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INS महेंद्रगिरि और INS मालवन की एंट्री तय, जुलाई में भारतीय नौसेना की ताकत होगी दोगुनी

मुंबई  भारतीय नौसेना जुलाई में दो स्वदेशी युद्धपोतों को सेवा में शामिल करने की तैयारी कर रही है. 21 जून को तीन युद्धपोतों – INS दुनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय के ऐतिहासिक ट्रिपल कमीशनिंग के तुरंत बाद यह एक्सपेंशन हो रहा है. स्टेल्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि और एंटी-सबमरीन वारफेयर वेसल INS मालवन की कमीशनिंग जुलाई में होगी।  INS महेंद्रगिरि: प्रोजेक्ट 17A का अंतिम और शक्तिशाली फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट 17A नीलगिरी क्लास का सातवां और अंतिम जहाज है. इसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने बनाया है. विशाखापट्टनम में कमीशन किया जाएगा. यह जहाज भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण का प्रमुख मील का पत्थर है. इसमें लगभग 75 प्रतिशत पार्ट्स स्वदेशी हैं।  नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया यह स्टेल्थ फ्रिगेट मल्टी-डायमेंशनल युद्ध के लिए तैयार है. इसमें एंटी-एयर, एंटी-सर्फेस और एंटी-सबमरीन क्षमताएं हैं. ब्रह्मोस मिसाइल और मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम से लैस यह जहाज दुश्मन के लक्ष्यों को दूर से भेदने में सक्षम है. एडवांस स्टेल्थ फीचर्स के कारण रडार पर पकड़ना मुश्किल है. लगभग 6700 टन वजन वाला यह जहाज हेलिकॉप्टर भी ऑपरेट कर सकता है।  INS मालवन: तटीय क्षेत्रों का सबमरीन शिकारी INS मालवन एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) प्रोग्राम का दूसरा जहाज है. कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया यह 80 मीटर लंबा और लगभग 1100 टन वजन का जहाज कोच्चि में कमीशन होगा. यह मुख्य रूप से तटीय जल क्षेत्रों में सबमरीन निगरानी और हमले के लिए डिजाइन किया गया है।  जहाज टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट, एडवांस्ड सोनार और आधुनिक रडार से सुसज्जित है. यह माइन वॉरफेयर और लो-इंटेंसिटी समुद्री अभियानों में भी सक्षम है. महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन के नाम पर रखा गया यह जहाज 2003 तक सेवा दे चुके पुराने माइंसवीपर की विरासत को आगे बढ़ाएगा. इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है, जिसमें कई एमएसएमई इकाइयों द्वारा विकसित सिस्टम शामिल हैं।  भारतीय महासागर क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियां, सबमरीन मूवमेंट और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है. ऐसे में INS महेंद्रगिरि जैसे स्टेल्थ फ्रिगेट लंबी दूरी की पेट्रोलिंग और बहु-आयामी युद्ध के लिए उपयोगी होंगे. वहीं, INS मालवन तटीय सुरक्षा और सबमरीन खतरे से निपटने में मजबूती देगा।  नौसेना का लक्ष्य 2026 में रिकॉर्ड संख्या में जहाज शामिल करना है. इससे बेड़े की संख्या 150 से ज्यादा हो जाएगी और समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी. 21 जून की ट्रिपल कमीशनिंग के बाद जुलाई में दो और स्वदेशी युद्धपोतों का शामिल होना भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण का सिलसिला जारी रखेगा।  INS महेंद्रगिरि और INS मालवन समुद्री सुरक्षा को नई ऊंचाई देंगे. यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की कहानी को मजबूत करता है. आने वाले समय में और कई स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स जुड़ेंगे, जो हिंद महासागर में भारत की स्थिति को और मजबूत बनाएंगे। 

भारत की शक्ति में इजाफा: भारतीय नौसेना को मिले 3 ब्रह्मोस मिसाइल से लैस घातक जहाज

