samacharsecretary.com

106 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता

रायपुर  भारत में नक्सलवाद को खत्म करने की कोशिश में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में कुल 106 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इन सभी पर कुल 3.95 करोड़ रुपए का इनाम था। इन सभी नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में सक्रिय थे। बीजापुर के 37, नारायणपुर के 4, बस्तर के 16, कांकेर से 3 और सुकमा से 18, दंतेवाड़ा से 30 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इन सभी के सिर पर कुल लगभग 4 करोड़ रुपए का इनाम था और ये नक्सली अलग-अलग रैंक पर तैनात थे।  छत्तीसगढ़ में 3.95 करोड़ रुपये के इनामी 106 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें बीजापुर और दंतेवाड़ा के 67 नक्सली भी शामिल हैं। रैंक की बात करें तो बीजापुर में डीवीसीएम रैंक के तहत दो नक्सली, पीपीसीएम रैंक में 4, एसीएम में 9 और पीएम रैंक वाले 22 नक्सलियो ने सरेंडर किया है। कुल 37 नक्सलियों पर 106 लाख रुपये का इनाम रखा गया था। नारायणपुर में डीवीसीएम रैंक के तहत एक नक्सली, सीवाईपीसीएम का एक, पीपीसीएम का एक और पीएम रैंक वाले दो नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन पर 22 लाख रुपये का इनाम रखा गया था।  बस्तर में डीवीसीएम रैंक का 1, पीपीसीएम के पांच, एसीएम के तीन और पीएम रैंक वाले सात नक्सलियों ने सरेंडर किया है। कुल 16 नक्सलियों पर 99 लाख रुपये का इनाम है। कांकेर में डीवीसीएम रैंक का एक, एसीएम और पीएम रैंक में एक एक नक्सली ने सरेंडर किया है। कुल तीन नक्सलियों पर 14 लाख रुपये का इनाम रखा गया था।  सुकमा में सीवाईपीसीएम रैंक वाले दो, पीपीसीएम रैंक में छह, एसीएम में पांच पीएम रैंक में 18 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इन सभी पर 85 लाख रुपये का इनाम रखा गया है। दंतेवाड़ा में डीवीसीएम का एक, पीपीसीएम में दो, एसीएम में पांच और पीएम रैंक में 22 नक्सलियों का सरेंडर हुआ है। इन पर 69 लाख रुपये का इनाम था।  क्या है सरकार का लक्ष्य बता दें कि भारत सरकार ने साल 2026 में देश से नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इस दौरान पिछले कुछ महीनों सैकड़ों नक्सलियों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया और इस दौरान हजारों नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है। सरेंडर करने की इसी कड़ी में बुधवार को 106 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर कर दिया।  

बस्तर के 125 नक्सलियों ने तेलंगाना में दिए हथियार, 4.18 करोड़ का पुनर्वास पैकेज मिलेगा; IG का खुलासा

