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फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा

रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा  मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और 'डिजिटल फर्जीवाड़े' का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी 'अंधेरगर्दी': लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि:कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: "राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल" पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'डिजिटल सेंधमारी' को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240

कुल्हाड़ी से हमला: गाली-गलौज का विरोध करने पर पूर्व जनपद सदस्य प्रतिनिधि पर जानलेवा वार

बिलासपुर सकरी थाना से लगे पेंडारी क्षेत्र में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां पूर्व जनपद सदस्य प्रतिनिधि परमानन्द बघेल पर उनके ही पड़ोसी द्वारा कुल्हाड़ी से हमला कर दिया गया। बताया जा रहा है कि घटना गाली-गलौज का विरोध करने पर हुई, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, परमानन्द बघेल अपने घर के पास मौजूद थे, तभी पड़ोसी लक्ष्मण बघेल किसी बात को लेकर गाली-गलौज करने लगा। जब परमानन्द बघेल ने इसका विरोध किया और उसे ऐसा करने से मना किया, तो विवाद अचानक बढ़ गया। इसी दौरान आक्रोशित लक्ष्मण बघेल ने कुल्हाड़ी उठाकर उन पर हमला कर दिया। हमले में परमानन्द बघेल को गंभीर चोटें आई हैं। परिजनों और आसपास के लोगों ने तत्काल उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार, समय रहते इलाज मिलने से उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आरोपी लक्ष्मण बघेल के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेजी से की जा रही है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

पंजाब में सुरक्षा चुनौतियों के बीच पुलिस फोर्स बढ़ाने की योजना, स्वीकृत पद 1.25 लाख तक बढ़ाने की तैयारी

चंडीगढ़ बॉर्डर स्टेट होने की वजह से पंजाब में जिस तरह की सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही है। उसके मद्देनजर सरकार पंजाब पुलिस में स्वीकृत पदों की संख्या 1.25 लाख करना चाहती है। इसी लक्ष्य के चलते पहले चरण में 10 हजार नए पदों को सृजित किया जा रहा है। जिसके लिए जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी।  पंजाब पुलिस में जवानों और अफसरों की संख्या देखी जाए तो साल 2000 में यह 80 हजार के करीब थी। साल 2026 में भी कुल पदों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई मगर सूबे में सुरक्षा की संवेदनशीलता बढ़ती गई। वर्तमान स्थिति यदि देखें तो पंजाब की आबादी भी करीब साढ़े तीन करोड़ के आसपास पहुंच चुकी है। ऐसे में आबादी के हिसाब से पुलिस की नफरी अपेक्षाकृत कम है। इसके अलावा बॉर्डर पार से पाकिस्तानी की नापाक गतिविधियां, नशा और हथियार तस्करी, गैंगस्टरवाद, रंगदारी, हत्याएं, लूट, डकैती, चोरियां इत्यादि आपराधिक वारदातों ने भी पंजाब पुलिस की चुनौतियों को काफी बढ़ा दिया है। इन पर नकेल कसने और पंजाबियों को पूरी तरह सुरक्षित माहौल मुहैय्या करवाने के मकसद से सरकार को अब पुलिस जवानों और अफसरों की संख्या बढ़ाना जरूरत महसूस हो रही है। इसके अलावा पंजाब सरकार ने क्रास बॉर्डर वेपन और ड्रग्स सिंडीकेट की तस्करी पर नकेल कसने के लिए पाकिस्तान बॉर्डर पर बीएसएफ की चौकियों से लगभग दो किलोमीटर पहले सेंकड लाइन ऑफ डिफेंस भी खड़ी करने का फैसला लिया है। इसके तहत कई छोटी-छोटी चौकियां खोली जा रही हैं। इन चौकियों पर पुलिस के जवान और होमगार्ड तैनात किए जा रहे हैं। इसके लिए भी अधिक पुलिस जवानों की जरूरत है। दूसरी ओर, लंबे से पुलिस अफसरों और जवानों के पद भी रिक्त पड़े रहते थे। भर्ती प्रक्रिया लटकी रहती थी। आप सरकार ने पिछले चार साल में पुलिस के 12966 रिक्त पदों को भरकर स्टाफ की कमी से जूझ रही पंजाब पुलिस को कुछ राहत देने की कोशिश की है। चुनावी साल में भर्तियां करती थी सरकारें पिछली रिवायती सरकारों की भर्ती प्रक्रिया भी सियासी फायदा के लिए होती थी। सत्ता में आने के बाद चार साल भर्तियां लटकी रहती थीं और पांचवें चुनावी साल में भर्तियां करतेथे मगर वे भी अपने रिश्तेदारों और सिफारिशी लोगों को नौकरी देते थे। 26 साल से पुलिस की नफरी जितनी थी, आज भी उतनी ही है। हम पंजाब पुलिस के स्वीकृत पदों को पहले 90 हजार तक लेकर जाएंगे और उसके बाद 1.25 लाख करेंगे।- भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

