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साइबर अपराध पर पुलिस की नई पहल, 14 थानों में खुलीं साइबर डेस्क; नजदीकी थाने में ही मिलेगी मदद

जिले के सभी 14 थानों में शुरू हुई साइबर डेस्क अब साइबर अपराध की शिकायत के लिए जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं, नजदीकी थाने में ही मिलेगी पुलिस सहायता शहडोल   जिले में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं साइबर ठगी से पीड़ित नागरिकों को त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले के सभी 14 थानों में साइबर डेस्क की शुरुआत की गई है। साइबर डेस्क के माध्यम से नागरिक अपने नजदीकी थाने में ही साइबर अपराध एवं ऑनलाइन ठगी से संबंधित शिकायत दर्ज कराकर आवश्यक पुलिस सहायता प्राप्त कर सकेंगे। पुलिस अधीक्षक शहडोल डॉ. संजय अग्रवाल ने बुढार थाने में फीता काटकर साइबर डेस्क का शुभारंभ किया। इस पहल से साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों के लिए नागरिकों को जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित थाना स्तर पर ही शिकायत प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साइबर डेस्क के माध्यम से ऑनलाइन ठगी, साइबर धोखाधड़ी, सोशल मीडिया से संबंधित अपराध एवं अन्य साइबर अपराधों की शिकायतों पर प्राथमिक स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इससे साइबर अपराधों की सूचना पुलिस तक शीघ्र पहुंचने के साथ ही पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। पुलिस विभाग द्वारा नागरिकों से अपील की गई है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराएं नहीं और तत्काल नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दें। साथ ही ऑनलाइन लेन-देन करते समय सतर्कता बरतें और किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी अथवा अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। जिले के सभी थानों में साइबर डेस्क की शुरुआत से साइबर अपराधों के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाई को थाना स्तर तक और अधिक प्रभावी बनाने तथा आमजन को त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

फैजल को जीप से बांधकर पीटा, गुजरात पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल; जानें पूरा मामला

भावनगर पुलिस की जीप से बंधा एक शख्स, पीछे से उस पर ताबड़तोड़ बरसाता एक जवान… सोशल मीडिया पर तैर रही इस वीडियो को देखते ही हर किसी के जेहन में एक ही सवाल उठता है, अरे ऐसी पिटाई क्यों? इसी वीडियो का एक दूसरा हिस्सा भी है. जिसमें वहीं शख्स एक बेंच पर लेटा है, और उस पर पुलिस की लाठियां बरस रही है. यहां भी उसके हाथ बंधे हैं. इन दोनों वीडियो को देखकर किसी का भी हैरान हो जाना स्वभाविक है. क्योंकि वीडियो में पुलिस की पिटाई बेहद बर्बर है और भी खुलेआम सभी के सामने. लेकिन पुलिस के इस खतरनाक एक्शन के पीछे की कहानी भी उतनी ही भयावह है. आइए इस पूरे मामले को समझते हैं।  मामला गुजरात के भावनगर का मामला गुजरात के भावनगर का है. वीडियो में पुलिस से पीटता दिख रहा शख्स फैजल लखानी है. फैजल लखानी अभी पुलिस की गिरफ्त में है. जहां कानूनी प्रक्रिया के तहत उस पर एक्शन लिया जा रहा है. लेकिन उसकी पिटाई का वीडियो कानूनी प्रक्रिया से ऊपर का है. ऐसा क्यों है, जानिए।  महिला की हत्या का आरोपी है पीट रहा शख्स दरअसल फैजल लखानी ने एक महिला की हत्या का आरोपी है. उसने बीते दिनों काजल बरैया नामक एक महिला की बेरहमी से हत्या की थी. इसका वीडियो भी सामने आया था. महिला की पिटाई के सीसीटीवी वीडियो में फैजल काजल को लात-घूसों से पीटता दिख रहा है।  पुलिस ने क्यों दी ऐसी सजा, खुद बताया वो महिला की जिस बेरहमी के साथ पिटाई कर रहा है, उसे देखकर किसी का भी खून खौल जाए. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या बेहद बेरहमी से की गई थी और इस घटना से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा था, इसलिए उन्हें 'एक कदम आगे बढ़कर' कार्रवाई करनी पड़ी।  लिव इन पार्टनर काजल की फैजल ने की हत्या दरअसल फैजल ने भावनगर शहर के बस स्टैंड पर काजल की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. यह पूरी घटना क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है. सीसीटीवी फुटेज में आरोपी महिला को बेरहमी से पीटता हुआ दिख रहा है, जबकि आसपास मौजूद लोग मूकदर्शक बने हुए हैं।  आरोपी का आपराधिक इतिहास, जेल में था पुलिस उपाधीक्षक आर आर सिंघल ने बताया कि यह घटना नीलम बाग थाना क्षेत्र में हुई थी. उन्होंने बताया, 'काजल बरैया और फैजल लखानी पिछले करीब सात सालों से फुटपाथ पर एक साथ रह रहे थे. आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ डकैती तथा अन्य गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं।  काजल की हत्या के बाद पुलिस ने फैजल को गिरफ्तार किया. फिर शनिवार को उसे उसी स्थान पर ले गए, जहां उसने काजल की पिटाई की दी. क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान पुलिस ने फैजल की लाठियों से पिटाई की।  फैजल ने काजल की क्यों की हत्या? फैजल ने काजल की हत्या क्यों की, इसके पीछे की कहानी भी फिल्मी है. फैजल का आपराधिक इतिहास है. वह जेल में था. इसी दौरान उसकी लिव इन पार्टनर काजल की उसके ही एक परिचित रवि से संबंध बन गए. अधिकारी ने बताया कि जेल से छूटने के बाद जब फैजल को इस संबंध के बारे में पता चला तो वो बुरी तरह से भड़क गया।   

