samacharsecretary.com

पंडुम कैफे का शुभारंभ बस्तर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का प्रेरक प्रतीक : मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर में सामाजिक-आर्थिक बदलाव के नए अध्याय की शुरुआत करते हुए आज जगदलपुर में ‘पंडुम कैफ़े’ का शुभारंभ किया। यह कैफ़े नक्सली हिंसा के पीड़ितों और समर्पण कर चुके सदस्यों के पुनर्वास हेतु छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों को सम्मानजनक और स्थायी आजीविका प्रदान करने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। यह अनूठी पहल संघर्ष से सहयोग तक के प्रेरणादायक सफर को दर्शाती है।‘पंडुम कैफ़े’ जगदलपुर के पुलिस लाइन परिसर में स्थित है। मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘पंडुम कैफे’ में कार्यरत नारायणपुर की फगनी, सुकमा की पुष्पा ठाकुर, बीरेंद्र ठाकुर, बस्तर की आशमती और प्रेमिला बघेल के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत की। उन्होंने नई शुरुआत के लिए उनका हौसला बढ़ाया और ‘पंडुम कैफ़े’ के बेहतर संचालन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पंडुम कैफ़े का शुभारंभ बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का एक प्रेरक प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने साय ने कहा कि पंडुम कैफे आशा, प्रगति और शांति का उज्ज्वल प्रतीक है। कैफे में कार्यरत युवा, जो नक्सली हिंसा के पीड़ित तथा हिंसा का मार्ग छोड़ चुके सदस्य हैं, अब शांति के पथ पर अग्रसर हो चुके हैं। जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से उन्हें आतिथ्य सेवाओं, कैफ़े प्रबंधन, ग्राहक सेवा, स्वच्छता मानकों, खाद्य सुरक्षा और उद्यमिता कौशल का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति के पथ पर लौटे और कैफ़े में कार्यरत एक महिला ने इस अवसर पर भावुक होकर इस पुनर्वास पहल से हुए बदलाव की बात दोहराई। एक पूर्व माओवादी कैडर ने कहा कि,“हमने अपने अतीत में अंधेरा देखा था। आज हमें समाज की सेवा करने का यह अवसर मिला है, यह हमारे लिए एक नया जन्म है। बारूद की जगह कॉफी परोसना और अपनी मेहनत की कमाई से जीना—यह एहसास हमें शांति और सम्मान दे रहा है।” एक अन्य सहयोगी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि,“पहले हम अपने परिवार को सम्मानजनक जीवन देने का सपना भी नहीं देख सकते थे। अब हम अपनी मेहनत से कमाए पैसों से घर के सदस्यों का भविष्य संवार सकते हैं। यह सब प्रशासन और इस कैफ़े की वजह से संभव हुआ है।” एक अन्य सदस्य ने समुदाय के सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि,“हमें लगा था कि मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होगा, लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन ने हमें प्रशिक्षण दिया और हमारा विश्वास जीता। सबसे बड़ी बात यह है कि हम अब पीड़ितों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे हमें अपने अतीत के अपराधों को सुधारने और शांति स्थापित करने का अवसर मिला है।” उन्होंने यह भी बताया कि ‘पंडुम’ बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है, और इसकी टैगलाइन “जहाँ हर कप एक कहानी कहता है” इस बात का प्रतीक है कि यहाँ परोसी गई कॉफी सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष पर विजय और एक नई शुरुआत की कहानी भी अपने साथ लेकर आती है। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, जगदलपुर महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, संभागायुक्त डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी., कलेक्टर हरिस एस., पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीगण भी उपस्थित थे।

