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उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा कदम: अब पेट्रोल और डीजल पंप खोलने के लिए 10 विभागों की NOC की जरूरत नहीं

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में पेट्रोल पंप खोलना अब पहले की तुलना में आसान होने जा रहा है. प्रदेश सरकार ने कारोबारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है. अब पेट्रोल और डीजल पंप खोलने के लिए पहले की तरह कई विभागों से एनओसी लेने की जरूरत नहीं होगी. सरकार के नए फैसले के तहत अब पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वन विभाग समेत चार विभागों की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) अनिवार्यता खत्म कर दी गई है. इस संबंध में खाद्य एवं रसद विभाग ने आदेश जारी कर दिया है. नहीं लेनी पड़ेगी 10 विभागों की एनओसी अब तक पेट्रोल और डीजल पंप के लाइसेंस के लिए जिलाधिकारी को 10 विभागों राजस्व, एनएसएआई, लोक निर्माण विभाग, विकास प्राधिकरण या नगर निकाय, जिला पंचायत, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पुलिस, वन विभाग, विद्युत सुरक्षा और बिजली विभाग से एनओसी लेनी पड़ती थी. इस प्रक्रिया में काफी समय लगता था, जिससे आवेदकों को अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता था. नई व्यवस्था के तहत अब पेट्रोल पंप खोलने के लिए मुख्य रूप से राजस्व, बिजली, लोक निर्माण विभाग और विकास प्राधिकरण-आवास विकास परिषद- औद्योगिक विकास प्राधिकरण से ही एनओसी ली जाएगी. शेष विभागों के लिए आवेदक का स्वघोषणा पत्र ही मान्य होगा. ऑनलाइन उपलब्ध होगी एनओसी इसके साथ ही जिलाधिकारी की ओर से डिजिटल हस्ताक्षरित एनओसी आवेदक के यूजर लॉग-इन पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराई जाएगी. आवेदक अपने आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक भी कर सकेगा. यह कदम प्रदेश में निवेश और कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

जानिए पेट्रोल पंप मालिक कितना कमा सकते हैं, एक लीटर पर 4.30 रुपये का कमीशन जोड़कर

मुंबई  एक बार लागत और फिर जिंदगी भर कमाई. एक ऐसा बिजनेस जो गांव से लेकर अब बड़े शहर तक में धड़ल्ले से चलता है.आगे भी कमाई गुलजार रहने वाला ये बिजनेस. उस बिजनेस का नाम है- फ्यूल पंप (Fuel Pump), जिसे आम बोलचाल में पेट्रोल पंप (Petrol Pump) कहते हैं. वैसे तो पेट्रोल पंप खोलना आसान बात नहीं है और हर कोई खोल भी नहीं सकता. लेकिन जो खोल लेता है, वो फिर कमाई में कभी पीछे नहीं रहता. आज हम आपको पूरा गणित बताएंगे कि कैसे एक-एक लीटर पेट्रोल-डीजल पर पंप मालिक को मोटी कमाई होती है.  दरअसल, देशों में वाहनों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है. ये वो दौर है जब हर घर कार की कल्पना की जा रही है. अभी भी देश में 90 फीसदी से ज्यादा पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियां बिकती हैं. फिर पेट्रोल पंप मालिकों की कमाई में उसी हिसाब से बढ़ रही है. फिलहाल पेट्रोल पंप बिजनेस एक आकर्षक और स्थिर व्यवसाय के रूप में उभरा है.  आप कैसे खोल हो सकते हैं पेट्रोल पंप ये सच है कि पेट्रोल पंप खोलने के लिए मोटा पैसा लगाना होता है. साथ ही जटिल लाइसेंसिंग प्रक्रिया, मोटा निवेश और फिर कंपीटिशन इस फील्ड में आम बात है. अगर आप इन चुनौतियों का सामना कर लेते हैं तो फिर बेहतरीन दैनिक आय एक जरिया है ये बिजनेस.    – ग्रामीण इलाकों में पेट्रोल पंप खोलने के लिए कम से कम 20 लाख रुपये की जरूरत होती है, जबकि शहरी इलाकों में 40 से 50 लाख रुपये तक निवेश आम बात है. इसमें टैंक, डिस्पेंसर और बुनियादी ढांचों की लागत शामिल है. – जमीन की कीमत शहर के हिसाब ज्यादा-कम हो सकती है, इससे लागत बढ़ भी सकती है. बड़े शहरों में एक करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश भी संभव है. पेट्रोल पंप ओपन के लिए आप बैंकों से 2 करोड़ रुपये तक लोन ले सकते हैं.  