samacharsecretary.com

तीन साल बाद रांची में जल शुल्क विवादों पर सुनवाई की प्रक्रिया फिर शुरू

रांची  तीन साल के लंबे इंतजार के बाद रांची नगर निगम अब सप्लाई पानी बिल से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई करने जा रहा है। नगर निगम की जलापूर्ति शाखा ने वार्ड संख्या 1 से 53 तक के उन उपभोक्ताओं के लिए आम सूचना जारी की है, जिनके पास निगम से स्वीकृत जल संयोजन है। निगम ने कहा है कि जल शुल्क से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उपभोक्ता अगले सात दिनों के भीतर आवेदन जमा कर सकते हैं। जारी सूचना के अनुसार, उपभोक्ताओं को जलापूर्ति शाखा में जल शुल्क विपत्र, जल संयोजन स्वीकृति पत्र एवं अन्य संबंधित दस्तावेजों के साथ आवेदन देना होगा। निगम प्रशासन का कहना है कि प्राप्त आवेदनों पर यथाशीघ्र कार्रवाई करते हुए समस्याओं का समाधान किया जाएगा। वेबर्स कमेटी नहीं बनने से तीन साल तक अटकी रही सुनवाई दरअसल, रांची नगर निगम चुनाव नहीं होने के कारण पिछले तीन वर्षों से वेबर्स कमेटी का गठन नहीं हो पा रहा था। इस कमेटी में नगर आयुक्त, मेयर, पार्षद और जलापूर्ति शाखा के इंजीनियर सदस्य होते हैं। मेयर और पार्षद नहीं रहने से कमेटी के गठन के लिए आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो पा रहा था। इसी वजह से पानी बिल, नए जल कनेक्शन और अन्य शिकायतों से जुड़े सैकड़ों मामलों की सुनवाई लंबित पड़ी रही। लोगों द्वारा आवेदन देने के बावजूद मामलों का निपटारा नहीं हो सका। बिना कनेक्शन के भेजा जा रहा था पानी बिल नगर निगम में सबसे अधिक शिकायतें उन उपभोक्ताओं की हैं, जिनका कहना है कि उनके घरों में पानी का कनेक्शन ही नहीं है, इसके बावजूद हर महीने पानी का बिल भेजा जा रहा है। वहीं कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उनके यहां वर्षों पुराना कनेक्शन तो है, लेकिन आज तक सप्लाई पानी नहीं पहुंचा। इसके बावजूद नियमित रूप से जलशुल्क वसूला जा रहा है। अब घर-घर जाकर होगी जांच जलापूर्ति शाखा में आने वाली शिकायतों की जांच के लिए नगर निगम की इंजीनियरों की टीम संबंधित उपभोक्ताओं के घर-घर जाएगी। जांच के दौरान संबंधित वार्ड के पार्षद भी मौजूद रहेंगे। शिकायतों की जांच रिपोर्ट तैयार कर वेबर्स कमेटी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद कमेटी मामले की सुनवाई कर अंतिम निर्णय लेगी।  

CM ने 8-मंजिला भोपाल निगम भवन का उद्घाटन किया, जनता सेवाओं और सोलर प्लांट का होगा लाभ

