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बस्तर में हिंसा के अंत का संकेत, नक्सली पापाराव और 17 साथी करेंगे सरेंडर

जगदलपुर इंद्रावती के घने जंगलों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जो बस्तर के दशकों पुराने हिंसक अध्याय के अंत का संकेत देती नजर आ रही है। लंबे समय से सक्रिय शीर्ष माओवादी कमांडर पापा राव के आत्मसमर्पण की तैयारी ने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क कर दिया है। बताया जा रहा है कि पापा राव अपने 17 साथियों के साथ हथियारों सहित समर्पण के लिए जंगल से बाहर निकल चुका है। उसे सुरक्षित लाने के लिए सुरक्षा बलों की विशेष टीम इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के भीतर रवाना हो चुकी है। यदि यह आत्मसमर्पण सफल होता है, तो इसे बस्तर में माओवादी हिंसा के अंत की निर्णायक शुरुआत माना जा रहा है। पापाराव उर्फ मंगू (56) ये छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में DKSZCM मेंबर है। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है। अपने पास AK-47 राइफल रखता है। बस्तर के जल-जंगल जमीन से वाकिफ है इसलिए कई बार पुलिस की गोलियों से बचकर निकला है। इसने सरेंडर कर दिया या फिर एनकाउंटर में मारा गया तो नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी खत्म हो जाएगी। देवा के सरेंडर करने के बाद अब पापाराव ही एक मात्र ऐसा नक्सली बचा है जो फाइटर है। बाकी बचे हुए अन्य टॉप कैडर्स के नक्सली उम्र दराज हो चुके हैं। पापाराव के सरेंडर करते ही बस्तर से माओवाद का सफाया तय माना जा रहा है। पापा राव का समर्पण     करीब 25 लाख रुपये के इनामी पापा राव वेस्ट बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का अहम सदस्य रहा है। लंबे समय तक बस्तर में माओवादी गतिविधियों की कमान उसके हाथों में रही।     ऐसे में उसका आत्मसमर्पण केवल एक व्यक्ति का सरेंडर नहीं, बल्कि पूरे संगठनात्मक ढांचे के कमजोर पड़ने का प्रतीक माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे शेष कैडर का मनोबल भी टूटेगा और वे भी आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित होंगे। साल भर में ऐसे बिखरा संगठन पिछले साल ही नक्सल संगठन के सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा, नक्सल संगठन का सचिव बसवाराजू, गणेश उइके समेत 17 बड़े कैडर्स का एनकाउंटर किया गया। भूपति, रूपेश, रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं। जबकि मिशिर बेसरा और गणपति ये 2 बड़े टॉप के नक्सली बचे हैं, जो वर्तमान में संगठन चला रहे हैं। बस्तर में बटालियन नंबर 1 का कमांडर देवा ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। अब केवल पापाराव ही एक ऐसा नक्सली बचा है जो लड़ाकू है। अगर इसका एनकाउंटर होता है या फिर गिरफ्तारी और सरेंडर होता है तो निश्चित ही नक्सल संगठन खत्म है। लगातार ऑपरेशन से टूटा नेटवर्क पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने माओवादी नेटवर्क पर लगातार सर्जिकल और रणनीतिक हमले किए हैं। बसव राजू, गुडसा उसेंडी, कोसा, हिड़मा और सुधाकर जैसे बड़े कमांडरों के मारे जाने से संगठन की रीढ़ पहले ही टूट चुकी थी। इसके अलावा भूपति, देवजी, मल्लाजी रेड्डी, रुपेश और सुजाता समेत करीब 2700 माओवादियों के आत्मसमर्पण ने संगठन को बिखेर दिया है। अब बस्तर में करीब 50 माओवादी ही सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनमें कोई बड़ा नेतृत्वकर्ता नहीं बचा है। विकास ने बदली तस्वीर माओवाद के कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण ग्रामीणों का घटता समर्थन भी रहा है। जिन क्षेत्रों में कभी ‘जनताना सरकार’ का प्रभाव था, वहां अब सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा कैंप स्थापित हो चुके हैं। सरकार की पुनर्वास नीति और रोजगार के अवसरों ने युवाओं को मुख्यधारा की ओर आकर्षित किया है। इससे माओवादियों का सामाजिक आधार लगभग समाप्त हो गया है। झारखंड में बची अंतिम चुनौती हालांकि बस्तर, ओडिशा और तेलंगाना में माओवादी प्रभाव काफी हद तक खत्म हो चुका है, लेकिन झारखंड अब भी एक चुनौती बना हुआ है। वहां पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा अपने 70-80 साथियों के साथ सक्रिय है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसकी लोकेशन का पता लगाया जा चुका है, लेकिन उसने अपने ठिकानों के आसपास बारूदी सुरंगों का जाल बिछा रखा है, जिससे ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लक्ष्य के करीब सुरक्षा एजेंसियां केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा 31 मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा खत्म करने के लक्ष्य के बीच तेजी से बदले हालात सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माने जा रहे हैं। पापा राव का संभावित आत्मसमर्पण इस लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम हो सकता है। यदि झारखंड में भी अंतिम अभियान सफल रहता है, तो देश माओवादी हिंसा के लंबे दौर से पूरी तरह मुक्त हो सकता है। जिनके सरेंडर या एनकाउंटर के बाद खत्म होगा एंटी नक्सल ऑपरेशन 1. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना उर्फ राजन्ना, 3.5 करोड़ का इनाम 2. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सर्निमल उर्फ सुनील, 1.30 करोड़ का इनाम 1. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति, 3.6 करोड़ का इनाम गणपति भाकपा (माओवादी) का पूर्व महासचिव था। 1992 में वो पीपुल्स वॉर ग्रुप (PWG) का महासचिव बना और 2004 में CPI (माओवादी) बनने के बाद 2018 तक इसकी कमान संभाली। पोलित ब्यूरो मेंबर और सेंट्रल कमेटी में एडवाइजर है। 1992 से लेकर 2018 तक जितने नक्सली हमले हुए, सब इसी के नेतृत्व में हुए। गणपति पर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार ने 1-1 करोड़ का इनाम रखा है। जबकि आंध्र ने 25 लाख, झारखंड ने 12 लाख और NIA ने 15 लाख का इनाम रखा है। ओडिशा, प. बंगाल और तेलंगाना ने भी गणपति पर इनाम की घोषणा कर रखी है। 2003 में आंध्र प्रदेश के CM रहे चंद्रबाबू नायडू पर हमले का आइडिया और स्ट्रैटजी दोनों गणपति की थी। नक्सलियों के संगठन में मौजूद हमारे सोर्स के मुताबिक, नायडू पर हमले का आइडिया पोलित ब्यूरो के कई मेंबर्स को जोखिम भरा लगा था। कई लोग इसके सपोर्ट में भी नहीं थे। हालांकि गणपति इससे पीछे हटने को राजी नहीं हुआ। नायडू पर हमले ने केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक को बड़ा झटका दिया था। ये सिर्फ अकेली घटना नहीं है, जो गणपति के नेतृत्व में अंजाम दी गई हो। ऐसी 10 बड़ी घटनाएं हैं, गणपति जिनका मास्टरमाइंड रहा। 2. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर, 1.30 करोड़ का इनाम बेसरा झारखंड … Read more

