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31 मार्च डेडलाइन! ये जरूरी प्रक्रिया न की तो बंद हो सकती है आपकी पेंशन

पटना बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का लाभ ले रहे लाखों लाभार्थियों के लिए प्रशासन ने सख्त चेतावनी जारी की है। सभी पेंशनधारियों को आगामी 31 मार्च 2026 तक अपना 'जीवन प्रमाणन' कराना अनिवार्य कर दिया गया है। निर्धारित समय सीमा के भीतर यह प्रक्रिया पूरी न करने वाले लाभार्थियों की पेंशन तत्काल प्रभाव से रोक दी जाएगी। बांका में 72 हजार से अधिक आवेदन लंबित प्रशासन का यह कदम सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने और मृत व्यक्तियों के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए उठाया गया है। बांका जिला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 2,52,911 पेंशनधारी पंजीकृत हैं। सेवा केंद्रों के माध्यम से 22 दिसंबर 2025 से निःशुल्क प्रमाणीकरण की प्रक्रिया चल रही है। अब तक 1,80,821 लाभार्थियों का सत्यापन पूरा हो चुका है, लेकिन अभी भी 72,390 पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण लंबित है। इसके अलावा, 2,638 ऐसे मामले हैं जहां आधार मैपिंग की समस्या आ रही है। इन 6 प्रमुख योजनाओं पर लागू होगा नियम जीवन प्रमाणन की यह प्रक्रिया निम्नलिखित योजनाओं के लाभार्थियों के लिए अनिवार्य है:     मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना     इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना     विधवा पेंशन योजना     निःशक्तता (दिव्यांग) पेंशन योजना     लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना     अन्य राजकीय सामाजिक सुरक्षा योजनाएं गलत जानकारी पर होगी कड़ी कार्रवाई जिलाधिकारी (DM) नवदीप शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी जीवित व्यक्ति को गलत तरीके से मृत घोषित कर उसकी पेंशन बंद की जाती है, तो इसकी उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी। वहीं, मृत पेंशनधारियों के मामले में परिजनों से लिखित पुष्टि अनिवार्य की गई है। पुष्टि न होने की स्थिति में पेंशन अस्थायी रूप से बंद कर इसकी सूचना पंचायत भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर चस्पा की जाएगी।

1 अप्रैल से MP में पेंशन भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव, जिला पेंशन कार्यालय बंद, SBI को मिलेगा पूरा जिम्मा, जानें प्रक्रिया