भोपाल  तुलसी नगर (सेकंड स्टॉप) पर भोपाल नगर निगम का नया मुख्यालय तैयार है। यह अटल भवन के नाम से जाना जाएगा। यह 43 करोड़ से बना है। यहां एक ही छत के नीचे पूरी नगर सरकार होगी। अब तक नागरिकों को अलग-अलग कामों के लिए शहर के कई हिस्सों में जाना पड़ता था।यह प्रदेश की पहली नगरीय निकाय बिल्डिंग है, जो जियोथर्मल तकनीक से लैस है। पार्किंग पर लगे सोलर पैनलों से 300 किलोवाट बिजली बनेगी। नवनिर्मित मुख्यालय का नाम ‘अटल भवन’ रखा गया है। इसके लोकार्पण के साथ नीमच जिले में भोपाल निगम द्वारा स्थापित 10.5 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का भी लोकार्पण किया गया। एक जगह पर आ जाएंगे सभी विभाग बिल्डिंग की शुरुआत के बाद निगम के सभी विभाग एक ही बिल्डिंग में आ जाएंगे। हालांकि, दो महीने पहले से ही कई ऑफिस शिफ्ट किए जा चुके हैं। अब सेंट्रल वर्कशॉप, हाउसिंग फॉर ऑल, सिविल, जनसंपर्क, विद्युत, बीसीएलएल, जल कार्य, सीवेज, स्वच्छ भारत मिशन, जन्म-मृत्यु, विवाह पंजीयन, झील प्रकोष्ठ, एनयूएलएम, राजस्व, गोवर्धन परियोजना, अतिक्रमण, बिल्डिंग परमिशन शाखाएं एक ही जगह पर लगेगी। ग्राउंड फ्लोर पर एंटर होते ही जनसुविधा केंद्र स्थापित किया गया है। जहां एक ही स्थान पर सभी विभागों से संबंधित जानकारी आवेदक को मिलेगी। बिल्डिंग परमिशन समेत कई जनसुविधा भी यहां मिलेंगी। अभी कई जगह पर संचालित ऑफिस अभी भोपाल के कई स्थानों पर निगम के ऑफिस में शाखाएं संचालित की जा रही हैं। आईएसबीटी और माता मंदिर में महापौर, अध्यक्ष और कमिश्नर के कक्ष के साथ कई शाखाएं हैं। शाहपुरा में बिल्डिंग परमिशन शाखा है, जबकि फतेहगढ़ में स्वास्थ्य शाखा लग रही है। ग्रीन कॉन्सेप्ट पर बनाई गई है बिल्डिंग ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर नगर निगम का नया मुख्यालय भवन बना है। बिल्डिंग के ठीक सामने परिसर में सोलर पैनल लगाए गए हैं। हालांकि, इसकी दिशा उत्तर-दक्षिणी होने की वजह से बिजली उत्पादन में असर पड़ सकता है। एक बिल्डिंग, 3 कमिश्नर बिल्डिंग की पूरी डिजाइन निगम के तत्कालीन कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी ने बनवाई थी। उनकी मौजूदगी में बिल्डिंग का आधे से ज्यादा काम हुआ, जबकि बाकी काम हरेंद्र नारायण के समय हुआ। अब संस्कृति जैन के समय बिल्डिंग शुरू की जा रही है। किस फ्लोर पर क्या?     ग्राउंड फ्लोरः जनसंपर्क, टैक्स काउंटर, विवाह पंजीकरण और बच्चों के लिए विशेष गेम जोन।     पहली से चौथी मंजिलः महापौर, एमआईसी सदस्य, भवन अनुज्ञा, जलकार्य, सीवेज और राजस्व विभाग।     पांचवीं से सातवीं मंजिलः योजना प्रकोष्ठ, आईटी, स्मार्ट सिटी, स्वास्थ्य और उद्यान विभाग।     आठवीं मंजिलः कमिश्नर स्टाफ और स्मार्ट सिटी का मुख्य कार्यालय 10 जगहों पर बिखरे दफ्तर अब एक छत के नीचे अब तक नगर निगम के कार्यालय माता मंदिर, पीएचई दफ्तर, आइएसबीटी, स्मार्ट सिटी कार्यालय, न्यू मार्केट, श्यामला हिल्स, शाहपुरा और फतेहगढ़ सहित शहर के 10 अलग-अलग स्थानों पर संचालित हो रहे थे। नए मुख्यालय के शुरू होने से निगम के अधिकांश विभाग एक ही परिसर में कार्य करेंगे, जिससे आम नागरिकों को सुविधाएं मिलेंगी। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा मुख्यालय भवन के भू-तल पर विवाह पंजीयन, भवन अनुज्ञा, स्मार्ट सिटी और कर संबंधी काउंटर बनाए गए हैं। पहली मंजिल पर महापौर, निगम परिषद अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और परिषद कार्यालय के साथ कॉन्फ्रेंस हॉल रहेगा। नगर निगम आयुक्त का कार्यालय भवन की आठवीं मंजिल पर बनाया गया है। बड़े नेताओं की मौजूदगी में होगा लोकार्पण लोकार्पण कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री Kailash Vijayvargiya, मंत्री Vishvas Sarang, प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप, राज्यमंत्री कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा और महापौर मालती राय सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। नीमच के सोलर प्लांट का भी शुभारंभ नगर निगम ने नीमच जिले की धमपुरा तहसील में 10.5 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया है। करीब 45 करोड़ रुपये की इस परियोजना में निगम ने 14 करोड़ रुपये निवेश किए हैं, जबकि शेष राशि निजी कंपनी द्वारा लगाई गई है। गाजियाबाद की टेक्नोसिस कंपनी के साथ 25 वर्षों का अनुबंध किया गया है। इस परियोजना से ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

