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20 वार्डों और 204 मतदान केंद्रों पर 2.07 लाख मतदाता करेंगे मतदान

 पंचकूला नगर निगम चुनाव के लिए शुक्रवार शाम चुनाव प्रचार थम गया। प्रचार के अंतिम दिन सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंकते हुए रोड शो, जनसभाएं और डोर-टू-डोर संपर्क अभियान चलाए। चुनाव प्रचार समाप्त होने से पहले शहर का राजनीतिक माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंगा नजर आया। अब उम्मीदवारों और उनके समर्थकों का पूरा ध्यान मतदान प्रतिशत बढ़ाने और मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने पर रहेगा। इस बार नगर निगम चुनाव में सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। भाजपा ने अपने प्रचार अभियान में स्टार प्रचारकों को उतारकर पूरी ताकत दिखाई, जबकि कांग्रेस प्रचार के स्तर पर अपेक्षाकृत कमजोर नजर आई। कांग्रेस के कई बड़े नेता मीडिया से रूबरू तो हुए, लेकिन जनसभाओं और जमीनी प्रचार में उनकी सक्रियता कम दिखाई दी। इसके बावजूद कांग्रेस खेमे में उत्साह बना हुआ है। अंतिम फैसला जनता तथा भगवान पर छोड़ा कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी सुधा भारद्वाज के पति और पार्टी नेता संजीव भारद्वाज ने दावा किया कि इस बार चुनाव परिणाम चौंकाने वाले होंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार जनता के बीच काम कर रही है और अंतिम फैसला जनता तथा भगवान पर छोड़ दिया गया है। सुधा भारद्वाज ने डोर शो करके प्रचार किया। बंसल ने किया 40 हजार से जीतने का दावा भाजपा पूरी तरह आत्मविश्वास से भरी नजर आई। भाजपा के मेयर पद प्रत्याशी श्याम लाल बंसल ने दावा किया कि पार्टी लगभग 40 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि शहर में भाजपा के पक्ष में एकतरफा माहौल बन चुका है और पार्टी मेयर पद के साथ-साथ सभी 20 वार्डों में जीत हासिल करेगी। 204 मतदान केंद्र नगर निगम चुनाव के लिए 20 वार्डों में कुल 204 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वार्ड-1, 2, 3, 10, 11, 12 और 13 में 10-10 बूथ स्थापित किए गए हैं, जबकि वार्ड-17 में सबसे अधिक 13 बूथ बनाए गए हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र पर दो ईवीएम लगाई जाएंगी, एक मेयर और दूसरी पार्षद पद के लिए, ताकि मतदाता अलग-अलग मतदान कर सकें। 2,07,379 मतदाता चुनाव में कुल 2 लाख 7 हजार 379 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1 लाख 8 हजार 227 पुरुष, 98 हजार 447 महिलाएं और 5 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। वार्ड-17 में सबसे अधिक मतदाता हैं, जबकि वार्ड-15 में मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है। 204 ईवीएम के साथ 58 रिजर्व मशीनें निर्वाचन व्यवस्था के तहत मेयर पद के लिए 204 ईवीएम मशीनों के साथ 41 रिजर्व मशीनें रखी गई हैं। वहीं, पार्षद चुनाव के लिए 204 ईवीएम के साथ 58 रिजर्व मशीनें निर्धारित की गई हैं। प्रशासन द्वारा पोलिंग स्टाफ की अंतिम रेंडमाइजेशन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और मतदान केंद्रों पर ईवीएम वितरण की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए वार्ड-वार ड्यूटी मजिस्ट्रेट और सेक्टर अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मतदान 10 मई और मतों की गिनती 13 मई को Government Girls College Sector 14 में सुबह 8 बजे से शुरू होगी। मतगणना पूरी होते ही परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

