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बेटी को मिलेगा माता-पिता की पेंशन में अधिकार, नए नियम जल्द होंगे लागू

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब बेटी को माता-पिता पेंशन की पेंशन में अधिकार मिलेगा। ये नियम प्रदेशभर में 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएंगे। राज्य सरकार पेंशन नियमों में पहली बार बड़े संशोधन करने जा रही है। प्रस्ताव तैयार किए जाने के बाद कैबिनेट में आने का इंतजार है। दरअसल, प्रस्तावित नियमों गौर करें तो भले ही घर में बेटा हो, लेकिन अगर बेटी उससे बड़ी है तो वही परिवार पेंशन की पात्र होगी। अविवाहित पुत्री/विधवा और तलाकशुदा पुत्री को आजीवन पेंशन मिलती रहेगी। आजीविका कमाने में पूरी तरह से अक्षम दिव्यांग पुत्र/पुत्री/भाई को भी पेंशन की पात्रता होगी। ये नए पेंशन नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे। नए नियमों में दिव्यांगजनों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। जो पुत्र, पुत्री या भाई आजीविका कमाने में पूरी तरह से अक्षम हैं, उन्हें भी परिवार पेंशन की पात्रता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आश्रित को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर मिलती है। ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) में यह अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत होती है, जबकि एनपीएस में एन्युटी के आधार पर पेंशन तय होती है। वहीं यूपीएस में निश्चित पेंशन का प्रावधान है। कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार पेंशन पहले पत्नी को और पति-पत्नी दोनों के निधन के बाद अवयस्क बच्चों को मिलती है। नए पेंशन नियम लागू होने के बाद बेटियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और उन्हें परिवार में बराबरी का अधिकार मिलेगा। सरकार का यह फैसला महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। 1 अप्रैल से होंगे लागू  इसके अलावा अविवाहित बेटी, विधवा या फिर तलाकशुदा बेटी को भी आजीवन पेंशन मिलने की योजना रहेगी. वहीं अपना जीवन यापन न कर पाने वाले अक्षम दिव्यांग बेटे-बेटी या भाई को भी पेंशन की पात्रता दी जाएगी. नए पेंशन नियम 1 अप्रैल से लागू किए जाने की संभावना है. यानि यह योजना नए वित्त वर्ष में लागू होगी, बता दें कि पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर के लिए मिलती है, जबकि ओल्ड पेंशन स्कीम में आखिरी सैलरी का 50 प्रतिशत हिस्सा एनपीएस में एन्युटी के आधार पर और यूपीएस में निश्चित पेंशन की पात्रता है जो कि अंतिम एन्युटी के आधार पर बनती है. जहां अगर कर्मचारी की मौत होती है तो फिर उसकी पेंशन उसकी पत्नी को दी जाती है, जो 30 प्रतिशत होती है. ऐसे में अब यह बदलाव होगा कि अगर पति-पत्नी दोनों की मौत होती है तो इस स्थिति में पेंशन पर उनकी बड़ी संतान का अधिकार होगा, जिसमें अव्यस्क बच्चा भी शामिल होगा.  यह भी होगा बदलाव  वहीं शादी के बाद भी बड़ी बेटी या फिर बड़े बेटे को पेंशन ट्रांसफर की जाएगी. अगर कोई पति पत्नी दोनों पेंशन स्कीम के तहत आते हैं, यानि दोनों की सरकारी नौकरी होगी और उन्हें पेंशन मिलता है तो उनकी मौत के बाद इसका अधिकार दोनों की फैमिली को मिलेगा. वहीं 25 साल से ज्यादा उम्र की बेटी या बेटे को हर साल यह भी बताना होगा कि वह अविवाहित या फिर विधवा है, यानि पूरी जानकारी के बाद ही वह पेंशन के नियमों में पात्रता रखेंगे.  कैबिनेट बैठक में पास होगा प्रस्ताव  बताया जा रहा है कि जल्द ही यह प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में भी पास होगा. सीएम मोहन यादव के विदेश दौरे से लौटने के बाद कैबिनेट की बैठक में पेंशन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव पास होगा, जबकि इसे नए वित्त वर्ष में लागू किया जाएगा. इसके लिए वित्त विभाग की तरफ से काम शुरू हो गया है. जबकि नए बजट में इसका प्रावधान भी कर दिया जाएगा.   अव्यस्क बच्चों को पेंशन की पात्रता बता दें कि, पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारी को जीवनभर मिलती है, जो ओल्ड पेंशन स्कीम में अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत है। एनपीएस में एन्युटी के आधार पर और यूपीएस में निश्चित पेंशन की पात्रता है। परिवार पेंशन कर्मचारी की मृत्यु के बाद पत्नी को पति और पत्नी दोनों की मृत्यु के बाद अव्यस्क बच्चों को पेंशन की पात्रता होती है।

रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए सिंगल विंडो सुविधा, मध्यप्रदेश में नए पेंशन नियम 2026 से लागू

भोपाल मध्य प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन अब नहीं अटकेगी. वित्त विभाग इसके लिए कई नए प्रयोग करने जा रहा है. रिटायर्ड होने वाले कर्मचारियों के लिए नेक्स्ट जेन परियोजना शुरू की जा री है, इसमें कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए अलग-अलग मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं. इसमें रिटायर्ड होने के बाद कर्मचारियों को पेंशन जैसी अन्य सुविधाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे. वहीं, राज्य सरकार अगले साल से एक पेंशन नियम भी लागू करने जा रही है. वेतन से जीपीएफ तक सब ऑनलाइन उपमुख्यमंत्री और वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे जगदीश देवड़ा पिछले 2 साल की उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजना को लेकर पत्रकारों से रू-ब-रू हुए. वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि "प्रदेश के कर्मचारियों को ध्यान में रखकर कई नवाचार किए हैं, ताकि उन्हें वेतन, पेंशन आदि के लिए परेशान न होना पड़े. राज्य सरकार ने कर्मचारियों के जीपीएफ के सभी डाटा और प्रोसेस को ऑनलाइन कर दिया है, ताकि रिटायरमेंट के बाद समय सीमा में उन्हें भुगतान मिल सके. चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सुविधा के लिए विभागीय भविष्य निधि को भी पूरी तरह से ऑनलाइन किया जा रहा है, ताकि उन्हें अपने स्वत्वों का भुगतान बिना किसी परेशानी के हो सके. इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में भोपाल जिले में लागू किया गया है और जल्द ही इसे प्रदेश स्तर पर लागू किया जाएगा." रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए सिंगल विंडो वित्त मंत्री बताया कि वेतन निर्धारण की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है. इसमें 100 फीसदी ई पे निर्धारित किया गया है. इसकी वजह से 90 फीसदी से ज्यादा कर्मचारियों को हर माह की 1 तारीख को वेतन मिल जाता है. इसके अलावा क्रेन्द्रीयकृत पे-बिल जनरेट किए जाने की व्यवस्था शुरू की गई है. इसके माध्यम से प्रदेश के सभी 6 हजार डीडीओ को सेंट्रलाइज सिस्टम से जोड़ा गया है, कोई भी डीडीओ सभी श्रेणी के कर्मचारियों के पे-बिल जनरेट कर सकेगा. रिटायर्ड कर्मचारियों को सिंगल विंडो सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नेक्स्ट जेन परियोजना के तहत नया सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है. 123 करोड़ की लागत से तैयार हो रही इस परियोजना में कर्मचारियों के लिए अलग-अलग मॉड्यूल बनाए जा रहे हैं. इसमें एआई की मदद भी ली जाएगी. क्यू आर कोड से मिलेगी जानकारी पेंशनर्स के दावों और भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए पेंशन प्रकरणों का डिजीटलीकरण किया जा रहा है. अब पेंशन भुगतान आदेश डिजिटल सिग्नेचर से जारी होंगे और इससे पेंशन आदेश खोने, फटने की समस्या खत्म हो जाएगी. पेंशन आदेश और बाकी सभी दस्तावेजों पर क्यूआर कोड होगा. इसे मोबाइल से स्कैन कर इसकी डिटेल पेंशनर्स कभी भी देख सकेंगे. इसे डिजी लॉकर से भी जोड़ा जाएगा. वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक रस्तोगी ने बताया कि "सरकार अगले साल से नए पेंशन नियम लागू करने जा रही है. अभी सरकारी कर्मचारियों को अपनी मर्जी से फंड मैनेजर का चयन करने और साल में एक बार बदलने का अधिकार दिया गया है. इसके अलावा इक्विटी में निवेश बढ़ाने के अधिकार दिए गए हैं.

