकर जोड़ने का काम किया गया है. जिसके ऊपर खेती होगी और नीचे जलधारा बहेगी." उन्होंने आगे बताया कि "कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की थी. इस दौरान डाक्टरों की कमी को लेकर भी चर्चा हुई थी. जिस रफ्तार से प्रदेश में मेडिकल कालेज बढ़ रहे हैं, उसी तेजी से हमको मैन पावर भी चाहिए. हेल्थ सेक्टर में एक्सपर्ट नहीं मिलने की चुनौती सरकार के सामने है, लेकिन अब हमने तय किया है कि प्राइवेट सेक्टर से अधिक वेतन देकर विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी सेवाओं में लिया जाएगा. कार्यकाल के दो साल के भीतर भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन शहर बनाने की घोषणा करने के साथ काम भी शुरू कर दिया है."

सम्राट विक्रमादित्य प्रवेश द्वार के भूमि-पूजन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे सम्राट विक्रमादित्य प्रवेश द्वार का भूमि-पूजन सांस्कृतिक विरासत और शहरी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम पीएम ई-बस सेवा योजनांतर्गत अत्याधुनिक ई-बस डिपो का भी होगा भूमिपूजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश की गौरवशाली अतीत और समृद्ध संस्कृति से जुड़ी पहल के तहत सम्राट विक्रमादित्य प्रवेश द्वार एवं पीएम ई-बस सेवा योजनांतर्गत अत्याधुनिक ई-बस डिपो का भूमि-पूजन करेंगे। कार्यक्रम 13 दिसंबर को प्रातः 11 बजे महाराणा प्रताप शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फंदा भोपाल में आयोजित होगा। सम्राट विक्रमादित्य प्रवेश द्वार के माध्यम से मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक शहरी विकास से जोड़ने का संदेश दिया जाएगा। सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य, न्यायप्रियता और सांस्कृतिक चेतना को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने वाला यह प्रवेश द्वार न केवल ऐतिहासिक पहचान को सुदृढ़ करेगा, बल्कि क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और नगरीय विकास को भी नई दिशा देगा। विकास के नए प्रतिमान होंगे स्थापित मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि प्रदेश की विरासत को संजोते हुए विकास के नए प्रतिमान स्थापित करना राज्य शासन की प्राथमिकता है। “विरासत के साथ विकास” की भावना को साकार करता यह प्रवेश द्वार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। यह कार्यक्रम विकास और सेवा के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भी विशेष महत्व रखता है, जो मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और समग्र विकास की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।  

मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र की जनहित योजनाओं को पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने में की महत्वपूर्ण भूमिका: सुरेश पचौरी

भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में देश में विकास की जो गंगा प्रवाहित हो रही है उससे मध्‍यप्रदेश भी अछूता नहीं है। श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में संचालित केन्‍द्रीय योजनाओं का मध्‍यप्रदेश को भरपूर लाभ मिल रहा है। केन्‍द्र सरकार की महत्‍वपूर्ण जनहितैषी योजनाओं के क्रियान्‍वयन से उनका लाभ पात्र हितग्राहियों को दिलाने में मध्‍यप्रदेश देश में लगातार अग्रणी बना हुआ है। जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी व ग्रामीण) आयुष्‍मान भारत योजना आदि। विगत 2 वर्षों की महत्‍वपूर्ण उपलब्धियों की बात की जाए तो मध्‍यप्रदेश में भारत सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत 11 लाख 46 हजार आवास से मध्‍यप्रदेश देश में प्रथम रहा। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत 8 लाख 64 हजार आवासों का कार्य पूर्ण हो चुका है। गरीब बंदी सहायता योजना का क्रियान्‍वयन करने वाला प्रथम राज्‍य बना है। प्रदेश में 80 लाख 52 हजार घरों तक नल कनेक्‍शन दिए गए। प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना के अंतर्गत मध्‍यप्रदेश में लगभग 85 लाख से अधिक हितग्राहियों को कुल 8 हजार 690 करोड़ से अधिक का लाभ प्रदान किया गया। प्रदेश के 82 लाख से अधिक किसानों को किसान सम्‍मान निधि की 1671.00 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान किया गया है। आयुष्‍मान निरामयम भारत योजनांतर्गत 3 लाख एक हजार 496 परिवारों के सदस्‍यों को चिकित्‍सा सहायता प्रदान की गई। राज्‍य में मातृ शक्ति को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाये गए हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं का 512 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता उपलब्‍ध कराई गई। मध्‍यप्रदेश में निवेश भोपाल में पिछले दिनों ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स समिट की सफलता ने पूरे देश का ध्‍यान आकर्षित किया। इसके उद्धाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और समापन अवसर पर केन्‍द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने मध्‍यप्रदेश को देश का अग्रणी विकसित राज्‍य बनाने के मुख्‍यमंत्री के अथक् परिश्रम और दृढ इच्‍छाशक्ति की प्रशंसा की। प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में राज्‍य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन अंतर्गत अब तक 8.57 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्‍ताव धरातल पर आ चुके हैं। इसके अलावा मुख्‍यमंत्री कन्‍या विवाह/निकाह सहायता योजनांतर्गत 1 लाख 52 हजार 353 हितग्राहियों को सहायता राशि रुपए 83844.39 लाख दी गई। सिंहस्‍थ – उज्‍जैन मध्‍यप्रदेश सरकार के सामने आने वाले दिनों में उज्‍जैन में होने वाले सिंहस्‍थ पर्व को सुसम्‍पन्‍न कराने की एक बड़ी चुनौती है। इस धार्मिक समागम में देश विदेश से करोड़ों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इसे निर्विघ्‍न व गरिमापूर्ण तरीके से संपन्‍न कराने के लिए राज्‍य सरकार ने कमर कस ली है। मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की बागडोर संभालते ही शासन-प्रशासन के अधिकारियों को सिंहस्‍थ महापर्व की तैयारियां करने के निर्देश दे दिए थे, ताकि सारे काम समय पर पूरे हो जाएं। इसके लिए यथासमय बजट का आवंटन किया गया। वर्ष 2025-26 में सिंहस्‍थ 2028 के लिए 67 आवासीय भवन के निर्माण की स्‍वीकृति प्रदान की गई। सिंहस्‍थ के अवसर पर दुनिया भर से उज्‍जैन आने वाले श्रद्धा‍लुओं तथा तीर्थयात्रियों को किसी तरह की तकलीफ न होने पाए, इसके लिए युद्ध स्‍तर पर तैयारियां चल रही है। प्रदेश की सांस्‍कृतिक, ऐतिहासिक तथा धार्मिक पहचान रखने वाले प्रमुख स्‍थानों के साथ ही पर्यटन स्‍थलों को विकसित किया जा रहा है। प्रदेश के चित्रकूट, उज्‍जैन, ओंकारेश्‍वर, महेश्‍वर, ओरछा, मैहर आदि स्‍थानों को उनके प्राचीन गौरव, वैभव और गरिमा के अनुसार सजाया-संवारा जा रहा है। मध्‍यप्रदेश में द्रुत गति से विकास के काम जारी हैं। श्रीराम वन गमन पथ श्रीराम के कर्तव्‍य पालन और राष्‍ट्र निर्माण का समर्पण संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का आधार देगा। साथ ही राज्‍य शासन द्वारा उन सभी स्‍थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ श्रीकृष्‍ण के स्‍मृति चिन्‍ह विराजमान हैं। मध्‍यप्रदेश में नक्‍सल समस्‍या मध्‍यप्रदेश में नक्‍सल मोर्चे पर सबसे बड़ी कामयाबी दर्ज की गई है। मध्‍यप्रदेश में 2.36 करोड़ रुपए के इनामी 10 हार्डकोर नक्‍सलियों ने एके-47 समेत आई.