Municipal Elections Punjab: 9 नगर निगमों के लिए 24 मई को मतदान की संभावना

चंडीगढ़. पंजाब में नगर निगम चुनावों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि राज्य के 9 नगर निगमों – मोहाली, होशियारपुर, अबोहर, बठिंडा, बटाला, बरनाला, पठानकोट, मोगा और कपूरथला – में नगर निगम चुनाव मई के आखिर तक होना लगभग तय है। सरकारी और एडमिनिस्ट्रेटिव सूत्रों के मुताबिक, ये चुनाव 24 मई को हो सकते हैं, लेकिन अभी इस पर आखिरी फैसला स्टेट इलेक्शन कमीशन को लेना है। इन चुनावों के लिए तैयारियां पहले ही कर ली गई हैं। सरकार ने चुनावों से पहले वार्ड रिजर्वेशन को भी अंतिम रूप दे दिया है। इस बार 50 परसेंट सीटें महिलाओं के लिए भी रिजर्व रहेंगी। एस.सी. और एस.टी. उम्मीदवार अपनी रिजर्व सीटों के अलावा जनरल सीटों से भी चुनाव लड़ सकेंगे। पंजाब में अगले नगर निगम चुनाव (अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला और फगवाड़ा) काफी समय से पेंडिंग हैं। इन्हें अलग-अलग फेज़ में आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। 

चुनाव प्रक्रिया विवादों में: हरियाणा में जनगणना की जगह FIDR डेटा पर उठा सवाल, हाई कोर्ट पहुंचा मुद्दा

चंडीगढ़. हरियाणा के नगर निगम चुनावों को लेकर बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व पार्षद उषा रानी समेत कई याचिकाकर्ताओं ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर राज्य सरकार की उस प्रक्रिया को चुनौती दी है, जिसमें जनगणना आंकड़ों की बजाय फैमिली इंफॉर्मेशन डेटा रिपॉजिटरी (एफआईडीआर) के आधार पर सीटों का निर्धारण और आरक्षण किया गया है। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 243-पी के अनुसार “जनसंख्या” का अर्थ अंतिम प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों से है, लेकिन राज्य सरकार ने 2023 और 2024 के संशोधनों के जरिए हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 में बदलाव कर एफआईडीआर डेटा को आधार बना लिया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह कदम न केवल संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को भी प्रभावित करता है। याचिका में पंचकूला नगर निगम के वार्ड परिसीमन को भी कठघरे में खड़ा किया गया है। आरोप है कि परिसीमन प्रक्रिया के दौरान प्राप्त आपत्तियों पर विचार किए बिना ही अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई, जो 1994 के नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसके अलावा वार्डों के निर्धारण में भौगोलिक एकरूपता, संतुलन और जनसंख्या अनुपात जैसे मूल सिद्धांतों की भी अनदेखी की गई।याचिकाकर्ताओं ने 10 अप्रैल 2026 की उस अधिसूचना को भी चुनौती दी है, जिसमें केवल अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सीटों की घोषणा की गई थी, जबकि अन्य वर्गों, सामान्य, पिछड़ा वर्ग (बीसी-ए और बीसी-बी) के लिए आरक्षण एक साथ घोषित नहीं किया गया। इसे मनमाना, भेदभावपूर्ण और चुनावी प्रक्रिया के मूल ढांचे के विपरीत बताया गया है।याचिका के अनुसार, राज्य सरकार ने पहले 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का निर्धारण किया था, लेकिन अब बिना किसी नई जनगणना के एफआईडीआर डेटा लागू कर दिया गया, जिससे आरक्षित सीटों की संख्या और स्वरूप में बदलाव आया है। इससे चुनावी प्रक्रिया की वैधता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। इसके अलावा मेयर पद और वार्डों के आरक्षण के लिए चिट्ठी प्रक्रिया (ड्रॉ ऑफ लॉट्स) भी केवल कुछ नगर निगमों में लागू की गई, जबकि नियमों के अनुसार इसे पूरे राज्य में एक साथ किया जाना चाहिए था। याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट से मांग की है कि पंचकूला नगर निगम की सभी सीटों का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाए और जब तक मामले का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। याचिका पर हाई कोर्ट की अवकाशकालीन बेंच आज सुनवाई करेगी।  

