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राजस्थान पुलिस ने रोहित गोदारा गैंग के शार्प शूटर को पकड़ा, 27 मामले दर्ज

जयपुर  राजस्थान पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) के जरिए अहम सफलता हासिल की है। जयपुर में की गई इस कार्रवाई के तहत सुजानगढ़ के चर्चित जेडीजे ज्वैलर्स फायरिंग कांड के मुख्य आरोपी कृष्ण सिंह को तीन साल बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, कृष्ण सिंह कुख्यात रोहित गोदारा और वीरेन्द्र चारण गिरोह का सक्रिय सदस्य रहा है। वह रंगदारी वसूली के लिए फायरिंग और हत्या जैसे गंभीर मामलों में लंबे समय से वांछित था और लगातार फरार चल रहा था। इस कार्रवाई में पुलिस ने एक और बड़े अपराधी लक्ष्मण सिंह को भी दबोचा है, जो 27 मुकदमों में शामिल आदतन अपराधी बताया जा रहा है। वैशाली नगर और मकराना क्षेत्र की पुलिस के लिए वह लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ था। एजीटीएफ की इस कार्रवाई को संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस अब दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर गिरोह के नेटवर्क और अन्य आपराधिक वारदातों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी हुई है। इस पूरे अभियान का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दिनेश एमएन के निर्देशन में किया गया। टीम प्रभारी प्लाटून कमांडेंट सोहन सिंह सहित पुलिस दल के अन्य सदस्यों ने भी इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजस्थान पुलिस ने इस कार्रवाई के जरिए साफ संदेश दिया है कि अपराधी चाहे कहीं भी छिपे हों, कानून के हाथ उनसे ज्यादा दूर नहीं हैं।

गर्लफ्रेंड ने वीडियो बनाई, बॉयफ्रेंड जलता रहा; वेस्टर्न स्टाइल रोमांस के चक्कर में हुई यह घटना

बेंगलुरु किरण और 27 साल की प्रेरणा पिछले एक साल से रिलेशनशिप में थे। दोनों ही एक ही टेलीकॉम कंपनी में साथ काम करते थे।  जब प्रेरणा का भाई और मां घर पर नहीं थे, तब उसने किरण को अपने घर बुलाया। पुलिस जांच के अनुसार, प्रेरणा ने किरण को एक विदेशी स्टाइल में प्रपोजल देने के लिए कहा। उसने किरण को एक कुर्सी पर बैठाया और उसके हाथ-पैर बांधने शुरू कर दिए। जब किरण ने हाथ-पैर कसकर बांधने पर सवाल उठाया, तो प्रेरणा ने उसे यह कहकर शांत कर दिया कि यह एक रोमांटिक सरप्राइज का हिस्सा है। किरण ने अपनी प्रेमिका पर भरोसा किया और विरोध नहीं किया। जैसे ही किरण पूरी तरह असहाय हुआ कि प्रेरणा ने उसके ऊपर पेट्रोल छिड़क दिया और आग लगा दी। कुर्सी से बंधे होने के कारण किरण के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने खुलासा किया है कि यह केवल एक हत्या नहीं थी, बल्कि एक विकृत मानसिकता का प्रदर्शन था। सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि जब किरण आग की लपटों में घिरा हुआ था तो आरोपी प्रेरणा अपने मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो बना रही थी। पुलिस को संदेह है कि पेट्रोल पहले से ही घर में लाकर रखा गया था। यह साबित करता है कि यह क्षण भर के गुस्से में की गई वारदात नहीं बल्कि एक सोची-समझी हत्या थी। हत्या के पीछे का मकसद प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि प्रेरणा इस बात से बेहद नाराज थी कि किरण उसे नजरअंदाज कर रहा था और उसने शादी करने से इनकार कर दिया था। इसी गुस्से और बदले की भावना ने उसे इस क्रूर कदम को उठाने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में प्रेरणा ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। उसने दावा किया कि वह वॉशरूम में थी और बाहर निकलने पर उसने किरण को जलते हुए पाया। हालांकि, सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक सबूतों ने उसके झूठ की पोल खोल दी, क्योंकि किरण अपने साथ कोई ज्वलनशील पदार्थ लेकर नहीं आया था। पुलिस ने प्रेरणा को हिरासत में ले लिया है। हत्या का मोबाइल वीडियो पुलिस के लिए सबसे बड़ा सबूत बन गया है।