जगदलपुर नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षाबल के जवानों को बड़ी सफलता मिली है। शनिवार को तेलंगाना में 130 माओवादियों ने हथियारों के साथ सरेंडर कर दिया है। सरेंडर करने वाले ज्यादातर नक्सली छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। तेलंगाना के डीजीपी के सामने आत्मसमर्पण करने वाले 130 माओवादियों में से 125 छत्तीसगढ़ के, 4 तेलंगाना के और एक आंध्र प्रदेश का रहने वाला है। तेलंगाना में सरेंडर करने वाले नक्सली सीपीआई (माओवादी), दंडकारण्य विशेष जोनल कमेटी और तेलंगाना राज्य कमेटी क्षेत्र के मेंबर हैं। इनमें से ज्यादातर नक्सली बस्तर इलाके में एक्टिव थे। हथियार भी सुरक्षाबलों को सौंपे हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटे इन कैडरों ने 124 हथियारों के साथ बड़ी मात्रा में गोला-बारूद भी सुरक्षा बलों के सामने जमा कराया, जो माओवादी संगठन को लगे बड़े झटके को दर्शाता है। अधिकारियों ने कहा कि यह घटनाक्रम पिछले कई महीनों से छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड तथा अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में संचालित लगातार और समन्वित सुरक्षा अभियानों का परिणाम है। अभियान के कारण पड़ा असर बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा-लगातार चलाए जा रहे अभियान, सुरक्षा तंत्र के विस्तार, फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस की स्थापना से माओवादी कैडरों की आवाजाही पर प्रभाव पड़ा है। बस्तर क्षेत्र और उससे सटे वन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे सतत और केंद्रित अभियानों ने माओवादी गढ़ों को धीरे-धीरे ध्वस्त किया है तथा उनके संगठनात्मक नेटवर्क को बाधित किया है, जिससे कैडरों पर हिंसा का मार्ग छोड़ने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सरेंडर के बाद मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने कहा कि Mahatma Gandhi के देश में हिंसक और सशस्त्र आंदोलन किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि जो लोग मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार पुनर्वास और बेहतर जीवन की व्यवस्था कर रही है. केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 तक की समय सीमा तय की है. जैसे-जैसे यह तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे नक्सलियों के सरेंडर की घटनाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं. हाल ही में नक्सल संगठन के टॉप नेताओं में शामिल देवजी के आत्मसमर्पण की खबर भी सामने आई थी. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अब संगठन के गिने-चुने नेता ही बचे हैं, जो लगातार दबाव के चलते इधर-उधर छिपते फिर रहे हैं. जीवन में बदलाव से आया परिवर्तन उन्होंने कहा कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने सुरक्षा प्रयासों के साथ-साथ दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं को लागू कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा, आजीविका के अवसरों तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर दिए गए विशेष ध्यान के कारण पहले से अलग-थलग पड़े गांवों तक धीरे-धीरे शासन की पहुंच बढ़ी है। इन प्रयासों ने स्थानीय समुदायों का लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत किया है तथा जनसामान्य के बीच माओवादी प्रचार के प्रभाव को कम किया है। देवजी की टीम के माओवादी भी शामिल इन 130 माओवादी कैडर्स में नक्सल संगठन के कई अहम सदस्य भी शामिल हैं। हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी संगठन के चीफ देवजी की PLGA कमांडर टीम के सदस्य भी इस सरेंडर में शामिल हैं। ICCC सेंटर में हुआ कार्यक्रम माओवादियों ने यह आत्मसमर्पण 7 मार्च को हैदराबाद के बंजारा हिल्स स्थित ICCC सेंटर में किया। कार्यक्रम में तेलंगाना सरकार के सीनियर अधिकारी और पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी भी मौजूद रहे। सुरक्षाबलों के दबाव के कारण सरेंडर जारी सुरक्षाबलों के लगातार दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण माओवादी कैडरों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। बड़ी संख्या में हुए इस सामूहिक आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका मान रही हैं। सरकार ने कहा है कि जो भी उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास और नई शुरुआत के सभी रास्ते खुले हैं। क्या कहा बस्तर रेंज के आईजी ने बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि नक्सलियों का सरेंडर दूरस्थ क्षेत्रों में शासन की बढ़ती पहुंच तथा सुरक्षा बलों के लगातार चलाए जा रहे अभियानों के प्रयास को दिखाता है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों से माओवादी संगठनात्मक ढांचा काफी कमजोर हुआ है। उनके संचालन क्षेत्र में उल्लेखनीय कमी आई है। जैसे-जैसे विकास और कल्याणकारी योजनाएं आंतरिक गांवों तक पहुँचती जाएंगी, वैसे-वैसे क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास का मार्ग और सुदृढ़ होगा।  

सुरक्षा एजेंसियों के खौफ से बस्तर में नक्सलियों के TCOC पर सन्नाटा

बस्तर. देश के सबसे बड़े नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में इस बार एक अलग स्थिति देखने को मिल रही है। करीब दो दशक में पहली बार ऐसा लग रहा है कि नक्सली अपने अहम सैन्य अभियान TCOC (Tactical Counter Offensive Campaign) की शुरुआत तय समय पर नहीं कर पाए हैं। आमतौर पर यह अभियान हर साल 8 मार्च के बाद शुरू होकर जून तक चलता है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करना और बस्तर जैसे क्षेत्रों में अपनी पैठ बढ़ाना होता है। यह अभियान उनके गुरिल्ला युद्ध का हिस्सा है, जिसमें वे सूखे और पतझड़ के मौसम का फायदा उठाते हैं। लेकिन इस बार शुरुआती दिनों में किसी बड़ी गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं। बता दें कि सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सल संगठन पर बढ़ते दबाव और कमजोर होती संरचना का परिणाम मान रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में लगातार चलाए गए ऑपरेशन में कई बड़े कमांडर मारे गए, गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसके साथ ही जंगलों में नए सुरक्षा कैंप, सड़कों का तेजी से विस्तार और ड्रोन सर्विलांस ने नक्सलियों की गतिविधियों को काफी सीमित कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों के खौफ से अब नक्सली बड़ी संख्या में एकत्र होकर रणनीति बनाने में भी मुश्किल महसूस कर रहे हैं। ऐसे में बड़े हमलों की योजना बनाना उनके लिए पहले जितना आसान नहीं रह गया है।हालांकि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं। आशंका है कि नक्सली छोटे या मध्यम स्तर के हमलों के जरिए अभियान की शुरुआत कर सकते हैं। इसे देखते हुए बस्तर संभाग के सभी जिलों में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। यदि इस साल भी टीसीओसी प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो पाता, तो यह नक्सली आंदोलन के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका साबित हो सकता है।