पूर्वी रीजनल नक्सल मोर्चे का पत्र आया सामने, ब्यूरो के तेवर फिर तीखे

जगदलपुर लगातार नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास के दौर के बीच, अब नक्सल संगठन के पूर्वी रीजनल ब्यूरो का नया बयान सामने आया है. यह ब्यूरो झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय बताया जाता है. ब्यूरो की ओर से जारी बयान में लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया गया है. बताया जा रहा है कि इस बयान के पीछे नक्सल नेता मिशिर बेसरा का नाम प्रमुखता से सामने आया है, जिसे इस रीजन का सबसे बड़ा नक्सली माना जाता है. बेसरा और उसके संगठन ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना में लगातार हो रहे नक्सल आत्मसमर्पण की निंदा की है. बयान में कहा गया है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी “संगठन के गद्दार” हैं और राज्य सरकार की नीति में फंस गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह बयान नक्सलियों की घटती ताकत और संगठनात्मक हताशा का संकेत है. बस्तर से लेकर सीमाई राज्यों तक नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों की बढ़त ने अब संगठन की जमीनी पकड़ कमजोर कर दी है.

छत्तीसगढ़ के माओवादी नेता बंडी प्रकाश ने समर्पण किया, DGP के सामने हथियार सौंपे

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के माओवादी पार्टी के प्रमुख नेता बंदी प्रकाश ने तेलंगाना DGP के सामने सरेंडर कर दिया है। बंदी प्रकाश नक्सलियों के तेलंगाना स्टेट कमेटी का मेम्बर और स्पेशल जोनल कमेटी मेम्बर भी है। बंदी प्रकाश पर छत्तीसगढ़ में 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। बंदी प्रकाश का नाम माओवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल है। बंदी प्रकाश उर्फ ​​प्रभात, अशोक, क्रांति मंचेरियल जिले के मंदामरी से हैं। प्रकाश के पिता सिंगरेनी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 1982-84 के बीच "गाँव चलो" आंदोलन के माध्यम से रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (आरएसयू) के लिए संघर्ष किया। इसके बाद वे माओवादी पार्टी से संबद्ध सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष बने और वहाँ से राज्य समिति के सदस्य बने। छात्र नेता से बना माओवादी नेता संगठन में ‘प्रभात’, ‘अशोक’ और ‘क्रांति’ जैसे नामों से पहचाने जाने वाला बंडी प्रकाश तेलंगाना के मंचेरियल जिले के मंदामरी क्षेत्र का रहने वाला है। उसके पिता सिंगरेनी कोलियरी में कर्मचारी हैं। छात्र जीवन में ही वह वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ और 1982–84 के बीच हुए गांव चलो आंदोलन के दौरान रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ गया। इसके बाद सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष के रूप में काम किया और धीरे-धीरे संगठन की ऊंची कमेटियों तक पहुंच गया। हाल के महीनों में माओवादियों पर बढ़ते दबाव और शीर्ष नेताओं के मारे जाने व मुख्यधारा में लौटने के बाद उसने भी मुख्यधारा का रास्ता चुन लिया। यहां बता दें कि कुछ दिन पहले पोलित ब्यूरो सदस्य एवं केंद्रीय क्षेत्रीय ब्यूरो प्रमुख भूपति और केंद्रीय समिति सदस्य रूपेश उर्फ सतीश के नेतृत्व में 271 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके एक दिन बाद कांकेर क्षेत्र में 20 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। बताया जा रहा है कि बंडी प्रकाश के आत्मसमर्पण से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी इकाई की गतिविधियों पर असर पड़ना तय है। इससे पहले भूपति की पत्नी तारक्का, उसकी भाभी सुजाता, और माओवादी नेता सुधाकर की पत्नी ककराला सुनीता भी आत्मसमर्पण कर चुकी हैं। लगातार आत्मसमर्पण की यह श्रृंखला माओवादी संगठन में तेजी से घटते मनोबल और आंतरिक असंतोष की ओर संकेत करती है। सुरक्षाबलों के ऑपरेशन से नक्सलियों में दहशत ज्ञात हो कि, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हाल ही में पुलिस शहीद दिवस के अवसर पर माओवादियों से आत्मसमर्पण करने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि कुछ माओवादी पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं और बाकी भी जन-जीवन में शामिल होकर देश के विकास का हिस्सा बनना चाहते हैं। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कगार के प्रभाव से पार्टी के प्रमुख सदस्य एक के बाद एक अपनी सेना के साथ आत्मसमर्पण कर रहे हैं। पिछले 45 वर्षों से नक्सल संगठन में थे सक्रिय बंदी प्रकाश माओवादी पार्टी में राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण संगठनकर्ता हैं। पिछले 45 वर्षों से विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे उनके आत्मसमर्पण को पार्टी के लिए एक बड़ा झटका कहा जा सकता है।

