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गांधी मैदान में हुआ भव्य समारोह: होमगार्ड जवानों को आधुनिक प्रशिक्षण और नई जिम्मेदारियों की जानकारी

 पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बदलते समय के साथ कानून-व्यवस्था की चुनौतियां भी बदल गई हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों को पारंपरिक जिम्मेदारियों के साथ आधुनिक तकनीकों में भी दक्ष होना होगा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए अनुशासन और कौशल को अब मैदान में उतारने का समय आ गया है। जनता की सुरक्षा और सहायता ही हमारा पहला धर्म है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अपराधी चुनौती देते हैं तो कभी-कभी उन्हें जवाब देना भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने भरोसा जताया कि बिहार अब तेजी से बदल रहा है और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। पांच हजार होमगार्ड जवानों को दी बधाई मुख्यमंत्री गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में आयोजित बिहार गृह रक्षा वाहिनी के 5,000 नवनामांकित जवानों के पारण परेड समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी जवानों को बधाई देते हुए कहा कि यहां तक पहुंचना उनके परिश्रम और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी जवान अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करेंगे। मुख्यमंत्री ने परेड की सलामी ली और जवानों द्वारा प्रदर्शित अनुशासन तथा प्रशिक्षण कौशल की सराहना की। समारोह में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, गृह विभाग और बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। होमगार्ड कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार होमगार्ड जवानों के कल्याण और सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार काम कर रही है। जवानों के लिए आधुनिक बैरकों का निर्माण, बेहतर आवासीय सुविधाएं और कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि जवान बिना किसी चिंता के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। बिहार पुलिस की सहयोगी शक्ति मानी जाने वाली गृह रक्षा वाहिनी को अब 5,000 नए प्रशिक्षित जवानों का बल मिला है। इससे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। महिला जवानों ने भी दिखाया दमखम पारण परेड की विशेषता यह रही कि बड़ी संख्या में महिला गृह रक्षक जवानों ने भी इसमें हिस्सा लिया। उन्होंने अपने अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रशिक्षण क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। समारोह के अंत में सभी 5,000 जवानों ने देश और राज्य की सेवा के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ शपथ ली। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने जवानों का उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अत्याधुनिक प्रशिक्षण से लैस हैं नए जवान नवनामांकित जवानों को केवल सामान्य सुरक्षा प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया है, बल्कि उन्हें आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भी तैयार किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान वीआईपी सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, राहत एवं बचाव कार्य, अत्याधुनिक हथियारों के संचालन, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण विधाओं का व्यापक प्रशिक्षण दिया गया। इससे वे विभिन्न परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगे। 45 डिग्री तापमान में भी दिखा अनुशासन और शौर्य भीषण गर्मी और लगभग 45 डिग्री तापमान के बावजूद गांधी मैदान में जवानों का उत्साह और जोश देखने लायक था। मुख्य मंच के सामने से गुजरते मार्चिंग दस्ते और बिहार गृह रक्षा वाहिनी के विशेष घुड़सवार दस्ते ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। जवानों की शानदार प्रस्तुति पर पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। बड़ी संख्या में जवानों के परिजन भी कार्यक्रम में मौजूद थे, जिन्होंने अपने प्रियजनों की उपलब्धि और प्रशिक्षण प्रदर्शन को गर्व के साथ देखा। जवानों के अनुशासन, समर्पण और शौर्य ने समारोह को यादगार बना दिया।

डीजीपी कैलाश मकवाणा के मुख्य आतिथ्य में पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय इंदौर में 78वें नव आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण सत्र का दीक्षांत समारोह सम्पन्न