मुठभेड़ में ढेर हुआ भैरमगढ़ एरिया कमेटी का इनामी नक्सली, पुलिस ने बरामद किया शव

दंतेवाड़ा दंतेवाड़ा–बीजापुर सीमाक्षेत्र के जंगल-पहाड़ी इलाके में सोमवार को पुलिस और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक सशस्त्र माओवादी मारा गया। मारे गए माओवादी की पहचान भैरमगढ़ एरिया कमेटी के एसीएम राजेश पुनेम के रूप में की गई है, जिस पर शासन द्वारा 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार थाना गीदम क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम गुमलनार, गिरसापारा एवं नेलगोड़ा के मध्य जंगल-पहाड़ क्षेत्र में नक्सली सामग्री एवं हथियारों का डंप छिपाए जाने की विश्वसनीय सूचना मिली थी। इस सूचना पर पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा के निर्देश पर उप पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑप्स) राहुल कुमार उयके के नेतृत्व में डीआरजी और बस्तर फाइटर्स के जवानों को योजनाबद्ध तरीके से रवाना किया गया। माओवादियों ने घात लगाकर की अंधाधुंध फायरिंग दोपहर लगभग 12:30 बजे पुलिस बल संभावित डंप स्थल की ओर बढ़ा और जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में सघन सर्चिंग व घेराबंदी शुरू की। रात करीब 8:30 से 9:00 बजे के बीच पहले से घात लगाए बैठे भैरमगढ़ एरिया कमेटी के 8 से 10 सशस्त्र माओवादियों ने पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि माओवादियों की मंशा जवानों की हत्या कर हथियार लूटने की थी। पुलिस पार्टी ने तत्काल सुरक्षित स्थान लेकर माओवादियों को आत्मसमर्पण की चेतावनी दी, लेकिन फायरिंग जारी रहने पर जवानों ने आत्मरक्षा में संयमित और सटीक जवाबी कार्रवाई की। प्रभावी जवाबी फायरिंग के बाद माओवादी कमजोर पड़ गए और घने जंगल, पहाड़ी भूभाग तथा अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। सर्चिंग में मिला शव और हथियार मुठभेड़ के बाद क्षेत्र की बारीकी से तलाशी लेने पर एक पुरुष सशस्त्र माओवादी का शव बरामद किया गया। साथ ही बड़ी मात्रा में हथियार और नक्सली सामग्री भी जब्त की गई। बरामद सामग्री में एक एसएलआर रायफल, एक इंसास रायफल, एक पिस्टल (मैगजीन सहित), एक वॉकी-टॉकी सेट, एसएलआर व इंसास की मैगजीन, जिंदा कारतूस, मिसफायर राउंड, खाली खोखे और अन्य सामग्री शामिल है। आत्मसमर्पित कैडर की मदद से मृत माओवादी की पहचान राजेश पुनेम, एसीएम, भैरमगढ़ एरिया कमेटी, निवासी ग्राम बुरजी, थाना गंगालूर, जिला बीजापुर के रूप में की गई। घटना स्थल से शव, हथियार और नक्सली सामग्री को अभिरक्षा में लेकर आईईडी और एंबुश के संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए टैक्टिकल मूवमेंट किया गया। आरओपी और एरिया डोमिनेशन के बाद बल सुरक्षित रूप से जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा लौट आया। पुलिस के अनुसार यह अभियान बिना किसी सुरक्षाबल क्षति के सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

झीरम हमले का मास्टरमाइंड चैतू और अन्य सरेंडर नक्सली विधानसभा में पहुंचे, देखी कार्यवाही

