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पंजाब में बुजुर्गों की पेंशन पर बड़ा खर्च, 24 लाख लाभार्थियों को मिले ₹2,507 करोड़

चंडीगढ़. चंडीगढ़. पंजाब में बुजुर्गों को आर्थिक सहायता देने के लिए पंजाब सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत सितंबर 2026 तक 2507.98 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इससे राज्य के 24.07 लाख बुजुर्गों को लाभ मिला है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के तहत 4000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र बुजुर्ग तक पेंशन का लाभ पहुंचाना है, ताकि उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को आवेदनों का सत्यापन तेजी से करने और पात्र लाभार्थियों को समय पर पेंशन उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। ‘हमारे बुजुर्ग हमारा मान’ अभियान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा ‘हमारे बुजुर्ग हमारा मान’ अभियान के तहत वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक 1,785.29 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल राज्य के बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत करने में सक्षम बनाने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वर्तमान में राज्य के 24 लाख से अधिक बुजुर्ग वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों को समय पर पेंशन मिलती रहे, इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष के बजट में इस योजना के लिए 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र बुजुर्ग व्यक्ति को 1,500 रुपये प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जाती है। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के पुरुष तथा 58 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाएं इस योजना के लिए पात्र हैं, बशर्ते उनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 60,000 रुपये से अधिक न हो।  इसके अलावा, आवेदक के पास 2.5 एकड़ से अधिक नहरी भूमि अथवा 5 एकड़ से अधिक बंजर/बरानी भूमि नहीं होनी चाहिए। बुजुर्गों को अनमोल पूंजी मानती है सरकार- डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार अपने बुजुर्गों को समाज की अनमोल पूंजी मानती है। उनके मान-सम्मान को बनाए रखने, सामाजिक सुरक्षा को और मजबूत करने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है, ताकि प्रत्येक बुजुर्ग सम्मान और आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सके। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी पात्र बुजुर्ग इस योजना के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि वृद्धावस्था पेंशन निर्धारित समय-सीमा के भीतर हर हाल में जारी करना सुनिश्चित किया जाए। इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा देरी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यूपी के बुजुर्गों के लिए पेंशन भुगतान का नया सिस्टम, तीन महीने की रकम दो किस्तों में मिलेगी

बलिया  वृद्धावस्था पेंशन पाने वाले बुजुर्गों के लिए भुगतान व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब तीन माह की पेंशन एकमुश्त देने के बजाय दो किस्तों में भेजने की व्यवस्था की गई है। दोनों किस्तों के बीच 45 दिन का अंतराल रहेगा। प्रत्येक किस्त में लाभार्थियों के बैंक खाते में 1500 रुपये भेजे जाएंगे। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे खाते में पहुंचेगी। नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को बैंक खाते और आधार से जुड़ी जानकारी दुरुस्त रखनी होगी। खाता आधार से लिंक नहीं होने या नाम, खाता संख्या सहित अन्य विवरणों में गड़बड़ी होने पर भुगतान अटक सकता है। वृद्धावस्था पेंशन में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी लाभार्थी की उम्र के अनुसार निर्धारित है। दोनों सरकारों का अंश 1500-1500 रुपये है 80 वर्ष से कम आयु के लाभार्थियों को तीन माह में राज्य सरकार की ओर से 2400 रुपये और केंद्र सरकार की ओर से 600 रुपये मिलते हैं। वहीं, 80 वर्ष से अधिक आयु के लाभार्थियों के लिए दोनों सरकारों का अंश 1500-1500 रुपये है। जिला समाज कल्याण अधिकारी रमेश कुमार ने लाभार्थियों से बैंक खाते को आधार से लिंक कराने और बैंक विवरण सही रखने की अपील की है, ताकि भुगतान में परेशानी न हो। वृद्धावस्था पेंशन के लिए न्यूनतम आयु 60 वर्ष निर्धारित है। ग्रामीण क्षेत्र में वार्षिक आय 46,080 रुपये और शहरी क्षेत्र में 56,460 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक और परिवार रजिस्टर की नकल सहित आवश्यक दस्तावेज एसएसपीवाई पोर्टल पर अपलोड करने होते हैं। पात्र बुजुर्गों को आवेदन में सही जानकारी भरने और अभिलेख दुरुस्त रखने का निर्देश है।

