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झारखंड में नगरीय चुनावी रण शुरू, 23 फरवरी को वोटिंग; जानिए कब आएंगे नतीजे

रांची झारखंड में निकाय चुनावों का शंखनाद हो गया है. झारखंड राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने मंगलवार 27 जनवरी 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया है. निर्वाचन आयुक्त की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, झारखंड में 23 फरवरी 2026 दिन सोमवार को मतदान होगा, जबकि 27 फरवरी को मतगणना की तिथि घोषित की गई है. निर्वाचन आयोग की ओर से अधिसूचना के अनुसार, नामांकन से लेकर मतगणना तक की सभी महत्वपूर्ण तिथियां तय कर दी गई हैं. यह कार्यक्रम जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगर निगम) के माध्यम से लागू होगा. राज्य की सभी नगर पालिकाओं, नगर निगमों और नगर परिषदों के लिए एक साथ चुनाव कराए जाएंगे। निर्वाचन आयोग की घोषणा के साथ ही पूरे झारखंड में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, 23 फरवरी को नगर निकाय चुनाव के लिए मतदान होगा। जबकि चुनाव के नतीजे 27 फरवरी को आएंगे। चुनाव प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत 28 जनवरी 2026 बुधवार को होगी. इसी दिन पूर्वाह्न 11 बजे प्रपत्र-5 में निर्वाचन की सूचना का प्रकाशन किया जाएगा. इसके साथ ही आचार संहिता प्रभावी मानी जाएगी. इसके साथ ही राज्य की 20 नगर परिषदों में अध्यक्ष पदों के लिए SC, ST, ओबीसी और अनारक्षित श्रेणियों के साथ-साथ महिला आरक्षण का भी पूरा ध्यान रखा गया है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, गिरिडीह, गढ़वा, दुमका, जामताड़ा, साहेबगंज और पूर्वी सिंहभूम जैसे जिलों की कई नगर पंचायतों में अध्यक्ष का पद महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं, खूंटी, लातेहार, गोड्डा और रांची जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग को प्राथमिकता दी गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि नगर निकाय चुनाव, 9 जनवरी को जारी की गई आरक्षण सूची के आधार पर ही होंगे। इस बार राजधानी रांची नगर निगम का मेयर पद अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं, धनबाद और चास नगर निगम के मेयर पद को सामान्य श्रेणी के लिए रखा गया है।

