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लुधियाना में बदलाव, नगर निगम के नए कमिश्नर ने संभाली कमान

लुधियाना बुधवार, 21 जनवरी को बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 26 आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस फेरबदल में  लुधियाना नगर निगम के कमिश्नर को भी बदल दिया गया है। सरकारी आदेशों के अनुसार, नगर निगम लुधियाना के मौजूदा कमिश्नर आदित्य डेचलवाल का तबादला कर उन्हें डिप्टी कमिश्नर रोपड़ नियुक्त किया गया है। वहीं, लुधियाना नगर निगम की कमान अब नीरू कत्याल को सौंपी गई है। अब लुधियाना नगर निगम के नए कमिश्नर नीरू कत्याल होंगे। बता दें कि नीरू कत्याल वर्तमान में पुड्डा (PUDA) में मुख्य प्रशासक के पद पर कार्यरत थीं।   नीरू कत्याल इससे पहले नगर निगम लुधियाना में एडिशनल कमिश्नर के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। इसके अलावा वह ग्लाडा (GLADA) की चीफ एडमिनिस्ट्रेटर भी रह चुकी हैं। प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें लुधियाना जैसे बड़े शहर की जिम्मेदारी सौंपी है।  इस तबादला सूची को आगामी समय में प्रशासनिक कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

हैरान करने वाली कार्रवाई: लखनऊ नगर निगम ने केंद्रीय संस्थान NBFGR का मुख्यालय किया सील

लखनऊ लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) ने हाउस टैक्स नहीं देने पर केंद्र सरकार के ही एक दफ्तर पर ताला मारकर उसे सील कर दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBFGR) पर नगर निगम का करोड़ से ऊपर रुपया बकाया है, जिसका भुगतान कई बार नोटिस देने के बाद भी नहीं हुआ है। निगम के अधिकारियों ने सोमवार की सुबह तेलीबाग स्थित एनबीएफजेआर के मुख्यालय पर ताला मार दिया। नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर नगर निगम इस समय बड़े बकाएदारों के खिलाफ सख्त अभियान चला रहा है।   नगर निगम जोन–4 की जोनल अधिकारी शिल्पा कुमारी ने सोमवार को नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्स (एनबीएफजीआर) का परिसर सील कर दिया। कृषि मंत्रालय के इस संस्थान पर नगर निगम का हाउस टैक्स मद में कुल 1 करोड़ 36 लाख 65 हजार 932 रुपये बकाया था। कई बार नोटिस और पत्राचार के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं करने पर लखनऊ नगर निगम ने यह अभूतपूर्व कदम उठाया है। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि बकाया कर की वसूली को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी, चाहे बकाएदार निजी हो या सरकारी विभाग। नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्स (एनबीएफजीआर) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने 1983 में इलाहाबाद (प्रयागराज) में एक किराए के परिसर में राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो की स्थापना की थी। ब्यूरो का स्थायी कार्यालय 1990 में लखनऊ के तेलीबाग इलाके में बना और तब से वो यहीं से चल रहा है। संस्थान का मुख्यालय 52 एकड़ में फैला है, जिसमें प्रशासनिक भवन के अलावा प्रयोगशाला, खेत और आवासीय परिसर भी शामिल हैं। संस्थान मछली आनुवंशिक संसाधनों का मूल्यांकन और संरक्षण करता है। मछली के संरक्षण के लिए भी यहां रिसर्च होता है।  

