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पंजाब में गैंगस्टर नेटवर्क पर शिकंजा, ISI कनेक्शन के आरोप में 18 युवक पकड़े गए

लुधियाना पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के पंजाब में फैलते नेटवर्क को तोड़ने के लिए पंजाब पुलिस ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया है। कार्रवाई के दौरान विभिन्न जिलों में छापे मारकर कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। अकेले लुधियाना में 18 युवकों को पूछताछ के लिए राउंडअप किया है।  खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर शुरू हुए अभियान में सामने आया कि दुबई में बैठा शहजाद भट्टी सोशल मीडिया के जरिए बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा था। पुलिस के अनुसार हिरासत में लिए गए अधिकांश युवक भट्टी को सोशल मीडिया पर फॉलो करते थे और उसके वीडियो व संदेश लगातार साझा कर रहे थे। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि युवाओं को पैसों और नशे का लालच देकर ड्रग्स तस्करी, अवैध हथियारों की सप्लाई और आतंकी गतिविधियों में कूरियर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि संदिग्धों के नेटवर्क और गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस अभियान से पंजाब में भट्टी के नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा। 

कठुआ से युवक गिरफ्तार, आर्मेनिया से संचालित हो रहा था नशा तस्करी का बड़ा नेटवर्क

कठुआ  पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। अभी तक की जांच में सामने आया है कि कठुआ के एक छोटे से गांव चक्क दराब खां का रहने वाला तस्कर अर्मेनिया में बैठकर नेटवर्क चला रहा है। यह तस्कर पाकिस्तान और पंजाब में सक्रिय नशा तस्करों के संपर्क में है और सीमा पार से पंजाब के रास्ते हेरोइन मंगाकर आगे सप्लाई कर रहा है। पुलिस ने कठुआ के चक्क दराब खां से एक नशा तस्कर को हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में यह राजफाश किया है। पुलिस आगे की जांच में जुटी है। जानकारी के अनुसार, एक पुख्ता सूचना पर कठुआ के बिलावर पुलिस स्टेशन के एसएचओ मुश्ताक अहमद ने गुरुवार को मुनीश कुमार नामक युवक को गिरफ्तार किया, जिसके कब्जे से करीब 15 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पूछताछ में आरोपित ने बताया कि उसने अपने घर में भी भारी मात्रा में नशे की खेप छिपा रखी है। आरोपित की निशानदेही पर पुलिस ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में घर पर दबिश दी। तलाशी के दौरान पुलिस ने 420 ग्राम से अधिक हेरोइन बरामद की। पूछताछ में पता चला कि आरोपित ने यह खेप गांव के ही एक नशा तस्कर से ली है, जो छह महीने पहले अर्मेनिया भाग गया था। उसने पंजाब सीमा से खेप को मुनीश तक पहुंचाया। मुनीश अब इसे आगे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पूरे जिले में सक्रिय नशा तस्करों को बेच रहा था। सूत्रों ने बताया कि हेरोइन की जांच से पता चला है कि ऐसी सप्लाई सीमा पार पाकिस्तान से भेजी जाती है। अब पुलिस कठुआ और पंजाब में सक्रिय नशा तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुट गई है। इसके तहत कई टीमें भी गठित की गई हैं। बता दें कि नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत पुलिस लगातार नशा तस्करों के खिलाफ विशेष मुहिम चला रही है। जिसमें कई बड़ी सफलताएं मिली हैं।

बिना गार्ड वाले ATM बनते थे निशाना: जालंधर पुलिस ने लुटेरे गिरोह का किया पर्दाफाश

