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बासमंडी उपकेंद्र ठप, नटखेड़ा में केबल में लगी आग; कई इलाकों में घंटों गुल रही बिजली

लखनऊ यूपी के लखनऊ में बासमंडी स्थित जीटीआई उपकेंद्र शनिवार शाम सात बजे ठप हो गया। इससे गणेशगंज, पान दरीबा और लालकुआं जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों की बत्ती गुल हो गई। शाम के वक्त बिजली न आने से करीब 40 हजार आबादी को पानी का संकट खड़ा हो गया। वहीं बाजारों में अंधेरा छा गया और कई व्यापारियों को समय से पहले अपनी दुकानें बंद करनी पड़ीं। लगभग सवा घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात 8:15 बजे बिजली बहाल हो सकी। लखनऊ में लोग एक बार फिर बिजली-पानी के लिए परेशान हो गए। वहीं आलमबाग के नटखेड़ा रोड पर स्थिति और भी भयावह हो गई जब एक बिजली बॉक्स के केबल में अचानक आग लग गई। आग की लपटें देख इलाके में हड़कंप मच गया। व्यापारियों की सजगता से चंदरनगर उपकेंद्र को सूचना देकर बिजली कटवाई गई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि इस दौरान कुटिया वाली गली और गोविंद गली सहित पूरे क्षेत्र में अंधेरा छा गया। शाम के वक्त बिजली न आने से घरों में पानी भी नहीं आया। वहीं कर्मचारियों ने फाल्ट को दुरुस्त कर रात 08 बजे बिजली चालू की। नटखेड़ा रोड युवा व्यापार मंडल के अध्यक्ष मनीष अरोड़ा ने बताया कि क्षेत्र में आये दिन बिजली संकट बना रहता है। इसके अलावा जानकीपुरम जोन के अहिबरनपुर, प्रियदर्शनी और आईटीआई उपकेंद्रों की अंडरग्राउंड केबल फाल्ट हो गया। वहीं विद्युत विभाग के मुताबिक नबीकोट नंदना ट्रांसमिशन से प्रियदर्शनी उपकेंद्र, इंदिरानगर ट्रांसमिशन से आईटीआई उपकेंद्र व नबीकोट नंदना ट्रांसमिशन से अहिबरनपुर उपकेंद्र केबल फाल्ट हो गया। कर्मचारियों ने आनन-फानन में मोर्चा संभाला और लोड को दूसरे फीडरों पर शिफ्ट कर वैकल्पिक स्रोतों से बिजली चालू करने की कोशिश की। हालांकि, लोड अधिक होने के कारण कई इलाकों में लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या बनी रही। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक शनिवार रात तक मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो सका। 1912 की शिकायतों का फर्जी निस्तारण न हो: एमडी मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी रिया केजरीवाल ने शनिवार को कस्टमर केयर सेंटर 1912 का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्युत आपूर्ति और उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण की मौजूदा प्रक्रिया की समीक्षा की। एमडी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों का समाधान तय समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए। किसी भी हाल में फर्जी निस्तारण न किया जाए, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। फीडबैक लेने और समस्याओं के समाधान के बाद उपभोक्ताओं को धन्यवाद संदेश या ट्वीट करने पर विशेष जोर दिया।

बिहार में उजाला, झारखंड के गांव अंधेरे में: प्रतापपुर के ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