मानवता शर्मसार: ठिठुरन भरी सर्दी में पेंशन के चक्कर लगा रहा दिव्यांग, दोनों पैर पहले ही कट चुके

फरीदाबाद फरीदाबाद के सेक्टर 12 लघु सचिवालय डीसी कार्यालय के नीचे दोनों पैरों से विकलांग व्यक्ति अपनी पेंशन बनवाने के लिए पिछले 6 महीने से कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है। जब भी वह पेंशन बनवाने के लिए आता है तो उसे एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय चक्कर कटवाए जा रहे हैं।  विकलांग राजकुमार ने बताया कि उसके दोनों पैर एक दुर्घटना के कारण कट गए थे जिसके चलते वह अब चलने में असमर्थ है लेकिन ऐसी भीषण ठंड में जब वह अपनी पेंशन के लिए कार्यालय में आता है तो उसके हाथ और शरीर भी नीचे चलने के कारण सुन हो जाते हैं लेकिन वह जब भी आता है तो उसे एक कार्यालय से दूसरे  कार्यालय भेज दिया जाता है। जो भी डॉक्यूमेंट उन्होंने मांगे थे वह सभी डाक्यूमेंट्स उन्होंने दे दिए लेकिन अभी तक भी उनकी पेंशन नहीं बनी है।

पेंशन पाने के लिए अब कितनी सेवा जरूरी? बदल गए हैं नियम, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) सिर्फ एक बचत योजना नहीं है, बल्कि यह उनकी रिटायरमेंट सुरक्षा का एक अहम साधन भी है। हर महीने आपकी सैलरी का एक छोटा हिस्सा और उतना ही आपका नियोक्ता EPF फंड में जमा करता है। ज्यादातर लोग इसे केवल एकमुश्त राशि के तौर पर देखते हैं, लेकिन इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘कर्मचारी पेंशन योजना’ (EPS) में जाता है, जो भविष्य में हर महीने पेंशन देने का काम करता है। 10 साल की न्यूनतम सेवा जरूरी कई लोग नौकरी छोड़ने के बाद अपने EPS फंड के बारे में आशंकित रहते हैं। EPFO के नियमों के अनुसार, पेंशन पाने के लिए न्यूनतम 10 साल की सेवा आवश्यक है। यदि आपकी कुल नौकरी 10 साल से कम है, तो आप पेंशन के पात्र नहीं होंगे। वहीं, 10 साल या उससे अधिक नौकरी करने वाले कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद पेंशन के हकदार बन जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि नौकरी छोड़ते ही पेंशन मिल जाएगी। पेंशन का दावा तभी किया जा सकता है जब आप 58 साल की उम्र पूरी कर लें। इसका मतलब है कि आप चाहे 40 साल की उम्र में नौकरी छोड़ दें, पेंशन का लाभ 58 साल के बाद मिलेगा। EPF और EPS में पैसे का बंटवारा आपकी सैलरी का 12% EPF फंड में जाता है और कंपनी भी उतना ही योगदान देती है। इसमें से 8.33% EPS में जाता है, जो रिटायरमेंट के बाद पेंशन के लिए आरक्षित होता है। बाकी 3.67% EPF खाते में जमा होता है, जिसे घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, शादी या मेडिकल इमरजेंसी में निकाला जा सकता है। मासिक पेंशन कैसे तय होती है? ➤ EPFO एक फॉर्मूला के आधार पर पेंशन राशि तय करता है: ➤ मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70 ➤ पेंशन योग्य सेवा: EPS खाते में कुल योगदान के साल। ➤ पेंशन योग्य वेतन: आखिरी 60 महीने (5 साल) की औसत सैलरी, जिसकी ऊपरी सीमा ₹15,000 प्रति माह है।

