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पदक से चूकीं पारुल चौधरी, 4:09.46 का नया पर्सनल बेस्ट; अब दो फाइनल पर नजर

मेरठ  एशियन गेम्स 2026 में स्टार एथलीट ओलिंपियन पारुल चौधरी ने महिलाओं की 1500 मीटर दौड़ में चौथा स्थान हासिल किया। पारुल ने 4 मिनट 09.46 सेकेंड का समय निकालकर अपना नया व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। हालांकि वह पदक से चूक गईं, लेकिन व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ उनका प्रदर्शन आगामी स्पर्धाओं के लिए मजबूत संकेत माना जा रहा है। 1500 मीटर फाइनल में मुकाबला शुरू से ही तेज रहा। पारुल ने रेस के दौरान अग्रणी धाविकाओं के साथ बने रहने की कोशिश की, लेकिन अंतिम लैप में पदक की दौड़ में मामूली अंतर से पीछे रह गईं। बहरीन की नेली कोरिर ने 4:04.50 के गेम्स रिकार्ड समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। चीन की ली चुनहुई 4:05.50 के साथ दूसरे और जापान की नोजोमी तनाका 4:06.14 के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। भारत की दूसरी धाविका पूजा 4:16.78 के समय के साथ छठे स्थान पर रहीं। पारुल के लिए इस दौड़ की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय रहा। 1500 मीटर में 4:09.46 का समय दर्ज कर उन्होंने अपनी गति और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को साबित किया। एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना उनके लिए खास उपलब्धि है। पारुल का एशियन गेम्स अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। उनके सामने अगले दो दिनों में दो बड़ी चुनौतियां हैं। 27 सितंबर को महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल में वह उतरेंगी। इसके बाद 28 सितंबर को 5000 मीटर फाइनल में उनका मुकाबला होगा, जहां वह अपने पिछले एशियन गेम्स स्वर्ण पदक का बचाव करने उतरेंगी। पारुल का कार्यक्रम इस बार खासा कठिन है। 1500 मीटर के बाद लगातार दो दिनों में 3000 मीटर स्टीपलचेज और 5000 मीटर जैसी लंबी दूरी की स्पर्धाएं उनके सामने हैं। ऐसे में अब उनकी चुनौती केवल गति की नहीं, बल्कि रिकवरी, स्टैमिना और रेस रणनीति की भी होगी। 1500 मीटर में पदक से चूकने के बाद पारुल के पास अगले दो फाइनल में वापसी का अवसर है। खासकर 5000 मीटर में वह अपने एशियन गेम्स खिताब का बचाव करेंगी। खेल प्रेमियों की निगाहें अब 27 और 28 सितंबर की इन दोनों स्पर्धाओं पर टिकी हैं।

मेरठ की धाविका पारुल चौधरी का बड़ा लक्ष्य, ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में चमकने की तैयारी

 नई दिल्ली  भारत की लंबी दूरी की धाविका पारुल चौधरी अब केवल एशियाई स्तर की खिलाड़ी नहीं रह गई हैं। पिछले एक साल में उन्होंने डायमंड लीग जैसी विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं में नियमित भाग लेकर खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया है। पारुल का मानना है कि दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है और इससे उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है। मेरठ की 31 वर्षीय एथलीट 2022 एशियाई खेलों में 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण और 3000 मीटर स्टीपलचेज (बाधा दौड़) में रजत पदक जीत चुकी हैं। वहीं पिछले साल गुमी में हुई एशियाई चैंपियनशिप में पारुल ने दोनों स्पर्धाओं में रजत पदक जीता था। पारुल ने बताया अपना लक्ष्य पारुल का लक्ष्य अब इस साल जुलाई में होने वाले ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पदक जीतना है। पारुल ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में कहा कि पहले भारतीय एथलीटों को विदेशों में खेलने के ज्यादा अवसर नहीं मिलते थे, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह 2016 से राष्ट्रीय कैंप का हिस्सा थीं, लेकिन उन्हें पहली बार 2022 में विदेश में प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिला। अब युवा खिलाड़ियों को लगातार अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर मिल रहा है, जिसका फायदा भारतीय एथलेटिक्स को मिल रहा है। भारतीय ट्रैक एंड फील्ड में अब तक स्पिरंट और फील्ड इवेंट के खिलाड़ियों को ज्यादा पहचान मिली है, लेकिन पारुल ने लंबी दूरी की दौड़ में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार खेलने से खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन को समझने और सुधारने का मौका मिलता है। पदक जीतना सबसे बड़ा लक्ष्य लंबी दूरी की दौड़ के अंतिम चरण को सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। पारुल के अनुसार अंतिम एक किलोमीटर में खुद को मजबूत बनाए रखना बेहद अहम होता है और इसके लिए कोच विशेष ट्रेनिंग और रणनीति तैयार करते हैं। पारुल ने बताया कि बेंगलुरु में ट्रेनिंग के दौरान खिलाड़ियों को स्पो‌र्ट्स साइंस, रिकवरी मॉनिटरिंग और फिटनेस से जुड़ी सभी आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे प्रदर्शन में लगातार सुधार हो रहा है। हाल ही में राष्ट्रमंडल खेलों की क्वालीफाइंग टाइमिंग की बराबरी करने वाली पारुल ने कहा कि अगर उन्हें क्वालिफाई करने का मौका मिलता है तो उनका लक्ष्य वहां भारत के लिए शानदार प्रदर्शन करना होगा। फिलहाल उनका पूरा फोकस निरंतर सुधार और बड़े मंच पर देश के लिए पदक जीतने पर है।