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SCERT की नई पहल: परिषदीय विद्यालयों में शुरू होगा दैनिक गतिविधि आधारित शिक्षण ‘अरुणोदय’

लखनऊ प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में सत्र 2026-27 से बच्चों को हर दिन कुछ नया सीखने का अवसर मिलेगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने पूरे वर्ष के लिए दैनिक गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया है, जिसे जल्द ही सभी स्कूलों में लागू किया जाएगा। यह पहल अपने आप में अनोखी मानी जा रही है। नवाचार आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार इस कैलेंडर को ‘अरुणोदय’ नाम दिया गया है। इसके तहत हर दिन किसी न किसी विषय जैसे पर्यावरण, स्वास्थ्य, महापुरुषों की जयंती, नदियां, शब्द ज्ञान, कला, कहानी-कविता, देशभक्ति और स्वतंत्रता से जुड़े प्रसंग पर बच्चों को जानकारी दी जाएगी। यह गतिविधियां सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान आयोजित होंगी। संबंधित शिक्षक या प्रधानाध्यापक बच्चों को विषय की जानकारी देंगे और उससे जुड़ी गतिविधियां भी कराएंगे। खास बात यह है कि प्रत्येक विषय के साथ क्यूआर कोड भी जोड़ा गया है, जिससे शिक्षक अतिरिक्त जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। कैलेंडर को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के अनुसार अलग-अलग तैयार किया गया है, ताकि बच्चों को उनकी कक्षा के अनुरूप सामग्री मिल सके।   विविध विषयों से होगा सर्वांगीण विकास कैलेंडर में बच्चों से छुट्टियों के अनुभव साझा कराने से लेकर मौसमी फल-सब्जियों के लाभ, वर्णमाला, शब्द निर्माण, विलोम शब्द, कहानी-कहानी, सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक सेंस, स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा वर्षा जल संरक्षण, पौधरोपण, बाढ़ से बचाव, संचारी रोगों की रोकथाम, विद्यालय शिष्टाचार, वाद्ययंत्र और लोकगीतों की जानकारी भी दी जाएगी। बच्चों को अच्छी आदतें, पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता, जीवन मूल्य, प्रकृति, आपदा प्रबंधन, ऋतुओं का ज्ञान और खेल-खेल में विज्ञान भी सिखाया जाएगा।   अखबारों से भी जोड़ने की पहल एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान के अनुसार, सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए बच्चों को अखबारों से भी जोड़ा जाएगा। उन्हें नए और पुराने अखबारों की उपयोगिता, समाचारों की समझ और उनसे जुड़ी चर्चाओं के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। साथ ही गणित के डर को दूर करने के लिए खेल, पहेलियां, गणित किट और भारतीय गणितज्ञों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य बच्चों का बहुमुखी विकास करना है, ताकि वे विभिन्न विषयों की समग्र जानकारी प्राप्त कर सकें। इसे जल्द ही प्रदेशभर के स्कूलों में लागू किया जाएगा।  

नवीन शिक्षा नीति विद्यार्थियों को रोजगारमूलक शिक्षा प्रदान करने और संस्कृति एवं पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का कर रही है कार्य : स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह

भोपाल.  स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने गुरुवार को शाजापुर जिले में 58 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सरदार वल्लभ भाई पटेल सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नवीन भवन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने स्कूल की अरूण एवं उदय कक्षा का अवलोकन कर विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को नए भवन की शुभकामनाएं दी। छोटे-छोटे बच्चों ने अपने हाथों से बनाए पुष्पगुच्छ भेंटकर मंत्री सिंह का स्वागत किया। इसके उपरांत मंत्री सिंह ने प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में सहभागिता की। नवीन भवन के शुभारंभ अवसर पर मंत्री सिंह ने कहा कि यह दिन विद्यालय परिवार के लिए ऐतिहासिक है। आने वाले अनेक दशकों तक विद्यार्थी इस नवीन सांदीपनि विद्यालय में अध्ययन कर अपने भविष्य का निर्माण करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने से शिक्षण व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया है। मध्यप्रदेश इस नीति के क्रियान्वयन में अग्रणी राज्य रहा है। नवीन शिक्षा नीति विद्यार्थियों को रोजगारमूलक शिक्षा प्रदान करने के साथ ही उन्हें अपनी संस्कृति एवं पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही है। प्रदेश में शासकीय विद्यालयों के परिणाम निरंतर बेहतर हो रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में सांदीपनि विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही विद्यालयों में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें, साइकिल वितरण, विद्युत व्यवस्था, भवन निर्माण एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं निर्धारित समयावधि में उपलब्ध कराई जा रही हैं। मंत्री सिंह ने कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है और व्यक्ति जीवनभर सीखता रहता है। विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए मंत्री सिंह ने कहा कि वे भविष्य में वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़कर प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। कार्यक्रम के दौरान विधायक अरूण भीमावद की मांग पर मंत्री सिंह ने नवीन सांदीपनि विद्यालय भवन के लिए पानी की टंकी निर्माण, बहुउद्देशीय हॉल के लिए आधुनिकीकरण, सरदार वल्लभ भाई पटेल की 25 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना, कक्षाओं के लिए शेष फर्नीचर उपलब्ध करने सहित  जिले के अन्य विद्यालयों के विकास के लिए करोड़ों रुपए की राशि देने की घोषणा की। गरीबी रेखा के नीचे और मध्यम वर्गीय परिवार का सपना पूरा कर रही सरकार कार्यक्रम के दौरान विधायक अरूण भीमावद ने कहा कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वाले एवं मध्यम वर्गीय परिवार का सपना था कि निजी विद्यालय की तर्ज पर शासकीय स्कूल भवन हो, अच्छी शिक्षा और अच्छे शिक्षक मिले, यह सपना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के नेतृत्व में साकार हुआ हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जिले में और भी सांदीपनि विद्यालय भवन बनेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में अमूलचूल परिवर्तन जिले में दिखाई दे रहा हैं। इस नवीन विद्यालय भवन में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के विद्यार्थी अध्ययन करेंगे। क्षेत्रीय सांसद महेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शाजापुर सहित प्रदेश के सभी जिले शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहे हैं।  प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल रहा है। उन्होंने शिक्षकों एवं अभिभावकों से आग्रह किया कि बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दें। बच्चों को देश सेवा की भावना, नशे से दूर रहने, यातायात नियमों एवं कानून का पालन करने के प्रति जागरूक बनाएं। उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करें। बच्चों का सर्वांगीण विकास भारतीय संस्कृति के अनुरूप होना चाहिए। जब बच्चे अपनी संस्कृति और मूल्यों के साथ आगे बढ़ेंगे तभी उनमें से श्रेष्ठ डॉक्टर, वकील, इंजीनियर सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रतिभाएं विकसित होंगी। जिला शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र शिप्रे ने जिले की शिक्षण व्यवस्था की प्रगति एवं उपलब्धियों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। विद्यार्थियों को पाठयपुस्तकों का किया वितरण कार्यक्रम के दौरान मंत्री सिंह एवं अन्य अतिथियों द्वारा विद्यार्थियों को नवीन शैक्षणिक सत्र के लिए पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया। साथ ही कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने साइबर जागरूकता की शपथ ली। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष हेमराज सिंह सिसोदिया, नगर पालिका उपाध्यक्ष संतोष जोशी, विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती सविता सोनी, डॉ. रवि पाण्डे, योगेन्द्र सिंह जादौन (बंटी बना), विजय सिंह बैस, शीतल भावसार, आशीष नागर, राय सिंह मालवीय, उमेश टेलर, गोविंद नायक, हरिओम गोठी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, पालक एवं शिक्षक उपस्थित थे। 

