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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अकासा एयर के बीच रणनीतिक साझेदारी पर मुहर

नोएडा उत्तर प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में उभर रहा है। इसी क्रम में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और देश की तेजी से उभरती एयरलाइन आकासा एयर के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी हुई है। इसके तहत नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परिसर में अकासा एयर की पहली मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा स्थापित की जाएगी। यह अत्याधुनिक एमआरओ केंद्र विमान रखरखाव, मरम्मत और तकनीकी सेवाओं का व्यापक नेटवर्क तैयार करेगा। इससे भारत के एविएशन सेक्टर को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निवेश-प्रोत्साहन नीतियों और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के चलते उत्तर प्रदेश में वैश्विक कंपनियों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में विकसित हो रही यह एमआरओ सुविधा प्रदेश को एविएशन, लॉजिस्टिक्स और हाईटेक इंडस्ट्री के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। परिचालन लागत और समय में आएगी कमी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और आकासा एयर के बीच यह साझेदारी न केवल देश में विमान रखरखाव की क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को एविएशन मेंटेनेंस और तकनीकी सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगी। इस एमआरओ सुविधा के विकसित होने से विमान कंपनियों को देश के भीतर ही उच्च गुणवत्ता वाली मेंटेनेंस सेवाएं मिल सकेंगी, जिससे परिचालन लागत और समय में कमी आएगी। रोजगार और कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा इस अत्याधुनिक एमआरओ सुविधा के स्थापित होने से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और स्थानीय युवाओं को एविएशन टेक्नोलॉजी और एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस से जुड़े कौशल प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही यह परियोजना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी गति देगी और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगी। यूपी को एविएशन हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम यह पहल भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के उस विजन के अनुरूप है, जिसके तहत नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को देश के प्रमुख एमआरओ हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे भारत की विमानन सेवाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा की क्षमता मजबूत होगी। विश्वस्तरीय एविएशन हब बनने की ओर अग्रसर नोएडा एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने कहा कि अकासा एयर का अपना पहला एमआरओ केंद्र नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्थापित करने का निर्णय इस एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय एविएशन हब बनाने के विजन की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत की एमआरओ क्षमताओं को मजबूत करेगी और क्षेत्र में रोजगार तथा कौशल विकास के नए अवसर पैदा करेगी।  अकासा एयर के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय दुबे ने कहा कि भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन बाजार को देखते हुए मजबूत घरेलू एमआरओ क्षमताओं का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ यह साझेदारी अकासा एयर के दीर्घकालिक विकास की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे भारत के विमानन क्षेत्र को अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।

एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन के साथ वरिष्ठ अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात

इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया बढ़ेगी आगे सुरक्षा मंजूरी के बाद जल्द तय होगी उद्घाटन तिथि, पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता लखनऊ, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया । इसके साथ ही जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया है। इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन समेत वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी भी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया जारी है। एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा से जुड़ी यह मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय करेगा। गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है। इस एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का समन्वय देखने को मिलेगा। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन हैं। एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी। तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा यहां 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है। एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा। तकनीकी दृष्टि से भी यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रहीं हैं ताकि यात्रियों को तेज और सहज यात्रा का अनुभव मिल सके। सतत विकास को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