पंजाब में नशे पर सियासत जारी, अकाली-कांग्रेस से AAP तक बदली सरकारें; 2027 चुनाव में भी बनेगा मुद्दा

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति में नशा करीब दो दशक से ऐसा मुद्दा है जो सरकार बदलने के साथ खत्म नहीं हुआ। 2007 के बाद अकाली-भाजपा सरकार फिर 2017 में कांग्रेस और 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार आई। तीनों सरकारों ने नशे के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सवाल फिर वही है कि इतने वर्षों की कार्रवाई के बाद नशे की जड़ कितनी कमजोर हुई और युवा इससे कितना दूर हुआ। उपलब्ध सरकारी पुलिस एनसीआरबी एनसीबी और केंद्रीय जांच एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार आप सरकार के दौरान कार्रवाई का पैमाना सबसे बड़ा दिखता है। हालांकि अधिक मामले और गिरफ्तारियां नशे की खपत का सीधा पैमाना नहीं हैं। ये पुलिस की अधिक सक्रियता और मामलों के ज्यादा पंजीकरण का नतीजा भी हो सकते हैं। अब बहस सिर्फ गिरफ्तारियों और बरामदगी की नहीं बल्कि सप्लाई लाइन और बड़े नेटवर्क को तोड़ने की है। अकाली-भाजपा सरकार : 6,000 करोड़ के नेटवर्क ने बढ़ाई सियासी तपिश 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार रही। एनसीआरबी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2007 से 2011 के बीच एनडीपीएस मामलों में 30,422 गिरफ्तारियां हुईं। 2012 से 2015 के बीच 58,511 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। 2012 में 11,715 2013 में 16,821 2014 में 17,084 और 2015 में 12,171 गिरफ्तारियां हुईं। एनसीबी के अनुसार 2015 में पंजाब में 601.88 किलोग्राम हेरोइन जब्त हुई। इसी दौर में पूर्व डीएसपी और अर्जुन पुरस्कार विजेता पहलवान जगदीश भोला को 2013 में सिंथेटिक ड्रग तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने नेटवर्क का आकार करीब 6,000 करोड़ रुपये बताया। बाद में कई बड़े नाम जांच के दायरे में आए। 2019 में भोला को सजा हुई और 2024 में धनशोधन मामले में भोला समेत 17 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए करीब 12.37 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त करने का आदेश दिया गया। कांग्रेस से आप तक : कार्रवाई का दायरा बढ़ा पर सवाल कायम 2017 में कांग्रेस सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स बनाई। 2017 से 2021 के उपलब्ध आंकड़ों में 52,255 एनडीपीएस मामले और 68,064 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। करीब 2,412-2,415 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई। दिसंबर 2021 में अकाली नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ एनडीपीएस कानून के तहत मामला दर्ज हुआ। उन्होंने आरोपों से इनकार किया और बाद में जमानत मिली। मार्च 2022 में भगवंत मान के नेतृत्व में आप सरकार आई और ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान शुरू किया। 2022 से 2026 तक सरकार के अनुसार 73,541 एनडीपीएस मामले दर्ज हुए और 98,596 लोग गिरफ्तार हुए। करीब 5,979 किलोग्राम हेरोइन 93 किलो आईसीई 3,583 किलो अफीम और 8.7 करोड़ फार्मा गोलियां-कैप्सूल जब्त किए गए। 772 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त या ध्वस्त करने और 54.47 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद करने का दावा है। दोषसिद्धि दर करीब 89 प्रतिशत बताई गई है। तस्करों से पुलिस और नेताओं तक पहुंची जांच 2012 में रंजीत सिंह कंडोला उर्फ राजा कंडोला गिरफ्तार हुआ। उसकी सहयोगी वानिया खन्ना को 2 किलो हेरोइन के साथ पकड़ा गया और उसे 10 साल की सजा हुई। 2013 में एनआरआई अनूप सिंह काहलो 540 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर 16 किलो और सहयोगी की कार से 10 किलो हेरोइन मिली। इसी जांच से भोला नेटवर्क सामने आया। भोला के साथ फार्मा कारोबारी जगजीत सिंह चहल और पूर्व अकाली नेता मनिंदर सिंह ‘बिट्टू’ औलख के नाम भी सामने आए। 2017 में पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया। उसके सरकारी क्वार्टर से 4 किलो हेरोइन 3 किलो स्मैक हथियार और नकदी मिली। उस पर ड्रग आरोपियों को बचाने के आरोप लगे। 2023 में एसएसपी राजजीत सिंह हुंदल को सेवा से बर्खास्त किया गया। वह ड्रग और भ्रष्टाचार मामलों में फरार हैं और घोषित अपराधी हो चुके हैं। नेता, पुलिसकर्मी भी धरे गए 2020 में पूर्व एसएसबी सदस्य और अकाली नेता अनवर मसीह गिरफ्तार हुए। उनके मकान से 188-194 किलो हेरोइन और ड्रग प्रोसेसिंग लैब का सामान मिलने का मामला सामने आया। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा को 2021 में ईडी और 2023 में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया। मूल मामले में 2 किलो हेरोइन गुरदेव सिंह से मिली थी। 2024 में खैरा को हाईकोर्ट से जमानत मिली। उन्होंने आरोपों से इनकार किया। 2022 में मजीठिया ने एनडीपीएस मामले में आत्मसमर्पण किया। 2025 में आय से अधिक संपत्ति के कथित 540 करोड़ रुपये के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया। 2024 में पूर्व विधायक सतकार कौर गेहरी को 128 ग्राम हेरोइन के मामले में गिरफ्तार किया गया और भाजपा ने निष्कासित किया। 2025 में पुलिस कांस्टेबल अमनदीप कौर 17 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ी गईं और सेवा से बर्खास्त हुईं।  खैरा के पूर्व पीएसओ जोगा सिंह को 2015 के मामले में 2025 में दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। मार्च 2026 में तरनतारन के सरपंच परमजीत सिंह उर्फ पम्मा से 18 किलो हेरोइन बरामद होने का मामला सामने आया। इसे सीमा-पार नेटवर्क से जोड़ा गया।   

Raisen Jail Firing: कैदी ने जेल प्रहरी पर चलाई गोली, हालत गंभीर; भोपाल किया गया रेफर

