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नीतीश सरकार ने सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के दिए निर्देश

पटना. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने दो दर्जन से अधिक सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है। भू अर्जन निदेशक कमलेश कुमार सिंह ने जिलों को उन सड़कों की सूची भेजी है, जिनके लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई चल रही है। मुख्यालय स्तर पर हुई समीक्षा में पाया गया कि अधिसंख्य मामला मुआवजा भुगतान के कारण लटका हुआ है। शेरपुर-दिघवारा के बीच गंगा नदी पर छह लेन के पुल के रास्ते में मंदिर-मस्जिद और स्कूल के आ जाने से कठिनाई हो रही है। एनएच 27 के किशनगंज-बहादुरगंज खंड एलाइनमेंट में सुधार के कारण जमीन अधिग्रहण में समस्या आ रही है। इस खंड के साढ़े चार किमी हिस्से के लिए जमीन की जरूरत है। मुआवजा भुगतान का प्रबंध करने के लिए विभाग को लिखा गया है। एनएच 231 के महेशखूंट-सहरसा-पूर्णिया खंड में मरंगा एवं सुखिया मौजा के रैयत मुआवजे की दर को लेकर विरोध कर रहे हैं। एनएच 139 डब्ल्यू के बाकरपुर-मानिकपुर खंड में भी समस्या है। इस हिस्से में संरचनाओं का भुगतान बाकी हे। इसी परियोजना के मुजफ्फरपुर वाले हिस्से में अधिग्रहण का एक विवाद हाई कोर्ट में लंबित है। शेरपुर-दिघवारा के बीच गंगा नदी पर छह लेन के पुल का निर्माण हो रहा है। सारण जिला में इसके लिए 580 मीटर जमीन अधिग्रहण का मामला अटक गया है, क्योंकि अधिग्रहण के रास्ते में मंदिर, मस्जिद और स्कूल पड़ रहे हैं। एनएच 139 डब्ल्यू के साहेबगंज-अरेराज-बेतिया खंड पर करीब 55 किमी सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई लंबित है। पश्चिमी चंपारण में भी इस सड़क के लिए करीब 24 किमी सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण होना बाकी है। इसी तरह एनएच 119 डी के लिए वैशाली जिले में भी 24 किमी सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। जिला भू अर्जन अधिकारी को कहा गया है कि वे अधियाची विभाग से समन्वय बना कर मुआवजा भुगतान की गति को तेज करें। इस परियोजना के लिए दरभंगा एवं समस्तीपुर जिलों में भी जमीन अधिग्रहण हो रहा है। एनएच 119 डी के पटना जिले के खंड में भरगांवा मौजा के रैयतों के विरोध का सामना हो रहा है। यह मुआवजे की कम दर को लेकर है। निदेशक, भू अर्जन कमलेश कुमार सिंह ने जिला भू अर्जन पदाधिकारियों को कहा है कि वे संबंधित विभागों एवं रैयतों के बीच समन्वय कर अधिग्रहण की कार्रवाई तेज करें।

जमीन रजिस्ट्री में बड़ा बदलाव: अब घर से ही पूरा होगा काम, बुजुर्गों के लिए खास ऐलान

पटना बिहार में अब घर बैठे जमीन की रजिस्ट्री हो जाएगी। नीतीश सरकार बुजुर्गों के लिए नई व्यवस्था लेकर आई है। इसके तहत 80 साल या उससे ज्यादा की उम्र को अपनी जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उन्हें घर पर ही जमीन निबंधन की सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सात निश्चय-3 के तहत मंगलवार को यह घोषणा की।   सीएम नीतीश कुमार ने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "कई बार ऐसा देखा गया है कि राज्य के वृद्धजनों, जिनकी उम्र 80 वर्ष या उससे ज्यादा है, उन्हें जमीन/ फ्लैट की रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों के निष्पादन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में 80 वर्ष या उससे ज्यादा की उम्र के लोगों के लिए जमीन/ फ्लैट के निबंधन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।" बुजुर्गों को मिलने वाली सुविधाएं-     घर बैठे जमीन निबंधन की सभी सेवाएं     मद्य निषेध, उत्पाद निबंधन विभाग की मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट के जरिए दस्तावेजों के निश्चित समय-सीमा के अंदर रजिस्ट्रेशन की सुविधा     आवेदन ऑनलाइन करना होगा     7 दिन के अंदर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी 1 अप्रैल से लागू होगी नई व्यवस्था, जमीन की अपडेटेड जानकारी भी मिलेगी बुजुर्गों को घर बैठे जमीन रजिस्ट्री की सुविधा 1 अप्रैल 2026 से लागू की जाएगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं। सीएम ने कहा, "अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जमीन खरीदने के इच्छुक व्यक्ति को संबंधित भूमि की अपडेटेड जानकारी उपलब्ध नहीं होती है, जिस कारण उन्हें समस्या होती है। इसे ध्यान में रखते हुए क्रेता और विक्रेता को जमीन की अपडेटेड जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। सीएम ने कहा कि इस व्यवस्था के तहत आवेदकों के अनुरोध पर आवेदन करने के बाद निबंधन विभाग द्वारा अंचल कार्यालय से भूमि की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त कर क्रेता को उपलब्ध करा दी जाएगी। इससे आवेदकों को काफी सुविधा होगी और उन्हें जमीन के बारे में सही जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।  