अब आइए कमाई की बात करते हैं, सबसे पहले आपको बताते हैं कि पेट्रोल-डीजल पर पंप ऑनर को कैसे कमाई होती है. दरअसल, सरकार ने हर लीटर पेट्रोल-डीजल पर पंप ऑनर के लिए कमीशन तय किया हुआ है. पेट्रोल पंप उतना ही वसूलता है, पेट्रोल पंप ऑनर अपने मन से एक पैसा भी ज्यादा नहीं वसूल सकता.   दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल पर कितना कमीशन?  फिलहाल दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये है, पेट्रोल पंप ऑनर को इसमें से 4.39 रुपये मिलता है, यानी दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल पर पंप ऑनर को 4.39 रुपये की कमाई होती है. बता दें, दिल्ली में पेट्रोल का बेस प्राइस एवरेज 52.84 रुपये प्रति लीटर है, जिसपर एक्‍साइज ड्यूटी 21.90 रुपये है, जो कि केंद्र सरकार वसूलती है. एक लीटर पेट्रोल पर 15.40 रुपये का VAT वसूला जाता है, जो राज्‍य सरकार लेती है. इसके अलावा कुछ और छोटे-मोटे एवरेज चार्ज 0.26 रुपये लगाकर 1 लीटर पेट्रोल के दाम तय किए जाते हैं.  यानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल पर पंप मालिक को 4.39 रुपये मिलता है. हालांकि इसमें पेट्रोल पंप मालिक को सारा खर्च निकालना होता है. एक पेट्रोल पंप पर दर्जनभर से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, उनकी सैलरी से लेकर पेट्रोल पंप के रख-रखाव पर मोटा खर्च होता है. फिर भी ये फायदे का सौदा है.  मान लीजिए, एक पेट्रोल पंप पर दिनभर में 5000 लीटर पेट्रोल बिकता है, नियम के मुताबिक उसे कमीशन के तौर पर 21,950 रुपये मिलेंगे. इसमें 50 फीसदी रकम खर्च निकाल देने पर भी कम से कम 10 हजार रुपये हर दिन कमाई संभव है.  एक लीटर डीजल पर पंप मालिक को कितनी कमाई अगर डीजल की बात करें तो दिल्‍ली में 1 लीटर पर 12.83 रुपये प्रति लीटर वैट (VAT) वसूला जाता है. जबकि केंद्र सरकार एक्‍साइज ड्यूटी (Excise Duty) 17.80 रुपये प्रति लीटर चार्ज कर रही है. एवरेज डीलर कमीशन 3.02 रुपये प्रति लीटर है, यानी हर एक लीटर डीजल बेचने पर पंप ऑनर के खाते में 3.02 रुपये जाता है, जो कम नहीं है. दिल्ली में डीजल का बेस प्राइस 53.76 रुपये प्रति लीटर है. इसके अलावा कुछ अन्‍य छोटे-मोटे चार्ज 0.26 रुपये वसूले जाते हैं. इसके बाद 1 लीटर डीजल के दाम तय होते हैं. 18 जुलाई 2025 को दिल्‍ली में 1 लीटर डीजल की कीमत (Diesel Price in Delhi) 87.67 रुपये प्रति लीटर थी.  बता दें, बड़े वाहनों में खासकर कमर्शियल वाहनों में डीजल की खपत ज्यादा है, और हर लीटर पर पंप ऑनर को 3.02 रुपये मिलता है. एक अनुमान के मुताबिक अगर पंप 24 घंटे में 5000 लीटर डीजल बेचता है तो कमीशन के तौर पर उसे करीब 15,100 रुपये मिलेंगे, इसमें से आधा खर्च काट दें तो 7500 रुपये बचत संभव है, यानी पेट्रोल और डीजल दोनों के बिक्री के आंकड़ों को मिला दें तो एक घनी आबादी वाले इलाके में पेट्रोल पंप ऑनर आसानी से 15000 रुपये प्रति दिन कमाई कर सकता है. कमीशन एक निश्चित राशि है, इसलिए पूरी कमाई बिक्री की मात्रा और लोकेशन पर निर्भर करती है. कैसे शुरू करें पेट्रोल पंप    पेट्रोल पंप शुरू करने के लिए आवेदक की आयु 21-60 साल होनी चाहिए. भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है. पेट्रोल पंप खुद की या किराये की जमीन पर खोल सकते हैं, शहरी इलाके में पेट्रोल पंप खोलने के लिए 800-1200 वर्ग मीटर और ग्रामीण इलाकों में 1200-1600 वर्ग मीटर जमीन होनी चाहिए. देश की तमाम बड़ी तेल कंपनियां (जैसे IOCL, BPCL, HPCL, रिलायंस) समय-समय पर डीलरशिप के लिए विज्ञापन जारी करती हैं. आवेदन ऑनलाइन जमा करना होता है. जिसमें आधार, पैन, जमीन के दस्तावेज और एनओसी जैसे दस्तावेज जरूरी हैं. अधिक जानकारी: www.iocl.com, www.reliancepetroleum.com पर जाकर जुटा सकते हैं.

