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गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री

भारतीय नायकों के गौरवशाली इतिहास से युवाओं को परिचित कराने का नाटक सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं को इतिहास से जोड़ेगा नाटक: डॉ. यादव ने बताया सांस्कृतिक माध्यम का महत्व गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री नाटक बनेगा प्रेरणा का मंच, युवाओं में भरेगा राष्ट्रभक्ति : डॉ. यादव का संदेश 6 दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वास्तव में नाटक कला अनूठी है। नाटकों के माध्यम से भारतीय इतिहास के गौरवशाली व्यक्तित्वों की जानकारी वर्तमान पीढ़ी को प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग की संस्था मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के सहयोग से रवीन्द्र भवन में आयोजित छह दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया, पूर्व राज्यसभा सदस्य रघुनंदन शर्मा, प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी, फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य सुवाणी त्रिपाठी और अन्य अतिथि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह संयोग है कि वे हरिहर की नगरी से आते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की चौदह विद्याओं और चौसठ कलाओं में नाट्य शास्त्र के सभी आयाम शामिल हैं। उज्जैन ऐसी नगरी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा हुई साथ ही महाकाल की नगरी होने का आशीर्वाद भी इसे मिला है। उज्जैन में श्रावण माह, कार्तिक माह और अन्य अवसरों पर होने वाले आयोजन अनूठे होते हैं। हमारे इतिहास में जहां राष्ट्र के दुर्बल होने के निराशाजनक उदाहरण देखने को मिलते हैं, वहीं हमारे समर्थ होने के भी प्रमाण मिलते हैं। विदेशी आक्रांताओं ने आराध्य स्थलों को नष्ट करने और प्रतिमाएं अन्य देशों में ले जाने का कृत्य किया, लेकिन यह भी सत्य है कि हमारे पराक्रमी और राष्ट्रप्रेमी शासकों ने उन प्रतीकों को पुन: स्वदेश लाने का कार्य भी किया। नाटक कला अनूठी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं विद्यालयीन और महाविद्यालयीन स्तर से नाटकों के मंचन से जुड़े रहे हैं। उन्हें अनेक वर्ष पूर्व महानाट्य जाणताराजा देखने का सौभाग्य मिला, जो शिवाजी महाराज के साहसिक जीवन पर केन्द्रित था। बाद में इस तर्ज पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन को मंच पर लाने में सफलता मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विविध  पक्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि शिवाजी महाराज की तरह सम्राट विक्रमादित्य सुशासन और शौर्य के प्रतीक थे। उनके राज्य का काफी विस्तार हुआ। उन्होंने अपने भूभाग के समस्त नागरिकों का ऋण समाप्त करने का ऐतिहासिक कार्य किया और विक्रम संवत् के प्रर्वतन की दिशा में आगे बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग को छह दिवसीय नाट्य समारोह के आयोजन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'लोक में मणिधर-बघेश्वर' और नाट्य समारोह की स्मारिका का विमोचन किया। प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह में प्रस्तुत होने वाले नाटकों और भरतमुनि राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत होने वाले शोध पत्रों की जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव ने किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित थे।  

गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री

भारतीय नायकों के गौरवशाली इतिहास से युवाओं को परिचित कराने का नाटक सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं को इतिहास से जोड़ेगा नाटक: डॉ. यादव ने बताया सांस्कृतिक माध्यम का महत्व गौरवशाली भारतीय नायकों की गाथा नाटक से पहुंचेगी नई पीढ़ी तक : मुख्यमंत्री नाटक बनेगा प्रेरणा का मंच, युवाओं में भरेगा राष्ट्रभक्ति : डॉ. यादव का संदेश 6 दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वास्तव में नाटक कला अनूठी है। नाटकों के माध्यम से भारतीय इतिहास के गौरवशाली व्यक्तित्वों की जानकारी वर्तमान पीढ़ी को प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग की संस्था मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के सहयोग से रवीन्द्र भवन में आयोजित छह दिवसीय हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया, पूर्व राज्यसभा सदस्य रघुनंदन शर्मा, प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी, फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य सुवाणी त्रिपाठी और अन्य अतिथि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह संयोग है कि वे हरिहर की नगरी से आते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की चौदह विद्याओं और चौसठ कलाओं में नाट्य शास्त्र के सभी आयाम शामिल हैं। उज्जैन ऐसी नगरी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा हुई साथ ही महाकाल की नगरी होने का आशीर्वाद भी इसे मिला है। उज्जैन में श्रावण माह, कार्तिक माह और अन्य अवसरों पर होने वाले आयोजन अनूठे होते हैं। हमारे इतिहास में जहां राष्ट्र के दुर्बल होने के निराशाजनक उदाहरण देखने को मिलते हैं, वहीं हमारे समर्थ होने के भी प्रमाण मिलते हैं। विदेशी आक्रांताओं ने आराध्य स्थलों को नष्ट करने और प्रतिमाएं अन्य देशों में ले जाने का कृत्य किया, लेकिन यह भी सत्य है कि हमारे पराक्रमी और राष्ट्रप्रेमी शासकों ने उन प्रतीकों को पुन: स्वदेश लाने का कार्य भी किया। नाटक कला अनूठी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं विद्यालयीन और महाविद्यालयीन स्तर से नाटकों के मंचन से जुड़े रहे हैं। उन्हें अनेक वर्ष पूर्व महानाट्य जाणताराजा देखने का सौभाग्य मिला, जो शिवाजी महाराज के साहसिक जीवन पर केन्द्रित था। बाद में इस तर्ज पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन को मंच पर लाने में सफलता मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विविध  पक्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि शिवाजी महाराज की तरह सम्राट विक्रमादित्य सुशासन और शौर्य के प्रतीक थे। उनके राज्य का काफी विस्तार हुआ। उन्होंने अपने भूभाग के समस्त नागरिकों का ऋण समाप्त करने का ऐतिहासिक कार्य किया और विक्रम संवत् के प्रर्वतन की दिशा में आगे बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग को छह दिवसीय नाट्य समारोह के आयोजन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'लोक में मणिधर-बघेश्वर' और नाट्य समारोह की स्मारिका का विमोचन किया। प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने हरिहर राष्ट्रीय नाट्य समारोह में प्रस्तुत होने वाले नाटकों और भरतमुनि राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत होने वाले शोध पत्रों की जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव ने किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित थे।  