हरियाणा में निकाय चुनाव का ऐलान, जानें पूरा शेड्यूल

चंडीगढ़ हरियाणा निकाय चुनावों की तारीखों का ऐलान हो गया है। हरियाणा चुनाव आयोग ने पंचकूला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनावों की तारीखों की घोषणा की। हरियाणा चुनाव आयोग ने बताया कि सोनीपत-पंचकूला और अंबाला नगर निगम में 10 मई को वोटिंग होगी और 13 को रिजल्ट आएगा। बता दें कि पंचकूला, अंबाला और सोनीपत नगर निगम चुनाव होने हैं। इसके अलावा, रेवाड़ी नगर परिषद ,धारूहेड़ा सांपला और उकलाना नगर पालिका में भी चुनाव होना। वहीं, टोहाना, झज्जर, राजौंद, तरावड़ी, सढ़ौरा और कनीना नगरपालिका को लेकर भी लोग वोट डालेंगे। जानें हरियाणा निकाय चुनाव का पूरा शेड्यूल     21 अप्रैल से 25 अप्रैल तक के बीच नामांकन दाखिल किए जाएंगे।     27 अप्रैल को नामांकन की जांच की जाएगी।     28 अप्रैल को नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख होगी।     इसी दिन चुनाव चिन्ह भी उम्मीदवार को दिए जाएंगे।     10 मई को वोटिंग होगी।     पुनः मतदान की जरूरत पड़ी तो 12 मई को दोबारा वोटिंग होगी।     13 मई को चुनावी नतीजों का ऐलान होगा। लोकतंत्र मात्र चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर दिन निभाई जाने वाली एक जिम्मेदारी है। नगर निगमों के साथ-साथ जिला परिषद और पंचायती राज संस्थाओं के खाली पड़े पदों के लिए उपचुनाव भी इसी समय सारणी के अनुसार कराए जाएंगे। हरियाणा के चुनाव आयुक्त ने क्या बताया हरियाणा के चुनाव आयुक्त देवेंद्र कल्याण ने बताया कि निगम मेयर के लिए 30 लाख खर्च सीमा तय की गई है। सदस्य के लिए यह 7.50 लाख रुपये है। निकाय चुनाव के लिए 10 मई को मतदान होगा। अगर दोबारा मतदान की जरूरत पड़ी तो वह 12 मई को होंगे। 13 मई को चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। बता दें कि इस बार बीजेपी, कांग्रेस, जेजेपी और आईएनएलडी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा से पहले ही सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया था।  

Ambala MC Election 2026: 10 मई को मतदान, 13 मई को रिजल्ट—हरियाणा में चुनावी सरगर्मी तेज

चंडीगढ़. हरियाणा से बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश में नगर निगम चुनाव को लेकर हरियाणा चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है। चुनाव आयोग ने प्रेस कान्फ्रेंस शेडयूल जारी कर दिया है। हरियाणा चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि सोनीपत-पंचकूल और अंबाला नगर निगम में 10 मई को वोटिंग होगी और 13 को रिजल्ट आएगा। चुनाव का समय 8 से 6 बजे होगा। जानें क्या रहेगा शेड्यूल     नामांकन नोटिस-15 अप्रैल     नामांकन 21 से 25 अप्रैल तक     नामांकन पत्रों की जांच- 27 अप्रैल     नाम वापसी- 28 अप्रैल उसी दिन चुनाव चिन्ह मिलेंगे     वोटिंग-10 मई     दोबारा मतदान-12 मई     मतगणना-13 मई को होगी राज्य चुनाव आयुक्त देवेंद्र कल्याण ने बताया कि पंचायत के उपचुनाव भी नगर निकायों के साथ होंगे। पानीपत और करनाल जिला परिषद के 1-1 वार्ड, 12 ब्लॉक समिति सदस्यों, 29 सरपंच, 485 पंचों के लिए वोटिंग होगी। वोटिंग के ऐलान के साथ ही सभी जगह चुनाव आचार संहिता लागू कर दी गई है।  कहां-कहां चुनाव होंगे नगर निगमः अंबाला, पंचकूला व सोनीपत नगर परिषदः रेवाड़ी नगर पालिकाः सांपला (रोहतक), उकलाना (हिसार) व धारूहेड़ा (रेवाड़ी)

