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पटना नगर निगम का बड़ा प्लान: 4400 दुकानदारों को मिलेगा आधुनिक वेंडिंग जोन में ठिकाना

पटना पटना के फुटपाथी दुकानदारों को जल्द ही नया ठिकाना मिलने वाला है. नगर निगम की ओर से शहर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित बनाने के लिए कई पहल किए जा रहे हैं. ऐसे में अब नए वेंडिंग जोन बनाने का फैसला लिया गया है. जानकारी के मुताबिक, शहर के अलग-अलग इलाकों में 31 वेंडिंग जोन बनेंगे. इनमें से 19 के लिए 760.81 डिसमिल जमीन चिह्नित कर ली गई है. मिली जानकारी के मुताबिक, पटना में बनने वाले वेंडिंग जोन पर 124.4 करोड़ खर्च किए जायेंगे. इसमें नौ जगहों पर नगर निगम की अपनी जमीन है, जबकि बाकी 10 जगहों के लिए पथ निर्माण, सिंचाई और भवन निर्माण विभाग से उनकी जमीन पर वेंडिंग जोन बनाने के लिए स्वीकृति मिल गई है. हर वेंडिंग जोन में 200 से 235 दुकानें होंगी. 4400 रजिस्टर्ड दुकानदारों को बेहद कम रेट पर जगह मिल सकेगी. किस जगह कितने बनेंगे वेंडिंग जोन? पटना के नूतन राजधानी अंचल में 61.69 करोड़ रुपये से आठ वेंडिंग जोन बनेंगे, इसके तहत शेखपुरा रैन बसेरा, अमला टोला, पंच मंदिर, इको पार्क डीपीएस के पास, चित्रगुप्त समाज मंदिर, साकेत नगर, बेऊर मोड़ और जंक्शन रोड मल्टी लेवल पार्किंग के पीछे जी प्लस वन वेंडिंग जोन बनेंगे. पाटलिपुत्र अंचल में 24.29 करोड़ से चार वेंडिंग जोन बनेंगे. इनमें मछली मार्केट के पास आरसीडी की जमीन, वार्ड 20 में सब्जी मार्केट के पास, वार्ड 8 में बीएमएसआइसीएल के सामने और वार्ड 24 में दीघा पोस्ट के सूर्य मंदिर के पास आधुनिक जी प्लस वन परिसर तैयार किए जायेंगे. मुसल्लहपुर हाट और गांधी सेतु के पास भी बनेंगे वेंडिंग जोन जानकारी के अनुसार, बांकीपुर अंचल में निगम की जमीन पर 18.82 करोड़ से मैकडोवेल गोलंबर और खेतान मार्केट के सामने बिरला मंदिर रोड में जी प्लस वन, जबकि वार्ड 50 में मुसल्लहपुर हाट के पास जी प्लस टू भवन बनेगा. अजीमाबाद अंचल में 15.54 करोड़ से गांधी सेतु के नीचे, गायघाट और मीना बाजार में जी प्लस टू होंगे. पटना सिटी अंचल में 4.11 करोड़ से सती चौराहा गुरु गोविंद सिंह लिंक पथ पर निगम की जमीन पर एक जी प्लस वन वेंडिंग जोन बनेगा. म्यूनिसिपल बॉन्ड के खर्च किए जायेंगे पैसे वेंडिंग जोन बनाने में म्यूनिसिपल बॉन्ड के पैसे खर्च किए जायेंगे. पटना नगर निगम 200 करोड़ रुपये का म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने जा रहा है. इसके लिए बाजार नियामक सेबी से हरी झंडी मिल चुकी है. पटना नगर निगम के मौजूदा रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में टोटल 20, 862 फुटपाथी दुकानदार रजिस्टर्ड हैं. लेकिन पिछले करीब 10 सालों से शहर के वेंडर कार्ड जारी नहीं किए गए हैं.

स्वच्छता को लेकर BMC का नया नियम, आयोजन से पहले मंजूरी अनिवार्य, घर में रखने होंगे 4 डस्टबिन

