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नारायणपुर में पीएम-जनमन से कच्चे मकानों से पक्के आशियाने तक का सफर

रायपुर        ​सरकार के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विशेष रूप से कमजोर एवं पात्र जनजातीय परिवारों के जीवन में एक नया सबेरा देखने को मिल रहा है। नारायणपुर जिले की ग्राम पंचायत कोहकामेटा के दूरस्थ क्षेत्रों में प्रधानमंत्री जनमन (पीएम-जनमन) आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के सपनों को साकार कर उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन दे रही है।    ​ वर्षों से मिट्टी के कच्चे घरों में रह रहे परिवारों के लिए मौसम की हर मार—चाहे वह मूसलाधार बारिश हो या तेज हवाएं—एक बड़ी चुनौती हुआ करती थी। आर्थिक तंगी के कारण पक्का मकान बनाना इन ग्रामीण परिवारों के लिए एक दूर की कौड़ी जैसा था।वर्षाकाल में टपकती छतों और ढहती दीवारों की चिंता से मुक्त होकर अब ग्राम कोहकामेटा की श्रीमती मोडडे बाई पति श्री मसीया राम और ग्राम किहकाड़ की श्रीमती गंगाबती पति श्री सुकालू का परिवार अपने मजबूत, ढलाई वाले पक्के मकानों में सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहा है।  ​मोडडे बाई बताती हैं कि मिट्टी के कच्चे घर में बारिश के दिनों में हर समय डर बना रहता था, लेकिन योजना के तहत आवास स्वीकृति मिलने के बाद अब मजबूत छत वाला घर बनकर तैयार है। यह नया घर केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि उनके परिवार के लिए स्थायित्व और सम्मानजनक जीवन का आधार बन गया है। ठीक इसी तरह ग्राम किहकाड़ की गंगाबती के लिए भी यह पक्का आशियाना एक बड़े बदलाव की शुरुआत लेकर आया है। कच्चे घर की जगह अब मजबूत ढलाई वाली पक्की छत तैयार हो चुकी है, जिससे उनका परिवार हर मौसम में पूरी तरह सुरक्षित है।   ​प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) को मूलभूत सुविधाओं से जोड़कर उनके जीवनस्तर में सुधार लाना है। नारायणपुर जिले में यह योजना केवल पक्के मकान ही नहीं दे रही, बल्कि इन परिवारों के मन में सुरक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद को भी मजबूत कर रही है। पक्का आवास मिलने पर दोनों परिवारों ने शासन-प्रशासन के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है। यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि विकास की मुख्यधारा से दूर रह रहे परिवारों तक जब योजनाएं पहुँचती हैं, तो उनके जीवन में वास्तविक और स्थायी बदलाव आता है।

सुशासन तिहार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पीएम जनमन के हितग्राही को सौंपी खुशियों की चाबी

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत जारी राज्यव्यापी दौरे में आज खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान विकासखंड के ग्राम सरोधी में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत सुभान सिंह मेरावी को उनके नवनिर्मित आवास की चाबी सौंपकर गृह प्रवेश कराया। सुभान सिंह ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि मुख्यमंत्री स्वयं उनके गांव आकर उन्हें यह सौभाग्य देंगे। उनके लिए यह केवल घर नहीं, बल्कि सम्मान और विश्वास का प्रतीक है।बउन्होंने बताया कि उन्हें वन अधिकार पट्टा के तहत 3 एकड़ 2 डिसमिल भूमि मिली है, जिस पर खेती कर वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। साथ ही उनकी पत्नी को महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता भी मिल रही है, जिससे घरेलू जरूरतों में सहयोग मिल रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि शासन का लक्ष्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

पीएम-जनमन क्षेत्रों में विशेष शिविरों के माध्यम से हजारों जनजातीय हितग्राही हुए लाभान्वित

महिलाओं के लिए बड़ी पहल: रायपुर में दूरदराज अंचलों तक पहुंची विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं रायपुर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की महत्त्वाकांक्षी पहल “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” के अंतर्गत आज प्रदेशभर के प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय मिशन (PM JANMAN) क्षेत्रों में विशेष जनजातीय स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से पिछड़ी जनजातीय समूहों (PVTGs) सहित हजारों लोगों को समर्पित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गईं, जो प्रदेश सरकार की जनजातीय स्वास्थ्य सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ राज्य में ‘‘स्वस्थ्य नारी, सशक्त परिवार‘‘ अभियान के आज के थीम के अनुरूप विशेष रूप से पीवीटीजी (विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने हेतु मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (MMU) के माध्यम से व्यापक स्तर पर सेवाएं प्रदान की गई, जिसमें राज्य के 24 ज़िलों में कुल 85 स्वास्थ्य शिविरों का संचालन किया गया। प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में 51 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की सक्रिय भागीदारी से पिछड़ी जनजातीय समूह के 1,815 सहित कुल 7,825 लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।  दूरस्थ अंचलों में बसे जनजातीय समुदायों को ध्यान में रखते हुए इन शिविरों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा समग्र स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श सेवाएँ प्रदान की गईं। सेवाओं के अंतर्गत सामान्य ओपीडी उपचार के अंतर्गत 2,118 लोगों का इलाज किया गया, वहीं 1,020 लोगों की हाईपरटेंशन (बीपी) जांच और 1108 लोगों की मधुमेह स्क्रीनिंग की गई। महिलाओं के स्वास्थ्य को केंद्र में रखते हुए एनीमिया की जांच 878 महिलाओं में की गई, जबकि मातृत्व सेवाओं के तहत 260 महिलाओं की एएनसी/पीएनसी जांच की गई। साथ ही, 210 मलेरिया, 340 सिकल सेल, और 112 टीबी जांचें की गईं। कैंसर स्क्रीनिंग (मुख, स्तन व ग्रीवा) के माध्यम से 150 महिलाओं की जांच की गई। बच्चों को टीकाकरण सेवाएं भी दी गईं, जिससे 185 बच्चों को लाभ मिला, जबकि परिवार नियोजन सेवाओं का लाभ 145 महिलाओं ने उठाया। मानसिक स्वास्थ्य परामर्श के तहत 80 लोगों को परामर्श दिया गया और आयुष एवं वेलनेस सेवाओं से 60 लोगों को लाभ मिला। इसके साथ ही, मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर भी विशेष रूप से जागरूकता सत्र आयोजित किए गए, जिसमें किशोरियों और महिलाओं को स्वच्छता प्रबंधन, सैनिटरी नैपकिन के उपयोग, संक्रमण से बचाव जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। यह प्रयास स्वास्थ्य सेवाओं से आगे बढ़कर, महिलाओं के स्वस्थ जीवन की दिशा में एक सशक्त पहल सिद्ध हो रहा है। स्वास्थ्य सेवा वितरण के साथ-साथ समुदाय में जागरूकता और विश्वास का संचार भी इन शिविरों की एक विशेष उपलब्धि रही। शिविरों में आए हितग्राहियों को न केवल जांच और उपचार प्रदान किया गया, बल्कि उन्हें पोषण, जीवनशैली में सुधार, नियमित जांच की महत्ता आदि विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया गया। यह अभियान राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रह रहे समुदायों तक मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक प्रभावशाली कदम है। महिलाओं के स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर चलाया गया यह कार्यक्रम सम्पूर्ण परिवार की सशक्तता और समग्र स्वास्थ्य सुधार की दिशा में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा है।