15 जुलाई तक टैक्स भुगतान पर छूट, ऑनलाइन पेमेंट करने पर मिलेगा 12% तक लाभ

वाराणसी उत्तर प्रदेश के एक नगर निगम में हाउस, वाटर और सीवर टैक्स को लेकर बहुत बड़ा फैसला लिया है। अब यहां पर दिव्यांग और दृष्टिबाधित यानी जिन्हें दिखाई नहीं देता है, ऐसे लोगों से किसी प्रकार का टैक्स नहीं लेना का फैसला किया गया है। नगर निगम कार्यकारिणी ने अबकी पहली बार दृष्टिबाधित और 80 प्रतिशत तक दिव्यांग भवनस्वामियों को सभी कर से छूट दे दी है। इसमें गृह, जल और सीवरकर शामिल है। वहीं सामान्य लोगों को 15 मई से 15 जुलाई तक गृहकर और सीवरकर जमा करने पर 10 फीसदी की छूट दी जाएगी। यदि कर ऑनलाइन जमा करते हैं तो यह छूट 12 प्रतिशत मिलेगी। वहीं लाइसेंस शुल्क में व्यापारियों को 10 प्रतिशत की राहत दी गई है। यह छूट वाराणसी के नगर निगम ने दी है। महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में सोमवार को निगम मुख्यालय में कार्यकारिणी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। करीब तीन घंटे चली बैठक में दृष्टिहीन और 80% दिव्यांग भवन स्वामियों के लिए कर में पूरी तरह छूट का निर्णय हुआ। लेकिन संबंधित भवनस्वामी को दिव्यांगता प्रमाण पत्र निगम कार्यालय में प्रस्तुत करना होगा। जिन भवन स्वामियों ने इस वित्तीय वर्ष का गृहकर, सीवरकर जमा कर दिया है, उनका अगले वित्तीय वर्ष में समायोजन होगा। उपसभापति नरसिंह दास ने सभी पूर्व महापौर और नगर प्रमुख के आवास तक जाने वाले मार्गों एवं गलियों की मरम्मत का मुद्दा उठाया। पार्षद प्रवीण राय ने पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग की बदहाली का मुद्दा उठाया। कार्यकारिणी ने नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को परिक्रमा पथ पर सड़कों की मरम्मत, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, शौचालय सुविधा का निर्देश दिया। मदन मोहन तिवारी ने वर्ष 2023 से 2026 तक हुए कार्यों का ब्योरा एक सप्ताह में प्रस्तुत करने को कहा। प्रमोद राय ने ठेकेदारों को हो रहे भुगतान के संबंध में सवाल उठाए। सुशील गुप्ता ने कहा कि सड़क की खोदाई के लिए एनओसी में कड़ी शर्तें रखी जाएं। अशोक मौर्या ने कांशीराम आवास योजना की बदहाली पर सवाल उठाए। बैठक में अमरदेव यादव, हनुमान प्रसाद, माधुरी सिंह, सुशीला देवी रहीं। रेलवे की जमीन लेकर सुविधाएं दी जाएं शहर में बुनियादी सुविधाओं के लिए नगर निगम ने रक्षा संपदा विभाग और रेलवे की कुछ जमीनों को लेने के संबंध में प्रस्ताव दिया है। रक्षा संपदा विभाग से कैंटोंमेंट स्थित गुडशेड बाजार में 1.2286 हेक्टेयर, फुलवरिया फ्लाईओवर के नीचे 3.8121 हेक्टेयर, डोमरी और सूजाबाद में 19.6690 हेक्टेयर, 160 एकड़ क्षेत्र में 34.259 हेक्टेयर शामिल है। इसी तरह रेलवे से घौसाबाद में 2830 वर्ग मीटर, लहरतारा से मंडुवाडीह मार्ग पर 2029.30 वर्ग मीटर, गुडशेड बाजार में लगभग 4100 वर्ग मीटर जमीन शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार नगर निगम रक्षा संपदा और रेलवे को इस कीमत की अपनी जमीन देगा।