दुर्गा पूजा से पहले पेंशन भुगतान की मांग तेज, विधवा, दिव्यांग और वृद्धजन परेशान

धनबाद  दुर्गा पूजा से पहले झारखंड की मंइयां सम्मान योजना के लाभुकों के खातों में सितंबर महीने की राशि का भुगतान कर दिया गया है। वहीं, राज्य में वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन के लाभुकों को करीब छह महीने से भुगतान का इंतजार है। इससे हजारों जरूरतमंद परिवारों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। धनबाद, बोकारो और रांची समेत राज्य के विभिन्न जिलों में पेंशन भुगतान लंबित रहने से लाभुक परेशान हैं। वृद्धावस्था पेंशन पर निर्भर बुजुर्गों, विधवा महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए यह राशि रोजमर्रा की जरूरतों, दवा और जरूरी खर्चों का सहारा होती है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर मइयां सम्मान योजना की सितंबर महीने की राशि दुर्गा पूजा से पहले मिलने से महिला लाभुकों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभुक अब भी बकाया राशि मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लाभुकों को इंतजार है कि सरकार लंबित पेंशन का भुगतान जल्द सुनिश्चित करेगी। दुर्गा पूजा के माैके पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभुकों को सरकार से उम्मीद है कि उनपर ध्यान दिया जाएगा। हालांकि, बाद, बोकारो और रांची सहित पूरे राज्य में पेंशन भुगतान की वास्तविक लंबित अवधि, प्रभावित लाभुकों की संख्या और राशि जारी होने की संभावित तारीख की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। भाजपा नेता रमेश राही ने दुर्गा पूजा से पहले सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभुकों के खाते में पेंशन की राशि भेजने की मांग की है। उन्होंने कहा है-दिव्यांग, विधवा और वृद्धजन को पेंशन की ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा है-मुख्यमंत्री मंइयां सम्मान योजना का भुगतान अच्छी बात है लेकिन दिव्यांग, विधवा और वृद्धजनों का क्या कसूर है?

बहू की पेंशन और पोती से ₹15 हजार महीने की मांग, 83 वर्षीय सास की याचिका पर कोर्ट का फैसला

तिरुवनंतपुरम क्या सास अपनी बहू को मिल रही पेंशन में हिस्सा मांग सकती है? एक 83 साल की दादी ने न सिर्फ बहू की पेंशन में हिस्सा मांगा, बल्कि पोती से हर महीने 15,000 रुपये खर्चे के लिए भी मांगे। वह अपने दिवंगत बेटे की पत्नी को मिल रही पेंशन में भी हिस्सा मांग रही थी। मामला कोर्ट पहुंचा तो दोनों मांगों पर बड़ा फैसला आया। आखिर कोर्ट ने उनकी मांग क्यों नहीं मानी बहू को पेंशन का हिस्सा और पोती को खर्चे का पैसा देने से क्यों मना कर दिया? क्या है पूरा मामला? मामला 83 साल की एस. थैंकम्मा से जुड़ा है। वह केरल सरकार के फिशरीज डिपार्टमेंट (Fisheries Department) से रिटायर हुई हैं और खुद पेंशन लेती हैं। उनके पति भी फिशरीज डिपार्टमेंट में सीनियर अधिकारी रह चुके हैं और उन्हें भी पेंशन मिलती है। थैंकम्मा के बेटे टी राज कुमार की नौकरी के दौरान मौत हो गई थी। वह केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड यानी KSEB में सीनियर सुप्रीटेंडेट थे। पेंशन में मांगा बहू से हिस्सा  रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी को विधवा फैमिली पेंशन मिलने लगी, जबकि उनकी बेटी यानी थैंकम्मा की पोती कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। दादी ने पोती और बहू के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने 15,000 रुपये महीने के खर्चे के पैसे की मांग की। साथ ही बेटे की मौत के बाद उसकी पत्नी को मिल रही फैमिली पेंशन में भी अपना हिस्सा मांगा। दादी को पहले ही मिले थे 12 लाख रुपये इस मामले में कोर्ट के सामने यह भी आया कि बेटे की मौत के बाद मिलने वाले सर्विस बेनेफिट में से करीब 12.28 लाख रुपये दादी को पहले ही मिल चुके थे। यह रकम KSEB ने सीधे उन्हें दिये थे। बाकी रकम बेटे की पत्नी को मिले थे। पोती से खर्चे का पैसा की मांग क्यों नहीं मानी? कोर्ट ने कहा कि पोती अभी कॉलेज की छात्रा है। वह अपनी पढ़ाई के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से एजुकेशन लोन लेकर पढ़ रही है। ऐसे में उससे दादी का पैसे की मांग करना उचित नहीं है। दादी की ओर से दलील दी गई थी कि सीनियिर सिटीजन एक्ट के तहत पोती को उनकी देखभाल करनी चाहिए। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि पढ़ाई कर रही पोती पर ऐसी आर्थिक जिम्मेदारी डालना उचित नहीं होगा। खासकर, तब जब वह खुद एजुकेशन लोन के सहारे पढ़ाई कर रही है। पेंशन में नहीं मिल सकता हिस्सा दादी ने बहू को मिल रही फैमिली पेंशन में भी हिस्सा मांगा था। लेकिन कोर्ट ने कहा कि सीनियर सिटीजन एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर दादी को बेटे की विधवा को मिल रही फैमिली पेंशन का हिस्सा दिलाया जा सके। कोर्ट ने दोनों मांगों 15,000 रुपये महीने के हिसाब से खर्च का पैसा और फैमिली पेंशन में हिस्से को खारिज कर दिया। यानी सिर्फ उम्र अधिक होने के आधार पर पोती से खर्चे का पैसा या बहू की फैमिली पेंशन में हिस्सा मांगने का अधिकार अपने आप नहीं मिल जाता। मामले में लागू कानून और संबंधित व्यक्ति की आर्थिक स्थिति भी देखी जाती है।