अब हर लाभार्थी तक पहुंचेगी पेंशन, योजना की सघन निगरानी के आदेश जारी

अब हर लाभार्थी तक पहुंचेगी पेंशन, योजना की सघन निगरानी के आदेश जारी पेंशन वितरण में लापरवाही नहीं चलेगी, ‘पेंशन आपके द्वार’ योजना की होगी कड़ी मॉनिटरिंग भोपाल  "पेंशन आपके द्वारा योजना" का शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन हो सके, इसके लिए कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी योजना की नियमित समीक्षा करें। यह निर्देश प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय दिव्यांगजन सशक्तिकरण मती सोनाली वांयणकर ने सभी जिला कलेक्टर को दिये हैं। प्रमुख सचिव मती वायंगणकर ने कहा कि सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत सिंगल क्लिक के माध्यम से पेंशन राशि हितग्राहियों के खाते में प्रति माह अंतरित की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कल्याणी, दिव्यांगजन, वृद्धजन को प्रति माह पेंशन राशि निकालने के लिए बैंकों के चक्कर न लगाना पड़े। इस उद्देश्य से 'पेंशन आपके द्वार योजना' संचालित की जा रही है। योजना के तहत बैंकिंग कॅरेसपंडेंस के माध्यम से ऐसी ग्राम पंचायत में जिनसे बैंक या पोस्ट ऑफिस की दूरी 3 किलोमीटर से अधिक है, उन स्थानों पर बैंक करस्पॉन्डेंट्स, बैंकिंग सखीज, कॉमन सर्विस सेंटर, एसएचजी मेंबर्स के माध्यम से पेंशन राशि हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर इस योजना की सघन मॉनिटरिंग की जाए और जहां पर कोई कमी या शिकायत प्राप्त होती है वहां यथोचित कार्रवाई की जाये, जिससे राज्य शासन की मंशा अनुसार हितग्राहियों को पेंशन का सही समय पर लाभ प्राप्त हो सके।  

कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर! हाई कोर्ट ने प्रमोशन और पेंशन लाभ का रास्ता किया साफ

