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महाराष्ट्र में मदरसों पर कटनी पुलिस की कार्रवाई, बिहार से मांगी गई सामाजिक जांच रिपोर्ट

कटनी महाराष्ट्र और कर्नाटक के मदरसों में धार्मिक शिक्षा के लिए बिहार से बच्चों को ले जाने के मामले में इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) भी सक्रिय हो गया है। मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर रविवार को ट्रेन में 163 बच्चों को ले जाते गिरफ्तार किए गए आठों आरोपितों के बारे में पड़ताल की जा रही है। उनके किसी कट्टर धार्मिक संगठन से जुड़े होने की आशंका है। ऐसे में, आईबी एवं जीआरपी के अधिकारियों ने सोमवार को देर रात तक आरोपितों और बिहार से बुलाए गए बच्चों के अभिभावकों से जानकारी जुटाई। वहीं, आठों आरोपितों बच्चों को लातूर और विदर्भ के जिन दो मदरसों में ले जा रहे थे, वहां की जानकारी जुटाने के लिए कटनी पुलिस की टीमें रवाना हो गई है। जांच में पता चलेगा किस तरह की शिक्षा दी जाती है पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने लातूर के मदरसा जामिया अशरफिया अंजूमने इस्लामिया उद्गीर और विदर्भ के दारुल उलूम इमदादिया मदरसा के नाम बताए हैं। इनमें पड़ताल के बाद पता चलेगा कि वहां पर बच्चों को किस तरह की धार्मिक शिक्षा दी जाती है या कोई अन्य कारण से बच्चे भेजे जा रहे थे। वहीं, महिला बाल विकास विभाग ने बिहार के अररिया प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद बच्चों को बिहार भेजा जाएगा। स्वयं को शिक्षक बता रहे हैं आरोपी बिहार के अररिया जिले से बच्चों को ले जाने वाले आठों लोग स्वयं को मदरसों में शिक्षक बता रहे हैं। उनका कहना है कि वे अपने जिले के बच्चों को वर्ष 2016 से मदरसों में धार्मिक शिक्षा देने के लिए ले जा रहे हैं। इनकी भूमिका पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि बिहार में भी मदरसे संचालित हैं। फंडिंग की भी जांच की जा रही निश्शुल्क शिक्षा देने के लिए कौन सा संगठन फंडिंग कर रहा है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही हैं। इस संबंध में आरोपितों में शामिल सद्दाम का कहना था कि मदरसों को समाज की ओर से चंदे के रूप में धार्मिक शिक्षा देने के लिए फंड मिलता है और इससे ही बच्चों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। आरोपियों को समाज को किया सुपुर्द जीआरपी ने आरोपित बनाए गए अररिया क्षेत्र निवासी सद्दाम, अमान उल्ला, मो. जाहिर, आमिर खान, हाफिज अबू तालिम, मो. इस्लाम, नौसाद और राशिद को कटनी में मुस्लिम समुदाय के सुपुर्दगी कर दिया है। मामले की जांच तक आठों को पूछताछ के लिए जीआरपी में उपस्थित होना होगा। वहीं, मंगलवार को लगभग 54 बच्चों के अभिभावक कटनी पहुंचे और उनकी मुलाकात आश्रय गृह में बच्चों से कराई गई। उनके बयान भी दर्ज किए गए।

पुलिस मुख्यालय का सख्त आदेश, 14 दिन में प्रारंभिक जांच पूरी नहीं की तो होगी कार्रवाई

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने राज्यभर के पुलिस अधिकारियों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि यदि किसी मामले में प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry-PE) आवश्यक समझी जाती है, तो उसे अधिकतम 14 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।   पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि के भीतर यह तय करना जरूरी होगा कि मामले में एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए या नहीं। दरअसल अक्सर देखने में आता है कि कुछ मामलों को जांच के नाम पर लंबित रखा जाता है और इस दौरान अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आती हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए मुख्यालय ने सख्ती दिखाई है। जारी निर्देश के अनुसार, थाना प्रभारी केवल उन्हीं मामलों में प्रारंभिक जांच शुरू कर सकते हैं, जिनमें सजा तीन से सात साल के बीच निर्धारित हो, और इसके लिए भी उन्हें पहले डीएसपी स्तर के अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।  हाल ही में एक मामले में जिला पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं कर उसे केवल जांच के दायरे में रखा गया था, जिस पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने भोपाल और इंदौर के पुलिस आयुक्तों सहित सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को यह निर्देश जारी किए हैं। निर्देश में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ‘ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ का हवाला देते हुए दोहराया गया है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। प्रारंभिक जांच केवल सीमित परिस्थितियों में ही की जा सकती है और उसे तय समयसीमा में पूरा करना होगा।  