पंचायत कर्मचारियों की पेंशन पर हाईकोर्ट का फैसला, नहीं मिलेगा सरकारी पेंशन का लाभ

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने पंचायत कर्मचारियों की पेंशन संबंधी याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं. जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता पेंशन पाने का कोई वैधानिक अधिकार स्थापित नहीं कर सके. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायत कर्मचारी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और उनके सेवा संबंधी मामले अलग नियमों से संचालित होते हैं. दरअसल, मामला प्रदेश के अलग-अलग जनपद पंचायतों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़ा था. याचिकाकर्ताओं ने लंबे समय तक सेवा करने और कुछ अन्य जनपद पंचायतों में कर्मचारियों को पेंशन मिलने का हवाला देते हुए पेंशन देने की मांग की थी. कोर्ट ने कहा कि कुछ जनपद पंचायतों द्वारा अपने स्तर पर पेंशन दिए जाने से सभी पंचायत कर्मचारियों को वैधानिक रूप से पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता. कोर्ट ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 131 केवल पहले से मौजूद वेतन, भत्ते और सेवानिवृत्ति लाभों को संरक्षण देती है, इससे नई पेंशन का अधिकार पैदा नहीं होता. याचिका कर्ताओं की सेवा शर्तों में सेवानिवृत्ति लाभ प्रोविडेंट फंड योजना के तहत थे, और वे कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड का लाभ ले रहे थे. ऐसे में पेंशन देने का कोई आधार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि दूसरे किसी प्राधिकरण द्वारा दिए गए लाभ के आधार पर वैधानिक अधिकार की मांग नहीं की जा सकती. सभी याचिकाओं में कोई मेरिट नहीं पाए जाने पर हाईकोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया और लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया.

