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PMFME योजना से आकांक्षा के मिलेट्स उद्यम को मिली नई उड़ान, मुनाफा 50 हजार तक पहुंचा

सफलता की कहानी PMFME योजना ने आकांक्षा के मिलेट्स उद्यम को दी नई उड़ान 10-15 हजार की मासिक आमदनी से 40-50 हजार रुपये के शुद्ध मुनाफे तक पहुँचीं आकांक्षा ‘मिली अन्ना’ ब्रांड से बनाई पहचान, दो युवाओं को भी दिया रोजगार भोपाल        हुनर के साथ सही मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग मिल जाए, तो छोटा-सा व्यवसाय भी सफल उद्यम का रूप ले सकता है। भोपाल जिले के फंदा विकासखंड की श्रीमती आकांक्षा वेक्टर ने इसे साकार कर दिखाया है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के सहयोग से उन्होंने अपने छोटे मिलेट्स व्यवसाय को आधुनिक प्रसंस्करण एवं उत्पादन इकाई में बदल दिया है। कभी 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह कमाने वाली आकांक्षा अब सभी व्यय और बैंक ऋण की किश्त चुकाने के बाद प्रतिमाह लगभग 40 से 50 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर रही हैं। पूंजी की कमी से थम रहा था कारोबार आकांक्षा के पास मिलेट्स से पौष्टिक खाद्य उत्पाद तैयार करने का हुनर और व्यवसाय को आगे बढ़ाने का जज्बा था। सीमित संसाधनों और छोटी मशीनों से उत्पादन करने के कारण उनके व्यवसाय का अपेक्षित विस्तार नहीं हो पा रहा था। उत्पादों की मांग होने के बावजूद आधुनिक मशीनरी खरीदने तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक पूंजी की कमी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। उस समय उनकी मासिक आमदनी लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक सीमित थी। PMFME योजना ने खोला उन्नति का रास्ता आकांक्षा को उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, जिला भोपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की जानकारी मिली। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी इकाई के विस्तार के लिए आवेदन किया। वर्ष 2026-27 में आईडीबीआई बैंक, भोपाल से उन्हें 4 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। योजना के अंतर्गत 35 प्रतिशत अनुदान का लाभ मिलने से आधुनिक मशीनरी स्थापित करने और व्यवसाय का विस्तार करने का उनका सपना साकार हुआ। आधुनिक मशीनों से बढ़ी गुणवत्ता और उत्पादन योजना से मिली सहायता से आकांक्षा ने अपनी इकाई में स्टोन-टाइप ग्राइंडर, सोलर डीहाइड्रेटर, डेक ओवन, मिक्सर तथा ऑटोमैटिक पैकेजिंग मशीन स्थापित कीं। इन मशीनों से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता और पैकेजिंग में भी उल्लेखनीय सुधार आया। उन्होंने अपने मिलेट्स उत्पादों को ‘मिली अन्ना’ नाम से स्थानीय ब्रांड के रूप में बाजार में उतारा। पौष्टिक उत्पादों, बेहतर गुणवत्ता और आकर्षक पैकेजिंग के कारण उनके ब्रांड को बाजार में नई पहचान मिली तथा उत्पादों की मांग लगातार बढ़ने लगी। आय बढ़ी, दो युवाओं को मिला रोजगार व्यवसाय के विस्तार का सीधा प्रभाव आकांक्षा की आय पर पड़ा। पहले जहां उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 से 15 हजार रुपये की आमदनी होती थी, वहीं अब सभी व्यय और बैंक ऋण की किश्त चुकाने के बाद वे प्रतिमाह लगभग 40 से 50 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर रही हैं। उनके उद्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और दो स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिला है। आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनी योजना आकांक्षा अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना, जिला प्रशासन भोपाल तथा उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से मिले सहयोग और मार्गदर्शन को देती हैं। उनका कहना है कि योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उनके छोटे व्यवसाय को आधुनिक एवं लाभकारी उद्यम में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आकांक्षा की सफलता बताती है कि मेहनत, हुनर और सरकारी योजनाओं के प्रभावी सहयोग से छोटे स्तर के व्यवसाय को भी आधुनिक, लाभकारी और रोजगारपरक उद्यम में बदला जा सकता है। आज वे आत्मनिर्भर बनने के साथ अन्य महिलाओं और नव उद्यमियों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।  

