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योगी सरकार में पुलिस का एक्शन मोड, इनामी अपराधियों पर शिकंजा; 15,233 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त

योगी सरकार में अपराधियों पर शिकंजा, 23 हजार से अधिक इनामी गिरफ्तार, 15,233 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त साइबर अपराध पर कार्रवाई से लेकर माफिया की संपत्ति जब्ती तक, यूपी पुलिस का दिखा एक्शन मोड साइबर अपराध की रोकथाम में यूपी सबसे आगे निकला, 874.58 करोड़ रुपये की धनराशि फ्रीज कराई इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी और माफिया नेटवर्क पर प्रहार, बीमारू से सुरक्षित प्रदेश बना यूपी लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार में पुलिस और प्रशासन ने कई स्तरों पर कार्रवाई की है। साइबर अपराध के मामलों में 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई। वहीं 23,601 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं गैंगस्टर एक्ट के तहत 15,233 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं। साइबर अपराध पर कार्रवाई में देश में पहला स्थान यूपी पुलिस साइबर अपराध की रोकथाम के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने संचालित कर रही है। इसके साथ ही सभी जनपदों के पुलिस थानों में साइबर सेल और हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से अगस्त 2019 से जून 2026 तक 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई। इन उपलब्धियों के आधार पर मार्च 2026 में साइबर अपराध संबंधी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश, देश में पहले स्थान पर रहा। अपराधियों पर कार्रवाई, अवैध संपत्तियों पर भी शिकंजा 20 मार्च 2017 से अब तक पुलिस मुठभेड़ों में 303 अपराधी मारे गए, जबकि 12,202 घायल हुए। इसी अवधि में 23,601 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। गैंगस्टर एक्ट के तहत 87,835 अपराधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत 995 अपराधियों पर कार्रवाई की गई। गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 152 अरब 33 करोड़ रुपये से अधिक (यानी करीब 15,233 करोड़ रुपये) मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त की गईं। चिह्नित माफिया और गिरोहों के खिलाफ भी कार्रवाई प्रदेश स्तर पर चिह्नित 68 माफिया और उनके गिरोह के सदस्यों एवं सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। इनके विरुद्ध कुल 909 मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि 651 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

₹50 हजार रिश्वत लेने के मामले में SHO सुनीता बावा पर कार्रवाई, पंजाब पुलिस से हुई बर्खास्त

मोगा  रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार मोगा के थाना कोट ईसे खां की तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर सुनीता बावा नंबर 33/एफआर को पंजाब पुलिस सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए फरीदकोट रेंज की आईजी नीलांबरी जगदाले की ओर से बर्खास्तगी के आदेश जारी किए गए हैं। इंस्पेक्टर सुनीता बावा को 26 सितंबर को विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। जानकारी के अनुसार, विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए तत्कालीन थाना कोट ईसे खां प्रभारी इंस्पेक्टर सुनीता बावा को कथित तौर पर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए काबू किया था। गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी धाराओं के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। विजिलेंस की कार्रवाई के बाद मामला पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया। मामले की गंभीरता और विभागीय स्तर पर सामने आए तथ्यों को देखते हुए फरीदकोट रेंज की आईजी नीलांबरी जगदाले ने इंस्पेक्टर सुनीता बावा के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की। आदेश के अनुसार उन्हें पंजाब पुलिस सेवा से तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त कर दिया गया है। 50 हजार रुपये की रिश्वत का है मामला बताया जा रहा है कि विजिलेंस ब्यूरो के पास रिश्वत मांगने संबंधी शिकायत पहुंची थी। शिकायत की जांच के बाद विजिलेंस टीम ने कार्रवाई करते हुए सुनीता बावा को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस की ओर से मामले में आगे की जांच की जा रही है। पुलिस विभाग में तैनात अधिकारी के खिलाफ रिश्वत के मामले में हुई इस कार्रवाई को विभागीय स्तर पर गंभीरता से लिया गया है। बर्खास्तगी के आदेश जारी होने के बाद अब मामले की कानूनी और विभागीय प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।  