झारखंड पुलिस की बड़ी जीत: TSPC संगठन के दो एरिया कमांडर ने किया आत्मसमर्पण

रांची  झारखंड में चतरा और पलामू जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय खतरनाक टीएसपीसी नक्सली संगठन के दो बड़े एरिया कमांडर कुलदीप गंझू उफर् पत्थर (कुणाल) और रोहनी गंझू उफर् रोहनी पाहन ने शुक्रवार को चतरा में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों नक्सलियों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण समारोह चतरा समाहरणालय के सभाकक्ष में बोकारो प्रक्षेत्र के आईजी सुनील भास्कर और चतरा एसपी सुमित कुमार अग्रवाल की मौजूदगी में संपन्न हुआ। कुलदीप गंझू के खिलाफ चतरा जिले के कुंदा, सदर, मनातु, छतरपुर, प्रतापपुर और गिद्धौर थाना क्षेत्रों में कुल 16 गंभीर मामले दर्ज हैं। वहीं, रोहनी गंझू पर कुंदा और मनातु थाना क्षेत्रों में 10 आपराधिक मामले हैं। नक्सलियों ने पुलिस को हथियार भी सौंपे। रोहनी गंझू ने एसएलआर राइफल समेत 82 जिंदा राउंड और कुलदीप ने सेमी ऑटोमैटिक राइफल के साथ 103 राउंड जिंदा गोला-बारूद सौंपा। ये दोनों नक्सली क्षेत्र में कई कुख्यात वारदातों में शामिल रहे हैं, जिनमें 25 मई 2024 को पंकज बिरहोर और उनके पिता बिफा बिरहोर की निर्मम हत्या और 7 फरवरी 2024 को अफीम विनष्टिकरण से लौट रहे पुलिस जवानों पर हमले की घटना प्रमुख हैं। उस हमले में दो पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। चतरा एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि यह सफलता लगातार चलाए जा रहे पुलिस अभियान और झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति‘नई दिशा'के व्यापक प्रचार-प्रसार का नतीजा है। पुलिस ने नक्सली परिवारों को इस नीति के बारे में गांव-गांव जाकर जानकारी दी और मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया। टीएसपीसी संगठन के अंदर भी उत्पन्न तनाव और पुलिस की प्रभावी दबिश के कारण ये नक्सलियों ने आत्मसमर्पण का कदम उठाया।

2025 में झारखंड पुलिस का अभियान: नक्सल और साइबर अपराध पर मजबूत कार्रवाई

रांची झारखंड पुलिस ने वर्ष 2025 के जनवरी से सितंबर माह तक नक्सल विरोधी अभियानों और साइबर अपराध नियंत्रण में जबरदस्त सफलता हासिल की है। आईजी अभियान माइकल राज एस ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में कुल 157 हथियार बरामद हुए हैं। इनमें 58 हथियार पुलिस से लूटे गए थे जिसे बरामद करने में कामयाबी मिली है। आईजी ने कहा कि जनवरी से सितंबर तक नक्सलियों के कब्जे से 11,950 गोलियां, 18,884 डेटोनेटर, 394.5 किलोग्राम विस्फोटक और 39.53 लाख रुपए की लेवी राशि जब्त की गई है। इसके अलावा नक्सलियों द्वारा लगाए गए 228 आईईडी विस्फोटकों को नष्ट किया गया और 37 नक्सली बंकर ध्वस्त किए गए। इस अभियान में कुल 266 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस-नक्सली मुठभेड़ों में 32 नक्सली मारे गए, जिनमें दो सेंट्रल कमिटी के बड़े सदस्य विवेक उर्फ प्रयाग मांझी और अनुज उर्फ सहदेव सोरेन शामिल है। इन पर एक करोड़ रुपये का इनाम भी था। साथ ही 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर साहेब राम मांझी उर्फ राहुल भी मुठभेड़ में मारा गया। माइकल ने साइबर अपराध के मामलों में भी बड़ी कार्रवाई का ब्यौरा दिया। अगस्त और सितंबर के बीच साइबर अपराध के 128 मामलों में 105 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से 139 मोबाइल फोन, 166 सिम काडर्, 60 एटीएम कार्ड और 2.81 लाख रुपए नकद बरामद हुए। माइकल ने बताया कि साल 2025 के पहले 9 महीनों में कुल 12,651 वारंट निष्पादित किए गए और 4,186 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 413 वाहनों, 136 हथियारों और 1221 गोलियों को भी जब्त किया गया। अमन साहू गिरोह के सक्रिय अपराधी सुनिल कुमार उफर् मयंक सिंह को अजरबैजान से भारत प्रत्यर्पित कर लाया गया, जिससे पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इसके अलावा रांची में कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर अवैध हथियार व रसायन जब्त किए गए। रामगढ़ डकैती मामले में चार आरोपियों को चार अवैध हथियारों के साथ पकड़ा गया। खूंटी में 838.33 किलोग्राम डोडा जब्त किया गया। वहीं, रांची में जाली नोट के कारोबार में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया जिनके पास 3.25 लाख रुपये के जाली नोट पाए गए। आईजी अभियान माईकल राज एस ने जनता से सहयोग की अपील की और आश्वस्त किया कि पुलिस अपराधियों के खिलाफ कड़ी कारर्वाई करने में पीछे नहीं हटेगी।  

छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता: एनकाउंटर में 4 नक्सली मारे गए, BGL लॉन्चर और राइफल जब्त

रायपुर  छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। बीजापुर और कांकेर में अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 4 नक्सली मारे गए हैं, जिनमें 2 महिला नक्सली शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के पास से हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की है। खुफिया जानकारी के आधार पर यह ऑपरेशन चलाया गया था। 2 महिला नक्सली भी शामिल बीजापुर में गंगालूर इलाके में 2 नक्सली मारे गए, जिनकी पहचान अभी की जा रही है। कांकेर-महाराष्ट्र सीमा पर गढ़चिरौली जिले के गट्टा जाबिया में सुरक्षाबलों ने 2 महिला नक्सलियों को मार गिराया। मारे गए नक्सलियों के शव बरामद कर लिए गए हैं। अभी और बढ़ सकती है संख्या डीआईजी कमलोचन कश्यप ने बताया कि बीजापुर के गंगालूर इलाके में मारे गए नक्सलियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मारे गए नक्सलियों की संख्या बढ़ सकती है। बीजापुर पुलिस को सूचना मिली थी कि गंगालूर इलाके के जंगलों में बड़ी संख्या में नक्सली मौजूद हैं। इसके बाद डीआरजी, एसटीएफ और कोबरा बटालियन के जवान सर्चिंग अभियान पर निकले थे। घात लगाकर बैठे थे नक्सली बुधवार दोपहर करीब 3 बजे घात लगाए बैठे नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में जवानों ने भी गोलियां चलाईं। सर्चिंग में 2 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। मौके से एक 303 राइफल, एक बीजीएल लॉन्चर और विस्फोटक सामग्री भी जब्त की गई है। महिला नक्सलियों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। एक दिन पहले जारी किया था प्रेस नोट एनकाउंटर के एक दिन पहले ही नक्सली लीडर अभय ने प्रेस नोट जारी कर कहा था कि सरकार के सामने सरेंडर करने और हथियार डालने को तैयार हैं। गरियाबंद जिले में 11 सितंबर को जवानों ने एनकाउंटर में 5 करोड़ के 10 इनामी नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें डेढ़ करोड़ का इनामी नक्सली मोडेम बालाकृष्ण भी शामिल था, जो ओडिशा स्टेट कमेटी का सचिव था। एडीजी एंटी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा ने बताया था कि नए जगह पांव पसारने से पहले नक्सलियों का खात्मा कर दिया गया। बड़े नक्सल नेटवर्क को तोड़ा गया। जवानों ने जंगल में घेरकर नक्सलियों को मारा। सभी इनामी नक्सली थे।  

बीजापुर में बड़ी कामयाबी: ₹24 लाख के इनामी माओवादी सहित 9 ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