जालंधर जालंधर देहात पुलिस ने एटीएम लूट की बड़ी वारदातों को अंजाम देने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने भोगपुर के यूके बैंक और किशनगढ़ के एसबीआई बैंक के एटीएम को निशाना बनाने वाले तीन आरोपियों कमलजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह और हरप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया। जालंधर के एसएसपी हरविंदर सिंह विर्क ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि बीती 1 और 2 मई की मध्यरात्रि को अपराधियों ने दो अलग-अलग जगहों पर एटीएम लूटने की कोशिश की थी। पहली वारदात भोगपुर स्थित यूके बैंक के एटीएम में हुई और दूसरी किशनगढ़ में एसबीआई बैंक के एटीएम में। इन घटनाओं की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत विशेष टीमों का गठन किया। तकनीकी जांच और खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की और गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान कमलजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह और हरप्रीत सिंह के रूप में हुई है। ड्राइवर बनकर करते थे रेकी पुलिस पूछताछ में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी पेशे से ड्राइवर हैं। अपनी इसी नौकरी की आड़ में वे अलग-अलग रूटों पर जाते थे और ऐसे एटीएम की पहचान करते थे जहां सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता नहीं होते थे। एसएसपी विर्क ने बताया कि यह गिरोह विशेष रूप से उन एटीएम को टारगेट करता था, जहां रात के समय कोई सिक्योरिटी गार्ड तैनात नहीं होता था। वारदात से पहले आरोपी कई दिनों तक उस इलाके की रेकी करते थे ताकि पुलिस की गश्त और स्थानीय हलचल का पता लगा सकें। हथियार और वाहन बरामद गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वह गाड़ी भी बरामद की है, जिसका इस्तेमाल वे वारदात के बाद भागने के लिए करते थे। इसके अलावा, एटीएम मशीन को काटने और तोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कटर और अन्य लोहे के औजार भी पुलिस ने जब्त किए हैं। पुलिस का मानना है कि इन आरोपियों की गिरफ्तारी से इलाके में एटीएम लूट की घटनाओं पर लगाम लगेगी। आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने पहले कितनी और वारदातों को अंजाम दिया है। रिमांड पर शुरू हुई पूछताछ पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उन्हें माननीय अदालत में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने उनका रिमांड हासिल किया है। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ करेगी। पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा की गई पिछली वारदातों के बारे में भी अहम सुराग मिल सकते हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि चोरी किए गए कैश को वे कहां ठिकाने लगाते थे।  

30 लाख की वसूली के आरोप में फंसे पूर्व SP: ग्वालियर कोर्ट ने 4 पुलिसकर्मियों को किया तलब