लुधियाना नगर निगम कर्मचारियों के लिए नए ड्यूटी आदेश, पढ़ें ताजातरीन निर्देश

लुधियाना  नगर निगम मुलाजिमों को अब डबल ड्यूटी नहीं करनी होगी जिसके तहत कमिश्नर ने नए इंस्पैक्टरों को जनगणना की जिम्मेदारी सौंप दी है। यहां बताना उचित होगा कि केंद्र सरकार के निर्देश पर वोटर लिस्ट अपडेट करने के अलावा जनगणना सर्वे का कार्य एक साथ शुरू हो गया है। इस काम के लिए नगर निगम के अधिकारियों द्वारा कई मुलाजिमों को डबल ड्यूटी दे दी गई है जिससे नगर निगम के रूटीन काम न होने कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा मुलाजिमों की डबल ड्यूटी लगाने के फैसले से चुनाव आयोग के ऑर्डर का उल्लंघन हो रहा है, क्योंकि स्टेट इलैक्शन कमिश्नर द्वारा 7 अप्रैल को पत्र जारी किया गया है कि वोटर लिस्ट अपडेट करने के काम में लगाए गए मुलाजिमों को उसके अलावा जनगणना सर्वे या किसी अन्य कार्य पर न लगाया जाए। इस संबंध में पंजाब केसरी द्वारा खुलासा करने के बाद नगर निगम मुलाजिमों को डबल ड्यूटी नहीं करनी होगी जिसके लिए कमिश्नर ने सरकार द्वारा नए लगाए गए इंस्पैक्टरों को चारों जोनों में बांटकर जनगणना की जिम्मेदारी सौंप दी है जिससे नगर निगम में खाली पड़ी रहने वाली कुर्सियों पर मुलाजिमों के वापस लौटने की उम्मीद बढ़ गई है। वोटर लिस्ट अपडेट करने के लिए 23 साल पुराने रिकार्ड को बनाया जाएगा आधार चुनाव आयोग द्वारा वोटिंग के दौरान फर्जीवाड़ा रोकने के लिए वोटर लिस्ट अपडेट करने की जो प्रक्रिया शुरू की गई है, उसके लिए 23 साल पुराने रिकार्ड को बनाया आधार जाएगा। मिली जानकारी के मुताबिक बी.एल.ओ. डोर-टू-डोर जाकर 2003 की वोटर लिस्ट के हिसाब से क्रॉस चैकिंग कर रहे हैं। इस दौरान जिन लोगों की मौत या कहीं दूसरी जगह शिफ्टिंग हो गई है, उनके बारे में अलग से रिपोर्ट की जाती है। इसके अलावा शहर में से ही किसी और जगह से शिफ्ट होकर आए लोगों का पुराना वोटर कार्ड मांगा जा रहा है जिसके आधार पर ही आने वाले समय के दौरान वोटर लिस्ट अपडेट करने के अलावा नए वोट बनाने का फैसला किया जाएगा। टार्गेट पूरा न करने वाले स्टाफ की रुक सकती है सैलरी वोटर लिस्ट अपडेट करने के मामले में शहरी एरिया के लिए 65 फीसदी तक का टारगेट दिया गया है। यह टार्गेट पूरा न करने वाले स्टाफ की सैलरी रुक सकती है। जहां तक लोगों द्वारा पुराने वोटर कार्ड न दिखाने या अन्य जानकारी देने में सहयोग न करने का हवाला दिया जा रहा है, उसके मद्देनजर समस्याओं का समाधान करने के लिए मास्टर ट्रेनर्ज की ड्यूटी अलग से लगाई गई है।

Panchkula में भाजपा का दांव: वार्डवार उम्मीदवार घोषित, Gyan Chand Gupta की मजबूत पकड़

पंचकूला. भाजपा ने नगर निकाय चुनाव 2026 के तहत पंचकूला नगर निगम के लिए पार्षद उम्मीदवारों की वार्डवार आधिकारिक सूची जारी कर दी है। अधिकांश उम्मीदवारों को पूर्व स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता का समर्थक माना जा रहा है। खास तौर पर उनके पौते पार्थ गुप्ता को वार्ड-6 से टिकट दिए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। यह सूची केंद्रीय नेतृत्व से विचार-विमर्श के बाद जारी की गई है। वार्ड नंबर 1 से 20 तक उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। पार्टी ने इस बार महिला उम्मीदवारों को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है। पूर्व पार्षद रितु गोयल, ओमवती पूनिया, सोनिया सूद और सुशील गर्ग नरवाना को टिकट दिया गया है। सूची जारी होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। सभी उम्मीदवारों ने अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। पार्टी अब बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करते हुए चुनाव जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रही है। वार्डवार उम्मीदवारों की सूची वार्ड नंबर     उम्मीदवार का नाम 1     परमजीत कौर 2     पमरजीत कौर 3     सुरेश वर्मा 4     भारत हितैषी 5     जय कौशिक 6     पार्थ गुप्ता 7     ज्योति प्रसाद 8     राजकुमार जैन 9     हरेंद्र मलिक 10     शेखर पांडेय 11     अनुराधा पुरी 12     राकेश जगोता 13     दीपक गर्ग 14     राकेश गोयल 15     प्रियंका 16     निर्मल देवी 17     सुदेश बिडला 18     पूजा देवी 19     मनीषा रानी 20     गौतम राणा