रायपुर : छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता: बीजापुर में ₹24 लाख के इनामी सहित 9 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन को बढ़त, बीजापुर में ₹24 लाख के इनामी समेत 9 माओवादी सरेंडर बीजापुर में बड़ी कामयाबी: ₹24 लाख के इनामी माओवादी सहित 9 ने छोड़ा हिंसा का रास्ता छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर सफलता, बीजापुर में 9 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा – नक्सलवाद अब अंतिम साँसें गिन रहा है, 31 मार्च 2026 तक पूर्ण समाप्ति के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार रायपुर छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। बीजापुर जिले में ₹24 लाख के इनामी समेत कुल 9 माओवादियों ने आज आत्मसमर्पण किया है, वहीं एक अन्य घटनाक्रम में एक माओवादी मुठभेड़ के दौरान न्यूट्रलाइज़ किया गया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  कहा कि यह बदलते बस्तर की तस्वीर है जहाँ बंदूकें झुक रही हैं और विकास की आवाज़ बुलंद हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सफलता सुरक्षाबलों के अदम्य साहस और भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक केंद्रीय गृह मंत्री के पद पर सेवा देने वाले श्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन का प्रतिफल है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि केंद्रीय मंत्री श्री अमित शाह  का कार्यकाल भारत की आंतरिक सुरक्षा का वह युग है जिसने असंभव को संभव बना दिया है। अनुच्छेद 370 की ऐतिहासिक समाप्ति हो या नक्सलवाद एवं आतंकवाद पर कठोर प्रहार का निर्णय – उन्होंने सदैव भारत को एक सुरक्षित, सशक्त और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाया है।  छत्तीसगढ़ में दिसंबर 2023 से अब तक लगभग 450 माओवादी न्यूट्रलाइज़ किए जा चुके हैं, 1579 माओवादी गिरफ्तार हुए हैं, और लगभग 1589 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह आँकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की मंशा के अनुरूप 31 मार्च 2026 तक राज्य से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।  मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास की प्रक्रिया को तेज़ी से लागू करने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश भी दिए हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस सफलता के लिए सुरक्षाबलों, खुफिया एजेंसियों और प्रशासनिक अमले को बधाई दी है और कहा है कि बस्तर अब अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ चुका है। विकास ही अब उसकी पहचान बनेगा।

देशभर में नक्सलियों के बुरे दिन, नक्सलियों का कबूलनामा कुल 357 साथी मारे गए

रायपुर  नक्सली संगठनों ने अपने कबूलनामे में माना है कि सुरक्षाबलों के हाथों पिछले एक साल में उनके 357 माओवादी मारे जा चुके हैं. कबूलनामे के मुताबिक सुरक्षाबलों के गोलियों के शिकार हुए नक्सलियों में महिला नक्सली भी शामिल हैं, जिनकी संख्या 136 बताई गई है. नक्सलियों के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त मुहिम से नक्सल संगठनों की हालत खराब है. लगातार नक्सली निशाने पर आ रहे नकस्ली या तो सरेंडर करने को मजबूर हैं या गिरफ्तार हो रहे हैं वरना सुरक्षाबलों के गोलियों के शिकार होकर मारे जा रहे हैं. जहां, 281 नक्सली मारे गए  रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए नक्सलियों में 4 सीसी मेम्बर 15 राज्य कमेटी के नक्सली शामिल बताए जाते हैं. कबूलनामे के मुताबिक एंटी नक्सल ऑपरेशन से नक्सल संगठन को सबसे बड़ा नुकसान दण्डकारण्य में हुआ है, जहां, 281 नक्सली मारे गए हैं. जबकि, कुछ महीने पहले भी नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी के प्रवक्ता ने लेटर जारी किया था। जिसमें डेढ़ साल में 400 से ज्यादा नक्सलियों के मारे जाने का जिक्र था। इधर, पुलिस के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में सिर्फ बस्तर में ही करीब 420 से ज्यादा नक्सलियों का एनकाउंटर हुआ है। वहीं इस बीच बीजापुर में नक्सलियों ने 2 शिक्षा दूतों की हत्या कर दी है। 15 जुलाई की सुबह पीलूर गांव में के जंगल में लाश बरामद हुई है। एक की पहचान विनोद मडे के तौर पर हुई है। वो शिक्षा दूत था। इन पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाया गया है। फिलहाल घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले, बीजापुर में नक्सलियों ने 15 दिनों में मुखबिरी के शक में 6 लोगों की हत्या की थी। जिसमें 4 ग्रामीण और 2 छात्र शामिल हैं। 136 महिला नक्सली भी शामिल दरअसल, नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के नाम से जारी इस बुकलेट में लिखा है कि सालभर में नक्सलियों के पोलित ब्यूरो मेंबर और नक्सल संगठन के महासचिव बसवा राजू समेत सेंट्रल कमेटी के 4 सदस्य, स्टेट कमेटी के 16 सदस्य मारे गए हैं। इन 357 में 136 महिला नक्सली भी मारी गई हैं। सबसे ज्यादा दंडकारण्य में 281 नक्सली ढेर हुए हैं। इन राज्यों में इतने नक्सली मारे गए नक्सलियों के इन आंकड़ों के मुताबिक, 14 बिहार-झारखंड, 23 तेलंगाना, 281 दंडकारण्य, 9 आंध्र-ओडिशा विशेष क्षेत्र/आंध्र प्रदेश, 8 महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी), 20 ओडिशा, 1 पश्चिमी घाट और 1 पंजाब से हैं। उनके 4 साथी खराब स्वास्थ्य और अनुचित उपचार के कारण, 1 दुर्घटना में, 80 फर्जी मुठभेड़ों में और 269 घेराबंदी हमलों में मारे गए। इन कैडर्स के नक्सली ढेर मारे गए नक्सलियों में बसवा राजू समेत राज्य समिति स्तर के 16, जिला समिति के 23, एसी/पीपीसी के 83, पार्टी के 138 सदस्य, PLGA के 17 सदस्य, जन संगठनों के 6 सदस्य और 34 लोग शामिल हैं। 36 लोगों का विवरण उपलब्ध नहीं है। नक्सलियों का कहना है कि अधिकांश कगार युद्ध में मारे गए हैं। घेराबंदी के दौरान कुछ साथी पकड़े गए। जिनकी हत्या की गई। सिर्फ बस्तर में ही मारे गए 420 से ज्यादा नक्सली बस्तर में 1 जनवरी 2024 से जून 2025 तक हुई अलग-अलग मुठभेड़ों में 420 से ज्यादा नक्सलियों का एनकाउंटर किया गया है। पुलिस के मुताबिक इनमें 2024 में 217 नक्सली और पिछले 6 महीने में 200 से ज्यादा नक्सली मारे गए हैं। वहीं नक्सलियों के अलग-अलग लेटर में जारी आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि नक्सल संगठन भी मारे गए नक्सलियों के स्पष्ट आंकड़े जारी नहीं कर रहा है। पिछले डेढ़ साल में नक्सलियों को बड़ी क्षति पहुंची है। शहीदी सप्ताह मनाएंगे नक्सली अपने मारे गए साथियों की याद में नक्सली 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाएंगे। इस दौरान मारे गए साथियों को श्रद्धांजलि देंगे। गांव-गांव में सभा करेंगे। वहीं इस दौरान नक्सली किसी बड़े हमले की भी प्लानिंग करते हैं। नक्सलियों के बुकलेट में लिखा है कि देश में क्रांतिकारी आंदोलन को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के 'कगार' युद्ध को विफल किया जाएगा। जनसमुदाय को वर्ग संघर्ष और गुरिल्ला युद्ध में लामबंद करने की बात लिखी है। 24 पेजों वाला बुकलेट जारी  नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी ने जारी एक प्रेस नोट में यह कबूल किया है. करीब 24 पेज वाले गोंडी बोली व इंग्लिश भाषा में नक्सलियों ने कबूलनामे का बुकलेट भी जारी किया हैं. कबूलनामे के मुताबिक नक्सली संगठन मारे गए साथियों की याद में 28 जूलाई से 3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाएंगे. पिछले एक साल में सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए नक्सलियों में 4 सीसी मेम्बर 15 राज्य कमेटी के नक्सली शामिल बताए जाते हैं. कबूलनामे के मुताबिक एंटी नक्सल ऑपरेशन से नक्सल संगठन को सबसे बड़ा नुकसान दण्डकारण्य में हुआ है, जहां, 281 नक्सली मारे गए हैं. मार्च, 2026 तय है नक्सल उन्मूलन! केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे देश से नक्सलियों को उखाड़ फेंकने के लिए सुरक्षाबलों को खुली छूट दे रखी है. शाह ने नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए मार्च, 2026 की तारीख भी तय कर दी है. सुरक्षाबलों की कार्रवाई से हलकान होकर लगातार नक्सली सरेंडर कर रहे हैं,  जिससे संगठन लगातार कमजोर हुआ है.  

बीजापुर में शिक्षा दूत की हत्या, शिक्षा दूतों का नक्सलियों पर पुलिस मुखबिर होने के शक में हत्या का

बीजापुर  नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगा रहे दो शिक्षादूतों की बीती रात नक्सलियों ने अपहरण के बाद निर्मम हत्या कर दी. मृतक शिक्षादूतों की पहचान पिल्लूर निवासी विनोद मड्डे (32 वर्ष) जो कोंडापड़गु प्राथमिक शाला में पदस्थ थे. दूसरे शिक्षा दूत की पहचान सुरेश मेटा (28 वर्ष) के रूप में हुई है जो प्राथमिक शाला, टेकमेटा में पदस्थ थे. दोनों के शव गांव के पास जंगल में फेंके गए मिले हैं. जबरन घर से उठाकर नक्सलियों ने की हत्या: ग्रामीणों के अनुसार, बीती रात अज्ञात नक्सलियों ने दोनों को जबरन घर से उठाया, उनसे पूछताछ के बाद कुछ ही घंटों बाद उनकी हत्या कर दी. यह घटना फारसेगढ़ थाना क्षेत्र की है, परंतु इलाके में फैले डर के कारण ग्रामीण अब तक पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं करवा सके हैं.  इससे पहले, बीजापुर में नक्सलियों ने 15 दिनों में मुखबिरी के शक में 6 लोगों की हत्या की थी। जिसमें 4 ग्रामीण और 2 छात्र शामिल हैं। नक्सलियों ने पिछले 25 साल में 1821 लोगों का मर्डर किया है। 17 जून को 3 लोगों की हुई थी हत्या इससे पहले, 17 जून 2025 को नक्सलियों ने बीजापुर जिले के एक गांव में 3 ग्रामीणों की रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इनमें एक 13 साल का 7वीं और दूसरा 20 साल का कॉलेज का छात्र और तीसरा ग्रामीण युवक शामिल है। पूरा मामला पेद्दाकोरमा गांव का है। गांववालों का कहना था कि, 17 जून की शाम करीब 70 से 80 की संख्या में हथियार बंद नक्सली पहुंचे थे। उन्होंने छात्र सोमा मोड़ियाम (20), अनिल माड़वी (13) समेत एक अन्य ग्रामीण को घर से उठा लिया था।सोमा इसी साल 12वीं पास कर कॉलेज में दाखिल हुआ था, जबकि अनिल 7वीं का छात्र था। नक्सली गांव के 10 से ज्यादा लड़कों को बंधक बनाकर अपने साथ लेकर गए। हालांकि, उनकी बेदम पिटाई करने के बाद उन्हें छोड़ दिया। पुलिस के एक्शन से बौखलाए नक्सली अब स्कूल और कॉलेज के बच्चों का कत्ल कर रहे हैं। सरेंडर नक्सली के रिश्तेदारों की हत्या दरअसल, मारे गए सभी ग्रामीण DVCM कैडर के सरेंडर नक्सली दिनेश मोड़ियम के रिश्तेदार थे। नक्सलियों ने आरोप लगाया कि इन्हीं लोगों ने उसे सरेंडर करने के लिए उकसाया, उससे पैसे लिए। इसी वजह से इनकी हत्या कर मौत की सजा दे दी। 22 जून को भी 2 लोगों को मार डाला इसके बाद बीजापुर जिले में 22 जून को नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी के शक पर समैय्या और वेको देवा की हत्या की थी। समैय्या पहले नक्सली था। उसने 2025 में आत्मसमर्पण किया है। वहीं वेको देवा ग्रामीण है। दोनों नक्सल प्रभावित गांव सेंड्राबोर और एमपुर के रहने वाले थे। मामला पामेड़ थाना क्षेत्र का है। कौन है शिक्षा दूत: विनोद मड्डे और सुरेश मेटा, दोनों ही शिक्षादूत योजना के तहत नक्सल प्रभावित बंद स्कूलों को फिर से शुरू करने की मुहिम में लगे थे. गृहमंत्री विजय शर्मा कुछ समय पहले जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव में पहुंचे थे, उस दौरान इन शिक्षादूतों की सराहना भी की थी, जो विषम हालात में भी बच्चों को शिक्षा देने के कार्य में जुटे थे. इन शिक्षकों को राज्य सरकार की ओर से 10,000 से 12,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है. जिले में इस समय लगभग 350 शिक्षादूत कार्यरत हैं, जो दुर्गम इलाकों में जाकर बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं. परिवार में रो रोकर बुरा हाल: शिक्षादूत विनोद मड्डे के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं, जबकि सुरेश मेटा अब तक अविवाहित थे. उनके परिवारजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. पिल्लूर और टेकमेटा गांव में मातम छाया हुआ है. गांववाले इस क्रूर घटना से सदमे में हैं और लगातार सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. मुखबिरी के शक में अबतक हुई हत्याएं     2 जुलाई 2025: बीजापुर के उसूर में युवक की हत्या, मुखबिरी का आरोप     20 फरवरी 2025: दंतेवाड़ा में पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर दो लोगों की नक्सलियों ने की हत्या     4 फरवरी 2025: दंतेवाड़ा के ककाड़ी के रहने वाले हड़मा हेमला की हत्या, पुलिस मुखबिरी का आरोप     21 दिसंबर 2024: बीजापुर में नक्सलियों ने कथित जनअदालत लगाकर एक ही परिवार के 2 लोगों की हत्या की     11 दिसंबर 2024: बीजापुर के फरसेगढ़ में युवक पर मुखबिरी का आरोप लगाकर हत्या     6 दिसंबर 2024: बासागुड़ा थाना इलाके के तिम्मापुर गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की हत्या     8 दिसंबर 2024: मद्देड़ इलाके के लोदेड़ गांव में 40 साल की महिला की हत्या     12 नवंबर 2024: बीजापुर में ग्रामीण माड़वी दुलारू की हत्या, पुलिस मुखबिर का आरोप     29 अक्टूबर 2024: बीजापुर में 35 साल के ग्रामीण दिनेश पुजार की हत्या     23 अक्टूबर 2024: सुकमा में ग्रामीण को अगवा कर उसकी हत्या की थी.     19 अक्टूबर 2024: सुकमा में पुलिस मुखबिरी के शक में युवक की हत्या     25 सितंबर 2024: सुकमा के भंडारपदर गांव में 50 साल के ग्रामीण पीट पीटकर हत्या     12 सितंबर 2024: बीजापुर के जप्पेमरका में 2 ग्रामीणों का अपहरण कर फांसी पर लटकाया     28 अगस्त 2024:बीजापुर के मिरतुर में 27 साल के युवक की तिमनार गांव में हत्या     28 अगस्त 2024: भैरमगढ़ में नक्सलियों ने की युवक की हत्या     23 अगस्त 2024: गंगालूर थाना इलाके के पूसनार गांव के जमींदार की हत्या     11 अगस्त 2024: कोंटा में उप सरपंच की हत्या     11 जुलाई 2024: सुकमा में नक्सलियों ने की युवक की हत्या 25 साल में 1821 लोगों की हत्या बता दें कि, नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से लेकर अब तक यानी पिछले 25 सालों में बस्तर के अलग-अलग जिलों में कुल 1821 लोगों की हत्या की है। इनमें आम नागरिक समेत जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा हत्या बीजापुर जिले में ही हुई है।