रायसेन  रायसेन जिला जेल में बुधवार को सुबह एक कैदी ने जेल प्रहरी को गोली मार दी। यह गोली प्रहरी की कमर के नीचे लगी है, गंभीर हालत में उसे भोपाल रैफर किया गया है। पुलिस इस मामले की भी जांच कर रही है कि इस कैदी के पास जेल में कट्टा कैसे पहुंचा। रायसेन जिला जेल में बुधवार की सुबह 9 बजे जब सभी कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात थे। तभी नीलेश ठाकुर नाम का आरोपी, जिस पर पहले से ही 307 और 302 के मुकदमे चल रहे हैं। उसने जेल के भीतर कट्टे से जेल प्रहरी दिग्विजय सिंह पर फायर कर दिया। यह गोली जेल प्रहरी के कमर के नीचे धंस गई। डाक्टरों ने जांच के बाद गंभीर हालत में भोपाल के एम्स अस्पताल रेफर कर दिया है।  भागने की फिराक में था कैदी बताया जा रहा है कि कैदी नीलेश जेल का गेट खुलवाकर भागने की फिराक में था। तभी उसने जेल प्रहरी पर गोली चला दी। यह भी बताया जा रहा है कि स्कूली बच्चों के साथ रक्षाबंधन कार्यक्रम होने वाला था। इसी कार्यक्रम के लिए फलों की टोकरी लेकर कैदी नीलेश गेट पर आया था तभी उसने गोली चला दी। नीलेश रायसेन जिले के बरेली के पास दिमाड़ा गांव का रहने वाला है। वह विचाराधीन कैदी है। एसडीओपी प्रिभा शर्मा के बताया कि नीलेश ठाकुर का आपराधिक रिकार्ड रहा है। मामले की जांच की जा रही है। एम्स भोपाल रेफर किया रायसेन जिला अस्पताल के चिकित्सक अभिषेक सागर के मुताबिक मरीज की पीठ के ऊपरी भाग में गोली लगी है। एक्सरे- में गोली फेफड़े के निचले भाग में नजर आ रही है। फेफड़े में पानी भी जमा होना शुरू हो गया है। मरीज की जान खतरे में है, इसलिए उसे एम्स भोपाल रेफर कर दिया है। एसपी आशुतोष गुप्ता बोले- कट्टा जेल में कैसे गया, जांच होगी घटना के बाद से ही जिला जेल में बड़े अधिकारियों का जमावड़ा है। एसपी अशुतोष गुप्ता समेत कई बड़े अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए थे। एसपी आशुतोष गुप्ता ने कहा कि चूंकि घटना जेल के भीतर हुई है, इस मामले में जेल अधिकारियों के साथ जांच की जाएगी। गुप्ता ने आरोपी के आपराधिक रिकार्ड वाला बताया और कहा कि उस पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज है। गुप्ता ने यह भी कहा कि जेल के भीतर कट्टा कैसे गया इसकी भी जांच की जा रही है। जेल के स्टाफ से भी पूछताछ की जाएगी।

पंजाब पुलिस में बड़ा बदलाव, 20 अधिकारियों का ट्रांसफर; देखें किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी

जालंधर पंजाब सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 8 आईपीएस और 12 पीपीएस अधिकारियों के तबादले व नई तैनातियां की हैं। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दिए गए हैं। आईपीएस अधिकारियों में गुरप्रीत सिंह भुल्लर को आईजी बॉर्डर रेंज, अमृतसर नियुक्त किया गया है। वह हरमनबीर सिंह की जगह लेंगे। हरमनबीर सिंह को अमृतसर का पुलिस आयुक्त बनाया गया है। वहीं भागीरथ सिंह मीणा को एआईजी पर्सनेल-1, सीपीओ पंजाब नियुक्त किया गया है। वरुण शर्मा को एसएसपी एसएएस नगर की जिम्मेदारी दी गई है जबकि वहां तैनात हरमनदीप सिंह हंस को एसएसपी पटियाला लगाया गया है। सूहैल कासिम मीर को एसएसपी बठिंडा नियुक्त किया गया है। बठिंडा की एसएसपी ज्योति यादव को 82वीं बटालियन पीएपी, चंडीगढ़ का कमांडेंट बनाया गया है। वैभव चौधरी को एसएसपी मानसा और हरमनबीर सिंह को अमृतसर पुलिस आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। पीपीएस अधिकारियों में हरकमलप्रीत सिंह खाख को एसएसपी मालेरकोटला नियुक्त किया गया है। गुरमीत सिंह को आईएसटीसी कपूरथला का कमांडेंट बनाया गया है। बलविंदर सिंह को एआईजी लॉ एंड ऑर्डर पंजाब, चंडीगढ़ नियुक्त किया गया है। दलजिंदर सिंह ढिल्लों को जालंधर का जोनल एआईजी सीआईडी बनाया गया है जबकि राजेश्वर सिंह को 7वीं बटालियन पीएपी जालंधर का कमांडेंट नियुक्त किया गया है। मनप्रीत सिंह को एसएसपी पठानकोट लगाया गया है। इसके अलावा हरपाल सिंह डीसीपी इन्वेस्टिगेशन लुधियाना के पद पर बने रहेंगे। सर्विंदर कौर को एडीसीपी स्पेशल ब्रांच अमृतसर, हरपाल सिंह को एआईजी सीआईडी अमृतसर, तलविंदर सिंह गिल को एसपी इंटेलिजेंस विंग पंजाब और रमनदीप सिंह को एसपी ट्रैफिक एसएएस नगर नियुक्त किया गया है। नवनीत कौर गिल को एसपी स्पेशल ब्रांच होशियारपुर लगाया गया है। गुरप्रीत सिंह भुल्लर को आईजी बॉर्डर रेंज, अमृतसर नियुक्त किया गया है। वह हरमनबीर सिंह की जगह लेंगे। हरमनबीर सिंह को अमृतसर का पुलिस आयुक्त बनाया गया है।  

समलैंगिक संबंध का झांसा, फिर ब्लैकमेल! मथुरा पुलिस ने पकड़ा शातिर गैंग, शर्म के कारण चुप रहते थे पीड़ित