​​भोपाल  शहर में स्वच्छता व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नगर निगम परिषद ने केंद्र सरकार के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को लागू करने का फैसला किया है. अब नगर निगम की नजर सिर्फ बड़े राजनीतिक या व्यावसायिक आयोजनों पर ही नहीं, बल्कि घरों में होने वाले छोटे-मोटे कार्यक्रमों जैसे बर्थ-डे पार्टी, सगाई, फेयरवेल और कॉलोनी के फंक्शन्स पर भी रहेगी।  निगम अधिकारियों का कहना है कि नए नियमों का मुख्य उद्देश्य बड़े और छोटे आयोजनों से निकलने वाले कचरे पर नियंत्रण पाना और लोगों की जवाबदेही तय करना है. ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने या खुले में कचरा फेंकने और जलाने पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।  ​100 मेहमान जुटे तो 3 दिन पहले देनी होगी सूचना ​नए नियमों के अनुसार यदि किसी भी निजी, धार्मिक, सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम में 100 या उससे अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है, तो आयोजक को कार्यक्रम से 3 दिन पहले नगर निगम को इसकी लिखित जानकारी और अनुमति लेनी होगी. आयोजकों को पहले से यह बताना होगा कि कार्यक्रम कहां हो रहा है, कितने लोग आएंगे और वहां पैदा होने वाले कचरे के निपटारे के लिए क्या व्यवस्था की गई है. बिना सूचना दिए आयोजन करने या कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन न करने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।  बिना छंटनी पर 150 प्रतिशत जुर्माना ​अब भोपाल के हर घर और व्यावसायिक संस्थान को अपने कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर रखना होगा. ऐसा न करने और 100 किलोग्राम से अधिक कचरा अलग-अलग श्रेणियों में देने पर 150 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाएगा।  कचरे को इन 4 भागों में विभाजित करना होगा अनिवार्य ​गीला कचरा- रसोई का भोजन, फल-सब्जियों के छिलके और पेड़-पौधों की हरी पत्तियां. ​सूखा कचरा- रद्दी कागज, गत्ते, प्लास्टिक, धातु, कांच की बोतलें और फटे-पुराने कपड़े. ​सैनिटरी कचरा – डायपर, सैनिटरी नैपकिन, टिश्यू पेपर और घरेलू स्तर का मेडिकल वेस्ट. ​घरेलू ई-वेस्ट – मोबाइल, चार्जर, बैटरियां, बल्ब, घरेलू केमिकल और एक्सपायर्ड दवाइयां. ​बड़े आवासीय और व्यावसायिक परिसर भी दायरे में नगर ​निगम ने बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी तय की है, जिसमें शहर के लगभग 2 हजार आवासीय, व्यावसायिक और सरकारी परिसर शामिल होंगे. नियमों के दायरे में आने वाले मानदंड इस प्रकार है।      ​आवासीय भवन – कुल फ्लोर एरिया 20,000 वर्ग मीटर या अधिक होने पर.     ​होटल और रेस्टोरेंट – कुल फ्लोर एरिया 5,000 वर्ग मीटर या अधिक होने पर.     कचरा उत्पादन – प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान.