ग्वालियर  ग्वालियर के विशेष सत्र न्यायालय ने दो साल पुराने मामले में भोपाल के DIG राजेश सिंह चंदेल (तत्कालीन ग्वालियर एसपी) समेत तत्कालीन टीआई, एसआई और हवलदार पर डकैती का मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं. परिवाद मामले की सुनवाई करते हुए स्पेशल कोर्ट ने ये आदेश दिया. पीड़ित ने पुलिस के खिलाफ याचिका लगाई थी। धोखाधड़ी केस में 30 लाख वसूलने का आरोप मामले के अनुसार ग्वालियर के थाटीपुरा थाना पुलिस ने दिसंबर 2024 में ग्वालियर के विक्रम राणा समेत दो लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था. इसी मामले में समझौते के नाम पर 30 लाख रुपये वसूलने का आरोप विक्रम के भाई अनूप राणा ने परिवाद में लगाया था. सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने आईपीसी राजेश चंदेल सहित 03 पुलिसकर्मियों पर डकैती, साजिश रचने और सबूत मिटाने का मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। शिकायत की तो उल्टा जेल भेज दिया शिकायतकर्ता पक्ष के मुताबिक, अनूप राणा के भाई पर थाटीपुर थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज था, जिसमें फरियादी से समझौता हो चुका था। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने पहले 5 लाख रुपए लिए और बाद में और पैसों की मांग करने लगी। कोर्ट में दी गई दलील के अनुसार, तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह के इशारे पर हवलदार संतोष वर्मा ने अनूप राणा के घर से 9.50 लाख रुपए और मामले से जुड़ी एक महिला आरोपी के घर से 15 लाख रुपए लिए। एसपी से की थी लिखित शिकायत अनूप राणा ने जब तत्कालीन SP राजेश चंदेल से इसकी लिखित शिकायत की, तो कार्रवाई करने के बजाय मामला दोबारा थाटीपुर थाने भेज दिया गया। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने अनूप राणा को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने साल 2024 में अदालत का दरवाजा खटखटाया। CCTV फुटेज डिलीट होने पर कोर्ट सख्त सुनवाई के दौरान कोर्ट ने थाटीपुर थाने के CCTV फुटेज मांगे थे। इस पर पुलिस की ओर से कहा गया कि 3 जनवरी 2024 से पहले के फुटेज डिलीट हो चुके हैं। कोर्ट ने इस जवाब पर सख्त नाराजगी जताई। मामले में रेडियो पुलिस अधीक्षक की जांच का भी जिक्र सामने आया, जिसमें थाने के स्टाफ को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके थे। अदालत ने इसे भी रिकॉर्ड पर लिया। नौकरी के नाम पर ठगी केस से शुरू हुआ विवाद पुलिस का दावा है कि यह मामला नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह की जांच से जुड़ा है और अनूप राणा व उसका भाई उसी रैकेट का हिस्सा थे। वहीं, अनूप राणा का कहना है कि वह खुद ठगी का शिकार हुआ था और अपने भाई की मदद के लिए थाने पहुंचा था, लेकिन पुलिस ने उसे ही आरोपी बना दिया। आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को बचाते हुए उससे और उसके भाई से लाखों रुपए वसूले। आखिर क्या है पूरा मामला ? फरियादी के वकील अशोक प्रजापति के मुताबिक "फ़रवरी 2024 में इन पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के ख़िलाफ़ लगाये गए परिवाद में बताया गया है विक्रम राणा और चन्द्रलेखा जैन के ख़िलाफ़ दिसंबर 2023 में धोखाधड़ी का मामला थाटीपुर थाने में दर्ज किया गया था. थाटीपुर पुलिस ने उस केस के फ़रियादी से समझौता कराने के नाम पर 5 लाख 80 हज़ार रुपये लिए. इसके बाद 24 दिसंबर 2023 को दोनों आरोपियों विक्रम और चंद्रलेखा को थाने बुलाया, जहां 25 लाख रुपये की और डिमांड की गई. इस पर दोनों आरोपियों विक्रम से 9 लाख 75 हज़ार और चंद्रलेखा के घर से 15 लाख रुपये (कुल 24 लाख 75 हज़ार रुपये) मंगवा कर रख लिये गए. पुलिस द्वारा 30 लाख रुपये और देने का दबाव बनाया गया. जब फिर से और रुपये मांगे गए तो फरियादियों ने रुपये देने से इंकार कर दिया। एसपी पर आरोप- शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं की परिवाद में दावा किया गया कि जब पुलिस को और रुपये नहीं मिले तो उन्होंने फरियादी को षड्यंत्रकारी बनाकर जेल भिजवा दिया गया. परेशान होकर मामले की शिकायत विक्रम के भाई अनूप राणा ने तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल से भी की लेकिन उन्होंने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की. इन हालतों से परेशान हो कर फ़रियादी ने न्यायालय में पुलिस के ख़िलाफ़ ही याचिका दायर की. न्यायालय ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने के आदेश दिए।   साक्ष्य मिटाने और साजिश के आरोप फरियादी के अधिवक्ता अशोक प्रजापति के मुताबिक "न्यायालय ने पुलिस से थाटीपुर थाने में लगे सीसीटीवी के फुटेज बतौर साक्ष्य मांगे लेकिन पुलिस ने हलफनामा दिया, जिसमें लिखा था कि 3 जनवरी 2024 से पहले के सीसीटीवी फुटेज डिलीट हो चुके हैं. पुलिस पर लापरवाही और ऐसे जवाब पर नाराजगी जताते हुए विशेष सत्र न्यायालय ने सभी तथ्यों को संज्ञान में लिया और सोमवार को इस परिवाद में तत्कालीन एसपी आईपीएस राजेश चंदेल, तत्कालीन थाटीपुर थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ, उपनिनिरीक्षक अजय सिंह सिंह सिकरवार और आरक्षक संतोष वर्मा के खिलाफ लूट, डकैती, साक्ष्य मिटाने और साजिश रचने का केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

पंजाब विजिलेंस ऑफिस में CBI रेड: भुल्लर रिश्वत मामले में अधिकारी का रीडर पकड़ा गया

