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विनय कुमार के VRS के बाद बिहार में नए DGP की कवायद तेज, वरिष्ठ IPS के नामों पर मंथन

पटना पुलिस महानिदेशक विनय कुमार की स्वैच्छिक सेवानिवृति के बाद बिहार के नए डीजीपी की तलाश तेज हो गई है। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, सरकार को नए डीजीपी का चयन करने के लिए यूपीएससी के नये पैनल का इंतजार है। कार्यकारी व्यवस्था के तहत वर्तमान पैनल में से सबसे वरिष्ठ आईपीएस प्रीता वर्मा को कार्यवाहक डीजीपी बनाया जा सकता है। गौर हो कि विनय कुमार निजी कारणों का हवाला देते हुए 15 सितंबर से 05 अक्तूबर 2026 तक 21 दिनों की छुट्टी पर गए थे। इस दौरान 1991 बैच की आईपीएस प्रीता वर्मा को डीजीपी का प्रभार सौंपा गया था। सूत्रों की मानें तो राज्य में डीजीपी का चयन केंद्र व राज्य सरकार के समन्वय से होता है। डीजीपी चयन को लेकर 30 साल की सेवा अवधि पूरी कर चुके आईपीएस का नाम वर्तमान की सेवानिवृति के कम से कम तीन माह पूर्व भेजना होता है। मगर विनय कुमार के सितंबर में ही स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने की वजह से केंद्र और राज्य सरकार आपसी समन्वय से इस पर निर्णय लेगी। राज्य सरकार से मिली अनुशंसा के आधार पर यूपीएससी आईपीएस अधिकारियों की वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड, नेतृत्व अनुभव और शेष कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए अंतिम तीन नाम का पैनल तैयार कर राज्य सरकार को भेजती है। राज्य सरकार को उनमें से ही किसी एक को डीजीपी चुनना होता है। बता दें कि बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने दिसंबर में होने वाली सेवानिवृत्ति से पहले ही भारतीय पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली है। बिहार सरकार ने उनका वीआरएस तत्काल प्रभाव से मंजूर करते हुए उन्हें बिहार का मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त भी कर दिया था। राज्य गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी वियन कुमार ने 25 सितंबर को वीआरएस के लिए आवेदन किया था। सरकार ने तीन महीने के नोटिस की अनिवार्य अवधि में छूट देते हुए उनका आवेदन तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया था। उनका डीजीपी के रूप में कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होना था। सामान्य प्रशासन विभाग की अलग अधिसूचना के अनुसार, विनय कुमार को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से बिहार का मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया है। विनय कुमार सितंबर के मध्य से अवकाश पर थे। उनकी अनुपस्थिति में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रीता वर्मा को बिहार के कार्यवाहक डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। इस घटनाक्रम के साथ बिहार में नए नियमित डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम केंद्र को भेजे जाने और उसके बाद संघ लोक सेवा आयोग की प्रक्रिया के तहत नए डीजीपी के चयन की कवायद चल रही है।

