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पंजाब में मुफ्त बिजली का बढ़ता बोझ, पावरकॉम को सरकार से ₹9,650 करोड़ लेने हैं; अब लेगा ₹10 हजार करोड़ का लोन

पटियाला  पंजाब में उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली की सुविधा जारी है लेकिन इसकी कीमत पावरकाम की आर्थिक सेहत पर भारी पड़ रही है। पंजाब सरकार से बिजली सब्सिडी के 7550 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है, जबकि विभिन्न सरकारी विभागों पर बिजली बिलों के करीब 2100 करोड़ रुपये और बकाया हैं। यानी सरकार और उसके विभागों पर पावरकाम का कुल बकाया करीब 9650 करोड़ रुपये पहुंच गया है।  नकदी संकट के बीच पावरकाम को अपने जरूरी खर्च चलाने के लिए बाजार से कर्ज लेने की तैयारी करनी पड़ रही है। 7550 करोड़ रुपये की लंबित सब्सिडी में करीब 4000 करोड़ रुपये पिछले दो वित्तीय वर्षों का बकाया ब्याज समेत है।  इसके अलावा करीब 3550 करोड़ रुपये चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की सब्सिडी के हैं। सरकारी विभागों में जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग पर करीब 1000 करोड़, स्थानीय निकाय विभाग पर 850 करोड़, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग पर 380 करोड़ और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पर करीब 125 करोड़ रुपये के बिजली बिल लंबित हैं। आम उपभोक्ता का बिल बकाया होने पर पावरकाम कनेक्शन काट सकता है, लेकिन सरकारी विभागों और आवश्यक सेवाओं के कनेक्शनों पर ऐसी कार्रवाई व्यावहारिक रूप से आसान नहीं है। इसका सीधा असर निगम के कैश फ्लो पर पड़ रहा है। बिजली की बढ़ती मांग के बीच पावरकाम को बाहर से बिजली और कोयला खरीदने, मरम्मत के लिए स्पेयर पार्ट्स व अन्य सामग्री जुटाने तथा वेतन समेत नियमित खर्चों का भुगतान करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत है। बिना सरकारी गारंटी 10 हजार करोड़ जुटाएगा पावरकाम आर्थिक दबाव के चलते पावरकाम अब बिना सरकारी गारंटी करीब 10 हजार करोड़ रुपये का बाजार ऋण लेने की तैयारी में है। इसके लिए गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) और बॉन्ड जारी करने की योजना बनाई गई है। प्रक्रिया के लिए मर्चेंट बैंकरों से ऑनलाइन बोलियां भी आमंत्रित की गई हैं। पावरकाम पर पहले से करीब 18 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। ऐसे में नया कर्ज उसके ब्याज बोझ को और बढ़ाएगा। दरें घटाने से 7800 करोड़ के राजस्व घाटे का खतरा पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल के मुताबिक, हाल के एआरआर में खर्च का वास्तविक आकलन कम करके बिजली दरें घटाई गईं। उनका दावा है कि इससे पावरकाम पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ा है और चालू वित्तीय वर्ष में वास्तविक खर्च की जरूरतों के मुकाबले करीब 7800 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, बिजली दरों में कटौती के बाद सरकार का सालाना सब्सिडी बिल करीब 5300 करोड़ रुपये घटकर लगभग 15,200 करोड़ रुपये रह गया है, लेकिन मौजूदा सब्सिडी का भुगतान समय पर नहीं हो रहा। बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच 1584 मेगावाट उत्पादन ठप पंजाब में बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच मंगलवार को 1584 मेगावाट उत्पादन क्षमता ठप रही। राज्य में बिजली की मांग 16,505 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि पावरकाम के अपने स्रोतों से महज 4605 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही। सरकारी क्षेत्र के गोइंदवाल थर्मल का 270 मेगावाट का एक यूनिट मंगलवार को बंद हो गया।  रोपड़ और लहरा मुहब्बत थर्मल का एक-एक यूनिट पहले से बंद है। कोयले की कमी के कारण निजी क्षेत्र के तलवंडी साबो और राजपुरा थर्मल भी पूरी क्षमता से नहीं चल सके। दोनों से 894 मेगावाट कम उत्पादन हुआ। 3380 मेगावाट क्षमता वाले इन दोनों प्लांटों से कुल 2486 मेगावाट बिजली ही मिली।  तलवंडी साबो में करीब पांच और राजपुरा में छह दिन का कोयला ही बचा है। रणजीत सागर बांध और यूबीडीसी के चार यूनिट बंद रहने से भी 195 मेगावाट उत्पादन प्रभावित रहा। मंगलवार की मांग पिछले साल के इसी दिन के मुकाबले 7344 मेगावाट अधिक रही। सुबह नौ बजे 16,505 मेगावाट की मांग के मुकाबले पावरकाम ने नार्दर्न ग्रिड से 11,171 मेगावाट बिजली ली, जबकि उसका शेड्यूल 11,150 मेगावाट का था।   

