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नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर: निर्मला भूरिया

भोपाल.  महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाए गए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक सकारात्मक कदम बताते हुए इसे मील का पत्थर निरूपित किया है। सुभूरिया गुरुवार को उज्जैन में जिला स्तरीय नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महिलाओं को संबोधित कर रही थीं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश भर में चल रहे नारी शक्ति वंदन जागरूकता अभियान की सफलता को रेखांकित करते हुए मंत्री सुभूरिया ने इस आयोजन को नारी शक्ति के उत्थान का प्रतीक बताया। उन्होंने अधिनियम की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने वाले इस कानून से न केवल नारी शक्ति का नेतृत्व सुदृढ़ होगा, बल्कि विधायी और संसदीय कार्यक्षेत्र में उनकी भागीदारी भी प्रभावी ढंग से बढ़ेगी। उन्होंने महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि अब देश के नीति निर्धारण में मातृशक्ति की भूमिका और भी निर्णायक होने वाली है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही नगर निगम सभापति कलावती यादव ने प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता की सराहना की। यादव ने इसे 'युगांतरकारी' परिवर्तन बताते हुए कहा कि महिलाओं के प्रति सरकार की यह संवेदनशीलता आज धरातल पर दिखाई दे रही है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं से आह्वान किया कि वे इस अधिनियम और शासन की कल्याणकारी योजनाओं के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएं, जिससे समाज की अंतिम पंक्ति की महिला तक भी इनका लाभ पहुँच सके। इस दौरान उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि हासिल करने वाली मेरिट की छात्राओं को मंत्री सुनिर्मला भूरिया एवं सभापति कलावती यादव द्वारा सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। सम्मेलन का समापन एक भव्य और विशाल महिला जागरूकता रैली के साथ हुआ। मंत्री सुभूरिया और सभापति यादव ने न केवल रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, बल्कि स्वयं भी सैकड़ों महिलाओं के साथ पूरे मार्ग पर पैदल मार्च किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों की महिला प्रतिभागी सम्मिलित हुईं।

ग्रामीण भारत के लिए नए युग की शुरुआत: VB-G RAM G अधिनियम 2025, सुश्री निर्मला भूरिया का अहम बयान

ग्रामीण भारत के लिए नए युग की शुरुआत : VB-G RAM G अधिनियम, 2025 : सुश्री निर्मला भूरिया हर ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी भोपाल  महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं नीमच जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि विकसित भारत–ग्रामीण आजीविका मिशन गारंटी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत के लिए नए युग की शुरुआत है। यह अधिनियम प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि यह कानून महात्मा गांधी की भावना के अनुरूप गरीबों, जनजातीय और पिछड़े वर्गों को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाया गया है। वन क्षेत्रों में कार्य करने वाले परिवारों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा अब तक मनरेगा पर 11.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यय किया गया है, जो ग्रामीण रोजगार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। VB-G RAM G अधिनियम, 2025 पूर्ववर्ती MGNREGA का स्थान लेगा, जहां राहत आधारित व्यवस्था के स्थान पर अब रोजगार और आजीविका को राष्ट्रीय विकास लक्ष्य से जोड़ा गया है। मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए बुवाई और कटाई के मौसम में राज्य सरकारें 60 दिनों का 'कार्य विराम' घोषित कर सकेंगी, जिससे कृषि क्षेत्र में श्रम की कमी नहीं होगी और मजदूरों की आय पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। नए कानून में कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है— जल संरक्षण एवं जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा निर्माण, आजीविका संपत्तियों का सृजन तथा जलवायु संरक्षण। समयबद्ध भुगतान और पारदर्शिता मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अनिवार्य किया गया है। देरी की स्थिति में श्रमिकों को स्वतः मुआवजा दिया जाएगा। पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी तथा एआई आधारित निगरानी को कानून का हिस्सा बनाया गया है। प्रत्येक छह माह में डिजिटल साक्ष्यों के साथ सोशल ऑडिट भी अनिवार्य होगा। इस योजना में केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच 60:40 का व्यय अनुपात होगा, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह 90:10 रहेगा। बेहतर क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक व्यय की सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है। ग्रामीण योजनाओं को पीएम गति शक्ति और विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक से जोड़ा गया है। सुश्री भूरिया ने कहा कि VB-G RAM G अधिनियम, 2025 केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में जवाबदेही, गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे और आर्थिक सुरक्षा की नई प्रतिबद्धता है, जो ग्रामीण नागरिकों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाता है। इस अवसर पर विधायक श्री दिलीप सिंह परिहार, श्री ओमप्रकाश सकलेचा, श्री अनिरुद्ध माधव मारू उपस्थित रहे।  