स्वास्थ्य सेवाओं में नई उपलब्धि: सीएम डॉ. यादव करेंगे भोपाल में अत्याधुनिक सीटी स्कैन और एमआरआई का लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल में अत्याधुनिक सी.टी. स्कैन एवं एम.आर.आई. सेवाओं का करेंगे लोकार्पण भोपाल को मिलेगी नई स्वास्थ्य सुविधा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे आधुनिक सीटी स्कैन व एमआरआई सेवा का शुभारंभ स्वास्थ्य सेवाओं में नई उपलब्धि: सीएम डॉ. यादव करेंगे भोपाल में अत्याधुनिक सीटी स्कैन और एमआरआई का लोकार्पण मशीनें फास्ट स्क्रीनिंग में सक्षम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शोध भी किया जा सकेगा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार प्रदेशवासियों को आधुनिक, सुलभ और सर्वसमावेशी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। चिकित्सा शिक्षा एवं जनस्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित कर सर्वसुलभ और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में सरकार सतत कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में अत्याधुनिक तकनीकी से युक्त सी.टी. स्कैन मशीन (80 रो डिटेक्टर एक्वारिंग – 128 स्लाइस) तथा एम.आर.आई. मशीन (1.5 टेसला) का 25 जुलाई को लोकार्पण करेंगे। उल्लेखनीय है कि यह सुविधा प्रदेश के समस्त शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में सर्वप्रथम भोपाल में प्रारंभ की गई है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल की गरिमामयी उपस्थिति भी रहेगी। चिकित्सा छात्रों को बेहतर शिक्षा और शोध कार्यों को मिलेगी गति इन आधुनिकतम मशीनों से आयुष्मान भारत योजना एवं अन्य शासकीय योजनाओं के अंतर्गत आने वाले मरीजों को निःशुल्क सी.टी. स्कैन एवं एम.आर.आई. जाँच की सुविधा प्रदान की जाएगी। इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं पहुंच को और अधिक मजबूती प्राप्त होगी। इन मशीनों की स्थापना से चिकित्सा छात्रों यू.जी., पी.जी. एवं पैरामेडिकल को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलेंगे, साथ ही शोध कार्यों को भी गति मिलेगी। साथ ही, प्रदेश की जनता को उच्च गुणवत्ता की वे जाँच सुविधाएं अब भोपाल में ही मिल सकेंगी। इसके लिए पूर्व में अन्य राज्यों में जाना पड़ता था। मशीनों के संचालन हेतु प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता भी शासन द्वारा सुनिश्चित की गई है। इन मशीनों में हाई-क्वालिटी कार्डियक पैकेजेस शामिल हैं, जिनसे हृदय रोगों की उन्नत और सटीक जाँच संभव है। एम.आर.आई. मशीन में डेडीकेटेड ब्रेस्ट कॉइल्स सहित उच्च गुणवत्ता की सभी आवश्यक कॉइल्स प्रदाय की गई हैं, जिससे स्तन कैंसर की गहन जांच सरलता से की जा सकेगी। सी.टी. स्कैन मशीन वॉल्यूमेट्री, फ्यूजन एवं परफ्यूजन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है, जिससे तीव्र एवं गहन जांच संभव है। ये मशीनें फास्ट स्क्रीनिंग में सक्षम हैं और इन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शोध भी किया जा सकता है।  