नगर निगम की नई पहल, बैंकें करेंगी कुओं का पुनर्जीवन और जल संवर्धन

इंदौर  इंदौर के पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में नगर निगम ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शहर के खस्ताहाल और बदहाल हो चुके कुओं को नया जीवन देने और उनके संपूर्ण कायाकल्प के लिए नगर निगम प्रशासन ने छह प्रमुख बैंकों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इस नई योजना के तहत प्रत्येक चिन्हित बैंक को शहर के 25 से 30 कुओं को संवारने का जिम्मा उठाना होगा। बैंकों को न केवल इन कुओं की साफ-सफाई और मरम्मत करानी होगी, बल्कि उनका गहरीकरण करने के साथ-साथ नगर निगम द्वारा तय किए गए अन्य सभी आवश्यक कार्य भी पूरे कराने होंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी नगर निगम ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर फंड के माध्यम से विभिन्न निजी कंपनियों और बैंकों के सहयोग से शहर के कई ऐतिहासिक तालाबों को संवारने का काम बड़े पैमाने पर किया था।  इस वृहद अभियान की पृष्ठभूमि में नगर निगम की विशेष टीमों द्वारा पिछले दिनों शहर के सभी वार्डों और क्षेत्रों में स्थित कुओं का एक विस्तृत सर्वे किया गया था। इस सर्वे के आधार पर निगम ने एक व्यापक सूची तैयार की थी। इसके बाद शुरुआती चरण में निगम ने अपने संसाधनों से कुछ प्रमुख कुओं को संवारने का काम शुरू भी किया था, लेकिन कई स्थानों पर कुओं के आसपास के हिस्सों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण होने के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो सका। वर्तमान में भी स्थिति यह है कि शहर के कई पारंपरिक कुएं मकानों और दुकानों के अवैध कब्जों की जद में आकर बेहद दयनीय स्थिति में पड़े हुए हैं। नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले दिनों विभिन्न राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के प्रबंधन के साथ सिलसिलेवार बैठकों का दौर चला था, जिसमें सर्वसम्मति से शहर के तालाबों और कुओं के जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी बैंकों को आवंटित करने का निर्णय लिया गया। कनाड़िया, बिजासन और मायाखेड़ी सहित कई तालाबों की भी बदलेगी सूरत इस जल संवर्धन अभियान में देश के कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय बैंक अपनी सहभागिता निभा रहे हैं। तय कार्ययोजना के अनुसार, कुछ चुनिंदा बैंकों को कनाड़िया क्षेत्र के दो प्रमुख तालाबों के साथ-साथ अरंडिया, मायाखेड़ी, हुकमाखेड़ी और प्रसिद्ध बिजासन तालाब को संवारने का विशेष दायित्व दिया गया है। बैंकों को इन तालाबों के जल भराव क्षेत्र को बढ़ाने के लिए उनका गहरीकरण करना होगा, साथ ही तालाबों के किनारों पर मजबूत पाल और आकर्षक पाथ-वे का निर्माण भी कराना होगा। इसके अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन जलाशयों के आसपास के खाली हिस्सों में बड़े पैमाने पर सघन पौधारोपण के कार्य भी बैंकों के माध्यम से संपन्न कराए जाएंगे। विभिन्न बैंकों और निजी कॉर्पोरेट फर्मों द्वारा अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के तहत सीएसआर फंड से इन सभी लोक कल्याणकारी कार्यों के खर्च का वहन किया जाता है। पिछले साल भी इंदौर नगर निगम ने इसी रणनीतिक मॉडल पर काम करते हुए बिलावली और लिम्बोदी सहित शहर के कई बड़े तालाबों के आसपास गहरीकरण से लेकर उनके संपूर्ण सौंदर्गीकरण के कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था, जिसके सकारात्मक परिणाम इस बार देखने को मिल रहे हैं। मध्य क्षेत्र के कुओं पर रहेगा विशेष ध्यान, रहवासियों को मिलेगा सीधा लाभ तालाबों के अलावा इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा शहर के कुओं को फिर से जीवित करना है। बैंकों को जो 25 से 30 कुओं को संवारने का काम आवंटित किया गया है, उनमें सबसे अधिक संख्या इंदौर के घने बसे मध्य क्षेत्र के कुओं की है। निगम के तकनीकी अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे के दौरान केवल उन्हीं कुओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया गया है, जहां पर जीर्णोद्धार और गहरीकरण के बाद भविष्य में पर्याप्त पानी मिलने की पूरी संभावना मौजूद है। इन कुओं के सक्रिय होने से आसपास के रहवासियों को दैनिक उपयोग के लिए आसानी से पानी मिल सकेगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा और गर्मियों के दिनों में टैंकरों पर निर्भरता भी काफी कम हो जाएगी। आने वाले कुछ ही दिनों में संबंधित बैंकें निविदाएं आमंत्रित कर या अपने स्तर पर एजेंसियों के माध्यम से इन जमीनी कार्यों की विधिवत शुरुआत कराने जा रही हैं। इस पूरे अभियान के दौरान कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नगर निगम के कुशल अधिकारी और इंजीनियर लगातार साइट्स की मॉनिटरिंग और कड़ा निरीक्षण करेंगे। निगम के अधिकारी समय-समय पर बैंकों की कार्यवाहक टीमों को कार्यों की तकनीकी बारीकियों और आवश्यक सुधारों के बारे में दिशा-निर्देश प्रदान करते रहेंगे ताकि जल संरक्षण का यह व्यापक मिशन पूरी तरह सफल हो सके। 

पंजाब में चुनावी माहौल, नगर निगम व काउंसिल चुनाव महीने के अंत तक हो सकते हैं

चंडीगढ़  पंजाब में नगर निगम और नगर काउंसिल चुनाव को लेकर आज आधिकारिक घोषणा की जाएगी। राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी ने इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जो दोपहर 3:30 बजे चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में आयोजित होगी। माना जा रहा है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव कार्यक्रम, नामांकन प्रक्रिया और मतदान की संभावित तारीखों की जानकारी साझा की जाएगी। राज्य में लंबे समय से स्थानीय निकाय चुनावों का इंतजार किया जा रहा था और अब प्रशासनिक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। राजनीतिक दलों ने भी चुनावी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। पंजाब में इस बार नौ नगर निगमों और 102 नगर काउंसिलों में चुनाव कराए जाने हैं। राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से वार्डबंदी समेत जरूरी प्रक्रियाएं पहले ही पूरी की जा चुकी हैं। जिन शहरों में चुनाव होने हैं वहां राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, पटियाला और मोहाली जैसे प्रमुख शहरी इलाकों में राजनीतिक दल लगातार बैठकें कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर संभावित उम्मीदवारों ने भी जनता के बीच सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टियों ने शुरू की चुनावी तैयारी नगर निकाय चुनाव को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने ऑब्जर्वर तैनात कर दिए हैं। कई इलाकों में संभावित उम्मीदवारों ने पोस्टर और बैनर लगाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन पर मंथन कर रहे हैं। राजनीतिक दलों का फोकस खासतौर पर शहरी वोट बैंक पर बना हुआ है क्योंकि इन चुनावों का असर आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर भी पड़ सकता है। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अलग-अलग जिलों में अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है और संवेदनशील इलाकों की पहचान की जा रही है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। चंडीगढ़ और मोहाली सहित कई शहरों में चुनावी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें भी बनाई गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार सभी तैयारियां पूरी की जाएंगी। स्थानीय निकाय मंत्री की गिरफ्तारी के बीच चुनाव यह चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री को हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद विभाग का अतिरिक्त प्रभार अब तक किसी अन्य मंत्री या अधिकारी को नहीं सौंपा गया है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि सरकार आगे इस विभाग की जिम्मेदारी किसे देगी। विपक्षी दल इस मुद्दे को चुनाव प्रचार में उठाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि सरकार प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न होने का दावा कर रही है। 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे चुनाव राजनीतिक जानकार इन नगर निकाय चुनावों को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संकेत मान रहे हैं। चूंकि चुनाव शहरी क्षेत्रों में हो रहे हैं, इसलिए इन्हें सरकार के प्रदर्शन की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान पिछले दो महीनों में उन अधिकांश शहरों का दौरा कर चुके हैं जहां चुनाव प्रस्तावित हैं। आम आदमी पार्टी इन चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, जबकि विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का अवसर मान रहा है। पिछले चुनावों में सत्ताधारी दल को फायदा मिलता रहा है, लेकिन इस बार मुकाबला कड़ा होने की संभावना जताई जा रही है।

