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लखनऊ समिट में 15 एमओयू पर हस्ताक्षर, 5 निवेशकों को आशय-पत्र जारी, 13 शैक्षणिक संस्थानों से साझेदारी

लखनऊ समिट में 15 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर, पांच निवेशकों को आशय-पत्र जारी, 13 शैक्षणिक संस्थानों से साझेदारी योगी सरकार में जीसीसी के विस्तार, कौशल विकास और उद्योग-शिक्षा सहयोग को मिलेगा बढ़ावा लखनऊ में दो परिसर स्थापित करेगा स्मार्टवर्क्स लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश जीसीसी इनोवेशन समिट-2026 में महत्वपूर्ण पहल हुई। सम्मेलन के दौरान जीसीसी कंपनियों और प्रतिभा विकास से जुड़े भागीदारों के साथ 15 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए, पांच निवेशकों को आशय-पत्र जारी किए गए तथा 13 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। इन साझेदारियों से प्रदेश में निवेश, नवाचार, कौशल विकास और उच्च-मूल्य वाले रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के एलुमनाई एसोसिएशन ने इन्वेस्ट यूपी और एचसीएल टेक के सहयोग से होटल द सेंट्रम में इस सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, निवेशकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन, नवाचार तथा वैश्विक कारोबारी सेवाओं में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। पांच निवेशकों को जारी किए गए आशय-पत्र सम्मेलन में हवेल्स इंडिया लिमिटेड, एमेरिप्राइज इंडिया एलएलपी, मेटलाइफ ग्लोबल ऑपरेशन्स सपोर्ट सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, एलजी सॉफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डब्ल्यूएसपी कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को आशय-पत्र जारी किए गए। डब्ल्यूएसपी कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के आशय-पत्र के संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री की स्वीकृति और औपचारिक पत्र जारी होने की प्रक्रिया अभी शेष है। जीसीसी विस्तार और कौशल विकास के लिए 15 समझौते सम्मेलन में ईवाई जीडीएस, एएमएल राइटसोर्स, कंप्यूटासेंटर, मेटलाइफ, डीएसवी, डैमैक, अल्ट्रुआइस्ट और स्मार्टवर्क्स सहित प्रमुख कंपनियों के साथ समझौते किए गए। इनका उद्देश्य प्रदेश में नए वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित करना और मौजूदा परिचालन का विस्तार करना है। स्मार्टवर्क्स लखनऊ में दो समर्पित परिसर स्थापित कर रहा है। वहीं, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए पेटीएम, अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस), बार्कलेज, आईबीएम और नौकरी ने प्रशिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रमों में सहयोग के लिए साझेदारी की। पेटीएम ने इस पहल के तहत दो समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों से वैश्विक क्षमता केंद्र क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर जोर दिया गया। 13 शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौते, उद्योग-शिक्षा सहयोग को बढ़ावा सम्मेलन में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर, आईआईटी रुड़की, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ, आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, शिव नादर विश्वविद्यालय, मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) इलाहाबाद, लखनऊ विश्वविद्यालय, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) इलाहाबाद, ट्रिपल आईटी लखनऊ, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। इन साझेदारियों का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग मजबूत करना, विद्यार्थियों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना तथा अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देना है। सात सत्रों में वैश्विक क्षमता केंद्रों के भविष्य पर मंथन सम्मेलन में आयोजित सात विषयगत सत्रों में वैश्विक क्षमता केंद्रों के लिए निवेश स्थल का चयन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संचालन, उत्पाद-केंद्रित नवाचार, नवोद्यमों के साथ सहयोग, विश्वविद्यालयों की भूमिका और भविष्य के कौशल जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने वैश्विक कंपनियों की बदलती जरूरतों के अनुरूप प्रतिभा विकसित करने तथा भारत में उत्पाद विकास और अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने पर अपने विचार साझा किए।

मंत्री सिंह ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के साथ किया सीएसआईआर-एम्प्री, भोपाल का भ्रमण मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में सीएसआईआर-एम्प्री के साथ एमओयू पर होंगे