सुरक्षाबलों के रडार पर चार शीर्ष कमांडर समेत 300 माओवादी

रायपुर. नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक पूर देश से नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म करने की तिथि निर्धारित की थी। नक्सलवाद खात्मे की डेडलाइन अब करीब आ गई है। इसे देखते हुए सरकार ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ एक बार फिर से बड़ा अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सभी नक्सल प्रभावित राज्यों में सघन अभियान चलाय़ा जा रहा है। सुरक्षाबलों के रडार पर चार शीर्ष कमांडर समेत 300 नक्सली हैं। सुरक्षाबलों के निशाने पर प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की शीर्ष चार केंद्रीय समिति (सीसी) के सदस्यों में मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, देवजी उर्फ कुंभा दादा उर्फ चेतन, राममन्ना उर्फ गणपति उर्फ लक्ष्मण राव और मल्लाह राजा रेड्डी उर्फ सागर शामिल हैं। इधर गृह मंत्रालय (Ministry Of Home Affairs) ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है। चार शीर्ष कमांडर समेत 300 नक्सलियों की तलाश सुरक्षाबलों को इन चार शीर्ष कमांडर समेत करीब 300 नक्सलियों की तलाश है. अधिकारियों ने कहा कि या तो वे आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा मार्च 2026 की समयसीमा तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सघन अभियानों के दौरान सुरक्षाबल उन्हें खत्म कर देंगे. नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटी गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की संख्या घटकर छत्तीसगढ़ के तीन रह गई है, जिसमें बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर शामिल हैं. मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है. मंत्रालय ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खतरे को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्रालय ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक पूर देश से नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। देवजी और उसके सहयोगी केसा सोढ़ी के इलाके में मौजूद होने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर एक सघन अभियान चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि रेड्डी को छोड़कर बाकी सभी शीर्ष कमांडर इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। रेड्डी के बारे में कहा जाता है कि वह ओडिशा में छिपा हुआ है। सुरक्षाबलों को इन चार शीर्ष कमांडर समेत करीब 300 नक्सलियों की तलाश है। अधिकारियों ने कहा कि या तो वे आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा मार्च 2026 की समयसीमा तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सघन अभियानों के दौरान सुरक्षाबल उन्हें खत्म कर देंगे। नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटी गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की संख्या घटकर छत्तीसगढ़ के तीन रह गई है। जिसमें बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर शामिल हैं। मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित जिलों की संख्या 18 से घटकर 11 हो गई है।

