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जंगल में घातक ऑपरेशन: झारखंड में सुरक्षाबलों की कार्रवाई, 21 नक्सली मारे गए

चाईबासा झारखंड के सारंडा जंगल में छिपे नक्सलियों पर मौत बरस पड़ी है। 36 घंटे से जारी मुठभेड़ में अब तक 21 नक्सली मौत के घाट उतारे जा चुके हैं। गुरुवार को 15 की मौत की पुष्टि के बाद शुक्रवार को 6 और शव बरामद किए गए हैं। सिर पर 2 करोड़ से ज्यादा इनाम वाला खूंखार नक्सली अनल यहां 25 लड़ाकों संग घिर गया था। अनल समेत 21 मारे जा चुके हैं।   झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में सारंडा के घने जंगलों में दो दर्जन नक्सलियों के साथ पतिराम मांझी उर्फ​अनल दा को घेर लिया गया था। सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन में इन्हें घेर लिया। नक्सलियों की ओर से फायरिंग के बाद सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई से खलबली मचा दी। 2.35 करोड़ रुपये के इनाम वाला अनल दा भी मारा गया। उस पर झारखंड सरकार ने एक करोड़ रुपये, ओडिशा सरकार ने 1.2 करोड़ रुपये और नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। अनल दा का मारा जाना क्यों इतनी बड़ी चोट अनल दा माओवादियों के मिलिट्री कमीशन का प्रमुख भी था। हाल के सालों में कोल्हान के सारंडा जंगली क्षेत्र में माओवादियों की ओर से सुरक्षाबलों पर किए गए बड़े हमलों में अनल की भूमिका अहम थी। मारे गए नक्सलियों में 25 लाख का इनामी सैक कमांडर अनमोल उर्फ सुशांत भी है। अनमोल पर ओडिशा में भी 65 लाख का इनाम था। अब तक ढेर किए गए नक्सलियों में एक दर्जन से ज्यादा की पहचान कर ली गई है। मारे गए नक्सलियों में कई महिलाएं भी हैं। भारी मात्रा में विस्फोटक भी बरामद आईजी अभियान माइकल राज एस ने बताया कि चाईबासा के किरीबुरु के बीहड़ कुमड़ी और होंजोदिरी गांव के बीच गुरुवार सुबह करीब छह बजे शुरू हुई मुठभेड़ के बाद सर्च अभियान के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी बरामद किए हैं। हेलीकॉप्टर और ड्रोन की मदद से नक्सलियों की तलाश की जा रही है। आईजी अभियान ने यह भी कहा कि इस ऑपरेशन से माओवादी संगठन की कमर टूट गई है।  

नक्सलवाद से वापसी: 29 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा छोड़ने का लिया निर्णय

सुकमा  नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए दरभा एवं केरलापाल एरिया कमेटी में सक्रिय रहे 29 नक्सलियों ने एसपी किरण चव्हाण, एएसपी रोहित शाह और सीआरपीएफ 74वीं बटालियन के कमांडेंट हिमांशु पांडे के समक्ष आत्मसमर्पण किया। गोगुंडा क्षेत्र में सुरक्षा कैंप की स्थापना के बाद नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगा है। लगातार बढ़ी सुरक्षा मौजूदगी, विकास कार्यों में तेजी और शासन की पुनर्वास नीति ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया है। आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली लंबे समय से दरभा और केरलापाल एरिया कमेटी के अंतर्गत सक्रिय थे और विभिन्न नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने कहा कि सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति नक्सलियों को हिंसा छोड़कर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान कर रही है। एएसपी रोहित शाह ने बताया कि क्षेत्र में शांति और विकास सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ-साथ संवाद और विश्वास निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है।सीआरपीएफ 74वीं बटालियन के कमांडेंट हिमांशु पांडे ने कहा कि गोगुंडा में कैंप की स्थापना से क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है, जिससे आम नागरिकों में विश्वास बढ़ा है और नक्सलियों का प्रभाव कमजोर पड़ा है।

दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, एक करोड़ से अधिक के थे इनाम, 18 महिलाएं भी शामिल