भोपाल  लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने बुधवार को सीएसआईआर-एम्प्री, भोपाल का भ्रमण किया। उन्होंने संस्थान में अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से विकसित आधुनिक तकनीकों एवं नवीन निर्माण सामग्रियों का अवलोकन किया तथा उनकी उपयोगिता एवं तकनीकी विशेषताओं की जानकारी ली। मंत्री  सिंह ने लोक निर्माण विभाग की सड़क, पुल एवं भवन निर्माण परियोजनाओं में स्वदेशी, पर्यावरण-अनुकूल, टिकाऊ एवं लागत-किफायती निर्माण तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं का परीक्षण कर इन्हें व्यावहारिक रूप से अपनाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। भ्रमण के दौरान जिओपॉलीमर कंक्रीट की तकनीक को विशेष रूप से समझा। जिओपॉलीमर कंक्रीट से निर्मित सड़क में सामान्य कंक्रीट की तरह पानी से तराई की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पानी की बचत होती है। साथ ही, कम मोटाई में भी एम-40 के अनुरूप मजबूती प्राप्त की जा सकती है। इस तकनीक का एम्स भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उपयोग किया जा चुका है। मंत्री  सिंह ने इस तकनीक को मध्यप्रदेश की सड़क परियोजनाओं में उपयोग की संभावनाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। मंत्री  सिंह ने फ्लाई ऐश और रेड मड सहित औद्योगिक एवं कृषि अपशिष्टों से तैयार सड़क निर्माण सामग्री, पेवर ब्लॉक, कर्ब स्टोन तथा ड्रेनेज ब्लॉक जैसे प्रीकास्ट कंपोनेंट्स का भी अवलोकन किया। अधिकारियों ने बताया कि सीएसआईआर-एम्प्री द्वारा लगभग 16 वर्ष पूर्व लगाए गए पेवर ब्लॉक आज भी मजबूत स्थिति में हैं और उन पर काई भी नहीं लगी है। इससे इन सामग्रियों की दीर्घकालिक मजबूती एवं टिकाऊपन का पता चलता है। संस्थान की प्रदर्शनी एवं प्रयोगशालाओं के भ्रमण के दौरान मंत्री  सिंह को बैम्बू कंपोजिट एवं हाइब्रिड वुड, रेड मड आधारित रेडिएशन शील्डिंग टाइल्स, एंटी-कोरोसिव एवं फायर-रेसिस्टेंट कोटिंग्स तथा कृषि अवशेषों से तैयार किए जाने वाले ग्रीन बाइंडर्स जैसी नवीन तकनीकों की जानकारी दी गई। उन्होंने इन तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर अधिकारियों के साथ चर्चा की। सीएसआईआर-एम्प्री बनेगा पीडब्ल्यूडी का तकनीकी साझेदार मंत्री  सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में आधुनिक तकनीक के उपयोग से मजबूत, टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का निर्माण सरकार की प्राथमिकता है। सीएसआईआर-एम्प्री में विकसित तकनीकों का लोक निर्माण विभाग की परियोजनाओं में अधिक व्यापक रूप से उपयोग करने के लिए संस्थान को पीडब्ल्यूडी का तकनीकी साझेदार बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगामी इंजीनियर्स डे के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में सीएसआईआर-एम्प्री के साथ एमओयू करने की योजना है। इस एमओयू के माध्यम से आधुनिक निर्माण तकनीकों, नवीन निर्माण सामग्रियों, गुणवत्ता परीक्षण एवं तकनीकी परामर्श के क्षेत्र में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को संस्थागत स्वरूप दिया जाएगा। मंत्री  सिंह ने कहा कि जिओपॉलीमर कंक्रीट जैसी तकनीकों से जहां निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन बढ़ाया जा सकता है, वहीं पानी की बचत और औद्योगिक अपशिष्ट के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएसआईआर-एम्प्री के साथ समन्वय कर उपयुक्त तकनीकों का तकनीकी परीक्षण किया जाए तथा पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर पीडब्ल्यूडी की परियोजनाओं में उनका उपयोग प्रारंभ किया जाए। मंत्री  सिंह ने एम्प्री की मटेरियल कैरेक्टराइजेशन प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया, जहां निर्माण सामग्री की मजबूती, टिकाऊपन एवं गुणवत्ता की जांच के लिए उपलब्ध आधुनिक परीक्षण मशीनों की कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव  सुखबीर सिंह, सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव, भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक  सी.बी. चक्रवर्ती, प्रमुख अभियंता  आर.एल. वर्मा, प्रमुख अभियंता  एस.आर. बघेल, सड़क विकास निगम के प्रमुख अभियंता  के.पी.एस. राणा, भवन विकास निगम के प्रमुख अभियंता  अजय वास्तव, मुख्य अभियंता  एस.सी. वर्मा एवं मुख्य अभियंता  बी.पी. बोरासी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। सीएसआईआर-एम्प्री की ओर से अपर निदेशक  शुक्ला, वरिष्ठ वैज्ञानिक  मनीष मुद्गल, वैज्ञानिकगण एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