चंडीगढ़ सीबीआई ने निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े रिश्वत मामले में कार्रवाई करते हुए सोमवार देर शाम मोहाली स्थित पंजाब विजिलेंस ब्यूरो कार्यालय पर छापा मारा और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों में एक वरिष्ठ अधिकारी के रीडर को हिरासत में लिया। हालांकि, सीबीआई या पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की ओर से किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई, लेकिन अकाली नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक्स पर दावा किया कि केंद्रीय एजेंसी ने '20 लाख रुपये की रिश्वत कांड में एक विजिलेंस अधिकारी से 13 लाख रुपये बरामद किए हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि भगवंत मान को मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। विजिलेंस ब्यूरो या पंजाब पुलिस के किसी भी अधिकारी ने फोन कॉल या संदेशों का जवाब नहीं दिया।गौर हो कि पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी भुल्लर को अक्तूबर 2025 में सीबीआई ने रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया था।

IED धमाकों के बाद पंजाब में हाई अलर्ट, हलवारा एयरफोर्स स्टेशन पर सुरक्षा बढ़ाई गई

जालंधर/अमृतसर जालंधर और अमृतसर में हुए आईईडी धमाकों के बाद भारतीय वायु सेना केंद्र हलवारा में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सेना केंद्र के मुख्य द्वार के बाहर जिला लुधियाना ग्रामीण पुलिस के दर्जनों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गये हैं। गुरुवार रात 10 बजे के करीब एसएसपी डॉ अंकुर गुप्ता खुद नाकेबंदी की कमान संभाले नजर आये और सभी वाहनों की गहन तलाशी ली जा रही है।  लुधियाना बठिंडा राजमार्ग पर भारतीय वायु सेना केंद्र हलवारा कस्बा सुधार बाजार और आसपास के इलाके में पुलिस की गश्त हो रही है और हूटर बजाते सुरक्षा वाहन लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं। जिला लुधियाना ग्रामीण पुलिस के अधीन सभी थाना चौकियों से आए कई अधिकारी और मुलाजिम वायु सेना केंद्र के आसपास सभी जगहों की कड़ी निगरानी कर रहे हैं और हर एक संदिग्ध से इलाके में होने के बारे में पूछताछ की जा रही है। गौरतलब है कि भारत के अहम लड़ाकू विमानों के बेस हलवारा वायु सेना केंद्र में पहले से थ्री लेयर सुरक्षा प्रणाली तैनात है जिसके चलते अंदर तो परिंदा भी पर नहीं मार सकता लेकिन किसी संभावित थ्रेट के मद्देनजर स्टेशन परिसर के बाहर राज मार्ग और सभी लिंक सड़क पर सिविल पुलिस की गश्त तेज कर दी गई है। एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता के अलावा ग्रामीण पुलिस के अन्य बड़े अधिकारी भी पॉइंट टू पॉइंट नाकेबंदियों की समीक्षा कर रहे हैं। सिविल कपड़ों में खुफिया विभागों के अधिकारी और मुलाजिम भी नजर बनाए हुए हैं। वायु सेना केंद्र के चारों तरफ बनी मजारों और अन्य स्थानों पर बैठने वाले लोगों समेत पंचायतों से भी कहा गया है कि किसी भी संदिग्ध के बारे में पुलिस को तुरंत जानकारी दी जाए। गौरतलब है कि एक दशक पहले भारतीय वायु सेना केंद्र हलवारा स्थित सेना के सीवी गोले इंडोर ऑडिटोरियम के बाहर एक मारुती कार में आईईडी बम लगाया गया था जिसे समय रहते डीफ्यूज कर दिया गया था।  

मरीजों की बीमारी पर ‘कमीशनखोरी’ का इलाज!