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार राज्य के लगभग साढ़े चार लाख पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए पेंशन भुगतान की व्यवस्था में बदलाव करने वाली है। नई व्यवस्था के तहत, अब किसी भी बैंक में खाता रखने वाले सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद सीधे अपने उसी खाते में पेंशन आएगी।  राज्य शासन ने इस प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के मकसद से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एकमात्र 'एग्रीगेटर बैंक' के रूप में नियुक्त किया है। यह महत्वपूर्ण बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी होगा। बता दें कि एमपी में पेंशन की मौजूदा व्यवस्था में कई समस्याएं हैं इसकी वजह से पेंशन भुगतान की प्रक्रिया में अक्सर देरी होती है। साथ ही तकनीकी बाधाओं की वजह से भी पेंशन मिलने में दिक्कत होती है। सरकार ने जिला पेंशन कार्यालयों को भी बंद करने का फैसला किया है। मौजूदा व्यवस्था की 4 प्रमुख समस्याएं मौजूदा पेंशन प्रणाली कई जटिलताएं और चुनौतियां हैं। इसकी वजह से पेंशनर्स को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रमुख रूप से 4 समस्याएं हैं…     बैंक बदलने की मजबूरी: कई मामलों में, पेंशनभोगियों को पेंशन लेने के लिए उन्हीं बैंकों में अकाउंट बनाए रखना पड़ता था, जहां उनका सैलरी अकाउंट था।     तकनीकी असमानता: महंगाई भत्ते (DA) में वृद्धि या वेतनमान में संशोधन जैसी स्थितियों में पेंशन राशि को अपडेट करने की प्रक्रिया जटिल है। यह कार्य सेंट्रलाइज्ड पेंशन प्रोसेसिंग सेल (CPPC) के माध्यम से किया जाता है, और यह सुविधा केवल 4 प्रमुख बैंकों में ही उपलब्ध है। जिन बैंकों में यह सिस्टम नहीं है, वहां पेंशन अपडेट होने में काफी समय लगता है, जिससे पेंशनर्स को एरियर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।     PPO हस्तांतरण में देरी: सेवानिवृत्ति से पहले कर्मचारी का पेंशन अदायगी आदेश (PPO) संबंधित बैंक को भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और समन्वय की कमी के कारण अक्सर सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद पेंशन शुरू होने में देरी होती है।     वेतनमान फिक्सेशन की त्रुटियां: कर्मचारियों के वेतनमान फिक्सेशन (Pay Fixation) में फिट-मेंट फैक्टर, मूल वेतन या महंगाई भत्ते की गणना में हुई मामूली गलती भी पेंशन प्रक्रिया को रोक देती है, जिसे सुधारने में महीनों लग जाते है। पेंशनर्स का आरोप- कर्मचारी रिश्वत लेते हैं पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेशदत्त जोशी इन समस्याओं के अलावा एक और मुद्दे पर ध्यान दिलाते हैं। उनके मुताबिक अभी पेंशन प्रकरणों का काम जिला और संभागीय पेंशन दफ्तरों के पास है। जैसे ही कोई कर्मचारी रिटायर होता है और उसका प्रकरण जब पेंशन कार्यालय में जाता है तो वहां मौजूद कर्मचारी एक ही प्रकार की कई आपत्तियां लगाते हैं। इन आपत्तियों को वो बार बार लगाकर कर्मचारी के संबंधित कार्यालय को भेजते हैं। जोशी के मुताबिक वो ऐसा इसलिए करते हैं ताकि रिटायर्ड कर्मचारी उनकी सेवा करें( रिश्वत) और इसके बदले वो उनका पीपीओ जारी करें। मौजूदा व्यवस्था में क्या बदलाव होगा     पूरी प्रोसेस को सेंट्रलाइज्ड किया जा रहा है। राज्य सरकार पेंशन की पूरी राशि केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को हस्तांतरित करेगी, जिसमें राज्य सरकार का मुख्य खाता है।     SBI एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करते हुए, प्रदेश के सभी पेंशनभोगियों के बैंक खातों में पेंशन की राशि वितरित करेगा, चाहे उनका खाता किसी भी बैंक में क्यों न हो।     अब तक जो क्लेम और कमीशन 11 अलग-अलग बैंकों को मिलता था, वह अब केवल SBI को मिलेगा, क्योंकि पेंशन वितरण का पूरा प्रबंधन और क्लेम भेजने की जिम्मेदारी सिर्फ SBI की होगी। प्रशासनिक स्तर पर बदलाव: बंद होंगे जिला पेंशन कार्यालय इस सुधार प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सभी जिलों में स्थित पेंशन कार्यालयों को बंद किया जाएगा। हालांकि, संभागीय मुख्यालयों में स्थित कार्यालय पहले की तरह काम करते रहेंगे। पेंशन निर्धारण की पूरी प्रक्रिया अब भोपाल स्थित मुख्यालय से केंद्रीकृत रूप से संचालित होगी। इस प्रणाली की सबसे खास बात इसकी पारदर्शिता और सीक्रेसी है। अब किसी भी कर्मचारी को यह पता नहीं चलेगा कि उसकी पेंशन का निर्धारण कौन-सा अधिकारी कर रहा है। उदाहरण के लिए, भिंड में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी की पेंशन फाइल का निर्धारण जबलपुर में बैठा कोई भी डिप्टी डायरेक्टर कर सकता है। सरकार का मानना है कि इस कदम से स्थानीय स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार और अनावश्यक दबाव पर पूरी तरह से रोक लगेगी। SBI ने शुरू की तैयारी, 2 लाख PPO होंगे ट्रांसफर इस नई व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए SBI ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में लगभग 4 लाख 46 हजार पेंशनर्स हैं, और इस साल 22 हजार और कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। SBI ने अन्य 10 बैंकों से 2 लाख से अधिक PPO वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बड़े पैमाने के कार्य को पूरा होने में 3 से 4 महीने लगने का अनुमान है।