कैथल  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कैथल जिले के पुलिस कर्मचारियों के पक्ष में बड़ा आदेश सुनाते हुए रोहतक रेंज द्वारा जारी सीनियरिटी और प्रमोशन से जुड़े विवादित आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि कैथल पुलिसकर्मियों की वरिष्ठता और प्रमोशन का निर्णय केवल करनाल रेंज कर सकता है। इस फैसले से कैथल के करीब 70 पुलिस कर्मचारियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जिनमें एएसआई और एसआई रैंक के अधिकारी शामिल हैं। इनमें से कुछ कर्मचारी अब सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। मामला सब-इंस्पेक्टर मोहिंदर सिंह और अन्य कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता कर्मवीर सिंह बनयाना ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल वर्ष 2004 से 2008 के बीच कैथल जिले में हेड कांस्टेबल के रूप में कन्फर्म हुए थे। जबकि उनके जूनियर साथियों को वर्ष 2009 से 2011 के बीच करनाल और पानीपत में कन्फर्म किया गया था। इसके बावजूद 2019 में रोहतक रेंज ने सीनियरिटी सूची बदलते हुए जूनियर्स को सीनियर बना दिया और उन्हें एंटीडेटेड प्रमोशन भी दे दिए। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि नियमों के मुताबिक हेड कांस्टेबल तक की सीनियरिटी जिला स्तर पर तय होती है, जबकि एएसआई और एसआई की सीनियरिटी रेंज स्तर पर होती है। ऐसे में कैथल, करनाल और पानीपत के कर्मचारियों की वरिष्ठता और प्रमोशन का फैसला केवल करनाल रेंज कर सकता था। रोहतक रेंज को इसमें हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं था क्योंकि 29-9-2011 में करनाल रेंज के गठन के बाद जिला करनाल, पानीपत और कैथल के पुलिस कर्मियों के बारे में कोई भी निर्णय लेने का अधिकार केवल करनाल रेंज के पास ही है रोहतक रेंज के पास नहीं है। न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि रोहतक रेंज का आदेश पूरी तरह गलत था। अदालत ने इस आदेश को रद्द करते हुए कहा कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हरियाणा स्वयं या किसी अन्य अधिकारी को नियुक्त कर तीन माह में उचित आदेश जारी करें। इस फैसले से कैथल जिले के एएसआई और एसआई रैंक के लगभग 70 पुलिस कर्मचारियों को प्रमोशन, वेतनमान और पेंशन लाभ मिलेगा। चूंकि इनमें से कुछ कर्मचारी अब रिटायर हो चुके हैं, इसलिए उन्हें भी एरियर और पेंशन लाभ का फायदा मिल सकेगा। कैथल पुलिस लाइन और थानों में तैनात कर्मचारियों ने हाईकोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह फैसला न केवल वर्षों से लंबित उनके हक की बहाली है बल्कि इससे उनका मनोबल भी ऊँचा होगा। कर्मचारी संगठनों ने भी अदालत के इस निर्णय को ऐतिहासिक करार देते हुए सरकार से अपील की है कि आदेश का पालन समय पर और बिना देरी के किया जाए। हाईकोर्ट का यह आदेश केवल कैथल पुलिसकर्मियों पर लागू होगा। इससे यह भी साफ हो गया है कि सीनियरिटी और प्रमोशन को लेकर भविष्य में किसी अन्य रेंज को कैथल के कर्मचारियों के मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होगा।

संवेदनशीलता की मिसाल! महासमुंद प्रशासन ने रिटायर शिक्षकों को तुरंत दिया पेंशन आदेश

महासमुंद राज्य शासन की मंशा अनुरूप जिला प्रशासन महासमुंद ने सोमवार को एक संवेदनशील एवं सराहनीय पहल करते हुए शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त शिक्षकों को सेवानिवृत्ति के अगले ही दिन पेंशन अदायगी आदेश (पीपीओ) प्रदान किया। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन तथा जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे, सहायक संचालक सतीश नायर एवं जिला कोषालय अधिकारी महासमुंद संजय कुमार चौधरी के निर्देशन में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत महासमुंद हेमंत रमेश नंदनवार (आईएएस) द्वारा सेवानिवृत्त शिक्षकों को पीपीओ प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुरलीधर भोई, प्रधान पाठक प्राथमिक शाला खैरमाल, जो 31 अगस्त 2025 को सेवानिवृत्त हुए, को विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्रकाश चंद्र मांझी की पहल पर 1 सितंबर 2025 को ही अवकाश नगदीकरण की राशि, जीपीएफ फाइनल पेमेंट, जीआईएस, एफबीएफ राशि तथा उपादान राशि के साथ पीपीओ प्रदान किया गया। इसी प्रकार चंद्रहास पात्र, प्रधान पाठक (मिडिल स्कूल) को भी पीपीओ आदेश सौंपा गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत हेमंत रमेश नंदनवार ने सेवानिवृत्त शिक्षकों को शुभकामनाएँ एवं बधाई देते हुए कहा कि “शिक्षक समाज की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन नई पीढ़ी को गढ़ने में समर्पित किया। प्रशासन की ओर से यह हमारा दायित्व है कि उन्हें सेवा निवृत्ति के पश्चात त्वरित सुविधा और सम्मान मिले।” इस अवसर पर सेवानिवृत्त शिक्षकों को प्रशासन की ओर से शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित भी किया गया। उप कोषालय अधिकारी सरायपाली अनिमेष सिंह द्वारा रिटायरमेंट के अगले ही दिन भुगतान सुनिश्चित किया गया। इस त्वरित कार्यवाही में विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के शाखा प्रभारी रुपेश महापात्र का विशेष योगदान रहा।