प्रदेश में ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

वन विकास निगम ने वन सम्पदा को पुनर्स्थापित किया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों का पुर्नवास बड़ी उपलब्धि निगम ने जंगल के साथ लोगों की जिन्दगी भी संवारी प्रदेश में ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को किया सम्मानित वन‍विकास निगम के विजन डाक्यूमेंट-2047 का किया अनावरण जू (चिड़ियाघर) तथा वन्य जीवों के रेस्क्यू सेंटर स्थापित होंगे वन क्षेत्र की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए वन सेवा के अधिकारी-कर्मचारियों का योगदान सराहनीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में खनन गतिविधियों और बिजली उत्पादन की प्रक्रिया में बने राख के पहाड़ों पर वनों को विकसित करने की चुनौती स्वीकार कर मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम ने वन सम्पदा को पुनर्स्थापित किया है। प्रदेश के तीन लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों का पुनर्वास करना बड़ी उपलब्धि है। वन विकास निगम इस उपलब्धि के लिए बधाई का पात्र है। यह गर्व का विषय है कि अन्य राज्य भी निगम की इस विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए उत्सुक हैं। प्रदेश में अद्यतन तकनीक के माध्यम से वनों का उचित प्रबंधन किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश वन सम्पदा में देश में सर्वश्रेष्ठ है। राज्य सरकार वनों और वन उपज के साथ वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में भी हरसंभव प्रयास कर रही है। प्रदेश के सघन वन क्षेत्र की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए वन सेवा के अधिकारी-कर्मचारी प्रशंसा के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सभी दिशाओं में क्षमता विकास और प्रगति के अवसर उपलब्ध हैं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में विशेष पहल की जा रही है। राज्य सरकार जू (चिड़ियाघर) तथा वन्य जीवों का रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य वन विकास निगम द्वारा विकसित वनों के प्रबंधन और आगामी कार्ययोजना के बारे में विचार मंथन की आवश्यकता है। अब तक किए गए कार्यों का सिंहावलोकन करते हुए राज्य सरकार वन विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विशेष नवाचार और पहल करने के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विकास निगम के केन्द्रों में ईको टूरिज्म की गतिविधियां संचालित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान का जोधपुर आम और बबूल की लकड़ी के आधार पर फर्नीचर के बड़े केन्द्र के रूप में स्थापित हुआ है। प्रदेश में उपलब्ध सागौन और अन्य श्रेष्ठ काष्ठ के उपयोग से मध्यप्रदेश भी इस प्रकार की पहल कर सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। प्रदेश के वन, देश की कई प्रमुख नदियों को जलराशि से समृद्ध बनाते हैं। प्रदेश के विशाल भू-क्षेत्र में फैली वन आधारित जीवनशैली हमें प्रकृति के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है। देश में सर्वाधिक बाघ मध्यप्रदेश में हैं। चंबल क्षेत्र में घड़ियाल भी वन्यजीव पर्यटन की शोभा बढ़ा रहे हैं। वन विभाग ने विलुप्तप्राय गिद्धों का संरक्षण करते हुए प्रदेश में गिद्धों को नया जीवन प्रदान किया है। सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने के लिए राज्य सरकार योजनाओं पर कार्य कर रही है। प्रदेश में सर्प गणना की तैयारी हो रही है। मध्यप्रदेश ऐसा क्षेत्र हैं, जहां टाइगर और मनुष्य सहचर्य की भावना से साथ-साथ रहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने वन विकास निगम के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों का सम्मान किया। इनमें सर्वआर.के. नामदेव, आर.एस. नेगी, रतन पुरवार, पी.सी. ताम्रकार तथा भगवंतराव बोहरपी को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निगम के स्वर्ण जयंती वर्ष पर वन विकास की आगामी कार्ययोजना पर केन्द्रित विजन-2047 का अनावरण किया। इस अवसर पर वन विकास निगम द्वारा संचालित गतिविधियों और उसकी विकास यात्रा पर केन्द्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के संचालक के.रविचंद्रन ने अंगवस्त्रम और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा भेंटकर अभिवादन किया। वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि वन विकास निगम, स्थानीय लोगों को जोड़ते हुए वन संरक्षण की गतिविधियां संचालित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अनेक नवाचार क्रियान्वित हो रहे हैं। इसके अंतर्गत प्रदेश को वन संपदा से समृद्ध करने के लिए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान शुरू किया गया। प्रदेश में जल संरक्षण के लिए जल-गंगा संवर्धन अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश में अनेकों कुए, बावड़ी, तालाब और जलस्त्रोतों का जीर्णोद्धार किया गया। जल-गंगा संवर्धन अभियान भूजल स्तर सुधार के क्षेत्र में एक बड़ी पहल है। राज्य वन विकास निगम की भूमिका सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है। अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णबाल ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि आयोग की अनुशंसा पर 1975 में स्थापित राज्य वन विकास निगम अपनी स्थापना से लेकर अब तक निरंतर लाभ में ही रहा है। पर्यावरणीय आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध निगम की गतिविधियों से जंगल के साथ-साथ लोगों की जिन्दगी भी संवर रही है। निगम का 50वां स्थापना दिवस मनाना हम सभी के लिए गौरव का क्षण है। वन विकास निगम के सहयोग से 3 लाख 90 हजार हेक्टेयर जंगलों का विकास और ट्रीटमेंट किया गया। इस उपलब्धि में निगम के अधिकारी और कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन तथा वानिकी के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधि और भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।  

औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार: अचारपुरा में 5 इकाइयों का भूमि-पूजन आज