हरियाणा में 73 हजार बुजुर्गों की पैंशन बहाल

चंडीगढ़. हरियाणा में करीब 73 हजार बुजुर्गों की पैंशन बहाल कर दी गई। इनैलो की ओर से इस मुद्दे को लेकर 20 फरवरी को पंचकूला में राज्यव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। खास बात यह है कि 20 फरवरी से ही प्रदेश का बजट सत्र शुरू होना है। इसके अलावा दूसरे विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा था। गौरतलब है कि हरियाणा में पैंशन सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। साल 1987 में जब चौ. देवीलाल मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने जून 1987 से प्रदेश में बुजुर्गों के लिए पैंशन योजना शुरू की थी। तब प्रदेश के 8 लाख 27 हजार बुजुर्गों को 100 रुपए मासिक पैंशन दिए जाने की योजना शुरू की गई। इसके बाद विधवा, दिव्यांगों, किन्नरों, बौनों एवं आश्रित बच्चों की भी पैंशन दी जाने लगी। वर्तमान में प्रदेश में 19 लाख 83 हजार वृद्धों को, 8 लाख 64 हजार विधवाओं, 1 लाख 98 हजार दिव्यांगों एवं 1 लाख 66 हजार आश्रित बच्चों को पैंशन दी जा रही है। हाल में कई मापदंडों का हवाला देकर सरकार की ओर से 73 हजार बुजुर्गों की पैंशन रोक दी गई थी। अब उनकी यह पैंशन बहाल कर दी गई है। विशेष बात यह है कि अभी 3 दिन पहले ही इनैलो सुप्रीमो चौ. अभय सिंह चौटाला ने दावा किया था कि पैंशन काटने के विरोध में 20 फरवरी को पंचकूला में जोरदार आंदोलन किया जाएगा। अपने इस आंदोलन की रणनीति के तहत इनैलो पदाधिकारियों व कार्यकत्र्ताओं ने उन बुजुर्गों से संपर्क एवं संवाद का सिलसिला भी शुरू कर दिया था, जिनकी पैंशन काटी गई थी। इसके अलावा प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में पैंशन काटने के विरोध में बुजुर्गों ने प्रदर्शन भी किए। ऐसे में मामला तूल पकड़ते देख सरकार ने प्रदेश के सामाजिक अधिकारिता विभाग से समन्वय किया और एक कमेटी का गठन किया गया। अब कमेटी की अनुशंसा के आधार पर जिन बुजुर्गों की पैंशन काटी गई थी, उसे बहाल कर दिया गया है। इसके साथ ही अब बुजुर्गों की पैंशन में 200 रुपए की वृद्धि की अधिसूचना भी जारी कर दी है। पिछले साल 1 नवंबर को हरियाणा दिवस पर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पैंशन में 200 रुपए की वृद्धि की घोषणा की थी। ऐसे में अब बुुजुर्गों व विधवाओं को प्रति माह 3200 रुपए मासिक पैंशन दी जाएगी। पैंशन बहाली के इस मुद्दे को इनैलो कार्यकत्र्ता अपनी जीत बता रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष रहते हुए भी किया था आंदोलन गौरतलब है कि इससे पहले भी समय-समय पर इनैलो ने विपक्ष की भूमिका निभाते हुए जनहित के मुद्दों को उठाया है। साल 2014 से लेकर 2019 तक इनैलो प्रदेश का मुख्य विपक्षी दल रही थी और उस दौरान चौ. अभय सिंह चौटाला नेता प्रतिपक्ष थे। तब अभय सिंह चौटाला ने सतलुज यमुना लिक नहर को लेकर एक बड़ा आंदोलन चलाया और जेल भी गए। नवंबर 2020 में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हरियाणा सहित पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश के किसानों ने दिल्ली में आंदोलन चलाया। तब अभय सिंह चौटाला ने जनवरी 2021 में ऐलनाबाद विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में वे उपचुनाव जीतकर फिर से विधायक बने थे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व विधायक रहते हुए अभय सिंह चौटाला ने रजिस्ट्री घोटाला, शराब घोटाला, बीज घोटाला, धान घोटाला, बेरोजगारी, खेती, बढ़ते नशे व अपराध जैसे मुद्दों को लेकर लगातार सरकार को घेरा था और अब इनैलो के डबवाली से विधायक आदित्य देवीलाल तथा रानियां से विधायक अर्जुन चौटाला भी विधानसभा में लगातार प्रदेश के अलग-अलग वर्गों के मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहे हैं। हालांकि  अभय सिंह चौटाला वर्तमान में विधायक नहीं हैं, फिर भी वे जनहित मुद्दों को लेकर लगातार गंभीरता से उठा रहे हैं।