नक्सलवाद के खात्मे की तैयारी तेज, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में अहम बैठक, मार्च 2026 पर नजर

रायपुर देश से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन को लेकर केंद्र और नक्सल प्रभावित राज्यों के बीच आज रायपुर में निर्णायक दौर की बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित इन बैठकों को मार्च 2026 की तय समय-सीमा से पहले की सबसे अहम रणनीतिक बैठक माना जा रहा है। पहली समीक्षा बैठक सुबह शुरू हुई, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य के पुलिस महानिदेशक सहित देश के नक्सल प्रभावित राज्यों के डीजीपी, गृह सचिव और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं। बैठक में नक्सल प्रभावित इलाकों की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, इंटेलिजेंस नेटवर्क की मजबूती, सुरक्षाबलों के ऑपरेशन की गति और बचे हुए संवेदनशील क्षेत्रों में कार्रवाई को तेज करने पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। तय समय-सीमा के भीतर नक्सलवाद के अंतिम गढ़ों को समाप्त करने के लिए ठोस एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। दिनभर चलेगा मंथन पहली बैठक दोपहर 12:45 बजे तक चलेगी। इसके बाद दोपहर 2 बजे तक दूसरी समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। दोपहर 2 से 3 बजे तक लंच ब्रेक रहेगा, जबकि शाम 3 बजे से 4:15 बजे तक एक बार फिर उच्चस्तरीय चर्चा होगी। इसके पश्चात शाम 5 बजे से 6:10 बजे तक “छत्तीसगढ़ @ 25 – शिफ्टिंग द लेंस” विषय पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें राज्य के भविष्य और विकास के नए दृष्टिकोण पर विचार किया जाएगा। दो प्रमुख एजेंडों पर होगा फैसला उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि यह 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले की अंतिम बड़ी समीक्षा बैठक है। बैठक में दो मुख्य मुद्दों पर विशेष रूप से चर्चा हो रही है। पहला, देश को तय समय सीमा तक पूरी तरह सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त करने की रणनीति। दूसरा, बस्तर सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से रुके विकास कार्यों को गति देने का रोडमैप।

बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे का ऐलान, 90 दिन में हिड़मा और बसवाराजू का एनकाउंटर, 6 अन्य की तलाश