भिंड में पेट्रोल पंप पर गोलीबारी, हेलमेट नियम पर नाराज़ होकर बदमाशों ने की फायरिंग

भिंड  ग्वालियर-इटावा नेशनल हाइवे 719 पर स्थित पेट्रोल पंप संचालक को बिना हेलमेट के बाइक सवार को पेट्रोल नहीं देना संचालक को महंगा पड़ गया। बाइक सवार युवकों ने पंप पर बंदूक और कट्टे से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इसी दौरान एक गोली पंप संचालक के दाएं हाथ में लग गई। घायल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के आधार पर दो आरोपितों की पहचान कर ली है। गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है। घटना शनिवार सुबह करीब पांच बजे की है। प्रेट्रोल नहीं देने पर भड़के युवक जानकारी के अनुसार 62 वर्षीय तेजनारायण पुत्र गोरेलाल नरवरिया निवासी पुर थाना देहात का बरोही क्षेत्र में हाइवे पर सावित्री पेट्रोल पंप है। शनिवार सुबह करीब चार बजे एक युवक बाइक से पंप पर पहुंचा और सेल्समैन ने पेट्रोल डालने के लिए कहा। सेल्समैन ने युवक से कहा कि हेलमेट नहीं है। इसलिए पेट्रोल नहीं डलेगी। भिंड कलेक्टर ने बिना हेलमेट पेट्रोल देने पर रोक लगाई है। इस पर युवक भड़क गया और सेल्समैन को धमकाते हुए बोला कि पेट्रोल नहीं डाली तो अंजाम बुरा होगा। इसके बाद युवक वहां से चला गया। पंप पर कर दी ताबड़तोड़ फायरिंग करीब 50 मिनट बाद युवक दो अन्य साथियों के साथ 4.50 बजे पंप पर पहुंचा। इसमें एक युवक 315 बोर की बंदूक और एक युवक 315 बोर का कट्टे लिए था। युवकों ने आते ही सेल्समैन को गालियां देना शुरू कर दी और बोला के बिना हेलमेट के पेट्रोल नहीं दी तो अब गोली खा। इसके बाद दो युवकों ने बंदूक और कट्टे से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली चलते ही कर्मचारी मौके से भाग गया। संचालक के हाथ में लगी गोली इसी दौरान पंप के ऑफिस में लेटे संचालक तेजनारायण नरवरिया बाहर आए और युवकों से फायरिंग बंद करने के लिए कहा। इसी दौरान एक गोली संचालक तेजनारायण दाएं हाथ में लग गई तो वह जमीन पर गिर गए। इस दौरान गोली पंप के ऑफिस में लगे शटर सहित अन्य जगह लगी हैं। इसके बाद युवक हथियार लहराते हुए बाइक लेकर भाग गए। स्टाफ ने संचालक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने दो आरोपियों की पहचान की बरोही थाना प्रभारी अतुल भदौरिया का कहना है कि सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में दो लोग बंदूक और कट्टे से फायरिंग करते हुए दिखाई दे रहे हैं। फुटेज के आधार पर उनकी पहचान बिजपुरी निवासी भोलू भदौरिया और कुलदीप भदौरिया के रूप में हुई है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए टीम लगातार दबिश दे रही हैं। संभवत: देर रात तक आरोपितों को पकड़ लेंगे। 5 अगस्त को बिना हेलमेट के पेट्रोल देने पर लगी थी रोक बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने पांच अगस्त को दो पहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट अनिवार्य कर दिया था। बिना हेलमेट पेट्रोल भी नहीं देने के आदेश दिए। नजर रखने के लिए एसडीएम के नेतृत्व में विशेष निरीक्षण दल गठित किए। निरीक्षण के दौरान पंपों पर दोपहिया वाहन चालकों को बिना हेलमेट के पेट्रोल देते पाए जाने पर कार्रवाई भी की गई।