तीन साल बाद रांची में जल शुल्क विवादों पर सुनवाई की प्रक्रिया फिर शुरू

रांची  तीन साल के लंबे इंतजार के बाद रांची नगर निगम अब सप्लाई पानी बिल से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई करने जा रहा है। नगर निगम की जलापूर्ति शाखा ने वार्ड संख्या 1 से 53 तक के उन उपभोक्ताओं के लिए आम सूचना जारी की है, जिनके पास निगम से स्वीकृत जल संयोजन है। निगम ने कहा है कि जल शुल्क से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उपभोक्ता अगले सात दिनों के भीतर आवेदन जमा कर सकते हैं। जारी सूचना के अनुसार, उपभोक्ताओं को जलापूर्ति शाखा में जल शुल्क विपत्र, जल संयोजन स्वीकृति पत्र एवं अन्य संबंधित दस्तावेजों के साथ आवेदन देना होगा। निगम प्रशासन का कहना है कि प्राप्त आवेदनों पर यथाशीघ्र कार्रवाई करते हुए समस्याओं का समाधान किया जाएगा। वेबर्स कमेटी नहीं बनने से तीन साल तक अटकी रही सुनवाई दरअसल, रांची नगर निगम चुनाव नहीं होने के कारण पिछले तीन वर्षों से वेबर्स कमेटी का गठन नहीं हो पा रहा था। इस कमेटी में नगर आयुक्त, मेयर, पार्षद और जलापूर्ति शाखा के इंजीनियर सदस्य होते हैं। मेयर और पार्षद नहीं रहने से कमेटी के गठन के लिए आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो पा रहा था। इसी वजह से पानी बिल, नए जल कनेक्शन और अन्य शिकायतों से जुड़े सैकड़ों मामलों की सुनवाई लंबित पड़ी रही। लोगों द्वारा आवेदन देने के बावजूद मामलों का निपटारा नहीं हो सका। बिना कनेक्शन के भेजा जा रहा था पानी बिल नगर निगम में सबसे अधिक शिकायतें उन उपभोक्ताओं की हैं, जिनका कहना है कि उनके घरों में पानी का कनेक्शन ही नहीं है, इसके बावजूद हर महीने पानी का बिल भेजा जा रहा है। वहीं कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उनके यहां वर्षों पुराना कनेक्शन तो है, लेकिन आज तक सप्लाई पानी नहीं पहुंचा। इसके बावजूद नियमित रूप से जलशुल्क वसूला जा रहा है। अब घर-घर जाकर होगी जांच जलापूर्ति शाखा में आने वाली शिकायतों की जांच के लिए नगर निगम की इंजीनियरों की टीम संबंधित उपभोक्ताओं के घर-घर जाएगी। जांच के दौरान संबंधित वार्ड के पार्षद भी मौजूद रहेंगे। शिकायतों की जांच रिपोर्ट तैयार कर वेबर्स कमेटी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद कमेटी मामले की सुनवाई कर अंतिम निर्णय लेगी।  

CM ने 8-मंजिला भोपाल निगम भवन का उद्घाटन किया, जनता सेवाओं और सोलर प्लांट का होगा लाभ