मथुरा  ग्राइंडर एप के माध्यम से लोगों को समलैंगिक संबंधों के बहाने सुनसान स्थानों पर बुलाकर उनसे लूट और डकैती करने वाले सात डकैतों को थाना जैंत पुलिस ने धर दबोचा है। धौरेरा के जंगलों में की गई कार्रवाई में पुलिस ने इनके पास से 10 मोबाइल और 51,500 रुपये नकद तथा घटना में प्रयोग की जाने वाली दो मोटर साइकिल जब्त की हैं। पिछले कुछ समय से ग्राइंडर नाम के मोबाइल एप के माध्यम से एक गिरोह युवकों से संपर्क कर उन्हें समलैंगिक संबंधों के लिए उकसा रहा था। कई युवक इनकी बातों में आकर फंसकर इनके बताए सुनसान स्थानों पर पहुंच जाते थे। ग्राइंडर मोबाइल एप के माध्यम से युवकों को फंसाते थे गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से धौरेरा के जंगलों में बुलाया जाता था। इस गिरोह ने वहां गिरोह का एक सदस्य उस युवक के साथ संबंध बनाता था, जबकि कोई अन्य सदस्य मोबाइल से इस कृत्य की वीडियो बना लेता था। बस वहीं गिरोह के अन्य सदस्य आकर युवक को घेर लेते थे और उसके मोबाइल और पर्स में रखी नकदी को लूट लेते थे। इतना ही नहीं, मोबाइल में पासवर्ड पूछकर उस युवक के एकाउंट से भी रुपये ट्रांसफर कर लेते थे। धौरेरा के जंगलों में युवकों के साथ मारपीट कर उनको लूटते थे मोबाइल की वीडियो देखकर चुपचाप सामान दे दिया तो ठीक, वरना गिरोह के सदस्य उस युवक के साथ मारपीट करते थे। लुटे-पिटे युवक शर्म के कारण इस बारे में किसी को कुछ बता नहीं पाते थे। लेकिन इस गिरोह का शिकार बने एक युवक ने जैंत पुलिस को इसकी जानकारी दी। फिर पुलिस ने युवक के लूटे हुए मोबाइल की लोकेशन के आधार पर धौरेरा के जंगल में दबिश दी। शर्म के कारण चुप्पी साध जाते थे युवक पुलिस ने वहां से सुनील निवासी ग्राम बैना जमनीपुर, थाना अगयाऊ बाजार, भोजपुर बिहार, सूरज निवासी ग्राम धारुहेड़ा रेवाड़ी, हरियाणा दोनों हाल निवासीगण दावानल कुंड, लाडली धाम गेस्टहाउस, गौरी गोपाल गोशाला वृंदावन, रवि और कृष्णा निवासीगण संत कॉलोनी, सोम आश्रम, वृंदावन, भूपेंद्र निवासी ग्राम नंदा गढ़ी थाना राया, प्रवीण निवासी दत्ता वास, थाना सादाबाद हाथरस और राजेश सिंह निवासी गांव मंगरौन थाना मंगरौन, दमोह मप्र, दोनों हाल निवासी संत कॉलोनी, सोम आश्रम के पास, वृंदावन को गिरफ्तार किया गया। थानाध्यक्ष जैंत सोनू कुमार ने मामले में कार्रवाई की गई है।  