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज अचारपुरा में करेंगे 406 करोड़ रूपये के निवेश की 5 औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन अचारपुरा में 406 करोड़ के निवेश को हरी झंडी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे भूमि-पूजन औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार: अचारपुरा में 5 इकाइयों का भूमि-पूजन आज मुख्यमंत्री गारमेंट इकाई का भ्रमण करेंगे भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मध्यप्रदेश को औद्योगिक और रोजगार संपन्न राज्य बनाने की पहल रंग ला रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 जुलाई को भोपाल के अचारपुरा में 406 करोड़ के निवेश वाली 5 औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन करेंगे। साथ ही 8 उद्योगों के निवेशकों को भूमि आवंटन के आशय-पत्र भी सौपेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत अचारपुरा स्थित गोकलदास एक्सपोर्ट्स की गारमेंट यूनिट के भ्रमण से होगी, जहाँ लगभग 2500 महिलाएँ कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यरत महिला श्रमिकों से संवाद करेंगे और इकाई में हो रहे उत्पादन कार्यों का अवलोकन करेंगे। यह इकाई न केवल औद्योगिक गतिविधियों बल्कि महिला सशक्तिकरण का भी एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। टेक्सटाइल, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मिलेगा विस्तार मुख्यमंत्री डॉ. यादव टेक्सटाइल, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से जुड़ी 5 प्रमुख इकाइयों का भूमि -पूजन करेंगे। इसमें इंडो एकॉर्ड अप्पैरल्स द्वारा 125 करोड़ रूपये के निवेश से 500 रोजगार, एसेड्स प्रा. लि. द्वारा 106 करोड़ रूपये के निवेश से 100 रोजगार, सिनाई हेल्थकेयर द्वारा 100 करोड़ रूपये से 200 रोजगार, समर्थ एग्रीटेक द्वारा 50 करोड़ रूपये से 200 रोजगार और गोकलदास एक्सपोर्ट्स द्वारा 25 करोड़ रूपये के निवेश से 500 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। ये सभी 5 इकाइयाँ 12.88 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थापित होगी, जिसमें 406 करोड़ रूपये का निवेश और 1500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। विशेष औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरेगा अचारपुरा मुख्यमंत्री डॉ. यादव अचारपुरा में 31.21 हेक्टेयर भूमि पर विकसित की जा रही नई औद्योगिक परियोजना का भूमि-पूजन भी करेंगे। यह परियोजना लगभग 15.61 करोड़ रूपये से विकसित की जाएगी, जिससे भविष्य में 800 करोड़ रूपये तक के निवेश आकर्षित होने की संभावना है और 1000 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इस क्षेत्र को विशेष रूप से टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर के लिए विकसित किया जा रहा है। 8 नई इकाइयों को सौंपे जाएंगे भूमि आवंटन के आशय-पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में महालक्ष्मी दाल उद्योग, जियो फिल्टेक, प्रवाह एंटरप्राइजेज, योगी इंडस्ट्रीज, अजमेरा इंडस्ट्रीज, सामवी एंटरप्राइजेज और बैग क्रिएशन इंडिया इकाइयों को औद्योगिक भूखंड आवंटन के आशय पत्र भी सौंपेंगे। ये 8 इकाइयाँ 12494.5 वर्ग मीटर भूमि पर 1770 लाख रूपये का निवेश करेंगी और 186 से अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करेंगी। निवेशकों ने जताया विश्वास, सराहा सरकार का सहयोग गोकलदास एक्सपोर्ट्स के प्रतिनिधि प्रदेश में निवेश के अनुभवों को साझा करेंगे। मध्यप्रदेश की स्थिर नीतियाँ, कुशल श्रमिक बल और समय पर मिल रही सुविधाओं से उन्होंने अचारपुरा में विस्तार का निर्णय लिया है। टेक्सटाइल, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के अन्य उद्यमी भी प्रदेश सरकार और प्रशासन द्वारा दिए जा रहे सक्रिय सहयोग और नीतियों को साझा करेंगे। निवेश के लिए सुविधाजनक वातावरण, कुशल लॉजिस्टिक्स और 'प्लग एंड प्ले' की सुविधा कार्यक्रम में प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह  अचारपुरा को निवेशकों के लिए उद्योग अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा दी रही सुविधाओं की जानकारी देंगे। सरकार द्वारा निवेशकों को 'प्लग एंड प्ले' मॉडल, तेज़ स्वीकृति प्रक्रियाएँ और बेहतर लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन सुविधाओं से औद्योगिक इकाइयों को सुगमता से संचालन का लाभ मिलेगा और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियाँ तेज़ होंगी।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नवांकुर सखी हरियाली यात्रा प्रशंसनीय पहल : सीएम डॉ. यादव