मुंगेली में पेंशन मामले पर बड़ा एक्शन, 6 निलंबित

मुंगेली. लोक शिक्षण संचालनालय ने मुंगेली जिले में दिवंगत शिक्षक के पेंशन प्रकरण मामले में गंभीर लापरवाही पाए जाने के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग के 6 अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. मामला लोरमी विकासखंड का है. जहां पेंशन प्रकरण में नियम प्रक्रिया को ताक पर रखकर गड़बड़ी पाये जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई है जिससे हड़कंप मचा हुआ है. आने वाले दिनों में कुछ और जांच में लंबित मामले में कार्रवाई के कयास लगाये जा रहे हैं. लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश में बताया किया कि हाईस्कूल लाखासार में पदस्थ विज्ञान शिक्षक अंजनी त्रिपाठी का 25 सितंबर 2022 को सेवाकाल के दौरान निधन हो गया था. जिसके बाद परिवार पेंशन, मृत्यु सह सेवानिवृत्ति उपादान के प्रकरण की प्रक्रिया में 2018 में शिक्षक एलबी के संविलियन के बाद किए गए वेतन निर्धारण की सक्षम प्राधिकारी से जांच एवं अनुमोदन नहीं कराया गया. विलंब से अनुमोदन के कारण अधिक भुगतान एवं वसूली की स्थिति निर्मित हुई साथ ही लंबित पेंशन के संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय को अंधेरे में रखकर गलत और भ्रामक जानकारी भेजी गई. मामले में तत्कालीन प्राचार्य राघवेन्द्र कुमार सोनी, प्रभारी प्राचार्य रघुनंदन राजपूत, लिपिक मोतीराम यादव, त्रिवेणी ध्रुव, अशोक ध्रुव, डीईओ ऑफिस के पेशन कक्ष प्रभारी कनिष्ठ लेखा परीक्षक शत्रुहन कुलमित्र को निलंबित किया गया है. सभी छह कर्मचारियों द्वारा अपने काम में नियम विरूद्ध कार्य, गंभीर लापरवाही, शासकीय कार्य में लेट लतीफ जैसी कई गलतियां पाई गई. सभी निलंबित लोगों का बिलासपुर संयुक्त संचालक कार्यालय निलंबन अवधि में निर्धारित किया गया है.

पेंशन बकाया मामले में सख्ती, पंजाब हाईकोर्ट ने DEO और बैंक अधिकारियों की सैलरी रोकी

चंडीगढ़. चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा कोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया है. जगदीश राज अरोड़ा नाम के व्यक्ति ने अपनी दिवंगत पत्नी सुदर्शन कुमारी की पेंशन के बकाया भुगतान के लिए वर्ष 2023 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुदर्शन कुमारी गुरदासपुर-द्वितीय में ब्लाक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं. याचिकाकर्ता के मुताबिक उनकी पत्नी की पेंशन का बकाया करीब वर्ष 2007 से लंबित है. करीब डेढ़ दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ. इस दौरान अरोड़ा सरकारी कार्यालयों और बैंक के चक्कर लगाते रहे. मामले में संबंधित विभाग और बैंक एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे, लेकिन बकाया राशि का समाधान नहीं हो सका. विभाग और बैंक देते रहे अलग-अलग दलील सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह स्पष्ट हुआ कि याचिकाकर्ता के पेंशन बकाये के अधिकार को लेकर कोई विवाद नहीं है. गुरदासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से बताया गया कि अकाउंटेंट जनरल, पंजाब के कार्यालय ने 24 सितंबर 2012 को जिला कोषाधिकारी को पत्र भेजा था. विभाग के अनुसार बैंक ऑफ इंडिया ने इस निर्देश को लागू नहीं किया. दूसरी ओर बैंक की ओर से दलील दी गई कि जिला कोषाधिकारी की ओर से आवश्यक अनुपालन नहीं किए जाने के कारण बकाया पेंशन जारी नहीं हो सकी. इस तरह भुगतान की जिम्मेदारी को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप चलता रहा. हाई कोर्ट ने अधिकारियों के वेतन पर लगाई रोक मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी ने सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि 80 वर्षीय याचिकाकर्ता अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में हैं और इसके बावजूद उन्हें अपने जायज हक के लिए लंबे समय तक भटकना पड़ा. कोर्ट ने पंजाब के स्कूल शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के सचिवों को निर्देश दिया कि गुरदासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी और जिला कोषाधिकारी अदालत की पूर्व अनुमति के बिना अपना वेतन नहीं निकाल सकेंगे. इसके साथ ही बैंक ऑफ इंडिया के उप महाप्रबंधक को भी निर्देश दिया गया कि संबंधित वरिष्ठ प्रबंधक और शाखा प्रबंधक कोर्ट की अनुमति के बिना अपना वेतन नहीं निकाल सकेंगे. हाई कोर्ट ने यह कदम तब तक प्रभावी रखने का निर्देश दिया है, जब तक पेंशन के बकाये से जुड़ा मामला प्रभावी तरीके से हल नहीं हो जाता.