भोपाल देशभक्ति, अनुशासन और जनसेवा के मूल्यों से ओतप्रोत 78वें नव आरक्षकों ने मंगलवार को पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर में कठिन प्रशिक्षण के उपरांत भव्य दीक्षांत परेड के माध्यम से अपनी दक्षता, अनुशासन और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश पुलिस के महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने बतौर मुख्य अतिथि परेड की सलामी ली तथा खुली जिप्सी में सवार होकर परेड का निरीक्षण किया। लगभग एक वर्ष के कठिन, अनुशासित एवं बहुआयामी प्रशिक्षण के उपरांत 983 नव आरक्षक विधिवत रूप से मध्यप्रदेश पुलिस की मुख्यधारा में शामिल हुए, जिनमें 787 महिला एवं 196 पुरुष नव आरक्षक सम्मिलित हैं। दीक्षांत समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण)  रवि कुमार गुप्ता, पुलिस आयुक्त इंदौर  संतोष कुमार सिंह, पुलिस महानिरीक्षक इंदौर ग्रामीण जोन  अनुराग, पुलिस महानिरीक्षक विसबल इंदौर  चंद्रशेखर सोलंकी, पुलिस महानिरीक्षक आरएपीटीसी इंदौर  धर्मेंद्र सिंह भदौरिया, उप पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) पुलिस मुख्यालय  मनीष कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक इंदौर ग्रामीण  राजेन्द्र कुमार वर्मा, सेनानी प्रथम वाहिनी  अभिषेक आनंद, सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  अनिल कुमार,  दिनेश चंद्र सागर सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षुओं के अभिभावक एवं पुलिस परिवारजन उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि आज का दिन सभी नव आरक्षकों के जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण, गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने परेड के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह दीक्षांत परेड प्रदेश के प्रशिक्षण संस्थानों में आयोजित होने वाले सबसे बड़े एवं प्रभावशाली पासिंग आउट समारोहों में से एक है। उन्होंने प्रशिक्षण संस्थान की उपलब्धियों, उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था तथा देश के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण संस्थानों में शामिल होने पर संस्थान के अधिकारियों एवं प्रशिक्षण स्टाफ को बधाई दी। डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी शक्ति उसके हथियार, अधिकार अथवा कानून नहीं, बल्कि जनता का विश्वास है। जब कोई पीड़ित व्यक्ति पुलिस के पास आता है तो वह केवल कानूनी सहायता नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदनशीलता और न्याय की अपेक्षा लेकर आता है। यह विश्वास किसी नियम पुस्तिका से नहीं मिलता, बल्कि पुलिसकर्मी के व्यवहार, कार्यशैली और मानवीय दृष्टिकोण से अर्जित होता है। उन्होंने कहा कि आज अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक अपराधी डिजिटल माध्यमों, मोबाइल, लैपटॉप, सोशल मीडिया और तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डाटा एनालिटिक्स, डिजिटल फॉरेंसिक एवं स्मार्ट पुलिसिंग के इस युग में पुलिसकर्मी को केवल शारीरिक रूप से सक्षम होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष, मानसिक रूप से संतुलित, निर्णयक्षम और नैतिक रूप से दृढ़ होना भी आवश्यक है। प्रशिक्षण भले ही आज पूर्ण हो रहा हो, लेकिन सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने नव आरक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्दी शक्ति का नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व का प्रतीक है। वर्दी अधिकार अवश्य देती है, लेकिन उससे कहीं अधिक जिम्मेदारी भी देती है। समाज पुलिसकर्मी को उसकी वर्दी से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और चरित्र से पहचानता है। वर्दी की वास्तविक प्रतिष्ठा उसके अधिकार में नहीं, बल्कि उसे पहनने वाले व्यक्ति के आचरण और संवेदनशीलता में निहित होती है। डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस का लक्ष्य केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक आधारित, जनसहभागी, पारदर्शी, जवाबदेह और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार पुलिस व्यवस्था का निर्माण करना है। हमारा उद्देश्य मध्यप्रदेश पुलिस को देश की सबसे आधुनिक, संवेदनशील और विश्वसनीय पुलिस संस्थाओं में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश पुलिस ने वर्ष 2025 में नक्सलवाद जैसी गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती को समाप्त कर मध्यप्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। इसके लिए उन्होंने प्रदेश पुलिस एवं सभी सुरक्षा बलों को बधाई दी। डीजीपी ने साइबर अपराध और नशे को समाज एवं युवा पीढ़ी के सामने उभरती दो सबसे बड़ी चुनौतियां बताते हुए कहा कि ये ऐसे शत्रु हैं जो दिखाई कम देते हैं लेकिन समाज को भीतर से खोखला कर सकते हैं। उन्होंने वर्ष 2025 में चलाए गए ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता का व्यापक आंदोलन था। उन्होंने नव आरक्षकों से इस अभियान को आगे बढ़ाने और समाज को सुरक्षित एवं नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने आगामी सिंहस्थ-2028 को मध्यप्रदेश पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व के सबसे बड़े मानव समागमों में से एक है। सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और तकनीकी समन्वय में पुलिस की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज प्रशिक्षण पूर्ण कर रहे अनेक नव आरक्षक उस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।  मकवाणा ने कहा कि ईमानदारी, संवेदनशीलता, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति एवं उत्कृष्ट चरित्र ही एक सफल पुलिसकर्मी की पहचान है। उन्होंने सभी नव आरक्षकों से प्रशिक्षण के दौरान ली गई शपथ को जीवनभर स्मरण रखने और मध्यप्रदेश पुलिस के मूल मंत्र ‘देशभक्ति-जनसेवा’ को अपने आचरण से चरितार्थ करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रशिक्षुओं के अभिभावकों को विशेष बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिवार के सदस्य को केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा के लिए तैयार किया है। उनके संस्कार, त्याग और विश्वास का ही परिणाम है कि आज उनके बेटे-बेटियां इस गौरवपूर्ण अवसर का हिस्सा बने हैं। उत्कृष्ट प्रशिक्षण और नवाचारों का राष्ट्रीय स्तर पर गौरव पुलिस अधीक्षक पीटीसी इंदौर मती वाहनी सिंह ने अपने प्रतिवेदन में बताया कि पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर देश के प्रतिष्ठित आरक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। बीपीआरएंडडी, नई दिल्ली द्वारा इसे दो बार देश के सर्वश्रेष्ठ आरक्षक प्रशिक्षण संस्थान के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। संस्थान में अब तक 77 बुनियादी प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से 27 हजार से अधिक आरक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर पुलिस सेवा में योगदान दे चुके हैं। आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों, साइबर जागरूकता, हार्टफुलनेस, वात्सल्य छात्रावास, किलकारी झूलाघर, पर्यावरण संरक्षण एवं अन्य नवाचारों के माध्यम से संस्थान पुलिस प्रशिक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल स्थापित कर रहा है। सांस्कृतिक संध्या में झलकी भारतीय संस्कृति, प्रतिभा और रचनात्मकता दीक्षांत समारोह के पूर्व 08 जून को पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर में 78वें नव आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण सत्र के समापन अवसर पर सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन किया गया। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के मुख्य आतिथ्य एवं विशेष पुलिस … Read more