दंतेवाड़ा. छत्तीसगढ़ राज्य सरकार और सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे ‘पूना मारगेमः पुनर्वास से पुनर्जीवन’ और ‘लोन वर्राटू’ यानी घर वापसी अभियान के तहत कुल 63 इनामी नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है. इन नक्सलियों पर कुल 1 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था. खास बात यह रही कि आत्मसमर्पण करने वालों में 16 महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो लंबे समय से बस्तर और उससे सटे इलाकों में सक्रिय थीं. नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले से नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक सामने आई है. यह आत्मसमर्पण न सिर्फ संख्या के लिहाज से बड़ा है, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर नक्सल नेटवर्क के लिए गहरा झटका माना जा रहा है. दंतेवाड़ा पुलिस और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों ने यह साबित कर दिया है कि सरकार की पुनर्वास आधारित नीति जमीन पर असर दिखा रही है. दंतेवाड़ा में हुआ यह सामूहिक सरेंडर केवल स्थानीय स्तर की घटना नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे बस्तर संभाग और पड़ोसी राज्यों तक देखा जा रहा है. आत्मसमर्पित नक्सली दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर, माड़ क्षेत्र और ओडिशा राज्य के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय थे. इनमें से कई नक्सली संगठन में अहम पदों पर रहे हैं और लंबे समय से हिंसक गतिविधियों में शामिल थे. सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन, जंगलों में बढ़ती घेराबंदी, और दूसरी ओर सरकार की पुनर्वास नीति ने नक्सलियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया. यही कारण है कि अब हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की प्रवृत्ति तेज हो रही है. यह घटना नक्सलवाद के कमजोर पड़ते ढांचे और बदलते बस्तर की एक बड़ी तस्वीर पेश करती है. प्रमुख नक्सली नेताओं का आत्मसमर्पण आत्मसमर्पण करने वालों में पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के सचिव मोहन कड़ती भी शामिल है, जिसने अपनी पत्नी के साथ आत्मसमर्पण किया है। इन नक्सलियों पर कुल मिलाकर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था, जो उनकी नक्सली गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। इस बड़े पैमाने पर हुए आत्मसमर्पण से नक्सलियों के संगठन को बड़ा झटका लगा है। अभियान की व्यापकता यह आत्मसमर्पण केवल छत्तीसगढ़ प्रदेश के नक्सलियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें छत्तीसगढ़ प्रदेश के बाहर के भी नक्सली शामिल हैं। यह इस बात का संकेत देता है कि राज्य की पुलिस और सुरक्षा बल नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई कर रहे हैं और नक्सलियों के प्रभाव को कम करने में सफल हो रहे हैं। लोन वर्राटू (घर वापसी) अभियान के तहत नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाने के प्रयास सफल हो रहे हैं, जिससे क्षेत्र में शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। सुरक्षाबलों के प्रयास सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे सघन अभियान, नक्सलियों के विरुद्ध मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीतियों के तहत मुख्यधारा में एकीकृत करने और उन्हें बेहतर जीवन जीने के अवसर प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी। इस सफलता से क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति में सुधार की उम्मीद है और विकास कार्यों को गति मिलेगी। यह घटना छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।  ‘पूना मारगेम’ और ‘लोन वर्राटू’ अभियान की भूमिका दंतेवाड़ा में नक्सलियों के इस बड़े सरेंडर के पीछे ‘पूना मारगेमः पुनर्वास से पुनर्जीवन’ और ‘लोन वर्राटू’ अभियान की अहम भूमिका मानी जा रही है. इन अभियानों का उद्देश्य नक्सलियों को केवल हथियार छोड़ने के लिए मजबूर करना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन का विकल्प देना है. सरकार का फोकस भरोसा, संवाद और पुनर्वास पर रहा है. एसपी गौरव राय का बयान दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने इसे पुलिस और राज्य सरकार की बड़ी सफलता बताया. उन्होंने कहा कि नक्सली विचारधारा छोड़कर मुख्यधारा में लौटना यह साबित करता है कि विकास और विश्वास की नीति सफल हो रही है. आत्मसमर्पित नक्सलियों को सरकार की सभी योजनाओं से जोड़ा जाएगा.

छत्तीसगढ़ के सुकमा में 26 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 65 लाख रुपये का इनाम था 13 माओवादियों पर