एन.एस.ए.एस. राइफल, एस.एल.आर. और सिंगल शॉट गन जैसे घातक हथियारों के साथ मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने सरेंडर किया है। नि:संदेह, मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश सरकार प्रदेशवासियों के हितों के मद्देनजर तमाम लोककल्‍याणकारी योजनाओं के माध्‍यम से निष्‍ठापूर्वक राजधर्म निभा रही है तथा एक लोकप्रिय सरकार बनने की दिशा में निरंतर कदम बढ़ा रही है। भौगोलिक दृष्टि से देश के इस बड़े राज्‍य के सामने जहां तमाम चुनौतियां हैं, वहीं जनता की अनगिनत अपेक्षाएं भी हैं। सरकार चुनौतियों से भी निपट रही है और जनापेक्षाओं को भी पूरा कर रही है। विकास सतत् चलने वाली प्रक्रिया है और आशा की जानी चाहिए कि देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश सरकार विकास के रथ को रुकने नहीं देगी। मध्‍यप्रदेश सरकार के उपलब्धियों भरे 2 वर्ष पूरे होने के अवसर यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके मंत्रिमंडल के ऊर्जावान सहयोगियों, राज्‍य की प्रशासनिक टीम तथा प्रदेश की जागरूक जनता को हार्दिक बधाई।

मध्यप्रदेश ने नक्सलवाद से मुक्ति पाई, सीएम मोहन यादव ने बीजेपी सरकार के दो साल पूरे होने से पहले किया ऐलान

भोपाल  मध्य प्रदेश देश का पहला नक्सल मुक्त राज्य बन गया है. ये घोषणा खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की है. खास बात ये है कि मध्य प्रदेश सरकार ने ये उपलब्धि निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर ली है.  मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्र बालाघाट में 11 दिसंबर को आखिरी दो नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया. दीपक उइके और रोहित ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की वर्चुअल मौजूदगी में सरेंडर किया – और इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित कर दिया. ये भी संयोग है कि 13 दिसंबर को मोहन यादव की सरकार के दो साल पूरे होने जा रहे हैं, और दो दिन पहले ही ये उपलब्धि हासिल हुई है. देश के पहले नक्सल मुक्त राज्य बनने की कहानी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सूबे को नक्सल मुक्त बनाने के लिए 26 जनवरी की तारीख तय कर रखी थी, लेकिन लक्ष्य करीब डेढ़ महीने पहले ही हासिल हो गया.  मोहन यादव को ये मौका बीजेपी की नई सरकार के दो साल पूरे होने से पहले ही मिल गया. दो साल के शासन की ये सबसे बड़ी उपलब्धि मिल गई है.  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को 2026 में नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य पहले ही निर्धारित कर रखा है. और, इसके लिए मार्च तक का लक्ष्य रखा है – मध्य प्रदेश ने इस मामले में पहले ही बाजी मार ली है.  मुख्यमंत्री मोहन यादव के मुताबिक, MMC जोन में बीते 42 दिनों में 42 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ को नक्सल प्रभावित इलाकों की MMC जोन कैटेगरी में रखा गया है.  मोहन यादव ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले 42 नक्सलियों पर कुल 7.75 करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था. और, 2025 में अकेले मध्य प्रदेश में, राज्य की पुलिस ने 13 नक्सलियों को आत्मसमर्पण कराया, जबकि 10 एनकाउंटर में मारे गए.  मध्य प्रदेश के तीन जिले बालाघाट, डिंडोरी और मंडला नक्सल प्रभावित थे, जो दीपक उइके और रोहित के सरेंडर के बाद पूरी तरह नक्सलमुक्त हो चुके हैं.  