प्रतापपुर (चतरा) बस कुछ कदम दूर बिहार है।वहां रातभर गांव रोशनी में जगमगाते रहते हैं और यहां पूरा गांव अंधेरे में डूबा रहता है।झारखंड-बिहार सीमा पर बसे प्रतापपुर प्रखंड के गांवों में इन दिनों यही दर्द लोगों की जुबान पर है।बिजली व्यवस्था की बदहाली ने ग्रामीणों का जीवन बेहाल कर दिया है। लोगों का आरोप है कि गांवों में दिनभर में मुश्किल से दो से तीन घंटे बिजली मिल रही है, वह भी लो वोल्टेज के सहारे। हालत यह है कि पंखे ठीक से नहीं चल पा रहे और रातभर उमस भरी गर्मी में लोग जागने को मजबूर हैं। सीमावर्ती गांवों के लोग जब रात के अंधेरे में बिहार के गांवों को 24 घंटे बिजली से जगमगाते देखते हैं, तो उनके भीतर व्यवस्था को लेकर गहरी मायूसी और आक्रोश उभर आता है। इस पार अंधेरे में डूबे गांव और उस पार रोशनी से चमकते घर लोगों को भीतर तक झकझोर रहे हैं। कई ग्रामीण अब पीड़ा भरे स्वर में कहते हैं कि काश, हम बिहार से अलग न हुए होते तो शायद आज हमारे गांवों में भी रातभर उजाला रहता। गर्मी के इस मौसम में बिजली संकट ने हालात और भयावह बना दिए हैं। पूरी रात बिजली कटौती से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बुजुर्ग और मरीज परेशान हैं, जबकि किसान सिंचाई के लिए दर-दर भटक रहे हैं। छोटे दुकानदारों और ग्रामीण कारोबारियों का कामकाज भी ठप पड़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की कोई तय समय-सारिणी नहीं रह गई है। कब बिजली आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई भरोसा नहीं। कभी अचानक हाई वोल्टेज आ जाता है तो कभी इतना लो वोल्टेज कि बल्ब तक टिमटिमाने लगते हैं। लगातार वोल्टेज के उतार-चढ़ाव से पंखे, टीवी, फ्रिज, मोटर और अन्य उपकरण खराब हो रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा। सरकारी कार्यालयों में जेनरेटर और इनवर्टर की सुविधा होने के कारण अधिकारियों को ग्रामीणों की पीड़ा का एहसास तक नहीं होता। जनप्रतिनिधियों पर भी लोगों ने उपेक्षा का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में गांवों की सुध लेने वाला कोई नहीं आता।प्रतापपुर प्रखंड के सीमावर्ती ग्रामीणों ने सरकार और बिजली विभाग से जल्द स्थायी समाधान निकालने तथा नियमित, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।  

यूपी में बिजली कटौती पर हंगामा: कई जिलों में लो-वोल्टेज और सप्लाई फेल, सरकार एक्शन मोड में

लखनऊ  भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बिजली संकट गहराता जा रहा है। राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज में बीती रात बिजली कटौती और लो-वोल्टेज से नाराज लोगों ने हंगामा कर दिया। आक्रोशित भीड़ ने सड़क जाम कर दिया। करीब एक घंटे तक बवाल के बाद लोग शांत हुए। एफसीआई उपकेंद्र के मुनेश्वर पुरम, प्रभात पुरम सहित कई इलाकों में बिजली न आने से लोग परेशान दिखे। इस बीच बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने फील्ड कर्मचारियों को 30 जून तक अस्थायी रूप से बायोमीट्रिक अटेंडेंस के नियमों में ढील देने का निर्णय लिया है। निगम के निदेशक (का. प्र. एवं प्रशासन) राजेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, लखनऊ के अंतर्गत कार्यरत सभी फील्ड कर्मी अब अपने आवंटित कार्य क्षेत्र के बजाय, अपने जोन के किसी भी उपकेंद्र या कार्यालय में हाजिरी दर्ज कर सकेंगे। इसके साथ ही बिजली चोरी से निपटने के लिए रात में चेकिंग अभियान चलाने की भी तैयारी है। यह चेकिंग खासतौर से ऐसे इलाकों में की जाएगी जहां रात में अचानक लोड बढ़ जा रहा है। बता दें कि यूपी में बिजली कटौती को लेकर योगी सरकार ऐक्शन मोड में आ गई है। शनिवार को सरकार ने ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के चार इंजीनियरों पर कार्रवाई की है। दो अधिशासी अभियंताओं को सस्पेंड किया गया है, एक अधीक्षण अभियंता को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि और एक मुख्य अभियंता को चेतावनी दी गई। सीएम योगी ने भीषण गर्मी में बढ़ती मांग के बीच शहर से गांव तक निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। वहीं लखनऊ में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने भी बीती रात शहीद पथ किनारे चकगंजरिया (सीजी सिटी) उपकेंद्र का निरीक्षण कर बिजली आपूर्ति की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से फीडरवार सप्लाई की जानकारी ली और लॉग शीट का मिलान किया। उन्होंने अधिकारियों को भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली सुनिश्चित करने और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के कड़े निर्देश दिए। वहीं मध्यांचल निगम की एमडी रिया केजरीवाल ने बीती रात फैजुल्लागंज उपकेंद्र का निरीक्षण किया। अचानक लोड बढ़ा तो क्षेत्र में होगी चोरी की जांच वहीं, निर्णय लिया गया है कि जिन इलाकों में रात में अचानक लोड बढ़ जा रहा है, वहां रात में बिजली चोरी की जांच की जाएगी। ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव और पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष डा. आशीष गोयल ने शनिवार को समीक्षा बैठक के दौरान अभियंताओं को इसके निर्देश दिए। डा. गोयल ने कहा कि संवेदनशील स्टेशनों पर अधिकारियों की तैनाती बढ़ाए। रिले की सेटिंग ठीक कराएं। इसमें टेस्ट डिवीजन के कार्मिक अभियान के रूप में लगें। ट्रांसमिशन के साथ बेहतर ताल मेल रखें। निदेशक वितरण इसकी समीक्षा करें। हर दिन दो घंटे ज्यादा काम करेंगे बिजली कर्मी उत्तर प्रदेश में बिजली संकट देखते हुए पावर ऑफिसर्स ऐसो, ने शनिवार को आपात बैठक में हर दिन दो घंटे अतिरिक्त काम करने का फैसला लिया है। संगठन के अध्यक्ष आरपी केन और कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बैठक में फैसला लिया गया कि सभी दलित व पिछड़ा वर्ग के अभियंता अपने नियमित काम के अतिरिक्त पहले चरण में हर दिन दो घंटे अतिरिक्त काम करेंगे।