मुंबई  हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति के बीच भारत की समुद्री ताकत को एक बड़ा बढ़ावा मिला है। भारतीय नौसेना को सोमवार को कोलकाता में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) से एक ही दिन में तीन नए जहाज प्राप्त हुए हैं। इनमें दो युद्धपोत (एक स्टेल्थ फ्रिगेट सहित) और एक बड़ा सर्वेक्षण पोत शामिल हैं। इन तीनों पोतों के नाम दूनागिरी, अग्रेय और संशोधक हैं। तीनों जहाजों की मुख्य विशेषताएं 1. दूनागिरी (स्टील्थ फ्रिगेट) यह प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित नीलगिरि श्रेणी का पांचवां युद्धपोत है, जिसे पिछले 16 महीनों में नौसेना को सौंपा गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 जुलाई, 2022 को कोलकाता के GRSE में इस प्रोजेक्ट को लॉन्च किया था। यह 149 मीटर लंबा और 6,670 टन वजनी गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है। मारक क्षमता की बात करें तो यह ब्रह्मोस एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ उन्नत रक्षा प्रणालियों से लैस है। यह हवा, सतह और पानी के नीचे बहु-आयामी ऑपरेशनों को अंजाम देने में सक्षम है। वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए इस जहाज के निर्माण में 75% स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है और 200 से अधिक MSME इसमें शामिल रहे हैं। पिछले अनुभवों के आधार पर इसके निर्माण की अवधि को नीलगिरि के 93 महीनों के मुकाबले घटाकर 80 महीने कर दिया गया। 2. अग्रय (एंटी-सबमरीन वारफेयर शिप) यह आठ 'अरनाला' श्रेणी के एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट्स (ASW-SWCs) में से चौथा जहाज है। इसका मुख्य उद्देश्य नौसेना की पनडुब्बी रोधी, माइन-वॉरफेयर और तटीय निगरानी क्षमताओं को बढ़ाना है। 77 मीटर लंबा यह वॉटरजेट-संचालित युद्धपोत अत्याधुनिक लाइटवेट टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उथले पानी के सोनार (SONAR) से लैस है। 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। 3. संशोधक (लार्ज सर्वे वेसल) संशोधक एक विशाल सर्वेक्षण पोत है, जिसे तटीय और गहरे पानी के हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण के लिए डिजाइन किया गया है। इसका विस्थापन लगभग 3400 टन और कुल लंबाई 110 मीटर है। इसका मुख्य काम बंदरगाहों के रास्तों का सर्वेक्षण करना और नेविगेशनल मार्गों (समुद्री रास्तों) का सटीक निर्धारण करना है। इसके अलावा, यह रक्षा और नागरिक इस्तेमाल के लिए समुद्र विज्ञान और भूभौतिकीय डेटा भी एकत्र करेगा। यह डेटा अधिग्रहण प्रणाली, ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल (AUV), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV), DGPS लॉन्ग-रेंज पोजिशनिंग सिस्टम और डिजिटल साइड स्कैन सोनार जैसे अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक उपकरणों से लैस है। यह पोत 30 अक्टूबर 2018 को चार सर्वेक्षण जहाजों के लिए हुए एक कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा है। इसी क्लास के पिछले तीन जहाज- INS संधायक, INS निर्देशक और INS इक्षक क्रमशः फरवरी 2024, दिसंबर 2024 और नवंबर 2025 में कमीशन किए जा चुके हैं। इसमें भी लागत के हिसाब से 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री लगी है। GRSE की अन्य परियोजनाएं GRSE वर्तमान में नौसेना के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण युद्धपोतों का निर्माण कर रहा है।     एक प्रोजेक्ट 17A एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट     चार ASW-SWC     चार नेक्स्ट-जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPVs) इसके अलावा, शिपयार्ड 30 अन्य जहाजों का निर्माण कर रहा है, जिनमें से 13 निर्यात के लिए हैं। GRSE पांच नेक्स्ट-जेनरेशन (अगली पीढ़ी के) कार्वेट के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण अनुबंध को अंतिम रूप देने के भी उन्नत चरण में है।