आधुनिक तकनीक और प्रो-एक्टिव पुलिसिंग से मजबूत हुई MP पुलिस की कानून-व्यवस्था

आधुनिक तकनीक, संवेदनशीलता और प्रो-एक्टिव पुलिसिंग: मध्यप्रदेश पुलिस के नवाचार एवं कानून-व्यवस्था सुदृढ़ीकरण के प्रयास भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस राज्य में शांति, सौहार्द और कानून-व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए "देश भक्ति – जन सेवा" के मूलमंत्र के साथ कार्य कर रही है। विगत समय में प्रदेश के विभिन्न जिलों में उत्पन्न हुई अत्यधिक संवेदनशील और जटिल परिस्थितियों में मध्य प्रदेश पुलिस ने बिना किसी अनावश्यक बल प्रयोग या लाठीचार्ज के, केवल "पहले संवाद, फिर सुरक्षा" की सूझबूझ भरी रणनीति और अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था के बल पर शांति स्थापित कर मिसाल कायम की है। ​जिलावार कानून-व्यवस्था के उत्कृष्ट उदाहरण ​1. धार: संवेदनशीलता, संवाद और त्रिस्तरीय सुरक्षा का प्रभावी मॉडल ​साम्प्रदायिक दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील धार जिले में पुलिस एवं प्रशासन ने कानूनी आदेशों के पालन और सौहार्द बनाए रखने में अभूतपूर्व तालमेल का प्रदर्शन किया। जिले मेंपूजन व नमाज शांतिपूर्वक संपन्न कराई गई। 23 जनवरी को  हजारों लोगों की वाग्देवी शोभायात्रा तथा दिनभर में श्रद्धालुओं द्वारा किए गए दर्शन-हवन के दौरान 6 सेक्टरों और 7 जोन में पुलिस बल तथा  आरएएफ (RAF) प्लाटून की तैनाती कर चाक-चौबंद सुरक्षा सुनिश्चित की गई। ​प्रतिबंधात्मक आदेश, सतत शांति समिति बैठकें, ड्रोन व सीसीटीवी निगरानी और आरएएफ/एसटीएफ/क्यूआरएफ के फ्लैग मार्च से माहौल पूरी तरह नियंत्रित रहा। ​कानून-व्यवस्था के दृष्टिगत अनुमति निरस्त होने के बावजूद रैली निकालने की जिद पर अड़े असामाजिक तत्वों के विरुद्ध पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। मजबूत बैरिकेडिंग और ड्रोन निगरानी के साथ उल्लंघन पर व्यक्तियों की वैधानिक गिरफ्तारी कर शहर में शांति बनाए रखी। ​​2. भोपाल पुलिस कमिश्नरेट: टकराव टालकर किसान आंदोलन में संवाद से समाधान ​मूंग खरीदी और खाद वितरण को लेकर नर्मदापुरम व आसपास के हजारों किसानों द्वारा बैरिकेड्स तोड़ने और राजमार्ग पर 6 घंटे तक चक्काजाम करने की गंभीर स्थिति में भोपाल पुलिस ने लाठीचार्ज या बल प्रयोग से परहेज किया। पुलिस कमिश्नर व प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को रोके रखा, जिससे आधी रात को मांगें पूरी होने के साथ चक्काजाम बिना किसी हिंसा के शांतिपूर्वक समाप्त हुआ। गोविंदपुरा क्षेत्र में मारपीट की घटना के बाद शहर के कुछ संवेदनशील इलाकों में विरोध प्रदर्शन और तनाव फैल गया, जहां कुछ जगहों पर पथराव की घटनाएं भी हुईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस नेत्वरित कार्रवाई की, आरोपियों को गिरफ्तार कियाऔर संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस सुरक्षा बल तैनात कर शांति व्यवस्था बहाल की। 3. खंडवा एवं खरगोन जिले: अग्रिम समन्वय से रूट विवादों का खात्मा ​त्योहारों के दौरान जुलूसों के मार्गों और समय को लेकर उत्पन्न होने वाले तनाव को पुलिस ने त्‍योहारों के पूर्व "शांति समिति की बैठकें" आयोजित कर हल किया। दोनों पक्षों के धर्मगुरुओं की आपसी सहमति से रूट व समय निर्धारण करवाकर संभावित झड़पों को शून्य किया गया। ​4. राजगढ़ जिला (ब्यावरा एवं बोड़ा): मध्यस्थता से लिखित समझौता ​ग्रामीण इलाकों में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर और रात्रिकालीन आयोजनों को लेकर उभरे विवाद में पुलिस ने थाना परिसरों में आपातकालीन बैठकें आयोजित कीं। कानून और भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए पुलिस की मध्यस्थता में दोनों पक्षों से समय-सीमा और ध्वनि नियंत्रण का लिखित समझौता कराया गया। इसी प्रकार मध्यप्रदेश पुलिस ने "देशभक्ति-जनसेवा" के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, अपराध नियंत्रण और आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़कर अब म.