धनबाद नगर निगम चुनाव में संजीव सिंह ने 8 साल जेल में रहकर किया BJP-JMM का किला ध्वस्त

धनबाद. धनबाद की राजनीति में बीजेपी के बागी उम्मीदवार संजीव सिंह ने दमदार वापसी की है. दमदार इसलिए क्योंकि कि वे डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड में लंबे समय तक जेल में थे, लेकिन अदालत ने उन्हें उस केस से बरी कर दिया. वर्षों तक सलाखों के पीछे रहने के बाद जब वे सियासत के मैदान पर वापस लौटे तो उन्होंने नगर निगम चुनाव में मेयर पद के लिए दावेदारी ठोक दी. उन्होंने बकायदा प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर समर्थन की मांग की. लेकिन उन्हें समर्थन नहीं मिला. इसके बजाय पार्टी ने संजीव कुमार को अपना समर्थन दिया. दूसरी तरफ बीजेपी के कद्दावर नेता रहे चंद्रशेखर अग्रवाल ने भी समर्थन की आस में पार्टी से बगावत कर झामुमो का दामन थाम लिया. झामुमो ने चंद्रशेखर अग्रवाल को अपना समर्थन दिया. जबकि कांग्रेस ने शमशेर आलम को सपोर्ट करने का ऐलान कर दिया. ऐसे में संजीव सिंह ने बैगर किसी के समर्थन के मैदान में उतरने का फैसला किया. बस उनके इस निर्णय से लगने लगा था कि वह बीजेपी के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगायेंगे. हुआ भी यही. उन्होंने झामुमो समर्थित पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल को 31,902 मतों के भारी अंतर से हरा दिया. इस जीत को धनबाद की राजनीति में बड़ा उलटफेर माना जा रहा है. मतगणना में साफ दिखी बढ़त चुनाव परिणामों के अनुसार, संजीव सिंह को कुल 1,43,362 मत मिले. वहीं चंद्रशेखर अग्रवाल को 82,460 वोट प्राप्त हुए. भाजपा समर्थित उम्मीदवार संजीव कुमार 57,895 लाकर चौथे स्थान पर रहे. कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी शमशेर आलम को 59,079 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे. संजीव सिंह शुरुआती राउंड से ही बढ़त बनाए हुए थे. धीरे धीरे यह बढ़त और मजबूत होती गयी और अंत में ये निर्णायक साबित हुई. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी जीत के पीछे का कारण क्या है. आज हम इस लेख में यही चीज को समझने की कोशिश करेंगे. युवाओं और सोशल मीडिया ने बदला माहौल संजीव सिंह की जीत में युवाओं की भूमिका अहम रही. चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में जबरदस्त माहौल बना. बड़ी संख्या में युवाओं ने न सिर्फ ऑनलाइन प्रचार किया, बल्कि बूथ स्तर पर भी सक्रियता दिखाई. इसका सीधा असर मतदान प्रतिशत और नतीजों पर पड़ा. सहानुभूति लहर बनी ताकत करीब आठ साल तक जेल में रहने और नीरज सिंह हत्याकांड में बरी होने के बाद संजीव सिंह के पक्ष में सहानुभूति की लहर बनी. आम लोगों के बीच यह संदेश गया कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया था. इस भावना ने मतदाताओं को उनके पक्ष में एकजुट किया. भाजपा के कोर वोट बैंक में सेंध निर्दलीय उम्मीदवार होने के बावजूद संजीव सिंह ने भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की. खासकर धनबाद और बागमारा क्षेत्र में भाजपा समर्थकों का बड़ा हिस्सा उनके साथ चला गया, जिससे मुकाबला एकतरफा होता चला गया. ‘अकेले योद्धा’ की बनी छवि चुनाव के दौरान सभी बड़े दलों का निशाना सिर्फ संजीव सिंह पर रहा. विरोधियों की इस घेराबंदी ने मतदाताओं की नजर में उनकी छवि एक ‘अकेले योद्धा’ के रूप में बना दी. यही छवि उनके लिए निर्णायक साबित हुई. 2017 में जाना पड़ा था जेल संजीव सिंह को वर्ष 2017 में अपने चचेरे भाई नीरज सिंह की हत्या की साजिश के आरोप में जेल जाना पड़ा था. वे अप्रैल 2017 से अगस्त 2025 तक न्यायिक हिरासत में रहे. 8 अगस्त 2025 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट से स्वास्थ्य आधार पर जमानत मिली, जबकि 27 अगस्त 2025 को धनबाद की विशेष अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया. ‘सिंह मेंशन’ परिवार की विरासत संजीव सिंह प्रसिद्ध ‘सिंह मेंशन’ परिवार से आते हैं, जिसकी नींव उनके पिता सूर्यदेव सिंह ने रखी थी. झरिया और धनबाद की राजनीति में इस परिवार की गहरी पकड़ रही है. उनकी मां कुंती देवी विधायक रह चुकी हैं, जबकि वर्तमान में उनकी पत्नी रागिनी सिंह भाजपा से विधायक हैं.