थैलीसीमिया पीड़ितों के लिए बड़ा ऐलान, मुफ्त ट्रांसप्लांट और पेंशन योजना जारी

 जयपुर  राजस्थान में थैलीसीमिया पीड़ितों को निःशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट के साथ 1250 रुपए मासिक पेंशन मिल रही है। विधायक रूपिन्द्र सिंह कुन्नर द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने चिकित्सा सहायता से लेकर आर्थिक सुरक्षा तक के प्रावधानों को लेकर जवाब पेश किया है। निःशुल्क चिकित्सा और डे-केयर की सुविधा सरकार ने अवगत कराया कि प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में थैलीसीमिया मरीजों के लिए विशेष 'डे-केयर सेंटर' संचालित हैं । इन केंद्रों पर मरीजों को बिना किसी रिप्लेसमेंट के ब्लड ट्रांसफ्यूजन, आयरन केलेशन थेरेपी और सभी प्रकार की जाँचे पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं । इसके अतिरिक्त, गंभीर मरीजों के लिए वार्ड में भर्ती होने और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी महंगी चिकित्सा सुविधा भी सरकार द्वारा मुफ्त दी जा रही है । आर्थिक संबल : 1250 रुपए की मासिक पेंशन सामाजिक सुरक्षा के तहत, राज्य सरकार थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को 'मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना' का लाभ दे रही है । इस श्रेणी के बच्चों को वर्तमान में 1250 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन दर से सहायता दी जा रही है । सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि थैलीसीमिया को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत 21 दिव्यांगता श्रेणियों में शामिल किया गया है, जिसके आधार पर इन बच्चों के यूडीआईडी (UDID) कार्ड और दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं । आधार और बायोमेट्रिक नियमों पर स्पष्टीकरण सदन में आधार कार्ड की अनिवार्यता और बायोमेट्रिक सत्यापन को लेकर उठ रहे सवालों पर विभाग ने स्थिति स्पष्ट की। 5 वर्ष से कम आयु: जन्म से 5 वर्ष तक के बच्चों का उपचार माता-पिता के आधार कार्ड के आधार पर ही सुनिश्चित किया जाता है । छोटे बच्चों का आधार नामांकन 'हेड ऑफ फैमिली' (HoF) के सत्यापन से किया जाता है । बायोमेट्रिक की बाध्यता नहीं : सरकार ने विशेष आदेश जारी कर यह सुविधा दी है कि जिन बच्चों के बायोमेट्रिक (हाथों के निशान) अपडेट नहीं हो पा रहे हैं, उनकी पेंशन नहीं रोकी जाएगी । ओटीपी आधारित सत्यापन : ऐसे मामलों में जहाँ फिंगरप्रिंट या फेस रिकॉग्निशन संभव नहीं है, वहाँ संबंधित पेंशन स्वीकृतिकर्ता अधिकारी पंजीकृत मोबाइल पर ओटीपी (OTP) के माध्यम से आवेदन स्वीकार कर स्वतः स्वीकृति जारी कर सकते हैं । यह वैकल्पिक प्रक्रिया उन विशेष मामलों के लिए 'अपवाद स्वरूप' लागू की गई है, ताकि तकनीकी कारणों से कोई भी पात्र बच्चा सहायता से वंचित न रहे ।

हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान: 56 लाख लोगों के खाते में पेंशन, हर महीने एक तय तारीख को मिलेगी राशि