प्र. पुलिस स्मार्ट, तकनीकी रूप से सक्षम और जन-संवेदनशील पुलिसिंग को प्राथमिकता दे रही है।   1. डिजिटल नवाचार एवं पारदर्शी नागरिक सेवाएं नागरिकों को बिना किसी झंझट के पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल माध्यमों को सशक्त बनाया गया है: ई-जीरो एफआईआर (E-Zero FIR) के दायरे का विस्तार: नागरिकों की सुविधा के लिए चोरी या संपत्ति संबंधी नुकसान की ऑनलाइन रिपोर्टिंग सीमा, जो पहले ₹1,00,000 थी, उसे घटाकर अब ₹25,000 कर दिया गया है। इससे छोटे अपराधों और संपत्ति चोरी की स्थिति में आम नागरिकों को त्वरित राहत और ऑनलाइन एफआईआर की सुविधा मिल रही है। ई-रक्षक ऐप (e-Rakshak Mobile App):राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB, भोपाल) द्वारा विकसित यह स्मार्ट-पुलिसिंग ऐप सुरक्षा व्यवस्था संभालने और नागरिकों तक आपातकालीन सेवाएं पहुँचाने में तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है। सिटीजन पोर्टल (Citizen Portal):चरित्र सत्यापन (Character Verification), किरायेदार/कर्मचारी सत्यापन और ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने जैसी बहुमूल्य सेवाएं घर बैठे उपलब्ध हो रही हैं। क्यूआर कोड आधारित शिकायत व्यवस्था: भीड़भाड़ वाले बाजारों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थलों पर क्यूआर कोड स्थापित किए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर नागरिक बिना थाने जाए गोपनीय व सीधी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। डायल-112 व फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल (FRV): किसी भी आपात स्थिति में सूचना मिलते ही न्यूनतम रिस्पांस टाइम में सहायता उपलब्ध कराने के लिए डायल-112 को आधुनिक जीपीएस व एफआरवी नेटवर्क से लैस किया गया है। अपराधियों का डिजिटल रिकॉर्ड: एक क्लिक पर संदिग्धों का क्रिमिनल बैकग्राउंड, हिस्ट्री शीट और पूर्व रिकॉर्ड की जांच। ​फेशियल रिकग्निशन व वाहन ट्रैकिंग: चेहरे की पहचान कर संदिग्धों को चिह्नित करना तथा चोरी/लावारिस वाहनों और संपत्तियों को तुरंत ट्रैक करना। ​डिजिटल सम्मन/वारंट: समन व वारंट की तामीली को पारदर्शी और त्वरित बनाना। 2. महिला एवं बाल सुरक्षा: संवेदनशीलता और सख्त निगरानी महिला, बालिकाओं एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा मध्यप्रदेश पुलिस की सर्वोच्च ​“शी-शक्ति” (She-Shakti) अभियान: भोपाल पुलिस कमिश्नरेट द्वारा महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत महिला पुलिसकर्मियों द्वारा शहर भर में वाहन रैलियां निकालकर जागरूकता फैलाई जा रही है। ​हॉटस्पॉट व संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष पेट्रोलिंग: प्रमुख बाजारों, पूजा स्थलों, मेलों, गरबा/डांडिया पंडालों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में प्रत्येक थाने से हॉटस्पॉट चिह्नित कर आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक की महिला पुलिस पेट्रोलिंग पार्टियां तैनात की गई हैं। ​त्वरित कार्रवाई व उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग: छेड़छाड़, फब्तियां कसने और पीछा करने जैसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिएअतिरिक्त/सहायक पुलिस आयुक्त (महिला सुरक्षा) स्तर के अधिकारी इसकी निगरानी कर रहे हैं। ​ऊर्जा डेस्क (Urja Desk):प्रदेश के सभी प्रमुख थानों में महिला केंद्रित शिकायतों की सुनवाई और त्वरित निस्तारण के लिए समर्पित महिला डेस्क सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। हेल्पलाइन नेटवर्क: महिला हेल्पलाइन (1090 / 181): संकटग्रस्त महिलाओं को विधिक, चिकित्सीय एवं पुलिस सहायता। चाईल्ड हेल्पलाइन (1098): बाल अपराधों की रोकथाम और गुमशुदा/मुसीबत में फंसे बच्चों के त्वरित … Read more