परिवार पहचान पत्र अपडेट पर सरकार का बड़ा फैसला, वृद्धावस्था पेंशन जारी रहेगी

चंडीगढ़  हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में जन्मतिथि सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद हजारों बुजुर्गों में यह आशंका पैदा हो गई थी कि यदि उनके पास उम्र साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हुए तो उनकी वृद्धावस्था सम्मान भत्ता पेंशन बंद हो सकती है। सरकार ने अब इस चिंता को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जा रही है, जिससे किसी भी पात्र बुजुर्ग की पेंशन केवल दस्तावेजों के अभाव में नहीं रुकेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों की जन्मतिथि का सत्यापन अभी बाकी है, उन्हें पहले की तरह नियमित रूप से पेंशन मिलती रहेगी। हरियाणा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन बुजुर्गों की थी, जिनका जन्म कई दशक पहले हुआ था और जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र या अन्य सरकारी रिकार्ड उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामलों की संख्या काफी अधिक है। इसे देखते हुए सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए नई व्यवस्था पर काम शुरू किया है। बुजुर्ग की आयु का होगा सत्यापन नई व्यवस्था के तहत यदि किसी बुजुर्ग के पास जन्मतिथि सत्यापित करने के लिए निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो परिवार पहचान पत्र में दर्ज उसके सबसे बड़े बेटे या बेटी के जन्म संबंधी रिकार्ड के आधार पर बुजुर्ग की आयु का सत्यापन किया जा सकेगा। परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के कार्डिनेटर डा. सतीश खोला ने बताया कि इसके लिए जरूरी होगा कि बड़ी संतान का नाम परिवार पहचान पत्र में दर्ज हो तथा उसकी जन्मतिथि पहले से सत्यापित हो। इस व्यवस्था से हजारों ऐसे लाभार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो केवल दस्तावेजों की कमी के कारण परेशान थे। सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल जन्मतिथि सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है और इसका सीधा संबंध पेंशन भुगतान से नहीं है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश हैं कि कोई भी पात्र नागरिक केवल सत्यापन प्रक्रिया लंबित होने के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं होगा। जन्मतिथि सत्यापन के लिए चाहिएं पांच प्रमुख दस्तावेज वर्तमान में जन्मतिथि सत्यापन के लिए पांच दस्तावेज मान्य हैं। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, दसवीं कक्षा की मार्कशीट, वर्ष 2019 तक बना मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट तथा पेंशन पेमेंट आर्डर (पीपीओ) शामिल हैं। जिन लाभार्थियों के पास इनमें से कोई भी दस्तावेज उपलब्ध है, उन्हें सरकार की ओर से भेजे गए संदेश के अनुसार 30 दिनों के भीतर संबंधित दस्तावेज परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के कार्डिनेटर डा. सतीश खोला के अनुसार दिसंबर तक परिवार पहचान पत्र में दर्ज सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को अपडेट और सत्यापित करने का लक्ष्य रखा गया है। हरियाणा सरकार का उद्देश्य किसी भी पात्र व्यक्ति की पेंशन या अन्य सरकारी सुविधा बंद करना नहीं, बल्कि रिकार्ड को अधिक प्रमाणिक बनाना है ताकि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी विवाद और रुकावट के पात्र लोगों तक आसानी से पहुंचता रहे।  