कपल्स के लिए पुलिस विभाग का कदम: 33 ट्रांसफर, पति-पत्नी एक ही जिले में करेंगे सेवा

रोहतास  शाहाबाद पुलिस प्रक्षेत्र के चारों जिलों रोहतास, भोजपुर, बक्सर और कैमूर में तैनात 33 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण किया गया है। इस निर्णय के बाद अब प्रक्षेत्र में कार्यरत पति-पत्नी एक ही जिले में रहकर अपनी ड्यूटी कर सकेंगे। प्रक्षेत्र के डीआईजी डॉ. सत्यप्रकाश के अनुसार, पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर यह तबादला आदेश जारी किया गया है। यह कदम पुलिसकर्मियों के मानसिक तनाव को कम करने और उनके पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। पांच वर्ष की सेवा का तय था पैमाना  तबादलों के लिए कड़े मानक निर्धारित किए गए थे। इसके तहत केवल उन्हीं कर्मियों के आवेदनों पर विचार किया गया, जिन्होंने अपनी वर्तमान तैनाती स्थल पर कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी कर ली है। नियमानुसार किसी भी पुलिसकर्मी को उसके गृह जिले में पोस्टिंग नहीं दी गई है। साथ ही, पूरे सेवाकाल में इस आधार पर अधिकतम दो बार ही स्थानांतरण की सुविधा दी जाएगी। चूंकि ये सभी तबादले कर्मियों के स्वयं के अनुरोध पर किए गए हैं, इसलिए विभाग की ओर से किसी प्रकार का यात्रा या स्थानांतरण भत्ता नहीं दिया जाएगा। इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा। मुख्यालय के निर्देशानुसार, कर्मियों को नए जिले के लिए विरमित करने से पहले संबंधित कार्यालय प्रमुख उनकी सर्विस बुक और अन्य अभिलेखों की गहन जांच करेंगे। किसी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर स्थानांतरण रोक दिया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत कुल 70 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 37 आवेदनों को तकनीकी कारणों से निरस्त कर दिया गया। पात्रता पूरी करने वाले 33 पुलिसकर्मियों के तबादले की सूची जारी की गई है। पारिवारिक आधार पर प्रमुख तबादले     अनि राधिका रमण का सारण से कैमूर जिला बल में तबादला किया गया है। उनकी पत्नी रोहतास में शिक्षिका हैं।     अनि रश्मि का रोहतास से बांका जिला बल में स्थानांतरण हुआ है। उनके पति भागलपुर में पदस्थापित हैं।     अनि रणधीर कुमार का सहरसा से रोहतास जिला बल में तबादला किया गया है। उनकी पत्नी औरंगाबाद में शिक्षिका हैं।     सिपाही स्मृति का रोहतास से जमुई जिला बल में स्थानांतरण हुआ है। उनके पति जमुई में सहायक प्राध्यापक हैं। क्यों खारिज हुए 37 आवेदन? पुलिस मुख्यालय की समिति ने 70 में से 37 आवेदनों को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया। इसके प्रमुख कारण रहे:  

भोपाल की हाई-प्रोफाइल लड़कियां रील्स से नशा बेचने का तरीका सीख रही थीं, VIP स्टाइल में पुलिस को चकमा