मस्जिद विवाद के बाद 100 Instagram ID पर कार्रवाई, संपर्कों की भी जांच शुरू

उज्जैन उज्जैन में शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने के दौरान हुए उपद्रव के बाद पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने उपद्रव से जुड़े भड़काऊ और वायरल कंटेंट वाले 100 से अधिक इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट/पेज ब्लॉक करवाए हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल, सोशल मीडिया गतिविधियों और सीडीआर की जांच कर यह पता लगा रही है कि उपद्रव से पहले और बाद में किन लोगों के बीच संपर्क हुआ था। सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का काम भी बुधवार को तेज किया गया। मंगलवार को मीनार पर मचान बांधने के बाद बुधवार को मीनार के गुम्बद वाले हिस्से को हटाया गया। इसके बाद मीनार समेत अन्य प्रभावित हिस्से को तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया। 8 FIR में 34 आरोपी, 24 गिरफ्तार 28 सितंबर को हुए उपद्रव के मामले में पुलिस अब तक 8 एफआईआर दर्ज कर चुकी है। इनमें 34 आरोपियों को आरोपी बनाया गया है, जबकि 24 की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की लगातार सर्चिंग कर रही है। जांच के दौरान और आरोपियों के नाम सामने आने की संभावना है। एसपी प्रदीप शर्मा के मुताबिक, पथराव, भड़काऊ संदेश प्रसारित करने और उपद्रव में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस ने अब तक 100 से अधिक वायरल कंटेंट को ब्लॉक करवाया है। दूसरे जिलों से भी आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड मंगाया जा रहा है। यदि किसी आरोपी की अन्य मामलों में संलिप्तता सामने आती है तो संबंधित मामलों में उसकी जमानत निरस्त कराने की कार्रवाई भी की जाएगी। आरोपी किन संगठनों से जुड़े, मोबाइल की CDR भी खंगाल रही पुलिस पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड के साथ यह भी पता लगा रही है कि वे किन-किन संगठनों से जुड़े हैं। उनके मोबाइल की सीडीआर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उपद्रव के पहले और बाद में आरोपियों के बीच किस तरह का संपर्क था। 500 मीटर क्षेत्र में 8 ड्रोन, 100 से ज्यादा CCTV शाही मस्जिद के आसपास करीब 500 मीटर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। यहां 8 ड्रोन और 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। पुलिस लगातार फुटेज खंगाल रही है, ताकि उपद्रव में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके। 2500 जवान तैनात, 5 ASP और 21 DSP संभाल रहे सुरक्षा उज्जैन में करीब 2500 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। छत्री चौक, लखेरवाड़ी, सराफा, कालिदास स्कूल के पास, गोपाल मंदिर, ढाबा रोड, खड़े हनुमान, सत्ती गेट से लेकर कंठाल तक बैरिकेडिंग की गई है। सुरक्षा व्यवस्था में उज्जैन के अलावा रतलाम, नीमच, इंदौर, देवास, शाजापुर समेत अन्य जिलों से आए 5 एएसपी, 21 डीएसपी और 32 टीआई तैनात हैं। RAF और STF की तीन कंपनियां भी सुरक्षा में लगी हैं। करीब 850 महिला पुलिसकर्मी भी ड्यूटी पर हैं। 40 श्रमिक कर रहे प्रभावित हिस्सा हटाने का काम मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने के लिए मुस्लिम समाज के करीब 40 श्रमिक दो शिफ्टों में काम कर रहे हैं। अभी तक करीब 35 प्रतिशत हिस्सा ही हटाया जा सका है। काम की गति को देखते हुए पूरा प्रभावित हिस्सा हटाने में कम से कम चार दिन और लग सकते हैं। पुलिसकर्मियों के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था बाहर से आए पुलिस अधिकारियों और जवानों के लिए शहर की अलग-अलग धर्मशालाओं में ठहरने की व्यवस्था की गई है। पुलिस बल के लिए चाय, नाश्ता, लंच और डिनर के साथ भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दो शिफ्टों में अधिकारी और जवान ड्यूटी कर रहे हैं।