पंजाब ह्यूमन राइट्स कमीशन सख्त, 35 कथित एनकाउंटर मामले में पुलिस से मांगा जवाब

 चंडीगढ़  पंजाब स्टेट एंड चंडीगढ़ ह्यूमन राइट्स कमीशन ने राज्य में कथित पुलिस एनकाउंटरों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। पंजाब मानवाधिकार संगठन (पीएचआरओ) के अध्यक्ष रंजीत सिंह की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने पंजाब के डीजीपी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने पंजाब पुलिस को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।शिकायतकर्ता ने आयोग में आरोप लगाया है कि पुलिस गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को हथियार या नशा तस्करी की बरामदगी के लिए ले जाती है और रास्ते में उनका एनकाउंटर कर देती है। आरोप यह भी है कि मामलों को अदालत तक पहुंचने से पहले ही खत्म करने की कोशिश की जाती है। मामले की अगली सुनवाई 30 जून 2026 को निर्धारित की गई है। शिकायत में राज्यभर में हुए 35 पुलिस एनकाउंटरों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई मामलों में पुलिस की कार्रवाई का पैटर्न लगभग एक जैसा दिखाई देता है। शिकायत के अनुसार, आरोपित को किसी हथियार या अन्य बरामदगी के लिए मौके पर ले जाया जाता है। वहां आरोपित की ओर से पुलिसकर्मी का हथियार छीनने या हमला करने की कोशिश का दावा किया जाता है और इसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपित के पैर में गोली लगने की कहानी सामने आती है। पुलिस अधिकारियों के वर्जन पर उठे सवाल पीएचआरओ ने आयोग को बताया कि कई मामलों में पुलिस का आधिकारिक वर्जन सवालों के घेरे में है। शिकायत में कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाई से मामलों को अदालत तक पहुंचने से पहले ही खत्म करने की कोशिश की जाती है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक प्रतिनिधियों के बयान कानून से बाहर जाकर हिंसक कार्रवाई को बढ़ावा देते हैं। शिकायत में गुरदासपुर के हालिया एनकाउंटर का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि घटना के वास्तविक हालात पुलिस के सार्वजनिक दावों से मेल नहीं खाते। साथ ही “गोली का बदला गोली” जैसे बयानों पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसी सोच कानून के शासन और संविधान प्रदत्त जीवन के अधिकार के विपरीत है। अब विस्तार से जानिए क्या है पूरा मामला:-     पुलिस की कहानी लगभग एक जैसी रही: पंजाब मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने इस मामले में शिकायत की। शिकायत में पंजाब में पिछले कुछ समय के दौरान हुए 35 एनकाउंटरों पर सवाल उठाए गए।  शिकायत में दावा किया गया कि कई मामलों में पुलिस की कहानी लगभग एक जैसी रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी को बरामदगी के लिए ले जाया जाता है, वह हथियार छीनने या फायरिंग करने की कोशिश करता है और फिर जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लग जाती है।     एनकाउंटर पूर्व नियोजित या फर्जी हो सकते हैं: शिकायतकर्ता के अनुसार इस तरह के एनकाउंटर पूर्व नियोजित या फर्जी हो सकते हैं। उन्होंने शिकायत में यह भी कहा कि गुरदासपुर में हाल ही में हुए एक एनकाउंटर का जिक्र करते हुए दावा किया गया कि जमीनी तथ्यों और पुलिस के आधिकारिक दावों में अंतर है।     एनकाउंटर को लेकर जारी किए गए निर्देशों की अनदेखी: सत्ताधारी दल के कुछ प्रतिनिधि "गोली का बदला गोली" जैसी सोच को बढ़ावा दे रहे हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 21, जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ है। साथ ही हाई कोर्ट की तरफ से एनकाउंटर को लेकर जारी किए गए निर्देशों की अनदेखी है।     कुछ इन मामलों का किया गया जिक्र: शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में कई कथित एनकाउंटर मामलों का उल्लेख किया है। इनमें 20 दिसंबर 2023 को अमृतसर के जंडियाला गुरु इलाके में गैंगस्टर और हेरोइन तस्कर अमृतपाल सिंह, दिसंबर 2025 में अमृतसर में फायरिंग मामले के आरोपी अमृतपाल सिंह, फरवरी 2026 में गुरदासपुर में 19 वर्षीय युवक रणजीत सिंह, 2023 में फतेहगढ़ साहिब में गैंगस्टर तेजा मेहंदीपुरिया, मार्च 2024 में गैंगस्टर सुखविंदर सिंह और फरवरी 2024 में बरनाला में गैंगस्टर गुरमीत सिंह सहित संजू बहमन और सुखदेव सिंह जैसे मामलों का जिक्र किया गया है। दो साल में बढ़े केस यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब में पुलिस मुठभेड़ों के मामलों में पिछले दो वर्षों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पंजाब पुलिस ने 2025 में राज्य में कम से कम 47 पुलिस मुठभेड़ दर्ज की गईं, जिनमें कई गैंगस्टर, नशा तस्कर और संगठित अपराध से जुड़े आरोपित शामिल थे। वहीं जनवरी से जून 2026 के बीच ही 35 से अधिक एनकाउंटर सामने आ चुके हैं। इनमें गुरदासपुर, अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और मोहाली प्रमुख जिले रहे।  