नक्सलियों के न भूलने वाले कारनामे बालाघाट मध्य प्रदेश का वो इलाका है जिसकी सीमा महाराष्ट्र के गोंदिया, और छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव लगती है – और ये पूरा इलाका माओवादी हिंसा से बुरी तरह प्रभावित रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बालाघाट की वो घटना भी याद दिलाई, जब मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रहे लखीराम कावरे की नक्सलियों ने घर में घुसकर उनको बाहर निकाला और बेरहमी से मौत के घात उतार डाला. ये 1999 की घटना है, जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह थे, और कांग्रेस की सरकार थी.   1. लखीराम कावरे बालाघाट के ही रहने वाले थे. वो अपने गांव में रहते थे दिग्विजय सिंह ने 1998 में जब दूसरी बार सरकार बनाई तो लखीराम कावरे को परिवहन मंत्री बनाया.  लखीराम कावरे गांव में अपने घर पर थे. अचानक ही माओवादियों ने उनका घर चारों तरफ से घेर लिया. लखीराम कावरे को घर से बाहर निकाला और वहीं कुल्हाड़ी से काट डाला – 15 दिसंबर, 1999 का दिन शायद ही कभी कोई भूल पाए.  2. छत्तीसगढ़ की भी नक्सल हमले की एक घटना कभी न भूलने वाली है. 2013 के आखिर में विधानसभा के लिए चुनाव होने थे, और कांग्रेस जोर शोर से तैयारी कर रही थी. बीजेपी की सरकार थी, और डॉक्टर रमन सिंह मुख्यमंत्री थे. तब कांग्रेस नेता बीजेपी सरकार के खिलाफ परिवर्तन रैली कर रहे थे.  25 मई, 2013 को सुकमा में कांग्रेस की परिवर्तन रैली थी. रैली खत्म होने के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर जा रहा था. कांग्रेस नेताओं के काफिले में करीब 25 गाड़ियां थीं, और उनमें करीब 200 नेता सवार थे. शाम के 4 बज रहे थे, और कांग्रेस का काफिला झीरम घाटी से गुजर रहा था. रास्ते में पेड़ काटकर गिरा दिए गए थे. रास्ता बंद होने के कारण एक के पीछे एक सारी गाड़ियां रुक गईं, और इससे पहले कि किसी को कुछ समझ आ पाता, आस पास के पेड़ों के पीछे छिपे नक्सलियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. हमलावरों ने सभी गाड़ियों को निशाना बनाया. करीब डेढ़ घंटे तक फायरिंग होती रही.  करीब साढ़े पांच बजे हमलावरों का एक जत्था मौके पर पहुंचकर चेक कर रहे थे कि कोई जिंदा तो नहीं बचा है. जो जिंदा बचे थे, उनको पकड़कर बंधक बना रहे थे, और जो जो मरे हुए समझ में आ रहे थे, उनको भी फिर से गोली मार रहे थे, और चाकू से भी वार कर रहे थे, ताकि जिंदा बचने की कोई गुंजाइश न रहे.  तभी महेंद्र कर्मा अपनी गाड़ी से नीचे उतरे, और बोले,  ‘मुझे बंधक बना लो, बाकियों को छोड़ दो.’ नक्स्लिी महेंद्र कर्मा को थोड़ी दूर तक ले गए, और उनको भी मार डाला. असल में, ‘सलवा जुडूम’ का नेतृत्व करने की वजह से नक्सली उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे. महेंद्र कर्मा के शरीर पर नक्सलियों ने चाकू से 50 से ज्यादा वार किए थे, और करीब 100 गोलियां भी दागी थी – बताते हैं, हत्या के बाद नक्सलियों ने उनके शव पर चढ़कर डांस भी किया था. हमले में महेंद्र कर्मा, कांग्रेस नेता नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल सहित 30 लोग मारे गए थे. घायलों में केंद्रीय मंत्री रहे वीसी शुक्ल भी घायल हुए थे.  सरेंडर कर चुके एक नक्सली की पुराने साथियों से अपील  नक्सलियों को सबसे बड़ा झटका लगा है हिडमा के मारे जाने के बाद. आंध्र प्रदेश में हुए एक मुठभेड़ में नक्सली कमांडर हिडमा की मौत के एक दिन बाद पूर्व नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ ​​भूपति पुराने साथियों से एक बड़ी अपील की. मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ ​​भूपति ने 15 अक्टूबर को ही 60 नक्सलियों के साथ सरेंडर किया था. भूपति की अपील का वीडियो गढ़चिरौली पुलिस की तरफ से जारी किया गया है.  भूपति ने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) कैडर से सशस्त्र संघर्ष छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है. भूपति का कहना है, ‘यह बहुत चिंताजनक मसला है… मैं आपको बताना चाहता हूं… हमने लगभग डेढ़ महीने पहले सशस्त्र संघर्ष छोड़ दिया था… क्योंकि हमें एहसास हुआ कि बदलते हालात में … Read more