भीषण गर्मी का असर: यूपी में 669 मिलियन यूनिट बिजली खपत, सप्लाई पर दबाव बढ़ा

लखनऊ भीषण गर्मी से बिजली की खपत के सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए हैं। शुक्रवार (24 घंटे में) को प्रदेश में पहली बार 669 मिलियन (66.90 करोड़) यूनिट बिजली की खपत रही। बिजली की अधिकतम मांग भी शनिवार को 31 हजार मेगावाट के पार पहुंच गई है। दिन में तो मांग के मुताबिक बिजली की उपलब्धता है लेकिन शहर से लेकर गांव के ज्यादातर उपभोक्ताओं को तय शेड्यूल के अनुसार बिजली नहीं मिल पा रही है क्योंकि विद्युत वितरण सिस्टम में कहीं भी फाल्ट होने पर उसे जल्द ठीक करने के लिए पर्याप्त मैनपावर ही नहीं हैं। रात में मांग के मुताबिक पावर कारपोरेशन को कहीं से बिजली उपलब्ध न होने के कारण कई क्षेत्रों में घंटों कटौती हो रही है। बिजली कटौती से प्रदेशवासियों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को ऊर्जा विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई है। पारा चढ़ने से राज्य में इनदिनों 31 हजार मेगावाट से भी अधिक बिजली की मांग है। सुबह से ही पारा चढ़ने से स्थिति यह है कि सात बजे के आसपास भी बिजली की मांग 24-25 हजार मेगावाट से नीचे नहीं जा रही है। बिजली की बढ़ती मांग का ही नतीजा है कि पिछले वर्ष 12 जून को जहां 655.9 मिलियन यूनिट बिजली की खपत का रिकॉर्ड बना था वहीं अबकी 22 मई को ही 669 मिलियन यूनिट खपत का नया रिकॉर्ड बन गया है। पावर कारपोरेशन प्रबंधन का अनुमान है कि जून में बिजली की अधिकतम मांग 34 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है। प्रबंधन ने मांग के अनुमान के मुताबिक बिजली की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई अनुबंध तो पहले से किए ही हैं, बढ़ती मांग को देखते हुए पावर एक्सचेंज तथा विभिन्न राज्यों से बैंकिंग के जरिए भी बिजली का इंतजाम करने की कोशिश में है। हालांकि, देशभर में बिजली की मांग बढ़ने से एक्सचेंज से प्रबंधन को 10 रुपये यूनिट में भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। ऐसे में सौर ऊर्जा के सहारे दिन में तो शहर से लेकर गांव तक को बिजली की आपूर्ति हो जा रही है लेकिन रात में आपूर्ति के लिए 33 हजार मेगावाट तक बिजली ही उपलब्धता ही नही है। ऐसे में खासतौर से गांवों में रात में बिजली की कटौती की जा रही है। हालांकि, रात में कटौती के एवज में दिन में अतिरिक्त बिजली देने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन लोकल फाल्ट के चलते प्रदेशवासियों को घंटों बिजली कटौती से जूझना पड़ रहा है प्रबंधन का दावा जरूर है कि उद्योगों से लेकर महानगर, मंडल व जिला मुख्यालयों को 24 घंटे जबकि तय शेड्यूल से नगर पंचायतों को 22, तहसील को 21.52 घंटे, बुंदेलखंड को 21 घंटे बिजली दी जा रही है। कारपोरेशन की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार को गांवों को 18 घंटे 37 मिनट बिजली दी गई है।  