भोपाल  तुलसी नगर (सेकंड स्टॉप) पर भोपाल नगर निगम का नया मुख्यालय तैयार है। यह अटल भवन के नाम से जाना जाएगा। यह 43 करोड़ से बना है। यहां एक ही छत के नीचे पूरी नगर सरकार होगी। अब तक नागरिकों को अलग-अलग कामों के लिए शहर के कई हिस्सों में जाना पड़ता था।यह प्रदेश की पहली नगरीय निकाय बिल्डिंग है, जो जियोथर्मल तकनीक से लैस है। पार्किंग पर लगे सोलर पैनलों से 300 किलोवाट बिजली बनेगी। नवनिर्मित मुख्यालय का नाम ‘अटल भवन’ रखा गया है। इसके लोकार्पण के साथ नीमच जिले में भोपाल निगम द्वारा स्थापित 10.5 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का भी लोकार्पण किया गया। एक जगह पर आ जाएंगे सभी विभाग बिल्डिंग की शुरुआत के बाद निगम के सभी विभाग एक ही बिल्डिंग में आ जाएंगे। हालांकि, दो महीने पहले से ही कई ऑफिस शिफ्ट किए जा चुके हैं। अब सेंट्रल वर्कशॉप, हाउसिंग फॉर ऑल, सिविल, जनसंपर्क, विद्युत, बीसीएलएल, जल कार्य, सीवेज, स्वच्छ भारत मिशन, जन्म-मृत्यु, विवाह पंजीयन, झील प्रकोष्ठ, एनयूएलएम, राजस्व, गोवर्धन परियोजना, अतिक्रमण, बिल्डिंग परमिशन शाखाएं एक ही जगह पर लगेगी। ग्राउंड फ्लोर पर एंटर होते ही जनसुविधा केंद्र स्थापित किया गया है। जहां एक ही स्थान पर सभी विभागों से संबंधित जानकारी आवेदक को मिलेगी। बिल्डिंग परमिशन समेत कई जनसुविधा भी यहां मिलेंगी। अभी कई जगह पर संचालित ऑफिस अभी भोपाल के कई स्थानों पर निगम के ऑफिस में शाखाएं संचालित की जा रही हैं। आईएसबीटी और माता मंदिर में महापौर, अध्यक्ष और कमिश्नर के कक्ष के साथ कई शाखाएं हैं। शाहपुरा में बिल्डिंग परमिशन शाखा है, जबकि फतेहगढ़ में स्वास्थ्य शाखा लग रही है। ग्रीन कॉन्सेप्ट पर बनाई गई है बिल्डिंग ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर नगर निगम का नया मुख्यालय भवन बना है। बिल्डिंग के ठीक सामने परिसर में सोलर पैनल लगाए गए हैं। हालांकि, इसकी दिशा उत्तर-दक्षिणी होने की वजह से बिजली उत्पादन में असर पड़ सकता है। एक बिल्डिंग, 3 कमिश्नर बिल्डिंग की पूरी डिजाइन निगम के तत्कालीन कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी ने बनवाई थी। उनकी मौजूदगी में बिल्डिंग का आधे से ज्यादा काम हुआ, जबकि बाकी काम हरेंद्र नारायण के समय हुआ। अब संस्कृति जैन के समय बिल्डिंग शुरू की जा रही है। किस फ्लोर पर क्या?     ग्राउंड फ्लोरः जनसंपर्क, टैक्स काउंटर, विवाह पंजीकरण और बच्चों के लिए विशेष गेम जोन।     पहली से चौथी मंजिलः महापौर, एमआईसी सदस्य, भवन अनुज्ञा, जलकार्य, सीवेज और राजस्व विभाग।     पांचवीं से सातवीं मंजिलः योजना प्रकोष्ठ, आईटी, स्मार्ट सिटी, स्वास्थ्य और उद्यान विभाग।     आठवीं मंजिलः कमिश्नर स्टाफ और स्मार्ट सिटी का मुख्य कार्यालय 10 जगहों पर बिखरे दफ्तर अब एक छत के नीचे अब तक नगर निगम के कार्यालय माता मंदिर, पीएचई दफ्तर, आइएसबीटी, स्मार्ट सिटी कार्यालय, न्यू मार्केट, श्यामला हिल्स, शाहपुरा और फतेहगढ़ सहित शहर के 10 अलग-अलग स्थानों पर संचालित हो रहे थे। नए मुख्यालय के शुरू होने से निगम के अधिकांश विभाग एक ही परिसर में कार्य करेंगे, जिससे आम नागरिकों को सुविधाएं मिलेंगी। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा मुख्यालय भवन के भू-तल पर विवाह पंजीयन, भवन अनुज्ञा, स्मार्ट सिटी और कर संबंधी काउंटर बनाए गए हैं। पहली मंजिल पर महापौर, निगम परिषद अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और परिषद कार्यालय के साथ कॉन्फ्रेंस हॉल रहेगा। नगर निगम आयुक्त का कार्यालय भवन की आठवीं मंजिल पर बनाया गया है। बड़े नेताओं की मौजूदगी में होगा लोकार्पण लोकार्पण कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री Kailash Vijayvargiya, मंत्री Vishvas Sarang, प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप, राज्यमंत्री कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा और महापौर मालती राय सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। नीमच के सोलर प्लांट का भी शुभारंभ नगर निगम ने नीमच जिले की धमपुरा तहसील में 10.5 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया है। करीब 45 करोड़ रुपये की इस परियोजना में निगम ने 14 करोड़ रुपये निवेश किए हैं, जबकि शेष राशि निजी कंपनी द्वारा लगाई गई है। गाजियाबाद की टेक्नोसिस कंपनी के साथ 25 वर्षों का अनुबंध किया गया है। इस परियोजना से ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