लुधियाना कांग्रेस नेता की हत्या पर बड़ा खुलासा, बिहार से पकड़ा गया आरोपी—कुल्हाड़ी लेकर घूम रहा था हत्यारा

लुधियाना थाना कुमकलां के तखरां गांव में 29 मार्च को कांग्रेस नेता परमिंदर तिवारी की बेरहमी से की गई हत्या के मामले को लुधियाना पुलिस ने सुलझा लेने का दावा किया है। पुलिस की विशेष टीमों ने इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपियों को बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पुलिस लाइन में आज दोपहर डीसीपी जसकरण जीत सिंह तेजा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए बड़ा खुलासा करेंगे। इस हत्याकांड ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी क्योंकि हमलावरों ने बड़ी ही क्रूरता के साथ इस वारदात को अंजाम दिया था। जांच के दौरान एक चौंकाने वाला वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मुख्य आरोपी विजय कुमार उर्फ अजय हत्या से महज एक घंटा पहले नशे की हालत में अपने कंधे पर कुल्हाड़ी रखकर गांव की गलियों में पैदल घूमता दिखाई दे रहा है। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार शाम 5:47 बजे आरोपी गांव में बेखौफ घूम रहा था और ठीक 6:45 बजे उसने परमिंदर तिवारी के सिर पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार कर उनकी जान ले ली। परिजनों का आरोप है कि अजय पिछले 15 दिनों से गांव के चक्कर लगाकर तिवारी की रेकी कर रहा था। वारदात के समय आरोपी लक्की बाइक चला रहा था, जबकि अजय ने कुल्हाड़ी से हमला किया। हत्या के बाद दोनों आरोपी फरार होकर पटना (बिहार) जा छिपे थे, जिन्हें पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद दबोच लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। हमलावरों ने परमिंदर तिवारी के सिर पर कुल्हाड़ी से एक के बाद एक कुल 6 वार किए, जिससे उनकी खोपड़ी पूरी तरह डैमेज हो गई और दिमाग का हिस्सा बाहर बिखर गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वार इतना जोरदार था कि तिवारी को चीखने तक का मौका नहीं मिला और वे पहले ही वार में जमीन पर गिर पड़े थे। गिरने के बाद भी आरोपी उन पर वार करते रहे। शरीर के अन्य किसी हिस्से पर चोट के निशान न होना यह दर्शाता है कि आरोपियों का एकमात्र मकसद उनकी जान लेना ही था। पुलिस फिलहाल इस हत्याकांड के पीछे तीन मुख्य थ्योरियों पर काम कर रही है। पहली थ्योरी पंचायत की जमीन के विवाद से जुड़ी है। आरोपी अजय ने पंचायत की जमीन पर अवैध कब्जा कर घर बनाया था और एक सरकारी कमरे को तोड़कर अपने घर में मिला लिया था। इसी बात को लेकर उसका परमिंदर तिवारी और सरपंच पति जगदीश के साथ विवाद चल रहा था, जिसका केस अदालत में लंबित है। दूसरी ओर, वारदात के कुछ समय बाद तिवारी के मोबाइल पर आए एक इंटरनेशनल कॉल ने पुलिस को उलझा दिया है। कॉल करने वाले ने सीधे तिवारी का हाल पूछा था, जिससे सुपारी किलिंग का शक भी गहरा रहा है। इसके साथ ही पुरानी राजनीतिक रंजिश के एंगल को भी नकारा नहीं जा रहा है, क्योंकि तिवारी गांव की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय थे और आरोपी उनके राजनीतिक विरोधियों का करीबी बताया जा रहा है। अब पुलिस की पूछताछ में ही साफ होगा कि इस खूनी खेल के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है।