भोपाल  राजधानी भोपाल में क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने नशा तस्करी के एक ऐसे गिरोह को दबोचा है, जो लग्जरी और सादगी के मुखौटे के पीछे काला कारोबार कर रहा था। भोपाल पुलिस ने दो युवतियों और उनके एक पुरुष साथी को ओडिशा से गांजा लाकर भोपाल में बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। ये आरोपी एसी फर्स्ट क्लास में वीआईपी बनकर सफर करते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि पुलिस महिलाओं और रईस दिखने वाले यात्रियों की तलाशी कम ही लेती है। पुलिस ने इनके पास से करीब 6.285 किलो गांजा और मोटरसाइकिल बरामद की है। रील्स ने दिखाया रास्ता पकड़ी गई युवतियों में से एक M.Com की छात्रा है जो कॉल सेंटर में काम करती है, जबकि दूसरी 10वीं पास है और एक दुकान पर काम करती थी। उनका साथी प्रॉपर्टी डीलर है। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि उन्हें ओडिशा से सस्ते गांजे की तस्करी का आईडिया सोशल मीडिया रील्स, विज्ञापनों और खबरों से मिला था। उन्होंने देखा कि ओडिशा में गांजा 4,000–5,000 रुपये प्रति किलो मिल जाता है, जबकि भोपाल में इसे 40,000 रुपये तक में बेचा जा सकता है। तस्करों ने पुलिस की मानसिकता को हथियार बनाया था, उन्हें लगा कि अमीर दिखने वालों पर हाथ नहीं डाला जाएगा। पर अपराधियों का हर हाई फाई तरीका पुलिस के रडार पर है। जांच अधिकारी विदेशी टूरिस्ट का हुलिया बनाकर करते थे सफर इन युवतियों का तस्करी का तरीका बेहद शातिर था। ये महंगे कपड़े पहनती थीं और उनके पास मौजूद बैग विदेशी पर्यटकों जैसे होते थे। वे जानबूझकर एसी फर्स्ट क्लास में टिकट बुक कराती थीं। उन्हें पता था कि पुलिस आमतौर पर एसी कोच के यात्रियों, खासकर महिलाओं पर शक नहीं करती। इसी एलीट क्लास की आड़ में वे भारी मात्रा में गांजा छिपाकर भोपाल लाती थीं। लेकिन एक ग्राहक द्वारा पुलिस मुखबिर को दी गई सूचना ने इनके इस सफर का अंत कर दिया।    

पुलिस की गांजा तस्करों पर बड़ी कार्यवाही, 03 आरोपियो को 6.285 किलोग्राम गांजा के साथ किया गिरफ्तार