नवांकुर सखी हरियाली यात्रा सराहनीय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनमानस को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाए जागरूक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नवांकुर सखी हरियाली यात्रा प्रशंसनीय पहल : सीएम डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यात्रा के पोस्टर का किया विमोचन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में नवांकुर सखी हरियाली यात्रा के पोस्टर का विमोचन किया और कहा कि लोगों को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण संरक्षण के लिए जनचेतना बढ़ाने का कार्य आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हरियाली यात्रा से घर के आंगन, अपने गांव से लेकर शहर तक नागरिकों को पर्यावरण की रक्षा की प्रेरणा मिलेगी। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद 24 जुलाई से प्रदेश में पांच दिवसीय नवांकुर सखी हरियाली यात्रा का आयोजन कर रहा है। पोस्टर विमोचन के अवसर पर परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर उपस्थित थे। इस अवसर पर एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री एवं मप्र जन अभियान परिषद के अध्यक्ष डॉ. मोहन यादव ने परिषद के नवाचारी कार्यक्रम नवांकुर सखी-हरियाली यात्रा को सराहनीय बताते हुए कहा कि इस प्रदेशव्यापी अभियान में अधिक से अधिक नागरिकों को जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवांकुर सखियों को शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण में उनकी सतत और सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा की। अभियान का प्रमुख उद्देश्य नारी शक्ति के माध्यम से स्वैच्छिकता के आधार पर पर्यावरण संरक्षण करना है। उल्लेखनीय है कि मप्र जन अभियान परिषद द्वारा प्रदेश के 313 विकासखंडों के 1565 सेक्टरों में हरियाली अमावस्या 24 जुलाई से आगामी 05 दिन तक नवांकुर सखी-हरियाली यात्रा का आयोजन किया जाएगा। प्रत्येक सेक्टर में 100 महिलाएं नवांकुर सखी के रूप में पंजीकृत की गई हैं। ये नवांकुर सखियां 11 बीज रोपित एवं अंकुरित पौध रोपित थैलियों के माध्यम से अपने घर की बगिया में पौधे विकसित करेंगी। मप्र जन अभियान परिषद की इस नवाचारी पहल से प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में 5500 पौधे तैयार होंगे। अभियान के तहत प्रदेश में 1 लाख 56 हजार 500 नवांकुर सखियों द्वारा 17 लाख 21 हजार 500 पौधे तैयार किए जाएंगे। विकसित पौधों को रोपण लायक होने की स्थिति में एक पेड़ मां के नाम अभियान में शासकीय या निजी भूमि पर परिवार के महत्व के अवसरों पर रोपित किए जाएंगे। ये पौधे एक पेड़ मां के नाम अभियान में आगामी वर्षों में रोपित होंगे। पोस्टर विमोचन के अवसर पर परिषद एवं कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड़ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

उज्जैन बनेगा विकास और विरासत का प्रतीक: सीएम डॉ. यादव

बदलते दौर का उज्जैन विश्व में छोड़ेगा अनूठी छाप: मुख्यमंत्री डॉ. यादव वैश्विक मंच पर चमकेगा उज्जैन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विज़न आध्यात्मिक नगरी से स्मार्ट सिटी तक: उज्जैन का नया दौर उज्जैन बनेगा विकास और विरासत का प्रतीक: सीएम डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सौंपी गई स्वच्छता अवार्ड की ट्राफी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बदलते दौर का उज्जैन सिर्फ उज्जैन के लिए नहीं बल्कि भारत और पूरे विश्व के लिए महवपूर्ण छाप छोड़ने का कार्य करेगा। मेट्रोपॉलेटिन सिटी में शामिल होने के बाद इंदौर-उज्जैन वृहद महानगरीय क्षेत्र बन जाएगा। उज्जैन नगर निगम के महापौर, सभापति और अन्य पदाधिकारियों ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास के समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट कर उसे 10 लाख की आबादी श्रेणी में उज्जैन को सर्वश्रेष्ठ स्वच्छता आवार्ड की उपलब्धि से अवगत करवाकर उन्हें ट्राफी और प्रशस्ति पत्र सौंपा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन से आए जनप्रतिनिधि को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों ओर नागरिकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश को स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 पुरस्कारों में मध्यप्रदेश को कुल 8 अवार्ड मिले हैं, जो हर्ष और गर्व का विषय है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अभिनंदन के पात्र हैं, क्योंकि उन्होंने स्वच्छता पुरस्कारों के लिए अनेक श्रेणियां निर्धारित कीं जिससे अनेक नगरीय निकाय योग्य होने पर पुरस्कार से वंचित नहीं हुए। अवंतिका नगरी की पहचान कई तरह की है। बाबा महाकाल की नगरी होने के साथ ही उज्जैन साइंस सिटी और खगोल विज्ञान की नगरी है। उज्जैन का गौरवशाली इतिहास है और राष्ट्र प्रेम भी उज्जैन के नागरिकों के संस्कार में शामिल है। विश्व के सबसे बड़े मेले सिंहस्थ: 2028 को यादगार बनाना है: मुख्यमंत्री डॉ यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में सिंहस्थ:2028 को यादगार बनाना है। यह विश्व का सबसे बड़ा मेला होगा। भविष्य में ग्वालियर और जबलपुर महानगरीय क्षेत्र भी परस्पर कनेक्ट होंगे। इस तरह जुड़वा महानगरीय क्षेत्र प्रदेश की पहचान बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय था जब नागरिकों को सिंगल रोड से आना जाना होता था। आज देवास-इंदौर सिक्स लेन मार्ग है। अन्य अनेक फोर लेन और सिक्स लेन सड़कें आवागमन को आसान बना रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कर विरासत को सहेजने और विकास को तीव्र करने का कार्य हुआ है। उज्जैन में कोठी पैलेस में वीर भारत संग्रहालय, भारत के महापुरुषों और राष्ट्रभक्तों की गाथा बताने का कार्य करेगा। उज्जैन के महापौर श्री मुकेश टटवाल ने कहा कि 17 जुलाई को नई दिल्ली में विज्ञान भवन में हुए पुरस्कार समारोह में उज्जैन को 3 से 10 लाख आबादी की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ शहर का अवार्ड देते हुए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने तीन बार उज्जैन का विशेष उल्लेख किया। वे गत वर्ष सितम्बर माह में सफाई मित्रों के सम्मान कार्यक्रम में उज्जैन आई थीं तब उन्होंने महाकाल मंदिर परिसर को बुहारने का कार्य भी किया था। विधायक श्री अनिल जैन कालूखेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव कर्म में विश्वास रखते हैं। उन्होंने केन-बेतवा सहित अन्य अंतर्राज्जीय सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए दिन रात एक कर दिया। नगर निगम उज्जैन की अध्यक्ष श्रीमती कलावति यादव ने उज्जैन को प्राप्त उपलब्धि के लिए जनप्रतिधियों, नागरिकों, प्रशासनिक अमले और सफाई मित्रों की सक्रिय भूमिका की प्रशंसा की। श्री संजय अग्रवाल, श्री राजेंद्र भारती, अनेक पार्षदगण,उज्जैन नगर निगम के आयुक्त श्री आशीष पाठक भी कार्यक्रम में शामिल थे।  

चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत, देशभक्ति की पराकाष्ठा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

चंद्रशेखर आजाद ने शहादत दे दी, पर अंग्रेजों के हाथ न आये, यह देश प्रेम की है पराकाष्ठा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव शहादत का वह क्षण जब आज़ाद ने चुनी मृत्यु, पर न झुके अंग्रेजों के आगे: सीएम डॉ. यादव चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत, देशभक्ति की पराकाष्ठा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव चंद्रशेखर आजाद नगर में हुआ स्मरण आजाद कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव वी.सी. के जरिए हुए कार्यक्रम में शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमें गर्व है कि अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद जैसे महानायक मध्यप्रदेश की धरती पर जन्मे हैं। उन्होंने कहा कि अपनी समूची चेतना, जीवन और अस्तित्व भारतमाता के चरणों में समर्पित करने वाले अमर बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर हम गौरवान्वित हैं। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए समर्पित चंद्रशेखर आजाद का जीवन ऊर्जा, संकल्प और सेवा का अमिट अध्याय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने जब यह देखा कि अब गिरफ्तारी से बच पाना मुश्किल है तो अपने हाथों से ही खुद के प्राणोत्सर्ग कर शहादत दे दी, पर अंग्रेजों के हाथ नहीं आये, यह देश प्रेम की परकाष्ठा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर अलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आज़ाद नगर (भाभरा) में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम "स्मरण-आजाद" को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। वीसी में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन शिवशेखर शुक्ला सहित अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद एक साधारण परिवार में जन्मे असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे। आज़ाद एक ऐसी आंधी थे, जिसने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिलाकर रख दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद एक नाम नहीं, भारत की क्रांति का वह तेजस्वी स्वर था, जिसकी गूंज आज भी देशभक्ति की शपथ लेने वालों के हृदय में सुनाई देती है। बाल्यकाल से ही उनमें एक अलग तेज और एक अलग सोच थी। जब काशी में उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया और गिरफ्तार हुए, तब न्यायाधीश के पूछने पर जो जवाब उन्होंने दिया, वह आज भी हर देशभक्त के हृदय में बसा है। जब उनसे, उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया- 'आजाद'। पिता का नाम पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया-स्वाधीनता। तीसरी बार जब उनके घर का पता पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया था- जेल। वे केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, एक विचारधारा और आत्मबल के प्रतीक थे, जिन्होंने यह संकल्प लिया था कि-'मैं आज़ाद था, आज़ाद हूं और आज़ाद ही रहूंगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद ने केवल एक क्रांतिकारी की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वाधीनता आंदोलन के सेनापति की भूमिका निभाई। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सेनापति बने और शहीद भगत सिंह जैसे नौजवानों को भी उन्होंने दिशा दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाला लाजपत राय की शहादत का बदला लेने के लिए जब सांडर्स को लाहौर में मार गिराया गया, तब इस योजना के केंद्र में चंद्रशेखर आज़ाद ही थे और जब देश की क्रांति को धन की आवश्यकता पड़ी, तब काकोरी कांड (1925) में ब्रिटिश खजाने को लूटकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया था कि अगर लक्ष्य पवित्र हो, तो क्रांति भी तपस्या बन जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि दुश्मनों से घिरे होने पर उन्होंने अंतिम गोली स्वयं पर चला दी, परंतु दुश्मन की पकड़ में नहीं आए। इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क (अब आज़ाद पार्क) में 27 फरवरी 1931 को पुलिस से घिरे होने पर अंतिम गोली खुद को मारकर प्राणोत्सर्ग कर दिया और अपने नाम के अनुरूप अंतिम सांस तक वे "आज़ाद" ही रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत आज भी हमें यह याद दिलाती है कि स्वतंत्रता किसी एक दिन की घटना नहीं, बल्कि लाखों बलिदानों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती पर देश के युवाओं को उनके साहस, त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। आजाद केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के प्रखर प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी को चाहिए कि वह आज़ाद जी के जीवन व चरित्र से सीखें कि कैसे कोई अकेला व्यक्ति इतिहास की धारा बदल सकता है। राष्ट्र के लिए जीना और राष्ट्र के लिए मरना क्या होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज हम जिस आज़ाद हवा में सांस ले रहे हैं, वह चंद्रशेखर आजाद जैसे रणबांकुरों के बलिदान की ही देन है। हम सबका यह परम कर्तव्य है कि हम एकजुट होकर उनके सपनों का भारत गढ़ें। उल्लेखनीय है कि चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म मध्यप्रदेश के वर्तमान अलीराजपुर जिले के एक छोटे से गांव भाभरा (अब चंद्रशेखर आज़ाद नगर के रूप में प्रचलित) में 23 जुलाई 1906 को हुआ था। चंद्रशेखर आजाद नगर में हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल पर अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी, पूर्व विधायक एवं वर्तमान में म.प्र. लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष माधो सिंह डाबर, भाभरा नगर परिषद की अध्यक्षा श्रीमती निर्मला डाबर, नगर परिषद के अध्यक्ष नारायण अरोड़ा, भाभरा जनपद पंचायत के अध्यक्ष जगदीश गणावा और जनपद पंचायत उपाध्यक्ष परमार सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।  

