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नोएडा प्रोटेस्ट में कर्मचारियों के अलावा थे कई ‘उपद्रवी’, पब्लिक पोस्टरों से होगा खुलासा

 नोएडा  हाल ही में हुई हिंसक झड़पों के बाद नोएडा में अब हालात सामान्य होते नजर आ रहे हैं, लेकिन पुलिस की कार्रवाई और भी सख्त हो गई है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, हालांकि हिंसा को भड़काने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी हालत में छोड़ा नहीं जाएगा.इसी सड़ी में नोएडा के कर्मचारियों के प्रदर्शन के मामले में अब तक की कार्रवाई में बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया है कि हिंसा, आगजनी और पथराव में शामिल अधिकांश लोग असल में मजदूर हैं ही नहीं।  साजिश रचने में चार गिरफ्तार विरोध के नाम पर उत्पात, तोड़फोड़ और आगजनी की घटना में अब तक 17 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से 11 को गिरफ्तार किया जा चुका है.  वहीं हिंसा भड़काने के मामले में 32 लोगों की पहचान हुई है, जिनमें से 19 को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इसके अलावा साजिश रचने के आरोप में 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो इस पूरे विवाद में मुख्य भूमिका निभाने के आरोपी हैं।  66 गिरफ्तारियों में से 45 लोग श्रमिक नहीं उत्पात और हिंसा दोनों मामलों को मिलाकर 34 ऐसे लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जो कंपनियों के कर्मचारी नहीं हैं बल्कि बाहरी तत्व के रूप में सामने आए हैं. इन आरोपियों में से कई के मजदूर बिगुल और कथित अर्बन नक्सल नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं. इसके अलावा पूरे मामले में कुल मिलाकर हुई 66 गिरफ्तारियों में से 45 लोग श्रमिक नहीं हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हिंसा में बाहरी तत्वों की बड़ी भूमिका रही है।  पब्लिक प्लेस में लगेंगे उपद्रवियों के पोस्टर इस खुलासे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर स्थिति की समीक्षा की. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि अफवाह और दुष्प्रचार फैलाने वालों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और सोशल मीडिया की लगातार निगरानी रखी जाए. साथ ही, गैर-श्रमिक उपद्रवी तत्वों की पहचान कर उनकी तस्वीरें सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।  नोएडा में पूरे सप्ताह रहा था बवाल बता दें कि बीते सप्ताह नोएडा में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन हुआ था दो काफी उग्र रहा. वेतन बढ़ाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर बड़ी संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतर आए जहां पथराव और पुलिस से भिड़ंत के बाद नोएडा फेज-2 छावनी बन गया. इन लोगों ने सेक्टर-84 और आसपास के इलाकों में जमकर उत्पात मचाया, पथराव किया और वाहनों को आग के हवाले कर दिया था. प्रदर्शनकारियों ने सेक्टर-84 में खड़ी गाड़ियों को निशाना बनाया जिसमें दो गाड़ियां पूरी तरह जलकर खाक हो गई हैं. स्थिति को बिगड़ता देख भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा, लेकिन बेकाबू भीड़ ने पुलिस पर भी पथराव शुरू कर दिया. जवाब में पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. हालांकि , अब शहर में स्थिति शांत है। 

42 हजार कर्मचारी सड़कों पर, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से भड़काने का शक

नोएडा  उत्तर प्रदेश के नोएडा फेज दो स्थित कंपनी के दफ्तर से शुरू हुआ कर्मचारियों का आंदोलन सोमवार को उग्र रूप ले लिया। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई कंपनियों में कर्मचारियों को बाहर निकाल कर इकाई को बंद कराया गया। इसके बाद सड़कों पर उतर कर कर्मचारी प्रदर्शन करते दिखे। शहर के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। अब इसके पीछे किसी प्रकार की साजिश का अंदेशा जताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि कर्मचारियों को भड़का कर उग्र आंदोलन कराया गया। मामले की जांच के लिए एसटीएफ को लगाया गया है। एसटीएफ हिंसक और उग्र आंदोलन को भड़काए जाने की जांच करेगी। नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन को लेकर लखनऊ तक हलचल दिखी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रमिकों की समस्याओं के समाधान और जांच के लिए औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमिटी गठित की है। कमिटी की अनुशंसा के आधार पर न्यूनतम वेतनमान में अंतरिम वृद्धि का आदेश जारी किया गया है। तीनों प्रकार के श्रमिकों के वेतन में लगभग 21 फीसदी की वृद्धि की घोषणा की गई है। वहीं, पुलिस और प्रशाासन घटना की जांच और एक्शन में जुट गई है। नोएडा पुलिस का एक्शन तेज नोएडा पुलिस का मामले में एक्शन तेज हो गया है। नोएडा में मजदूरों के विरोध पर पुलिस कमिश्नर, गौतमबुद्धनगर लक्ष्मी सिंह का बड़ा बयान आया है। सीपी ने कहा कि कल हमारी ओर से अलग-अलग स्थानों पर हुई घटनाओं को लेकर 7 एफआईआर दर्ज की गई है। उपद्रव के मामले में 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनको उकसाने की दिशा में जो लोग चिह्नित किए गए थे, उनकी भी गिरफ्तारियां की गई हैं। सीपी ने कहा कि आने वाले दिनों में भी कुछ गिरफ्तारियां की जाएगी। सीपी ने जताया संदेह पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने मंगलवार को कहा कि सोमवार को नोएडा में 83 स्थानों पर 42 हजार से अधिक कर्मचारी सड़कों पर उतरे थे। दो स्थानों पर हिंसक प्रदर्शन हुआ। इस दौरान पुलिस ने न्यूनतम बल प्रयोग करते हुए श्रमिकों के प्रदर्शन को काबू में लाया गया। सीपी ने कहा कि अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को समझा-बुझाकर वापस भेजा गया। सीपी ने कहा कि जो श्रमिक हैं, ऐसा पता चला है कि कोई एक ग्रुप है जो उन्हें पीछे से उकसा रहा है। पीछे से बहुत व्यवस्थित तरीके से चीजों को आगे बढ़ा रहा है। सीपी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में ऐसे बहुत से फर्जी ट्विटर और अन्य अकाउंट बनाए गए हैं। इसके माध्यम से लगातार श्रमिकों को उकसाने, हिंसा, फैक्टरियों में आगजनी करने, पुलिस से भिड़ने के लिए उकसाया जाता रहा है। कल 2 अकाउंट के बारे में पता लगा था। पिछले 2 दिनों में श्रमिकों के 2 वाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं, जिसमें QR कोड स्कैन करके ग्रुप में जोड़ा रहा है। पुलिस करेगी फंडिंग की जांच पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि पूरे मामले की जांच के क्रम में सामने आया है कि पीछे से कोई संगठित गिरोह कर्मचारियों को भड़का रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को भीड़ में से चुनकर गिरफ्तार किया गया है। आगे भी इस प्रकार के लोगों की गिरफ्तारियां सुनिश्चित की जाएगी। इनकी फंडिंग की भी जांच की जाएगी। अगर जांच में आता है कि देश या प्रदेश के बाहर से इन लोगों को फंडिंग की गई है तो इस दिशा में भी काम किया जाएगा। मंगलवार को भी प्रदर्शन नोएडा के फेज 2 इलाके में एक कंपनी के कर्मचारियों ने कंपनी के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारी वेतन वृद्धि सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद रही। इस दौरान श्रमिकों की ओर से किसी प्रकार की हिंसक गतिविधि की खबर अब तक नहीं है।