संवेदनशील पहल से बदली दाखू देवी की जिंदगी, मिली सरकारी योजनाओं की सौगात

जैसलमेर जैसलमेर जिले की राजमथाई ग्राम पंचायत निवासी दाखू देवी जोगी पूर्व में हुई एक भीषण आगजनी की घटना में लगभग 75 प्रतिशत तक झुलस गई थी। इस दुर्घटना में उनका चेहरा एवं हाथों की उंगलियां भी गंभीर रूप से प्रभावित हो गई थी। शारीरिक स्थिति के कारण उनका आधार कार्ड नहीं बन पा रहा था, जिसके चलते वे विभिन्न सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के लाभ से वंचित थी।  पहले पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी की उपस्थिति में पंचायत समिति भणियाणा के विकास अधिकारी हनुमान राम ने दाखू देवी की समस्या का समाधान करने का संकल्प लिया था। इसके बाद उन्होंने अपने निजी वाहन से दाखू देवी को पांच बार जोधपुर ले जाकर आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण करवाईं। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप दाखू देवी का आधार कार्ड,जन आधार कार्ड एवं बैंक खाता बनवाया गया एवं उनकी वृद्धावस्था पेंशन भी स्वीकृत करवाई गई। ग्राम पंचायत राजमथाई में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी ने दाखू देवी को पेंशन पीपीओ सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रदान किए।  दस्तावेज प्राप्त कर भावुक हुई दाखू देवी ने कहा कि अब उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा और उनका जीवन पहले से अधिक सुरक्षित एवं सम्मानजनक बनेगा। उन्होंने पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी, विकास अधिकारी हनुमान राम, ग्राम विकास अधिकारी भीमदान चारण तथा वरिष्ठ सहायक राणा राम गौरा सहित सभी संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों का आभार व्यक्त किया।   दाखू देवी की यह सच्ची कहानी दर्शाती है कि यदि प्रशासन संवेदनशीलता, समर्पण और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करे तो कठिन से कठिन समस्या का समाधान संभव है।

सामाजिक सुरक्षा एवं मुख्यमंत्री पेंशन योजनाओं से जरूरतमंदों को मिल रहा संबल

महासमुंद जिले के 53 हजार से अधिक हितग्राहियों को मिली पेंशन राशि सामाजिक सुरक्षा एवं मुख्यमंत्री पेंशन योजनाओं से जरूरतमंदों को मिल रहा संबल वृद्धजन, विधवा एवं दिव्यांग हितग्राहियों को लंबित पेंशन राशि का भी किया गया भुगतान रायपुर,  छत्तीसगढ़ राज्य में सामाजिक सुरक्षा और मुख्यमंत्री पेंशन योजनाएं वृद्धों, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगों के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभर रही हैं । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा दी जा रही पेंशन से जरूरतमंदों को महंगाई के इस दौर में सम्मानजनक जीवन जीने की वास्तविक सुविधा मिल रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक सहायता एवं पेंशन योजनाओं के माध्यम से महासमुंद जिले के हजारों जरूरतमंद हितग्राहियों को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। जिले में सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सुखद सहारा योजना और मुख्यमंत्री पेंशन योजना के अंतर्गत कुल 53 हजार 561 हितग्राहियों को पेंशन राशि का भुगतान किया गया है। राज्य शासन की योजनाओं से मिल रहा आर्थिक सहयोग           महासमुंद जिले के उप संचालक समाज कल्याण श्रीमती संगीता सिंह ने बताया कि राज्य शासन द्वारा संचालित पेंशन योजनाओं के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के 24 हजार 253, सुखद सहारा योजना के 9 हजार 76 तथा मुख्यमंत्री पेंशन योजना के 20 हजार 232 हितग्राहियों को अप्रैल 2026 तक की पेंशन राशि का भुगतान किया जा चुका है। इन योजनाओं के माध्यम से वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और अन्य पात्र हितग्राहियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनके जीवनयापन में सहूलियत मिल रही है। केंद्रीय पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों को भी मिला लाभ          समाज कल्याण विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों को भी लंबित पेंशन राशि का भुगतान किया गया है। तकनीकी प्रक्रिया के कारण हुई थी देरी          भारत सरकार द्वारा नवीन एसएनए-एस्पर्श प्रणाली लागू किए जाने के कारण पेंशन भुगतान में कुछ समय के लिए विलंब की स्थिति बनी थी। अब प्रक्रिया सुचारु होने के बाद पात्र हितग्राहियों को अप्रैल 2026 तक की पेंशन राशि जारी कर दी गई है। 42 हजार से अधिक हितग्राहियों को मिला भुगतान          केंद्र प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के 32 हजार 52, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के 9 हजार 469 तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के 945 हितग्राहियों को पेंशन राशि का भुगतान किया जा चुका है। सामाजिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल           सामाजिक सहायता योजनाएं समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। नियमित पेंशन भुगतान से वृद्धजन, विधवा महिलाओं और दिव्यांगजनों को सम्मानपूर्वक जीवनयापन में सहायता मिल रही है। शासन की इन योजनाओं से हजारों परिवारों को सामाजिक और आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है।