सुकमा  छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बुधवार को 26 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 13 पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम था। सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सुकमा पुलिस की ओर से ‘‘पूना मार्गेम’’ पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान संचालित किया जा रहा है। इससे प्रभावित होकर तथा पुलिस के बढ़ते प्रभाव से 26 नक्सलियों ने आत्मसमपर्ण किया है। इन 26 नक्सलियों में सात महिलाएं हैं। इन सभी ने सामान्य जीवन में लौटने का निर्णय लिया है। आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को 50,000 रुपये की सहायता दी गई और उन्हें सरकार की नीति के अनुसार पुनर्वासित किया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ये लोग माओवादियों की पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, माड़ डिवीजन और आंध्र ओडिशा सीमा डिवीजन में सक्रिय थे और अबूझमाड़, छत्तीसगढ़ के सुकमा और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में कई घटनाओं में शामिल थे। ये माओवादी राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित थे जिसके तहत आत्मसमर्पण किया है।   लाली उर्फ मुचाकी पर था दस लाख का इनाम लाली उर्फ मुचाकी आयते लखमू (35), जो एक कंपनी पार्टी समिति की सदस्य थी इस पर 10 लाख रुपये का इनाम था। मुचाकी हिंसा की कई बड़ी घटनाओं में शामिल थी, जिसमें 2017 में कोरापुट रोड (ओडिशा) पर एक वाहन को निशाना बनाकर IED विस्फोट करना भी शामिल है, जिसमें 14 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी। चार अन्य प्रमुख कैडर – हेमला लखमा (41), अस्मिता उर्फ कमलू सन्नी (20), रामबती उर्फ पदम जोगी (21) और सुंदरम पाले (20) इन चारों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था। 2020 के मिनपा हमले में शामिल था लखमा पुलिस अधिकारियों ने बताया कि लखमा 2020 के मिनपा हमले में शामिल था, जिसमें 17 सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी। आत्मसमर्पण करने वाले अन्य कैडरों में से तीन पर 5-5 लाख रुपये का इनाम था, एक कैडर पर तीन लाख रुपये, एक कैडर पर दो लाख रुपये और तीन कैडरों पर  एक-एक लाख रुपये का इनाम था। आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को 50,000 रुपये की सहायता दी गई है और उन्हें सरकार की नीति के अनुसार आगे पुनर्वासित किया जाएगा।   आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली 1. लाली उर्फ मुचाकी आयते पिता मुचाकी गंगा पति स्व. रमेश उम्र लगभग 35 वर्ष निवासी तोलेवर्ती गायतापारा थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा।धारित पद सीआरसी कम्पनी 3, प्लटून 2 डिप्टी कमाण्डर/सीवायपीसीएम/इनाम 10 लाख रूपये। 2. हेमला लखमा पिता टोकलू उम्र लगभग 41 वर्ष निवासी पारलागट्टा पटेलपारा थाना जगरगुण्ड़ा जिला सुकमा। धारित पद प्लाटून नंबर 4 का कमाण्डर/डीव्हीसीएम/इनामी 08 लाख। 3. आसमिता उर्फ कमलू सन्नी पिता स्व. भीमा उम्र लगभग 20 वर्ष निवासी पारलागट्टा थाना जगरगुण्ड़ा जिला सुकमा। धारित पद कम्पनी नंबर 7 की पार्टी सदस्या/इनामी 8 लाख। 4. रामबत्ती उर्फ संध्या उर्फ पदाम जोगी पिता स्व. हुंगा उम्र लगभग 21 वर्ष निवासी निवासी तोलेवर्ती दोड़बुण्डपारा थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा।धारित पद कम्पनी नंबर 7 की पार्टी सदस्या/इनामी 8 लाख। 5. सुण्डाम पाले पिता स्व. भीमा उम्र लगभग 20 वर्ष निवासी परलागट्टा थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा। धारित पद पीएलजीए बटालियन नंबर 1 कम्पनी नंबर 1 सेक्सन बी (पार्टी सदस्य)/इनामी 8 लाख। 6. निलेश उर्फ हेमला भीमा पिता स्व0 हांदा उम्र लगभग 35 वर्ष जाति मुरिया निवासी प्रतापगिरी थाना तोंगपाल जिला सुकमा। धारित पद दरभा डिवीजन कृषि टीम कमाण्डर/एसीएम/इनामी 5 लाख। 7. मुचाकी संदीप उर्फ हिड़मा पिता स्व. सन्नू निवासी तोलवर्ती थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा। धारित पद पूर्व सिलगेर एलओएस कमांडर/एसीएम/इनामी 5 लाख। 8. मड़कम चैते उर्फ मंगली पति संदीप उर्फ मुचाकी हिड़मा (जगरगुण्डा एरिया एसीएम) निवासी जब्बागट्टा थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा। धारित पद जगरगुण्डा एरिया केएमएस अध्यक्षा/एसीएम/इनामी 5 लाख। 9. ताती सोमडू पिता स्व. ताती पण्डरू उम्र लगभग 40 वर्ष निवासी परलागट्टा थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा। धारित पद बैयमपल्ली आरपीसी मिलिशिया कमांडर/इनामी 3 लाख। 10. मुचाकी देवा पिता सोमड़ा उम्र लगभग 35 वर्ष निवासी बेड़मा जोंगापारा थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा। धारित पद बेड़मा आरपीसी डीएकेएमएस अध्यक्ष/इनामी 2 लाख। 11. सरिता उर्फ इरपा सीते पिता स्व. दारा उम्र लगभग 28 वर्ष निवासी पेद्दागेलूर थाना बासागुड़ा जिला बीजापुर। धारित पद बासागुड़ा एलओएस पार्टी सदस्या/इनामी एक लाख। 12. वेट्टी मासा उर्फ वासु पिता भीमा उम्र लगभग 17 वर्ष निवासी परलागट्टा पटेलपारा थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा। धारित पद एओबी/सी.सी. उदय दादा का गार्ड सदस्य/ इनामी एक लाख। 13. हेमला दशरू उर्फ अजय पिता हेमला बुधरू उम्र लगभग 17 वर्ष निवासी परलागट्टा थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा। धारित पद गढचिरौली एसजेडसीएम गिरधर का गार्ड सदस्य(पार्टी सदस्य)/इनामी एक लाख। 14. विजय मुचाकी पिता स्व. देवा उम्र लगभग 19 वर्ष निवासी किन्दरेलपाड़ थाना भेज्जी जिला सुकमा। धारित पद गोमपाड़ आरपीसी सीएनएम सदस्य। 15. आकाश मुचाकी पिता बुधरा उम्र लगभग 21 वर्ष निवासी किन्दरेलपाड़ थाना भेज्जी जिला सुकमा। धारित पद गोमपाड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य। 16. मड़कम/मुचाकी पायके पिता आकाश मुचाकी उम्र लगभग 23 वर्ष निवासी किन्दरेलपाड़ थाना भेज्जी जिला सुकमा। धारित पद गोमपाड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्या। 17. मिड़ियम सुरेश पिता मगंडू उम्र लगभग 24 वर्ष निवासी बेड़मा आमापारा थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा। धारित पद बेड़मा आरपीसी आर्थिक शाखा अध्यक्ष। 18. मुचाकी बुधरा पिता स्व. हिड़मा उम्र लगभग 67 वर्ष निवासी किन्दरेलपाड़ थाना कोंटा जिला सुकमा। धारित पद गोमपाड़ आरपीसी उपाध्यक्ष कृषि कमेटी अध्यक्ष। 19. मुचाकी मुड़ा पिता मुचाकी जोगा उम्र लगभग 29 वर्ष निवासी किन्दरेलपाड़ पटेलपारा थाना भेज्जी जिला सुकमा। धारित पद गोमपाड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य। 20. माड़वी हड़मा पिता स्व. मासा उम्र लगभग 33 वर्ष निवासी तुमालपाड़ थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा। धारित पद जोन्नागुड़ा आरपीसी मिलिशिया सदस्य। 21. माड़वी सुक्का उर्फ रवि पिता स्व. हड़मा उम्र लगभग 39 वर्ष निवासी गोमपाड़ नयापारा थाना भेज्जी जिला सुकमा। धारित पद गोमपाड़ आरपीसी जंगल कमेटी अध्यक्ष। 22. मड़कम हुंगा पिता सुक्का उम्र लगभग 24 वर्ष निवासी गोमपाड़ थाना भेज्जी जिला सुकमा। धारित पद गोमपाड़ आरपीसी मिलिषिया सदस्य। 23. सुण्डम राजू पिता स्व. जोगा उम्र लगभग 38 निवासी परनलागट्टा थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा। धारित पद बैयमपल्ली आरपीसी डीएकेएमएस उपाध्यक्ष । 24 वेट्टी बुधू पिता स्व सुक्का उम्र लगभग 35 वर्ष निवासी परलागट्टा थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा। धारित पद बैयमपल्ली आरपीसी मिलिशिया सदस्य। 25 गोंचे उर्फ मड़कम देवा पिता स्व. जोगा उम्र लगभग 42 वर्ष निवासी मड़़पी दुलेड थाना चिंतागुफा जिला सुकमा। धारित पद ग्राम मड़पेदुलेड़ डीएकेएमएस … Read more

