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ऑपरेशन प्रहार में सहयोगियों से विदेशी गैंग्स्टर–आतंकी नेटवर्क मिला पूरा नक्शा

चंडीगढ़. ऑपरेशन ‘प्रहार’ के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि पंजाब के कई जिलों में हाल के महीनों में हुई हत्याएं और फिरौती की काल्स सीधे विदेशी नंबरों और एन्क्रिप्टेड ऐप्स से नियंत्रित की जा रही थीं। कुछ मामलों में निर्देश पाकिस्तान और कनाडा से मिल रहे थे, जिससे साफ हो गया है कि यह केवल गैंगवार नहीं बल्कि सीमा पार संचालित संगठित आपराधिक नेटवर्क है। इसी इनपुट के आधार पर पंजाब पुलिस ने 61 सबसे खतरनाक गैंगस्टरों की सूची तैयार कर उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। उधर गणतंत्र दिवस को लेकर पंजाब पुलिस ने पूरे राज्य में हाईअलर्ट जारी किया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गैंग्स्टरों के खिलाफ ऑपरेशन प्रहार लगातार जारी रहेगा। वहीं गणतंत्र दिवस को देखते हुए पूरे राज्य में विशेष नाके लगाए जाएंगे। उधर पुलिस ने गैंग्स्टरों को अलग अलग कैटेगरी में डाला है। पुलिस ने एक सूची तैयार की है किस देश में कितने गैंग्स्टर सक्रिय है। अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका 18, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) 9, कनाडा जर्मनी में 6 – 6, यूनाइटेड किंगडम व यूरोप, 5, आस्ट्रेलिया, पुर्तगाल में 3-3 थाईलैंड, मलेशिया में 2-2, पाकिस्तान, इटली, ब्राजील, इंडोनेशिया में 1 – 1 – 1 – 1 गैंग्स्टर सक्रिय है। पुलिस का कहना है कि इन सभी के खिलाफ सबूत, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रेल और हिरासत में लिए गए सहयोगियों की गवाही के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी। परेशन प्रहार जारी रहेगा, और लक्ष्य है विदेश में बैठे सरगनाओं तक सीधे पहुंचना और उनके पूरे नेटवर्क को तोड़ना। A-कैटेगरी गैंगस्टर–आतंकी गोल्डी बराड़ (कनाडा) – सिद्धू मूसेवाला केस से जुड़ा नाम, विदेश से शूटर और फंडिंग कंट्रोल करता रहा है। हरविंदर रिंदा (पाकिस्तान) – आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा, पंजाब में हमलों के लिए निर्देश भेजने का आरोप। रोहित गोदारा (यूरोप) – बराड़-गोदारा नेटवर्क का ऑपरेटर, फिरौती और धमकी कॉल्स का संचालन। अर्श डाला (कनाडा) – खालिस्तानी आतंकी संगठनों से लिंक, टारगेट किलिंग मॉड्यूल से जुड़ा। लखबीर लांडा (कनाडा) – रिंदा-लांडा नेटवर्क का हिस्सा, जबरन वसूली के मामलों से जुड़ा। अमृत बाठ (कनाडा) – हथियार और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़े मामलों में वांछित। अन्य प्रमुख नाम डोनी बल – बंबीहा गिरोह से जुड़ा, हाल की हिंसक घटनाओं में नाम सामने आया। लकी पटियाल – बंबीहा नेटवर्क का विदेशी संचालक, कई हाई-प्रोफाइल मामलों से जुड़ा। अमृत दालम – जग्गू भगवानपुरिया गैंग का प्रमुख हैंडलर, खाड़ी देशों से नेटवर्क चलाने का आरोप। अंकुश बहमन – ऑस्ट्रेलिया से संचालित मॉड्यूल, फिरौती और हथियार मामलों से जुड़ा। जैसल (गुरदेव सिंह) – अमेरिका से नेटवर्क, जबरन वसूली और गैंग सपोर्ट के आरोप। जंटा (गुरजंट सिंह) – ऑस्ट्रेलिया से