डीएवी स्कूलों के 97 प्राचार्य जुटे एक मंच पर, शिक्षा सुधार और नीति क्रियान्वयन पर मंथन

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित 97 डीएवी विद्यालयों के प्राचार्यों की एक भव्य और महत्वपूर्ण बैठक डीएवी हुडको भिलाई, दुर्ग में संपन्न हुई. इस बैठक के मुख्य अतिथि जगदीश बर्मन, सीबीएसई, रायपुर छत्तीसगढ़ रहें. इस मीटिंग के अध्यक्षता छत्तीसगढ़ डी ए वी संस्थान प्रमुख, क्षेत्रीय अधिकारी प्रक्षेत्र ‘अ’ छत्तीसगढ़ प्रशान्त कुमार के सक्षम नेतृत्व एवं कुशल मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ. बैठक का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के “शैक्षणिक उन्नयन, परीक्षा की तैयारी, मानसिक सशक्तिकरण और उत्कृष्ट परिणाम” प्राप्ति के लिए सामूहिक रणनीति तैयार करना था. सीबीएसई छत्तीसगढ़ प्रमुख बर्मन ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में विद्यालयों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि विद्यार्थियों के “समग्र व्यक्तित्व विकास, अनुशासन, नैतिकता और नेतृत्व गुणों के निर्माण” में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. आगे कहा कि डीएवी संस्थान सदैव गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए जाना जाता हैं, सभी प्राचार्यो को विद्यार्थियों के हित में और भी बेहतर कार्य करना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि सभी विद्यालयों को एकजुट होकर की भावना के साथ कार्य करना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का एक समान और सशक्त वातावरण तैयार हो, जिससे उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम को हासिल हो सके. बैठक में विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया, जिनमें –     विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर विशेष ध्यान.     परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता एवं सुधार.     शिक्षण पद्धतियों में नवीन तकनीकी प्रयोग.     सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के समग्र विकास पर बल.     शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर चर्चा शामिल रही     नई शिक्षा नीति का पालन बैठक के दौरान सभी प्राचार्यों ने अपने-अपने विद्यालयों के अनुभव साझा किए और विद्यार्थियों के प्रदर्शन में सुधार हेतु कई नवाचारों का सुझाव दिया. छत्तीसगढ़ डीएवी संस्थान क्षेत्रीय अधिकारी प्रक्षेत्र ‘अ’ छत्तीसगढ़ के सक्षम नेतृत्व में मेज़बान दल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और बैठक के सफल संचालन के लिए सहयोग प्रदान किया. जगदीश बर्मन ने अंत में सभी प्राचार्यों को संबोधित करते हुए कहा कि डीएवी विद्यालयों की सबसे बड़ी शक्ति उनका आपसी सहयोग और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण है. यदि हम सभी एकजुट होकर एक ही उद्देश्य के साथ कार्य करें तो निश्चित ही हमारे विद्यार्थी आगामी परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करेंगे और छत्तीसगढ़ में डीएवी की शैक्षणिक छवि और भी सशक्त होगी. बैठक का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी उपस्थित प्राचार्यों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे विद्यार्थियों की शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों की दिशा में एक साथ मिलकर कार्य करेंगे. डीएवी हुडको भिलाई दुर्ग द्वारा इस आयोजन को बड़ी सफलता के साथ संपन्न किया गया.