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ बड़ी मुठभेड़, 12 से ज्यादा नक्सली मारे गए

सुकमा  छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबलों का बड़ा अभियान जारी है। सुकमा और बीजापुर जिलों में पुलिस और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ चल रही है। सुकमा जिले के किस्टाराम क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 10 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना है, जबकि इलाके में अब भी रुक-रुककर फायरिंग जारी है। दूसरी ओर बीजापुर जिले में दो माओवादियों को ढेर कर दिया गया है, जिनके शव और हथियार बरामद कर लिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक माओवादियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिलने के बाद डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) की टीम ने नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया था। इसी दौरान शनिवार तड़के नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में मुठभेड़ शुरू हो गई। माओवादियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया था। डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) की टीम ऑपरेशन पर निकली थी। इसी दौरान शनिवार तड़के नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। सुबह करीब 5 बजे से माओवादियों के साथ रुक-रुककर मुठभेड़ जारी है। सर्च ऑपरेशन के दौरान अब तक बीजापुर क्षेत्र से दो नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। मुठभेड़ की पुष्टि एसपी जितेंद्र यादव ने की है। सुरक्षा कारणों को देखते हुए मुठभेड़ के सटीक स्थान और ऑपरेशन में शामिल सुरक्षाबलों की संख्या का खुलासा नहीं किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अभियान पूरा होने के बाद विस्तृत जानकारी आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी। 3 जनवरी की सुबह करीब 5 बजे से लगातार रुक-रुककर गोलीबारी चल रही है। बीजापुर में हुई मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने अब तक दो नक्सलियों के शव बरामद किए हैं। मुठभेड़ की पुष्टि बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव ने की है। उन्होंने बताया कि इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षाबल पूरी सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सुरक्षा कारणों को देखते हुए फिलहाल मुठभेड़ के सटीक स्थान और ऑपरेशन में शामिल जवानों की संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान पूरा होने के बाद विस्तृत जानकारी आधिकारिक रूप से साझा की जाएगी। हाल के दिनों में तेज हुए नक्सल विरोधी अभियान गौरतलब है कि 8 दिन पहले पड़ोसी राज्य ओडिशा के कंधमाल जिले में हुए एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने 1 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली नेता गणेश उईके समेत 6 माओवादियों को मार गिराया था। उस कार्रवाई में दो महिला नक्सली भी ढेर हुई थीं और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए गए थे। छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती राज्यों में लगातार हो रही इन कार्रवाइयों को नक्सल नेटवर्क पर अब तक का बड़ा दबाव माना जा रहा है। Yearender 2025 – छत्तीसगढ़ के बड़े नक्सल एनकाउंटर  छत्तीसगढ़ में मार्च 2026 तक नक्सल खात्मे का लक्ष्य रखा गया है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर दौरे में नक्सलियों से हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी. इस अपील के बाद बड़ी संख्या में नक्सलियों ने फोर्स के सामने हथियार डाले. जिन नक्सलियों ने हथियार के साथ फोर्स को चुनौती देने की कोशिश की उनके नामो निशान मिट गए.साल 2025 बड़े नक्सलियों के खात्मे के लिए भी जाना जाएगा. दिसंबर 19.12.2025 : बीजापुर जिले में सुरक्षाकर्मियों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 5 लाख का इनामी नक्सली मारा गया. ASP चंद्रकांत गोवर्णा ने बताया कि भैरमगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले इंद्रावती क्षेत्र में डीआरजी टीम ने तलाशी अभियान चलाया था.जिसमें एक नक्सली ढेर हुआ. 18.12.2025: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 3 नक्सली मारे गए, जिनमें कई हिंसक घटनाओं में शामिल एक महिला नक्सली भी थी. गोलापल्ली पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पहाड़ी वन क्षेत्र में यह मुठभेड़ हुई. 03.12.2025: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गंगालूर में हुई मुठभेड़ में पीएलजीए कंपनी नंबर 2 के कमांडर मोदियामी वेल्ला समेत 18 नक्सली मारे गए. मुठभेड़ में तीन सुरक्षाकर्मी भी शहीद हो गए, जबकि दो घायल हुए. छत्तीसगढ़ सरकार ने वेल्ला पर 8 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था. नवंबर 18.11.2025: आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेदुमिल्ली वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 6 माओवादी मारे गए. इनमें बस्तर का वरिष्ठ माओवादी नेता और केंद्रीय समिति सदस्य माडवी हिड़मा भी शामिल था. 11.11.2025: बीजापुर जिले में सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में 6 नक्सली मारे गए. इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में सुरक्षाकर्मियों की एक संयुक्त टीम क्षेत्र में वरिष्ठ माओवादी कैडरों की उपस्थिति की सूचना के आधार पर नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी. सितंबर 28.09.2025: छत्तीसगढ़ के कांकेर में सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में 14 लाख रुपए के 3 इनामी नक्सली मारे गए. कांकेर पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलेसला के मुताबिक कांकेर और गरियाबंद जिलों की सीमा पर स्थित छिंदखड़क गांव के पास एक पहाड़ी पर मुठभेड़ हुई. 22.09.2025: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के जंगलों में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 2 नक्सली मारे गए. नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर, महाराष्ट्र से सटे अबूझमाड़ के मूसफरशी जंगलों में एक अभियान शुरू किया गया और सुबह गोलीबारी शुरू हो गई. नारायणपुर के एसपी रॉबिन्सन गुड़िया ने कहा कि महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर अबूझमाड़ के जंगलों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. 11.09.2025: छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने हाल के वर्षों में अपनी सबसे बड़ी सफलताओं में से एक को अंजाम दिया, जब उन्होंने गरियाबंद क्षेत्र में एक सुनियोजित अभियान में 10 कट्टर नक्सलियों को मार गिराया. मारे गए लोगों में मोदम बालकृष्ण उर्फ ​​मोनाज (CCM) भी शामिल था, जिस पर एक करोड़ रुपए का इनाम था. 5.22 करोड़ रुपए के इनामी 10 नक्सली मारे गए: रायपुर रेंज के आईजी अमरीश मिश्रा ने बताया कि गरियाबंद मुठभेड़ में 10 नक्सली मारे गए. इनमें बालकृष्ण उर्फ मनोज उर्फ ​​बलन्ना भी शामिल था, जिस पर एक करोड़ रुपए का इनाम था.इस मुठभेड़ में अन्य नक्सली भी मारे गए, जिन पर कुल मिलाकर 4.22 करोड़ रुपए का इनाम था. अगस्त 13.08.2025: छत्तीसगढ़ के मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले में पुलिस और सुरक्षा बलों ने भीषण मुठभेड़ में दो वरिष्ठ माओवादी नेताओं को मार गिराया. यह मुठभेड़ मदनवाड़ा क्षेत्र के बांदा पहाड़ रेतेगांव … Read more

जहाँ बंदूकें खामोश हुईं, वहाँ भविष्य की नींव रखी जा रही है, पुनर्वास केंद्र में 35 आत्मसमर्पित नक्सली बने राजमिस्त्री

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से सुकमा में पुनर्वास नीति बनी मिसाल रायपुर, कभी जिन हाथों में बंदूकें थीं, आज उन्हीं हाथों में औज़ार हैं। कभी जिन रास्तों पर हिंसा और डर का साया था, आज वहीं विकास और भरोसे की नींव रखी जा रही है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील सोच और स्पष्ट मंशा के अनुरूप सुकमा जिले में आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास की एक नई और सकारात्मक तस्वीर उभरकर सामने आई है। वहाँ पुनर्वास केंद्र में रह रहे 35 आत्मसमर्पित नक्सलियों को राजमिस्त्री (मेसन) का व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस पहल की गई है। यह प्रशिक्षण जिला प्रशासन और एसबीआई आरसेटी के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 15 महिलाएं और 20 पुरुष शामिल हैं। इन्हें भवन निर्माण से जुड़े सभी आवश्यक तकनीकी और व्यावहारिक कौशल—जैसे नींव निर्माण, ईंट चिनाई, प्लास्टर कार्य, छत ढलाई, गुणवत्ता मानक का व्यवस्थित और चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि ये किसी भी निर्माण कार्य में दक्षता के साथ काम कर सकें। यह पहल केवल रोजगार प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसमर्पित युवाओं के जीवन को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम बन रही है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये युवा प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण )के तहत जिले में अधूरे और नए आवासों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इससे एक ओर उन्हें स्थायी और सम्मानजनक रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही कुशल राजमिस्त्रियों की कमी भी दूर होगी। कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने इस पहल को सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि आत्मसमर्पण का वास्तविक अर्थ केवल हथियार छोड़ना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ लौटना है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि पुनर्वास केंद्र में रह रहे युवाओं को कौशल, रोजगार और सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुन्द ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण सहित विभिन्न शासकीय निर्माण कार्यों के सफल क्रियान्वयन के लिए कुशल मानव संसाधन अत्यंत आवश्यक है। यह प्रशिक्षण  आत्मसमर्पित युवाओं को रोजगार  और सामाजिक सरोकार से जोड़ेगा। पोलमपल्ली निवासी पुनर्वासित पोड़ियम भीमा बताते हैं कि वे लगभग 30 वर्षों तक संगठन से जुड़े रहे, लेकिन आत्मसमर्पण के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। “यहाँ रहने और खाने की अच्छी व्यवस्था है। हमें राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले इलेक्ट्रीशियन मैकेनिक का प्रशिक्षण भी मिला। अब मैं सम्मान के साथ काम कर सकूंगा। पुवर्ती निवासी मुचाकी रनवती बताती हैं कि वे 24 वर्षों तक संगठन से जुड़ी रहीं। पुनर्वास के बाद मुझे सिलाई का प्रशिक्षण मिला। अब राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हम अपने परिवार से मिल पाए, बस्तर ओलंपिक में भाग लिया और प्रथम पुरस्कार भी जीता। शासन की योजनाओं का पूरा लाभ मिल रहा है। डब्बमरका निवासी गंगा वेट्टी ने कहा कि पुनर्वास के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। जिला प्रशासन ने मोबाइल और राजमिस्त्री किट दी है। शिविर लगाकर आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और जॉब कार्ड बनाए गए हैं। कोई समस्या होती है तो कलेक्टर और एसपी तुरंत सुनवाई करते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस पहल को लेकर कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार संवाद, संवेदना और विकास के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। आत्मसमर्पित युवाओं को हुनर, रोजगार और सम्मान देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना राज्य की पुनर्वास नीति का मूल उद्देश्य है। सुकमा जिले में चल रहा आत्मसमर्पित युवाओं को रोजगार मूलक कार्यों से जोड़ने का यह प्रयास इस बात का प्रमाण है कि  संवेदनशील प्रशासन, भरोसे और विकासपरक योजनाओं के जरिए हिंसा के रास्ते पर भटके युवाओं को  नई पहचान और बेहतर भविष्य दिया जा सकता है। यही पुनर्वास की असली सफलता है और यही स्थायी शांति की मजबूत नींव।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों आमने-सामने, इलाके में मुठभेड़ जारी