भोपाल  थाना अयोध्या नगर,जोन-02 पुलिस की गांजा तस्करों पर बड़ी कार्यवाही, 02 युवती सहित  03 आरोपियो को 6.285 किलोग्राम गांजा के साथ किया गिरफ्तार – आरोपियों से 6.285 किलों गांजा और मोटर सायकिल सहित कुल 2.70 लाख रुपये का मसरुका जब्त जप्त । – उडिसा से लाकर भोपाल में खपाते थे गांजा ।   – रीवा एवं रायसेन निवासी आरोपीगण, भोपाल में किराये से रहकर कर रहे थे गांजा तस्करी । – स्कूल कॉलेज के युवाओं और स्लम एरिया के छोटे मजदूरों को करते थे टारगेट । – पुलिस उपायुक्त जोन 2 विवेक सिंह के निर्देशन में गांजा तस्करो पर सख्त कार्यवाही।                गृह मंत्रालय की गाइडलाइन अनुरुप पुलिस मुख्यालय द्वारा चलाये जा रहे नशा मुक्ति अभियान और अवैध मादक पदार्थों के तस्करों पर सख्त कार्यवाही हेतु पुलिस आयुक्त संजय कुमार (भापुसे) एवं अति. पुलिस आयुक्त अवधेश गोस्वामी (भापुसे) द्वारा लगातार निर्देशित किया जा रहा है ।                 उक्त दिशा निर्देशों के तारतम्य मे पुलिस उपायुक्त जोन-02 विवेक सिंह (भापुसे) के सतत निर्देशन में, अति.पुलिस उपायुक्त गौतम सोलंकी के पर्यवेक्षण तथा सहायक पुलिस आयुक्त एम.पी.नगर संभाग मनीष भारद्वाज (भापुसे) के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक महेश लिल्हारे के नेतृत्व मे थाना अयोध्यानगर पुलिस द्वारा गांजा तस्करों को चिह्नित कर सतत नजर बनाए रखते हुए गांजा बेचने की फिराक में 02 युवती और  01 युवक सहित 03 गांजा तस्कर आरोपियों को 6.285 किलो गांजा व 1 मो.सा. सहित गिरफ्तार कर लगभग 2.70 लाख रुपये का मसरुका जब्त करने में सफलता प्राप्त की । घटना का विवरणः- वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस टीम द्वारा मामूर मुखबिरो से सूचना पर अरेड़ी रोड पर निर्माणाधीन बिल्डिंग के पास आम रोड से 2 युवती और 1 युवक सहित 3 गांजा तस्करो को पकडा जिनके कब्जे से एक  जिक्सर मोटर सायकिल तथा 6.285 किलोग्राम गांजा कीमती करीबन 02.70 लाख रुपये जप्त किया गया। आरोपियों ने पुछताछ में नाम पता- 1. नाम विनय कुमार लोधी पिता घनश्याम सिंह लोधी उम्र 25 साल निवासी ग्राम कठोलिया थाना उदयपुरा जिला रायसेन हालपता अशोक बिहार कालोनी थाना अशोका गार्डन भोपाल, 2. अंकिता ठाकुर पिता केशव सिंह ठाकुर उम्र 19 साल निवासी उदयपुरा बरेली रायसेन हालपता अशोक बिहार कालोनी थाना अशोका गार्डन भोपाल तथा 3. आरोही सिंह उर्फ सरीता चौहान पिता केशव सिंह चौहान उम्र 28 साल निवासी उपरेहटी मोहल्ला थाना सिटी कोतवाली जिला रीवा  हाल पता नबाब टी प्वाईन्ट के पास मल्टी अशोक बिहार कालोनी थाना अशोका गार्डन भोपाल बताया। – आरोपियों से आगे की ट्रेल के बारे में जानकारी ली गई पुछताछ में आरोपीगणों ने बताया कि उडीसा से गांजा खरीद लाकर भोपाल एवं रायसेन में बेचते थे । विशेष तौर पर ओडिशा से गांजा युवतियां लेकर आती थी और अपने साथी मित्र आरोपी विनय के साथ भोपाल में कालेज के छात्र छात्राओं तथा स्लम एरिया के मजदूर वर्गों टारगेट करते हुए कुछ पैडलर्स को सप्लाई करते थे, जिसके बारे में जानकारी लेकर पुलिस विवेचना कर रही है। –  आरोपीगण किराये के मकान में अपने परिवार से अलग रहते हैं। स्वयं के बड़े खर्चे, लग्जरी लाईफ स्टाईल और जल्दी ज्यादा पैसा कमाने हेतु गांजा तस्करी का काम शुरू करना बताया ।  जप्तमाल–  गांजा 6.285 किलोग्राम, 01 मोटर सायकिल. जिक्सर क्र एम.पी.04 जेड.जी.0687, कुल कीमत लगभग 270000/-रूपये ) । आरोपीः– 1. विनय कुमार लोधी पिता घनश्याम सिंह लोधी उम्र 25 साल निवासी ग्राम कठोलिया थाना उदयपुरा जिला रायसेन  हालपता –  अशोक बिहार कालोनी थाना अशोका गार्डन भोपाल  शिक्षा- स्नातक व्यवसाय-  प्राँपर्टी का काम करता था  । पहले पेटीएम में काम कर चुका है। 2. अंकिता ठाकुर पिता केशव सिंह ठाकुर उम्र 19 साल निवासी उदयपुरा बरेली रायसेन। हालपता अशोक बिहार कालोनी थाना अशोका गार्डन भोपाल  शिक्षा-  10वीं व्यवसाय- दुकान पर काम करती हैं  । 3. आरोही सिंह चौहान पिता कौशल सिंह चौहान उम्र 28 साल निवासी उपरेहटी मोहल्ला थाना सिटी कोतवाली जिला रीवा  हालपता – नबाब टी प्वाईन्ट के पास मल्टी अशोक बिहार कालोनी थाना अशोका गार्डन भोपाल । शिक्षा- एम. काँम  व्यवसाय- काँल सेन्टर में काम करती हैं  । सराहनीय भूमिका –         थाना प्रभारी महेश लिल्हारे, उनि. सुदील देशमुख, उनि. विजय सिह कर्चुली, सउनि मनोज कछवाहा, प्रआऱ 1177 अमित व्यास, प्रआर.3178 बृजेश सिंह, प्रआर 2233 रूपेश सिह जादौन , प्रआर 2307 दिनेश मिश्रा, प्रआर 3330 अतुल सिह, आर 3514 राजेश अन्नोठिया, जितेन्द्र जाट, आर पुष्पेन्द्र, आर अम्बरीश तिवारी, म.आर.3871 मोनिका जयसवाल, म.आर.3489 पूजा राठौड, म.आर.502 अपर्णा कटारे, आर भूपेन्द्र सिंह (टेकनिकल सेल) सराहनीय भूमिका रही ।