नीतीश सरकार की बड़ी पहल: छात्रवृत्ति योजनाओं से लाखों छात्रों को मिला संबल

पटना बिहार सरकार के पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति योजनाओं के जरिये करीब 55 लाख विद्यार्थियों को लगभग 832 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई है। बिहार सरकार का पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग राज्य के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े तथा अत्यंत पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए लगातार प्रयासरत है। शिक्षा को प्रोत्साहन देने और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से विभाग द्वारा संचालित विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं ने वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनसे लाखों छात्र-छात्राएँ लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना विभाग की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक, मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक लगभग 53 लाख 46 हजार विद्यार्थियों को लगभग 654 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है, जिससे उन्हें अपनी प्री-मैट्रिक शिक्षा बिना किसी बाधा के जारी रखने में सहायता मिली है। यह योजना लाखों परिवारों के लिए शिक्षा का आधार बन रही है। मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में अब तक कुल 2,76,580 लाभार्थियों को कुल 142.01 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई है। मुख्यमंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग मेधावृत्ति योजना मुख्यमंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग मेधावृत्ति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस योजना से अब तक कुल 1,11,670 विद्यार्थियों (50,002 बालिकाएँ और 61,668 बालक) तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक कुल 1,07,172 विद्यार्थियों (49,370 बालिकाएँ और 57,802 बालक) को लाभ मिला है। इन सभी मेधावी विद्यार्थियों को प्रत्येक को 10 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए संचालित मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग मेधावृत्ति योजना ने भी अपनी प्रतिबद्धता साबित की है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में, इस योजना के तहत कुल 78,045 लाभार्थियों तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 70639 लाभार्थियों को प्रत्येक को 10 हजार रूपये की राशि वितरित की जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार सरकार की इन प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाओं से अब तक लगभग 55 लाख विद्यार्थियों को लगभग 832 करोड़ रुपये का लाभ मिला है। पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार सरकार, राज्य के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से कमजोर वर्गों को आर्थिक सहायता प्रदान करने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य छात्रों को उनकी शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना और समाज में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है, जिससे एक सशक्त, शिक्षित और समावेशी बिहार का निर्माण हो सके। विभाग भविष्य में भी इन वर्गों के सर्वांगीण विकास के लिए नए आयाम स्थापित करने के लिये संकल्पित है।  