माओवादी डंप से बरामद ₹20 लाख लापता, दो DSP पर गंभीर आरोप; विभाग में हड़कंप

कांकेर  जिले में माओवादी डंप से बरामद 20 लाख रुपये गायब होने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार मार्च-अप्रैल 2026 में मुरगांव क्षेत्र के जंगलों में माओवादी डंप की तलाश के दौरान करीब 20 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई थी। आरोप है कि बरामद रकम को सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय तत्कालीन दो डीएसपी ने आपस में बांट लिया। मामले की जानकारी एसपी तक पहुंचने के बाद जांच कराई गई, लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। टोडेमरका और मरकाकोनारी के जंगलों में हुई थी बरामदगी बताया गया कि तत्कालीन डीएसपी अपनी टीम के साथ मुरगांव के आश्रित ग्राम टोडेमरका और मरकाकोनारी के जंगलों में डंप की तलाश के लिए निकले थे। सर्च ऑपरेशन के दौरान टोडेमरका जंगल से करीब 15 लाख और मरकाकोनारी से करीब पांच लाख रुपये बरामद हुए थे। कुल मिलाकर करीब 20 लाख रुपये की नकदी मिलने की बात सामने आई है। जांच के बाद भी रिपोर्ट नहीं आई सामने बरामद रकम के बंटवारे को लेकर अब तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि नियमानुसार रकम को सरकारी खाते में जमा किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इधर मामले में एसपी के संज्ञान में आने के बाद आंतरिक जांच कराई गई, मगर उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। इससे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है। 22 करोड़ की अफवाह से हड़कंप इधर डंप से 20 लाख की जगह 22 करोड़ रुपये मिलने की अफवाह भी फैली हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह चर्चा जोरों पर है कि बरामद रकम 20 लाख से कहीं ज्यादा थी। वहीं स्थानांतरण के बाद विभाग में मामले की फिर से चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर विभाग ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है।

पंजाब पुलिस में ASI भर्ती का रास्ता साफ, 450 पदों पर होगी नियुक्ति

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने पुलिस बल को मजबूत करने के लिए 450 सहायक सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) की सीधी भर्ती को मंजूरी दी है। पंजाब सरकार ने इस संदर्भ में एक प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। सरकार के मुताबिक भर्ती पारदर्शी और मेरिट के आधार पर होगी। सीएम मान ने कहा कि नई भर्ती से पढ़े-लिखे और योग्य युवाओं को पुलिस विभाग में शामिल होने का अवसर मिलेगा। साथ ही जमीनी स्तर पर पुलिसिंग मजबूत होगी और कानून-व्यवस्था की उभरती चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।  मुख्यमंत्री के अनुसार पंजाब पुलिस के पांच कैडरों में एएसआई के 6,810 स्वीकृत पद हैं। चार कैडरों में करीब 70 फीसदी रिक्तियां पदोन्नति से और आर्म्ड कैडर में करीब 90 फीसदी पद पदोन्नति से भरे जाने की संभावना है। इन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 450 पदों पर सीधी भर्ती का फैसला किया गया है। संबंधित विभागों को भर्ती की औपचारिकताएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।  भर्ती और पदोन्नति की योजना तैयार 6810 एएसआइ पदों का है स्वीकृत कैडर सरकार के अनुसार पंजाब पुलिस के पांच कैडरों में एएसआइ के कुल 6810 स्वीकृत पद हैं। इनमें जिला पुलिस, आर्म्ड पुलिस, ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन, इंटेलिजेंस और टेक्निकल सपोर्ट सर्विस शामिल हैं। सरकार ने मौजूदा और आने वाले समय में संभावित रिक्तियों का विस्तृत आकलन किया है। इसी आधार पर भर्ती और पदोन्नति की योजना तैयार की गई है। सरकार के मुताबिक चार कैडरों में करीब 70 प्रतिशत रिक्तियां पदोन्नति के माध्यम से भरी जाने की संभावना है, जबकि आर्म्ड कैडर में यह अनुपात करीब 90 प्रतिशत है। पदोन्नति की जरूरतों को ध्यान में रखने के बाद 450 एएसआइ पदों पर सीधी भर्ती का फैसला किया गया है। भर्ती प्रक्रिया में नहीं होगी देरी.. मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को भर्ती से जुड़ी सभी जरूरी औपचारिकताएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार निष्पक्ष, पारदर्शी और मेरिट आधारित होगी। उन्होंने कहा कि मजबूत पुलिस बल केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिसकर्मियों को अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभाने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराना भी जरूरी है। सरकार के अनुसार नई भर्ती से पंजाब पुलिस की जमीनी स्तर पर कार्यक्षमता बढ़ेगी और उभरती कानून-व्यवस्था तथा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी युवाओं के लिए खास बात: 450 एएसआइ पदों की सीधी भर्ती को मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, आवेदन की तारीख, आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा पैटर्न और आधिकारिक भर्ती विज्ञापन की जानकारी अलग से जारी की जाएगी। इसलिए इच्छुक युवाओं को पंजाब पुलिस की आधिकारिक भर्ती सूचना का इंतजार करना होगा।  