15 जुलाई तक टैक्स भुगतान पर छूट, ऑनलाइन पेमेंट करने पर मिलेगा 12% तक लाभ

वाराणसी उत्तर प्रदेश के एक नगर निगम में हाउस, वाटर और सीवर टैक्स को लेकर बहुत बड़ा फैसला लिया है। अब यहां पर दिव्यांग और दृष्टिबाधित यानी जिन्हें दिखाई नहीं देता है, ऐसे लोगों से किसी प्रकार का टैक्स नहीं लेना का फैसला किया गया है। नगर निगम कार्यकारिणी ने अबकी पहली बार दृष्टिबाधित और 80 प्रतिशत तक दिव्यांग भवनस्वामियों को सभी कर से छूट दे दी है। इसमें गृह, जल और सीवरकर शामिल है। वहीं सामान्य लोगों को 15 मई से 15 जुलाई तक गृहकर और सीवरकर जमा करने पर 10 फीसदी की छूट दी जाएगी। यदि कर ऑनलाइन जमा करते हैं तो यह छूट 12 प्रतिशत मिलेगी। वहीं लाइसेंस शुल्क में व्यापारियों को 10 प्रतिशत की राहत दी गई है। यह छूट वाराणसी के नगर निगम ने दी है। महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में सोमवार को निगम मुख्यालय में कार्यकारिणी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। करीब तीन घंटे चली बैठक में दृष्टिहीन और 80% दिव्यांग भवन स्वामियों के लिए कर में पूरी तरह छूट का निर्णय हुआ। लेकिन संबंधित भवनस्वामी को दिव्यांगता प्रमाण पत्र निगम कार्यालय में प्रस्तुत करना होगा। जिन भवन स्वामियों ने इस वित्तीय वर्ष का गृहकर, सीवरकर जमा कर दिया है, उनका अगले वित्तीय वर्ष में समायोजन होगा। उपसभापति नरसिंह दास ने सभी पूर्व महापौर और नगर प्रमुख के आवास तक जाने वाले मार्गों एवं गलियों की मरम्मत का मुद्दा उठाया। पार्षद प्रवीण राय ने पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग की बदहाली का मुद्दा उठाया। कार्यकारिणी ने नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को परिक्रमा पथ पर सड़कों की मरम्मत, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, शौचालय सुविधा का निर्देश दिया। मदन मोहन तिवारी ने वर्ष 2023 से 2026 तक हुए कार्यों का ब्योरा एक सप्ताह में प्रस्तुत करने को कहा। प्रमोद राय ने ठेकेदारों को हो रहे भुगतान के संबंध में सवाल उठाए। सुशील गुप्ता ने कहा कि सड़क की खोदाई के लिए एनओसी में कड़ी शर्तें रखी जाएं। अशोक मौर्या ने कांशीराम आवास योजना की बदहाली पर सवाल उठाए। बैठक में अमरदेव यादव, हनुमान प्रसाद, माधुरी सिंह, सुशीला देवी रहीं। रेलवे की जमीन लेकर सुविधाएं दी जाएं शहर में बुनियादी सुविधाओं के लिए नगर निगम ने रक्षा संपदा विभाग और रेलवे की कुछ जमीनों को लेने के संबंध में प्रस्ताव दिया है। रक्षा संपदा विभाग से कैंटोंमेंट स्थित गुडशेड बाजार में 1.2286 हेक्टेयर, फुलवरिया फ्लाईओवर के नीचे 3.8121 हेक्टेयर, डोमरी और सूजाबाद में 19.6690 हेक्टेयर, 160 एकड़ क्षेत्र में 34.259 हेक्टेयर शामिल है। इसी तरह रेलवे से घौसाबाद में 2830 वर्ग मीटर, लहरतारा से मंडुवाडीह मार्ग पर 2029.30 वर्ग मीटर, गुडशेड बाजार में लगभग 4100 वर्ग मीटर जमीन शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार नगर निगम रक्षा संपदा और रेलवे को इस कीमत की अपनी जमीन देगा।