बीजापुर नक्सलवाद पर प्रहार जारी है. लगातार दूसरे दिन डीआरजी जवानों ने कार्रवाई की है. सुकमा के बाद बीजापुर के भैरामगढ़-इंद्रावती के जंगलों में नक्सलियों को जवानों ने घेर लिया है. शुक्रवार की सुबह से नक्सलियों और जवानों के बीच रुक-रुककर फायरिंग हो रही है. जानकारी के अनुसार, भैरमगढ़ – इन्द्रावती क्षेत्र के जंगल पहाड़ों में माओवादियों की मौजूदगी की जानकारी मिली थी. इस इनपुट पर बीजापुर से DRG जवानों की टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया. अभियान के दौरान जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई. शुक्रवार की सुबह से दोनों ओर से रुक-रुककर गोलीबारी हो रही है. बता दें कि गोलापल्ली के जंगलों में गुरुवार को डीआरडी जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. जिसमें जवानों ने 3 नक्सलियों को ढेर किया था. एनकाउंटर में माड़वी जोगा उर्फ मुन्ना उर्फ जगत, एरिया कमेटी मेंबर (एसीएम), किस्टाराम एरिया कमेटी, सोधी बंदी, एसीएम, किस्टाराम एरिया कमेटी और नुप्पो बाजनी, एसीएम (महिला), किस्टाराम एरिया कमेटी मार गिराए गए थे.

नक्सलियों में हड़कंप: 15 लाख के इनामी धनुष ने पत्नी सहित चुनी शांति की राह, MP में सरेंडर बढ़े

बालाघाट   मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई जिले, जो कभी लाल आतंक के खौफ से दहल जाते थे, जहां माओवादियों बंदूक की दम पर अपना एकाधिकार स्थापित करना चाहते थे, अब वहां परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी की गई डेडलाइन के बाद नक्सली पूरी तरह बैकफुट पर आ गए है. इसके अलावा हॉक फोर्स द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन ऑपरेशन का भी असर दिखने लगा है. बालाघाट और आसपास नक्सलियों का सरेंडर हाल ही में मध्य प्रदेश के बालाघाट में नक्सली सुनीता ने आत्मसर्पण किया था. अब बालाघाट में सक्रिय रहे धनुष और उसकी पत्नी ने छत्तीसगढ़ में सरेंडर किया है. इस प्रकार नक्सली अब सरेंडर की राह पर चल पड़े हैं. माओवादियों के सेंट्रल कमेटी के मेंबर रामदेर के साथ 15 नक्सली बालाघाट आए थे, जिनकी आधी टीम अब खाली हो चुकी है. इसके बाद इसी टीम में सक्रिय रहे नक्सली कपल ने भी अब समर्पण की राह चुनी है. दोनों ने छत्तीसगढ़ में खैरागढ़ के बकरकट्टा थाने में सरेंडर किया है. नक्सली धनुष पर 14 लाख इनाम घोषित था सरेंडर करने वाले धनुष और उसकी पत्नी रोनी उर्फ तुले दोनों 25 वर्ष के हैं. धनुष पर सरकार ने 14 लाख का इनाम रखा था. ये नक्सली कपल जीआरबी डिवीजन के टांडा मलाजखण्ड दलम के सदस्य थे, जो कई नक्सली गतिविधियों में शामिल थे. विगत 20 मई को बिलालकसा के जंगल में हुई मुठभेड़ मे धनुष भी शामिल था. नक्सली कपल ने सरेंडर करते हुए कहा है "अब वे सम्मानजनक और शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं. दोनों नक्सली सीसी मेंबर रामदेर के साथ बालाघाट आए थे. जो जनवरी 2025 से एमएमसी जोन में सक्रिय थे." फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है नक्सली धनुष सरेंडर करने वाला नक्सली धनुष संगठन में टेक्नीकल काम संभालता था. उसे हिंदी और अंग्रेजी भाषा की अच्छी जानकारी है और वह कंम्प्यूटर सहित अन्य दूसरी चीजों की भी गहरी जानकारी रखता है. नक्सली धनुष न केवल फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है बल्कि जबरदस्त स्पीड के साथ वह टायपिंग भी करता है. धनुष के सरेंडर के बाद बालाघाट में एंटी नक्सल ऑपरेशन के एडिशनल एसपी आदर्शकान्त शुक्ला ने बताया "धनुष नक्सल साहित्य, प्रेस नोट, और मैगजीन प्रभात के लिए कंटेट राईटिंग का काम करता था."  सरकार ने तय की है मार्च 2026 तक डेडलाइन धनुष की पत्नी रोनी उर्फ तुले सीसी मेंबर रामदेर के साथ काम कर चुकी है. वहीं, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में नक्सलियों के बड़े नेताओं द्वारा बड़ी संख्या में नक्सलियों के साथ सरेंडर किया जा रहा है. मार्च 2026 नक्सलवाद के पूरी तरह से खात्मे की तारीख पहले ही गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित कर दी गई है. लगता है इस तारीख से पहले ही नक्सलवाद देश से पूरी तरह समाप्त हो जाएगा. एमएमसी जोन (मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़) में तीनों राज्यों का संयुक्त ऑपरेशन जारी है. ऐसे में नक्सलियों पर काफी दबाव बढ़ गया है. नक्सलियों ने सरेंडर की डेडलाइन बढ़ाने की लगाई गुहार नक्सलियों ने पहले एक प्रेस नोट जारी कर समय मांगते हुए जवानों द्वारा चलाये जा रहे ऑपरेशन को रोकने की मांग की थी, उसके बाद फिर नक्सलियों की तरफ से समय दिये जाने की अपील की गई है. लेकिन सरकार की तरफ से फिलहाल नक्सलियों द्वारा मांगी गई मोहलत पर कोई विचार नहीं किया गया है और न ही किसी तरह का जवाब दिया गया है. मध्य प्रदेश के बालाघाट में सरकार ने एक होनहार हॉक फोर्स निरीक्षक को खोया है. ऐसे में प्रदेश सरकार किसी तरह से नक्सलियों से बातचीत के मूड में फिलहाल नजर नहीं आ रही है. 