थाना अरेरा हिल्स पुलिस ने गांजा तस्कर को किया गिरफ्तार, 1300 ग्राम गांजा जप्त

भोपाल   श्रीमान पुलिस आयुक्त भोपाल संजय कुमार एवं श्रीमान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त भोपाल अवधेश गोस्वामी, व श्रीमान पुलिस उपायुक्त जोन-02 विवेक सिंह तथा श्रीमान अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन-2, गौतम सोलंकी एवं श्रीमान सहायक पुलिस आयुक्त एम.पी. नगर, भोपाल मनीष भारद्वाज के निर्देशन मे मादक पदार्थ के संबंध में विरूद्ध त्वरित कार्यवाही के निर्देश के पालन मे थाना अरेरा हिल्स पुलिस द्वारा 01 किलो 300 ग्रांम गांजा जप्त कर 08/20 NDPS ACT के अंतर्गत कार्यवाही की गई ।  घटना का विवरणः- दिनांक 09/04/26 को मुखबिर सूचना कर बताया गया कि खेलछात्रावास के पास भीम नगर थाना अरेरा हिल्स भोपाल में कोई व्यक्ति गांजा लिये बेचने की फिराक में खडा है । मुखबिर की सूचना से उनि नरेन्द्र सिंह परमार द्वारा श्रीमान सहायक पुलिस आयुक्त एमपीनगर को अवगत कराया जाकर मय स्टाफ के मुखबिर द्वारा बताये स्थान पर पहुंचे । मुखबिर द्वारा बताये हुलिये का व्यक्ति खेलछात्रावास के पास हाथ में एक प्लास्टिक का झौला पकडे हुए था जिसे हमराह स्टाफ व गवाहान की मदद से घेराबंदी कर पकड़ा जिसका नाम पता पूछने पर अपना नाम राजू राय पिता रमेश राय उम्र 50 साल निवासी खेल छात्रावास के पास भीम नगर अरेरा हिल्स भोपाल का होना बताया बाद राजू राय को मेरे द्वारा मुखबिर सूचना से अवगत कराकर तलाशी लेने हेतु धारा 50 NDPS Act के अन्तर्गत लिखित नोटिस/सूचना पत्र दिया गया जिसमे उक्त व्यक्ति द्वारा अपनी तलाशी उनि नरेन्द्र सिंह परमार द्वारा कराये जाने हेतु अपनी सहमति दी गई । राजू राय की तलाशी ली जाने पर उसके हाथ में प्लास्टिक के झोला मे पत्ती व दाने का टुकड़े मे बंटा हुआ हल्के हरे रंग का हल्का गीला पदार्थ मिला जिस संबंध मे पंचनामा तैयार किया गया है । उक्त व्यक्ति के पास मिले पदार्थ को देखकर, सूंघ कर, जला कर, रगड कर अनुभव के आधार पर पहचानने पर वह अवैध मादक पदार्थ गांजा होना पाया गया जिस संबंध मे पहचान पंचनामा तैयार किया गया । मादक पदार्थ का तराजू से तौल किया जाने पर प्लास्टिक के झोला सहित मादक पदार्थ गांजा का बजन कुल-1 किलो 300 ग्राम होना पाया गया । आरोपी का जुर्म अजमानती होने से आरोपी को गिरफ्तारी की सूचना से अवगत कराकर माननीय उच्चतम न्यायालय व मानव अधिकार आयोग के निर्देशो का अक्षरशः पालन करते हुये विधिवत समक्ष गवाहन के गिरफ्तार किया गया । आरोपी के विरूद्ध अपक्र. 69/26 धारा 08/20 NDPS ACT का कायम कर विवेचना में लिया गया ।  तलाशी में मिला गांजा – पकड़े गए आरोपी के पास एक प्लास्टिक के झोले में अवैध मादक पदार्थ मिला। जांच के दौरान यह गांजा पाया गया, जिसका कुल वजन करीब 1 किलो 300 ग्राम बताया गया है । कानूनी कार्रवाई – आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट 1985 की धारा 8/20 के तहत मामला दर्ज किया गया है।  पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच जारी – पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं है । मामले की जांच अरेरा हिल्स थाना के जांच अधिकारी उनि नरेन्द्र सिंह परमार द्वारा की जा रही है। सराहनीय भूमिकाः- इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी सुनील शर्मा के निर्देशन एवं मार्गदर्शन मे उनि नरेन्द्र सिंह परमार, सउनि उमेश कुमार, सउनि सुनीता व्यास, सउनि गोविंद प्रसाद, प्र.आर. 2728 देवीदास, प्र.आर. 1626 राधेश्याम, आर. 3256 कालूराम, आर.4491 राजेश कुमार, म.आर. 4344 पूर्णिमा, म.आर. 1518 प्रियंका , म.आर. 1817 सोनम रघुवंशी  की सराहनीय भूमिका रही है ।    