महाराष्ट्र में मदरसों पर कटनी पुलिस की कार्रवाई, बिहार से मांगी गई सामाजिक जांच रिपोर्ट

कटनी महाराष्ट्र और कर्नाटक के मदरसों में धार्मिक शिक्षा के लिए बिहार से बच्चों को ले जाने के मामले में इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) भी सक्रिय हो गया है। मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर रविवार को ट्रेन में 163 बच्चों को ले जाते गिरफ्तार किए गए आठों आरोपितों के बारे में पड़ताल की जा रही है। उनके किसी कट्टर धार्मिक संगठन से जुड़े होने की आशंका है। ऐसे में, आईबी एवं जीआरपी के अधिकारियों ने सोमवार को देर रात तक आरोपितों और बिहार से बुलाए गए बच्चों के अभिभावकों से जानकारी जुटाई। वहीं, आठों आरोपितों बच्चों को लातूर और विदर्भ के जिन दो मदरसों में ले जा रहे थे, वहां की जानकारी जुटाने के लिए कटनी पुलिस की टीमें रवाना हो गई है। जांच में पता चलेगा किस तरह की शिक्षा दी जाती है पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने लातूर के मदरसा जामिया अशरफिया अंजूमने इस्लामिया उद्गीर और विदर्भ के दारुल उलूम इमदादिया मदरसा के नाम बताए हैं। इनमें पड़ताल के बाद पता चलेगा कि वहां पर बच्चों को किस तरह की धार्मिक शिक्षा दी जाती है या कोई अन्य कारण से बच्चे भेजे जा रहे थे। वहीं, महिला बाल विकास विभाग ने बिहार के अररिया प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद बच्चों को बिहार भेजा जाएगा। स्वयं को शिक्षक बता रहे हैं आरोपी बिहार के अररिया जिले से बच्चों को ले जाने वाले आठों लोग स्वयं को मदरसों में शिक्षक बता रहे हैं। उनका कहना है कि वे अपने जिले के बच्चों को वर्ष 2016 से मदरसों में धार्मिक शिक्षा देने के लिए ले जा रहे हैं। इनकी भूमिका पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि बिहार में भी मदरसे संचालित हैं। फंडिंग की भी जांच की जा रही निश्शुल्क शिक्षा देने के लिए कौन सा संगठन फंडिंग कर रहा है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही हैं। इस संबंध में आरोपितों में शामिल सद्दाम का कहना था कि मदरसों को समाज की ओर से चंदे के रूप में धार्मिक शिक्षा देने के लिए फंड मिलता है और इससे ही बच्चों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। आरोपियों को समाज को किया सुपुर्द जीआरपी ने आरोपित बनाए गए अररिया क्षेत्र निवासी सद्दाम, अमान उल्ला, मो. जाहिर, आमिर खान, हाफिज अबू तालिम, मो. इस्लाम, नौसाद और राशिद को कटनी में मुस्लिम समुदाय के सुपुर्दगी कर दिया है। मामले की जांच तक आठों को पूछताछ के लिए जीआरपी में उपस्थित होना होगा। वहीं, मंगलवार को लगभग 54 बच्चों के अभिभावक कटनी पहुंचे और उनकी मुलाकात आश्रय गृह में बच्चों से कराई गई। उनके बयान भी दर्ज किए गए।