बस्तर  बस्तर में नक्सलवाद खत्म करने का काउंटडाउन शुरू हो गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर बनाने की डेडलाइन तय की है। अब इस तारीख तक सिर्फ 90 दिन बचे हैं। 2025 में नक्सलवाद पर बड़ा अभियान चलाया गया। डेढ़ साल में कुल 23 बड़े नक्सली मारे गए हैं। इनमें सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा, नक्सल संगठन सचिव बसवाराजू, गणेश उइके सहित 16 बड़े नक्सली शामिल हैं। भूपति, रूपेश और रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं। अब केवल पोलित ब्यूरो मेंबर देवजी, मिशिर बेसरा और गणपति तीन शीर्ष नक्सली बचे हैं, जो संगठन चला रहे हैं। बस्तर में पापाराव और देवा अपनी जान बचाने के लिए अब भी जंगल में घूम रहे हैं। पुलिस इनकी तलाश कर रही है। बस्तर में 200 से 300 नक्सली बचे नक्सल संगठन में बस्तर के अलग-अलग इलाकों में करीब 200 से 300 आर्म कैडर के नक्सली ही बचे हुए हैं, जो टुकड़ों में यहां-वहां छिपे हुए हैं। नक्सलियों का महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन पूरी तरह से खत्म हो गया है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी नक्सलियों का लगभग सफाया हो गया है। अब फोर्स के लिए इन 90 दिनों में दक्षिण बस्तर डिवीजन को नक्सल मुक्त करना ही सबसे बड़ी चुनौती है। जानकारी के मुताबिक दक्षिण बस्तर के जंगलों में ही देवा और पापाराव अपने साथियों के साथ अलग-अलग टुकड़ियों में छिपे हुए हैं। जबकि मिशिर बेसरा झारखंड में है। कुछ समय पहले देवजी की लोकेशन तेलंगाना-आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ट्राई जंक्शन में थी। हालांकि, वह बार-बार ठिकाने बदल रहा है। इन 90 दिनों में अगर ये 5 से 6 बड़े नक्सली मारे जाते हैं या सरेंडर करते हैं तो बस्तर के फ्रंट लाइन के सभी टॉप लीडर्स खत्म हो जाएंगे। जानिए उन टॉप नक्सलियों के बारे में जिनकी पुलिस को तलाश है… 1 – थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी (61)- देवजी तेलंगाना का रहने वाला है। बसवाराजू के एनकाउंटर के बाद नक्सल संगठन ने थिप्परी तिरुपति को नक्सल संगठन का महासचिव बनाया है। ये नक्सल संगठन में पोलित ब्यूरो मेंबर भी है। वर्तमान में नक्सल संगठन का सबसे टॉप लीडर यही है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की पुलिस इसकी तलाश में जुटी हुई है। इसपर सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही 1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित है। 2. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति (74)- गणपति भी तेलंगाना का रहने वाला है। बसवाराजू से पहले ये ही नक्सल संगठन का महासचिव था। हालांकि, बीमारी और बढ़ती उम्र के चलते इसने करीब 4-5 साल पहले ही संगठन के इस सबसे बड़े पद को छोड़ दिया था। जिसके बाद बसवाराजू को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी। इसपर भी 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित है। 3. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर (62)- भास्कर झारखंड का रहने वाला है। वर्तमान में नक्सलियों का पोलित ब्यूरो मेंबर है। साथ ही ERB का इंचार्ज है। इसपर भी 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित है। 4. पापा राव उर्फ मंगू (56)- पापाराव छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZCM) मेंबर है। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है। पापाराव अपने पास AK-47 राइफल रखता है। बस्तर के जल-जंगल जमीन से वाकिफ है, इसलिए कई बार पुलिस की गोलियों से बचकर निकला है। इसी इसने सरेंडर कर दिया या फिर एनकाउंटर में मारा गया तो नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी खत्म हो जाएगी। 5. देवा बारसे उर्फ सुक्का (48)- देवा सुकमा जिले का पूवर्ती का रहने वाला है। वर्तमान में SZCM कैडर का है। साथ ही नक्सलियों की सबसे खतरनाक टीम बटालियन नंबर 1 प्रभारी है। ये माड़वी हिड़मा का सबसे करीबी साथी रहा है। पुलिस को इसकी तलाश है। अगर पापा राव और देवा दोनों पकड़े या मारे जाते हैं तो दक्षिण बस्तर का इलाका भी शांत हो जाएगा। IG बोले- निर्णायक साल रहा बस्तर के IG सुंदरराज पी ने कहा कि साल 2025 बस्तर पुलिस के लिए नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में काफी निर्णायक साल रहा है। नक्सलियों के गढ़ में घुसकर बड़े लीडरों को मुठभेड़ में ढेर किया गया है। मारे गए माओवादियों के पास से LMG, AK-47, इंसास, SLR जैसे ऑटोमैटिक हथियार बरामद किया गया है। 2 सालों में ऐसे बदल गई परिस्थितियां? 2023 तक बस्तर में नक्सली फोर्स पर हावी थे। कई बड़े हमले किए गए। जवानों की कैजुअल्टी ज्यादा होती थी। लेकिन डेढ़ साल पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के दौरे के दौरान नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन जारी की थी। उन्होंने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक देशभर से नक्सलवाद का सफाया हो जाएगा। साथ ही छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के पुलिस अधिकारियों की बैठक ली। नई स्ट्रेटजी के तहत काम किया। नक्सल ऑपरेशन पर एक-दूसरे राज्य के साथ कॉर्डिनेशन स्थापित करने निर्देश दिए थे। वहीं राज्य में भी पड़ोसी जिलों की पुलिस फोर्स का संयुक्त ऑपरेशन लॉन्च किया गया। नक्सलियों के गढ़ में घुसकर जवान नक्सलियों को घेरकर मारने लगे। यही वजह थी कि नक्सलियों को ज्यादा नुकसान हुआ है। हर 5 से 10 किमी के दायरे में कैंप खोले गए। सड़कें बनीं, इंद्रावती नदी पर पुल बनने से इसका सीधा फायदा पहुंचा और मानसून में भी जवानों का ऑपरेशन जारी रहा।  

मुख्यमंत्री साय ने शहीद जवानों को दी अंतिम सलामी, कहा– हमारे जवान नक्सलवाद के खिलाफ मजबूती से डटे हैं

 रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बिलासपुर के अटल बिहारी बाजपेई विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह में शमिल होने के लिए रायपुर से रवाना हो गए हैं। रवानगी से पहले एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि दीक्षांत समारोह में देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि हैं और राज्यपाल भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री साय ने बीजापुर में हुई नक्सली मुठभेड़ में जवानों की शहादत और ऑपरेशन में मिली सफलता पर कहा कि लगातार ऑपरेशन हो रहे हैं, हमारे जवान मजबूती के साथ नक्सलवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं। कल ऑपरेशन में DRG के तीन जवान शहीद हुए हैं। हम उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, उनके साहस को नमन करते हैं और उनके परिवार को इस शोक को सहने की भगवान शक्ति प्रदान करें ऐसी प्रार्थना करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस मुठभेड़ में बड़ी सफलता मिली है, बड़ी संख्या में नक्सली न्यूट्रलाइज हुए हैं। वहीं उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि बीजापुर में ऑपरेशन के दौरान 16 नक्सली मारे गए हैं। बहादुर जवानों ने ऑपरेशन को अंजाम दिया। हमने तीन जवानों को खोया, नक्सलियों की यह कायराना हरकत है। जवानों की शहादत को जाया जाने नहीं देंगे।

नक्सल विरोधी अभियान तेज, CM साय बोले— ‘अब अंत करीब है’

रायपुर छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती इलाकों में जारी एंटी नक्सल ऑपरेशन को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को मीडिया से चर्चा में बयान दिया. उन्होंने कहा कि करीब 2 साल होने को आया, हमारे जवान ताकत के साथ नक्सली के खिलाफ लड़ते आ रहे हैं. अब नक्सलवाद का समापन होने वाला है, वह अपनी अंतिम सांस गिन रहा है. केंद्र में हमारी (भाजपा) सरकार है, जिसका लाभ मिल रहा है. प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नक्सलवाद को समाप्त करने का संकल्प अवश्य पूर्ण होगा. बिजली बिल हाफ योजना के फैसले पर सीएम साय मुख्यमंत्री साय ने बिजली बिल हाफ योजना को लेकर कहा कि मंगलवार को विधानसभा का पुराने भवन, जो 25 वर्षों तक छत्तीसगढ़ की जनता का आशा और विश्वास का प्रतीक रहा, वहां दिनभर चर्चा हुई. इसी के साथ विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की गई. हाफ बिजली बिल जो 100 यूनिट था, उसमें वृद्धि कर 200 यूनिट किया गया है. इसका काफी लोगों को फायदा मिलेगा, और जो बच गए हैं, उनके लिए प्रधानमंत्री सूर्य मुफ्त योजना से लाभ दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि एक किलोवाट में भारत सरकार की ओर से 30 हजार रुपए और राज्य सरकार की तरफ से 15 हजार रुपए की सब्सिडी दी जा रही है. लगभग लागत का तीन चौथाई सब्सिडी के रूप में कंज्यूमर को मिलेगा. एक चौथाई उनको लगाना पड़ेगा और कुछ वर्षों में उनका पूरा लोन समाप्त हो जाएगा. उसके बाद वह मुफ्त में बिजली का इस्तेमाल कर सकेंगे. साथ ही जो बिजली उत्पन्न करेंगे वह बिजली बेच भी पाएंगे. किसानों के लिए आज सौभाग्य का दिन धमतरी में किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त अंतरण कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री साय ने  कहा कि आज का दिन हमारे छत्तीसगढ़ सहित देश के किसान भाईयों के लिए सौभाग्य का दिन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोयंबटूर से देश के 9 करोड़ किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त के 18 हजार करोड़ रुपए भेजने वाले हैं. छत्तीसगढ़ के 24 लाख 70 हजार किसानों के खाते में 494 करोड़ दिए जाएंगे. उन्होंने प्रदेश के सभी किसानों को बधाई दी. साथ ही देश के प्रधानमंत्री मोदी और कृषि मंत्री शिवराज को धन्यवाद ज्ञापित किया.

छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: सुरक्षाबलों ने 6 नक्सलियों को किया ढेर, एक पर था 8 लाख का इनाम

रायपुर बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला रिज़र्व गार्ड (DRG) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त कार्रवाई में मुठभेड़ के दौरान छह नक्सली न्यूट्रलाइज किए गए। इसमें ₹8 लाख का इनामी कन्ना ऊर्फ बुचन्ना भी शामिल है, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में हिंसा, भय और नक्सल गतिविधियों को संचालित कर रहा था। सुरक्षाबलों को मिली बड़ी सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरी सराहना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों की इस सफलता की सराहना करते हुए एक्स पर लिखा – बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में छत्तीसगढ़ पुलिस, डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई के दौरान छह माओवादी न्यूट्रलाइज हुए हैं। इसमें आठ लाख रुपये का इनामी कन्ना ऊर्फ बुचन्ना भी शामिल है। जिसके न्यूट्रलाइज होने से इस क्षेत्र में फैले माओवादी आतंक के एक लंबे अध्याय का अंत हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों की इस सफलता की सराहना करते हुए एक्स पर लिखा – यह उपलब्धि पुलिस बलों के उत्कृष्ट समन्वय, साहस और सटीक रणनीति का परिणाम है। लाल आतंक के समूल नाश की दिशा में यह कार्रवाई एक निर्णायक पड़ाव है। उन्होंने कहा- छत्तीसगढ़ सरकार, यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में, 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन के संकल्प के साथ इस मिशन को पूरे समर्पण और प्रतिबद्धता से आगे बढ़ा रही है। राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां एकजुट होकर इस लड़ाई को निर्णायक अंत तक ले जाएंगी।

नक्सलियों में आत्मसमर्पण की बाढ़: माओवाद खत्म करने की ‘मोदी-शाह’ प्लानिंग कितनी कारगर?