लुधियाना नगर निगम कर्मचारियों के लिए नए ड्यूटी आदेश, पढ़ें ताजातरीन निर्देश

लुधियाना  नगर निगम मुलाजिमों को अब डबल ड्यूटी नहीं करनी होगी जिसके तहत कमिश्नर ने नए इंस्पैक्टरों को जनगणना की जिम्मेदारी सौंप दी है। यहां बताना उचित होगा कि केंद्र सरकार के निर्देश पर वोटर लिस्ट अपडेट करने के अलावा जनगणना सर्वे का कार्य एक साथ शुरू हो गया है। इस काम के लिए नगर निगम के अधिकारियों द्वारा कई मुलाजिमों को डबल ड्यूटी दे दी गई है जिससे नगर निगम के रूटीन काम न होने कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा मुलाजिमों की डबल ड्यूटी लगाने के फैसले से चुनाव आयोग के ऑर्डर का उल्लंघन हो रहा है, क्योंकि स्टेट इलैक्शन कमिश्नर द्वारा 7 अप्रैल को पत्र जारी किया गया है कि वोटर लिस्ट अपडेट करने के काम में लगाए गए मुलाजिमों को उसके अलावा जनगणना सर्वे या किसी अन्य कार्य पर न लगाया जाए। इस संबंध में पंजाब केसरी द्वारा खुलासा करने के बाद नगर निगम मुलाजिमों को डबल ड्यूटी नहीं करनी होगी जिसके लिए कमिश्नर ने सरकार द्वारा नए लगाए गए इंस्पैक्टरों को चारों जोनों में बांटकर जनगणना की जिम्मेदारी सौंप दी है जिससे नगर निगम में खाली पड़ी रहने वाली कुर्सियों पर मुलाजिमों के वापस लौटने की उम्मीद बढ़ गई है। वोटर लिस्ट अपडेट करने के लिए 23 साल पुराने रिकार्ड को बनाया जाएगा आधार चुनाव आयोग द्वारा वोटिंग के दौरान फर्जीवाड़ा रोकने के लिए वोटर लिस्ट अपडेट करने की जो प्रक्रिया शुरू की गई है, उसके लिए 23 साल पुराने रिकार्ड को बनाया आधार जाएगा। मिली जानकारी के मुताबिक बी.एल.ओ. डोर-टू-डोर जाकर 2003 की वोटर लिस्ट के हिसाब से क्रॉस चैकिंग कर रहे हैं। इस दौरान जिन लोगों की मौत या कहीं दूसरी जगह शिफ्टिंग हो गई है, उनके बारे में अलग से रिपोर्ट की जाती है। इसके अलावा शहर में से ही किसी और जगह से शिफ्ट होकर आए लोगों का पुराना वोटर कार्ड मांगा जा रहा है जिसके आधार पर ही आने वाले समय के दौरान वोटर लिस्ट अपडेट करने के अलावा नए वोट बनाने का फैसला किया जाएगा। टार्गेट पूरा न करने वाले स्टाफ की रुक सकती है सैलरी वोटर लिस्ट अपडेट करने के मामले में शहरी एरिया के लिए 65 फीसदी तक का टारगेट दिया गया है। यह टार्गेट पूरा न करने वाले स्टाफ की सैलरी रुक सकती है। जहां तक लोगों द्वारा पुराने वोटर कार्ड न दिखाने या अन्य जानकारी देने में सहयोग न करने का हवाला दिया जा रहा है, उसके मद्देनजर समस्याओं का समाधान करने के लिए मास्टर ट्रेनर्ज की ड्यूटी अलग से लगाई गई है।

Panchkula में भाजपा का दांव: वार्डवार उम्मीदवार घोषित, Gyan Chand Gupta की मजबूत पकड़

पंचकूला. भाजपा ने नगर निकाय चुनाव 2026 के तहत पंचकूला नगर निगम के लिए पार्षद उम्मीदवारों की वार्डवार आधिकारिक सूची जारी कर दी है। अधिकांश उम्मीदवारों को पूर्व स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता का समर्थक माना जा रहा है। खास तौर पर उनके पौते पार्थ गुप्ता को वार्ड-6 से टिकट दिए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। यह सूची केंद्रीय नेतृत्व से विचार-विमर्श के बाद जारी की गई है। वार्ड नंबर 1 से 20 तक उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। पार्टी ने इस बार महिला उम्मीदवारों को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है। पूर्व पार्षद रितु गोयल, ओमवती पूनिया, सोनिया सूद और सुशील गर्ग नरवाना को टिकट दिया गया है। सूची जारी होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। सभी उम्मीदवारों ने अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। पार्टी अब बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करते हुए चुनाव जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रही है। वार्डवार उम्मीदवारों की सूची वार्ड नंबर     उम्मीदवार का नाम 1     परमजीत कौर 2     पमरजीत कौर 3     सुरेश वर्मा 4     भारत हितैषी 5     जय कौशिक 6     पार्थ गुप्ता 7     ज्योति प्रसाद 8     राजकुमार जैन 9     हरेंद्र मलिक 10     शेखर पांडेय 11     अनुराधा पुरी 12     राकेश जगोता 13     दीपक गर्ग 14     राकेश गोयल 15     प्रियंका 16     निर्मल देवी 17     सुदेश बिडला 18     पूजा देवी 19     मनीषा रानी 20     गौतम राणा