थाने में बड़ा घोटाला: 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड, SP ने कड़ी कार्रवाई की

डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ थाना एक बार फिर विवादों में है। सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित वीडियो ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो सामने आते ही पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एएसआई रोहित खूंटे और आरक्षक लक्ष्मी शंकर कंवर को निलंबित कर दिया है। वायरल हो रहे इस कथित वीडियो में थाना परिसर के भीतर संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। फुटेज में एक एएसआई, जिसे रोहित खूंटे बताया जा रहा है, मोबाइल फोन में एक महिला की तस्वीर को ज़ूम कर देखते नजर आते हैं। यह दृश्य पुलिस आचरण को लेकर कई सवाल खड़े करता है। इसके बाद वीडियो में कथित तौर पर एक वर्दीधारी आरक्षक, जिसे लक्ष्मी शंकर कंवर बताया जा रहा है, नगदी लेकर अपनी जेब में रखते दिखाई देता है।  आगे के हिस्से में एएसआई द्वारा बाहर आकर संबंधित व्यक्ति से और पैसों की मांग करने और “मामला निपटाने” की बात कहने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सामने आए दृश्य पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना रहे हैं और इसी संवेदनशीलता के चलते एसपी ने दोनों पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है। घटनाक्रम ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब यह सब थाने के भीतर हो रहा था, तो क्या थाना प्रभारी को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर यह सब उनकी जानकारी में ही चल रहा था? किसी भी थाने की गतिविधियों की अंतिम जिम्मेदारी थाना प्रभारी की होती है, ऐसे में जांच का दायरा केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रहना चाहिए।  मामला सामने आते ही एसपी अंकिता शर्मा ने “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत त्वरित कदम उठाते हुए वीडियो में दिख रहे एएसआई रोहित खूंटे और आरक्षक लक्ष्मी शंकर कंवर को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई विभाग की सख्ती का संकेत जरूर है, लेकिन साथ ही यह भी सवाल उठता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस विभाग इस पूरे मामले की जांच कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से करता है।  जनता के बीच फिलहाल एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या वर्दी के भीतर चल रही इस कथित ‘सौदेबाज़ी’ पर सख्त कार्रवाई होगी, या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?  

एमपी पुलिस ट्रेनिंग में ‘दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ का पाठ, नए आदेश से हुआ सियासी विवाद