देश सेवा से उद्यम तक का सफर, PMFME योजना ने बदली सफलता की कहानी

देश सेवा से उद्यम सेवा तक – प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना ने बनाया सफल उद्यमी भोपाल  भिण्ड शहर के चतुर्वेदी नगर निवासी संतोष सिंह प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना पीएमएफएमई अंतर्गत प्राप्त सहायता के माध्यम से सफल उद्यमी बने हैं। भारतीय सेना में हवलदार के पद पर 17 वर्षों तक सेवा देने वाले सिंह ने देश-सेवा के बाद जिले में उद्यम-सेवा के जज्बे के साथ खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में कदम रखा। वैष्णवी ऑयल मिल के माध्यम से ओडीओपी उत्पाद – सरसो का प्रसंस्करण कर वे न केवल 10 लाख की वार्षिक आय प्राप्त कर रहे हैं बल्कि 5 अन्य स्थानीय व्यक्तियों को रोजगार भी दे रहे है। शुरुआती दिनों में वैष्णवी ऑयल मिल की सीमित संसाधनों के कारण उत्पादन क्षमता कम थी और उत्पाद को बड़ा बाजार नहीं मिल पा रहा था। पीएमएफएमई योजना अंतर्गत आवेदन करने पर योजना के तहत उन्हें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 13.50 लाख रुपए का ऋण और 5.25 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। उन्होंने इस सहायता से मिल के उन्नयन हेतु आधुनिक एक्सपेलर, फिल्टर और मोटर मशीनें लगाई जिससे उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई। आज वे ग्रामीण क्षेत्रों से किसानों से सीधे सरसों खरीद कर शुद्ध सरसों का तेल निकालते हैं और उसे खुला एवं टीन के डिब्बों में पैक कर स्थानीय बाजार में बेचते हैं। सिंह का कहना है कि पीएमएफएमई योजना अत्यंत लाभकारी है जिसके अंतर्गत सहायता प्राप्त कर युवा अपना उद्यम स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। सिंह अपने खाद्य प्रसंस्करण उद्यम के सफल संचालन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत संचालित इस योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना पर अधिकतम 10 लाख रुपए की सीमा तक 35 प्रतिशत अनुदान और 3 प्रतिशत ब्याज माफी का प्रावधान है। जिले के युवा, कृषक, और छोटे व्यवसायी व्यक्तिगत स्तर पर, तथा किसान उत्पाद संगठन, स्वसहायता समूह और उत्पादक सहकारी समिति उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से संपर्क कर नए औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अथवा मौजूदा इकाइयों के उन्नयन के लिए योजना अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।  