एयरपोर्ट में नजर आएगा स्विस एफिशिएंसी और भारतीय आतिथ्य का संगम

क्षेत्रीय विरासत के साथ आधुनिक सुविधाओं का होगा मेल पूरी तरह भारतीय पारंपरिक डिजाइन से प्रेरणा लेकर तैयार की गई है एयरपोर्ट की वास्तुकला लखनऊ/ग्रेटर नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) का जल्द ही शुभारंभ होने को है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यात्री यहां उतरते ही भारतीय संस्कृति और उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत का अनुभव कर सकें। स्विस दक्षता और भारतीय मेहमाननवाजी का अद्भुत संयोजन यात्रियों को एक अनूठी, सहज और आरामदायक यात्रा का अनुभव देगा। आधुनिकतम तकनीक और सुविधाओं के साथ यह हवाईअड्डा वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार हो रहा है।  यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के एसीईओ शैलेन्द्र कुमार भाटिया ने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपने अभिनव डिजाइन, अत्याधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक समृद्धि के साथ न केवल यूपी बल्कि भारत की वैश्विक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार है। यह हवाई अड्डा यात्रियों के लिए हर कदम पर आरामदायक, तेज और यादगार अनुभव का वादा करता है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वयं दिन प्रतिदिन इसकी निगरानी कर रहे हैं और हाल ही में उन्होंने यहां का भ्रमण कर प्रगति का जायजा लिया और दिशा निर्देश भी दिए। ‘घाट’ और ‘हवेली’ की झलक देती आकर्षक डिजाइन एयरपोर्ट की वास्तुकला पूरी तरह भारतीय पारंपरिक डिजाइन से प्रेरणा लेकर तैयार की गई है, ताकि यात्री यहां उतरते ही उत्तर भारत की सांस्कृतिक आत्मा को महसूस कर सकें। टर्मिनल बिल्डिंग में लैटिस स्क्रीन जैसे नक्काशीदार डिजाइन लगाए गए हैं, जो न केवल सौंदर्य बढ़ाते हैं, बल्कि प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन के प्रवाह को भी नियंत्रित करते हैं। प्रवेश द्वार पर वाराणसी और हरिद्वार के प्रसिद्ध घाटों की याद दिलाने वाली चौड़ी व आकर्षक सीढ़ियां बनाई गई हैं, जो इस क्षेत्र की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं। टर्मिनल के भीतर एक हवेली शैली का विस्तृत आंगन बनाया जा रहा है, जो यात्रियों को खुला, हवादार और आरामदायक माहौल प्रदान करेगा। यह डिज़ाइन पारंपरिक भारतीय वास्तुकला में आंगन की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है। इसके साथ ही यूपी की प्रमुख नदियों की शांति व प्रवाह को दर्शाने वाली सफेद, तरंगाकार छत पूरे टर्मिनल को आधुनिकता और प्रकृति के संयोजन का प्रतीक बनाती है। इन सभी डिज़ाइन तत्वों का उद्देश्य है एक ऐसा वातावरण तैयार करना जहां यात्री तनावमुक्त, सहज और आत्मीय अनुभव के साथ अपनी यात्रा की शुरुआत कर सकें। एक ऐसा अनुभव जो भारतीय संस्कृति की गर्मजोशी और आधुनिक विश्वस्तरीय सुविधाओं का अनूठा मेल हो। मिलेगा डिजिटल अनुभव, पूरी तरह टेक-सक्षम होगा एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यात्रियों को एक अत्याधुनिक और डिजिटल-फर्स्ट अनुभव प्रदान करने जा रहा है। एयरपोर्ट पर ऐसी आधुनिक तकनीकें लगाई जा रही हैं, जो यात्रा को तेज और सहज बनाएंगी। यात्री स्वयं ही सेल्फ बैग-ड्रॉप मशीनों के माध्यम से अपना सामान जमा कर सकेंगे, जिससे लंबी कतारों में लगने की जरूरत कम होगी। इसी तरह सेल्फ बोर्डिंग गेट्स के जरिए बोर्डिंग प्रक्रिया और अधिक तेज़ और सुविधाजनक होगी। एयरपोर्ट के सभी गेट DigiYatra सुविधा से लैस होंगे, जिसमें बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के माध्यम से यात्रियों को बिना किसी दस्तावेज दिखाए तेजी से प्रवेश और बोर्डिंग की सुविधा मिलेगी। स्मार्ट साइनेज, यूज़र-फ्रेंडली इंटरफेस और डिजिटलीकृत प्रक्रियाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर यात्री को एक तनावमुक्त, सुगम और अत्याधुनिक यात्रा अनुभव मिले। यह एयरपोर्ट भविष्य की यात्रा जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जहां तकनीक यात्रियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। शॉपिंग और डाइनिंग का यादगार अनुभव नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों को शॉपिंग और डाइनिंग का ऐसा अनोखा अनुभव मिलेगा, जो उनकी यात्रा को और भी खास बना देगा। यहां यूपी और भारत के असली स्वादों का आनंद लेने के साथ-साथ स्थानीय और वैश्विक व्यंजनों का बेहतरीन मिश्रण उपलब्ध होगा। पारंपरिक व्यंजनों से लेकर इंटरनेशनल क्यूज़ीन तक, हर स्वाद का ध्यान रखते हुए एक क्यूरेटेड F&B अनुभव तैयार किया जा रहा है, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा होगा। साथ ही, एयरपोर्ट पर शॉपिंग का आनंद भी यात्रियों को रोमांचक सांस्कृतिक यात्रा का एहसास कराएगा, जहां स्थानीय हस्तशिल्प, आर्टवर्क, आधुनिक रिटेल ब्रांड्स और विशेष सॉवेनियर्स का आकर्षक संगम देखने को मिलेगा। यहां का हर अनुभव यात्रियों को सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि उत्तर भारत की समृद्ध संस्कृति से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करेगा। साथ ही शॉपिंग के लिए ड्यूटी-फ्री स्टोर्स, प्रीमियम ब्रांड्स और यूपी के विशेष हस्तशिल्प जैसे बनारसी सिल्क, चिकनकारी और अतर के आकर्षक विकल्प यात्रियों को उपलब्ध होंगे। इस संपूर्ण व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि यात्रियों को यहां सिर्फ एक ट्रांजिट स्पेस नहीं, बल्कि एक यादगार सांस्कृतिक यात्रा का आनंद मिले। ग्रीन एयरपोर्ट का बनेगा सजीव उदाहरण नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक ग्रीन एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया गया है, जहां निर्माण से लेकर संचालन तक हर स्तर पर सतत विकास को प्राथमिकता दी गई है। एयरपोर्ट परिसर में नवीकरणीय ऊर्जा, विशेष रूप से सोलर और ऑफ-ग्रिड विंड सिस्टम का अधिकतम उपयोग किया जाएगा, जिससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। वर्षा जल संचयन प्रणाली और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के साथ-साथ अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर्यावरण संरक्षण को मजबूती प्रदान करेंगे।