भीषण गर्मी में गुरुग्राम को झटका, 7 बिजली घर ठप होने से सप्लाई बाधित

गुरुग्राम  दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां बिजली संकट गहरा गया है। गुरुग्राम में सेक्टर-72 के 220 केवीए बिजली घर का मुख्य ट्रांसफार्मर फूंक गया। ऐसे में इससे जुड़े 7 बिजली घर ठप गए। इस कारण इन बिजली घरों से अटैच कई सेक्टर की बत्ती गुल हो गई है। वहीं बिजली संकट के चलते रैपिड मेट्रो सेवा भी एकक घंटे प्रभावित रही। इसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 220 KVA बिजली घर का मुख्य ट्रांसफार्मर जला जानकारी के मुताबिक, गुरुग्राम के सेक्टर 38 से 57 तक पावर सप्लाई ठप हो गई है। वहीं सेक्टर 72 में भी ट्रांसफार्मर जल गया। यहां 220 KVA बिजली घर का मुख्य ट्रांसफार्मर फूंकने से 7 बिजली घर ठप हो गए हैं। इसके अलावा गुरुग्राम सेक्टर 18 भी बिजली नहीं आने से प्रभावित हुआ है। भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट से लोग परेशान हो गए हैं। गुरुग्राम के सेक्टर-72 स्थित 220 KVA पावर स्टेशन के मुख्य ट्रांसफॉर्मर में आग लगने के बाद बिजली गुल हो गई। इससे शहर के कई इलाकों में बिजली सप्लाई बाधित हो गई। 7-8 घंटे में फॉल्ट दुरुस्त होगा बिजली विभाग के अनुसार, तत्काल राहत की उम्मीद नहीं है, देर रात तक बिजली सप्लाई शुरू हो सकती है। वहीं ट्रांसफार्मर ठीक होने में 8 से 10 घंटे लगेंगे। देर रात तक सप्लाई बहाल होने की उम्मीद है। मेट्रो ने क्या कहा? DMRC प्रवक्ता ने बताया कि गुरुग्राम के सेक्टर-72 स्थित HVPNL के सबस्टेशन से बिजली सप्लाई बाधित होने के कारण रैपिड मेट्रो प्रभावित हुई। HVPNL सबस्टेशन गुरुग्राम शहर और येलो लाइन के गुरुग्राम सेक्शन को बिजली सप्लाई करता है। रैपिड मेट्रो में शाम 7:50 बजे से 8:33 बजे तक ट्रेन सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं। हालांकि, येलो लाइन पर सेवाएं स्टैंडबाय सबस्टेशन के माध्यम से नियंत्रित रहीं और इस दौरान सामान्य रूप से चलती रहीं। सेक्टर-72 सबस्टेशन के माध्यम से HVPNL द्वारा बिजली सप्लाई बहाल किए जाने के बाद रैपिड मेट्रो की सामान्य सेवाएं भी पुनः शुरू कर दी गईं।  