मरीजों की बीमारी पर ‘कमीशनखोरी’ का इलाज! राजपुर अस्पताल के तीन डॉक्टर लोकायुक्त के शिकंजे में, पैथोलॉजी जांच को बना रखा था ‘कमाई का धंधा’  बड़वानी सरकारी अस्पताल, जहां मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं अगर डॉक्टर बीमारी नहीं बल्कि “कमीशन” देखने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना तय है। ऐसा ही शर्मनाक मामला राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सामने आया, जहां तीन डॉक्टर मरीजों को निजी पैथोलॉजी लैब पर भेजने के एवज में मोटा कमीशन वसूलते पकड़े गए। विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन की इंदौर इकाई ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तीनों डॉक्टरों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि अस्पताल में लंबे समय से “जांच के नाम पर कमीशन” का खेल चल रहा था और मरीजों को सिर्फ इसलिए एक विशेष लैब पर भेजा जा रहा था ताकि डॉक्टरों की जेब गर्म होती रहे। शिकायतकर्ता अदनान अली, जो राजपुर की एक पैथोलॉजी लैब में मैनेजर है, ने लोकायुक्त को बताया कि पहले डॉक्टर 20 प्रतिशत कमीशन लेते थे, लेकिन पिछले महीने से लालच इतना बढ़ गया कि तीनों ने मिलकर सीधे 50 प्रतिशत हिस्सा मांगना शुरू कर दिया। यानी मरीजों की जेब कटे और डॉक्टरों की कमाई बढ़े — यही खेल चल रहा था। लोकायुक्त जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद ट्रैप बिछाया गया। कार्रवाई के दौरान आरोपी डॉक्टरों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया गया। डॉ. अमित शाक्य — 8 हजार रुपए डॉ. दिव्या साईं — 5 हजार रुपए डॉ. मनोहर गोदारा — 12 हजार रुपए लोकायुक्त टीम ने कुल 25 हजार रुपए की रिश्वत राशि बरामद की। तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। इस कार्रवाई ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज अब “कमीशन आधारित व्यवस्था” बन चुका है? और यदि लोकायुक्त की कार्रवाई नहीं होती, तो यह खेल आखिर कब तक चलता रहता? सूत्रों की मानें तो अब इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हो सकती है। राजपुर अस्पताल में हुई इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

वर्षों से लापता लोगों की तलाश में जुटी एमसीबी पुलिस, आमजन से मांगा सहयोग

वर्षों से लापता लोगों की तलाश में जुटी एमसीबी पुलिस, आमजन से मांगा सहयोग बुजुर्ग महिला से लेकर युवाओं तक के कई मामलों में अब तक नहीं मिला सुराग, पुलिस ने जारी किए संपर्क नंबर मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में वर्षों से लापता लोगों की तलाश को लेकर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि यदि किसी भी गुमशुदा व्यक्ति के संबंध में कोई जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचित करें, ताकि उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचाया जा सके। पुलिस के अनुसार थाना चिरमिरी क्षेत्र से वर्ष 2020 में लापता हुई 75 वर्षीय श्रीमती कुसुमनी पति संतोष कुमार राय निवासी गोदरीपारा, चालिस घोड़ा का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बताया गया कि 24 नवंबर 2020 की रात वे घर से बिना बताए कहीं चली गई थीं। परिजनों ने आसपास के क्षेत्रों एवं रिश्तेदारों के यहां काफी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसी तरह वर्ष 2019 में थाना चिरमिरी में दर्ज एक अन्य मामले में 20 वर्षीय विक्रम पिता सची शंकर निवासी छोटी बाजार, दलगंजन दफाई भी अचानक घर से लापता हो गया था। परिवार द्वारा लगातार खोजबीन किए जाने के बावजूद युवक का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। वहीं तीसरे मामले में 26 वर्षीय श्रीमती जयमती सारथी पति बहादुर सारथी निवासी परसिया थाना ओड़गी जिला सूरजपुर वर्ष 2020 से लापता हैं। जानकारी के अनुसार पारिवारिक विवाद के बाद वे घर से निकल गई थीं, जिनकी तलाश लगातार जारी है। इसी कड़ी में थाना चिरमिरी क्षेत्र से वर्ष 2020 में लापता हुई 82 वर्षीय वृद्ध महिला खिरो नायक का मामला भी पुलिस के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। गुम इंसान क्रमांक 15/2020 के तहत दर्ज मामले में खिरो नायक, पति स्वर्गीय धनु नायक निवासी हरीनगर ईवाई हल्दीबाड़ी थाना चिरमिरी, 19 अगस्त 2020 को दोपहर करीब 12 बजे घर से बिना बताए कहीं चली गई थीं। परिजनों द्वारा काफी खोजबीन के बाद 21 अगस्त 2020 को थाना चिरमिरी में गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। एमसीबी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश उनकी प्राथमिकता में शामिल है और सभी थाना एवं चौकी प्रभारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को इन गुमशुदा लोगों के संबंध में कोई भी जानकारी प्राप्त होती है तो तत्काल पुलिस को सूचित करें। संपर्क हेतु पुलिस अधीक्षक एमसीबी – 9479194855, सीएसपी चिरमिरी – 9479193703, थाना चिरमिरी – 9479193709 तथा कंट्रोल रूम – 9479160180 पर जानकारी दी जा सकती है।

ब्योहारी तहसील के एसडीएम कार्यालय में लोकायुक्त का छापा ,15 हजार की रिश्वत लेते बाबू रंगे हाथ हुआ गिरफ्तार!