इंदौर में नगर निगम और पुलिस करेंगी बेसमेंट पार्किंग खाली, चार जोन में ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन होगा

 इंदौर  शहर की प्रमुख इमारतों की बेसमेंट में पार्किंग के उपयोग की जगह पर व्यावसायिक उपयोग पर अब रोक लगाई जाएगी। नगर निगम बेसमेंट से दुकानों व गोदाम को खाली करवाएगा। बेसमेंट में पार्किंग के अलावा अन्य उपयोग पाए जाने पर भवन को सील किया जाएगा। पुलिस के साथ मिलकर नगर निगम की टीम आगामी दिनों में कार्रवाई शुरू करेगी। यह निर्णय सोमवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हुआ। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि चार जोन में बांटे गए ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। वर्तमान में शहर में अभी तक तीन हजार ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन हुए हैं और एक आकलन के मुताबिक फिलहाल शहर में 11 हजार ई-रिक्शा चल रहे हैं। ऐसे में जो ई-रिक्शा चालक रजिस्ट्रेशन नहीं करवाएंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी। ई-रिक्शाओं को कलर कोड से रंगा जाएगा आठ एसीपी जोन के माध्यम से चार सेक्टर में बांटे गए ई-रिक्शाओं को उस क्षेत्र के विशेष कलर कोड से रंगा जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पुलिस कार्रवाई भी करेगी। इसके अलावा इंदौर में निर्धारित 16 ब्लैक स्पाट पर आईडीए, एनएचएआई, एमपीआईडीसी और नगर निगम सहित अन्य एजेंसियों सुधार के लिए जल्द से जल्द काम करेगी। शहर के कई रहवासी व व्यावसायिक इलाकों से सड़कों में स्पीड ब्रेकर के लिए मांग के प्रस्ताव समिति के पास पहुंचे हैं। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस उस क्षेत्र का निरीक्षण कर वहां के ट्रैफिक स्थिति का आकलन कर स्पीड ब्रेकर निर्माण के लिए अनुमति देगी। बैठक में नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, एसपी ग्रामीण यांगचेन भूटिया, डीसीपी ट्रैफिक राजेश त्रिपाठी, अपर आयुक्त आकाश सिंह, स्मार्ट सिटी के सीईओ अर्थ जैन, अपर कलेक्टर रोशन राय सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। बसों के रूट में परिवर्तन किया गया बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और जनहानि को रोकना है। इसके लिए इंजीनियरिंग सुधारों के साथ-साथ सतत मानिटरिंग की जा रही है। संबंधित विभागों को दिए गए निर्देशों के पालन की नियमित समीक्षा भी की जा रही है तथा आवश्यकतानुसार कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को दिए गए निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ है, जिससे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया राजवाड़ा क्षेत्र में सिटी बसों के खड़े होने से यातायात बाधित हो रहा था। इसलिए बसों के रूट में परिवर्तन किया गया है, जिससे ट्रैफिक में सुधार देखने को मिला है। हालांकि यात्रियों को हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आठ मार्गों पर किया जा रहा सुधार यातायात व्यवस्था सुधार के लिए शहर के आठ प्रमुख मार्गों को चिन्हित किया गया है, जहां अतिक्रमण और अव्यवस्थित संरचना के कारण जाम की स्थिति बनती थी। इन मार्गों पर अतिक्रमण हटाने, लेफ्ट टर्न व्यवस्थित करने तथा विद्युत खंभों एवं डीपी शिफ्टिंग की कार्रवाई जारी है, जिससे यातायात सुगम बनाया जा सके। ट्रैफिक सुधार के लिए दिए गए ये निर्देश     सड़क किनारे खड़े वाहनों पर चालानी कार्रवाई होगी, वाहनों पर लाक लगाया जाएगा।     एयरपोर्ट के सामने बन रहे मेट्रो स्टेशन व बिजासन माता मंदिर के बीच रिक्त भूमि पर एयरपोर्ट टर्मिनल के सामने से सर्विस रोड बनाई जाएगी।     बायपास एवं अन्य प्रमुख मार्गों जहां पर दुर्घटनाएं संभावित रहती हैं उन क्षेत्रों के चिह्नित रहवासियों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे आवश्यकता पड़ने पर वे पीड़ितों को तुरंत सीपीआर दे सकेंगे।     निर्माणाधीन पुल-पुलियाओं और सड़कों के वैकल्पिक मार्गों की मरम्मत जल्द की जाए।  