पीएमएफएमई योजना: प्रदेश के युवा विभिन्न उद्योग स्थापित कर बना रहे हैं अपनी पहचान

पीएमएफएमई योजना प्रदेश के युवा विभिन्न उद्योग स्थापित कर बना रहे हैं अपनी पहचान सरकारी योजना, तकनीकी मार्गदर्शन एवं ईच्छाशक्ति युवाओं के सपने साकार करने में सहायक भोपाल  केन्द्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य, उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) का लाभ लेकर बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी  अभिषेक जायसवाल ने उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की है। यह प्रदेश के युवाओं एवं किसानों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वरोजगार से जोड़ने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना का उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना और युवाओं को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस योजना का लाभ अधिक से अधिक युवाओं तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। शासन द्वारा विभागीय मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता एवं वित्तीय सहयोग के माध्यम से युवाओं को उद्यम स्थापना हेतु प्रेरित किया जा रहा है, जिससे वे स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकें। यूनिट स्थापना से मिली नई पहचान बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी अभिषेक जायसवाल एक शिक्षित युवा हैं, जिन्होंने एग्रीकल्चर बीएससी तथा एग्रीकल्चर मैनेजमेंट में एमबीए की पढ़ाई की है। शुरू से ही कृषि से जुड़े परिवार से होने के कारण अभिषेक की कृषि से संबंधित कार्य को आगे बढ़ाने में रूचि थी। उद्यानिकी विभाग के सहयोग से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना द्वारा अभिषेक ने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना कर मात्र 4 माह में ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। पीएमएफएमई योजना से मिला संबल अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग के माध्यम से उन्हें पीएमएफएमई योजना की जानकारी प्राप्त हुई, जिसके बाद उन्होंने अपने उद्यम की शुरुआत करने का निर्णय लिया। योजना में उन्होंने बैंक से प्राप्त सहायता राशि के माध्यम से माह अक्टूबर 2025 में डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की। इस यूनिट में मुख्य रूप से प्याज, केला के डिहाइड्रेट उत्पादों को तैयार करते हैं। क्या है डिहाइड्रेट यूनिट डिहाइड्रेशन यूनिट एक ऐसी प्रसंस्करण इकाई है, जिसमें फल एवं सब्जियों जैसे प्याज, केला, हल्दी तथा पत्तेदार सब्जियों से कम तापमान पर नमी हटाकर उन्हें सुखाया जाता है। यह प्रक्रिया जल्दी खराब होने वाली खाद्य सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है और उन्हें फ्लेक्स, चिप्स अथवा पाउडर के रूप में उपयोग योग्य बनाती है। डिहाइड्रेशन के कारण उत्पाद लम्बे समय तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे भंडारण एवं परिवहन आसान और कम खर्चीला हो जाता है। सही तकनीक से सुखाने पर उत्पाद का रंग, स्वाद एवं पोषण तत्व काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक खाद्य उत्पाद उपलब्ध होते हैं। प्रक्रिया अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि यूनिट में प्याज को डिहाइड्रेट करने के लिए पहले उसका छिलका हटाकर अच्छे से साफ कर कटर मशीन से 1 एमएम स्लाइस बनाए जाते हैं। इन स्लाइसों को क्रेट में भरकर इलेक्ट्रॉनिक ड्रायर में निर्धारित तापमान पर लगभग 10 घंटे रखा जाता है, जिससे डिहाइड्रेटेड उत्पाद तैयार होता है। पाउडर बनाने के लिए स्लाइस को पल्वराइज़र मशीन में पीसकर पाउडर तैयार किया जाता है और वाइब्रो फिल्टर से छाना जाता है। वहीं केले को डिहाइड्रेट करने के लिए करीबन 60 डिग्री तापमान पर लगभग 8 घंटे तक ड्रायर में रखा जाता है। इसी प्रकार हल्दी, मैथी एवं अन्य उत्पादों के लिए भी लगभग समान प्रक्रिया अपनाई जाती है। रोजगार के अवसर भी हुए सृजित यूनिट में वर्तमान में 5 से 6 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इससे न केवल अभिषेक का व्यवसाय आगे बढ़ रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। मांग और बिक्री से बढ़ रही आय अभिषेक जायसवाल यूनिट में प्रतिमाह लगभग 5-6 क्विंटल उत्पादन की बिक्री कर लेते हैं, जिससे उन्हें लगभग 50 से 60 हजार रुपये शुद्ध आय प्रति माह का मुनाफा हो जाता है। अभिषेक जायसवाल बताते है कि, उत्पादों की पैकेजिंग 30 एवं 50 किलो के पैकेट्स में की जाती है। इसके लिए पैकिंग बैग में सामग्री भरकर पैकेजिंग मशीन से सील कर ग्राहकों तक पहुँचाया जाता है। ग्राहकों द्वारा इन डिहाइड्रेट उत्पादों को पसंद किया जा रहा है। नियमित ग्राहक के साथ-साथ मांग अनुसार पैकेट्स भी तैयार किए जाते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ने की तैयारी अभिषेक के उत्पादों की बिक्री बुरहानपुर जिले के साथ-साथ इंदौर, मुंबई सहित अन्य शहरों में भी हो रही है। आने वाले समय में वे अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी विक्रय करने की तैयारी कर रहे हैं। योजना बनी आत्मनिर्भरता की राह प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से सही मार्गदर्शन, योजना का लाभ और ईच्छाशक्ति के बल पर युवा न केवल स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बना रहे है।