जहरीली शराब कांड में बड़ी कार्रवाई, 30 हजार का इनामी आरोपी एनकाउंटर के बाद पकड़ा

 सागर  जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपितों में से एक मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर को  तड़के एक संक्षिप्त मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। मुठभेड़ में पुलिस की गोली मनीष के पैर में लगी। पुलिस के मुताबिक यह मुठभेड़ मालथौन थाना क्षेत्र के नोनिया-सेसई रोड घाटी पर हुई। इसमें उसका साथी आशीष साहू भी घायल हुआ है। मनीष की गिरफ्तारी पर पुलिस ने 30 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। मुखबिर की सूचना पर पुलिस की घेराबंदी पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि मनीष लोधी और आशीष साहू बाइक से मड़ावरा-नोनिया क्षेत्र की ओर आ रहे हैं। सूचना पर थाना बंडा और विनायका पुलिस की टीमों ने घेराबंदी की। बुधवार सुबह करीब तीन बजे दोनों आरोपित बाइक से आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने को कहा तो आरोपितों की ओर से पुलिस टीम पर फायर किया गया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोलियां चलाईं, जिसमें से एक गोली आरोपित मनीष लोधी के पैर में लगी। उसका साथी आशीष साहू भागते समय गिरने से चोटिल हो गया। कट्टा-कारतूस-चाकू जब्त पुलिस टीम ने मनीष के पास से 12 बोर का देसी कट्टा और आशीष के पास से 15 बोर का कट्टा, एक जिंदा कारतूस, आठ खाली कारतूस, चाकू, बेसबाल का डंडा बरामद किया है। उनकी बाइक और मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। पुलिस ने दोनों को घायल हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया है। जहरीली शराब से हुईं 40 से ज्यादा मौतें बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से अब तक 41 लोगों की मौत की बात सामने आ चुकी है। प्रशासन ने 20 मौतों की बात स्वीकार की है। पुलिस ने इस मामले में कुल 52 आरोपितों को चिह्नित किया है। इनमें से अब तक 39 की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें शराब बनाने वाले और गांव में अवैध शराब बेचने वाले दो आरोपितों की मौत भी जहरीली शराब पीने के कारण हो चुकी है। जहरीली शराब कांड के सूत्रधारों में से एक पुलिस ने बताया कि मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर शराब ठेकेदार था। जहरीली शराब बनाने और बेचने के धंधे के मुख्य सूत्रधारों में उसकी भूमिका थी। मनीष ने ही अपने नेटवर्क के जरिए नकली शराब को सरकारी ठेकों और गांव-गांव की दुकानों तक पहुंचाया था। आशीष साहू इसमें उसका सहयोगी था। मनीष पर पहले से 11 मामले पुलिस के अनुसार मनीष लोधी के खिलाफ कुल 11 अपराध दर्ज हैं। वर्ष 2010 में उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम का पहला मामला दर्ज हुआ था। वर्ष 2012 में भी वह शराब तस्करी के मामले में पकड़ा गया था। उसके खिलाफ छह आबकारी प्रकरण दर्ज हैं। वहीं आशीष साहू के खिलाफ तीन आबकारी अपराध दर्ज होना सामने आया है।  