एआई फॉर संस्कृति इंटरनेशनल समिट: देसंविवि का जिनेवा स्थित ग्लोबलेथिक्स व इरोज इंटरनेशलन के साथ हुआ एमओयू

हरिद्वार देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित ‘एआई फॉर संस्कृति इंटरनेशनल समिट’ ने तकनीक और मानवीय मूल्यों के समन्वय की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की। इस समिट का सबसे महत्वपूर्ण क्षण देसंविवि और जिनेवा स्थित अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्लोबेथिक्स के बीच हुए समझौता ज्ञापन पर औपचारिक हस्ताक्षर रहा। इस अवसर पर देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या एवं ग्लोबलेथिक्स के कार्यकारी निदेशक डॉ फादी दाऊ ने एमओयू पर हस्ताक्षर किया। यह साझेदारी वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) परिदृश्य में नैतिकता, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों के संस्थागत समावेश की दिशा में एक युगांतरकारी कदम मानी जा रही है। समझौते का उद्देश्य केवल शैक्षणिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उच्च-स्तरीय अनुसंधान, नीतिगत विमर्श और मूल्य-आधारित तकनीकी ढांचे के विकास पर केंद्रित है—ऐसा ढांचा जो मशीनी बुद्धिमत्ता को मानवीय संवेदनाओं से जोड़े। वहीं समिट के दौरान वैश्विक पहल को और विस्तार देते हुए इरोज इंटरनेशनल के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किया गया। इसके अंतर्गत संस्कृति जीपीटी और धर्म जीपीटी जैसे अभिनव, मूल्य-संचालित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने पर सहमति बनी। इस समझौते पर देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या एवं इरोज इंटरनेशनल की सीईओ डॉ शिल्पा देसाई ने हस्ताक्षर किया। उल्लेखनीय है कि इरोज इंटरनेशनल को 12000 से अधिक छोटी बडी फिल्मों को निर्माण का श्रेय जाता है। इन प्रस्तावित समझौते का लक्ष्य भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक विमर्श और नैतिक दृष्टिकोण को एआई तकनीक के माध्यम से वैश्विक मंच तक पहुँचाना है। यह पहल इस विचार को पुष्ट करती है कि आधुनिक तकनीक केवल गणनात्मक उपकरण नहीं, बल्कि सभ्यताओं के मध्य संवाद, वैश्विक सद्भाव और लोक-कल्याण का सशक्त माध्यम बन सकती है। हरिद्वार की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से प्रारंभ हुआ यह अंतरराष्ट्रीय अभियान डिजिटल क्रांति को ‘संस्कार’ और ‘संस्कृति’ की गरिमा से मंडित करने का प्रयास है। यह समझौता एक प्रतीक है—कि भविष्य की एआई नीतियाँ केवल एल्गोरिदम और डेटा पर नहीं, बल्कि नैतिक चेतना और मानवीय संवेदनशीलता पर भी आधारित होंगी। हरिद्वार से जिनेवा तक जुड़ा यह नैतिकता का सूत्र वैश्विक एआई विमर्श को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है—जहाँ तकनीक और मानवता परस्पर पूरक बनकर विश्व-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें।

आवास और बुनियादी ढांचा विकास के लिए एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर

रायपुर, छत्तीसगढ़ में बुनियादी ढांचे के विकास और आवास निर्माण को गति देने के उद्देश्य से, छत्तीसगढ़ शासन ने हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (आवास और शहरी विकास निगम हुडको) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह रणनीतिक साझेदारी राज्य के विकास लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रमुख आवास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण सुरक्षित करना है।      .. इस अवसर पर वित्त विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल, विशेष सचिव श्री चन्दन कुमार, विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा, उप सचिव श्री ऋषभ कुमार पाराशर व अवर सचिव श्री चंद्र प्रकाश पाण्डेय तथा हुडको से निदेशक वित्त श्री दलजीत सिंह खत्री व क्षेत्रीय प्रमुख हितेश बोराड मौजूदगी में सम्पन्न हुए। यह कार्यक्रम महानदी भवन, मंत्रालय, नवा रायपुर, अटल नगर में कल संपन्न हुआ। यह समझौता हुडको द्वारा राज्य शासन की विभिन्न विकास पहलों के लिए वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए एक रूपरेखा स्थापित करता है।             समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) का मुख्य उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ में प्रमुख आवास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तपोषण की सुविधा प्रदान करना है। यह सहयोग मजबूत बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण और किफायती आवास की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर केंद्रित होगा। इससे सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ के नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने में योगदान मिलेगा।      यह साझेदारी आधुनिकीकरण और सतत् विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। जो हुडको की विशेषज्ञता और वित्तीय क्षमता का लाभ उठाकर परिवर्तनकारी परियोजनाओं को मूर्त रूप देने में मदद करेगी। हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको) एक नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है, जो देश में आवासीय उद्देश्यों के लिए घरों के निर्माण या आवास और शहरी विकास कार्यक्रमों के वित्तपोषण के लिए दीर्घकालिक वित्त प्रदान करता है।

गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और टी.आर.के.सी. के बीच हुआ एमओयू

रायपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में निवास करने वाली जनजातियों पर विशेष शोध और अनुसंधान की राह खुल गई है। राज्य की जनजातियों की गौरवशाली परंपरा, उनकी संस्कृति और उनके आर्थिक-समाजिक ताने-बाने को लेकर अब विद्यार्थी उच्च स्तरीय शोध कर पाएंगे। राज्य के गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और ट्रायबल रिसर्च एण्ड नॉलेज सेंटर नई दिल्ली के बीच इसके लिए महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। टीआरकेसी विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय जनजातियों के बारे में शोध कार्याें के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। विश्वविद्यालय के ओर से इस एमओयू पर कुलसचिव प्रो. अभय एस रणदिवे और टीआरकेसी की ओर से छतीसगढ़ प्रभारी राजीव शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत् संस्था द्वारा अगले तीन वर्षों तक छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों पर शोध कार्य किए जाएंगे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कूलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नीलांबरी दवे, वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय युवा कार्यप्रमुख वैभव सुरंगे सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे। एमओयू के बारे में टीआरकेसी के राज्य प्रभारी राजीव शर्मा ने बताया कि टीआरकेसी देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय विषयों पर शोध कार्यों को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण संस्था है। गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातीयों पर रिसर्च तेज होगी। उन्होंने बताया कि राज्य की पुरातन और गौरवशाली जनजातीय के कई अनछुए पहलुओं और उनकी सभ्यता और संस्कृति के बारे में इन शोधों से आम नागरिकों को भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इन शोध कार्यों से सरगुजा और बस्तर के क्षेत्रों की विभिन्न जनजातियों के आदिकालीन सामाजिक संगठन, उनके अर्थशास्त्र, सुशासन, ग्रामीण उद्यमिता, सतत् विकास और नवाचार के बारे में भी लोगों को जानकारियां मिलेंगी। शर्मा ने बताया कि इससे खुद जनजातीय युवा अपने गौरवशाली अतीत और उसकी व्यवस्थाओं के बारे में जान पाएंगे।  विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि संपादित एमओयू के बाद जनजातीयों पर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू होंगी। क्षेत्राधारित केस स्टडी और युवाओं, प्रशासकों, जनजातीय हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, नेतृत्व विकास कार्यशालाएं और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी आयोजित होंगे। युवाओं के लिए सामाजिक प्रभाव आधारित र्स्टाटअप और नवाचारों पर मार्गदर्शन तथा परामर्श सत्र रखे जाएंगे। विशेषज्ञों और प्राघ्यापकों की भागीदारी से जनजातीय वर्ग में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। जनजातीय पर आधारित संगोष्ठीयों, व्याख्यानों, सम्मेलनों, गोलमेज चर्चाओं तथा सार्वजनिक संवादों का भी आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च वर्क से मिले परिणामों को पुस्तकालयों, अनुसंधान प्रकाशनों तथा डेटाबेस के द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राज्य के जनजातीय समुदाय के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लोगों तक पहुंच सकेगी। स्वयं जनजातीय समुदायों को भी अपने गौरवशाली अतीत के बारे में पता चलेगा और भविष्य में यह रिसर्च वर्क जनजातीयों के विषयों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने का जरिया बनेंगे।