मध्यप्रदेश पुलिस में बैंड के 679 आरक्षक पदों के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिस बैंड के अंतर्गत आरक्षक (बैंड) के कुल 679 पदों पर सीधी भर्ती वर्ष 2026 हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह भर्ती प्रक्रिया विशेष रूप से पुरुष अभ्यर्थियों के लिए आयोजित की जा रही है। इन पदों पर नियुक्ति हेतु इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी दिनांक 05 अप्रैल 2026 से 19 अप्रैल 2026 तक एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। अभ्यर्थियों को आवेदन हेतु एमपी ऑनलाइन की अधिकृत वेबसाइट पर जाकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। इस संबंध में विस्तृत जानकारी मध्यप्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट mppolice.gov.in पर भी उपलब्ध है, जहाँ भर्ती से संबंधित नियम, पात्रता, चयन प्रक्रिया एवं अन्य आवश्यक निर्देश देखे जा सकते हैं। 

पुलिस मुख्यालय परिवार ने नौसेवानिवृत्त कर्मचारियों को दी भावपूर्ण विदाई

पुलिस मुख्यालय परिवार द्वारा नौसेवानिवृत्‍त कर्मचारियों को भावभीनी विदाई पुलिस महानिदेशक ने सभी को स्‍मृतिचिन्‍ह भेंट किए भोपाल पुलिस मुख्‍यालय की विभिन्‍न शाखाओं से माह मार्चमें सेवानिवृत्‍तनौकर्मचारियों कोपुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा नेमंगलवार को भावभीनी विदाई दी। पुलिस महानिदेशक ने सभी को पौधे एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए और उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों को उनके विभिन्‍नस्‍वत्‍व (क्‍लेम) भुगतान के आदेश भी प्रदान किए गये। नवीन पुलिस मुख्‍यालय भवन कॉन्‍फ्रेंसहॉल में आयोजित विदाई समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशकआदर्श कटियार, अनिल कुमार, आशुतोष राय, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक जयदीप प्रसाद,पुलिस महानिरीक्षक हरिनारायणचारी मिश्र, उप पुलिस महानिरीक्षक तरूण नायक एवं अन्‍य पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों के परिजन उपस्थित थे। पुलिस मुख्‍यालय से सेवानिवृत्‍तमानसेवी उप पुलिस अधीक्षक विशेष शाखा रामनिवास यादव, कार्यवाहक सहायक अधीक्षक प्रशासन शाखा दिनेश पाटिल, कार्यवाहक सूबेदार (एम) एससीआरबी चन्‍द्रप्रकाश शर्मा, कार्यवाहक सूबेदार (एम) शिकायत शाखा महेश जयसिंघानी, कार्यवाहक आंकिक/सूबेदार (एम) प्रबंध शाखा प्रकाश तोलानी, सहायक उप निरीक्षक महिला सुरक्षा शाखा विजय सिंह ठाकुर, कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक विशेष शाखा श्रीमती शोभा शर्मा, प्रधान आरक्षक एससीआरबी गणपत राव शिन्‍दे तथा कार्यवाहक प्रधान आरक्षक अजाक शाखा शिवशंकर भदौरिया को पुलिस मुख्‍यालय परिवार ने मंगलवार को भावभीनी विदाई दी। सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती अंशुमान अग्रवाल ने सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों के कार्यकाल पर प्रकाश डाला। विदाई समारोह में मौजूद अधिकारियों ने सेवानिवृत कर्मचारियों की मेहनत और लगन की सराहना की।  

