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झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता, AK-47 बरामद

लातेहार झारखंड में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। प्रतिबंधित झारखंड जन मुक्ति परिषद से जुड़े दो माओवादियों को हथियार और गोला-बारूद के साथ लातेहार जिले के कुरुखेता जंगल क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है।पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुमार गौरव ने बताया कि मंगलवार को एक खुफिया सूचना के बाद जंगल में चलाए गए एक अभियान के दौरान मनोज लोहरा (26) और महादेव सिंह (24) को पकड़ा गया। इस तरह झारखंड को नक्सलमुक्त बनाने में सुरक्षाबलों ने एक कदम और बढ़ा दिया है। भारी मात्रा में हथियार भी मिला बयान के आधार पर हमने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। संगठन के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। अधिकारी ने बताया कि बरामद की गई वस्तुओं में एक एके-47 राइफल, 318 कारतूस, मोबाइल फोन और सिम कार्ड शामिल हैं। उन्होंने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। यह कार्रवाई कुटमखेता जंगल क्षेत्र में छापामारी के दौरान की गई, जहां पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने एसपी के गुप्त सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस को देखते ही उग्रवादी भागने लगे, लेकिन सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर दो लोगों को पकड़ लिया। गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान 26 वर्षीय मनोज लोहरा, पिता भुनेश्वर लोहरा, ग्राम जोबला (ताल पांकी, पलामू) और 24 वर्षीय मनोज महादेव सिंह, पिता स्व. आदन सिंह, ग्राम सिमरियाटांड़, लातेहार के रूप में हुई है। पुलिस ने क्या बताया पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने प्रेस वार्ता कर बताया किनक्सल विरोधी अभियान में लगातार सफलता मिल रही है और माओवादी व जेजेएमपी जैसे संगठन कमजोर पड़ते जा रहे हैं। एसपी ने बताया कि मनोज लोहरा के पास से एसएलआर राइफल, मैगजीन, गोली, मोबाइल फोन सहित अन्य सामग्री बरामद की गई है। वहीं छापेमारी के दौरान झाड़ियों से एके-47 राइफल, मैगजीन, गोली, मोबाइल और वायरलेस सेट भी बरामद हुआ है। बरामद हथियारों और सामग्रियों से स्पष्ट है कि उग्रवादी किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। इस संबंध में मनिका थाना कांड संख्या 41/26, दिनांक 05 मई 2026 दर्ज कर दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस शंकर राम नामक अन्य उग्रवादी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। अभियान में पुलिस अधिकारियों के साथ सशस्त्र बल के जवानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसमें पुलिस पदाधिकारी प्रभात कुमार दास, यकीन अंसारी, सेट-42 कुमंडीडी पिकेट, सेट-137 आईआरबी-04 छिपादोहर के जवान और मनिका थाना के रिजर्व गार्ड शामिल थे।

झारखंड में बड़ी कार्रवाई: लंबे समय से फरार नक्सली मुन्ना आखिरकार दबोचा गया

बलरामपुर. 13 साल से फरार चल रहे नक्सली मुन्ना कोरवा को झारखंड से गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिली है. मुन्ना पर बंधक बनाकर मारपीट और हत्या की नियत से गोली चलाने का आरोप है. साल 2012 से वह जंगल में छिपकर पुलिस की आखों में धूल झोंक रहा था. जानकारी के मुताबिक, नक्सलियों ने लातेहार निवासी लखू यादव को ग्राम पुन्दाग में बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट की थी. नक्सली दस्ता के सदस्य इकबाल यादव के निर्देश पर लखू को जान से मारने के इरादे से गोली चलाई गई, लेकिन वह किसी तरह बचकर भाग निकला। घटना के संबंध में सामरीपीठ में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी. आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं 147, 148, 149, 342, 395, 307, 120बी भादवि एवं आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया था. जांच के दौरान सभी आरोपी भाग निकले थे. न्यायालय ने उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया था. मुखबीर से जानकारी मिली की वारंटी मुन्ना कोरवा झारखंड के तेहड़ी (भण्डरिया) में छिपा हो सकता है. इसके बाद एक विशेष टीम गठित कर झारखंड रवाना किया गया. पुलिस ने आरोपी को दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया. सामरीपाठ लाकर उसे कोर्ट में पेश किया गया.

इनामी नक्सली पति-पत्नी ने खैरागढ़ में आत्मसमर्पण किया, बोले- अब शांति से जीना चाहते हैं

खैरागढ़ खैरागढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली। 20 लाख रुपये के इनामी नक्सली दंपति ने हथियार छोड़कर एसपी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण-पुनर्वास नीति 2025 और क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे विकास कार्यों ने दोनों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया। धनुष उर्फ मुन्ना और पत्नी रोनी उर्फ तुले ने किया सरेंडर आत्मसमर्पण करने वालों में 14 लाख का इनामी हार्डकोर माओवादी धनुष उर्फ मुन्ना (25) और उसकी पत्नी, 6 लाख की इनामी महिला नक्सली रोनी उर्फ तुले (25) शामिल हैं। दोनों माड़ डिवीजन और एमएमसी जोन के सक्रिय कैडर थे और टाण्डा–मलाजखण्ड क्षेत्र में कई नक्सली घटनाओं में शामिल रहे। रोनी, एमएमसी जोन प्रभारी व सीसी मेम्बर रामदेर के साथ काम करती थी, जबकि धनुष को कंप्यूटर व हिंदी–अंग्रेजी टाइपिंग में दक्षता होने के कारण संगठन के टेक्निकल और डाटा कार्य सौंपे जाते थे। केसीजी पुलिस की लगातार सर्चिंग, सिविक एक्शन प्रोग्राम, गांवों में जागरूकता अभियान और सरकार द्वारा सड़क, बिजली, पानी व नेटवर्क जैसी सुविधाओं के विस्तार से इलाके में पुलिस पर भरोसा बढ़ा है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि यह दंपति हिंसा छोड़कर समाज से जुड़ने आगे आया। बोले- अब सम्मानजनक और शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं दोनों ने कहा कि वे अब सम्मानजनक और शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं। पुलिस और प्रशासन का मानना है कि यह आत्मसमर्पण क्षेत्र में शांति बहाली और नक्सल संगठन को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विकास और सरकारी नीतियों का असर साफ दिख रहा है पहाड़ों और जंगलों में अब बदलाव की हवा चल रही है।