भोपाल नगर निगम घोटाला: सेवतकर को हटाकर दूसरे को सौंपा वित्त विभाग, लोकायुक्त ने दर्ज की थी FIR

भोपाल  नगर निगम में फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए के भुगतान के मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई के बीच वित्त और लेखा शाखा के अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर को शाखा से हटा दिया है। वहीं, अपर आयुक्त मुकेश शर्मा को वित्त एवं लेखा शाखा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह फेरबदल उस समय हुआ है, जब नगर निगम का बजट पेश होने में करीब 10 दिन शेष हैं। नगर निगम का वार्षिक बजट 23 से 26 मार्च के बीच पेश होना है। बजट का ड्राफ्ट तैयार करने की अंतिम तिथि 16 मार्च तय की गई है। लोकायुक्त की छापेमारी और FIR का असर इससे ठीक पहले करोड़ों रुपये के फर्जी बिल भुगतान मामले में निगम के डाटा सेंटर सहित कई शाखाओं में छापेमारी कर लोकायुक्त ने पिछले करीब दस साल के दस्तावेज और सर्वर डाटा जब्त किया है। शिकायत के आधार पर की गई प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी के संकेत मिलने के बाद शुक्रवार को तत्कालीन वित्त एवं लेखा शाखा की जिम्मेदारी देख रहे अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में एफआइआर दर्ज की गई थी। इसके बाद निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने उन्हें इस शाखा से हटा दिया गया है। ऐन वक्त पर वित्त विभाग के प्रमुख को हटाए जाने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप है। अब मुकेश शर्मा पर बजट को अंतिम रूप देने और निगम की वित्तीय साख सुधारने की दोहरी चुनौती होगी। बता दें कि नगर निगम में बिना काम कराए फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए निकालने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की थी। टीम ने निगम के डाटा सेंटर समेत कई शाखाओं में छापेमारी कर पिछले करीब 10 साल के दस्तावेज और सर्वर डाटा जब्त कर लिया था। इस मामले में सेवतकर समेत अन्य पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था। एफआईआर के बाद शनिवार को कमिश्नर जैन ने सेवतकर को हटाने की कार्रवाई की। कोर्ट से सर्च वारंट लेकर की थी छापेमारी निगम में फर्जी भुगतान की शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को मिली थी। प्रारंभिक जांच में तथ्य सही पाए जाने पर 9 मार्च को आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में FIR दर्ज की गई है। इसके बाद कोर्ट से सर्च वारंट लेकर छापेमारी की गई थी। लोकायुक्त पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई नवंबर 2025 में मिली एक शिकायत के आधार पर की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नगर निगम में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी बिल बनाकर सरकारी राशि का भुगतान कराया गया। प्रारंभिक जांच में आरोपों के समर्थन में पर्याप्त तथ्य मिलने के बाद 9 मार्च को अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी धाराओं में FIR दर्ज की गई। जांच एजेंसी के मुताबिक फर्जी भुगतान के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर ई-बिल तैयार किए गए। आरोप है कि कई मामलों में नगर निगम के जलकार्य विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग और केंद्रीय वर्कशॉप के नाम पर वाहनों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य काम दिखाए गए, जबकि वास्तव में ऐसे काम हुए ही नहीं। इसके बावजूद सिस्टम में बिल दर्ज कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। लोकायुक्त टीम ने शुक्रवार सुबह करीब साढ़े दस बजे नगर निगम के अलग-अलग विभागों में एक साथ कार्रवाई की। लेखा शाखा, कंप्यूटर शाखा, डेटा सेंटर, लिंक रोड-2 स्थित मुख्य कार्यालय और फतेहगढ़ स्थित पुराने कार्यालय में छापेमारी कर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लिया गया। जांच अधिकारियों ने भुगतान से जुड़े SAP सॉफ्टवेयर का डेटा भी जब्त किया है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि सर्वर डेटा की पड़ताल के बाद यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन-किन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया और वास्तव में उन कार्यों का निष्पादन हुआ या नहीं। जांच के दौरान अन्य अधिकारियों और निजी फर्मों की भूमिका भी सामने आने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि नगर निगम में बिल सीधे लेखा शाखा से तैयार या स्वीकृत नहीं किए जाते। संबंधित विभागों से सत्यापन के बाद ही बिल आते हैं और फंड की उपलब्धता के आधार पर आयुक्त से चर्चा के बाद भुगतान किया जाता है। फिलहाल लोकायुक्त की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला सरकारी संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जिस पर प्रशासन और आम जनता दोनों की नजर बनी हुई है। ये गड़बड़ी आई थी सामने आरोप है कि नगर निगम के जलकार्य, सामान्य प्रशासन और केंद्रीय वर्कशॉप जैसे विभागों के नाम पर वाहनों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य काम दिखाए गए। कई मामलों में वास्तव में काम हुआ ही नहीं, लेकिन सिस्टम में ई-बिल तैयार कर दिए गए। कुछ मामलों में जिस विभाग के नाम से बिल बनाए गए, उन्हें ही इसकी जानकारी नहीं थी। इन जगहों पर हुई थी छापेमारी लोकायुक्त पुलिस ने निगम के लेखा शाखा, कंप्यूटर शाखा, डाटा सेंटर, लिंक रोड-2 स्थित मुख्य कार्यालय और फतेहगढ़ स्थित पुराने कार्यालय में एक साथ छापेमारी की। लोकायुक्त का कहना है कि डिजिटल डाटा और दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में अन्य कर्मचारियों और फर्मों की भूमिका भी सामने आ सकती है। SAP सॉफ्टवेयर का डाटा जब्त किया प्रारंभिक जांच में मोटर वर्क शाखा, जल कार्य विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े कुछ कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच टीम ने भुगतान से जुड़े SAP सॉफ्टवेयर का डिजिटल डाटा भी कब्जे में लिया है। अब इसकी जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि किन-किन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया और वास्तव में काम हुआ भी था या नहीं। इस मामले में अपर आयुक्त ने कहा- कमिश्नर से चर्चा के बाद भुगतान इस मामले में अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर ने कहा था कि लेखा शाखा में बिल सीधे तैयार या पास नहीं किए जाते। बिल संबंधित विभागों से सत्यापन के बाद आते हैं और फंड की उपलब्धता के अनुसार … Read more