झाबुआ-निमाड़ में आज बरस रहा है आनंद, मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान

झाबुआ-निमाड़ में आज बरस रहा है आनंद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्रीकृष्ण पाथेय में जोड़ेंगे धार-झाबुआ में मौजूद भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित स्थानों को समोई (झाबुआ) के श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म महोत्सव में भोपाल से वर्चुअली हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि धार और झाबुआ में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियों से संबद्ध स्थानों को श्रीकृष्ण पाथेय में शामिल कर तीर्थ स्थलों के रूप में विकसित किया जायेगा। उन्होंने झाबुआ के ग्राम समोई में आयोजित श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म महोत्सव में उपस्थित श्रृद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज झाबुआ-निमाड़ में आनंद बरस रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म महोत्सव में भोपाल से वर्चुअली शामिल हुए। समोई में कार्यक्रम स्थल पर संतों के साथ अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, धार-झाबुआ सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मुख्यमत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन अद्भुत रहा है। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया। भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानने वाले प्रणामी सम्प्रदाय के द्वारा आयोजित श्रीकृष्ण प्रणामी महोत्सव सर्वधर्म संभाव और सनातन मूल्यों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि 400 वर्ष पूर्व सद्गुरू श्री देवचन्द्र जी महाराज के द्वारा प्रारंभ किये गये प्रणामी संप्रदाय के लिये वे आज अखण्ड सनातन परंपरा का प्रकाश स्तंभ है। प्रणामी सम्प्रदाय का व्यापक प्रचार-प्रसार प्राणानाथ स्वामी और उनके शिष्य महाराज छत्रसाल ने किया था। प्रणामी संप्रदाय के प्रमुख 3 धामों में से एक धाम पद्मावती पुरी है, जो कि हमारे प्रदेश के पन्ना शहर में है। श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म एक ऐसा मार्ग है, जो कृष्ण भक्ति, आध्यात्मिक ज्ञान और सार्वभौमिक भाईचारे के सिद्धांतों पर आधारित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह महोत्सव परंपरा, भक्ति, समाज सुधार और आध्यात्मिक एकता का अद्भुत संगम है। उन्होंने प्रणामी सम्प्रदाय के अनुयायियों औरसमाज के लोगों को धर्म महोत्सव की शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कामना की कि भगवान श्रीकृष्ण, श्यामाजी महारानी, सद्गुरू देवचन्द्र, स्वामी प्राणनाथ, वृंदावन दास महाराज और नटवरदास महाराज की सदैव सभी पर कृपा बनी रहे। प्रमुख बिन्दु              धार और झाबुआ में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियों से संबद्ध स्थानों को श्रीकृष्ण पाथेय में शामिल कर तीर्थ स्थलों के रूप में विकसित किया जायेगा।              समोई में कार्यक्रम स्थल पर संतों के साथ अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, धार-झाबुआ सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान मौजूद रही।              भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानने वाले प्रणामी सम्प्रदाय के द्वारा आयोजित श्रीकृष्ण प्रणामी महोत्सव सर्वधर्म संभाव और सनातन मूल्यों को आगे बढ़ा रहा है।              400 वर्ष पूर्व सद्गुरू श्री देवचन्द्र जी महाराज के द्वारा प्रारंभ किये गये प्रणामी संप्रदाय के लिये सद्गुरू महाराज जी अखण्ड सनातन परंपरा का प्रकाश स्तंभ है।              प्रणामी सम्प्रदाय का व्यापक प्रचार-प्रसार प्राणानाथ स्वामी और उनके शिष्य महाराज छत्रसाल ने किया था।              प्रणामी संप्रदाय के प्रमुख 3 धामों में से एक धाम पद्मावती पुरी है, जो कि हमारे प्रदेश के पन्ना शहर में है।              यह महोत्सव परंपरा, भक्ति, समाज सुधार और आध्यात्मिक एकता का अद्भुत संगम है।  

सीएम डॉ. मोहन यादव ने दो साल में किए गए कार्यों का विवरण दिया, नक्सलवाद खत्म कर सिस्टम को मजबूत किया

 भोपाल  मध्य प्रदेश में सीएम डॉ. मोहन यादव की सरकार को दो साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर भोपाल में आयोजित पत्रकारवार्ता में सीएम, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सरकार की उपलब्धियों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री दो वर्ष की उपलब्धियों की पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि हमने दो साल की समीक्षा की और आगामी तीन वर्ष के कार्यों का लक्ष्य तय किया है। हमने तय किया कि मंत्री विभागवार प्रेजेंटेशन दे। लॉ एंड ऑर्डर को लेकर सबसे बड़ी प्रॉब्लम थी। 35 साल पुरानी माओवाद की चुनौती से निपटने का केंद्रीय गृह मंत्री ने लक्ष्य तय किया। इसके बाद मंडला, बालाघाट, डिंडोरी लाल आतंक से मुक्त होते गए। यहां तक कि एक मंत्री को घर से निकालकर थाने के पास कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई थी। उस समय समानांतर थाने, समानांतर कोर्ट और समानांतर सत्ता चलने लगी थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस संबंध में डेडलाइन तय की, तब सभी को लगा कि यह संभव होगा भी या नहीं। लेकिन कई पुलिस अधिकारी स्वयं आगे आए और बालाघाट में ड्यूटी की मांग की, जिससे नक्सलवाद खत्म करने में बड़ी मदद मिली। हमारे जवानों और नागरिकों को सलाम मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मंडला, बालाघाट और डिंडोरी में नक्सली समस्या खत्म करना प्रदेश के लिए एक बड़ा उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि “हमारे जवानों और आम नागरिकों ने इसकी बड़ी कीमत चुकाई है, मैं उन सभी को सलाम करता हूं।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब जरूरत है कि सिस्टम को इतना मजबूत बनाया जाए कि यह समस्या दोबारा सिर न उठा सके। नदी जोड़ो अभियान पर बोलते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। परस्पर सौहार्द के तहत राजस्थान और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों में पार्वती, कालीसिंध और चंबल नदी का पानी पहुंचने से बड़ी राहत मिलेगी। सीएम ने कहा पार्वती कालीसिंध चंबल, केन बेतवा और ताप्ती नदी जोड़ो परियोजनाएं नए युग की शुरुआत है। 800 करोड़ की क्षिप्रा योजना से अब क्षिप्रा जल से ही स्नान होगा। गंभीर और खान नदी को जोड़कर परियोजना बनाई है। ऊपर खेती होगी और नदी का टनल बनकर सिंचाई का कार्य कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है यह दो वर्ष विकास और सेवा के रहे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा यह दो वर्ष विकास ओर सेवा के रहे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार विकसित भारत 2047 को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है। लाड़ली बहनों को डेढ़ हजार रुपए की राशि दे रहे हैं। महिला उद्यमियों के लिए 275 करोड़ का प्रविधान