रायपुर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को यह भरोसा दिलाया है कि 31 मार्च 2026 से पहले 'नक्सलवाद' पूरी तरह खत्म हो जाएगा। माओवाद के खात्मे पर अब प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री 'शाह' का हाई 'कॉन्फिडेंस' साफ झलक रहा है। अभी तो डेड लाइन करीब आने में पांच माह बचे हैं, लेकिन अभी से ही नक्सलियों में 'सरेंडर' करने की होड़ मच गई है। माओवादियों की केंद्रीय कमेटी और जोनल कमेटी के सदस्यों के अलावा सीनियर ऑपरेटिव, सुरक्षा बलों के समक्ष हथियार डाल रहे हैं। पिछले कई दिनों से सुरक्षा बलों एवं राज्यों के विशेष दस्तों को ऐसे खुफिया इनपुट मिल रहे हैं कि नक्सली, भारी तादाद में सरेंडर करने के इच्छुक हैं। उन्हें एनकाउंटर में न उलझाया जाए। इस सप्ताह सैकड़ों नक्सलियों ने सरेंडर किया है। माओवादियों पर कसी गई नकेल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब नक्सलियों की गिरफ्तारी का आंकड़ा, सरेंडर की गिनती से पीछे छूट चुका है। 2024 में छत्तीसगढ़ में 2100 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, 1785 गिरफ्तार हुए, जबकि 477 को न्यूट्रलाइज किया गया। बता दें कि इस सप्ताह जितने नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, यह एक रिकार्ड बन गया है। छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को 208 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। इनमें 98 पुरुष और 110 महिलाएं शामिल हैं। सभी 208 नक्सलियों ने 153 हथियार भी पुलिस के पास जमा करा दिए हैं। इससे पहले छत्तीसगढ़ में 170 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। बाद में 27 अन्य नक्सली भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो गए। दो दिन पहले महाराष्ट्र में भी 61 नक्सलियों ने हथियार डाले थे। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की सूची में 10 सीनियर ऑपरेटिव, जिनमें सतीश उर्फ टी वासुदेव राव (सीसीएम), रानीता (एसजेडसीएम, माड़ डीवीसी की सचिव), भास्कर (डीवीसीएम, पीएल 32), नीला उर्फ नंदे (डीवीसीएम, आईसी और नेलनार एसी की सचिव), दीपक पालो (डीवीसीएम, आईसी और इंद्रावती एसी का सचिव) शामिल हैं। टी वासुदेव राव पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था। बाकी कई दूसरे माओवादियों पर भी इनाम घोषित किया गया था। इतने बड़े पैमाने पर हुए सरेंडर को लेकर अमित शाह ने कहा, यह अत्यंत हर्ष की बात है कि एक समय आतंक का गढ़ रहे छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और नॉर्थ बस्तर को आज नक्सली हिंसा से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया गया है। अब छिटपुट नक्सली केवल साउथ बस्तर में बचे हुए हैं, जिन्हें हमारे सुरक्षा बल शीघ्र ही समाप्त कर देंगे। यह 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के हमारे दृढ़ संकल्प का प्रतिबिम्ब है। सरेंडर बाबत केंद्रीय सुरक्षा बल के एक अधिकारी, जो लंबे समय तक नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात रहे हैं, ने बताया, अब ज्यादा कुछ बचा नहीं है। हां, यह भी नहीं कह सकते है कि माओवादी पूरी तरह से समाप्त हो गए हैं। कुछ क्षेत्रों में उनकी मौजूदगी है, लेकिन देर सवेर वहां भी सरेंडर या मुठभेड़ में मारे गए, जैसी कोई सूचना मिल सकती है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 