जुआ फड़ से भागे दुकानदार की संदिग्ध मौत, पुलिस पर पिटाई का आरोप

जुआ फड़ से भागे दुकानदार की संदिग्ध मौत, पुलिस पर पिटाई का आरोप मौत के बाद बाजार बंद, सैकड़ों व्यापारियों ने घेरा थाना; पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार मुरैना जौरा में पुलिस को देखकर जुआ फड़ से भागे 37 वर्षीय दुकानदार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक की पहचान सूरज उर्फ कल्ला गुप्ता निवासी पुराना अस्पताल रोड, जौरा के रूप में हुई है। मौत के बाद परिजनों और व्यापारियों ने पुलिस पर मारपीट का गंभीर आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि, पुलिस ने मारपीट के आरोपों से इनकार करते हुए बताया कि युवक जेल रोड पर बेहोशी की हालत में मिला था। जानकारी के मुताबिक, बुधवार दोपहर जौरा पुलिस नकबजनी के एक मामले में संदेही की तलाश में पगारा रोड क्षेत्र में गई थी। पुलिस को संदेही के जेल रोड पर होने की सूचना मिली। पुलिस टीम के पहुंचते ही वहां जुआ खेल रहे लोग भागने लगे। इसी दौरान सूरज उर्फ कल्ला भी भागा और पुलिस के मुताबिक दौड़ते समय जमीन पर गिर गया। पुलिस उसे तत्काल सिविल अस्पताल लेकर पहुंची। डॉक्टर अनिल राजपूत ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को डेड हाउस में रखवाकर परिजनों को सूचना दी गई। परिजनों ने पुलिस पर लगाए मारपीट के आरोप सूरज की मौत के बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि पुलिस ने सूरज को पकड़कर उसके साथ मारपीट की और पैरों में डंडे मारे। परिजनों ने उसके शरीर पर चोट के निशान होने का भी दावा किया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वहीं पुलिस का कहना है कि युवक को जेल रोड पर बेहोशी की हालत में पाया गया था और अस्पताल पहुंचाने के बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित किया । मौत के बाद बाजार बंद, थाने का घेराव घटना की जानकारी मिलते ही जौरा के व्यापारियों में आक्रोश फैल गया। और देर रात ही व्यापारियों ने तहसील चौराहे पर प्रदर्शन किया और विरोध में दुकानें बंद कर दीं। इसके बाद रात बड़ी संख्या में व्यापारी जौरा थाने पहुंच गए। व्यापारियों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए थाने का घेराव किया और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। विधायक का कहना  –पंकज उपाध्याय कांग्रेस विधायक विधानसभा जौरा नेहरू मार्केट में पीको सिलाई की दुकान चलाता था सूरज सूरज उर्फ कल्ला गुप्ता नेहरू मार्केट में पीको सिलाई की दुकान चलाता था। इसी दुकान से वह अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। बुधवार को वह जेल रोड पर किस वजह से पहुंचा था और जुआ फड़ से उसका क्या संबंध था, इसे लेकर पुलिस जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। गुरुवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा। मौत की वास्तविक वजह क्या थी और शरीर पर चोट के निशान कैसे आए, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल पुलिस और परिजनों के दावों के बीच मौत का कारण जांच का विषय बना हुआ है। उधर व्यापारी वर्ग की मांग को ध्यान में रखते हुए पुलिस अधीक्षक ने भविष्य देने गए पांच पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया है। और तीन डॉक्टरों की टीम से वीडियोग्राफी करके पीएम करने के निर्देश दिए हैं। पीएम रिपोर्ट आने के बाद और भी स्थिति साफ हो जाएगी कि आखिर मौत की वजह क्या रही….