त्रिपक्षीय समझौते से मजदूरों को बड़ी राहत, रांची नगर निगम देगा पहली बार बोनस

रांची झारखंड की राजधानी रांची नगर निगम के उप श्रमायुक्त अविनाश कृष्ण की उपस्थिति में मजदूरों के बोनस भुगतान को लेकर त्रिपक्षीय समझौता संपन्न हुआ। इस समझौते के तहत पहली बार रांची नगर निगम में कार्यरत मजदूरों को बोनस का लाभ मिलेगा, जिसे श्रमिक हितों की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। त्रिपक्षीय समझौते पर मजदूर पक्ष की ओर से झारखंड नगर निकाय मजदूर यूनियन, रांची के अध्यक्ष एवं प्राधिकृत प्रतिनिधि भवन सिंह तथा यूनियन के सचिव सुखनाथ लोहरा ने हस्ताक्षर किए। वहीं नियोक्ता पक्ष की ओर से मेसर्स स्वच्छता कॉरपोरेशन, बेंगलुरु के महाप्रबंधक राजशेखर रेड्डी और प्रोजेक्ट मैनेजर जी. गांधी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौता पूर्ण होने के बाद उप श्रमायुक्त अविनाश कृष्ण ने इसकी प्रमाणित प्रति दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई।         मजदूरों को दो किस्तों में मिलेगा बोनस भुगतान समझौते के अनुसार वर्ष 2024-25 के लिए बोनस भुगतान की व्यवस्था तय की गई है। दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में कार्यरत मजदूरों को 2000 रुपये प्रति कामगार की दर से बोनस दिया जाएगा। यह राशि दो किस्तों में मजदूरों को प्राप्त होगी, जो दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के वेतन के साथ भुगतान की जाएगी। वहीं फरवरी और मार्च 2025 में कार्यरत मजदूरों को 1000 रुपये बोनस दिया जाएगा, जिसका भुगतान दिसंबर 2025 के वेतन के साथ किया जाएगा।        मजदूरों ने समझौते का किया स्वागत इस अवसर पर झारखंड नगर निकाय मजदूर यूनियन के अध्यक्ष भवन सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि यूनियन के लंबे संघर्ष और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि रांची नगर निगम के मजदूरों को पहली बार बोनस का अधिकार मिलना मजदूर एकता की जीत है। भवन सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि यूनियन आगे भी मजदूरों के अन्य अधिकारों और सुविधाओं के लिए संघर्ष जारी रखेगी। मजदूरों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे आर्थिक राहत देने वाला कदम बताया है। श्रमिकों का कहना है कि बोनस मिलने से उनके परिवारों को आर्थिक सहारा मिलेगा, खासकर त्योहार और जरूरी खर्चों के समय। श्रमिक संगठनों का मानना है कि यह त्रिपक्षीय समझौता भविष्य में नगर निगम के अन्य श्रमिक अधिकारों, जैसे सामाजिक सुरक्षा और स्थायी लाभों की दिशा में भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा।

जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, 10 स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाएगा निगम

रायपुर राजधानी में लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए नगर निगम ने जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाया है. शहर में भू-जल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा 10 स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाए जाने की योजना तैयार की गई है. इस योजना के लिए लगभग 50 लाख रुपये का प्रस्ताव केंद्रीय जल आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजा गया है. नगर निगम के जल विभाग के अनुसार, प्रत्येक रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट पर करीब 5 लाख रुपये की लागत आएगी. इन पिटों के जरिए वर्षा जल को संग्रहित कर सीधे जमीन में पहुंचाया जाएगा, जिससे भू-जल का पुनर्भरण हो सके. फिलहाल शहर में उपयुक्त स्थानों का चिन्हांकन किया जा रहा है. कई इलाकों में काफी नीचे चला गया है जल स्तर नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक रायपुर में भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है. कचना, सड्डू और सेजबहार जैसे क्षेत्रों में जल स्तर 800 से 1000 फीट तक पहुंच गया है. इससे बोरवेल की गहराई बढ़ रही है और जल आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव भी लगातार बढ़ रहा है. 62 एकड़ क्षेत्र में पहले से विकसित है रेन वाटर हार्वेस्टिंग इससे पहले भी नगर निगम द्वारा दलदल सिवनी क्षेत्र में लगभग 62 एकड़ में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली विकसित की जा चुकी है. इंदिरा स्मृति वन के पास बनाए गए परकोलेशन टैंकों में मानसून के दौरान वर्षा जल को एकत्र कर जमीन में समाहित किया जाएगा. विशेषज्ञों के अनुसार इस व्यवस्था से करीब 21 करोड़ लीटर पानी का भंडारण संभव है. नगर निगम का मानना है कि वर्षा जल संरक्षण से भविष्य में जल संकट को काफी हद तक रोका जा सकता है. निगम आयुक्त विश्वदीप ने बताया कि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू किया जाएगा. साथ ही आने वाले समय में सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं विकसित करने की योजना है.