पंचकूला  हरियाणा में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत प्रोत्साहन राशि, सब्सिडी और किसी भी तरह की पेंशन प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को भविष्य में कोई परेशानी नहीं होने वाली है।प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की समस्त राशि को अब हर माह एक ही तारीख को लाभार्थियों के खातों में डाला जाएगा। महीने की यह तारीख कौन सी होगी, इस बारे में अभी निर्णय लिया जाना बाकी है। प्रदेश सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लोगों को अपनी पेंशन, प्रोत्साहन भत्ते और सब्सिडी हासिल करने के लिए कई-कई माह तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 56 लाख 34 हजार लाभार्थियो के खातों में पहुंचे 1431 करोड़ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को 18 जन कल्याणकारी योजनाओं के तहत 56 लाख 34 हजार लाभार्थियों के खातों में 1431 करोड़ रुपये की राशि स्थानांतरित की। प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी, पशुपालन मंत्री श्याम सिंह राणा और सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा भी इस मौके के गवाह बने। मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय लाडो लक्ष्मी योजना की चौथी किस्त के तहत 9 लाख 22 हजार 452 महिलाओं के खातों में 193 करोड़ रुपये की राशि डाली। अभी तक चारों किस्तों में यह राशि 634 करोड़ रुपये हो चुकी है। राज्य सरकार द्वारा एक लाख रुपये से कम आय वाली महिलाओं को 2100 रुपये मासिक देने की योजना आरंभ की गई है। इस योजना के अंतर्गत फरवरी माह से 1100 रुपये की राशि खातों में भेजी जाती है और 1000 रुपये की राशि की एफडी कराई जाती है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुढ़ापा, विधवा और दिव्यांग समेत प्रत्येक तरह की सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अंतर्गत 34.14 लाख लाभार्थियों के खातों में 1098 करोड़ रुपये की राशि जारी की। लाडो लक्ष्मी योजना और पेंशन योजना के अंतर्गत 43 लाख 36 हजार 452 लोगों को 1240 करोड़ रुपये की लाभ राशि प्रदान की गई है। हर घर हर गृहिणी गैस सिलेंडर रिफिल योजना के अंतर्गत 12 लाख 62 हजार महिलाओं के खातों में नवंबर व दिसंबर माह के लिए 38 करोड़ 97 लाख रुपये की सब्सिडी राशि भेजी गई है। इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को 500 रुपये में गैस सिलेंडर मिलता है। पात्रता से जुड़ी शिकायतें आई हैं मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 36 हजार लाभार्थियों के खातों में 101 करोड़ रुपये की सब्सिडी राशि प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि राज्य भर में पेंशन से संबंधित समस्याएं व आय आधारित पात्रता से जुड़ी शिकायतें उनके संज्ञान में आई हैं। इन शिकायतों व अपीलों के समाधान तथा पात्रता के निष्पक्ष निपटान के लिए सभी जिलों के अतिरिक्त उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं। इसके अंतर्गत सभी एडीसी सप्ताह में सोमवार व बृहस्पतिवार को समाधान शिविर लगाकर समस्या का समाधान सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने दोहराया कि किसी भी पात्र व्यक्ति की पेंशन नहीं कटने दी जाएगी। कार्यक्रम का संचालन सीएम के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रेय ने किया। दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा बढ़ाया गया मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के अंतर्गत अब एक लाख 80 हजार रुपये वार्षिक आय वाले परिवारों की महिलाएं भी 2100 रुपये प्राप्त करने की पात्रता में शामिल हो गई हैं। इनमें ऐसी महिलाएं शामिल हैं, जिनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं और जिन्होंने कक्षा 10 या 12 की बोर्ड परीक्षाओं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। कक्षा एक से चार में ‘निपुण भारत मिशन’ के अंतर्गत कक्षा स्तर की दक्षता हासिल करने वाले बच्चों की माताओं और बच्चों को कुपोषण से सफलतापूर्वक पुनर्वासित करने वाली महिलाओं को भी यह राशि मिलेगी। विपक्षी दलों के आंदोलन से पहले भाजपा ने छीना मुद्दा हरियाणा में विपक्षी राजनीतिक दलों ने पेंशन कटने को बड़ा मुद्दा बनाया हुआ है। इनेलो की ओर से 20 फरवरी को पंचकूला में प्रदर्शन किया जाएगा। कांग्रेस और जननायक जनता पार्टी के साथ आम आदमी पार्टी भी लगातार बुजुर्गों की पेंशन काटे जाने, परिवार पहचान पत्रों में आय की जांच के नाम पर लोगों को परेशान करने के आरोप लगा रहे हैं। इससे पहले कि राज्य में विपक्षी दल कोई बड़ा आंदोलन खड़ा कर पाएं अथवा विधानसभा के बजट सत्र में इस मुद्दे को उठाएं, भाजपा सरकार ने करीब 56 लाख लोगों के खातों में लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपये की राशि डालकर इस मुद्दे की हवा निकाल दी है।  