किया। युवा रोजगार के लिए भी सरकार ने निर्णय लिए। पीएमसी एंबुलेंस जैसे नए प्रयोग किए। हर वर्ग के हर समाज के लिए काम करने का प्रयास किया गया। शिप्रा में स्नान हो सके, इसलिए बनाई 800 करोड़ की योजना सीएम यादव ने कहा कि उज्जैन की शिप्रा नदी में दो तरह की चुनौतियां थीं। पिछले सिंहस्थ में साधु-संतों ने गंभीर नदी के पानी से स्नान किया था। स्नान तो हुआ और सिंहस्थ संपन्न हुआ, लेकिन शिप्रा नदी का पानी उपलब्ध नहीं था। इस बार जल संसाधन विभाग ने व्यवस्था कर दी है कि सिंहस्थ में शिप्रा नदी के जल से स्नान हो सके। इसके लिए लगभग 800 करोड़ रुपए की योजना बनाई गई है। मध्यप्रदेश में एक राज्य के अंदर दो नदियों को जोड़ने का अभियान भी शुरू किया गया है। इसके तहत गंभीर और खान नदी को मिलाने के लिए टनल बनाकर नदी से नदी जोड़ने का काम किया गया है। ऊपर खेती होती है और नीचे नदी की धारा बहती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भोपाल में पहले जीआईएस सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जिसे उनकी सरकार ने लागू किया। इसके अलावा, सागर में खाद का कारखाना चालू होने से यूरिया और अन्य खाद की आपूर्ति में आसानी होगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने न केवल व्यवस्थाएं चलाईं, बल्कि दूरदर्शी सोच के साथ ऐसे प्रोजेक्ट भी पूरे किए जो सामान्यतः लंबा समय लेते। 'भोपाल गैस त्रासदी के कचरे का निष्पादन हमने किया' मुख्यमंत्री यादव ने इंदौर की हुकुम चंद मिल का जिक्र करते हुए कहा कि 300 से 400 करोड़ के बकाया में उलझी मिल का निराकरण होने के बाद अब 70 से 80 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट यहां लगने वाला है। उन्होंने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी के कचरे का निष्पादन करने का काम उनकी सरकार ने किया है। 'प्राइवेट से ज्यादा वेतन देंगे, ताकि एक्सपर्ट सरकारी सेवा में आएं' मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ती डॉक्टरों की कमी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि, तेज गति से मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं तो हमको उसके हिसाब से मैनपॉवर भी चाहिए। हेल्थ सेक्टर में एक्सपर्ट नहीं मिलने की चुनौती तो है, लेकिन हमने तय किया है कि हम प्राइवेट सेक्टर से ज्यादा वेतन देकर एक्सपर्ट डॉक्टरों को सरकारी सेवाओं में आगे लाएंगे। दो बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र सीएम यादव ने कहा कि, मध्यप्रदेश में शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मध्यप्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम 2025 को मंजूरी दी है। इसके तहत इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर को मेट्रोपॉलिटन सिटी घोषित किया है। पहला इंदौर-उज्जैन-देवास-धार और दूसरा भोपाल-सीहोर-रायसेन-विदिशा-ब्यावरा विकसित होंगे। एकीकृत टाउनशिप नीति-2025 को भी स्वीकृति दी गई है। मई 2025 में इंदौर मेट्रो और दिसंबर 2025 में भोपाल मेट्रो का परिचालन शुरू होगा। डिप्टी सीएम बोले- विकास और विरासत दोनों पर ध्यान कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार का दो साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ मध्यप्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जा रहे हैं। इन दो वर्षों में विकास और विरासत दोनों पर विशेष ध्यान दिया गया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि विकास और सेवा के ये दो वर्ष अच्छे शासन, पारदर्शिता और त्वरित निर्णयों के लिए जाने जाते हैं। त्वरित कार्यवाही से भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने … Read more