इंदौर में नगर निगम और पुलिस करेंगी बेसमेंट पार्किंग खाली, चार जोन में ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन होगा

 इंदौर  शहर की प्रमुख इमारतों की बेसमेंट में पार्किंग के उपयोग की जगह पर व्यावसायिक उपयोग पर अब रोक लगाई जाएगी। नगर निगम बेसमेंट से दुकानों व गोदाम को खाली करवाएगा। बेसमेंट में पार्किंग के अलावा अन्य उपयोग पाए जाने पर भवन को सील किया जाएगा। पुलिस के साथ मिलकर नगर निगम की टीम आगामी दिनों में कार्रवाई शुरू करेगी। यह निर्णय सोमवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हुआ। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि चार जोन में बांटे गए ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। वर्तमान में शहर में अभी तक तीन हजार ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन हुए हैं और एक आकलन के मुताबिक फिलहाल शहर में 11 हजार ई-रिक्शा चल रहे हैं। ऐसे में जो ई-रिक्शा चालक रजिस्ट्रेशन नहीं करवाएंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी। ई-रिक्शाओं को कलर कोड से रंगा जाएगा आठ एसीपी जोन के माध्यम से चार सेक्टर में बांटे गए ई-रिक्शाओं को उस क्षेत्र के विशेष कलर कोड से रंगा जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पुलिस कार्रवाई भी करेगी। इसके अलावा इंदौर में निर्धारित 16 ब्लैक स्पाट पर आईडीए, एनएचएआई, एमपीआईडीसी और नगर निगम सहित अन्य एजेंसियों सुधार के लिए जल्द से जल्द काम करेगी। शहर के कई रहवासी व व्यावसायिक इलाकों से सड़कों में स्पीड ब्रेकर के लिए मांग के प्रस्ताव समिति के पास पहुंचे हैं। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस उस क्षेत्र का निरीक्षण कर वहां के ट्रैफिक स्थिति का आकलन कर स्पीड ब्रेकर निर्माण के लिए अनुमति देगी। बैठक में नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, एसपी ग्रामीण यांगचेन भूटिया, डीसीपी ट्रैफिक राजेश त्रिपाठी, अपर आयुक्त आकाश सिंह, स्मार्ट सिटी के सीईओ अर्थ जैन, अपर कलेक्टर रोशन राय सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। बसों के रूट में परिवर्तन किया गया बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और जनहानि को रोकना है। इसके लिए इंजीनियरिंग सुधारों के साथ-साथ सतत मानिटरिंग की जा रही है। संबंधित विभागों को दिए गए निर्देशों के पालन की नियमित समीक्षा भी की जा रही है तथा आवश्यकतानुसार कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को दिए गए निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ है, जिससे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया राजवाड़ा क्षेत्र में सिटी बसों के खड़े होने से यातायात बाधित हो रहा था। इसलिए बसों के रूट में परिवर्तन किया गया है, जिससे ट्रैफिक में सुधार देखने को मिला है। हालांकि यात्रियों को हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आठ मार्गों पर किया जा रहा सुधार यातायात व्यवस्था सुधार के लिए शहर के आठ प्रमुख मार्गों को चिन्हित किया गया है, जहां अतिक्रमण और अव्यवस्थित संरचना के कारण जाम की स्थिति बनती थी। इन मार्गों पर अतिक्रमण हटाने, लेफ्ट टर्न व्यवस्थित करने तथा विद्युत खंभों एवं डीपी शिफ्टिंग की कार्रवाई जारी है, जिससे यातायात सुगम बनाया जा सके। ट्रैफिक सुधार के लिए दिए गए ये निर्देश     सड़क किनारे खड़े वाहनों पर चालानी कार्रवाई होगी, वाहनों पर लाक लगाया जाएगा।     एयरपोर्ट के सामने बन रहे मेट्रो स्टेशन व बिजासन माता मंदिर के बीच रिक्त भूमि पर एयरपोर्ट टर्मिनल के सामने से सर्विस रोड बनाई जाएगी।     बायपास एवं अन्य प्रमुख मार्गों जहां पर दुर्घटनाएं संभावित रहती हैं उन क्षेत्रों के चिह्नित रहवासियों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे आवश्यकता पड़ने पर वे पीड़ितों को तुरंत सीपीआर दे सकेंगे।     निर्माणाधीन पुल-पुलियाओं और सड़कों के वैकल्पिक मार्गों की मरम्मत जल्द की जाए।