पुलिस मुख्यालय का सख्त आदेश, 14 दिन में प्रारंभिक जांच पूरी नहीं की तो होगी कार्रवाई

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने राज्यभर के पुलिस अधिकारियों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि यदि किसी मामले में प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry-PE) आवश्यक समझी जाती है, तो उसे अधिकतम 14 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।   पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि के भीतर यह तय करना जरूरी होगा कि मामले में एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए या नहीं। दरअसल अक्सर देखने में आता है कि कुछ मामलों को जांच के नाम पर लंबित रखा जाता है और इस दौरान अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आती हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए मुख्यालय ने सख्ती दिखाई है। जारी निर्देश के अनुसार, थाना प्रभारी केवल उन्हीं मामलों में प्रारंभिक जांच शुरू कर सकते हैं, जिनमें सजा तीन से सात साल के बीच निर्धारित हो, और इसके लिए भी उन्हें पहले डीएसपी स्तर के अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।  हाल ही में एक मामले में जिला पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं कर उसे केवल जांच के दायरे में रखा गया था, जिस पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने भोपाल और इंदौर के पुलिस आयुक्तों सहित सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को यह निर्देश जारी किए हैं। निर्देश में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ‘ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ का हवाला देते हुए दोहराया गया है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। प्रारंभिक जांच केवल सीमित परिस्थितियों में ही की जा सकती है और उसे तय समयसीमा में पूरा करना होगा।  

थाना अरेरा हिल्स पुलिस ने गांजा तस्कर को किया गिरफ्तार, 1300 ग्राम गांजा जप्त

भोपाल   श्रीमान पुलिस आयुक्त भोपाल संजय कुमार एवं श्रीमान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त भोपाल अवधेश गोस्वामी, व श्रीमान पुलिस उपायुक्त जोन-02 विवेक सिंह तथा श्रीमान अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन-2, गौतम सोलंकी एवं श्रीमान सहायक पुलिस आयुक्त एम.पी. नगर, भोपाल मनीष भारद्वाज के निर्देशन मे मादक पदार्थ के संबंध में विरूद्ध त्वरित कार्यवाही के निर्देश के पालन मे थाना अरेरा हिल्स पुलिस द्वारा 01 किलो 300 ग्रांम गांजा जप्त कर 08/20 NDPS ACT के अंतर्गत कार्यवाही की गई ।  घटना का विवरणः- दिनांक 09/04/26 को मुखबिर सूचना कर बताया गया कि खेलछात्रावास के पास भीम नगर थाना अरेरा हिल्स भोपाल में कोई व्यक्ति गांजा लिये बेचने की फिराक में खडा है । मुखबिर की सूचना से उनि नरेन्द्र सिंह परमार द्वारा श्रीमान सहायक पुलिस आयुक्त एमपीनगर को अवगत कराया जाकर मय स्टाफ के मुखबिर द्वारा बताये स्थान पर पहुंचे । मुखबिर द्वारा बताये हुलिये का व्यक्ति खेलछात्रावास के पास हाथ में एक प्लास्टिक का झौला पकडे हुए था जिसे हमराह स्टाफ व गवाहान की मदद से घेराबंदी कर पकड़ा जिसका नाम पता पूछने पर अपना नाम राजू राय पिता रमेश राय उम्र 50 साल निवासी खेल छात्रावास के पास भीम नगर अरेरा हिल्स भोपाल का होना बताया बाद राजू राय को मेरे द्वारा मुखबिर सूचना से अवगत कराकर तलाशी लेने हेतु धारा 50 NDPS Act के अन्तर्गत लिखित नोटिस/सूचना पत्र दिया गया जिसमे उक्त व्यक्ति द्वारा अपनी तलाशी उनि नरेन्द्र सिंह परमार द्वारा कराये जाने हेतु अपनी सहमति दी गई । राजू राय की तलाशी ली जाने पर उसके हाथ में प्लास्टिक के झोला मे पत्ती व दाने का टुकड़े मे बंटा हुआ हल्के हरे रंग का हल्का गीला पदार्थ मिला जिस संबंध मे पंचनामा तैयार किया गया है । उक्त व्यक्ति के पास मिले पदार्थ को देखकर, सूंघ कर, जला कर, रगड कर अनुभव के आधार पर पहचानने पर वह अवैध मादक पदार्थ गांजा होना पाया गया जिस संबंध मे पहचान पंचनामा तैयार किया गया । मादक पदार्थ का तराजू से तौल किया जाने पर प्लास्टिक के झोला सहित मादक पदार्थ गांजा का बजन कुल-1 किलो 300 ग्राम होना पाया गया । आरोपी का जुर्म अजमानती होने से आरोपी को गिरफ्तारी की सूचना से अवगत कराकर माननीय उच्चतम न्यायालय व मानव अधिकार आयोग के निर्देशो का अक्षरशः पालन करते हुये विधिवत समक्ष गवाहन के गिरफ्तार किया गया । आरोपी के विरूद्ध अपक्र. 69/26 धारा 08/20 NDPS ACT का कायम कर विवेचना में लिया गया ।  तलाशी में मिला गांजा – पकड़े गए आरोपी के पास एक प्लास्टिक के झोले में अवैध मादक पदार्थ मिला। जांच के दौरान यह गांजा पाया गया, जिसका कुल वजन करीब 1 किलो 300 ग्राम बताया गया है । कानूनी कार्रवाई – आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट 1985 की धारा 8/20 के तहत मामला दर्ज किया गया है।  पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच जारी – पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं है । मामले की जांच अरेरा हिल्स थाना के जांच अधिकारी उनि नरेन्द्र सिंह परमार द्वारा की जा रही है। सराहनीय भूमिकाः- इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी सुनील शर्मा के निर्देशन एवं मार्गदर्शन मे उनि नरेन्द्र सिंह परमार, सउनि उमेश कुमार, सउनि सुनीता व्यास, सउनि गोविंद प्रसाद, प्र.आर. 2728 देवीदास, प्र.आर. 1626 राधेश्याम, आर. 3256 कालूराम, आर.4491 राजेश कुमार, म.आर. 4344 पूर्णिमा, म.आर. 1518 प्रियंका , म.आर. 1817 सोनम रघुवंशी  की सराहनीय भूमिका रही है ।    