बिजली कटौती पर सरकार सख्त, मंत्री Arora ने गिनाए संकट के कारण और दिया राहत का भरोसा

चंडीगढ़. पंजाब में अचानक बढ़ी गर्मी ने बिजली व्यवस्था पर सीधा असर डाला है। भीषण लू और तापमान में लगातार बढ़ोतरी के कारण बिजली की मांग में तेजी से उछाल दर्ज किया गया है। विभाग के अनुसार इस तरह की मांग पहले कभी अप्रैल महीने में देखने को नहीं मिली, जिससे पूरे तंत्र पर दबाव बढ़ गया है।  बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि पहले से तय कार्यक्रम के तहत मरम्मत कार्य चल रहे थे। इसी वजह से कई स्थानों पर नियोजित बिजली कट लगाए गए, जिससे उपभोक्ताओं को कटौती अधिक महसूस हुई। 17 अप्रैल के बाद पैदा हुई स्थिति का यही सबसे बड़ा कारण है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ऐसे नियोजित कट चार घंटे से ज्यादा नहीं होंगे और व्यवस्था को सामान्य रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। खेती के मौसम ने भी बिजली की मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस समय फसलों की कटाई के साथ-साथ आलू और टमाटर जैसी फसलों की खेती के लिए लगातार बिजली की जरूरत रहती है। किसानों को तय समय पर बिजली उपलब्ध कराना जरूरी होने के कारण ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। हालात पर विभाग रख रहा नजर विभाग के अनुसार राज्य में करीब छह हजार करोड़ रुपये की लागत से प्रसारण और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने का काम चल रहा है। लेकिन अचानक बढ़ी मांग के कारण इस काम की गति भी प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। राहत के तौर पर उद्योगों को रात के समय खुले प्रावधान के तहत सीधे बिजली खरीदने की अनुमति दी गई है, ताकि दिन के समय ग्रिड पर लोड कम किया जा सके और आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। अनावश्यक बिजली उपकरणों के इस्तेमाल से बचें विभाग का दावा है कि राज्य में जरूरत के अनुसार बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और प्रदेश अभी भी बिजली के मामले में आत्मनिर्भर स्थिति में है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी तैयारियां पहले से थीं, लेकिन अप्रैल में इतनी अधिक मांग अप्रत्याशित रही। उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे अधिक खपत वाले समय में अनावश्यक बिजली उपकरणों का इस्तेमाल न करें, ताकि सभी को सुचारु रूप से बिजली मिल सके। बिजली की अधिकतम मांग में 12% की बढ़ोतरी अप्रैल की शुरुआत में: बिजली का इस्तेमाल पिछले साल के मुकाबले 7% से 21% तक कम था। पिछले 10 दिनों में: भारी गर्मी की वजह से बिजली के इस्तेमाल और इसकी डिमांड में जबरदस्त उछाल आया है। बड़ी छलांग: अधिकतम मांग 15 अप्रैल को लगभग 7900 MW थी, जो 25 अप्रैल तक बढ़कर 12000 MW के पार पहुंच गई है। स्थिति को सुधारने के लिए उठाए गए कदम बिजली कटौती का समय तय: लोगों को परेशानी न हो, इसलिए बिजली कटौती को ज्यादा से ज्यादा 4 घंटे तक ही सीमित रखा गया है। दूसरे राज्यों से बिजली का लेनदेन: दूसरे राज्यों के साथ 1500-2000 MW बिजली के लिए बातचीत आखिरी दौर में है; ये समझौते जल्द ही पूरे कर लिए जाएंगे। हाइड्रो पावर प्लांट फिर से शुरू: 2025 की बाढ़ में सरकारी हाइड्रो यूनिट्स को नुकसान पहुँचा था। मरम्मत का काम 10 मई तक पूरा हो जाएगा, जिससे ग्रिड में 300 MW बिजली और जुड़ जाएगी। अतिरिक्त बिजली की खरीदारी: ग्रिड के लिए लगभग 1500 MW एक्स्ट्रा बिजली अलग-अलग राज्यों और प्राइवेट कंपनियों से खरीदी जा रही है। केंद्र सरकार से मदद: गर्मियों के पीक महीनों में राहत देने के लिए पंजाब केंद्र सरकार के कोटे से लगभग 2000 MW बिजली लेने की तैयारी कर रहा है। शॉर्ट-टर्म टेंडर: बाजार में कम समय वाले टेंडर निकाले गए हैं ताकि बिना किसी देरी के तुरंत फालतू बिजली खरीदी जा सके। चार्ज में छूट: अगले 2 महीनों के लिए शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक 'व्हीलिंग चार्ज' और 'क्रॉस सब्सिडी' में छूट दी गई है।