कॉल ऑपरेशन, फिरौती और धमकी मामलों से जुड़ा। अमरजीत खब्बे राजपूत – यूरोप से हैंडलिंग, बंबीहा-डोनी नेटवर्क का कॉल ऑपरेटर। अमन घोटा वाला – यूएई से लॉजिस्टिक सपोर्ट, कई गिरोहों से संपर्क। अजयपाल उर्फ डैनी – एनडीपीएस और गैंग फंडिंग के लिंक, यूएई में छिपे होने की आशंका। हैप्पी जट्ट – ड्रग और कॉल मॉड्यूल से जुड़ा, कई मामलों में वांछित। हैरी चट्ठा – विदेश से ऑपरेटिंग हैंडलर, कई गैंगों के साथ गठजोड़। गोपी – फाइनेंसर और लोकल कड़ी, हवाला नेटवर्क से लिंक। दलबीर बीरा – हथियार सपोर्ट और सेफ-हाउस से जुड़ा नाम। जवंदा – काल रूटिंग और धमकी मैसेजिंग से जुड़ा। गोल्डी ढिल्लों – लोकल मॉड्यूल का समन्वय, फिरौती मामलों से जुड़ा। गुल्लू – शूटर नेटवर्क की सप्लाई चेन से जुड़ा। हैरी बाक्सर – गैंग ट्रेनिंग और फंड कलेक्शन में भूमिका। हुसान – सोशल मीडिया पर धमकी और जिम्मेदारी लेने वाले अकाउंट्स से लिंक। जिंदी – हथियार ट्रांजिट और ड्राइवर नेटवर्क। जर्मनजीत मल्ही – यूरोप से कॉल-रूटिंग सपोर्ट। जोबन मल्ही – फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट चैनल। बिल्ला – शूटरों की मूवमेंट और सेफ-हाउस। करणवीर – लोकल फंड कलेक्शन और कैश मूवमेंट। कोमल (जर्मनी) – विदेश से कॉल ऑपरेशन। कुणाल महाजन – हवाला और डिजिटल वॉलेट लिंक। लड्डी भजल – धमकी कॉल्स और मीडिया अकाउंट्स। मनिंदर बिल्ला – लोकल नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स। मनप्रीत मुन्ना – हथियार सप्लाई चैन। मोहब्बत सिंह – ड्राइवर और मूवमेंट सपोर्ट। जैसी – सेफ-हाउस और शरण देने के आरोप। आरजू बिश्नोई – डिजिटल कम्युनिकेशन हैंडलर। निशान जौरियन – कॉल ट्रैक बदलने की तकनीकी मदद। पवित्तर – लोकल कलेक्टर। प्रभ दासूवाल – सोशल मीडिया और धमकी वीडियो। राजन भगत – फंड मूवमेंट। सोनू खत्री – सेफ-हाउस। राज जवंदा – अंतर-गिरोह समन्वय। रणदीप मलिक – ड्राइवर नेटवर्क। रितिक रैली – डिजिटल पेमेंट। सनी ख्वाजके – हथियार ट्रांजिट। जीवन फौजी – सुरक्षा और मूवमेंट। सत्ता – लोकल आपरेटर। शमशेर शीरा – गैंग सपोर्ट। शुभम लोनकर – आनलाइन धमकी। मोनू गुर्जर – फाइनेंस और कैश। नोनी – सेफ-हाउस। विक्की सत्तेवाला – लोकल कड़ी। चांदी – हथियार सप्लाई। यादविंदर यादा – शूटर लिंक।

पंजाब में ‘ऑपरेशन प्रहार’ में बदमाशों के 2500 मददगार किए डिटेन

फरीदकोट. पंजाब सरकार द्वारा पंजाब को गैंगस्टर मुक्त राज्य बनाने के लिए अपने अभियान जारी है।  पंजाब पुलिस टीमों ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन 72 घंटे लंबे 'ऑपरेशन प्रहार' के तहत विदेश में बैठे गैंगस्टरों से जुड़े पहचाने गए और मैप किए गए ठिकानों पर छापे मारे। मंगलवार को गैंगस्टरों के खिलाफ पूरी तरह से मोर्चा खोलते हुए पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने 72 घंटे लंबे अभियान 'ऑपरेशन प्रहार' की शुरुआत की थी, जिसके तहत संगठित अपराध के इकोसिस्टम को खत्म करने के लिए राज्य भर में लगभग 12,000 कर्मियों वाली 2000 से अधिक पुलिस टीमों को तैनात किया गया था। 