घुमंतू पशुओं पर सख्ती: हादसे रोकने को नगर निगम का बड़ा एक्शन, मालिकों पर होगी FIR

जगदलपुर शहर में आवारा और घुमंतू पशुओं के कारण लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए अब नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। बार-बार सड़कों से हटाने के बावजूद ये पशु फिर से सड़क पर पहुंच जाते हैं, जिसके चलते अब नगर निगम जगदलपुर ने घुमंतू पशुओं के मालिकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने का निर्णय लिया है। नगर निगम क्षेत्र के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास स्थित ग्रामीण इलाकों में भी यह सख्ती अपनाई जाएगी। नगर निगम, यातायात विभाग और ग्राम पंचायतों ने मिलकर सख्त कार्रवाई को लेकर अपनी सहमति दी है। महापौर संजय पांडे ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में आवारा पशुओं की पहचान कर उनका पुनर्वास करते हुए गौशालाओं में भेजा जाएगा। साथ ही पशुओं के मालिकों के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई करते हुए दुर्घटना होने की स्थिति में FIR की भी कार्रवाई होगी। नगर निगम ने इसके लिए गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण का काम भी शुरू कर दिया है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने पालतू पशुओं को सड़कों पर न छोड़ें।

नगर निगम का नया नियम: ठेला, गुमटी और फूड वैन बिना लाइसेंस नहीं चलेंगे

रायपुर छत्तीसगढ़ के नगरीय निकाय क्षेत्रों में अब बिना अनुमति कोई भी व्यापार नहीं किया जा सकेगा. राज्य सरकार ने इसके लिए छत्तीसगढ़ नगरपालिका (व्यापार अनुज्ञापन) नियम 2025 की अधिसूचना जारी कर दी है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है. नए नियमों के तहत नगर निगम, नगरपालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में गुमटी, ठेले और वाहनों के माध्यम से व्यापार करने वालों को भी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा. नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना नियमों का पालन न करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है. आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अनुज्ञप्ति प्रदान की जाएगी, 15 दिनों के भीतर निर्णय नहीं लिए जाने पर अनुज्ञप्ति प्रदान की गई समझी जाएगी. जिन व्यापारियों के पास पहले से अनुज्ञप्ति नहीं है, वे 60 दिनों के भीतर आवेदन कर सकेंगे. भवन और खुले स्थानों को नगरीय निकाय द्वारा उस सड़क की चौड़ाई या स्थान के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा, जहां व्यापारिक परिसर स्थित है. नगर निगम क्षेत्रों में 7.5 मीटर से कम सड़क चौड़ाई पर न्यूनतम वार्षिक शुल्क 4 रुपए प्रति वर्गफुट, नगरपालिका में 3 रुपए और नगर पंचायत में 2 रुपए प्रति वर्गफुट तय किया गया है. प्रत्येक अनुज्ञप्ति अधिकतम 10 वर्ष के लिए मान्य होगी, जिसकी अवधि आवेदक स्वयं चुन सकता है. नवीनीकरण का भी प्रावधान अनुज्ञप्ति की समाप्ति से कम से कम एक वर्ष पहले नवीनीकरण कराना होगा. निर्धारित अवधि में नवीनीकरण न होने पर अनुज्ञप्ति रद्द कर व्यापार परिसर को सील किया जा सकेगा. प्रतिबंध और छूट केंद्र व राज्य शासन, जिला प्रशासन और नगरपालिका द्वारा समय-समय पर जारी आदेश-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा. परिसर के सामने फुटपाथ या सार्वजनिक सड़क पर कोई अवरोध और अतिक्रमण नहीं किया जाएगा. परिसर के सामने किसी तरह की होर्डिंग, विज्ञापन और अवैध पार्किंग की अनुमति नहीं होगी. व्यापार परिसर में अनुज्ञप्ति शुल्क मोहल्ला-कॉलोनी के लिए व्यापार अनुज्ञप्ति शुल्क नगर निगम में 4, नगरपालिका में 3 और नगर पंचायत में 2 रुपए प्रति वर्गफुट प्रतिवर्ष निर्धारित है. इसी तरह छोटे और मध्यम बाजारों में क्रमशः 5, 4 और 3 रुपए तथा बड़े बाजारों में क्रमशः 6, 5 व 4 रुपए प्रति वर्गफुट प्रतिवर्ष निर्धारित है. अन्य व्यावसायिक परिसरों के लिए अलग दरें नगरीय निकाय में स्थित ऐसे सभी व्यावसायिक परिसर जो बाजारों में अवस्थित न हो, उसके लिए अनुज्ञप्ति शुल्क की अलग दरें होंगी. नगर निगम में 30 हजार, नगरपालिका परिषद में 20 हजार और नगर पंचायत में 10 हजार रुपए से अधिक नहीं होगी. वाहनों के माध्यम से व्यापार के लिए भी लाइसेंस वाहनों के माध्यम से व्यापार के लिए भी लाइसेंस जरूरी होगा. मिनी ट्रक, पिकअप वेन और जीप इत्यादि के लिए नगर निगम में 400, परिषद में 300 और नगर पंचायत में 200 रुपए प्रति वाहन-प्रतिवर्ष अनुज्ञप्ति शुल्क निर्धारित है. वहीं ऑटो रिक्शा और तिपहिया वाहन के लिए क्रमशः 250, 200 और 150 रुपए शुल्क देना होगा. वाहन यह सुनिश्चित करेगा कि यातायात को कोई अवरोध न हो. यातायात में अवरोध किए जाने पर अनुज्ञप्ति निरस्त कर दी जाएगी.