पन्ना पुलिस की बड़ी सफलता, त्वरित कार्रवाई से अपहृत युवक सकुशल बरामद

पन्ना पुलिस की त्वरित कार्रवाई से अपहृत युवक सकुशल दस्तयाब 10 लाख रुपये की फिरौती की मांग करने वाले आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश जारी पन्ना "देशभक्ति, जनसेवा" के मूल मंत्र के अनुरूप मध्यप्रदेश पुलिस ने पन्ना जिले में अपहरण के एक गंभीर प्रकरण में त्वरित कार्रवाई करते हुए अपहृत युवक को सकुशल दस्तयाब कर मानवीय संवेदनशीलता, तकनीकी दक्षता एवं प्रभावी पुलिसिंग का परिचय दिया है। विषम परिस्थितियों में पूरी रात चलाए गए सर्च ऑपरेशन के परिणामस्वरूप युवक को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। 27 जून की रात्रि लगभग 8:00 बजे थाना पवई क्षेत्र से सूचना प्राप्त हुई कि स्थानीय कपड़ा व्यापारी श्री राजेश कुमार डेंगरे के 20 वर्षीय पुत्र अंशुल उर्फ कान्हा का अज्ञात व्यक्तियों द्वारा अपहरण कर लिया गया है तथा उसकी रिहाई के लिए 10 लाख रुपये की फिरौती की मांग की जा रही है। सूचना मिलते ही थाना पवई पुलिस ने मामले की गंभीरता से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया। पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू के निर्देशन में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। साथ ही तकनीकी विश्लेषण एवं डिजिटल इनपुट के लिए साइबर सेल को तत्काल सक्रिय किया गया। पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर तंत्र एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के आधार पर संभावित स्थानों पर लगातार तलाश की। रात्रि के दौरान लगातार वर्षा, घने जंगल एवं दुर्गम मार्ग जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद पुलिस बल ने कई किलोमीटर तक पैदल सर्च अभियान संचालित किया। लगातार प्रयासों एवं सुनियोजित रणनीति के परिणामस्वरूप पुलिस टीम ने हथकुरी के समीप जंगल क्षेत्र से अपहृत युवक अंशुल उर्फ कान्हा को सकुशल दस्तयाब कर लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी अंधेरे का लाभ उठाकर मौके से फरार हो गए, जिनकी तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर लगातार दबिशें दी जा रही है। पुलिस द्वारा प्रकरण के सभी पहलुओं की गंभीरता एवं निष्पक्षता के साथ जांच की जा रही है। मामले में संलिप्त आरोपियों की पहचान कर ली गई है तथा उनकी शीघ्र गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं। मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा किसी भी गंभीर अपराध की सूचना पर त्वरित, प्रभावी एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सतत कार्यरत है।  