बेटी को मिलेगा माता-पिता की पेंशन में अधिकार, नए नियम जल्द होंगे लागू

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब बेटी को माता-पिता पेंशन की पेंशन में अधिकार मिलेगा। ये नियम प्रदेशभर में 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएंगे। राज्य सरकार पेंशन नियमों में पहली बार बड़े संशोधन करने जा रही है। प्रस्ताव तैयार किए जाने के बाद कैबिनेट में आने का इंतजार है। दरअसल, प्रस्तावित नियमों गौर करें तो भले ही घर में बेटा हो, लेकिन अगर बेटी उससे बड़ी है तो वही परिवार पेंशन की पात्र होगी। अविवाहित पुत्री/विधवा और तलाकशुदा पुत्री को आजीवन पेंशन मिलती रहेगी। आजीविका कमाने में पूरी तरह से अक्षम दिव्यांग पुत्र/पुत्री/भाई को भी पेंशन की पात्रता होगी। ये नए पेंशन नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे। नए नियमों में दिव्यांगजनों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। जो पुत्र, पुत्री या भाई आजीविका कमाने में पूरी तरह से अक्षम हैं, उन्हें भी परिवार पेंशन की पात्रता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आश्रित को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर मिलती है। ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) में यह अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत होती है, जबकि एनपीएस में एन्युटी के आधार पर पेंशन तय होती है। वहीं यूपीएस में निश्चित पेंशन का प्रावधान है। कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार पेंशन पहले पत्नी को और पति-पत्नी दोनों के निधन के बाद अवयस्क बच्चों को मिलती है। नए पेंशन नियम लागू होने के बाद बेटियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और उन्हें परिवार में बराबरी का अधिकार मिलेगा। सरकार का यह फैसला महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। 1 अप्रैल से होंगे लागू  इसके अलावा अविवाहित बेटी, विधवा या फिर तलाकशुदा बेटी को भी आजीवन पेंशन मिलने की योजना रहेगी. वहीं अपना जीवन यापन न कर पाने वाले अक्षम दिव्यांग बेटे-बेटी या भाई को भी पेंशन की पात्रता दी जाएगी. नए पेंशन नियम 1 अप्रैल से लागू किए जाने की संभावना है. यानि यह योजना नए वित्त वर्ष में लागू होगी, बता दें कि पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर के लिए मिलती है, जबकि ओल्ड पेंशन स्कीम में आखिरी सैलरी का 50 प्रतिशत हिस्सा एनपीएस में एन्युटी के आधार पर और यूपीएस में निश्चित पेंशन की पात्रता है जो कि अंतिम एन्युटी के आधार पर बनती है. जहां अगर कर्मचारी की मौत होती है तो फिर उसकी पेंशन उसकी पत्नी को दी जाती है, जो 30 प्रतिशत होती है. ऐसे में अब यह बदलाव होगा कि अगर पति-पत्नी दोनों की मौत होती है तो इस स्थिति में पेंशन पर उनकी बड़ी संतान का अधिकार होगा, जिसमें अव्यस्क बच्चा भी शामिल होगा.  यह भी होगा बदलाव  वहीं शादी के बाद भी बड़ी बेटी या फिर बड़े बेटे को पेंशन ट्रांसफर की जाएगी. अगर कोई पति पत्नी दोनों पेंशन स्कीम के तहत आते हैं, यानि दोनों की सरकारी नौकरी होगी और उन्हें पेंशन मिलता है तो उनकी मौत के बाद इसका अधिकार दोनों की फैमिली को मिलेगा. वहीं 25 साल से ज्यादा उम्र की बेटी या बेटे को हर साल यह भी बताना होगा कि वह अविवाहित या फिर विधवा है, यानि पूरी जानकारी के बाद ही वह पेंशन के नियमों में पात्रता रखेंगे.  कैबिनेट बैठक में पास होगा प्रस्ताव  बताया जा रहा है कि जल्द ही यह प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में भी पास होगा. सीएम मोहन यादव के विदेश दौरे से लौटने के बाद कैबिनेट की बैठक में पेंशन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव पास होगा, जबकि इसे नए वित्त वर्ष में लागू किया जाएगा. इसके लिए वित्त विभाग की तरफ से काम शुरू हो गया है. जबकि नए बजट में इसका प्रावधान भी कर दिया जाएगा.   अव्यस्क बच्चों को पेंशन की पात्रता बता दें कि, पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर मिलती है, जो ओल्ड पेंशन स्कीम में अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत है। एनपीएस में एन्युटी के आधार पर और यूपीएस में निश्चित पेंशन की पात्रता है। परिवार पेंशन कर्मचारी की मृत्यु के बाद पत्नी को पति और पत्नी दोनों की मृत्यु के बाद अव्यस्क बच्चों को पेंशन की पात्रता होती है।

रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए सिंगल विंडो सुविधा, मध्यप्रदेश में नए पेंशन नियम 2026 से लागू