नीतीश सरकार का बड़ा फैसला: पानी की फिजूलखर्ची रोकने को नया नियम लागू

पटना बिहार सरकार ने ‘हर घर नल का जल’ योजना को और प्रभावी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब पानी की बर्बादी करना सीधे जेब पर भारी पड़ेगा। सरकार का साफ कहना है—अब नल खुला छोड़ना या बेवजह पानी बहाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्या लागू हुआ नया नियम? राज्य में लगातार गिरते भू-गर्भीय जलस्तर को देखते हुए सरकार ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए सख्त पेनल्टी सिस्टम लागू किया है। जो लोग नल बहता छोड़ देते हैं या घरेलू पेयजल का गलत उपयोग करते हैं, उनके खिलाफ अब पंचायत स्तर पर तुरंत कार्रवाई होगी। अब ये गलती की… तो जुर्माना तय सरकार ने तीन-स्तरीय पेनल्टी का प्रावधान बनाया है:     पहली बार गलती: ₹150 जुर्माना     दूसरी बार: ₹400 जुर्माना     तीसरी बार: ₹5,000 जुर्माना + पानी का कनेक्शन तत्काल काट दिया जाएगा अगर कोई उपभोक्ता जुर्माना नहीं भरता है, तो उसके खिलाफ सर्टिफिकेट वाद दर्ज कर वसूली की प्रक्रिया शुरू होगी। कनेक्शन कट गया तो दोबारा कैसे मिलेगा? दुबारा पानी का कनेक्शन चाहिये तो उपभोक्ता को सभी बकाया राशि और लगाया गया जुर्माना पूरी तरह जमा करना होगा। इसके बाद WIMC यानी वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की अनुमति पर ही कनेक्शन बहाल होगा। पेयजल का गलत उपयोग करने पर सख्त प्रतिबंध सरकार ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि पेयजल का उपयोग सिर्फ घरेलू और पीने से जुड़ी जरूरतों के लिए किया जाए। इन कामों पर पूरी तरह पाबंदी होगी:     नल खुला छोड़कर पानी बहाना     गाड़ी, आंगन या घर धोने में पेयजल का उपयोग     जानवरों को नहलाने के लिए नल का पानी     खराब या लीक टोंटी को नजरअंदाज करना     कहीं भी लीकेज देखने पर सूचना न देना मोटर पंप लगाया तो मुश्किल में पड़ जाएंगे सरकारी नल पर मोटर पंप चलाना अब अपराध माना जाएगा।     तुरंत ₹5,000 का जुर्माना     मोटर पंप जब्त     बार-बार गलती पर FIR दर्ज सरकार का कहना है कि यह कदम उन लोगों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है जो सरकारी सुविधा का दुरुपयोग कर रहे थे। सरकार ने क्यों अपनाई कड़ी नीति? जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, और कई जगहों पर पेयजल की कमी देखी जा रही है। सरकार के अनुसार “योजना का उद्देश्य हर घर को स्वच्छ पानी देना है, लेकिन कुछ लोग गैर-जरूरी उपयोग कर पानी की बर्बादी बढ़ा रहे हैं। नए नियम जल संरक्षण और सामुदायिक जिम्मेदारी दोनों को मजबूत करेंगे।” अगर आप भी ‘हर घर नल का जल’ योजना के लाभार्थी हैं, तो इन नए नियमों का पालन करना अब जरूरी है, नहीं तो भारी जुर्माना झेलना पड़ेगा।

प्रशांत किशोर ने दी चेतावनी, सरकार पर दबाव: सम्राट चौधरी को मर्डर केस में तुरंत गिरफ्तार किया जाए