1186 मददगारों को पकड़ा ऑपरेशन के दूसरे दिन का हाल शेयर करते हुए स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (स्पेशल DGP) लॉ एंड ऑर्डर अर्पित शुक्ला, जिन्होंने चल रही कार्रवाई की निगरानी के लिए व्यक्तिगत रूप से मोहाली का दौरा किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दूसरे दिन राज्य भर में विदेश में बैठे गैंगस्टरों के 1186 सहयोगियों और मददगारों को पकड़ा गया है, जिससे कुल संख्या 2500 हो गई है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन प्रहार के पहले दिन 1314 लोगों को पकड़ा गया था। स्पेशल DGP अर्पित शुक्ला ने कहा कि संगठित अपराध को समर्थन देने वाले सपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह से खत्म करने के लिए वित्तीय नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, हथियार आपूर्ति और संचार लिंक सहित विभिन्न पहलुओं से गहन जांच चल रही है। पुलिस ने की इनाम की घोषणा नागरिकों से संगठित अपराध के खिलाफ अभियान में सक्रिय रूप से समर्थन करने का आग्रह करते हुए, स्पेशल DGP अर्पित शुक्ला ने कहा कि लोग वांछित अपराधियों और गैंगस्टरों से संबंधित जानकारी गुमनाम रूप से रिपोर्ट कर सकते हैं। इसके साथ ही एंटी गैंगस्टर हेल्पलाइन नंबर 93946-93946 के माध्यम से अपराध और आपराधिक गतिविधि के बारे में टिप्स भी साझा कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि गैंगस्टरों की गिरफ्तारी की ओर ले जाने वाली जानकारी के लिए 10 लाख रुपये तक का नकद इनाम दिया जाएगा।

पंजाब में 60 गैंगस्टर के खिलाफ 12000 पुलिसकर्मियों की दो हजार ठिकानों पर रेड

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राज्य में ड्रग तस्करी और संगठित गैंगस्टर नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से आज से 72 घंटे का विशेष अभियान 'वार अगेंस्ट ड्रग'– ऑपरेशन प्रहार” शुरू कर दिया है।  पंजाब में गैंगस्टरों के खिलाफ पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार को लेकर पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने कहा कि गैंगस्टरों के खिलाफ जंग छेड़ दी गई है। आज से 72 घंटे का ऑपरेशन शुरू किया गया है। इसके पहले चरण में लगभग 12,000 पुलिस अधिकारी लगभग 2,000 ठिकानों पर छापेमारी कर रहे हैं। 60 प्रमुख गैंगस्टरों को यह नहीं सोचना चाहिए कि वे सुरक्षित हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियों की विस्तृत मैपिंग के बाद यह सामने आया है कि पंजाब से जुड़े करीब 2000 गैंगस्टर सक्रिय हैं। इनमें से लगभग 1940 गैंगस्टर देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय हैं, जबकि 60 कुख्यात गैंगस्टर विदेशों में बैठकर ड्रग तस्करी, हथियार सप्लाई, हत्या और फिरौती के नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं। 60 गैंगस्टरों में से 23 के खिलाफ रेड कॉर्नर अधिकारियों के अनुसार, विदेशों में बैठे इन 60 गैंगस्टरों में से 23 के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो चुके हैं या जारी होने की प्रक्रिया में हैं, जबकि शेष 37 गैंगस्टरों के खिलाफ अगले तीन महीनों में सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर नोटिस जारी किए जाएंगे। इन अपराधियों को भारत लाकर न्याय के कटघरे में खड़ा करना सरकार की प्राथमिकता