नशा विरोधी अभियान में फरीदकोट ने गाड़े झंडे, पंजाब के टॉप जिलों में बनाई अपनी पहचान

फरीदकोट भगवंत मान सरकार के नशा विरोधी अभियान के तहत पंजाब का फरीदकोट जिला एक मजबूत उदाहरण बनकर सामने आया है. जिले में कुल अपराध में 37% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि लूटपाट के मामलों में 97% रिकवरी दर हासिल हुई है. यह "युद्ध नशेयां विरुद्ध" और ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत लगातार चल रही कार्रवाई का परिणाम है।  फरीदकोट में यह बदलाव सख्त कार्रवाई, तकनीक आधारित निगरानी और मजबूत जनभागीदारी के संयोजन से संभव हुआ है. इन प्रयासों ने स्थानीय स्तर पर नशा नेटवर्क को कमजोर किया है और कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाया है. भगवंत मान सरकार का नशे के तंत्र को खत्म करने का अभियान अब जिला स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है।  पुलिस अधिकारियों के अनुसार ग्राम रक्षा समितियों (VDC), गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और सामाजिक संस्थाओं के साथ नियमित बैठकों से जमीनी स्तर की खुफिया जानकारी मजबूत हुई है. इसके चलते लोग अब नशा तस्करों और असामाजिक तत्वों की जानकारी सक्रिय रूप से साझा कर रहे हैं, जिससे पुलिस को तेजी और सटीकता के साथ कार्रवाई करने में मदद मिल रही है।  अभियान की निगरानी कर रहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रज्ञा जैन, आईपीएस ने कहा, “लोगों का पुलिस पर भरोसा बढ़ा है क्योंकि सूचनादाताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और तुरंत कार्रवाई की जाती है. हर आयु वर्ग के लोग इस अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि यह विश्वास नशे और अपराध के खिलाफ कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण ताकत बनकर उभरा है।  इस बदलाव में तकनीक की भी अहम भूमिका रही है. फरीदकोट के प्रमुख स्थानों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों ने निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत किया है. ढिलवां कलां गांव में एक व्यापक सीसीटीवी नेटवर्क स्थापित किया गया है, जो लिंक सड़कों और आसपास के राजमार्गों को कवर करता है. इस प्रणाली की रियल-टाइम निगरानी गांव प्रशासन और पुलिस दोनों के पास उपलब्ध है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।  स्थानीय लोगों ने भी इन प्रयासों के असर को स्वीकार किया है. गांव के सरपंच सुखजीत सिंह ने बताया कि सीसीटीवी निगरानी के जरिए नशा तस्करी से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों का समय रहते पता चल रहा है, जिससे पुलिस तुरंत कार्रवाई कर पा रही है और अपराध होने से पहले ही आरोपियों को पकड़ा जा रहा है।  सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों ने भी इस बदलाव को सकारात्मक बताया है. सहारा सेवा सोसाइटी के चेयरमैन प्रवीण काला ने कहा कि सख्त कार्रवाई से जिले में नशा तस्करी के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और पुलिस के साथ लोगों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है।  अधिकारियों ने बताया कि सख्त कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता अभियान, स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय और पर्यावरण व पौधारोपण जैसी सामुदायिक पहल भी चलाई जा रही हैं, ताकि नशे के खिलाफ दीर्घकालिक सामाजिक बदलाव सुनिश्चित किया जा सके।  भगवंत मान सरकार के "युद्ध नशेयां विरुद्ध" अभियान के तहत सख्त पुलिसिंग, तकनीक का प्रभावी उपयोग और मजबूत जनभागीदारी के साथ फरीदकोट एक आदर्श जिले के रूप में उभर रहा है. यह दिखाता है कि समन्वित प्रयासों से नशा नेटवर्क को कमजोर किया जा सकता है और कानून-व्यवस्था में जनता का विश्वास और मजबूत किया जा सकता है। 