'सीआरपीएफ', डीआरजी, एसटीएफ, बीएसएफ और आईटीबीपी के जवान 31 मार्च 2026 के लक्ष्य की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। नक्सलवाद से प्रभावित अधिकांश इलाकों में सीआरपीएफ और इसकी विशेष इकाई 'कोबरा' तैनात है, इसलिए अब तेज रफ्तार से 'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित किए जा रहे हैं। ये कहना गलत नहीं होगा कि नक्सल को खत्म करने में सबसे बड़ा योगदान सीआरपीएफ और इसकी विशेष इकाई, 'कोबरा' का है। डीआरजी एवं दूसरे बलों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। सात आठ वर्ष पहले लोकल पुलिस, अकेले जंगल में नहीं जा पाती थी। साथ में सीआरपीएफ/कोबरा या कोई दूसरा बल रहता था। सीआरपीएफ, कोबरा, डीआरजी के जवानों ने इस लड़ाई में खूब बलिदान दिया है। जब से केंद्रीय गृह मंत्री ने नक्सलियों के खात्मे की डेड लाइन तय की है, मानवीय और गैर मानवीय दिक्कतों के बावजूद 'सीआरपीएफ' द्वारा महज 48 घंटे में नया एफओबी तैयार कर दिया जाता है।'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित करने में पहले काफी समय लगता था। वजह, उस क्षेत्रों में सड़कें न होने के कारण वहां पर निर्माण सामग्री, जल्दी नहीं पहुंच पाती थी। नक्सलियों द्वारा घात लगाकर हमला, आईईडी लगाना व बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) से अटैक, ये सब आम बात थी। इस तरह के खतरों के बीच सीआरपीएफ ने खुद के बलबूते और कुछ जगहों पर डीआरजी (डिस्ट्रिक रिजर्व गार्ड) एवं लोकल पुलिस को साथ लेकर एफओबी स्थापित किए हैं। दो तीन वर्षों में एफओबी के बीच में अंतराल ज्यादा बिल्कुल कम कर दिया गया है। अब तो चार-पांच किलोमीटर या उससे कम की दूरी पर भी एफओबी स्थापित किए जा रहे हैं। नतीजा, नक्सलियों के पास अब दो ही विकल्प, 'सरेंडर' या 'गोली' ही बचते हैं। लगातार खुलते एफओबी के चलते नक्सलियों के ठिकाने तबाह होने लगे हैं। ऐसा कोई इलाका नहीं बचा है, जहां सुरक्षा बलों की पहुंच न हो। महज 48 घंटे में 'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित कर सुरक्षा बल, आगे बढ़ रहे हैं। नक्सलियों के लिए जंगलों में ज्यादा लंबी दूरी तक भागना संभव नहीं रहा। उनकी सप्लाई चेन कट चुकी है। अब उन्हें वित्तीय मदद भी नहीं मिल पा रही। नक्सलियों की नई भर्ती तो पूरी तरह बंद हो गई है। घने जंगलों में स्थित नक्सलियों के ट्रेनिंग सेंटर भी तबाह किए जा रहे हैं। तीन सौ से ज्यादा एफओबी खुलने के बाद माओवादी,  सुरक्षा बलों के चक्रव्यूह में फंसकर रह गए हैं। यही वजह है कि अब एकाएक, आत्मसमर्पण बढ़ता जा रहा है। नक्सलियों के गढ़ में 2024 में 58 नए कैंप स्थापित हुए थे। इस वर्ष 100 नए एफओबी स्थापित करने पर काम शुरु हुआ था। ये कैंप नक्सल के किले को ढहाने में आखिरी किल साबित हो रहे हैं। जिस तेजी से 'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित हो रहे हैं, उससे यह बात साफ है कि तय अवधि से पहले ही नक्सलवाद को खत्म कर दिया जाएगा। सुरक्षा बलों ने नक्सलियों का हर वो ठिकाना ढूंढ निकाला है, जो अभी तक एक पहेली बना हुआ था। उनके स्मारक गिराए जा रहे हैं। 'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित होने के कारण नक्सली घिरते जा रहे हैं। पहाड़ी जंगल में सुरक्षा बल चारों तरफ से घेरा डालकर आगे बढ़ रहे हैं। एफओबी को स्थापित … Read more