रायपुर  छत्तीसगढ़ के 120 सरेंडर नक्सली आज विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे हैं। इनमें 1 करोड़ का इनामी पूर्व नक्सली रुपेश भी शामिल है। वहीं, झीरम हमले का मास्टरमांड, 25 लाख इनामी चैतू भी कार्यवाही देखने आया है। 3 महीने पहले इसने जगदलपुर में सरेंडर किया था। इससे पहले गुरुवार रात ये सभी नक्सली डिप्टी सीएम विजय शर्मा के निवास पर डिनर के लिए पहुंचे थे। निवास पर उनके लिए रेड कार्पेट बिछाया गया था और फूलों से स्वागत किया गया। वहीं, सदन में आज विधायक पुन्नूलाल मोहले ने किसानों से जुड़ा मुद्दा उठाया। इसके साथ ही कांग्रेस विधायकों के सवाल पर वित्त मंत्री के जवाब के बाद हंगामा हुआ। विपक्ष ने विकास कार्यों की स्वीकृति मांगी। जवाब पर विपक्ष ने वॉकआउट किया। विजय शर्मा के बंगले पर मेहमान बने पूर्व नक्सली छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गुरुवार रात एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जो बस्तर के बदलते मिजाज की गवाही दे रही है। सूबे के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा के निवास पर सवा सौ से अधिक उन 'भाई-बहनों' का जमावड़ा लगा, जो कभी लाल आतंक की राह पर थे। यह महज एक डिनर कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन भटके हुए युवाओं को यह अहसास कराने की कोशिश थी कि लोकतंत्र में उनका स्वागत है। डिप्टी सीएम ने प्रोटोकॉल किनारे रखकर इन पुनर्वासित नक्सलियों के साथ बैठकर खाना खाया और उनसे संवाद किया। डेप्युटी सीएम ने पूछा 'रायपुर में कहां-कहां घूमे?' डिनर के दौरान विजय शर्मा ने एक-एक कर सभी से बात की, उनके रायपुर आने के अनुभव पूछे और मजाकिया अंदाज में यह भी पूछा कि उन्हें शहर कैसा लगा। जब एक युवक ने बताया कि वह दो दिन पहले ही आया है, तो डिप्टी सीएम ने उन्हें शहर के दर्शनीय स्थलों का आनंद लेने की सलाह दी। इस दौरान माहौल इतना सहज था कि किसी को अहसास ही नहीं हुआ कि ये वही लोग हैं जो कभी सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बने हुए थे। आज विधानसभा देखेंगे पूर्व नक्सली इस पूरे दौरे का सबसे अहम पड़ाव शुक्रवार को होने वाला है। खबर है कि ये आत्मसमर्पित नक्सली छत्तीसगढ़ विधानसभा जाएंगे। वे न केवल विधानसभा की भव्य इमारत को देखेंगे, बल्कि सदन की कार्यवाही के भी साक्षी बनेंगे। यह कदम उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझने और व्यवस्था पर भरोसा कायम करने में बड़ी मदद करेगा। गृह मंत्री ने विधानसभा में खुद जानकारी दी कि अब तक 2,937 नक्सली पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। 31 मार्च की डेडलाइन और बदलता बस्तर यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दी गई नक्सलवाद के खात्मे की 31 मार्च 2026 की डेडलाइन में अब एक महीने से भी कम समय बचा है। हाल ही में बड़े कमांडर देवजी के सरेंडर और रिकॉर्ड तोड़ पुनर्वास के आंकड़ों ने सरकार के हौसले बुलंद कर दिए हैं। प्रशासन का दावा है कि आत्मसमर्पित नक्सलियों पर इनाम की कुल 5.64 करोड़ रुपये की राशि उनके पुनर्वास और बेहतर भविष्य के लिए उपयोग की जा रही है।

बीजापुर में सुरक्षा बलों ने 2 नक्सलियों को ढेर किया, अन्वेष और उसके 12 साथियों ने किया सरेंडर

