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दिल्ली-NCR में यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी, Ola-Uber सेवाओं पर 9 दिन का संकट

नई दिल्ली दिल्ली के पड़ोसी राज्य पंजाब के कुछ शहरों के लोगों को 9 से 16 जून तक आवाजाही में दिक्कत झेलनी पड़ सकती है. दरअसल चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में ओला, उबर समेत एप बेस्ड कैब ड्राइवर हड़ताल पर हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैब ड्राइवर्स का ये अंदोलन सुबह 10 बजे से शाम 4 बज तक चलेगा. इस दौरान ये सवारियां लाने-लेजाने का काम नहीं करेंगे. ओला-उबर और इनड्राइव की इस हड़ताल का असर करीब 50 हजार यात्रियों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. कैब हड़ताल के बीच लोगों को तेज और जलती धूप के बीच पब्लिक ट्रांसपोर्ट या फिर ऑटो में सफर करना पड़ेगा।  कैब ड्राइवर क्यों कर रहे हड़ताल? पंजाब की राजधानी चंडीगढ़, मोहलाी और पंचकूला के कैब ड्राइवर्स के आंदोलन की वजह किराए की कीमतों में बढ़ोतरी न किए जाना है. ये लोग लगातार किराये में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं. कैब ड्राइवर्स के मुताबिक, साल 2025 में चंडीगढ़ प्रशासन ने उनके लिए किराया 25 किमी. प्रति किमी. तय किया था. इसके बाद से कई बार पेट्रोल, डीजल और सीएनजी महंगा हो चुका है. लेकिन कैब के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया. 1 साल से किराया नहीं बढ़ने से ये लोग नाराज हैं।  किराया 25 रुपये से35 रुपये प्रति किमी. करने की मांग कैब ड्राइवर्स कह रहे हैं कि सीएनजी 9 रुपये महंगी हो चुकी है. पेट्रोल-डीजल भी लगातार महंगा हो रहा है. ऐसे में ये लोग किराया 25 रुपये से बढ़ाकर 35 रुपये प्रति किमी. बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं. ड्राइवर एसोसिएशन का कहना है कि किराये में बढ़ोतरी की मांग को लेकर वे लोग कई बार अधिकारियों से मिले लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई. इसी वजह से उनको अब हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ा है।  दिल्ली-NCR में भी हुई थी ऑटो और टैक्सी भी हड़ताल बता दें कि 21 से 23 मई तक दिल्ली-एनसीआर में भी ऑटो और टैक्सी वालों ने हड़ताल की थी. इसका खामियाजा दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम के लाखों लोगों को भुगतना पड़ा था. ये हड़ताल इन लोगों ने कमर्शियल वाहनों पर ईसीसी बढ़ाए जाने और BS-4 या उससे पुराने वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर की गई थी. हालांकि ओला, उबर और रैपिड जैसी एप बेस्ड सर्विसेज ने इस समर्थन का सपोर्ट नहीं किया था।  

कैब एग्रीगेटर पर सख्ती: UP सरकार का बड़ा फैसला, Ola-Uber के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

लखनऊ  योगी सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा को देखते हुए परिवहन से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यूपी में अब ओला व उबर को भी पंजीकरण कराना होगा। परिवहन मंत्री ने मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 का जिक्र किया और बताया कि भारत सरकार ने 1 जुलाई 2025 को नियमावली में संशोधन किया है। भारत सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश भी अपनाएगा। ओला-उबर पर पहले नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण कराना पड़ेगा। आवेदन, लाइसेंस और रिन्युअल शुल्क भी देना होगा। कौन गाड़ी चला रहा है, यह अभी तक हम नहीं जान पाते थे। इनका ड्राइवर का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन तथा फिटनेस टेस्ट आदि भी कराएंगे। परिवहन मंत्री ने बताया कि अब यूपी में बिना पंजीकरण शुल्क, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट, पुलिस वेरिफिकेशन के गाड़ी नहीं चला पाएंगे। अधिसूचना जारी होने के बाद यह लागू हो जाएगी। आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी, जबकि 50-100 या इससे अधिक गाड़ी चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। रिन्युअल हर पांच साल पर होता रहेगा। रिन्युअल के लिए पांच हजार रुपये देना होगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि ऐसा ऐप भी विकसित करेंगे, जिससे समस्त जानकारी पब्लिक डोमेन में रहे। इसके तहत ड्राइवर आदि की समस्त जानकारी भी प्राप्त होगी। अब प्रदेश के हर गांव तक पहुंचेगी बस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में कैबिनेट बैठक हुई। वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकार वार्ता में बताया कि बैठक में कुल 31 प्रस्ताव आए, जिसमें से 30 प्रस्तावों पर कैबिनेट ने स्वीकृति दी। योगी सरकार ने ग्रामीणों के हित को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ को स्वीकृति दी। इस योजना के माध्यम से अब उत्तर प्रदेश के हर गांव तक बस पहुंचेगी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभी तक 12,200 गांवों तक बसें नहीं पहुंच रही थीं, लेकिन नई पॉलिसी के तहत उत्तर प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बसें पहुंचेंगी। इन बसों को परमिट व टैक्स से मुक्त रखा गया है। बड़ी ग्रामीण आबादी लाभान्वित इससे प्रदेश की बड़ी ग्रामीण आबादी लाभान्वित होगी। ये बसें चलाने की अनुमति निजी लोगों को मिलेगी। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें सीडीओ, एसपी, एआरटीओ, एआरएम सदस्य होंगे। ये बसें रात में गांव में ही रुकेंगी। सुबह ब्लॉक व तहसील होते हुए ये बसें सुबह 10 बजे तक जनपद मुख्यालय तक पहुंचेंगी। इस सेवा का लाभ विद्यार्थियों के अलावा कचहरी, ऑफिस या अपना उत्पाद शहर में बेचने जाने वाले लोगों को भी मिलेगा। कई गांवों में ऐसी सड़कें हैं, जहां बड़ी बसें टर्न होने में परेशानी होती है। 12,200 में से 5000 ऐसे गांव हैं, जहां बड़ी बसें टर्न नहीं हो सकतीं। इसलिए ये छोटी बसें होंगी, जिनकी अधिकतम लंबाई सात मीटर और अधिकतम सीट क्षमता 28 होगी।