भोपाल मध्य प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन अब नहीं अटकेगी. वित्त विभाग इसके लिए कई नए प्रयोग करने जा रहा है. रिटायर्ड होने वाले कर्मचारियों के लिए नेक्स्ट जेन परियोजना शुरू की जा री है, इसमें कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए अलग-अलग मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं. इसमें रिटायर्ड होने के बाद कर्मचारियों को पेंशन जैसी अन्य सुविधाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे. वहीं, राज्य सरकार अगले साल से एक पेंशन नियम भी लागू करने जा रही है. वेतन से जीपीएफ तक सब ऑनलाइन उपमुख्यमंत्री और वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे जगदीश देवड़ा पिछले 2 साल की उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजना को लेकर पत्रकारों से रू-ब-रू हुए. वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि "प्रदेश के कर्मचारियों को ध्यान में रखकर कई नवाचार किए हैं, ताकि उन्हें वेतन, पेंशन आदि के लिए परेशान न होना पड़े. राज्य सरकार ने कर्मचारियों के जीपीएफ के सभी डाटा और प्रोसेस को ऑनलाइन कर दिया है, ताकि रिटायरमेंट के बाद समय सीमा में उन्हें भुगतान मिल सके. चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सुविधा के लिए विभागीय भविष्य निधि को भी पूरी तरह से ऑनलाइन किया जा रहा है, ताकि उन्हें अपने स्वत्वों का भुगतान बिना किसी परेशानी के हो सके. इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में भोपाल जिले में लागू किया गया है और जल्द ही इसे प्रदेश स्तर पर लागू किया जाएगा." रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए सिंगल विंडो वित्त मंत्री बताया कि वेतन निर्धारण की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है. इसमें 100 फीसदी ई पे निर्धारित किया गया है. इसकी वजह से 90 फीसदी से ज्यादा कर्मचारियों को हर माह की 1 तारीख को वेतन मिल जाता है. इसके अलावा क्रेन्द्रीयकृत पे-बिल जनरेट किए जाने की व्यवस्था शुरू की गई है. इसके माध्यम से प्रदेश के सभी 6 हजार डीडीओ को सेंट्रलाइज सिस्टम से जोड़ा गया है, कोई भी डीडीओ सभी श्रेणी के कर्मचारियों के पे-बिल जनरेट कर सकेगा. रिटायर्ड कर्मचारियों को सिंगल विंडो सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नेक्स्ट जेन परियोजना के तहत नया सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है. 123 करोड़ की लागत से तैयार हो रही इस परियोजना में कर्मचारियों के लिए अलग-अलग मॉड्यूल बनाए जा रहे हैं. इसमें एआई की मदद भी ली जाएगी. क्यू आर कोड से मिलेगी जानकारी पेंशनर्स के दावों और भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए पेंशन प्रकरणों का डिजीटलीकरण किया जा रहा है. अब पेंशन भुगतान आदेश डिजिटल सिग्नेचर से जारी होंगे और इससे पेंशन आदेश खोने, फटने की समस्या खत्म हो जाएगी. पेंशन आदेश और बाकी सभी दस्तावेजों पर क्यूआर कोड होगा. इसे मोबाइल से स्कैन कर इसकी डिटेल पेंशनर्स कभी भी देख सकेंगे. इसे डिजी लॉकर से भी जोड़ा जाएगा. वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक रस्तोगी ने बताया कि "सरकार अगले साल से नए पेंशन नियम लागू करने जा रही है. अभी सरकारी कर्मचारियों को अपनी मर्जी से फंड मैनेजर का चयन करने और साल में एक बार बदलने का अधिकार दिया गया है. इसके अलावा इक्विटी में निवेश बढ़ाने के अधिकार दिए गए हैं.

मानवता शर्मसार: ठिठुरन भरी सर्दी में पेंशन के चक्कर लगा रहा दिव्यांग, दोनों पैर पहले ही कट चुके

फरीदाबाद फरीदाबाद के सेक्टर 12 लघु सचिवालय डीसी कार्यालय के नीचे दोनों पैरों से विकलांग व्यक्ति अपनी पेंशन बनवाने के लिए पिछले 6 महीने से कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है। जब भी वह पेंशन बनवाने के लिए आता है तो उसे एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय चक्कर कटवाए जा रहे हैं।  विकलांग राजकुमार ने बताया कि उसके दोनों पैर एक दुर्घटना के कारण कट गए थे जिसके चलते वह अब चलने में असमर्थ है लेकिन ऐसी भीषण ठंड में जब वह अपनी पेंशन के लिए कार्यालय में आता है तो उसके हाथ और शरीर भी नीचे चलने के कारण सुन हो जाते हैं लेकिन वह जब भी आता है तो उसे एक कार्यालय से दूसरे  कार्यालय भेज दिया जाता है। जो भी डॉक्यूमेंट उन्होंने मांगे थे वह सभी डाक्यूमेंट्स उन्होंने दे दिए लेकिन अभी तक भी उनकी पेंशन नहीं बनी है।