है। ऑपरेशन प्रहार के तहत केवल गिरफ्तारियां ही नहीं होंगी, बल्कि ड्रग और गैंगस्टर नेटवर्क की पूरी मैपिंग की जा रही है। इसमें हर गैंगस्टर की भूमिका, उसका फाइनेंसर, हथियार सप्लायर, ड्रग सप्लाई चेन, सेफ हाउस, डिजिटल कम्युनिकेशन और सहयोगियों की पहचान की जा रही है। इस मैपिंग के आधार पर एक-एक कड़ी पर कार्रवाई की जाएगी। अभियान के लिए विशेष ढांचा तैयार इस अभियान की निगरानी के लिए एक विशेष ढांचा तैयार किया गया है। आईजी काउंटर इंटेलिजेंस को पूरे ऑपरेशन का समग्र प्रभारी बनाया गया है। काउंटर इंटेलिजेंस के एडीजीपी आशिष चौधरी, जो हाल ही में एनआईए में लंबी सेवाएं देकर लौटे हैं, को ओवरसीज़ फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्रडिशन सेल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डीआईजी गुरमीत चौहान, जो एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के प्रमुख हैं, को राज्य और देश में सक्रिय गैंगस्टरों पर कार्रवाई और उनकी गिरफ्तारी की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं डीआईजी अखिल चौधरी, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF), को ड्रग नेटवर्क, सप्लाई चेन और तस्करी के रूट तोड़ने का दायित्व सौंपा गया है। इसके अलावा एआईजी ब्यूरो ऑफ इंटेलिजेंस कमलदीप सिंह को ड्रग और गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी रखने तथा गैंगस्टर गतिविधियों की तकनीकी मैपिंग की जिम्मेदारी दी गई है। सेल में अलग-अलग डेस्क बनाए गए हैं, जो रेड कॉर्नर नोटिस, प्रत्यर्पण, इंटरपोल समन्वय, कानूनी सहायता और अंतरराष्ट्रीय पत्राचार का काम संभालेंगे। ड्रग से अर्जित धन पर भी सख्त कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अनुसार, 68 एनडीपीएस मामलों में ड्रग तस्करों की संपत्तियां फ्रीज़ की जा चुकी हैं। अपराध से अर्जित धन, संपत्तियां और अवैध व्यवसायों को प्रोसिड्स ऑफ क्राइम मानते हुए जब्त किया जा रहा है, ताकि ड्रग माफिया की आर्थिक रीढ़ पूरी तरह तोड़ी जा सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो युवा ड्रग के जाल में फंसकर गुमराह हो गए हैं और मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाया जाएगा। लेकिन ड्रग तस्करी या गैंगस्टर गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। एंटी ड्रग हेल्पलाइन नंबर: 93946 93946 24×7 सक्रिय डीजीपी द्वारा घोषित रिवॉर्ड पॉलिसी  ड्रग और गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़ी किसी भी सूचना का गुप्त रखा जाएगा ड्रग तस्करी और एनडीपीएस मामलों में सूचना देने पर कुल 10 करोड़ रुपये तक इनाम एसएसपी स्तर तक अधिकारी: 1 से 1.5 लाख रुपये तक इनाम देने के अधिकृत पुलिस कमिश्नर / डीआईजी रेंज: 2 लाख रुपये तक इनाम डीसीपी स्तर से ऊपर: 2 लाख से अधिक इनाम की स्वीकृति  ड्रग की कमर्शियल बरामदगी पर 60,000 रुपये प्रति किलो इनाम एनडीपीएस में दोषसिद्धि पर 40,000 रुपये संबंधित जांच अधिकारी को संपत्ति फ्रीज़ कराने पर 20,000 रुपये इनाम पीआईटी-एनडीपीएस (Preventive Detention) प्रस्ताव तैयार करने पर 50,000 रुपये     यह नीति 1 सितंबर 2024 से प्रभावी (रेट्रोस्पेक्टिव) होगी