निकाय चुनाव में मेयर-अध्यक्ष के 76 और पार्षद के 348 नामांकन रद

रांची. नगर निकाय चुनाव के तहत दाखिल नामांकन पत्रों की गुरुवार को निर्वाची पदाधिकारियों द्वारा जांच की की गई। जांच के बाद कुल 424 आवेदन रद हो गए।इनमें 76 नामांकन पत्र नगर निगमों के महापौर तथा नगर परिषदों व नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद के लिए दाखिल किए गए थे। नगर निगमों, नगर परिषदों तथा नगर पंचायतों के वार्ड पार्षदों के लिए दाखिल नामांकन पत्रों में भी 348 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र रद हो गए। नामांकन पत्रों की जांच के बाद कुल 6,555 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं। इनमें 598 प्रत्याशी महापौर तथा अध्यक्ष पद के हैं, जबकि 5,957 प्रत्याशी वार्ड पार्षद चुनाव के हैं। हालांकि प्रत्याशी शुक्रवार शाम तीन बजे तक अपना नामांकन वापस ले सकंगे। इसके बाद ही पता चल पाएगा कि विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में कितने प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं तथा कितने में निर्विरोध निर्वाचन होगा। नामांकन पत्रों की जांच के बाद जितने प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं, उनमें 3,229 महिलाएं हैं। महापौर तथा अध्यक्ष के लिए 251 तथा वार्ड पार्षद के लिए 2,978 महिलाएं चुनाव मैदान में रह गई हैं। नामांकन के बाद कितने प्रत्याशियों का नामांकन पत्र हुआ रद पद     कुल नामांकन     रद्द नामांकन     चुनाव मैदान में शेष प्रत्याशी महापौर/अध्यक्ष     674     76     598 वार्ड पार्षद     6,305     348     5,957 कुल     6,979     424     6,555 महिलाओं के नामांकन पत्रों की जांच के बाद स्थिति पद     कुल नामांकन     रद्द नामांकन     चुनाव मैदान में शेष प्रत्याशी महापौर / अध्यक्ष     283     32     251 वार्ड पार्षद     3,179     201     2,978 कुल     3,462     233     3,229