जल्द होगा जेवर एयरपोर्ट का भव्य शुभारंभ, मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी की पूरी तैयारी

लखनऊ,  नोएडा के जेवर में बना नवनिर्मित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जल्द ही शुरू होने जा रहा है। एयरपोर्ट को दिल्ली-एनसीआर, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मेरठ और हरियाणा जैसे क्षेत्रों से जोड़ने के लिए बहु-माध्यमीय (multi-modal) परिवहन व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसका मकसद यात्रियों, पर्यटकों और उद्योगों को एयरपोर्ट तक पहुंचने का तेज, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल साधन देना है। हर दिशा से आसान रोड कनेक्टिविटी एयरपोर्ट सीधे यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (बल्लभगढ़ लिंक) बनने से हरियाणा और पश्चिम भारत की दिशा से भी सुगमता बढ़ी है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से एयरपोर्ट को जोड़ने का काम तेज़ी से चल रहा है, जिससे गाजियाबाद, मेरठ, पलवल और सोनीपत से भी सीधा रास्ता मिलेगा। वहीं, औद्योगिक और मालवाहक ट्रैफिक के लिए उत्तर और पूर्व एक्सेस रोड लगभग बनकर तैयार हैं। जबकि,  सेक्टर-28 की 60 मीटर चौड़ी सेवा सड़क को भी यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ा गया है, ताकि स्थानीय यातायात सुचारू रहे। रेल और रैपिड रेल से भी पहुंचना होगा आसान दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट तक रीजनल रैपिड रेल (RRTS) परियोजना का डीपीआर राज्य सरकार ने मंज़ूर कर दिया है। रेल मंत्रालय भी एयरपोर्ट को चोला-रुंधी रेल लाइन से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। साथ ही, दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में जेवर स्टेशन का प्रावधान किया गया है। इलेक्ट्रिक बसों से अंतिम माइल कनेक्टिविटी एयरपोर्ट को आसपास के शहरों और मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने के लिए UPSRTC के साथ समझौता किया गया है। उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के साथ भी अंतरराज्यीय बस सेवा की सहमति बन चुकी है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण मिलकर 500 इलेक्ट्रिक बसें चलाएं गे, जो यात्रियों को एयरपोर्ट तक पर्यावरण-अनुकूल यात्रा सुविधा देंगी। कैब और कार रेंटल सेवाएं भी तैयार 1. NIA ब्रांडेड कैब (महिंद्रा लॉजिस्टिक्स): एयरपोर्ट पर महिंद्रा लॉजिस्टिक्स द्वारा NIA ब्रांडेड कैब सेवा शुरू की जा रही है। यह सेवा यात्रियों को समय पर, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा अनुभव देगी। 2. ऐप-आधारित टैक्सियां: उबर, रैपिडो और मेक माई ट्रिप जैसी कंपनियां ऑन-डिमांड कैब सेवा देंगी। ओला के साथ अनुबंध भी अंतिम चरण में है। यात्री मोबाइल ऐप से कैब बुक कर सकेंगे, किराया देख सकेंगे और लाइव ट्रैकिंग कर पाएंगे। 3. कार रेंटल सेवाएं: यात्रियों को खुद चलाने वाली या ड्राइवर सहित कारें किराए पर लेने की सुविधा भी मिलेगी। कई कंपनियां इस सेवा के लिए तैयार हैं। उत्तर भारत का नया एविएशन हब बनने को तैयार इन सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) उत्तर भारत का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक विमानन केंद्र बनने जा रहा है। यह देश के उन चुनिंदा एयरपोर्ट्स में शामिल होगा, जहाँ सड़क, रेल, रैपिड रेल और बस—चारों माध्यमों से एकीकृत कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।