पेंशन पाने के लिए अब कितनी सेवा जरूरी? बदल गए हैं नियम, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) सिर्फ एक बचत योजना नहीं है, बल्कि यह उनकी रिटायरमेंट सुरक्षा का एक अहम साधन भी है। हर महीने आपकी सैलरी का एक छोटा हिस्सा और उतना ही आपका नियोक्ता EPF फंड में जमा करता है। ज्यादातर लोग इसे केवल एकमुश्त राशि के तौर पर देखते हैं, लेकिन इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘कर्मचारी पेंशन योजना’ (EPS) में जाता है, जो भविष्य में हर महीने पेंशन देने का काम करता है। 10 साल की न्यूनतम सेवा जरूरी कई लोग नौकरी छोड़ने के बाद अपने EPS फंड के बारे में आशंकित रहते हैं। EPFO के नियमों के अनुसार, पेंशन पाने के लिए न्यूनतम 10 साल की सेवा आवश्यक है। यदि आपकी कुल नौकरी 10 साल से कम है, तो आप पेंशन के पात्र नहीं होंगे। वहीं, 10 साल या उससे अधिक नौकरी करने वाले कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद पेंशन के हकदार बन जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि नौकरी छोड़ते ही पेंशन मिल जाएगी। पेंशन का दावा तभी किया जा सकता है जब आप 58 साल की उम्र पूरी कर लें। इसका मतलब है कि आप चाहे 40 साल की उम्र में नौकरी छोड़ दें, पेंशन का लाभ 58 साल के बाद मिलेगा। EPF और EPS में पैसे का बंटवारा आपकी सैलरी का 12% EPF फंड में जाता है और कंपनी भी उतना ही योगदान देती है। इसमें से 8.33% EPS में जाता है, जो रिटायरमेंट के बाद पेंशन के लिए आरक्षित होता है। बाकी 3.67% EPF खाते में जमा होता है, जिसे घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, शादी या मेडिकल इमरजेंसी में निकाला जा सकता है। मासिक पेंशन कैसे तय होती है? ➤ EPFO एक फॉर्मूला के आधार पर पेंशन राशि तय करता है: ➤ मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70 ➤ पेंशन योग्य सेवा: EPS खाते में कुल योगदान के साल। ➤ पेंशन योग्य वेतन: आखिरी 60 महीने (5 साल) की औसत सैलरी, जिसकी ऊपरी सीमा ₹15,000 प्रति माह है।

अब हर लाभार्थी तक पहुंचेगी पेंशन, योजना की सघन निगरानी के आदेश जारी

अब हर लाभार्थी तक पहुंचेगी पेंशन, योजना की सघन निगरानी के आदेश जारी पेंशन वितरण में लापरवाही नहीं चलेगी, ‘पेंशन आपके द्वार’ योजना की होगी कड़ी मॉनिटरिंग भोपाल  "पेंशन आपके द्वारा योजना" का शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन हो सके, इसके लिए कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी योजना की नियमित समीक्षा करें। यह निर्देश प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय दिव्यांगजन सशक्तिकरण मती सोनाली वांयणकर ने सभी जिला कलेक्टर को दिये हैं। प्रमुख सचिव मती वायंगणकर ने कहा कि सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत सिंगल क्लिक के माध्यम से पेंशन राशि हितग्राहियों के खाते में प्रति माह अंतरित की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कल्याणी, दिव्यांगजन, वृद्धजन को प्रति माह पेंशन राशि निकालने के लिए बैंकों के चक्कर न लगाना पड़े। इस उद्देश्य से 'पेंशन आपके द्वार योजना' संचालित की जा रही है। योजना के तहत बैंकिंग कॅरेसपंडेंस के माध्यम से ऐसी ग्राम पंचायत में जिनसे बैंक या पोस्ट ऑफिस की दूरी 3 किलोमीटर से अधिक है, उन स्थानों पर बैंक करस्पॉन्डेंट्स, बैंकिंग सखीज, कॉमन सर्विस सेंटर, एसएचजी मेंबर्स के माध्यम से पेंशन राशि हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर इस योजना की सघन मॉनिटरिंग की जाए और जहां पर कोई कमी या शिकायत प्राप्त होती है वहां यथोचित कार्रवाई की जाये, जिससे राज्य शासन की मंशा अनुसार हितग्राहियों को पेंशन का सही समय पर लाभ प्राप्त हो सके।