पटना  जन सुराज पार्टी के सुप्रीमो प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बड़े नेता सम्राट चौधरी को डिप्टी सीएम पद से बर्खास्त करने और गिरफ्तार करने की मांग की है। प्रशांत किशोर ने 1995 में तारापुर में छह लोगों की सामूहिक हत्या के केस में अभियुक्त रहे सम्राट चौधरी पर गलत उम्र का दस्तावेज देकर कोर्ट से राहत लेने का आरोप लगाया है। प्रशांत ने कहा कि सम्राट ने 1995 में अपनी उम्र 14-15 साल दिखाने और बतौर नाबालिग राहत पाने के लिए बिहार बोर्ड की परीक्षा का प्रवेश पत्र कोर्ट को दिया था। प्रशांत ने बताया कि सम्राट ने 2020 के चुनाव में जो शपथ पत्र दिया है, उसके मुताबिक वो 51 साल के थे और इस हिसाब से 1995 में 26 साल उम्र बनती है, इसलिए उन्हें बर्खास्त करके जेल भेजना चाहिए। प्रशांत किशोर ने पटना में सोमवार को पत्रकार सम्मेलन बुलाकर सम्राट चौधरी पर ताजा हमला बोला है। उन्होंने पहले भी सम्राट पर इसी मर्डर केस को लेकर आरोप लगाए थे। सम्राट ने अपने जवाब में कहा था कि उनकी उम्र और नाम को लेकर विवाद पहले से सार्वजनिक है। प्रशांत के ताजा हमले पर सम्राट ने तंज में कहा कि पीके खोजी पत्रकार बन गए हैं। प्रशांत ने सोमवार को पटना में कहा कि वो केंद्र सरकार, राज्य सरकार और राज्यपाल से अनुरोध करते हैं कि सम्राट को हत्या के आरोप में तुरंत पद से बर्खास्त करके अरेस्ट किया जाए। प्रशांत किशोर ने कहा- “तारापुर में 1995 में छह लोगों की जो हत्या हुई, सातों कुशवाहा समाज के थे।… छह लोगों की हत्या के अभियुक्त हैं, आरोप नहीं है, अभियुक्त हैं, राकेश कुमार उर्फ सम्राट कुमार मौर्य उर्फ सम्राट चौधरी। तारापुर केस नंबर 44/1995। 24 अप्रैल 1995 को इन लोगों ने सीजेएम कोर्ट में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) का प्रवेश पत्र जमा किया। एडमिट कार्ड में नाम- सम्राट चंद्र मौर्य। पिता का नाम- शकुनी चौधरी। जन्मतिथि- 1 मई 1981। रिजल्ट- फेल। नंबर आया 268। कैटेगरी प्राइवेट है।” प्रशांत ने कहा- “ये सुप्रीम कोर्ट का दस्तावेज है, जो सम्राट चौधरी ने जमा किया है। जिसमें यह बताया है कि उनका जन्म वर्ष 1981 है, उसके हिसाब से सीजीएम कोर्ट ने उनको 15 साल उम्र का नाबालिग मानकर राहत दिया। इनको जेल से निकाला गया। कानूनन 18 साल से कम उम्र के बच्चे को जेल में नहीं रखा जा सकता। यह बात तो सब जानते हैं। लेकिन आज क्यों कह रहा हूं कि उनको गिरफ्तार करना चाहिए।” 1995 में सम्राट चौधरी के उम्र पर सवाल खड़ा करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा- “2020 का, जो सम्राट चौधरी ने चुनाव घोषणा पत्र दिया है, इसमें अपना उम्र बताया है 51 साल। इसका मतलब 2020 में उससे 25 साल कम करने पर उनकी उम्र 26 साल बनती है। 26 साल के आदमी को कोर्ट ने गलती से, गलत प्रमाण पत्र के आधार नाबालिग होने के नाम पर अभियुक्त रहते जेल से बरी कर दिया गया था कि ये 15 साल के हैं। इनका अपना दस्तावेज बता रहा है कि ये उस समय 26 साल के थे। 26 साल के आदमी पर अगर 6 लोगों की हत्या का आरोप है तो जब तक कोर्ट से बरी नहीं होते, तब तक उनको जेल में होना चाहिए। और ये आदमी यहां का डिप्टी सीएम बनकर बैठा हुआ है।” प्रशांत किशोर ने कहा कि हत्या के आरोपी सम्राट चौधरी संवैधानिक पद पर बैठे हुए हैं। ये देश के संविधान का अपमान है। जिस आदमी को जेल में होना चाहिए, वो यहां का उपमुख्यमंत्री बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कार्रवाई नहीं करेंगे तो जन सुराज पार्टी राज्यपाल के पास जाएगी और सम्राट की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग करेगी। प्रशांत ने कहा कि वो सम्राट के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखेंगे। उन्होंने कहा कि ऐक्शन नहीं होता है तो जन सुराज पार्टी इस केस को लेकर अदालत भी जाएगी।  