कांग्रेस सरकार में फला-फूला नक्सलवाद, अब हो रहा सफाया: श्यामबिहारी, ताम्रध्वज बोले- हमारी सरकार होती तो पहले खत्म हो जाता

रायपुर छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर सियासत गरमाने लगा है. माड़ डिवीजन के 16 नक्सलियों ने सरेंडर किया है. इस मामले में मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा, यह डबल इंजन सरकार की इच्छाशक्ति का परिणाम है. पिछली सरकार में नक्सलवाद फला, फूला और बढ़ता गया. कांग्रेस की सरकार में इच्छाशक्ति की कमी थी. इच्छाशक्ति होती तो नक्सलवाद का सफाया हो जाता. वहीं नक्सलवाद को लेकर पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा है कि 5 साल तक नक्सलवाद को सिमटते हुए एक पिनपॉइंट पर हमने ला दिया था. अगर हमारी सरकार बनती तो उस पिनपॉइंट को खत्म कर देते. डबल इंजन सरकार नहीं होते हुए भी नक्सलवाद खत्म हो जाता. नक्सलवाद खात्मे पर पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा, 15 साल रमन सरकार ने नक्सल उन्मूलन का काम नहीं किया. भूपेश सरकार में नक्सल उन्मूलन और विकास हुआ. नक्सल क्षेत्रों में 70 कैंप भूपेश सरकार में खुले. विश्वास और विकास का नारा भूपेश सरकार ने दिया. अगर हमारी सरकार बनती तो डबल इंजन सरकार नहीं होते हुए भी नक्सलवाद खत्म हो जाता. प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने गोमाता को राजमाता का दर्जा देने की मांग की है. इस पर मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा, गाय की पूजा सदियों से माता के रूप में की जा रही है. गोमाता को राजमाता का दर्जा दिया जाए तो खुशी की बात है. मुझे लगता है कि इसमें किसी को भी आपत्ति नहीं होगी. सनातन संस्कृति में हमेशा गोमाता की जय का नारा लगता है. पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा, बोलने और दुष्प्रचार करने में भाजपा माहिर है. जब से सृष्टि बनी है तब से गौ माता को गौ माता ही कहते हैं. यह तो सामान्य प्रक्रिया शुरू से चल रही है. मंत्री ने मुगलों से की कांग्रेस की तुलना कांग्रेस के घोटालों को लेकर हर दिन हो रहे खुलासे पर मंत्री जायसवाल ने कांग्रेस की तुलना मुगलों से की. घोटालों को लेकर उन्होंने कहा, रहीम ने कहा है – खैर, खून, खांसी, खुशी, बैर, प्रीति, मदपान, रहीमन दाबे न दबे, जानत सकल जहान. आपराधिक चीजों, भ्रष्टाचार को तत्काल कोई नहीं कहता, लेकिन एक न एक दिन ये बातें खुलकर सामने आती है. कभी मुगलों और टीपू सुल्तान को महान बताया जाता था. आज सबको पता चल रहा है ये लूटेरे थे, लूटने आए थे. इसी तरह से कांग्रेस के घोटाले भी खुलकर सामने आ रहे हैं. पूर्व गृह मंत्री ने कहा – मंत्री को इतिहास की जानकारी नहीं मंत्री ने कांग्रेस की तुलना मुगलों से की. इस पर पलटवार करते हुए पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा, श्यामबिहारी जायसवाल को भारत वर्ष के इतिहास की जानकारी नहीं है. पहले जानकारी लें, इतिहास पढ़ें कि आजादी के पहले क्या था. अंग्रेजों के शासन के पहले क्या था. उसके बाद मुगलों की तुलना कांग्रेस से करे. कांग्रेस को भाजपा के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है. कांग्रेस सरकार में हर क्षेत्र में अंधाधुन भ्रष्टाचार हुआ : श्यामबिहारी कांग्रेस का कहना है कि सरकार 32 लाख राशनकार्ड धारियों के राशन कार्ड निरस्त करना चाहती है. इस मामले में मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा, कांग्रेस चाहती है कि जंगलराज वापस आए. Kyc की वजह से डायरेक्ट पैसा जा रहा है. ये फिर से चाहते हैं कि 100 रुपए भेजे और 15 पैसे जाए. कांग्रेस के समय में हर क्षेत्र में अंधाधुन भ्रष्टाचार हुआ है. सरकार जब भी उसे दुरुस्त करना चाहती है उनको पीड़ा होती है.

बस्तर में नक्सलियों की धरती पर बदलाव की बयार, CM साय बोले – 2026 तक खत्म करेंगे नक्सलवाद

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार की नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025 और नियद नेल्ला नार योजना ने दंतेवाड़ा सहित पूरे बस्तर अंचल में नया विश्वास जगाया है। माओवादी हिंसा के झूठे नारों से भटके लोग अब विकास और शांति की राह चुन रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर संभाग में चलाए जा रहे पूना मारगेम अभियान तथा दंतेवाड़ा जिले में चलाए जा रहे लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर हाल ही में 71 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 30 नक्सलियों पर 50 हजार से 8 लाख रुपये तक का कुल 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण हमारी नीतियों की प्रभावशीलता और जन-विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है। Cm  साय ने कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को बेहतर जीवन की शुरुआत के लिए 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए गए हैं। साथ ही उन्हें नक्सल उन्मूलन नीति के तहत सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और भरोसेमंद वातावरण के कारण अब तक 1770 से अधिक माओवादी मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। डबल इंजन की सरकार का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा और आत्मसमर्पित साथियों को सम्मानजनक पुनर्वास एवं बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही  मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर बदल रहा है और नक्सलवाद का अंधियारा छंट रहा है। यह परिवर्तन बस्तर के उज्ज्वल भविष्य और शांति की ओर बढ़ते कदमों का सशक्त संकेत है।