खेसारी लाल यादव पर नगर निगम की कार्रवाई, चुनावी माहौल में बढ़ी हलचल

पटना बिहार में जारी मतदान के बीच भोजपुरी अभिनेता और राजनेता खेसारी लाल यादव  को झटका लगा है। दरअसल, मीरा भयंदर नगर निगम ने भोजपुरी अभिनेता और गायक खेसारी लाल यादव, जो राजद उम्मीदवार के रूप में बिहार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, को मीरा रोड स्थित उनके घर में कथित अवैध निर्माण के लिए नोटिस जारी किया है। एक अधिकारी ने कहा, यह नोटिस "लोहे के एंगल और टिन शीट शेड की अनधिकृत स्थापना" से संबंधित है। महाराष्ट्र नगर निगम के अधिकारी ने कहा, "नोटिस में परिसर के मालिक से इन अवैध निर्माणों को हटाने के लिए कहा गया है, अन्यथा अतिक्रमण विभाग नगर निगम के कानूनों के अनुसार कार्रवाई शुरू करेगा। अगर अवैध निर्माण स्वेच्छा से नहीं हटाया जाता है, तो नगर निगम मालिक के खर्चे पर इसे गिरा देगा।" छपरा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं खेसारी लाल यादव इलाके के निवासियों ने बताया कि उनका घर कई हफ़्तों से बंद है, और कुछ का दावा है कि उनका परिवार यादव के चुनाव प्रचार में उनका समर्थन करने बिहार गया है। यादव राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर छपरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां से 2015 से भाजपा के सीएन गुप्ता जीतते आ रहे हैं। यादव से टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं किया जा सका।