भोपाल  मध्य प्रदेश के पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में अब दिन की शुरुआत 'श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' के पाठ से की जाएगी। पुलिस प्रशिक्षण विंग के इस नए आदेश के बाद प्रदेशभर में एक नय सियासी बवाल खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इसे सरकारी संस्थानों की निष्पक्षता से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा इसे भारतीय सांस्कृतिक और परंपरा का हिस्सा बताकर आदेश का बचाव कर रही है। आपको बता दें कि, पुलिस प्रशिक्षण विंग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने प्रदेश के सभी पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों (PTS) को निर्देश जारी किया है, जिसमें हर रोज के प्रशिक्षण की शुरुआत से पहले परिसर में लगे लाउडस्पीकर पर 'श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' बजाने साथ ही, उसका पाठ करने के आदेश दिए हैं। ताकि प्रशिक्षक और भर्ती दोनों इसे सुन सकें। एडीजी ने बताया आदेश का कारण एडीजी ने कहा कि दक्षिणामूर्ति को ज्ञान और विवेक का प्रतीक माना जाता है। उनके मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी के लिए सिर्फ जानकारी होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे विवेक, संवेदनशीलता और सहानुभूति भी होनी चाहिए। उनका मानना है कि, स्तोत्र के जरिए प्रशिक्षुओं में नैतिक स्पष्टता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। पहले भी दिया जा चुका ऐसा ही निर्देश ये पहली बार नहीं, जब पुलिस प्रशिक्षण में धार्मिक या दार्शनिक ग्रंथों को शामिल किया गया है। पिछले साल भी विभाग ने 8 पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों में रात के ध्यान सत्र से पहले भागवद गीता का एक अध्याय पढ़ने का सुझाव दिया था। इससे पहले प्रशिक्षुओं को राम चरितमानस के दोहे पढ़ने के लिए भी कहा गया था। अधिकारियों का कहना था कि इससे करीब 4 हजार प्रशिक्षुओं में अनुशासन और नैतिक सोच को बढ़ावा मिलेगा। कांग्रेस ने उठाए सवाल नए आदेश के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि कानून व्यवस्था संभालने वाली संस्थाओं को पूरी तरह तटस्थ होना चाहिए और किसी एक आस्था से जुड़ी परंपरा को बढ़ावा देना ठीक नहीं है। भाजपा ने किया पलटवार वहीं, दूसरी तरफ भाजपा एडीजी की इस पहल के बचाव में नजर आई। पार्टी के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि गीता या दक्षिणामूर्ति स्तोत्र जैसे ग्रंथ सांप्रदायिक नहीं बल्कि ज्ञान, अनुशासन और कर्तव्य की शिक्षाएं देते हैं। उनके मुताबिक, इन्हें सांप्रदायिक बताना भारत की सभ्यतागत परंपरा को न समझने जैसा है। अधिकारियों का तर्क पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले से ही योग, ध्यान और मानसिक अनुशासन शामिल हैं और यह पहल उसी का हिस्सा है। उनका दावा है कि, इसका उद्देश्य धार्मिक अभ्यास लागू करना नहीं, बल्कि नैतिक सोच और संवेदनशीलता को मजबूत करना है। हालांकि, इस निर्देश के बाद एक बार फिर मध्य प्रदेश की पुलिस ट्रेनिंग व्यवस्था सियासी बहस के केंद्र में आ गई है, जहां सांस्कृतिक परंपरा और संस्थागत तटस्थता को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।

फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा

रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा  मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और 'डिजिटल फर्जीवाड़े' का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी 'अंधेरगर्दी': लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि:कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: "राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल" पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'डिजिटल सेंधमारी' को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240

कुल्हाड़ी से हमला: गाली-गलौज का विरोध करने पर पूर्व जनपद सदस्य प्रतिनिधि पर जानलेवा वार

बिलासपुर सकरी थाना से लगे पेंडारी क्षेत्र में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां पूर्व जनपद सदस्य प्रतिनिधि परमानन्द बघेल पर उनके ही पड़ोसी द्वारा कुल्हाड़ी से हमला कर दिया गया। बताया जा रहा है कि घटना गाली-गलौज का विरोध करने पर हुई, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, परमानन्द बघेल अपने घर के पास मौजूद थे, तभी पड़ोसी लक्ष्मण बघेल किसी बात को लेकर गाली-गलौज करने लगा। जब परमानन्द बघेल ने इसका विरोध किया और उसे ऐसा करने से मना किया, तो विवाद अचानक बढ़ गया। इसी दौरान आक्रोशित लक्ष्मण बघेल ने कुल्हाड़ी उठाकर उन पर हमला कर दिया। हमले में परमानन्द बघेल को गंभीर चोटें आई हैं। परिजनों और आसपास के लोगों ने तत्काल उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार, समय रहते इलाज मिलने से उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आरोपी लक्ष्मण बघेल के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेजी से की जा रही है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