टर्मिनल ट्रायल में कामयाब नोएडा एयरपोर्ट, कर्मचारियों ने किया असली यात्री अनुभव

नोएडा चार वर्षों की अथक मेहनत, दिन-रात जारी निर्माण कार्य और अनगिनत घंटों की तपस्या…..इन सबका परिणाम शनिवार को उस वक्त झलका जब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कर्मचारियों ने खुद को पहली बार यात्री के रूप में महसूस किया. एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग में हुए इस विशेष ट्रायल में कर्मचारियों ने टिकट और पहचान पत्र के साथ सभी यात्री प्रक्रियाओं का अनुभव लिया. बिलकुल वैसे ही जैसे वास्तविक उड़ान के समय यात्री करते हैं. एयरपोर्ट बना उत्साह का केंद्र सुबह से ही माहौल उत्साहपूर्ण था. यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (यापल) की ओर से चयनित कर्मचारियों को बसों से टर्मिनल बिल्डिंग लाया गया. सुरक्षा जांच पूरी करने के बाद वे चेक-इन काउंटर पर पहुंचे, जहां टिकट और पहचान पत्र दिखाकर ऑनलाइन चेक-इन किया गया और बोर्डिंग पास सौंपे गए. लगेज कराया जमा कर्मचारियों ने अपने बैग और लगेज को बोर्डिंग प्रक्रिया के अनुसार जमा कराया. सामान का वजन करने के बाद उस पर बारकोड टैग लगाया गया और कन्वेयर बेल्ट के जरिए उसे स्कैन कर उड़ान क्षेत्र में भेजा गया. इस दौरान कर्मचारियों ने हैंड बैगेज और व्यक्तिगत वस्तुओं की सुरक्षा जांच भी पूरी की.   सुविधाओं की बारीकी से हुई जांच इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य एयरपोर्ट के हर सिस्टम, सुरक्षा प्रक्रिया और यात्री सुविधा की बारीकी से जांच करना था. यापल की टीम ने यह सुनिश्चित किया कि संचालन शुरू होने के बाद किसी भी यात्री को असुविधा न हो. ट्रायल के दौरान टर्मिनल की स्वचालित सीढ़ियां, कोर्ट यार्ड एरिया, एयरो ब्रिज कनेक्टिविटी और बैगेज हैंडलिंग सिस्टम की जांच की गई.