नगर निगम के 17 द्वितीय श्रेणी पदों की भर्ती पर परिषद ने जताई आपत्ति

भोपाल  मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (PEB) ने समूह-2 और उप समूह-3 के करीब 300 पदों के लिए भर्ती निकाली है। आवेदन भरने की आखिरी तारीख 12 नवंबर 2025 है। यही परीक्षा अब सवालों के घेरे में आ गई है। दूसरी ओर, इन पदों की जानकारी बिना एमआईसी यानी, मेयर इन कौंसिल के भेजी गई थी। इसलिए जानकारी देने वाले सेवानिवृत्त अपर आयुक्त एमके सिंह के विरुद्ध भी कार्रवाई हो सकती है। इस मामले का खुलासा 30 अक्टूबर को हुई नगर निगम परिषद की बैठक में हुआ। बीजेपी पार्षद देवेंद्र भार्गव ने कहा कि पीईबी को सहायक यंत्री की भर्ती के अधिकार ही नहीं है। वहीं, निगम के संकल्प के बिना कोई भर्ती नहीं की जा सकती। यह मध्यप्रदेश शासन के गजट में है। कोरोना काल में जब परिषद में संभागायुक्त प्रशासक थे, तब लिस्ट तैयार की गई थी। जिसे वर्ष 2023 में तत्कालीन अपर आयुक्त एमपी सिंह ने पीईबी को भेज दी, जबकि साल 2022 से परिषद में है। यदि जरूरी भी था कि लिस्ट एमआईसी या कमिश्नर के संज्ञान में लाने के बाद भेजी जानी थी। पुराने पत्र के आधार पर एमआईसी को जानकारी दी गई। इसलिए भर्ती को विलोपित करने को कहा गया है। निगम अध्यक्ष बोले- परीक्षा हुई तो इंजीनियर इधर-उधर भटकेंगे मुद्दा सामने आने के बाद निगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने भी कमिश्नर संस्कृति जैन को पीईबी को जल्द ही पत्र लिखने को कहा। ताकि, परीक्षा से सहायक यंत्री के पदों को हटा दिया जाए। उन्होंने बताया, पार्षद भार्गव ने यह विषय उठाया था। इस पर पक्ष-विपक्ष सभी ने सहमति जताई थी। गलत और नियम विरुद्ध तरीके से सेकंड क्लॉस भर्ती के लिए पीईबी को पत्र लिखा गया, जबकि उस समय परिषद निर्वाचित होकर अपने स्वरुप में आ गई थी। नियम कहता है कि एमआईसी को नियुक्ति के अधिकार है। एमआईसी की मंजूरी के बिना कोई प्रस्ताव पीईबी को गया, यह नीतिगत सही नहीं था। दूसरी ओर, पीईबी को द्वितीय श्रेणी की भर्ती की पात्रता ही नहीं है। शासन ने तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्ती के लिए पीईबी को बनाया गया है। द्वितीय श्रेणी की एग्जॉम MPPSC करा सकता है। बावजूद यदि पीईबी यह परीक्षा करा देती है तो जिनकी नियुक्ति होगी, वे भी इधर-उधर भटकते रहेंगे। इसलिए निगम कमिश्नर से कहा है कि जल्द ही पीईबी को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करें। इन कैटेगिरी के लिए भर्ती भोपाल नगर निगम में सहायक यंत्री सिविल के कुल 15 पद है, जबकि एक मैकेनिकल और एक सहायक यंत्री विद्युत के लिए पद है। इस तरह कुल पद 17 है। इनमें श्रेणी के हिसाब से भर्ती की जा रही है। जिसमें अनारक्षित, ईडब्ल्यूएस, एससी, एसटी और ओबीसी शामिल हैं। इनमें भी महिला, भूतपूर्व सैनिक, दिव्यांग के लिए पद आरक्षित किए गए हैं। मैकेनिकल और सहायक यंत्री के 2 पदों पर सीधी भर्ती होगी। सभी पद कार्यपालिक है। अपर आयुक्त ने 36 पदों की भेजी थी जानकारी तत्कालीन अपर आयुक्त सिंह ने 11 जुलाई-23 को कुल 36 पदों पर भर्ती के लिए जानकारी पीईओ को भेजी थी। इसमें सहायक आयुक्त के 11 पद, सहायक यंत्री (सिविल) के 15 पद, सहायक यंत्री (विद्युत) का 1 पद, सहायक यंत्री (मैकेनिकल) का 1 पद और सहायक ई-गवर्नेंस अधिकारी के 8 पद शामिल हैं। पत्र में बताया गया था कि ये सभी पद द्वितीय श्रेणी के है। इस संबंध में सिंह ने बताया कि सेवानिवृत्त हुए दो साल हो गए हैं। मेरे संज्ञान में मामला नहीं है। प्रक्रिया के हिसाब से ही पत्र भेजा गया होगा।

मंदिरों पर अब नहीं लगेगा प्रॉपर्टी टैक्स, रायपुर महापौर ने नगर निगम को दिए सख्त निर्देश

 रायपुर  शहर में मौजूद किसी भी मंदिर से अब संपत्तिकर (Property Tax) नहीं वसूला जाएगा। रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम द्वारा किसी भी जोन या वार्ड के मंदिर को संपत्तिकर वसूली का नोटिस नहीं भेजा जाएगा। यह निर्णय नगर निगम की नियमावली के तहत लिया गया है। हाल ही में जोन-4 के ब्राह्मणपारा वार्ड स्थित सोहागा मंदिर को नगर निगम राजस्व विभाग की ओर से संपत्तिकर का नोटिस जारी किया गया था। इस घटना पर महापौर मीनल चौबे ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों सुशांत और अमर को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। महापौर ने कहा कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो दोनों कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी जोन आयुक्तों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी परिस्थिति में मंदिरों को संपत्तिकर वसूली का नोटिस न दिया जाए। मीनल चौबे ने कहा, 'इस मामले में किसी प्रकार की लापरवाही, हीला-हवाला या नियमों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को सुनिश्चित करना होगा कि मंदिरों के सम्मान और नियमों के पालन में कोई चूक न हो।' बताया जा रहा है कि रायपुर शहर में वर्तमान में लगभग 450 मंदिर स्थित हैं, जिन पर यह निर्णय लागू रहेगा।