समाज की कुरीतियों को दूर करने के लिये बालिकाओं के साथ बालकों को भी जागरूक करें : मंत्री सुश्री भूरिया

महिलाओं का सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मंत्री सुश्री भूरिया समाज की कुरीतियों को दूर करने के लिये बालिकाओं के साथ बालकों को भी जागरूक करें : मंत्री सुश्री भूरिया मंत्री सुश्री भूरिया की अध्यक्षता में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रथम अनुश्रवण समिति की बैठक भोपाल महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में आज अनुश्रवण समिति की प्रथम बैठक मंत्रालय में सम्पन्न हुई। बैठक में महिलाओं के उत्थान और उनकी आजीविका को बेहतर बनाने के लिये 21 विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा कर आगामी कार्य-योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि बाल विवाह रोकने के सार्थक प्रयास में विद्यालयों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को भी इसकी समझाइश दी जाये उन्हें समाज की कुरीतियों को दूर करने और उनके रोकने के लिये जागरूक किया जाये । विमुक्त घुमंतू जातियों के उत्थान के लिये करें विशेष प्रयास उद्योग एवं आदिम जाति विभाग के संयुक्त प्रयास से वर्किंग वीमेन हॉस्टल की हर जिले में स्थापना की जाये ताकि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को और बेहतर किया जा सके । मंत्री सुश्री भूरिया ने बैठक में कहा कि महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए तथा जमीनी स्तर पर नियमित अनुश्रवण किया जाए। बैठक में पोषण अभियान, आंगनवाड़ी सेवाएं, किशोरी बालिका योजना, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं तथा महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों की वर्तमान स्थिति पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। मंत्री ने योजनाओं में आ रही चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए। सुश्री भूरिया ने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता के साथ कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से नवाचार आधारित प्रयासों को बढ़ावा देने और विभागीय समन्वय को मजबूत करने पर भी जोर दिया। बैठक में विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव आयुक्त, महिला एवं बाल विकास सुश्री निधि निवेदिता सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया, मंदसौर जिले में दो साल में हुए महत्वपूर्ण विकास कार्य

मंदसौर जिले ने दो वर्षों में किए विकास के नए आयाम स्थापित : प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया पशुपतिनाथ लोक, मेडिकल कॉलेज, चीता प्रोजेक्ट, नगर वन, उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों में हासिल की उल्लेखनीय उपलब्धियां भावांतर भुगतान योजना में 8,803 किसानों को 10.20 करोड़ रुपए का भुगतान दो वर्षो की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का किया विमोचन प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक भोपाल महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मंदसौर जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि मंदसौर जिले ने विगत दो वर्षों में विकास के हर क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होने राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर मंदसौर जिले में अब तक किए गए विकास कार्यों, योजनाओं की प्रगति तथा उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी। प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित सुशासन भवन सभागार में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक एवं प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रभारी मंत्री ने 2 वर्ष की उपलब्धियां पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर, कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग, सुवासरा विधायक श्री हरदीप सिंह डंग, जिला योजना समिति सदस्य श्री राजेश दीक्षित, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा विजय पाटीदार, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री बसंत शर्मा सहित पुलिस अधीक्षक श्री विनोद कुमार मीना, अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल सहित सभी जिलाधिकारी, पत्रकार गण मौजूद थे। प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि विगत दो वर्षों में मंदसौर जिले में धार्मिक, पर्यटन, औद्योगिक, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, नगरीय एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं। भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में लगभग 25 करोड़ रुपए की लागत से पशुपतिनाथ लोक का निर्माण पूर्णता की ओर है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत जिले में 61.62 करोड़ रुपए की लागत से 5 निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिले के सभी 922 ग्रामों में 2 लाख 40 हजार से अधिक ग्रामीण नल जल कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं तथा लगभग 1332 करोड़ रुपए की नल जल योजनाओं के कार्य प्रगतिरत हैं। इसके साथ ही गांधीसागर जल विद्युत गृह की 115 मेगावाट क्षमता की इकाइयों के नवीनीकरण एवं आधुनिकीकरण के लिए 418.91 करोड़ रुपए की स्वीकृति शासन द्वारा प्रदान की गई है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में भी जिले ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। मंदसौर जिला मुख्यालय पर श्री सुंदरलाल पटवा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अक्टूबर 2024 से 100 सीट्स के साथ प्रारंभ किया गया है, जहां वर्तमान में प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के कुल 200 छात्र अध्ययनरत हैं। इसके अलावा जिले में 13 सांदीपनि विद्यालयों की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से अधिकांश भवनों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। कृषि एवं किसान कल्याण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एवं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत जिले के 2 लाख 19 हजार से अधिक किसानों को 43.96 करोड़ रुपए की राशि वितरित की गई है। सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत 8,803 किसानों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 10.20 करोड़ रुपए की राशि उनके बैंक खातों में जमा कराई गई है। अतिवृष्टि एवं फसल क्षति पर जिले को 267.29 करोड़ रुपए की राहत राशि आवंटित की गई है। औद्योगिक विकास को गति देने जिले में 331.47 हेक्टेयर भूमि पर नवीन औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार किया गया है। कृषि उद्योग समागम 2025 का आयोजन मंदसौर में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति में किया गया, जिसमें 3,600 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश हुआ तथा लगभग 12,500 लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के अंतर्गत विगत दो वर्षों में 487 हितग्राहियों को 35.39 करोड़ रुपए का ऋण प्रदान कर स्वरोजगार से जोड़ा गया है। नगरीय एवं ग्रामीण विकास के अंतर्गत अमृत 2.0 योजना में 194.82 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 10,166 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, ग्राम सड़क, प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) सहित 50,512 विकास कार्यों के लिए 810.01 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि मंदसौर जिला निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है तथा आने वाले समय में जिले को विकास के नए शिखर पर पहुंचाया जाएगा।  