अमृतसर में पुलिस ने मारी बड़ी कामयाबी, नाकेबंदी में दो सब-मशीन गन पकड़ी, साजिश नाकाम

 अमृतसर  अमृतसर पुलिस कमिश्नर रेट में नाकाबंदी के दौरान रविवार की सुबह दो सब मशीन गन बरामद की है। पता चला है कि दो आरोपित पुलिस को गच्चा देकर नाकाबंदी से ही फरार हो गए। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कुख्यात गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह उर्फ गोल्डी के इशारे पर यह दो सब मशीन गन भारतीय हद में ड्रोन से गिराई गई थीl कुछ देर में पुलिस कमिश्नर इस बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। स्पष्ट है कि गैंगस्टर और आतंकी पंजाब में बड़ी खूनी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैl पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई इसके लिए गैंगस्टरों की सहायता से भारत में लगातार हथियारों की सप्लाई में जुटी है।

क्रिस्पी खेहरा के पति को 2 साल की सजा, चंडीगढ़ में ₹30 लाख का इमीग्रेशन फ्रॉड और पत्नी के नाम पर 2 चेक जारी

चंडीगढ़ चंडीगढ़ में वांटेड आरोपी क्रिस्पी खेहरा के पति दविंदर सिंह गिल को जिला कोर्ट ने इमीग्रेशन फ्रॉड और चेक बाउंस मामले में 2 साल की सजा सुनाई है। पीड़ित व्यक्ति को 25 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस मामले में क्रिस्पी खेहरा का भी नाम सामने आया है दोनों ने मेडिकल स्टोर संचालक से उसके बेटे को कनाडा भेजने के नाम पर 30 लाख रुपए लिए थे। लेकिन इसके बाद भी उसको विदेश नहीं भेजा। मामला 6 सितंबर 2019 का है। करीब 6 साल 5 महीने चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, क्रिस्पी खेहरा के नाम से दो चेक जारी किए गए थे। वहीं क्रिस्पी खेहरा चंडीगढ़ पुलिस की वांटेड सूची में शामिल है और उस पर 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया है। अब सिलसिलेवार जानिए पूरा मामला सेक्टर-46 के मेडिकल स्टोर संचालक नरेश भाटिया ने पुलिस को बताया था कि उनकी पहचान आरोपी दविंदर सिंह गिल से साल 2015 से थी। दोनों एक किटी ग्रुप के सदस्य थे और आपस में अच्छे संबंध थे। नवंबर 2018 में सेक्टर-35 स्थित गोपाल स्वीट्स में मुलाकात के दौरान आरोपी ने अपनी पत्नी के इमिग्रेशन कारोबार के बारे में बताया। इस पर शिकायतकर्ता ने अपने बेटे को कनाडा PR पर भेजने की इच्छा जताई। नरेश भाटिया ने कहा कि आरोपी और उसकी पत्नी ने बेटे को विदेश भेजने के लिए 30 लाख रुपए की मांग की। इसके तहत 9 लाख रुपए नकद दिए, 14 लाख रुपए RTGS के जरिए ट्रांसफर किए और बाद में 7 लाख रुपए और नकद दे दिए। इस तरह कुल 30 लाख रुपए आरोपी को दे दिए गए। लेकिन पैसे लेने के बाद आरोपी ने न तो बेटे को विदेश भेजा और न ही कोई प्रक्रिया पूरी की। जब पैसे वापस मांगे तो आरोपी टालमटोल करता रहा और बाद में संपर्क करना भी बंद कर दिया। नरेश भाटिया ने कहा कि जब हमने सख्ती दिखाई तो आरोपी और उसकी पत्नी ने पैसे लौटाने के लिए 5 पोस्ट डेटेड चेक दिए। इनमें से 25 लाख रुपए का एक चेक जब बैंक में लगाया गया तो 23 अगस्त 2019 को वह “सिग्नेचर डिफर” के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद 6 सितंबर 2019 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन आरोपी ने तय समय में भुगतान नहीं किया, जिसके चलते मामला कोर्ट पहुंचा। कोर्ट में आरोपी ने खुद को बताया निर्दोष मामले की सुनवाई के दौरान दविंदर गिल ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह शिकायतकर्ता नरेश भाटिया को नहीं जानता, चेक उसके नहीं हैं और उस पर किए गए साइन फर्जी हैं। उसने यह भी कहा कि उसे साजिश के तहत फंसाया गया है। वहीं शिकायतकर्ता ने बैंक रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन और अन्य दस्तावेज पेश किए, जिससे यह साबित हुआ कि पैसे दिए गए थे और चेक भी गिल द्वारा ही जारी किए गए थे। कोर्ट ने सभी सबूतों और गवाहों को ध्यान में रखते हुए पाया कि गिल अपने बचाव में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि “सिग्नेचर डिफर” के कारण चेक बाउंस होना भी कानून के तहत अपराध है और इससे आरोपी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी दिव्या शर्मा की कोर्ट ने दविंदर सिंह गिल को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए 2 साल की साधारण कैद की सजा सुनाई। साथ ही आरोपी को 25 लाख रुपए शिकायतकर्ता को मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। यदि आरोपी मुआवजा नहीं देता है, तो उसे 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। कोर्ट ने अपने फैसले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है, जिसमें आरोपी ने भरोसे का गलत फायदा उठाया और लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया से बचने की कोशिश की। ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती, क्योंकि इससे बैंकिंग व्यवस्था और लेन-देन की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। जानिए वाटेंड क्रिस्पी खेहरा का रोल कोर्ट के आदेश के अनुसार, क्रिस्पी खेहरा का इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण और सीधा रोल सामने आया है। रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी दविंदर सिंह गिल ने शिकायतकर्ता को यह बताया था कि उसकी पत्नी क्रिस्पी खेहरा इमिग्रेशन का काम करती है और वही उसके बेटे को कनाडा भेजने की पूरी प्रक्रिया संभालेगी। इसी भरोसे पर शिकायतकर्ता ने पैसे देने के लिए सहमति दी। कोर्ट में यह भी साबित हुआ कि कुल 30 लाख रुपए में से 14 लाख रुपए सीधे क्रिस्पी खेहरा के बैंक खाते में RTGS के माध्यम से ट्रांसफर किए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह लेन-देन का हिस्सा थी। 2 चेक क्रिस्पी खेहरा के नाम से थे कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने जो रकम दी, वह दविंदर गिल और उसकी पत्नी दोनों को दी गई थी और दोनों ने मिलकर विदेश भेजने का भरोसा दिलाया था। जब काम पूरा नहीं हुआ और शिकायतकर्ता ने पैसे वापस मांगे, तब आरोपी और क्रिस्पी खेहरा ने मिलकर कुल 30 लाख रुपए के 5 पोस्ट डेटेड चेक जारी किए, जिनमें से दो चेक क्रिस्पी खेहरा के नाम से थे। इससे यह स्थापित होता है कि पैसे वापस करने की जिम्मेदारी में भी उसकी भागीदारी थी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान केस विशेष रूप से उस 25 लाख रुपए के चेक से संबंधित था, जो दविंदर सिंह गिल के खाते से जारी हुआ था और बाउंस हो गया। इसलिए इस मामले में सजा उसी को दी गई। बावजूद इसके, कोर्ट के रिकॉर्ड और साक्ष्यों से यह साफ है कि किस्पी खेरा पूरे लेन-देन, पैसे लेने और चेक जारी करने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल रही।  

प्रशासनिक फेरबदल में एसपी ने थानों के टीआई को किया बदल, देर रात के आदेश

नीमच   मध्य प्रदेश के नीमच जिले में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन में अहम बदलाव किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक अंकित जायसवाल ने सोमवार देर रात प्रशासनिक फेरबदल करते हुए दो थाना प्रभारियों के तबादले के आदेश जारी किए। इस आदेश के तहत नीमच केंट थाना और मनासा थाना के थाना प्रभारियों को आपस में बदला गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम जिले में बेहतर पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उठाया गया है।