लुधियाना में बदलाव, नगर निगम के नए कमिश्नर ने संभाली कमान

लुधियाना बुधवार, 21 जनवरी को बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 26 आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस फेरबदल में  लुधियाना नगर निगम के कमिश्नर को भी बदल दिया गया है। सरकारी आदेशों के अनुसार, नगर निगम लुधियाना के मौजूदा कमिश्नर आदित्य डेचलवाल का तबादला कर उन्हें डिप्टी कमिश्नर रोपड़ नियुक्त किया गया है। वहीं, लुधियाना नगर निगम की कमान अब नीरू कत्याल को सौंपी गई है। अब लुधियाना नगर निगम के नए कमिश्नर नीरू कत्याल होंगे। बता दें कि नीरू कत्याल वर्तमान में पुड्डा (PUDA) में मुख्य प्रशासक के पद पर कार्यरत थीं।   नीरू कत्याल इससे पहले नगर निगम लुधियाना में एडिशनल कमिश्नर के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। इसके अलावा वह ग्लाडा (GLADA) की चीफ एडमिनिस्ट्रेटर भी रह चुकी हैं। प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें लुधियाना जैसे बड़े शहर की जिम्मेदारी सौंपी है।  इस तबादला सूची को आगामी समय में प्रशासनिक कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

हैरान करने वाली कार्रवाई: लखनऊ नगर निगम ने केंद्रीय संस्थान NBFGR का मुख्यालय किया सील