थाने में बड़ा घोटाला: 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड, SP ने कड़ी कार्रवाई की

डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ थाना एक बार फिर विवादों में है। सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित वीडियो ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो सामने आते ही पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एएसआई रोहित खूंटे और आरक्षक लक्ष्मी शंकर कंवर को निलंबित कर दिया है। वायरल हो रहे इस कथित वीडियो में थाना परिसर के भीतर संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। फुटेज में एक एएसआई, जिसे रोहित खूंटे बताया जा रहा है, मोबाइल फोन में एक महिला की तस्वीर को ज़ूम कर देखते नजर आते हैं। यह दृश्य पुलिस आचरण को लेकर कई सवाल खड़े करता है। इसके बाद वीडियो में कथित तौर पर एक वर्दीधारी आरक्षक, जिसे लक्ष्मी शंकर कंवर बताया जा रहा है, नगदी लेकर अपनी जेब में रखते दिखाई देता है।  आगे के हिस्से में एएसआई द्वारा बाहर आकर संबंधित व्यक्ति से और पैसों की मांग करने और “मामला निपटाने” की बात कहने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सामने आए दृश्य पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना रहे हैं और इसी संवेदनशीलता के चलते एसपी ने दोनों पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है। घटनाक्रम ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब यह सब थाने के भीतर हो रहा था, तो क्या थाना प्रभारी को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर यह सब उनकी जानकारी में ही चल रहा था? किसी भी थाने की गतिविधियों की अंतिम जिम्मेदारी थाना प्रभारी की होती है, ऐसे में जांच का दायरा केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रहना चाहिए।  मामला सामने आते ही एसपी अंकिता शर्मा ने “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत त्वरित कदम उठाते हुए वीडियो में दिख रहे एएसआई रोहित खूंटे और आरक्षक लक्ष्मी शंकर कंवर को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई विभाग की सख्ती का संकेत जरूर है, लेकिन साथ ही यह भी सवाल उठता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस विभाग इस पूरे मामले की जांच कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से करता है।  जनता के बीच फिलहाल एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या वर्दी के भीतर चल रही इस कथित ‘सौदेबाज़ी’ पर सख्त कार्रवाई होगी, या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?  