झारखंड निकाय चुनाव 2026 में 15 लाख तक तय की खर्च लिमिट

रांची. झारखंड में 2026 के निकाय चुनावों का बिगुल बज चुका है। अगर आप पार्षद, मेयर या चेयरपर्सन बनने का सपना देख रहे हैं, तो नियमों की ये बैरियर पार करनी होंगी। राज्य चुनाव आयोग ने हाल ही में खर्च सीमा को 15 लाख रुपये तय किया हैऔर आरक्षित सीटों पर जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य है। यह रिपोर्ट झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 और नवीनतम अधिसूचनाओं पर आधारित है, जिसमें पात्रता से लेकर चुनाव व्यय तक सब कुछ शामिल है। दो बच्चों की नीति और कर क्लीयरेंस जैसे नियम अब और सख्त हैं। 1. पात्रता मानदंड झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 579 के अनुसार, उम्मीदवार का नाम नगरपालिका मतदाता सूची में होना चाहिए। आरक्षित सीटों के लिए अतिरिक्त शर्तें लागू हैं: न्यूनतमआयु: 21 वर्ष। इससे कम आयु पर अयोग्यता (धारा 18(b))।     नागरिकता: भारतीय नागरिक होना जरूरी (धारा 18(a))।     आरक्षित सीटें: SC, ST, BC या महिला आरक्षण वाली सीटों पर उम्मीदवार उसी कैटेगरी का होना चाहिए। राज्य चुनाव आयोग रोटेशन आधार पर आरक्षण तय करता है (धारा 16 और 27)।     मतदाता होना: उम्मीदवार को उस क्षेत्र की विधानसभा मतदाता सूची में नाम होना चाहिए (धारा 555)।     शैक्षणिक योग्यता: कोई अनिवार्य योग्यता नहीं, लेकिन शपथ पत्र में शिक्षा विवरण देना पड़ता है (धारा 543)। एक उम्मीदवार वार्ड सदस्य और मेयर/चेयरपर्सन दोनों पदों पर लड़ सकता है। 2. अयोग्यता के आधार धारा 18 में अयोग्यता के कई आधार हैं। इनमें से कोई भी लागू होने पर चुनाव लड़ना या पद संभालना असंभव।     दो बच्चों की नीति: दो से ज्यादा जीवित बच्चे होने पर अयोग्य (धारा 18(n))। अपवाद: अधिनियम शुरू होने (9 फरवरी, 2012) के एक साल के अंदर दो से ज्यादा बच्चे होने पर छूट, लेकिन 9 फरवरी, 2013 के बाद तीसरा बच्चा होने पर पूरी तरह अयोग्य।     कर बकाया: पिछले साल का नगरपालिका कर बकाया होने पर अयोग्य (धारा 18(l))। कर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जरूरी।     आपराधिक रिकॉर्ड: 6 महीने से ज्यादा सजा (राजनीतिक अपराध छोड़कर), या फरार होना (धारा 18(h))।     सरकारी सेवा: सरकारी या लोकल अथॉरिटी की जॉब में होना (धारा 18(c))।     अन्य: दिवालिया, मानसिक अक्षमता, भ्रष्टाचार (6 साल तक अयोग्य), या 3 लगातार मीटिंग्स से गैरहाजिर (धारा 18(o))।     दोहरी सदस्यता: विधायक, सांसद या पंचायत सदस्य होने पर 15 दिनों में एक पद छोड़ना (धारा 18)। अयोग्यता पर राज्य चुनाव आयोग फैसला करता है। 3. नामांकन प्रक्रिया नामांकन आयोग द्वारा घोषित तिथियों पर (धारा 539)। मुख्य बिंदु-     शपथ पत्र: नामांकन के साथ जरूरी (धारा 543)। इसमें आपराधिक रिकॉर्ड, संपत्ति, देनदारियां, शिक्षा शामिल।     झूठा शपथ पत्र: 1 साल कैद या जुर्माना (धारा 544)।     जमा राशि: आयोग द्वारा तय, सामान्य कैटेगरी के लिए अलग।     प्रक्रिया: रिटर्निंग ऑफिसर (उप जिलाधिकारी स्तर) के पास जमा। सहायक रिटर्निंग ऑफिसर मदद करते हैं (धारा 541)।     आरक्षण पालन: केवल योग्य उम्मीदवार आरक्षित सीटों पर।     दोहरी नामांकन: Allowed, लेकिन जीतने पर एक पद चुनना। नामांकन जांच के बाद, गलती पर रद्दीकरण। इस समाचार में उपयोग किए गए क्रिएटिव ग्राफिक्स को NoteBookLM आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस प्रोग्राम की सहायता से बनाया गया है। 4. आरक्षण व्यवस्था धारा 16 और 27 के मुताबिक-     SC/ST/BC/महिलाओं के लिए 50% तक आरक्षण।     आरक्षित कैटेगरी में महिलाओं के लिए सब-आरक्षण।     आयोग द्वारा हर 10 साल में रिव्यू और रोटेशन।     मेयर/चेयरपर्सन के लिए भी जनसंख्या आधारित आरक्षण। 5. जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता आरक्षित सीटों (SC/ST/BC) पर लड़ने के लिए वैध जाति प्रमाण पत्र नामांकन के साथ जमा करना अनिवार्य है। प्रमाण पत्र जिला मजिस्ट्रेट, अनुमंडल पदाधिकारी या अधिकृत अथॉरिटी द्वारा जारी किया जाता है। वैधता आमतौर पर लाइफटाइम होती है, लेकिन चुनाव के लिए हालिया वेरिफिकेशन जरूरी। BC-I/BC-II के लिए नॉन-क्रीमी लेयर डिक्लेरेशन भी लगता है। फॉर्मेट राज्य सरकार के सर्कुलर के अनुसार, जैसे SC/ST के लिए स्पेसिफिक फॉर्मेट में संशोधन। गलत प्रमाण पत्र पर नामांकन रद्द और कानूनी कार्रवाई। राज्य चुनाव आयोग ने हालिया सर्कुलरों में सख्ती बढ़ाई है। 6. चुनाव प्रक्रिया और मतदान     पर्यवेक्षण: राज्य चुनाव आयोग (धारा 538)। जिला चुनाव अधिकारी (उपायुक्त) कोऑर्डिनेट करता है।     मतदान: डायरेक्ट इलेक्शन (धारा 553)। अमिट स्याही और आईडी जरूरी (धारा 554)।     मतदान दिवस: छुट्टी (धारा 575); शराब बैन 48 घंटे पहले (धारा 576)।     पर्यवेक्षक: आयोग द्वारा अपॉइंट (धारा 556)।     अपराध: रिश्वत, धमकी, बूथ कैप्चरिंग पर सजा (धारा 558-574)। बूथ कैप्चरिंग पर 1-3 साल कैद। 7. चुनाव व्यय और लेखा     सीमा: राज्य चुनाव आयोग द्वारा तय। 2026 चुनावों के लिए उम्मीदवारों पर 15 लाख रुपये की अधिकतम खर्च सीमा लागू। निकाय के आधार पर अलग-अलग, जैसे मेयर के लिए ज्यादा, वार्ड के लिए कम। उल्लंघन पर अयोग्यता (धारा 577)।     लेखा: नामांकन से रिजल्ट तक हिसाब रखना जरूरी। फेल होने पर 3 साल अयोग्य (धारा 578)।     मॉनिटरिंग: आयोग द्वारा सख्त निगरानी, बैंक ट्रांजेक्शन चेक। 8. शपथ और पद ग्रहण     पार्षदों के लिए: संविधान निष्ठा शपथ (धारा 19)। 3 महीने में लेनी, वरना पद रिक्त।     मेयर/चेयरपर्सन के लिए: गोपनीयता शपथ (धारा 29)। 9. रिकॉल और पद की अवधि     अवधि: 5 साल (धारा 20)।     रिकॉल: वार्ड वोटर्स की बहुमत पिटीशन पर, 2/3 पार्षदों की अप्रूवल से (धारा 21)। पहले साल में नहीं। 10. चुनाव याचिका     फाइलिंग: रिजल्ट के 45 दिनों में कोर्ट में (धारा 580)।      आधार: अयोग्य उम्मीदवार, भ्रष्टाचार, गलत नामांकन।     भ्रष्टाचार: रिश्वत, झूठे स्टेटमेंट, फ्री ट्रांसपोर्ट आदि (धारा 586)। दोषी पर 5 साल अयोग्य। यह रिपोर्ट चुनाव आयोग के आधिकारिक स्रोतों और नवीनतम अपडेट्स पर बनी है। चुनाव तिथियां जल्द घोषित हो सकती हैं। उम्मीदवार आयोग की वेबसाइट चेक करें और अपडेट रहें।