पंजाब के नए DGP पर जल्द फैसला! UPSC की अहम बैठक से साफ होगी तस्वीर

चंडीगढ़. पंजाब में आज परमानेंट डीजीपी नियुक्त होने का रास्ता साफ हो जाएगा। UPSC ने डीजीपी का पैनल शॉर्टलिस्ट करने के लिए आज बैठक बुलाई है। इस बैठक में तीन अधिकारियों का पैनल तैयार कर पंजाब सरकार को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर सरकार एक अधिकारी को डीजीपी नियुक्त करेगी। जुलाई 2022 में पंजाब सरकार ने गौरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया था। इसके बाद से ही उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए जा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद पंजाब में स्थायी डीजीपी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों का पैनल तय कर पंजाब सरकार को भेजेगी इसी साल फरवरी में यूपीएससी ने पंजाब सरकार से स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए अधिकारियों के नाम मांगे थे। इसके बाद पंजाब सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजी थी। इनमें से यूपीएससी आज तीन अधिकारियों का पैनल तय कर पंजाब सरकार को भेजेगी। अब पढ़ें 14 अफसरों की लिस्ट में किन-किन का नाम:- वर्तमान डीजीपी गौरव यादव समेत 14 अफसरों के नाम भेजे: पंजाब सरकार ने 6 अप्रैल को यूपीएससी को 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची भेजी थी, जिसमें वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव (1992 बैच) का नाम भी शामिल है। सरकार द्वारा भेजी गई इस सूची में वरिष्ठता के आधार पर गौरव यादव का नाम तीसरे स्थान पर है। इस बैच के सबसे वरिष्ठ अधिकारी शरद सत्य चौहान हैं, जिनके बाद क्रमशः हरप्रीत सिंह सिद्धू, गौरव यादव और कुलदीप सिंह का स्थान आता है। इस प्रस्ताव में 1993 बैच के तीन और 1994 बैच के सात अधिकारी भी शामिल हैं। तीन अफसरों का पैनल तय करेगा यूपीएससी: यूपीएससी, पंजाब सरकार की ओर से भेजी गई 14 आईपीएस अधिकारियों की सूची में से तीन अधिकारियों का पैनल शॉर्टलिस्ट कर सरकार को भेजेगा। इस पैनल में शामिल किसी भी एक अधिकारी को पंजाब सरकार स्थायी डीजीपी नियुक्त कर सकती है। सूची में सबसे ऊपर डॉ. शरद सत्य चौहान का नाम है, जबकि दूसरे स्थान पर हरप्रीत सिंह सिद्धू का नाम है, जो 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं व वरिष्ठता सूची में दूसरे स्थान पर आते हैं। वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव का नाम तीसरे स्थान पर है। यदि यूपीएससी ने वरिष्ठता के आधार पर पैनल तैयार किया, तो यही तीन नाम इसमें शामिल हो सकते हैं। इसके बाद पंजाब सरकार एक बार फिर गौरव यादव को डीजीपी नियुक्त करने का निर्णय ले सकती है। इन अधिकारियों के सूची में नाम भेजे: सरकार की ओर से स्थायी डीजीपी के लिए भेजे गए अधिकारियों के पैनल को तीन बैचों में बांटा गया है। 1992 बैच में गौरव यादव (वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी), शरद सत्य चौहान, कुलदीप सिंह और हरप्रीत सिंह सिद्धू के नाम शामिल हैं। 1993 बैच में गुरप्रीत कौर देव, जितेंद्र कुमार जैन और शशि प्रभा द्विवेदी का नाम है। वहीं 1994 बैच में सुधांशु शेखर श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार सिन्हा, अमरदीप सिंह राय, वी. नीरजा, अनिता पुंज, नरेश कुमार और राम सिंह के नाम शामिल हैं। इसके अलावा 1989 बैच के सामंत गोयल ने इस पद के लिए अनिच्छा जताई है, जबकि अर्पित शुक्ला और ईश्वर सिंह अपनी सेवानिवृत्ति के करीब होने के कारण इस दौड़ से बाहर हैं। ऐसे होती है सिलेक्शन प्रक्रिया सरकार की ओर से पैनल भेजे जाने के बाद उस पर विचार करने के लिए एक कमेटी गठित की जाती है। इसमें UPSC के अध्यक्ष (अध्यक्ष के रूप में), केंद्रीय गृह सचिव या उनके प्रतिनिधि, राज्य के मुख्य सचिव, राज्य के वर्तमान डीजीपी तथा किसी केंद्रीय पुलिस संगठन के प्रमुख (जो संबंधित राज्य कैडर से न हों) शामिल होते हैं। यह कमेटी तीन नामों को अंतिम रूप देती है और उन्हें राज्य सरकार को भेजती है, जिसके बाद सरकार अंतिम नियुक्ति पर निर्णय लेती है।