पंजाब पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अमृतसर में अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी गिरोह का पर्दाफाश; विदेश से मिल रहे थे निर्देश

अमृतसर  अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने सीमा पार से संचालित अवैध हथियार तस्करी के एक नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 10 अत्याधुनिक पिस्तौल और कारतूस बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी विदेश में बैठे एक तस्कर के निर्देश पर काम कर रहे थे। ये आरोपी सीमा पार से भेजी गई हथियारों की खेप प्राप्त कर उन्हें आगे अपराधी तत्वों तक पहुंचाते थे। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध से जुड़े हो सकते हैं। थाना छेहरटा और मकबूलपुरा में एफआईआर दर्ज इस मामले में थाना छेहरटा और थाना मकबूलपुरा में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि हथियार कहां से आए, किन-किन लोगों तक पहुंचाए जाने थे और इस तस्करी गिरोह में और कौन-कौन शामिल है। जांच में और गिरफ्तारियों की संभावना पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी और इस नेटवर्क से जुड़े सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही विदेशी तस्कर और उसके स्थानीय संपर्कों की भी पहचान की जा रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस को इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।  

पुलिस सैलरी पैकेज योजना बनी पुलिस परिवारों का मजबूत सहारा, कठिन समय में मिलेगी आर्थिक सुरक्षा

पुलिस सैलरी पैकेज योजना कठिन समय में पुलिस परिवारों का सशक्त सहारा 35वीं वाहिनी मंडला के स्वर्गीय कार्यवाहक प्रधान आरक्षक मुकेश बंसकार के नॉमिनी को 1 करोड़ रूपए की सहायता मध्यप्रदेश पुलिस हर परिस्थिति में साथ भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कल्याण हेतु संचालित योजनाएं कठिन परिस्थितियों में पुलिस परिवारों के लिए सशक्त सहारा बनकर सामने आ रही हैं। इसी क्रम में मंडला में दिवंगत पुलिसकर्मी के परिजन को भारतीय स्टेट बैंक की पुलिस सैलरी पैकेज योजना के अंतर्गत एक करोड़ रुपए की बीमा सहायता राशि प्रदान की गई है। 35वीं वाहिनी मंडला में पदस्थ स्वर्गीय कार्यवाहक प्रधान आरक्षक मुकेश बंसकार का सर्पदंश के कारण निधन हो जाने पर उनका वेतन खाता भारतीय स्टेट बैंक शाखा मंडला में पुलिस सैलरी पैकेज योजना से संबद्ध होने के कारण उनके नामांकित उत्तराधिकारी उनकी पत्नी श्रीमती रजनी बंसकार को दुर्घटनावश मृत्यु बीमा के रूप में 1 करोड़ रुपए की सहायता राशि प्रदान की गई। सेनानी 35वीं वाहिनी मंडला राजेश रघुवंशी द्वारा परिजनों को उक्त राशि का चेक सौंपा गया। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सभी पुलिस कर्मियों को पुलिस वेतन पैकेज खाता के जरिए अनेक वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें एक करोड़ रुपये का आकस्मिक मृत्यु बीमा, होम लोन पर विशेष ब्याज दरें, मुफ्त डेबिट कार्ड और बीमा परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा कवच शामिल हैं।