एमपी पुलिस ट्रेनिंग में ‘दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ का पाठ, नए आदेश से हुआ सियासी विवाद

भोपाल  मध्य प्रदेश के पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में अब दिन की शुरुआत 'श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' के पाठ से की जाएगी। पुलिस प्रशिक्षण विंग के इस नए आदेश के बाद प्रदेशभर में एक नय सियासी बवाल खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इसे सरकारी संस्थानों की निष्पक्षता से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा इसे भारतीय सांस्कृतिक और परंपरा का हिस्सा बताकर आदेश का बचाव कर रही है। आपको बता दें कि, पुलिस प्रशिक्षण विंग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने प्रदेश के सभी पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों (PTS) को निर्देश जारी किया है, जिसमें हर रोज के प्रशिक्षण की शुरुआत से पहले परिसर में लगे लाउडस्पीकर पर 'श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' बजाने साथ ही, उसका पाठ करने के आदेश दिए हैं। ताकि प्रशिक्षक और भर्ती दोनों इसे सुन सकें। एडीजी ने बताया आदेश का कारण एडीजी ने कहा कि दक्षिणामूर्ति को ज्ञान और विवेक का प्रतीक माना जाता है। उनके मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी के लिए सिर्फ जानकारी होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे विवेक, संवेदनशीलता और सहानुभूति भी होनी चाहिए। उनका मानना है कि, स्तोत्र के जरिए प्रशिक्षुओं में नैतिक स्पष्टता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। पहले भी दिया जा चुका ऐसा ही निर्देश ये पहली बार नहीं, जब पुलिस प्रशिक्षण में धार्मिक या दार्शनिक ग्रंथों को शामिल किया गया है। पिछले साल भी विभाग ने 8 पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों में रात के ध्यान सत्र से पहले भागवद गीता का एक अध्याय पढ़ने का सुझाव दिया था। इससे पहले प्रशिक्षुओं को राम चरितमानस के दोहे पढ़ने के लिए भी कहा गया था। अधिकारियों का कहना था कि इससे करीब 4 हजार प्रशिक्षुओं में अनुशासन और नैतिक सोच को बढ़ावा मिलेगा। कांग्रेस ने उठाए सवाल नए आदेश के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि कानून व्यवस्था संभालने वाली संस्थाओं को पूरी तरह तटस्थ होना चाहिए और किसी एक आस्था से जुड़ी परंपरा को बढ़ावा देना ठीक नहीं है। भाजपा ने किया पलटवार वहीं, दूसरी तरफ भाजपा एडीजी की इस पहल के बचाव में नजर आई। पार्टी के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि गीता या दक्षिणामूर्ति स्तोत्र जैसे ग्रंथ सांप्रदायिक नहीं बल्कि ज्ञान, अनुशासन और कर्तव्य की शिक्षाएं देते हैं। उनके मुताबिक, इन्हें सांप्रदायिक बताना भारत की सभ्यतागत परंपरा को न समझने जैसा है। अधिकारियों का तर्क पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले से ही योग, ध्यान और मानसिक अनुशासन शामिल हैं और यह पहल उसी का हिस्सा है। उनका दावा है कि, इसका उद्देश्य धार्मिक अभ्यास लागू करना नहीं, बल्कि नैतिक सोच और संवेदनशीलता को मजबूत करना है। हालांकि, इस निर्देश के बाद एक बार फिर मध्य प्रदेश की पुलिस ट्रेनिंग व्यवस्था सियासी बहस के केंद्र में आ गई है, जहां सांस्कृतिक परंपरा और संस्थागत तटस्थता को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।