सरकार की प्री-पेड बिजली योजना पर रोक, इंदौर नगर निगम और पुलिस ने नहीं किया अपनाना

इंदौर  सरकार द्वारा शुरू किया गया  प्री-पेड बिजली कनेक्शन सिस्टम खुद सरकारी विभागों के लिए चुनौती बन गया है। अगस्त महीने तक शहर के करीब 1300 सरकारी कनेक्शनों को प्री-पेड मोड पर लाना था, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी केवल 350 कनेक्शन ही इसमें जोड़े जा सके हैं। खास बात यह है कि नगर निगम और पुलिस प्रशासन जैसे बड़े उपभोक्ता भी अभी तक इस प्रणाली को अपनाने को तैयार नहीं हैं। आधे से ज्यादा विभागों ने कोषालय को न तो बिल भेजे हैं और न ही अग्रिम भुगतान किया है। योजना के तहत मोबाइल की तरह बिजली के लिए भी पहले रिचार्ज करवाने की व्यवस्था की जानी है। शुरुआत में सरकारी दफ्तरों को इसमें शामिल किया गया है, इसके बाद व्यावसायिक और घरेलू कनेक्शनों पर भी यह प्रणाली लागू की जाएगी। बिजली कंपनी की कोशिशें नाकाम, विभागों की बेरुखी बरकरार पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के इंदौर-उज्जैन संभाग में 15 जिले आते हैं। योजना के पहले चरण में इन जिलों के करीब 11 हजार सरकारी कनेक्शनों को प्री-पेड मोड में लाने का लक्ष्य रखा गया था। इंदौर शहर के लगभग 1300 सरकारी कनेक्शन इस सूची में थे, लेकिन अगस्त तक काम पूरा नहीं हो सका। बिजली कंपनी ने कोषालय के माध्यम से दो माह के अग्रिम बिल जमा कराने की व्यवस्था भी बना दी थी, परंतु वास्तविक अमल की रफ्तार बेहद धीमी रही। दिलचस्प बात यह है कि प्री-पेड योजना में सरकारी उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 25 पैसे की छूट भी दी जा रही है, इसके बावजूद विभागों की अनदेखी जारी है। निजी उपभोक्ताओं के लिए भी भविष्य में यह योजना लागू करने की तैयारी थी, लेकिन शुरुआती चरण की धीमी रफ्तार से अब यह योजना ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है। जिन विभागों का बिजली खर्च ज्यादा, वही कर रहे उपेक्षा वित्त मंत्रालय ने सभी जिलों को अगस्त से पहले दो माह के अग्रिम बिल भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे। बिजली कंपनी ने स्मार्ट मीटर लगाकर सिस्टम अपग्रेड कर लिया, भुगतान फाइलें भेज दीं, लेकिन कई सरकारी विभागों ने सहयोग नहीं किया। जिन विभागों पर सबसे अधिक बिजली खर्च होता है, उन्हीं की फाइलें अटकी पड़ी हैं। नगर निगम और पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट रुख सामने नहीं आया है। न तो कोषालय को अग्रिम भुगतान की जानकारी दी गई और न ही सहमति पत्र भेजे गए। अस्पताल, थाने और जल प्रदाय जैसी आवश्यक सेवाओं को पहले चरण से फिलहाल बाहर रखा गया था, फिर भी जिन कनेक्शनों को शामिल किया जाना था, वहां भी प्रक्रिया सुस्त है। इंदौर में 7.75 लाख उपभोक्ताओं के लिए तैयारी, पर गति धीमी इंदौर शहर में करीब 7.75 लाख उपभोक्ता हैं और सभी को भविष्य में प्री-पेड सिस्टम में लाने की योजना है। अधिकांश जगहों पर स्मार्ट मीटर लग चुके हैं और सिस्टम भी अपग्रेड किया जा चुका है। पहले चरण में लगभग 1300 सरकारी कनेक्शनों को प्री-पेड मोड पर देना तय था, लेकिन अब तक केवल 350 कार्यालयों ने दो माह का अग्रिम बिल जमा किया है। मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधीक्षण अभियंता डी.के. गांठें ने बताया कि “कंपनी ने पूरी तैयारी कर ली है, अब विभागों से अपेक्षित सहयोग मिलना बाकी है।”