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25 जून को निर्जला एकादशी, शनि-शुक्र से बनेगा नवपंचम राजयोग

 इस बार निर्जला एकादशी 25 जून को मनाई जाएगी. इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु की उपासना की जाती है. ज्योतिषियों के मुताबिक, शनि-शुक्र मिलकर नवपंचम राजयोग का निर्माण करेंगे. दरअसल, निर्जला एकादशी पर शनि-शुक्र एक-दूसरे से 120 डिग्री की दूरी पर विराजमान होंगे, जिससे नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा. ज्योतिष शास्त्र में शनि और शुक्र दोनों परम मित्र हैं, इसलिए 25 जून 2026 को बनने वाला यह राजयोग आर्थिक, पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में बेहद शुभ परिणाम लेकर आएगा. क्या होता है नवपंचम राजयोग? ज्योतिष शास्त्र में नवपंचम राजयोग को बेहद शुभ और शक्तिशाली योगों में से एक माना गया है. यह एक त्रिकोणीय संबंध है, जो दो ग्रहों के बीच एक विशेष दूरी बनने पर निर्मित होता है. जब शनि और शुक्र एक-दूसरे से पांचवें  और नौवें भाव में स्थित होते हैं, तो उनके बीच नवपंचम योग बनता है. यानी आसान शब्दों में जब इन दोनों ग्रह के बीच 120 डिग्री का कोण बनता है, तब इस शुभ योग का निर्माण होता है. इस राजयोग से मुख्य रूप से लाभान्वित होने वाली हैं. वृषभ करियर में उछाल: शनि और शुक्र की शुभ स्थिति से आपके कार्यक्षेत्र में बड़ी तरक्की के योग हैं. लंबे समय से अटके हुए काम गति पकड़ेंगे. आर्थिक लाभ: यदि आप बिजनेस में हैं, तो कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है. पैतृक संपत्ति से भी लाभ मिलने की संभावना है. समाज और ऑफिस में आपके काम को सराहा जाएगा और आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. मिथुन आय के नए स्रोत: आपकी आमदनी में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. एक से अधिक माध्यमों से धन लाभ होगा. बिजनेस या नौकरी के सिलसिले में की गई यात्राएं बेहद लाभदायक सिद्ध होंगी. पारिवारिक सुख: परिवार में चल रहे मतभेद समाप्त होंगे. जीवनसाथी के साथ संबंध और मजबूत होंगे. कन्या अचानक धन लाभ: कन्या राशि वालों को शेयर मार्केट, लॉटरी या किसी पुराने निवेश से बड़ा अप्रत्याशित लाभ हो सकता है. नौकरीपेशा जातकों को बड़ी जिम्मेदारी या प्रमोशन मिलने के प्रबल संकेत हैं. उच्च अधिकारियों का सहयोग मिलेगा. क्रिएटिविटी: यदि आप कला, लेखन, मीडिया या डिजिटल कंटेंट क्रिएशन से जुड़े हैं, तो आपकी रचनात्मकता चरम पर होगी. कुंभ शनि की कृपा: कुंभ राशि के स्वामी शनि देव हैं. नवपंचम योग के प्रभाव से आपके आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि होगी. कारोबार में विस्तार: यदि आप नया स्टार्टअप या नया काम शुरू करना चाहते हैं, तो यह समय सबसे अनुकूल है. पिछले कुछ समय से चल रहा मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होंगी.

निर्जला एकादशी 2026 कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व

साल की सबसे बड़ी एकादशी यानी निर्जला एकादशी आने वाली है. जिसकी तिथि को लेकर लोगों में कंफ्यूजन बना हुआ है. कोई कह रहा है कि यह एकादशी 25 जून को आएगी और कुछ लोगों के मुताबिक यह 26 जून को आएगी. सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और फलदायी व्रत कहा जाता है. यह व्रत ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन बिना जल के उपवास रखने से सालभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है. धार्मिक कथा के अनुसार, पांडवों में से भीम उपवास नहीं रख पाते थे. तब उन्होंने महर्षि व्यास के कहने पर केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखा. लेकिन बिना भोजन और पानी के वे मूर्छित हो गए थे. इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है. निर्जला एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6 बजकर 12 मिनट पर शुरू होकर 25 जून को रात 8 बजकर 09 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के मुताबिक, 25 जून को ही निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा. निर्जला एकादशी का पारण 26 जून को सुबह 5 बजकर 25 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा.   क्यों खास है निर्जला एकादशी? निर्जला एकादशी को सबसे कठोर तपस्या माना जाता है, क्योंकि इसमें पूरे 24 घंटे तक जल का भी त्याग करना होता है, खासकर गर्मियों के मौसम में. शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति विधि-विधान से यह व्रत करता है, उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से पापों का क्षय होता है. शरीर को स्वास्थ्य लाभ मिलता है. जीवन में सुख और समृद्धि आती है. मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं कैसे करें निर्जला एकादशी का व्रत? सुबह स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करें. पीले वस्त्र धारण करें. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें. पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें. विष्णु मंत्रों का जप करें. इस दिन जरूर करें ये काम – प्यासे को जल पिलाना – पेड़-पौधों को पानी देना – पशु-पक्षियों को जल देना – अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल और छाता दान करना