भोपाल थाने में वकील से मारपीट पर एक्शन, TI समेत दो आरक्षक निलंबित

भोपाल में थाने के अंदर वकील से मारपीट पर एक्शन: टीआई समेत दो आरक्षक निलंबित, आधी रात जमकर हुआ था हंगामा भोपाल  भोपाल के जहांगीराबाद थाने में अधिवक्ता राकेश रावल से कथित मारपीट के मामले में थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार समेत आरक्षक यश लखेरा और रामस्वरूप को निलंबित कर दिया गया है। डीसीपी जोन-1 अखिल पटेल ने आदेश जारी किए और तीनों को पुलिस लाइन से संबद्ध किया गया है। राजधानी भोपाल में जहांगीराबाद थाना परिसर में अधिवक्ता के साथ कथित मारपीट के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। जहांगीराबाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार, आरक्षक यश लखेरा और रामस्वरूप को निलंबित कर दिया गया है। तीनों को पुलिस लाइन से संबद्ध किया गया है। डीसीपी जोन-1 अखिल पटेल ने निलंबन के आदेश जारी किए हैं। 21 साल से वकालत कर रहे 45 वर्षीय अधिवक्ता राकेश रावल के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा बदसलूकी और मारपीट का आरोप है। घटना से आक्रोशित सैकड़ों वकीलों ने देर रात करीब 3 बजे तक जहांगीराबाद थाने को घेरे रखा और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बुधवार सुबह भोपाल जिला अदालत में भी वकीलों ने प्रदर्शन किया और पैरवी से दूरी बनाए रखी। गणेश विसर्जन के दौरान रास्ते के विवाद से शुरू हुआ मामला बैरागढ़ कलां निवासी अधिवक्ता राकेश रावल मंगलवार शाम करीब 8 बजे खटलापुरा मंदिर मार्ग से गुजर रहे थे। गणेश प्रतिमा विसर्जन के चलते रास्ता बंद होने के कारण ट्रैफिक एसीपी और पुलिस बल से उनकी बहस हो गई। आरोप है कि इसके बाद पुलिसकर्मी उन्हें जबरन जहांगीराबाद थाने ले गए। पीड़ित अधिवक्ता का कहना है कि जब उन्होंने वाहन में पेट्रोल नहीं होने की बात कही, तो पुलिसकर्मी गाली-गलौज पर उतर आए। विरोध करने पर उन्हें कीचड़ में पटककर लाठियों से पीटा गया। मारपीट की खबर के बाद थाने पहुंचे सैकड़ों वकील थाने के भीतर अधिवक्ता के साथ कथित मारपीट की खबर फैलने के बाद बड़ी संख्या में वकील जहांगीराबाद थाने पहुंच गए। वकीलों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हंगामा देर रात करीब 3 बजे तक चलता रहा। इसके बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और वकीलों को कार्रवाई का आश्वासन दिया। वीडियो में दिखाईं चोटें, वरिष्ठ अधिकारियों ने दिया जांच का आश्वासन वकीलों की ओर से जारी एक वीडियो में अधिवक्ता राकेश रावल के कपड़ों पर कीचड़ और पैरों पर चोट के निशान दिखाई दे रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शैलेंद्र सिंह चौहान भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने वकीलों को शांत कराया और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि शिकायत के आधार पर मामले की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। टीआई समेत दो आरक्षक निलंबित अधिवक्ता से मारपीट के मामले में डीसीपी जोन-1 अखिल पटेल ने निलंबन के आदेश जारी किए हैं। जहांगीराबाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार, आरक्षक यश लखेरा और रामस्वरूप को निलंबित कर दिया गया है। तीनों को पुलिस लाइन से संबद्ध किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच जारी है। इधर, अधिवक्ताओं ने पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध जताया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, वे अदालत में पैरवी करने के लिए तैयार नहीं हैं। जिला अदालत में भी वकीलों ने किया प्रदर्शन अधिवक्ता से मारपीट की घटना के विरोध में बुधवार सुबह भोपाल जिला अदालत में भी वकीलों ने हंगामा किया। अधिवक्ताओं ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई और पैरवी से दूरी बनाए रखी। पुलिस की ओर से टीआई समेत तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद मामले में आगे की कार्रवाई और जांच पर नजर बनी हुई है।

मत्तेवाल में पुलिस-गैंगस्टर मुठभेड़, हरमन सिंह के पैर में लगी गोली

अमृतसर अमृतसर के मत्तेवाल इलाके में बुधवार सुबह पुलिस और एक गैंगस्टर के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस को देखकर भागने की कोशिश कर रहे आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई। इस दौरान पुलिस की गोली आरोपी की टांग में लगी, जिससे वह घायल हो गया। पुलिस टीम ने मौके पर ही उसे काबू कर लिया और उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया। आरोपी का नाम हरमन सिंह निवासी गांव बोपाराए बताया जा रहा है। आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास, एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह पिछले कुछ समय से पुलिस को वांछित था। मौके पर ही आरोपी से एक पिस्टल भी बरामद किया गया है। पीछा करते समय अचानक चलाने लगा गोलियां  एसएसपी कंवलप्रीत सिंह चाहल ने बताया कि पुलिस टीम को आरोपी के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। बुधवार सुबह मत्तेवाल इलाके में पुलिस टीम आरोपी का पीछा कर रही थी। पुलिस को नजदीक आता देखकर आरोपी ने भागने का प्रयास किया और इसी दौरान पुलिस टीम पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। अचानक हुई फायरिंग के बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। दोनों तरफ से हुई फायरिंग के दौरान एक गोली हरमन सिंह की टांग में लगी। गोली लगने के बाद वह घायल होकर गिर गया। पुलिस कर्मियों ने तुरंत उसे काबू कर लिया और उसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। बोपाराए में व्यक्ति पर फायरिंग के बाद था वांछित  एसएसपी ने बताया कि हरमन सिंह के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या के प्रयास, एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट से संबंधित मामले शामिल हैं। कुछ दिन पहले आरोपी ने बोपाराए गांव में ही एक व्यक्ति पर गोलियां चलाई थीं। इस वारदात के बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।  पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि उसके पास हथियार कहां से आया, फायरिंग की वारदात में उसके साथ और कौन लोग शामिल थे और उसके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों में उसकी क्या भूमिका रही है।