प्रोटोकॉल में भारी चूक: दूषित डीजल से सीएम काफिले की कारें बंद, पेट्रोल पंप संचालक पर कार्रवाई

रतलाम  रतलाम में मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल से जुड़ी गाड़ियों में मिलावटी डीजल भरने का मामला अब जांच रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया है। 27 जून को एमपी राइज 2025 कार्यक्रम के दौरान सीएम के प्रोटोकॉल में शामिल 19 इनोवा कारें डोसीगांव स्थित भारत पेट्रोलियम के मेसर्स से रिफ्लिंग कराई गई थी।  रतलाम जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पेट्रोल पंप को सील कर तीन डीजल सैंपल लिए, जिन्हें BPCL लैब मांगलिया भेजा गया। अब आई जांच रिपोर्ट में डीजल में पानी की मिलावट की पुष्टि हुई है। पंप संचालक शक्ति बुंदेल और पंप मैनेजर अमरजीत डाबर के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच में पाया गया कि पंप के डीजल टैंक में 197.43 लीटर पानी मौजूद था, और स्टॉक में 720 लीटर का अंतर मिला। घटना के बाद से पेट्रोल पंप अब तक बंद है और आगे की कार्रवाई पुलिस के हाथों में है। बता दें कि 26, जून की रात सीएम के काफिले में शामिल होने के लिए प्राइवेट गाड़ियां इंदौर से रतलाम आई थीं। डोसीगांव में स्थित भारत पेट्रोलियम के मेसर्स शक्ति फ्यूल्स पाईंट पर 19 इनोवा कारों में एक साथ डीजल भराया। डीजल भराने के बाद कारे कुछ दूरी तक ही चली और बंद हो गई। इन सभी को धक्का मारकर पेट्रोल पंप पर लाकर खड़ा किया था। जब प्रशासन को इस बारे में जानकारी लगी तो हड़कंप मच गया। अधिकारी पेट्रोल पंप पहुंचे। गाड़ियों के टैंक खुलवाकर डीजल खाली कराया तो उसमें डीजल के साथ पानी निकला। मामला सीएम से जुड़ा होने के कारण उसी रात पेट्रोल पंप को सील कर दिया। रात में ही प्रशासन ने इंदौर से अन्य गाड़ियों का इंतजाम किया। दूसरी गाड़िया इंदौर से रतलाम पहुंची। 27 जून को 3 सैंपल जांच के लिए भेजे, रिपोर्ट आई मामला सामने आने के बाद 27 जून को जिला आपूर्ति विभाग ने डीजल के 3 सैंपल लेकर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के मांगलिया लेब में टेस्ट के लिए भेजे गए। करीब एक पखवाड़ा बाद लेब से टेस्ट रिपोर्ट मिल गई है। जिला आपूर्ति विभाग ने आगे की कार्रवाई को लेकर थाना औद्योगिक क्षेत्र को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। जिला आपूर्ति अधिकारी आनंद गोले की रिपोर्ट पर 27 जून को थाना औद्योगिक क्षेत्र ने पेट्रोल पंप संचालक शक्ति बुंदेल पति हेमराज बुंदेल और पंप मैनेजर अमरजीत पिता बल्लू डाबर के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत केस दर्ज किया था। दर्ज रिपोर्ट के अनुसार जांच में पाया कि पंप संचालक ने लापरवाही बरतते हुए वाहनों में अपमिश्रित डीजल भरा गया, जो कि उन्हें नहीं करना चाहिए था। तब से लेकर आज तक पेट्रोल पंप बंद है। पेट्रोल पंप संचालक जनसुनवाई में कलेक्टर के पास भी पहुंचे थे, ताकि पेट्रोल पंप को चालू कराया जा सके। जिला आपूर्ति अधिकारी ने टाली जवाबदेही जांच रिपोर्ट के संबंध में जब दैनिक भास्कर ने जिला आपूर्ति अधिकारी आनंद गोले से जानकारी मांगी, तो वे स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने शुरुआत में कहा कि रिपोर्ट सीधे पुलिस को भेज दी गई है। जब रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी मांगी गई तो उन्होंने मामले को पुलिस की जांच से जोड़ते हुए कहा कि उनका काम केवल सैंपल लेकर जांच के लिए भेजना था। विभागीय जिम्मेदारी की बात उठाने पर उन्होंने कैमरे के सामने आने से बचते हुए स्वीकार किया कि जांच में डीजल में पानी की मिलावट पाई गई है। लेकिन जब आगे की कार्रवाई के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे पुलिस का मामला बताकर अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया। विशेष रूप से चिंताजनक यह है कि मामला मुख्यमंत्री के काफिले से जुड़ा होने के बावजूद जिला आपूर्ति अधिकारी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यहां तक कि उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। प्रशासन का दावा: गाड़ियां सीएम काफिले की नहीं मामले में ड्राइवरों और प्रशासन के बयानों में विरोधाभास सामने आया है। जहां ड्राइवरों ने गाड़ियां बंद होने पर बताया कि वे इंदौर से सीएम के काफिले में शामिल होने के लिए आए थे, वहीं जिला प्रशासन ने अगले दिन स्पष्ट किया कि ये केवल प्रोटोकॉल के लिए आई वीआईपी गाड़ियां थीं। प्रशासन के अनुसार, इन गाड़ियों के लिए मेसर्स इम्पेक्ट ट्रेवल्स इंदौर अधिकृत एजेंसी है। एजेंसी को शर्तों के तहत अपडेटेड कंडीशन में गाड़ियां, डीजल और ड्राइवर सहित प्रोटोकॉल के लिए उपलब्ध करानी थीं। गाड़ियों में ईंधन भरवाने की जिम्मेदारी भी ट्रेवल एजेंसी की थी, न कि जिला प्रशासन की। जानकारी के अनुसार, इम्पेक्ट ट्रेवल्स इंदौर ने इनोवा गाड़ियां रतलाम भेजीं और उन्हीं के द्वारा मेसर्स शक्ति फ्यूल्स पाइंट डोसीगांव रतलाम से डीजल भरवाया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ये गाड़ियां मुख्यमंत्री के काफिले का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि अन्य प्रोटोकॉल के लिए थीं। डीजल भरवाने के बाद ये गाड़ियां कुछ दूरी तय करने के बाद बंद हो गईं। स्टॉक में मिला अंतर – जांच रिपोर्ट अधिकारियों ने पंप के डेंसिटी और स्टॉक की जांच की। जांच के दौरान डीजल के विक्रय के बाद शेष स्टॉक एवं डीप स्टॉक में 720 लीटर का अंतर पाया गया। यह मान्य छूट सीमा 426 लीटर से अधिक था। ऑटोमेशन डिस्प्ले में डीजल टैंक में वाटर लेवल 6.63 सेंटीमीटर तथा पानी की मात्रा 197.43 लीटर दिखाई दे रही थी, जो स्पष्ट करता है कि डीजल टैंक में पानी मिल रहा था। अधिकारियों ने पंप से 5995 लीटर पेट्रोल एवं 10657 लीटर डीजल जप्त किया। 184 में से मात्र 50 पंपों की जांच रतलाम जिले में कुल 184 पेट्रोल पंप हैं, लेकिन आपूर्ति विभाग अब तक केवल 50 पेट्रोल पंप की ही जांच कर पाया है। मुख्यमंत्री से मामला जुड़ा होने के कारण भोपाल स्तर से प्रदेश के सभी पेट्रोल पंप की जांच के आदेश दिए गए थे। कलेक्टर द्वारा हर तीन माह में पेट्रोल पंप की जांच का रोस्टर भी बनाया गया है। भारत पेट्रोलियम कंपनी के एरिया मैनेजर श्रीधर ने जांच रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर कहा कि उन्होंने आपूर्ति अधिकारी को रिपोर्ट सौंप दी है और इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। कलेक्टर राजेश बाथम ने कहा-पेट्रोल कंपनी को भेजेंगे रिपोर्ट प्रोटोकॉल की अधिकृत वैंडर की गाड़िया थीं। डीजल में पानी मिलने की … Read more