खैरागढ़ में नक्सलियों का सरेंडर, रोहिणी और धनुष हथियार रहित होंगे

खैरागढ़  जिले में आज एक महत्वपूर्ण सुरक्षा विकास होने जा रहा है। बीजापुर इलाके से जुड़े नक्सली दंपत्ति रोहिणी और धनुष आज खैरागढ़ में बिना हथियारों के आत्मसमर्पण करने जा रहे हैं। यह कदम सरकार की पुनर्वास एवं मुख्यधारा में लौटने की नीति से प्रभावित होकर उठाया गया है। दोनों के सरेंडर को सुरक्षा एजेंसियाँ बड़ी उपलब्धि मान रही हैं। नक्सली दंपति का सरेंडर क्यों अहम है? सूत्रों के अनुसार रोहिणी और धनुष पिछले लंबे समय से संगठन से दूरी बनाना चाहते थे। लगातार अभियान, सुरक्षा बलों का दबाव और पुनर्वास नीति की सुविधाओं ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। जानकारों का कहना है कि दोनों दंपति नक्सली संगठन के सक्रिय कैडर में शामिल थे। कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनकी भूमिका रही है। बिना हथियार आत्मसमर्पण करना इस बात का संकेत है कि वे पूरी तरह मुख्यधारा में लौटने को तैयार हैं। शाम 5 बजे खैरागढ़ एसपी की प्रेस वार्ता खैरागढ़ जिले के पुलिस अधीक्षक लक्स शर्मा (SP) आज शाम 5 बजे प्रेस वार्ता करेंगे। इस दौरान दंपति के आत्मसमर्पण की आधिकारिक जानकारी,उनके पुराने रिकॉर्ड,और पुनर्वास योजना से जुड़ीजानकारीसाझा की जाएगी।  पुलिस विभाग का मानना है कि यह आत्मसमर्पण भविष्य में अन्य नक्सली सदस्यों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करेगा।

आंध्र में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई, हिडमा के बाद मटुरे समेत सात की मौत