24 जुलाई को राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे CM डॉ. यादव, वन विकास निगम की होगी विशेष बैठक

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर 24 जुलाई को स्वर्ण जयंती वर्ष का उद्घाटन एवं राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे।वे ‘विजन डॉक्यूमेंट-2047’ का विमोचन एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन भी करेंगे। कार्यक्रम में निगम के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को सम्मानित भी किया जायेगा। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप सिंह अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री असीम श्रीवास्तव भी उपस्थित रहेंगे। गुरुवार 24 जुलाई को प्रात: 10:30 बजे से भारतीय वन प्रबंधन संस्थान नेहरू नगर भोपाल के ऑडिटोरियम में होने वाले कार्यक्रम के संबंध में प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम श्री व्ही.एन. अम्बाड़े ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, तेलंगाना और कर्नाटक राज्य के वन विकास निगम के प्रबंध संचालक द्वारा विभिन्न विषयों जैसे थिनिंग व फेलिंग, जनरल प्लानटेशन, मियॉवाकी प्लानटेशन, डिपॉजिट वर्क, थीम वर्क, ईको टूरिज्म विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया जायेगा। कार्यशाला का उद्देश्य मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा विगत 50 वर्षों में किये गये वानिकी, वन एवं वन्य जीव संरक्षण कार्य को रेखांकित किया जाना है। कार्यक्रम में वन विकास निगम के कार्यों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जायेगा। वनीकरण में निगम की अनेक उपलब्धियां मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की स्थापना 24 जुलाई 1975 को हुई थी। निगम की स्थापना का उद्देश्य निम्न कोटि के वन क्षेत्रों को तेजी से बढ़ने वाली बहुमूल्य तथा बहु उपयोगी प्रजातियों के रोपण द्वारा उच्च कोटि के वन क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता एवं गुणवत्ता में सुधार लाना है। निगम का कार्य प्रदेश के 22 जिलों में संचालित है। निगम अंतर्गत कुल 13 काष्ठगार एवं 15 स्थाई रोपणियां स्थापित हैं। निगम को लगभग 4.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें से वर्ष 2025 तक 3.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का उपचारण किया जा चुका है एवं 3.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण किया गया है। विगत 2 वर्षों में निगम द्वारा 2 करोड़ 48 लाख पौधों का रोपण किया गया है। निगम की रोपणियों में वर्ष 2025 में कुल 1 करोड़ 70 लाख सागौन रूटशूट सागौन का उत्पादन हुआ है। टाइगर रिजर्व में चुनौती पूर्ण कार्य वन विकास निगम की अधिकांश परियोजना मंडल टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य क्षेत्र बफर जोन से लगे हैं। इन क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, भालू एवं हिरण आदि वन्य जीवों के विचरण की उपस्थिति दर्ज की गई है। वन्य जीवों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिये निगम द्वारा बोरीबंधान, तालाब निर्माण एवं झिरियां निर्माण का कार्य किया जाता है। वर्ष 2024-25 में लगभग 60 हजार घनमीटर इमारती काष्ठ एवं 3100 टन बांस का उत्पादन किया गया। जैव विविधता के साथ साथ जलगंगा संवर्धन भी निगम ने व्यावसायिक वृक्षारोपण के साथ जैव विविधता संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य भी किया जा रहा है। निगम द्वारा ‘जल गंगा संवर्धन’ एवं ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अंतर्गत लगभग 125 करोड़ पौधों का रोपण वृहद स्तर पर किया जा रहा है। निगम को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 170 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।   

विकसित भारत @2047 अंतर्गत रोजगार आधारित शिक्षा: रुझान एवं नए अवसर राष्ट्रीय कार्यशाला में राज्यपाल और मुख्यमंत्री हुए शामिल

भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं को पहचान कर विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम तैयार करें। उन्होंने प्रदेश में देश विदेश से निवेश प्रस्ताव प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल की सराहना की है। अपेक्षा की है कि निवेश परियोजना क्रियान्वयन के साथ ही उद्योग में रोजगार के लिए उपयुक्त अभ्यर्थी उपलब्ध कराने के लिए कोर्स प्रारम्भ करें, जिससे परियोजना शुरू होने के साथ ही आवश्यकता अनुसार स्थानीय स्तर के युवा उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज करेंसी का जमाना है, लेकिन स्किल (कौशल) ही करेंसी है, भारत इसे अच्छी तरह समझता है। इसीलिए हम नवाचार करते हुए कौशल विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान और तेजी से बढ़ता राज्य है। इसीलिए हम खेती की पढ़ाई को सामान्य महाविद्यालयों तक लेकर गए हैं। अगर कोई युवा खेती में करियर बनाना चाहे तो उसे आधुनिक तकनीक की जानकारी होनी चाहिए। विश्वविद्यालयों के दायरे विस्तृत होने चाहिए। सभी कोर्स यहां से संचालित होने चाहिए। राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उक्त विचार उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विकसित मध्यप्रदेश @2047 ‘रोजगार आधारित शिक्षा-रूझान एवं नए अवसर’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही है। कार्यशाला का आयोजन बुधवार को  कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया गया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय रोजगार आधारित शिक्षा-रूझान एवं नए अवसर कार्यशाला समय की आवश्यकता है। भविष्य की तैयारी का सशक्त मंच है। रोजगार केन्द्रित शिक्षा और विकसित भारत के निर्माण में प्रदेश के योगदान को बढ़ाने की प्रभावी पहल है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि शिक्षा समाज की रीढ़ है। यह समय के साथ तालमेल बैठाने, नवाचारों को अपनाने और नवीन अवसरों का लाभ उठाने के लिए व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को सक्षम बनाती है। इसलिए हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों को रोजगार के अवसरों तक सुलभ पहुंच देने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा से मनुष्य का समग्र विकास होता है। यह आयोजन को बदलते दौर में रोजगार आधारित शिक्षा और अवसरों का विकास करने के क्रम किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सबसे पहले 1968 और उसके बाद 1988 में मंथन हुआ। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर तीसरी बार मंथन हो रहा है। लेकिन आजादी के बाद 2020 से पहले कभी भी लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति से बाहर आकर विचार नहीं किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल शासन की मंशा को समझने वाले दृष्टा थे। इसी भाव से उन्होंने सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करते हुए देश की जड़ों को मजबूत करने का कार्य किया। महात्मा गांधी ने अहिंसा के अस्त्र का उपयोग करते हुए देश के गांव-गांव तक स्वतंत्रता की अलख जगाई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया, भारत के साथ आने के लिए लालायित है। आक्रांताओं ने भारतीय संस्कृति पर आक्रमण करने के लिए हमारी शिक्षा के बड़े केंद्रों तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला को तोड़ने और जलाने का कार्य किया। मध्य प्रदेश 64 कलाओं की शिक्षा वाली भूमि है। इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण शिक्षा ग्रहण करने के लिए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम आए थे। हम उस देश के वासी हैं, जहां होठों पर सच्चाई रहती है और जो होठों पर सच्चाई लेकर आए वही शिक्षा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में शासकीय और निजी मिलाकर 70 से अधिक विश्वविद्यालय हैं। भारत विश्वगुरु है और गुरु वह जो हमारे जीवन में अंधकार हटाकर उसे प्रकाशमय कर दे। जेएनयू ने भी मध्यप्रदेश की कुलगुरु परंपरा को आत्मसात कर लिया है। सरकार प्रदेश में 10 हजार से अधिक शैक्षणिक संस्थाओं में एनईपी लागू करने पर आगे बढ़ चुकी है। प्रदेश में 220 से अधिक सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत की गई है। यहां विद्यार्थियों के लिए आधुनिक कंप्यूटर कोडिंग लैब स्थापित की गई हैं। शिक्षा केवल कागज की डिग्री लेने के लिए न हो, बल्कि वह भविष्य की चुनौतियों से लड़ने और उसे समझने में समर्थ हो। इसीलिए प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्युटिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश दूध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। हमने शीर्ष स्तर पर पहुंचने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पशुधन है, इसीलिए राज्य सरकार प्रदेश में वेटेनरी कॉलेज की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रही है। हम सिंचाई के रकबे के साथ-साथ मत्स्य उत्पादन को भी बढ़ाने के लिए संकल्पित हैं। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा हर काल में सर्वोच्च रही है। भारतीय संस्कृति में संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए रोजगार देने की परंपरा थी। बिना संस्कारों के हम श्रेष्ठ और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक नहीं बना सकते हैं। प्रदेश में नई शिक्षा नीति और कार्य की जवाबदेही तय करने की पहल देश भर में स्थान बनाएगी और प्रदेश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। राज्यपाल पटेल का उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने पौधा, श्रीफल, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कार्यशाला में विषय -विशेषज्ञ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और आई.ई.यू.ए.सी. के निदेशक डॉ. ए.सी. पांड़े ने विचार रखे। राष्ट्रीय कार्यशाला के प्रारंभ में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने स्वागत उद्बोधन दिया। मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. भरत शरण सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता, उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा, प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, वरिष्ठ प्राध्यापक और विषय-विशेषज्ञ उपस्थित रहे।