डिप्टी कलेक्टर की पोस्टिंग का विरोध तेज, महिला-बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया के आवास पर जुटे अधिकारी

बुरहानपुर मध्य प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग में बुरहानपुर जिला की डिप्टी कलेक्टर लता शरणागत की अतिरिक्त निदेशक (Additional Director) के रूप में नियुक्ति पर सरकारी अधिकारियों के एक वर्ग ने विरोध जताया है. महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के एक ग्रुप ने भोपाल में विभाग की मंत्री निर्मला भूरिया से मुलाकात की और शरणागत की अतिरिक्त निदेशक के रूप में नियुक्ति का विरोध किया.  उन्होंने शीर्ष पद पर उनकी 'जूनियर' हैसियत का हवाला दिया और शरणागत की नियुक्ति रद्द करने का अनुरोध किया. मंत्री भूरिया ने बाद में बताया कि अधिकारियों की मांग जायज है और वह इस संबंध में जरूरी कदम उठाएंगी. उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग में अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति विभाग के ही वरिष्ठ अधिकारियों में से की जाती है. मंत्री ने बताया कि शरणागत के मामले में उनकी नियुक्ति सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा की गई थी. इससे पहले, अधिकारियों के एक समूह ने भूरिया को एक ज्ञापन सौंपा और उनसे शरणागत की नियुक्ति के संबंध में जरूरी कार्रवाई करने का अनुरोध किया. महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त निदेशक (इंदौर संभाग) डॉ. संध्या व्यास ने कहा कि शरणागत को अतिरिक्त निदेशक के पद पर नियुक्त करना नियमों के विरुद्ध है और इससे विभाग में भारी रोष है. व्यास ने कहा, "अधिकारी इस नियुक्ति से नाराज हैं क्योंकि शरणागत की नियुक्ति से विभाग के अधिकारियों की वरिष्ठता का हनन हुआ है." महिला मंत्री भूरिया को सौंपे ज्ञापन में, अधिकारियों ने बताया कि शरणागत 2008 बैच की अधिकारी हैं, जबकि विभाग में कई वरिष्ठ संयुक्त निदेशक 2009 से इसी पद पर कार्यरत हैं.  ज्ञापन में कहा गया है कि यह प्रमुख विभाग महिलाओं और बच्चों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाता है, जिनके लिए विशेषज्ञता की जरूरत होती है और एक डिप्टी कलेक्टर इन विषयों का विशेषज्ञ नहीं होता.