जगदलपुर/बीजापुर ओडिशा में माओवादी नेता ने अपने एक साथी को सरेंडर करने से रोकने के लिए उसकी हत्या कर दी और उसके शव को कंधमाल जिले के एक जंगल में दफना दिया। पुलिस ने बताया कि इस घटना का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित की लाश दारिंगबाड़ी पुलिस स्टेशन की सीमा के तहत अरबाडू जंगल में मिली। छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य ओडिशा के कंधमाल जिले में एक नक्सली को उसके ही साथियों ने गोली मारकर दफना दिया। अन्वेष 22 लाख का इनामी था। वह अपने 12 साथियों के साथ जल्द ही आत्मसमर्पण करने वाला था। उससे पहले ही उसकी हत्या कर दी गई। जांगला थाना क्षेत्र के इंद्रावती नदी के जैगुर-डोडुम के जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम सर्चिंग के लिए निकली थी। जवानों को देखते ही नक्सलियों ने फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी गोलियां दागी। ढेर हुए नक्सलियों में एक महिला नक्सली भी शामिल है। सरेंडर करना चाहता था रेणु पुलिस ने बताया कि रेणु की हत्या कथित तौर पर 29 जनवरी को सुकरू ने की थी, जो अभी केकेबीएन डिवीजन का हेड है। उन्होंने बताया कि रेणु के सरेंडर करने का इरादा जताने के बाद सुकरू ने उसकी हत्या कर दी थी। रेणु की बॉडी को जंगल में गहरे दफना दिया गया था। यह मामला तब सामने आया जब सरेंडर करने वाले एक माओवादी ने पूछताछ के दौरान कथित हत्या के बारे में बताया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि हमने दरिंगबाड़ी पुलिस स्टेशन में सुकरू के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है और जांच शुरू की है। उन्होंने बताया कि बॉडी को पोस्ट-मॉर्टम के लिए बरहामपुर के एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल भेज दिया गया है। जानिए कैसे सरेंडर करने से रोकते थे माओवादी पुलिस ने बताया कि इस हत्या से पता चलता है कि कैसे बड़े माओवादी नेता सिस्टमैटिक तरीके से कैडर को सरेंडर करने से रोकते थे और हथियार डालने की कोशिश करने वालों को मार भी देते थे। उन्होंने बताया कि कई क्राइम सिंडिकेट में ये आम बात है। पुलिस ने रविवार को रायकिया पुलिस स्टेशन के तहत नंदबली रिजर्व फॉरेस्ट में एक ऑपरेशन चलाया था। इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने दो माओवादियों को मार गिराया था। इस पूरी कार्रवाई के तीन दिन बाद पुलिस ने शव की बरामदगी की थी। पुलिस को मौके से हथियारों, गोला-बारूद और माओवादी सामान का एक जखीरा भी मिला था। पुलिस ने परिवार को सौंपा शव बुधवार को पुलिस ने कानूनी फॉर्मैलिटी पूरी करने के बाद दोनों माओवादियों की बॉडी उनके परिवारों को सौंप दीं। बॉडी लेने के लिए रिश्तेदार छत्तीसगढ़ से फूलबनी आए थे। एक पुलिस ऑफिसर ने बताया कि हमने परिवारों को बॉडी उनके घर ले जाने में मदद करने के लिए एक एम्बुलेंस और पैसे की मदद दी। पुलिस ने बताया कि केंद्र द्वारा निर्धारित 31 मार्च की डेडलाइन को पूरा करने के लिए वे पूरी लगने से काम कर रहे हैं।  इंसास राइफल, बोर बंदूके जब्त एसपी डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि मुठभेड़ के बाद चलाए गए सर्च अभियान में दो वर्दीधारी माओवादियों के शव बरामद हुए। मौके से एक SLR, एक इंसास राइफल, एक 12 बोर राइफल, विस्फोटक सामग्री और दैनिक उपयोग के सामान भी जब्त किए गए हैं। पड़ोसी राज्य में नक्सली की हत्या 26 फरवरी को ओडिशा के कंधमाल जिले में नक्सली को उसके ही साथियों ने मार डाला। पुलिस के मुताबिक, अन्वेष दरिंगबाड़ी थाना क्षेत्र के पाकरी रिजर्व फॉरेस्ट में केकेबीएन ग्रुप के एरिया पार्टी कमांडर था। अन्वेष समर्पण की तैयारी में था। इसी शक में उसे मारकर जंगल में दफना दिया गया। मोस्ट वांटेड नक्सली सुकुरु और अन्य साथियों ने वारदात को अंजाम दिया है। हत्या से पहले दोनों पक्षों में विवाद भी हुआ था। कंधमाल एसपी हरीशा बीसी ने घटना को संगठन की अंदरूनी कलह बताया है। उन्होंने कहा कि, जो लोग अभी भी संगठन में हैं, वे सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सामान्य जीवन में लौटें। कांकेर में डीवीसीएम मासे ने डाले हथियार कांकेर के छिंदपदर गांव से माओवादी डीवीसीएम मासे बारसा ने एके 47 के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। मासे साल 2003 से दण्डकारणय, अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर में माओवाद संगठन में सक्रिय थी। 26 फरवरी को उसने जंगल के रास्ते हाथों में AK-47 लेकर कांकेर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। 6 फरवरी को 7 नक्सली मारे गए थे इससे पहले 6 फरवरी को छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बॉर्डर पर पुलिस और नक्सलियों के बीच हुए मुठभेड़ में 7 नक्सली ढेर हुए थे। इनमें 3 महिला नक्सली शामिल थे। वहीं महाराष्ट्र का एक जवान शहीद हो गया था, 1 अन्य जवान घायल था। नक्सलियों की ओर से फायरिंग में गोली कॉन्स्टेबल दीपक चिन्ना मदावी (38 साल) को जा लगी। उन्हें तुरंत एयरलिफ्ट कर भामरागड़ के अस्पताल लाया गया था। जहां ऑपरेशन के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था।

नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: पहली बार देवजी सहित दो शीर्ष माओवादी नेताओं ने डाले हथियार

जगदलपुर माओवादी संगठन को अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक झटका लगा है। पोलित ब्यूरो सदस्य टिप्पिरी थिरुपथी उर्फ देवजी उर्फ कुम्मा दादा ने अपने तीन शीर्ष साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। सभी ने तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी के समक्ष हथियार डालते हुए मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। देवजी के साथ जिन बड़े माओवादी नेताओं ने आत्मसमर्पण किया, उनमें केंद्रीय समिति सदस्य मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम, स्टेट कमेटी मेंबर बड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर, स्टेट कमेटी सदस्य नुने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना उर्फ सन्नू दादा शामिल हैं। यह आत्मसमर्पण कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार दो केंद्रीय स्तर के माओवादी नेताओं ने एक साथ हथियार डाले हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, लगातार बढ़ते फोर्स प्रेशर, सघन ऑपरेशनों और संगठन के भीतर कमजोर पड़ते नेटवर्क के चलते यह बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। वहीं इसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में सुरक्षा बलों की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

BBM डिवीजन के 15 नक्सली 3 मार्च तक करेंगे आत्मसमर्पण

रायपुर. छत्तीसगढ़ में लगातार जारी नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास के दौरे के बीच, अब नक्सल संगठन के बीबीएम डिवीजन की ओर से गृहमंत्री विजय शर्मा को एक पत्र लिखा गया है. इसमें 3 मार्च तक 15 नक्सली हथियार के साथ सरेंडर करने की बात कही गई है. सभी को बलांगिर, बरगढ़ और महासमुंद इलाकों में सक्रीय बताया जाता है. यह पत्र पश्चिम सब ब्यूरो सचिव विकास ने जारी किया गया है.  पत्र में क्या-क्या लिखा? बीबीएम डिवीजन के नक्सलियों के पत्र में कहा गया है कि वह हथियार सहित आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं. गृहमंत्री से रेडियो के माध्यम से सुरक्षा की गारंटी देने की अपील की है. आश्वासन मिलने के बाद 2 से 3 मार्च तक बाहर आने की बात कही है. नक्सलियों ने बताया कि वह  ओडिशा में है, लेकिन अधिकांश सदस्य बस्तर क्षेत्र के होने के कारण छत्तीसगढ़ में ही सरेंडर करने पर सहमत हुए हैं. एक टीम आगे बढ़कर संपर्क स्थापित कर रही है, जबकि बाकी सदस्य धीरे-धीरे पहुंच रहे हैं. 1 मार्च तक समय देने का आग्रह किया गया है. आत्मसमर्पण में देरी पर दी सफाई ? केंद्रीय कमेटी (CC) के निर्णय का इंतजार, आत्मसमर्पण करने वालों को बैरकों में रखने और बाद में केस में फंसाने की आशंका और कॉम्बिंग के दौरान मुठभेड़ का डर. इन कारणों से नक्सलियों कहना है कि कैडर में संशय है, इसलिए कुछ दिन इंतजार किया गया.  पत्र के अंत में लिखा गया है कि कुल 15 सदस्य – DVC-3, AC-5, PM-7, आत्मसमर्पण के लिए तैयार हैं और महासमुंद जिले में सरेंडर करने की योजना है. साथ ही मार्च 31 के लक्ष्य से 28 दिन पहले ही आत्मसमर्पण करने की बात कही गई है. सुरक्षा देने की अपील  पत्र में विशेष रूप से आग्रह किया गया है कि आत्मसमर्पण के लिए नक्सलियों के लिए पुलिस कॉम्बिंग और दबाव की कार्रवाई रोकी जाए, ताकि आने वाले नक्सली सुरक्षित तरीके से निर्धारित स्थान तक पहुंच सकें. साथ ही ओडिशा पुलिस को भी सूचना देकर बलांगिर और बरगढ़ जिलों में सर्च ऑपरेशन रोकने का अनुरोध किया गया है. नक्सलियों का कहना है कि रास्ते में सुरक्षा बलों की मूवमेंट दिखने पर समूह के बिखरने का खतरा है. गृहमंत्री शर्मा करेंगे वीडियो जारी गृहमंत्री विजय शर्मा का नक्सलियों के पत्र को लेकर बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि पत्र जारी कर बलांगिर, बरगढ़ और महासमुंद डिवीजन के नक्सलियों ने पुनर्वास की इच्छा जताई है. उनकी संख्या 15 से अधिक है. नक्सलियों ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेडियो से संदेश देने अपील की है. नक्सलियों के लिए सुरक्षित मार्ग प्रशस्त करने को लेकर सरकार गंभीरता से प्रयास कर रही है. गृहमंत्री ने बताया कि वह नक्सलियों से वापस लौटने की अपील, उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और उन्नति का पूरा ध्यान रखने के संदेश के साथ एक वीडियो जारी करेंगे.