गोदावरी  आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के मारेडुमिल्ली और GM वालसा के जंगलों में बुधवार सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में सात नक्सली मारे गए. यह कार्रवाई मंगलवार से चल रहे संयुक्त ऑपरेशन का हिस्सा थी. राज्य के इंटेलिजेंस एडीजी महेश चंद्र लड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुष्टि की कि मुठभेड़ के दौरान चार पुरुष और तीन महिला नक्सली ढेर किए गए हैं और फील्ड से लगातार अपडेट मिल रहे हैं. मारे गए नक्सलियों में संगठन का टॉप IED एक्सपर्ट मेट्टुरु जोगाराव उर्फ टेक शंकर भी शामिल है, जो आंध्र-ओडिशा बॉर्डर स्पेशल जोनल कमेटी (AOBSZC) का महत्वपूर्ण सदस्य और तकनीकी संचालन का सबसे बड़ा जिम्मेदार माना जाता था. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, टेक शंकर ही वह कैडर था जिसने पिछले वर्षों में छत्तीसगढ़ और AOB क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर किए गए लगभग सभी बड़े लैंडमाइन और IED हमलों को डिजाइन और निष्पादित किया था. पुलिस ने बताया कि वह हथियार निर्माण, संचार प्रणाली और विस्फोटक उपकरणों की डिजाइनिंग में माहिर था, और इसी विशेषज्ञता के चलते वह संगठन की "टेक्निकल रीढ़" माना जाता था. AOB क्षेत्र में फिर बढ़ रही नक्सल गतिविधि पिछले कुछ महीनों से आंध्र–ओडिशा सीमा क्षेत्र में नक्सली गतिविधि में वृद्धि की सूचना मिल रही थी. इनपुट मिले थे कि नक्सली जंगलों के भीतर नए ठिकाने बना रहे हैं, कैडर को दोबारा सक्रिय कर रहे हैं और छत्तीसगढ़ की ओर से नए समूह राज्य की सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं. इसी आधार पर आंध्र प्रदेश ग्रेहाउंड्स और अन्य एजेंसियों ने मंगलवार को एक बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप बुधवार सुबह GM वालसा इलाके में मुठभेड़ हुई. पिछले ऑपरेशनों से जुटी जानकारी ने दिखाई राह एडीजी लड्डा ने बताया कि 17 नवंबर को भी सुरक्षा बलों ने मारेडुमिल्ली क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई की थी, जिसमें कुख्यात नक्सली नेता हिड़मा सहित छह नक्सली मारे गए थे. उन्हीं से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर संयुक्त टीमों ने AOB क्षेत्र में फैले नक्सली नेटवर्क पर विशेष फोकस किया और लगातार कई जिलों में ऑपरेशन चलाए. 50 नक्सली गिरफ्तार-राज्य में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई एडीजी लड्डा ने जानकारी दी कि हाल के दिनों में NTR, कृष्णा, काकीनाडा, कोनसीमा और एलुरु जिलों से 50 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें केंद्रीय समिति, राज्य समिति, एरिया कमेटी और प्लाटून टीम के सदस्य शामिल हैं. यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर संगठन के कोर कैडर को एक साथ पकड़ा गया है. हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद सुरक्षा बलों ने अभियान के दौरान 45 हथियार, 272 कारतूस, दो मैगजीन, 750 ग्राम वायर और कई तकनीकी उपकरण व दस्तावेज बरामद किए हैं. एडीजी लड्डा ने कहा कि "फील्ड स्टाफ ने पूरी योजना के अनुसार, बिना किसी हानि के ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया है. इंटेलिजेंस विभाग ने लगातार नक्सलियों की गतिविधियों की निगरानी की और सही समय का इंतज़ार करने के बाद निर्णायक कार्रवाई की." जानें हिड़मा के अटैक की लिस्ट! कौन था हिडमा हिड़मा का जन्म1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में हुआ था. वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की एक बटालियन का कमांडर और माओवादी सेंट्रल कमेटी का सदस्य था. वह बस्तर क्षेत्र से इस नेतृत्व में शामिल होने वाला इकलौता आदिवासी माना जाता था. हिड़मा पिछले 2 दशक में हुए 26 से ज्यादा बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है. इसमें 2010 दंतेवाड़ा हमला भी शामिल है, जिसमें 76 CRPF जवान शहीद हुए थे. इसके अलावा 2013 में झीरम घाटी हमले, 2021 सुकमा-बीजापुर हमले में भी हिड़मा की भूमिका रही है. हिड़मा दंतेवाड़ा में 76 जवानों की हत्या का मास्टरमाइंड था छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 2010 में 76 जवानों की हत्या हुई थी. यह नक्सल इतिहास का सबसे बड़ा हमला था. उस हमले का मास्टरमाइंड हिड़मा ही था. इसमें बसवाराजू भी शामिल रहा, जो एनकाउंटर में पहले ही मारा जा चुका है. बुरकापाल हमले में भी था हिडमा का हाथ     2017 के बुरकापाल हमले में भी उसका हाथ था जिसमें CRPF के 24 जवान शहीद हुए थे.     माडवी हिडमा ने झीरम घाटी हमला, दंतेवाड़ा में 76 जवानों की हत्या, बुरकापाल हमला और बीजापुर हमले का मास्टरमाइंड था.     हिड़मा सेंट्रल कमेटी का मेंबर और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का लीडर था, जो कम से कम 26 जानलेवा हमलों के लिए जिम्मेदार था.     हिड़मा की पहचान बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों के प्रमुख नेता के तौर पर होती थी, जिसे सुरक्षाबलों ने आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेदुमिल्ली में मार गिराया है.     हिड़मा पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 45 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था. वहीं उस पर अलग-अलग राज्य की सरकारों ने कुल मिलाकर एक करोड़ रुपये से ज्यादा का इनाम रखा था.     हिड़मा साल 2010 में दंतेवाड़ा में हुए हमले का मास्टरमाइंड था, जिसमें 76 सीआरपीएफ जवानों की हत्या हुई थी.     इसके बाद हिड़मा 2013 में झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में शामिल था, जिसमें 33 लोग मारे गए थे और इसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेता शामिल थे.     साल 2017 में बुरकापाल हमले में भी हिड़मा शामिल था, जिसमें 24 जवान शहीद हुए थे.     हिड़मा साल 2021 में बीजापुर में हुए नक्सली हमले का भी मास्टरमाइंड था, जिसमें 22 जवान शहीद हुए थे.     हिडमा का एनकाउंटर कैसे हुआ     पिछले कुछ हफ्तों से आंध्र प्रदेश SIB/इंटेलिजेंस इनपुट्स से खास तौर पर आंध्र प्रदेश-छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर के पास माओवादियों के मूवमेंट का इशारा मिला था और उन इनपुट्स के आधार पर हमने ऑपरेशन किया और यह कामयाबी मिली. सिक्योरिटी अधिकारियों के मुताबिक, हिडमा उर्फ संतोष, उसकी पत्नी और चार अन्य लोग छत्तीसगढ़ से भाग रहे थे, जब सुबह 6 से 7 बजे के बीच अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेदुमिल्ली जंगल में सिक्योरिटी फोर्स ने उन्हें घेर लिया. आज (18 नवंबर) सुबह आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेदुमिल्ली में पुलिस और माओवादियों के बीच एनकाउंटर शुरू हुआ. फायरिंग सुबह 6 बजे से 7 बजे के बीच हुई. ऑपरेशन में हिड़मा समेत छह माओवादी मारे गए है और अभी भी एक बड़ा कॉम्बिंग ऑपरेशन चल रहा है. … Read more