675 करोड़ की ई-बस योजना कागजों में फंसी, नोएडा एयरपोर्ट की उड़ान अब भी टिकी

लखनऊ  देश के सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचे में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन 30 अक्टूबर को प्रस्तावित है, लेकिन एयरपोर्ट तक सुगम यातायात सुविधा की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ई-बस सेवा अब भी कागजों में उलझी हुई है. बेहतर कनेक्टिविटी नहीं होने की वजह से यात्रियों का सीधे एयरपोर्ट पहुंचना मुश्किल होगा. 500 बसों की योजना जिले में सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की योजना तैयार की गई थी जिसमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्रों को शामिल किया गया है. योजना के मुताबिक नोएडा में 300, ग्रेटर नोएडा व यीडा क्षेत्र में 100-100 बसें चलाई जानी है. इसके लिए 25 रूट प्रस्तावित किए गए है.   कंपनी का गठन अधर में लटका अभी तक बस संचालन के लिए आवश्यक जरूरतें जैसे बस स्टैंड, ई-चार्जिंग स्टेशन और वर्कशॉप आदि पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है. इतना ही नहीं तीनों प्राधिकरणों की सहमति के बावजूद बसों के संचालन के लिए गठित की जाने वाली संयुक्त कंपनी ग्रीन ट्रांसपोर्ट लिमिटेड का औपचारिक गठन भी अधर में लटका हुआ है. करीब 675 करोड़ की लागत इस योजना की लागत लगभग 675 करोड़ रुपये आंकी गई है इसे प्लान करके लागू करने पर विचार किया जा रहा है. शासन स्तर पर दो निजी कंपनियों ट्रैवल टाइम मोबिलिटी इंडिया प्रा. लि. और डेलबस मोबिलिटी का चयन कर लिया गया है, जो बस संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगी. यात्रियों के बिना कैसे चलेंगी बसें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने स्पष्ट किया कि बिना पर्याप्त यात्री संख्या के रूट पर बसें चलाने से तीनों प्राधिकरणों पर फाइनेंशियल बोझ बढ़ सकता है. इसलिए बसों के संचालन से पहले एक बार इस रूट का सर्वे करना जरूरी है. यीडा ने शुरू की तैयारी यीडा ने एयरपोर्ट को ध्यान में रखते हुए अपने ई-बस रूट में एयरपोर्ट को प्रमुख ठहराव बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. ओएसडी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा से यात्रियों की सीधी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए ई-बस रूट की शुरुआत नोएडा एयरपोर्ट से ही की जाएगी. एयरपोर्ट उद्घाटन के 45 दिनों के भीतर विमान सेवाएं शुरू होने की संभावना है. ऐसे में यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने के बेहतर कनेक्टिविटी होनी जरूरी है.

नोएडा को मिलेगी नई उड़ान: पीएम मोदी 30 अक्टूबर को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का करेंगे उद्घाटन

नई दिल्ली   ग्रेटर नोएडा के यमुना सिटी में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन 30 अक्टूबर को होगा। उद्घाटन के मद्देनजर जमीन पर तैयारियों का खाका खींचा जाना शुरू हो चुका है। कार्यक्रम स्थल से लेकर सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और जनसभा की व्यवस्था तक हर पहलू पर अधिकारियों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एयरपोर्ट उद्घाटन में बतौर चीफ गेस्ट शामिल होंगे। वह एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम स्थल का किया निरीक्षण यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह व एयरपोर्ट के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने संभावित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में उद्घाटन कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उड़ान के लिए तैयार एयरपोर्ट जेवर में बन रहा यह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा एनसीआर का दूसरा और उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। अधिकारियों के मुताबिक निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है और लगभग सभी प्रमुख हिस्से तैयार हो चुके है। अनुमान है कि अक्टूबर तक एयरपोर्ट उड़ानों के संचालन के लिए तैयार हो जाएगा। आमंत्रण भेजा गया प्रदेश सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उद्घाटन समारोह के लिए आमंत्रण भेजा गया है। फुल-स्केल ग्राउंड प्लानिंग अमल में लाई जा रही है। सूत्रों की मानें तो उद्घाटन समारोह को भव्य बनाने के लिए न केवल जिला प्रशासन बल्कि राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न विभाग तालमेल के साथ काम कर रहे है। कार्यक्रम के दौरान आने वाले अतिथियों की सुरक्षा, आगंतुकों की आवाजाही और यातायात प्रबंधन के लिए विशेष प्लान तैयार किया जा रहा है।