अबूझमाड़ के जंगलों में नक्सलियों का बड़ा जखीरा बरामद, हथियार फैक्ट्री और विस्फोटक से जुड़ी बड़ी कार्रवाई

नारायणपुर  जिले के अबूझमाड़ अंचल में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है. थाना सोनपुर क्षेत्र के कुरुसकोड़ो जंगल में डीआरजी और नारायणपुर पुलिस ने नक्सलियों की एक गुप्त हथियार फैक्ट्री से जुड़े बड़े डंप का खुलासा किया है. जिस दिन कुरुसकोड़ो में नया सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित किया गया, उसी दिन यह बड़ी सफलता हाथ लगी. खुफिया सूचना के आधार पर चला सर्च ऑपरेशन पुलिस को विश्वसनीय खुफिया सूचना मिली थी कि कुरुसकोड़ो–पांगुड–कंदुलपार क्षेत्र में नक्सलियों ने वर्षों पहले हथियार और विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखी है. इसके बाद थाना सोनपुर से डीआरजी टीम ने एरिया डॉमिनेशन पैट्रोल योजना में बदलाव कर सघन तलाशी अभियान चलाया. तलाशी के दौरान जमीन के भीतर प्लास्टिक ड्रम में दबाकर रखी गई भारी मात्रा में हथियार निर्माण से जुड़ी सामग्री बरामद की गई. हथियार फैक्ट्री के सबूत मिले बरामद सामग्री से साफ संकेत मिलता है कि नक्सलियों ने जंगल के अंदर अवैध हथियार फैक्ट्री विकसित कर रखी थी. एसएलआर की खाली मैगजीन, बीजीएल और यूबीजीएल सेल तथा एल्यूमिनियम पाइप से हैंड ग्रेनेड बनाने की सामग्री सबसे चौंकाने वाली बरामदगी रही. बरामद सामग्री का संक्षिप्त विवरण तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में लोहे और एल्यूमिनियम के पाइप, बीजीएल सेल, खाली मैगजीन, ग्राइंडर मशीन, वेल्डिंग उपकरण, मोटर पार्ट्स, कटर व्हील और अन्य मशीनरी सामान बरामद किया गया. विस्तार से जानिए क्या-क्या मिला?     लोहा पाइप हॉफ इंच – 584 नग     लोहा पाइप 1 इंच – 588 नग     लोहा पाइप डेढ़ इंच – 70 नग     लोहा पाइप 02 इंच – 30 नग     लोहा पाइप (छोटा) डेढ़ इंच – 11 नग     लोहा पाइप ढाई इंच – 03 नग     एल्युमिनियम हॉफ इंच – 140 नग     एल्युमिनियम 2 इंच – 32 नग (प्रत्येक वज़न 8 किलोग्राम)     एल्युमिनियम 3 इंच – 30 नग (प्रत्येक वज़न 22.5 किलोग्राम)     बीजीएल सेल – 61 नग     बीजीएल सेल (छोटा) – 21 नग     तीर-धनुष बीजीएल – 46 नग     एसएलआर की खाली मैगजीन – 14 नग     पिस्टल की खाली मैगजीन – 01 नग     टुलू मोटर – 01 नग     केरोसिन ब्रश ब्लू पम्प – 05 नग     कटर व्हील – 310 नग     स्क्रू (छोटा) – 04 पैकेट     स्क्रू (बड़ा) – 01 पैकेट     लाइट 3-पिन – 06 नग     लाइट सिंगल बटन – 10 नग     वेल्डिंग इलेक्ट्रोड होल्डर – 01 नग     वर्गों कंपनी का इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पैक्ट स्केल – 01 नग     मोटर सायकल स्पोक – 44 नग     रेतमल – 05 नग     ग्राइंडर मशीन – 02 नग     ग्राइंडर टूल बॉक्स – 01 नग     स्टॉक पिन – 40 नग     स्टॉक वाइसर – 11 पैकेट     ग्रेडिंग व्हील – 05 नग     मोटर पट्टा (रबर बेल्ट) – 05 नग     अन्य हथियार निर्माण एवं मशीनरी से संबंधित सामग्री बड़ी साजिश नाकाम पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बीजीएल और यूबीजीएल सेल की बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि नक्सली किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे थे. समय रहते इस डंप का पता लगने से एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया गया. पूरे अभियान में न तो किसी नागरिक को नुकसान पहुंचा और न ही सुरक्षा बलों को कोई क्षति हुई.     नक्सलवाद के खिलाफ हमारा अभियान लगातार जारी है. सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से क्षेत्र में शांति और विकास का रास्ता खुलेगा और तय समय सीमा में नक्सलमुक्त बस्तर का लक्ष्य पूरा किया जाएगा.- पुलिस अधीक्षक, रॉबिनसन गुड़िया ग्रामीणों का भरोसा बढ़ा हाल ही में कुरुसकोड़ो क्षेत्र में नारायणपुर पुलिस और बीएसएफ के सहयोग से नया सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित किया गया है. लगातार कैंप स्थापना, सड़क निर्माण और विकास कार्यों के कारण स्थानीय ग्रामीणों का भरोसा पुलिस पर बढ़ा है. 

छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बॉर्डर पर नक्सलियों के साथ मुठभेड़, 3 नक्सली मारे गए, एक जवान शहीद

बीजापुर  बीजापुर (Bijapur) और महाराष्ट्र की सीमा से लगे अबूझमाड़ (Abujhmad) क्षेत्र में पुलिस (Police) और नक्सलियों (Naxalite) के बीच पिछले दो दिनों से भीषण मुठभेड़ जारी है. यह मुठभेड़ एक बड़े एंटी नक्सली ऑपरेशन के दौरान शुरू हुई, जिसे सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों के निर्णायक सफाए के रूप में देखा है. मुठभेड़ के दौरान अब तक तीन नक्सली ढेर किए जा चुके हैं, जिनमें दो पुरुष और एक महिला शामिल है. घटना स्थल से एक AK-47 राइफल और एक SLR बरामद की गई है. मारे गए नक्सलियों की पहचान अभी तक जारी नहीं की गई है और उनकी विस्तृत जानकारी एकत्र की जा रही है. अबुझमाड़ जंगल इलाके में चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई है, जिसमें तीन नक्सली मारे गए हैं।पुलिस के मुताबिक मारे गए नक्सलियों में दो पुरुष और एक महिला शामिल हैं। मुठभेड़ स्थल से एक AK-47 राइफल और एक SLR राइफल बरामद की गई है। फिलहाल मारे गए नक्सलियों की पहचान नहीं हो पाई है।इस अभियान के दौरान C-60 यूनिट के कांस्टेबल दीपक चिन्ना मडावी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें हेलीकॉप्टर से भामरागढ़ के उप-जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त की। वहीं एक अन्य जवान कांस्टेबल जोगा मडावी गोली लगने से घायल हुए हैं, जिनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।सुरक्षा बलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है और पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। एक जवान शहीद, एक घायल इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को भी नुकसान झेलना पड़ा है. C-60 कमांडो के कॉन्स्टेबल दीपक चिन्‍ना मडावी (38 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हुए थे. उन्हें हेलिकॉप्टर से भामरागढ़ उप-जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने शहादत प्राप्त की. पूरे क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान जारी है. सुरक्षा बलों को आशंका है कि जंगलों में अभी भी नक्सलियों का समूह सक्रिय हो सकता है, इसलिए आसपास के इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. मुठभेड़ जिस इलाके में चल रही है, वह घने जंगलों और दुर्गम भौगोलिक स्थितियों के कारण नक्सलियों का पुराना ठिकाना माना जाता रहा है. महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले से सटे इस सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा बल लंबे समय से नक्सल विरोधी अभियानों को गति दे रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई नक्सलियों के खिलाफ चल रहे बड़े अभियान का हिस्सा है और आगे भी इसी प्रकार के ऑपरेशन जारी रहेंगे.