500 मेगावाट यूनिट ठप, एमपी में बिजली संकट की चिंता; मरम्मत में लगेंगे दो साल

 उमरिया बिरसिंहपुर पाली स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र एक बार फिर तकनीकी संकट में फंस गया है। केंद्र की सबसे बड़ी 500 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट रोटर की गंभीर खराबी के कारण बंद पड़ी है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि रोटर की मरम्मत में करीब दो साल का समय लग सकता है। इसका सीधा असर प्रदेश की बिजली आपूर्ति पर पड़ेगा। ठेकेदारों से गारंटी नहीं सूत्र बताते हैं कि रोटर मरम्मत का काम जिस कंपनी को सौंपा गया है, उसने साफ कहा है कि मरम्मत के बाद रोटर कितने समय तक चलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। यानी करोड़ों का खर्च और लंबा इंतजार करने के बाद भी यूनिट का भविष्य अनिश्चित ही रहेगा। इतना ही नहीं, री-मेंटेनेंस की अवधि में भी इस यूनिट को केवल आंशिक लोड पर चलाने की बात सामने आई है। पहले भी खराब हो चुकी हैं यूनिटें यह पहला मौका नहीं है, जब केंद्र की यूनिटें तकनीकी खामी के कारण लंबे समय तक ठप हुई हों। कुछ समय पहले यहां की 210 मेगावाट क्षमता वाली एक नंबर यूनिट करीब 11 महीने बंद रही। मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद वह बार-बार उत्पादन बंद करती रही। इससे केंद्र की रखरखाव व्यवस्था और तकनीकी प्रबंधन पर सवाल खड़े होते रहे हैं। अभियंता और ठेकेदारों की मिलीभगत के आरोप केंद्र के मुख्य अभियंता एच. के. त्रिपाठी पर आरोप लग रहे हैं कि वे ठेकेदारों के भरोसे यूनिटों के संचालन का काम कर रहे हैं और तकनीकी खामियों पर सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रहे। यूनिटों का मेंटेनेंस अक्सर सिर्फ कागजों में दिखाया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि करोड़ों खर्च करने के बावजूद उत्पादन स्थिर नहीं हो पाता। बताया जाता है कि क्वालिटी कंट्रोल और तकनीकी जांच में भी भारी लापरवाही बरती जा रही है। बिजली उत्पादन पर बड़ा असर प्रदेश की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा इस केंद्र से पूरा होता है। अगर 500 मेगावाट यूनिट लंबे समय तक बंद रही तो उत्पादन में भारी कमी आएगी। नतीजतन उपभोक्ताओं को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही सरकार को निजी कंपनियों से महंगी दर पर बिजली खरीदनी पड़ेगी, जिसका अप्रत्यक्ष बोझ आम जनता पर पड़ेगा। जवाबदेही तय करना जरूरी केंद्र का इतिहास बताता है कि यहां की यूनिटें बार-बार तकनीकी खामी और खराब प्रबंधन की वजह से ठप होती रही हैं। सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं मिल रहा, तो आखिर जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती। क्या यह केवल ठेकेदारों की गलती है या अभियंताओं की लापरवाही भी उतनी ही जिम्मेदार है? सख्त कार्रवाई की मांग विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक मरम्मत कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच और अभियंताओं से लेकर ठेकेदारों तक की जवाबदेही तय नहीं होगी तब तक यह केंद्र प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर बोझ बना रहेगा। अब वक्त आ गया है कि जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में बार-बार उत्पादन बंद होने की समस्या न दोहराई जाए।