ब्योहारी  तहसील कार्यालय में भृत्य के पद पर पदस्थ रहते हुए बीर सिंह कर रहा था एसडीएम कार्यालय में पेशकार का काम। कई सालों से यहां पर था पदस्थ। बिना लिये दिए नहीं होता तहसील कार्यालय में किसी का कोई काम। तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार की लिखी जा  रही इवारत की खबरों की हो गई पुष्टि भ्रष्टाचार का गढ़ बना तहसील कार्यालय, पैसों के दम पर होते है फैसले। तहसील कार्यालय में हुई लोकायुक्त की दविश से मची खलबली। ब्यौहारी- भ्रष्टाचार के विरुद्ध रीवा लोकायुक्त की टीम ने आज एक बड़ी कार्यवाही करते हुए ब्यौहारी तहसील में अनुभागीय अधिकारी कार्यालय के बाबू पेशकार को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। न्यायालयीन प्रकरण में पक्ष में फैसला सुनाने के नाम पर रिश्वत की मांग की गई थी। ​जमीनी विवाद के फैसले के बदले मांगी थी पंद्रह हजार की घूंस। ​मिली जानकारी अनुसार, तहसील कार्यालय के अनुभागीय अधिकारी कार्यालय में कार्यरत लिपिक वीर सिंह जो भृत्य के पद पर पदस्थ रहते हुए यहां सालों से पेशकार का काम करता रहा है। जिसने एक जमीनी विवाद के मामले में निर्णय पीड़ित पक्ष के हक में करने के एवज में रिश्वत की मांग की थी। आरोपी बाबू ने शिकायतकर्ता को धमकी भी दी थी कि यदि पैसे नहीं दिए, तो वह मामले का निर्णय दूसरे पक्ष संपत जायसवाल के समर्थन में करवा देगा। ​20 हजार में तय हुआ था सौदा। ​शिकायतकर्ता अंकिता जायसवाल पति सुरेश जायसवाल ने इस मामले की शिकायत लोकायुक्त रीवा से की थी। बताया जा रहा है कि एसडीएम के बाबू वीर सिंह ने शुरुआत में 20 हजार रुपये की मांग की थी, लेकिन बाद में मामला 15,000/- रुपये में तय हुआ। ​लोकायुक्त रीवा की कार्यवाही ​शिकायत की पुष्टि होने के बाद लोकायुक्त की बारह सदस्यी टीम ने जाल बिछाया और तहसील के एसडीएम कार्यालय में जैसे ही शिकायतकर्ता ने रिश्वत की रकम बाबू वीर सिंह को दी, टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथ दबोच लिया।  लोकायुक्त की टीम फिलहाल भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्यवाही कर रही है।

जंगल में जुए के अड्डे पर पुलिस का ताबड़तोड़ छापा, 5 आरोपी गिरफ्तार, फिल्मी अंदाज में बड़ी सफलता

जंगल में जुए के अड्डे पर पुलिस का ताबड़तोड़ छापा, 5 आरोपी गिरफ्तार, फिल्मी अंदाज में बड़ी सफलता मो. कासिम जिला प्रतिनिधि एमसीबी मनेन्द्रगढ़  जिले में अवैध गतिविधियों पर शिकंजा कसते हुए मनेन्द्रगढ़ पुलिस ने फिल्मी अंदाज में एक बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जानकारी के अनुसार गुटरा के जंगल में लंबे समय से 52 पत्तों का जुआ संचालित हो रहा था, जिसकी सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और रणनीतिक घेराबंदी कर दबिश दी। अचानक हुई इस कार्रवाई से जुआरियों में अफरा-तफरी मच गई और कई भागने की कोशिश में जुट गए। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मौके से 5 जुआरियों को गिरफ्तार किया। साथ ही जुआ खेलने में इस्तेमाल सामग्री और नगदी भी जब्त की गई है। सभी आरोपियों के खिलाफ जुआ एक्ट के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे मामलों में सख्ती के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।