लखनऊ लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) ने हाउस टैक्स नहीं देने पर केंद्र सरकार के ही एक दफ्तर पर ताला मारकर उसे सील कर दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBFGR) पर नगर निगम का करोड़ से ऊपर रुपया बकाया है, जिसका भुगतान कई बार नोटिस देने के बाद भी नहीं हुआ है। निगम के अधिकारियों ने सोमवार की सुबह तेलीबाग स्थित एनबीएफजेआर के मुख्यालय पर ताला मार दिया। नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर नगर निगम इस समय बड़े बकाएदारों के खिलाफ सख्त अभियान चला रहा है।   नगर निगम जोन–4 की जोनल अधिकारी शिल्पा कुमारी ने सोमवार को नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्स (एनबीएफजीआर) का परिसर सील कर दिया। कृषि मंत्रालय के इस संस्थान पर नगर निगम का हाउस टैक्स मद में कुल 1 करोड़ 36 लाख 65 हजार 932 रुपये बकाया था। कई बार नोटिस और पत्राचार के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं करने पर लखनऊ नगर निगम ने यह अभूतपूर्व कदम उठाया है। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि बकाया कर की वसूली को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी, चाहे बकाएदार निजी हो या सरकारी विभाग। नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्स (एनबीएफजीआर) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने 1983 में इलाहाबाद (प्रयागराज) में एक किराए के परिसर में राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो की स्थापना की थी। ब्यूरो का स्थायी कार्यालय 1990 में लखनऊ के तेलीबाग इलाके में बना और तब से वो यहीं से चल रहा है। संस्थान का मुख्यालय 52 एकड़ में फैला है, जिसमें प्रशासनिक भवन के अलावा प्रयोगशाला, खेत और आवासीय परिसर भी शामिल हैं। संस्थान मछली आनुवंशिक संसाधनों का मूल्यांकन और संरक्षण करता है। मछली के संरक्षण के लिए भी यहां रिसर्च होता है।  

त्रिपक्षीय समझौते से मजदूरों को बड़ी राहत, रांची नगर निगम देगा पहली बार बोनस

रांची झारखंड की राजधानी रांची नगर निगम के उप श्रमायुक्त अविनाश कृष्ण की उपस्थिति में मजदूरों के बोनस भुगतान को लेकर त्रिपक्षीय समझौता संपन्न हुआ। इस समझौते के तहत पहली बार रांची नगर निगम में कार्यरत मजदूरों को बोनस का लाभ मिलेगा, जिसे श्रमिक हितों की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। त्रिपक्षीय समझौते पर मजदूर पक्ष की ओर से झारखंड नगर निकाय मजदूर यूनियन, रांची के अध्यक्ष एवं प्राधिकृत प्रतिनिधि भवन सिंह तथा यूनियन के सचिव सुखनाथ लोहरा ने हस्ताक्षर किए। वहीं नियोक्ता पक्ष की ओर से मेसर्स स्वच्छता कॉरपोरेशन, बेंगलुरु के महाप्रबंधक राजशेखर रेड्डी और प्रोजेक्ट मैनेजर जी. गांधी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौता पूर्ण होने के बाद उप श्रमायुक्त अविनाश कृष्ण ने इसकी प्रमाणित प्रति दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई।         मजदूरों को दो किस्तों में मिलेगा बोनस भुगतान समझौते के अनुसार वर्ष 2024-25 के लिए बोनस भुगतान की व्यवस्था तय की गई है। दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में कार्यरत मजदूरों को 2000 रुपये प्रति कामगार की दर से बोनस दिया जाएगा। यह राशि दो किस्तों में मजदूरों को प्राप्त होगी, जो दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के वेतन के साथ भुगतान की जाएगी। वहीं फरवरी और मार्च 2025 में कार्यरत मजदूरों को 1000 रुपये बोनस दिया जाएगा, जिसका भुगतान दिसंबर 2025 के वेतन के साथ किया जाएगा।        मजदूरों ने समझौते का किया स्वागत इस अवसर पर झारखंड नगर निकाय मजदूर यूनियन के अध्यक्ष भवन सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि यूनियन के लंबे संघर्ष और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि रांची नगर निगम के मजदूरों को पहली बार बोनस का अधिकार मिलना मजदूर एकता की जीत है। भवन सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि यूनियन आगे भी मजदूरों के अन्य अधिकारों और सुविधाओं के लिए संघर्ष जारी रखेगी। मजदूरों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे आर्थिक राहत देने वाला कदम बताया है। श्रमिकों का कहना है कि बोनस मिलने से उनके परिवारों को आर्थिक सहारा मिलेगा, खासकर त्योहार और जरूरी खर्चों के समय। श्रमिक संगठनों का मानना है कि यह त्रिपक्षीय समझौता भविष्य में नगर निगम के अन्य श्रमिक अधिकारों, जैसे सामाजिक सुरक्षा और स्थायी लाभों की दिशा में भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा।