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छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त होने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर श्रद्धांजलि एवं दीपदान कार्यक्रम आयोजित

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त होने की ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में भारतीय जनता युवा मोर्चा, जिला बिलासपुर द्वारा सत्यम चौक स्थित शहीद विनोद चौबे जी की स्मृति में श्रद्धांजलि एवं दीपदान कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए दीप प्रज्वलित कर उनके बलिदान को नमन किया। कार्यक्रम में बिलासपुर विधायक माननीय अमर अग्रवाल जी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। साथ ही भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक सिंह जी, भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष वैभव गुप्ता जी एवं संगठन के समस्त पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में सुरक्षा बलों और शहीदों के योगदान को याद किया तथा इस उपलब्धि को प्रदेश के विकास और शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान भी किया। पूरे आयोजन में देशभक्ति का उत्साह और श्रद्धा का भाव देखने को मिला। दीपदान के माध्यम से उपस्थित लोगों ने शहीदों की स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का माध्यम बना, बल्कि समाज में एकता, देशभक्ति और जागरूकता का संदेश भी प्रसारित करने में सफल रहा।

हिंसा को पीछे छोड़, कांकेर में नक्सल प्रभावितों को मिल रही नई दिशा और रोजगार के अवसर

हिंसा छोड़कर नई दिशा, नई राह की ओर बढ़ रहे कदम आत्मसमर्पित व नक्सल पीड़ितों को कलेक्टर ने सौंपा नियुक्ति पत्र प्रशिक्षण उपरांत रोजगार देने वाला पहला जिला बना कांकेर रायपुर  मानव समाज का सबसे उत्कृष्ट पहलू सकारात्मक परिवर्तन है, जिससे जीवन में नवाचार और नए विचार जन्म लेते हैं। ऐसा ही बदलाव आत्मसमर्पित माओवादियों के जीवन में दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर उन्हें पहले प्रशिक्षित किया गया और अब कुशल होने के बाद रोजगार भी मुहैया हो रहा है। आत्मसमर्पित माओवादियों को भानुप्रतापपुर के ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें पारंगत होने के बाद प्रशासन के प्रयासों से रोजगार भी दिलाया जा रहा है। मुख्यधारा में लौटकर प्रशिक्षण के उपरांत रोजगार प्रदान करने के मामले में उत्तर बस्तर कांकेर पहला जिला है। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर और जिला पंचायत के सीईओ श्री हरेश मंडावी ने आज कलेक्टर कक्ष में आज सुबह 04 आत्मसमर्पित माओवादी व पीड़ितों को नियुक्ति पत्र सौंपा तथा उन्हें नई शुरूआत के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। इनमें पुनर्वासित सगनूराम आंचला एवं नक्सल पीड़ित रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल थे। इन सभी को निजी फर्म का नियुक्ति पत्र प्रदाय किया गया, जहां 15 हजार रूपए प्रतिमाह मानदेय और अन्य प्रकार की वित्तीय सुविधाएं प्राप्त होंगी। श्री आंचला ने बताया कि शिक्षा और सही-गलत की जानकारी के अभाव में माओवादी संगठन से जुड़ गया था। उन्हांने कहा कि मनुष्य की अहमियत मुख्यधारा में जुड़ने के बाद ही पता चली। जीवन के अलग-अलग रंगों व वास्तविक खुशियों की पहचान अब जाकर हुई। श्री आंचला ने शासन-प्रशासन का आभार मानते हुए कहा कि जीने का असली मकसद अब मिला है। इसी तरह माओवाद पीड़ित श्री बीरसिंह मंडावी ने कहा कि ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में पुनर्जीवन मिला है, जहां निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल एवं पारंगत बनाया गया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद जिला प्रशासन द्वारा रोजगार भी दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर हिंसा का मार्ग छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। ज्ञात हो कि प्रशिक्षण देकर उन्हें नियोजित करने के मामले में कांकेर बस्तर संभाग का पहला जिला बन गया है। यह शासन की विशिष्ट पहल है, जिसके चलते उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने व तराशने तथा उसे नई दिशा देने की कवायद हो रही है। इस प्रकार शासन की सकारात्मक पहल का प्रत्यक्ष लाभ पुनर्वासितों व पीड़ितों को मिल रहा है।

बालाघाट पुलिस की पहल: आत्मसमर्पित नक्सली सिलाई और ड्राइविंग सीख रहे, 14 परिवारों को मिली सरकारी नौकरी

बालाघाट  बालाघाट पुलिस ने नक्सलियों को समाज की मुख्य धारा में वापस लाने और नक्सली हिंसा के पीड़ितों की मदद के लिए एक खास मुहिम शुरू की है। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सली अब हथियार छोड़कर सिलाई और ड्राइविंग जैसे काम सीख रहे हैं. पुलिस लाइन में फिलहाल 10 आत्मसमर्पित नक्सली (5 पुरुष और 5 महिला) सिलाई और ड्राइविंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं। पिछले डेढ़ महीने से चल रही इस ट्रेनिंग में ये लोग शर्ट-पेंट सिलना और जेसीबी चलाना सीख रहे हैं ताकि वे खुद का रोजगार शुरू कर सकें। इनमें सुनीता ओयाम, सुरेंद्र, राकेश और सलीता जैसे कई पूर्व नक्सली शामिल हैं। पीड़ित परिवारों को मिला सहारा पुलिस ने उन 14 परिवारों की भी मदद की है जिनके सदस्यों को नक्सलियों ने 'मुखबिरी' के शक में मार दिया था। इन परिवारों के सदस्यों को आरक्षक (कॉन्स्टेबल) के पद पर नौकरी दी गई है। सुमित उईके के पिता की हत्या 2002 में हुई थी। सुमित बताते हैं कि उन्हें पहले पुलिस की नौकरी से डर लगता था, लेकिन अब वे खुश हैं। संजय कुमार पुसाम सिर्फ 8वीं तक पढ़े हैं, इन्होंने कभी सोचा नहीं था कि पिता की मौत के बाद उन्हें पुलिस विभाग में काम करने का मौका मिलेगा। पुलिस अधीक्षक की पहल एसपी आदित्य मिश्रा के नेतृत्व में चल रही इस पहल का मकसद हिंसा से प्रभावित लोगों का पुनर्वास करना और उन्हें आर्थिक सुरक्षा देना है। नौकरी पाने वालों में तेजाबसिंह, अनिल मेरावी, निशा राउत और डिलेश्वरी जैसे 14 लोग शामिल हैं, जो अब पुलिस बल का हिस्सा बनकर समाज की सेवा कर रहे हैं।

दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा पर मुठभेड़: ₹5 लाख का इनामी माओवादी ढेर, बरामद हुए बड़े पैमाने पर हथियार

दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों की सीमा से लगे जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ (Dantewada Maoist encounter) में एक इनामी माओवादी मारा गया। पुलिस ने मौके से हथियार और बड़ी मात्रा में माओवादी सामग्री बरामद की है। घटना के बाद इलाके में सर्चिंग अभियान तेज कर दिया गया है। सर्चिंग अभियान के दौरान हुई मुठभेड़ पुलिस के अनुसार दंतेवाड़ा जिले के थाना गीदम क्षेत्र के अंतर्गत गुमलनार, गिरसापारा और नेलगोड़ा के बीच स्थित जंगल-पहाड़ इलाके में माओवादियों द्वारा हथियार और सामग्री डम्प किए जाने की सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और बस्तर फाइटर्स के जवानों की संयुक्त टीम को सर्चिंग अभियान के लिए रवाना किया गया। सुरक्षा बल इलाके में तलाशी अभियान चला रहे थे, इसी दौरान माओवादियों के साथ उनका आमना-सामना हो गया। माओवादियों ने अचानक शुरू की फायरिंग जानकारी के मुताबिक अभियान के दौरान रात करीब 8:30 से 9 बजे के बीच पहले से घात लगाए बैठे भैरमगढ़ एरिया कमेटी के लगभग 8 से 10 सशस्त्र माओवादियों ने अचानक जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। कुछ समय तक दोनों ओर से गोलीबारी चलती रही। हालांकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान माओवादी घने जंगल का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल हो गए। मुठभेड़ के बाद तलाशी में मिला माओवादी का शव मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके में सर्चिंग अभियान चलाया। तलाशी के दौरान घटनास्थल से एक पुरुष माओवादी का शव बरामद किया गया। इसके अलावा वहां से हथियार और बड़ी मात्रा में माओवादी सामग्री भी जब्त की गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बरामद सामग्री से माओवादी गतिविधियों से जुड़े कई अहम सुराग मिलने की संभावना है। राजेश पुनेम के रूप में हुई पहचान पुलिस ने मृत माओवादी की पहचान राजेश पुनेम के रूप में की है। वह भैरमगढ़ एरिया कमेटी (एसीएम) का सक्रिय सदस्य बताया गया है। राजेश पुनेम बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के बुरजी गांव का निवासी था। उस पर शासन की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। जंगलों में सर्चिंग अभियान जारी पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुठभेड़ के बाद आसपास के जंगलों में अन्य माओवादियों की तलाश के लिए सर्चिंग अभियान जारी है। सुरक्षा बल लगातार क्षेत्र में अभियान चलाकर माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में कार्रवाई कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है और जवानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षाबलों ने नक्सलगढ़ पुरंगेल में पेश की मानवता की मिसाल, आग से झुलसी महिला को बचाने के लिए चारपाई पर किया रेस्क्यू

  दंतेवाड़ा दंतेवाड़ा जिले के नक्सल प्रभावित अंदरूनी क्षेत्र पुरंगेल गांव में नक्सल सर्चिंग पर निकले एसटीएफ जवानों ने मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए एक गंभीर रूप से आग से झुलसी ग्रामीण महिला की जान बचाई. सुरक्षा बल जहां एक ओर नक्सल अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की मदद कर भरोसे की नई तस्वीर भी पेश कर रहे हैं. 10-15 दिन पहले आग में जल गई थी महिला जानकारी के अनुसार एसटीएफ की टीम नक्सल ऑपरेशन के तहत बीजापुर से दंतेवाड़ा के दुर्गम जंगलों में सर्चिंग कर रही थी. इसी दौरान जवान जब नक्सलगढ़ माने जाने वाले पुरंगेल गांव पहुंचे, तब उन्हें एक महिला की गंभीर हालत की सूचना मिली. मौके पर पहुंचने पर पता चला कि महिला करीब 10-15 दिन पहले आग तापते समय दुर्घटनावश आग में गिर गई थी, जिससे कमर से ऊपर तक उसका शरीर बुरी तरह झुलस गया था. दूरस्थ इलाके और इलाज की सुविधा नहीं मिलने के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी. चारपाई के सहारे पहुंचाया महिला की स्थिति देखकर एसटीएफ कंपनी कमांडर ओम प्रकाश सेन और उनकी टीम ने तुरंत मानवीय पहल करते हुए रेस्क्यू शुरू किया. जवानों ने दुर्गम जंगल और पहाड़ी रास्तों के बीच चारपाई को कावड़ की तरह इस्तेमाल कर महिला को कई किलोमीटर पैदल सुरक्षित बाहर निकाला और हिरोली गांव तक पहुंचाया. वहां पहले से बुलाई गई एंबुलेंस के जरिए घायल महिला को किरंदुल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल दंतेवाड़ा रेफर किया गया. तीन माह के मासूम बच्चे की देखभाल की कराई व्यवस्था डॉक्टरों के अनुसार महिला लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक झुलस चुकी थी और समय पर इलाज न मिलने से घाव गंभीर हो चुके थे. जवानों ने महिला के तीन माह के मासूम बच्चे की देखभाल की भी व्यवस्था कराई और अस्पताल प्रशासन से समन्वय बनाकर उपचार सुनिश्चित कराया. एसटीएफ अधिकारियों ने जवानों के इस कार्य को मानवता और कर्तव्य का उत्कृष्ट उदाहरण बताया. स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन ने भी जवानों की संवेदनशील पहल की सराहना करते हुए इसे सुरक्षा बल और ग्रामीणों के बीच बढ़ते विश्वास का प्रतीक बताया है.

जहां मर्द भी गांव छोड़ते थे, अब सुरक्षा बलों की कार्रवाई से हुई बदलाव

जमुई  बिहार के जमुई जिला का वो इलाका जिसे नक्सल समस्या के कारण लाल गलियारा की संज्ञा दी जाती थी. जिस इलाके से सटे जंगल में मुंगेर के तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू विस्फोट में शहीद हो गए थे. जिस इलाके के मर्द नक्सली खौफ के कारण दूसरे जगहों पर पलायन कर जाते थे. वहां अब सूरत बदलने लगी है. सीआरपीएफ के कैम्प आने के बाद तीन नक्सलियों के सरेंडर से लाल गलियारा में चहल पहल बढ़ गई. पलायन किए लोग गांव लौट आए हैं अब इंतजार है विकास का. सुरक्षा के बाद अब यहां बात होने लगी है बिजली, सड़क, शिक्षा और संचार सुविधा की. जमुई जिले के बरहट इलाके का चौरमारा गांव जो जंगलों और पहाड़ों से घिरा है. जहां दशकों से नक्सलियों का बोलबाला था. लाल गलियारे कहे जाने वाले इसी जंगली इलाके की सड़क पर नक्सलियों द्वारा किए गए एक विस्फोट में मुंगेर के तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू शहीद हो गए थे. अब वहां नक्सल समस्या खत्म हो चली है, चौरमारा वाले इस इलाके में अब विकास की बात की जा रही है. नक्सलियों के खौफ के कारण जो लोग पलायन कर गए थे वह गांव लौट आए हैं. चौरमारा गांव के नागेश्वर कोड़ा की कहानी भी ऐसी ही है. नक्सलियों के डर और खौफ के कारण नागेश्वर गांव छोड़कर दूसरे महानगर में चले गए थे, जबकि उनकी पत्नी संगीता देवी गांव में ही रही. लोगों को बुरी तरह पीटते थे नक्सली  संगीता देवी का सामना कई बार नक्सलियों के दस्ते से हुआ, जो गांव में अक्सर आकर अत्याचार करते थे. नक्सली खौफ के खात्मे के बाद यह दंपति उन घटनाओं को याद कर अभी भी सहम जाते हैं. संगीता बताती हैं कि कई बार हमारे सामने ही नक्सली लोगों को मारते-पीटते थे. जबरन साथ में बंधक बनाकर ले जाते और अपना काम कराते थे. मना करने पर लोगों को पीट-पीटकर घायल कर देते थे. उनके पति नागेश्वर बताते हैं कि मारपीट और अत्याचार की घटनाओं से डरकर उन्हें गांव छोड़ना पड़ गया था. कई लोगों ने छोड़ दिया था गांव  सिर्फ नागेश्वर कोड़ा ही नहीं गांव के अधिकांश मर्द जान जाने के डर और नक्सलियों की पिटाई के खौफ के कारण गांव से पलायन कर गए थे, अब वापस आ चुके हैं. यह सब संभव हुआ जब गांव में सरकार ने सीआरपीएफ कैंप लगा दी. पैरा मिलिट्री फोर्सेज की तैनाती के बाद इस इलाके में नक्सलियों का खौफ तब और खत्म हो गया जब यहां के हार्डकोर तीन नक्सली कमांडर ने सरेंडर कर दिया. सुरक्षा के बाद अब यहां के लोग विकास मांग रहे हैं, गांव में अभी तक बिजली नहीं, संचार की कोई सुविधा नहीं, गांव जाने वाली सड़क कच्ची है. हालांकि कई दशक के बाद यहां के लोग पहली बार अपना वोट गांव में डालें, सरकारी अनाज अब गांव तक पहुंचने लगा, लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतरी की मांग हो रही है. जंगल में बसे चोरमारा की आबादी लगभग 4 हजार है. नक्सली खौफ के खात्मे के बाद विकास की मांग पर सरकार और जिला प्रशासन की गंभीर है. जिले के डीएम का कहना है कि बिजली संचार सड़क शिक्षा जैसी चीजों पर काम हो रही है आने वाले दिनों में जल्द ही बेहतर परिणाम देखे जाएंगे.

बस्तर में माओवादी हिंसा की दिशा बदलने का वक्त, 60 लाख के इनामी माओवादी की हुई शिनाख्त

 जगदलपुर  बस्तर से लेकर तेलंगाना तक फैला माओवादी नेटवर्क अब निर्णायक रूप से टूट चुका है। दशकों से जारी लाल आतंक का ‘रिवर्स काउंटडाउन’ (उल्टी गिनती) शुरू हो गया है। सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, निरंतर दबाव और नेतृत्व के विघटन ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है। सुरक्षा एजेंसियों का विश्वास है कि 26 जनवरी को इसकी घोषणा कर दी जाए।  तेलंगाना में पीएलजीए (पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी) बटालियन नंबर–एक के प्रमुख बारसे देवा उर्फ सुक्का के आत्मसमर्पण और सुकमा में कोंटा एरिया कमेटी प्रमुख के मारे जाने के बाद बस्तर में संगठन लगभग नेतृत्वविहीन हो गया है। पापा राव ही एकमात्र बड़ा नाम शेष अब शीर्ष स्तर पर पापा राव ही एकमात्र बड़ा नाम शेष है। 14 माओवादी शनिवार को सुकमा, बीजापुर में मारे गए थे। उधर, तेलंगाना में बारसे देवा ने अपने 20 साथियों के साथ समर्पण किया था। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी का कहना है कि माओवादी संगठन का संख्या बल लगातार घट रहा है और नेतृत्व पूरी तरह बिखर चुका है। बस्तर में अब केवल पापा राव शीर्ष स्तर पर बचा है, जबकि जमीनी स्तर पर गिनती के ही माओवादी सक्रिय हैं। यदि बचे हुए माओवादी समय रहते आत्मसमर्पण नहीं करते, तो भविष्य में उनके लिए यह विकल्प भी नहीं बचेगा। पांच महिला सहित 12 माओवादियों की शिनाख्त वहीं सुकमा में बुर्कलंका और पामलूर इलाके में शनिवार को मुठभेड़ में मारे गए पांच महिला सहित 12 माओवादियों की शिनाख्त हो गई है। सभी शवों को जिला मुख्यालय लाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद स्वजन को सौंपा जाएगा। माओवादियों में डीवीसीएम वेट्टी मंगडू उर्फ मुक्का आठ लाख का इनामी, एसीएम माड़वी हितेश आठ लाख, सीवाईपीसी पोड़ियम जोगा 10 लाख, कोमरम बदरी, झितरू माड़वी, माड़वी मुक्का, मुचाकि मुन्नी, माड़वी जमली, पोड़ियम रोशनी ये सभी एसीएम जिन पर पांच लाख का इनाम घोषित था। इनके अलावा तामो नंदा, मड़कम रामा, मासे ये तीनों पार्टी के सदस्य थे और इन पर दो लाख का इनाम राशि घोषित था। मुठभेड़ स्थल से एके-47, इंसास, एसएलआर राइफल, बीजीएल लांचर, 12 बोर हथियार, वायरलेस सेट, स्कैनर तथा बड़ी मात्रा में जिंदा राउंड बरामद किए गए हैं। हिंसा का भविष्य नहीं सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने पत्रवार्ता में कहा कि बस्तर क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में निरंतर व निर्णायक प्रगति हो रही है। हिंसा का कोई भविष्य नहीं है और संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों के माध्यम से ही बस्तर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने हिंसा के रास्ते पर चल रहे माओवादी कैडरों से समय रहते मुख्यधारा में लौटने और विकास के भागीदार बनने की अपील की। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई सुरक्षा बलों की सतत रणनीति और मजबूत खुफिया तंत्र का परिणाम है। पत्र में ग्रामीण को दी थी धमकी पत्रवार्ता में यह भी खुलासा हुआ कि घटनास्थल से एक धमकी भरा पत्र बरामद किया गया है, जिसमें माओवादियों ने मेहता ग्राम पंचायत के बालंगतोग गांव के एक ग्रामीण को पुलिस मुखबिर बताते हुए चेतावनी दी है। पत्र में जन अदालत में सजा देने और सुधार न होने पर कार्रवाई की धमकी का उल्लेख है। मोबाइल टावर एसपी ने कहा कि यह माओवादियों की जनविरोधी मानसिकता को दर्शाता है। 41 बड़ी घटनाओं में शामिल था मंगड़ू पुलिस के अनुसार कोंटा एरिया कमेटी का सचिव मंगडू 41 बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है, जिनमें ताड़मेटला, बुर्कापाल, एर्राबोर राहत शिविर, दरभागुड़ा, कोताचेरू और मिनपा जैसी भीषण घटनाएं शामिल हैं, जिनमें बड़ी संख्या में जवान और नागरिक बलिदान हुए थे।

दंतेवाड़ा में पुनर्वासितों के लिए बड़ी पहल, लाइवलीहुड कॉलेज में कौशल प्रशिक्षण और किट वितरण

दंतेवाड़ा : दंतेवाड़ा में पुनर्वासितों के पुनर्वास की दिशा में बड़ी पहल लाइवलीहुड कॉलेज में कौशल प्रशिक्षण के बाद वेलकम किट एवं टूल किट का वितरण दंतेवाड़ा राज्य शासन एवं जिला प्रशासन की पुनर्वास नीति के अंतर्गत पुनर्वासितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दंतेवाड़ा जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज, दंतेवाड़ा में हिंसा का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा में शामिल होने वाले पुनर्वासितों के लिए रोजगारोन्मुखी कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है।  इस क्रम में आज लाइवलीहुड कॉलेज परिसर में वेलकम किट एवं टूल किट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके 147 पुनर्वासितों को आवश्यक टूल किट प्रदान की गई, जिससे वे स्वरोजगार अपनाकर सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।   रोजगारोन्मुखी ट्रेड्स में प्रशिक्षण   प्रशिक्षणार्थियों को इलेक्ट्रिशियन, सिलाई, वेल्डिंग, प्लंबिंग, सोलर पैनल ऑपरेटर सहित अन्य तकनीकी एवं आजीविका आधारित ट्रेड्स में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण उपरांत संबंधित ट्रेड्स की टूल किट प्रदान की गई, ताकि वे अपने कौशल का व्यावहारिक उपयोग कर सकें। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दंतेवाड़ा विधायक श्री चैतराम अटामी रहे। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक श्री गौरव रॉय, जिला पंचायत सीईओ श्री जयंत नाहटा तथा जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री अरविंद कुंजाम विशिष्ट अतिथि, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री संतोष गुप्ता प्रभारी अधिकारी लाइवलीहुड राजीव कुजूर, सहायक संचालक कौशल विकास, अमित वर्मा, प्राचार्य लाइवलीहुड हरीश सिन्हा, डीएसपी नसर उल्ला सिद्दीकी, डीएसपी विशाल कुमार उपस्थित रहे। अतिथियों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को वेलकम किट एवं टूल किट का वितरण किया गया।   स्थानीय भाषा में संवाद, विश्वास बहाली पर जोर  विधायक श्री चैतराम अटामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पुनर्वासितों को बधाई दी और उनके सामान्य जीवन में लौटने को सराहनीय कदम बताया। विधायक ने स्थानीय गोंडी भाषा में संवाद कर प्रशिक्षणार्थियों से सीधा संवाद स्थापित किया, जिससे विश्वास और सहभागिता को मजबूती मिली।   प्रशासन की सतत सहायता का आश्वासन पुलिस अधीक्षक श्री गौरव रॉय ने प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद प्रदान की जाने वाली 10 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि की जानकारी देते हुए कहा कि जिला एवं पुलिस प्रशासन पुनर्वासितों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से इस राशि का सदुपयोग कर स्वरोजगार अपनाने का आह्वान किया। वहीं जिला पंचायत सीईओ श्री जयंत नाहटा ने प्रशिक्षणार्थियों को पर्यटन क्षेत्र एवं स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दंतेवाड़ा एवं रायपुर भ्रमण कार्यक्रम की जानकारी दी तथा आगामी वर्ष आयोजित होने वाले दंतेवाड़ा स्टार्टअप हंट में भाग लेकर व्यवसाय प्रारंभ करने की सलाह दी। जिला प्रशासन द्वारा दुकान संचालन हेतु सहयोग प्रदान किए जाने की भी जानकारी दी गई।  शांति और विकास की दिशा में सशक्त कदम प्रशासन का उद्देश्य पुनर्वासितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और विश्वास बहाली सुनिश्चित करना है। यह पहल बस्तर अंचल में सामाजिक समरसता और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 

सुकमा :गोलापल्ली के जंगल में एनकाउंटर, सुरक्षाबलों ने माओवादियों को घेरा

सुकमा  छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में DRG जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। खबर है कि इस दौरान  तीन नक्सली मारे गए हैं, जबकि कुछ घायल भी हुए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस को सूचना मिली थी कि गोलापल्ली इलाके में भारी संख्या में नक्सली मौजूद हैं। इस आधार पर DRG के जवान जंगल में सर्च ऑपरेशन के लिए गए थे। 18 दिसंबर की सुबह जब जवान उस इलाके में पहुंचे, तो माओवादियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी। माओवादियों की मौजूदगी की जानकारी के आधार पर जिला सुकमा की डीआरजी(जिला रिजर्व गार्ड) टीम ने गुरुवार की सुबह सर्च आपरेशन शुरू किया था। अभियान के दौरान सुबह से ही सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच रुक-रुक कर फायरिंग हो रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मुठभेड़ स्थल से हथियारों की बरामदगी हुई है, हालांकि मारे गए माओवादियों की पहचान और बरामद सामग्री का विस्तृत विवरण अभियान पूर्ण होने के बाद जारी किया जाएगा। इस पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग स्वयं सुकमा एसपी किरण चव्हाण कर रहे हैं। क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात कर सर्च ऑपरेशन को और तेज किया गया है। बता दें कि पिछले दो वर्ष में माओवादियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है, शीर्ष माओवादी नेताओं सहित 500 से अधिक माओवादी मुठभेड़ में मारे गए हैं। इसके जवाब में जवानों ने भी कार्रवाई की और दोनों तरफ से सुबह से ही गोलीबारी जारी है। मारे गए नक्सलियों में एरिया कमेटी मेंबर (ACM) कैडर के होने की संभावना जताई जा रही है। इस कैडर पर 5 लाख रुपए का इनाम रखा गया है। 3 दिसंबर को मुठभेड़ में मारे गए थे 12 नक्सली इससे पहले 3 दिसंबर को दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर जवानों ने 12 नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) वेल्ला मोडियम भी मारा गया था। वहीं, इस एनकाउंटर में DRG के 3 जवान शहीद और 2 घायल हुए थे। 16 नवंबर- 3 नक्सली मारे गए थे 16 नवंबर 2025 को भेज्जी-चिंतागुफा के सीमावर्ती क्षेत्र में जवानों ने तीन नक्सलियों को मार गिराया था। इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। जिसके बाद DRG की टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान तुमालपाड़ के जंगल में नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग के बाद जवानों ने भी मोर्चा संभाला। नक्सलियों की गोलियों का जवाब दिया। सुबह से दोनों ओर से रुक-रुककर फायरिंग हुई। इसमें तीन नक्सली मारे गए थे। जवानों ने सर्चिंग के दौरान जंगल से तीनों नक्सलियों के शव बरामद किए गए थे।

सरेंडर नक्सलियों के इनपुट पर बड़ी कार्रवाई, बालाघाट जंगल से लाखों रुपये और हथियार मिले

बालाघाट नक्सल विरोधी अभियान के तहत बालाघाट जिले में पुलिस और सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से मिली अहम जानकारी के आधार पर जंगलों में छिपाए गए नक्सली डंप का खुलासा हुआ है। सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने 11 लाख 57 हजार 385 रुपये नकद के साथ भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की है। जिले में यह पहला मौका है जब किसी नक्सली डंप से इतनी बड़ी नकदी हाथ लगी है।  पुलिस ने प्रेस को इस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार नवंबर से दिसंबर के बीच अलग-अलग समय पर कुल 13 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। इनमें एक, दस और दो नक्सलियों के अलग-अलग समूह शामिल थे। आत्मसमर्पण के बाद पूछताछ के दौरान इन नक्सलियों ने जिले के विभिन्न जंगली इलाकों में छिपाए गए डंप के बारे में सुराग दिए। सूचना के आधार पर पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने जंगल में सघन तलाशी अभियान चलाया। अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखे गए नक्सली डंप को बरामद किया गया। आधुनिक हथियार और विस्फोटक बरामद बरामद सामग्री में चार सेमी-ऑटोमैटिक राइफल, एक ग्रेनेड लॉन्चर, एक बोल्ट एक्शन राइफल और आठ पंप एक्शन सिंगल शॉट राइफल शामिल हैं। इसके अलावा एक देसी कट्टा, 451 राउंड कारतूस और 26 मैगजीन भी मिली हैं। क्लेमोर माइंस और डेटोनेटर भी मिले पुलिस के मुताबिक डंप से क्लेमोर माइंस पाइप, 500 ग्राम बारूद, करीब 16 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री, 22 मेटल स्पाइक्स, दो किलोग्राम बोल्ट व छर्रे बरामद किए गए हैं। साथ ही पांच इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, वोल्ट मीटर, बैटरी सेल, स्टेथेस्कोप, बीपी मशीन और जीवन रक्षक दवाएं भी जब्त की गई हैं। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई नक्सलियों की आर्थिक और सैन्य ताकत को बड़ा झटका है। जिले में नक्सल गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।