पंजाब में सुरक्षा चुनौतियों के बीच पुलिस फोर्स बढ़ाने की योजना, स्वीकृत पद 1.25 लाख तक बढ़ाने की तैयारी

चंडीगढ़ बॉर्डर स्टेट होने की वजह से पंजाब में जिस तरह की सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही है। उसके मद्देनजर सरकार पंजाब पुलिस में स्वीकृत पदों की संख्या 1.25 लाख करना चाहती है। इसी लक्ष्य के चलते पहले चरण में 10 हजार नए पदों को सृजित किया जा रहा है। जिसके लिए जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी।  पंजाब पुलिस में जवानों और अफसरों की संख्या देखी जाए तो साल 2000 में यह 80 हजार के करीब थी। साल 2026 में भी कुल पदों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई मगर सूबे में सुरक्षा की संवेदनशीलता बढ़ती गई। वर्तमान स्थिति यदि देखें तो पंजाब की आबादी भी करीब साढ़े तीन करोड़ के आसपास पहुंच चुकी है। ऐसे में आबादी के हिसाब से पुलिस की नफरी अपेक्षाकृत कम है। इसके अलावा बॉर्डर पार से पाकिस्तानी की नापाक गतिविधियां, नशा और हथियार तस्करी, गैंगस्टरवाद, रंगदारी, हत्याएं, लूट, डकैती, चोरियां इत्यादि आपराधिक वारदातों ने भी पंजाब पुलिस की चुनौतियों को काफी बढ़ा दिया है। इन पर नकेल कसने और पंजाबियों को पूरी तरह सुरक्षित माहौल मुहैय्या करवाने के मकसद से सरकार को अब पुलिस जवानों और अफसरों की संख्या बढ़ाना जरूरत महसूस हो रही है। इसके अलावा पंजाब सरकार ने क्रास बॉर्डर वेपन और ड्रग्स सिंडीकेट की तस्करी पर नकेल कसने के लिए पाकिस्तान बॉर्डर पर बीएसएफ की चौकियों से लगभग दो किलोमीटर पहले सेंकड लाइन ऑफ डिफेंस भी खड़ी करने का फैसला लिया है। इसके तहत कई छोटी-छोटी चौकियां खोली जा रही हैं। इन चौकियों पर पुलिस के जवान और होमगार्ड तैनात किए जा रहे हैं। इसके लिए भी अधिक पुलिस जवानों की जरूरत है। दूसरी ओर, लंबे से पुलिस अफसरों और जवानों के पद भी रिक्त पड़े रहते थे। भर्ती प्रक्रिया लटकी रहती थी। आप सरकार ने पिछले चार साल में पुलिस के 12966 रिक्त पदों को भरकर स्टाफ की कमी से जूझ रही पंजाब पुलिस को कुछ राहत देने की कोशिश की है। चुनावी साल में भर्तियां करती थी सरकारें पिछली रिवायती सरकारों की भर्ती प्रक्रिया भी सियासी फायदा के लिए होती थी। सत्ता में आने के बाद चार साल भर्तियां लटकी रहती थीं और पांचवें चुनावी साल में भर्तियां करतेथे मगर वे भी अपने रिश्तेदारों और सिफारिशी लोगों को नौकरी देते थे। 26 साल से पुलिस की नफरी जितनी थी, आज भी उतनी ही है। हम पंजाब पुलिस के स्वीकृत पदों को पहले 90 हजार तक लेकर जाएंगे और उसके बाद 1.25 लाख करेंगे।- भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

लुधियाना कांग्रेस नेता की हत्या पर बड़ा खुलासा, बिहार से पकड़ा गया आरोपी—कुल्हाड़ी लेकर घूम रहा था हत्यारा