नीतीश सरकार ने दिया तोहफ़ा, इस महीने समय से पहले होगा वेतन भुगतान

पटना बिहार में विधान सभा का चुनाव होना है और इसकी अधिसूचना जारी होने में अब गिन कर दिन बच गए हैं।  इससे पहले हिन्दुओं का महापर्व दुर्गापूजा चल रहा है। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ी घोषणा की है। यह घोषणा राज्यकर्मियों के लिए है।   मुख्यमंत्री नीतीश सरकार ने दुर्गापूजा को ध्यान में रखते हुए उनके सितंबर महीने के वेतन का भुगतान समय से पहले करने का ऐलान किया है। यह भुगतान आज यानी गुरुवार से शुरु हो जाएगा। सरकार के इस फैसले से राज्यकर्मियों ने एक बड़ी राहत की साँस ली है। क्यों कि राज्यकर्मी कर्मचारी अपने वेतन के इंतजार में बैठे हुए थे, इस घोषणा के बाद वह काफी खुश हैं। बिहार सरकार के इस घोषणा के बाद राज्यभर के कर्मचारियों में उत्साह और खुशी का माहौल है। इस संबंध में कर्मचारियों का कहना है कि त्योहार से पहले वेतन मिलने से उनकी तैयारियों में आसानी होगी। अब पूरा परिवार एक साथ दुर्गापूजा की तैयारी करेंगे। दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर वित्त विभाग ने यह आदेश जारी करते हुए आज गुरुवार से सितंबर महीने का वेतन भुगतान शुरू करने का निर्देश दिया है, क्यों कि बिहार सरकार का यह निर्णय दुर्गापूजा को ध्यान में रखकर लिया गया है।इसको लेकर वित्त विभाग के प्रधान सचिव आनंद किशोर के द्वारा अधिसूचना जारी की गई है। जारी किए गए आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार के कर्मचारी के साथ-साथ हाईकोर्ट, विधानसभा, विधान परिषद और राजभवन के कर्मियों को भी सितंबर का वेतन समय से पहले दिया जाएगा। इसके लिए आदेश की प्रति सभी कोषागार पदाधिकारियों को भेज दी गई है।

बाढ़ में मवेशियों के लिए भूख नहीं बनेगी जानलेवा! ऐसे मिलेगा सूखा चारा

बाढ़ में नहीं भूख से तड़पेंगे पशुधन!नीतीश सरकार पहुंचाएगी चारा  बाढ़ में मवेशियों के लिए भूख नहीं बनेगी जानलेवा! ऐसे मिलेगा सूखा चारा पशुओं की जान बचाने उतरी नीतीश सरकार, हर शिविर में पहुंचेगा चारा  बाढ़ के दौरान पशुओं का डायर्ट प्‍लान तैयार! जरूरत के अनुसार मिलेगा चारा पटना बाढ़ की विभीषिका केवल इंसानों को ही नहीं, पशुओं के लिए भी मुश्किल खड़ी कर देती है। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के पशुपालकों की समस्‍या को समझते हैं। ऐसे वक्‍त में जब घर-आंगन जलमग्न हो जाते हैं और चारागाह डूब जाते हैं। बिहार सरकार पशुपालकों के पशुधन को बचाने के लिए बड़ी सहारा बनी है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने आपदा प्रभावित इलाकों में पशु चारा वितरण कार्यक्रम शुरू किया है, ताकि किसी भी पशुपालक को अपने मवेशियों को भूखा रखने की नौबत न आए। पशुओं के हिसाब से मिलेगा चारा जिला प्रशासन के सहयोग से चल रहे इस कार्यक्रम के तहत हर जिले में पशुपालन पदाधिकारी की देखरेख में प्रभावित गांवों और पशु शिविरों तक चारा पहुंचाया जा रहा है। खास बात यह है कि वितरण पूरी तरह पशुओं की ज़रूरत के हिसाब से तय किया गया है। किसके लिए कितना चारा  बिहार सरकार जिला प्रशासन के सहयोग से बड़े जानवरों के लिए 6 किलो चारा तय किया है। छोटे जानवरों के लिए 3 किलो चारा तय किया है। वहीं, उससे छोटे जैसे भेंड बकरी और दूसरे मवेशियों के लिए एक किलो चारा तय किया गया है। चारे में इस बात का ध्‍यान रखा गया है कि मवेशियों की जरूरत का पोषण उन्‍हें मिल जाए। ये है प्रक्रिया जिला प्रशासन की ओर से पशुपालकों को एक बार में 3 दिन से लेकर एक हफ्ते तक का चारा मुहैया कराया जा रहा है। गौर करने वाली बात ये है कि बाढ़ की वजह से हालात बिगड़ने पर यह व्यवस्था शिविर संचालन तक जारी रखने का आदेश दिया गया है। चारा वितरण से पहले प्रभावित पशुओं की संख्या गिनी जाती है और हर पशुपालक को टोकन दिया जाता है। इसी आधार पर लाइनवार और व्यवस्थित तरीके से चारा पहुंचाया जाता है। ऐसे ले सकते हैं लाभ बताते चलें, बाढ़ के समय पशुओं का जीवन दांव पर होता है। तब यह योजना पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो रही है। जरूरत पड़ने पर मवेशी पालक, पशुपालन निदेशालय, बिहार के 0612-2230942 नंबर या पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, बिहार 0612-2226049 नंपर पर भी संपर्क कर सकते हैं।