लुधियाना थाना कुमकलां के तखरां गांव में 29 मार्च को कांग्रेस नेता परमिंदर तिवारी की बेरहमी से की गई हत्या के मामले को लुधियाना पुलिस ने सुलझा लेने का दावा किया है। पुलिस की विशेष टीमों ने इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपियों को बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पुलिस लाइन में आज दोपहर डीसीपी जसकरण जीत सिंह तेजा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए बड़ा खुलासा करेंगे। इस हत्याकांड ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी क्योंकि हमलावरों ने बड़ी ही क्रूरता के साथ इस वारदात को अंजाम दिया था। जांच के दौरान एक चौंकाने वाला वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मुख्य आरोपी विजय कुमार उर्फ अजय हत्या से महज एक घंटा पहले नशे की हालत में अपने कंधे पर कुल्हाड़ी रखकर गांव की गलियों में पैदल घूमता दिखाई दे रहा है। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार शाम 5:47 बजे आरोपी गांव में बेखौफ घूम रहा था और ठीक 6:45 बजे उसने परमिंदर तिवारी के सिर पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार कर उनकी जान ले ली। परिजनों का आरोप है कि अजय पिछले 15 दिनों से गांव के चक्कर लगाकर तिवारी की रेकी कर रहा था। वारदात के समय आरोपी लक्की बाइक चला रहा था, जबकि अजय ने कुल्हाड़ी से हमला किया। हत्या के बाद दोनों आरोपी फरार होकर पटना (बिहार) जा छिपे थे, जिन्हें पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद दबोच लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। हमलावरों ने परमिंदर तिवारी के सिर पर कुल्हाड़ी से एक के बाद एक कुल 6 वार किए, जिससे उनकी खोपड़ी पूरी तरह डैमेज हो गई और दिमाग का हिस्सा बाहर बिखर गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वार इतना जोरदार था कि तिवारी को चीखने तक का मौका नहीं मिला और वे पहले ही वार में जमीन पर गिर पड़े थे। गिरने के बाद भी आरोपी उन पर वार करते रहे। शरीर के अन्य किसी हिस्से पर चोट के निशान न होना यह दर्शाता है कि आरोपियों का एकमात्र मकसद उनकी जान लेना ही था। पुलिस फिलहाल इस हत्याकांड के पीछे तीन मुख्य थ्योरियों पर काम कर रही है। पहली थ्योरी पंचायत की जमीन के विवाद से जुड़ी है। आरोपी अजय ने पंचायत की जमीन पर अवैध कब्जा कर घर बनाया था और एक सरकारी कमरे को तोड़कर अपने घर में मिला लिया था। इसी बात को लेकर उसका परमिंदर तिवारी और सरपंच पति जगदीश के साथ विवाद चल रहा था, जिसका केस अदालत में लंबित है। दूसरी ओर, वारदात के कुछ समय बाद तिवारी के मोबाइल पर आए एक इंटरनेशनल कॉल ने पुलिस को उलझा दिया है। कॉल करने वाले ने सीधे तिवारी का हाल पूछा था, जिससे सुपारी किलिंग का शक भी गहरा रहा है। इसके साथ ही पुरानी राजनीतिक रंजिश के एंगल को भी नकारा नहीं जा रहा है, क्योंकि तिवारी गांव की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय थे और आरोपी उनके राजनीतिक विरोधियों का करीबी बताया जा रहा है। अब पुलिस की पूछताछ में ही साफ होगा कि इस खूनी खेल के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है।

मध्यप्रदेश पुलिस में बैंड के 679 आरक्षक पदों के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिस बैंड के अंतर्गत आरक्षक (बैंड) के कुल 679 पदों पर सीधी भर्ती वर्ष 2026 हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह भर्ती प्रक्रिया विशेष रूप से पुरुष अभ्यर्थियों के लिए आयोजित की जा रही है। इन पदों पर नियुक्ति हेतु इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी दिनांक 05 अप्रैल 2026 से 19 अप्रैल 2026 तक एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। अभ्यर्थियों को आवेदन हेतु एमपी ऑनलाइन की अधिकृत वेबसाइट पर जाकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। इस संबंध में विस्तृत जानकारी मध्यप्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट mppolice.gov.in पर भी उपलब्ध है, जहाँ भर्ती से संबंधित नियम, पात्रता, चयन प्रक्रिया एवं अन्य आवश्यक निर्देश देखे जा सकते हैं।