बिजली बिल न भरने वालों के काटे जा रहे कनेक्शन

चंडीगढ़/जीरकपुर. बिजली बिल न भरने वाले कंज्यूमर्स के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पावरकॉम ने एक खास मुहिम शुरू की है। नवंबर 2025 तक बकाया बिल जमा न कराने वाले कंज्यूमर्स के कनेक्शन रोजाना काटे जा रहे हैं। डिपार्टमेंट ने साफ कर दिया है कि बकाया रकम जमा कराए बिना कोई राहत नहीं दी जाएगी। ऑफिशियल सूत्रों के मुताबिक, 31 जनवरी 2026 तक इलाके के कंज्यूमर्स पर करीब 62.5 करोड़ रुपये बकाया थे। इस भारी बकाए को देखते हुए फरवरी की शुरुआत से ही रिकवरी मुहिम तेज कर दी गई थी। 1 फरवरी से अब तक करीब 2.5 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं। डिपार्टमेंट का टारगेट 31 मार्च तक 20 करोड़ रुपये वसूलना है। अधिकारियों का दावा है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ेगा। पावरकॉम अधिकारियों के मुताबिक, डिफॉल्टर्स में बड़े बिल्डर्स से लेकर छोटे घरेलू कंज्यूमर्स तक शामिल हैं। कई मामलों में तो लंबे समय से बिल जमा नहीं कराए गए थे, जिससे डिपार्टमेंट की फाइनेंशियल हालत पर असर पड़ रहा था। डिपार्टमेंट की टीमें अलग-अलग इलाकों में भेजी जा रही हैं, जो मौके पर जाकर बकाया बिल चेक कर रही हैं और पेमेंट न करने पर तुरंत कनेक्शन काट रही हैं। अधिकारियों ने कंज्यूमर्स से अपील की है कि वे अपना बकाया समय पर जमा कर दें ताकि कनेक्शन काटने की कार्रवाई से बचा जा सके। डिपार्टमेंट का कहना है कि यह कैंपेन पूरी ट्रांसपेरेंसी के साथ चलाया जा रहा है और किसी भी लेवल पर कोई भेदभाव नहीं होगा। लाखों रुपये बकाया छोड़कर गायब बिल्डर्स पर नजर पहले भी शहर में S प्लस फ्लैट बनाने की होड़ में कई बाहरी लोगों ने टेम्परेरी मीटर लेकर कंस्ट्रक्शन का काम शुरू कर दिया था। अब खबर मिली है कि ऐसे कई छोटे बिल्डर्स पावरकॉम का लाखों रुपये बकाया छोड़कर गायब हो गए हैं या किसी दूसरी फर्म के नाम पर नए कनेक्शन लेकर काम कर रहे हैं। पावरकॉम ने साफ किया है कि मामलों की जांच की जा रही है और संदिग्ध कंज्यूमर्स पर खास नजर रखी जा रही है। बकाया वसूलने के लिए सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। एक हफ़्ते में 100 से ज़्यादा कनेक्शन काटे गए: रक्ष भाटिया SDO राकेश भाटिया ने बताया कि पावरकॉम कर्मचारियों की हाल ही में हुई हड़ताल को देखते हुए शहर के कई कंज्यूमर्स ने डिपार्टमेंट की कार्रवाई को हल्के में लिया था और समय पर बिजली बिल जमा नहीं किए थे, लेकिन अब डिपार्टमेंट ने साफ़ कर दिया है कि इस मामले में कोई ढील नहीं दी जाएगी। पिछले एक हफ़्ते से एक स्पेशल कैंपेन चलाया जा रहा है, जिसके दौरान 100 से ज़्यादा डिफॉल्टर कंज्यूमर्स के बिजली कनेक्शन काटे गए हैं, जिन कंज्यूमर्स ने बकाया रकम जमा कर दी है, उनके कनेक्शन नियमानुसार दोबारा जोड़े जा रहे हैं। कंज्यूमर्स से रिक्वेस्ट है कि वे बिना देर किए अपने बिजली बिल जमा करें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि एक बार कनेक्शन कटने के बाद पूरी बकाया रकम जमा होने के बाद ही सप्लाई बहाल की जाएगी। 31 मार्च तक 20 करोड़ रुपये वसूलने का टारगेट: हेमंत कुमार SDO हेमंत कुमार ने बताया कि पावरकॉम की तरफ से बकाया रकम वसूलने के लिए चलाए जा रहे स्पेशल कैंपेन को शहर में बड़ा सपोर्ट मिल रहा है। पिछले 20 दिनों में पावरकॉम के अकाउंट में करीब 2.5 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। जीरकपुर सर्कल के कंज्यूमर्स पर कुल 62 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया था, जिसमें से अब तक 2.5 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं। डिपार्टमेंट ने 31 मार्च तक 20 करोड़ रुपये और वसूलने का टारगेट रखा है और दावा किया गया है कि यह टारगेट तय समय से पहले ही हासिल कर लिया गया है। अभी सिर्फ उन्हीं कंज्यूमर्स पर एक्शन लिया जा रहा है, जिनका 30 नवंबर 2025 तक का बकाया है। जो लोग समय पर बिल जमा करेंगे, उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

पावरकॉम ने PUDA को 50 एकड़ जमीन बेचने की दी मंजूरी

पटियाला. पावरकॉम ने पटियाला के बडूंगर में पुड्डा को 50 एकड़ ज़मीन ट्रांसफर करने की मंज़ूरी दे दी है। पहले यह मामला कर्मचारियों के विरोध की वजह से पेंडिंग था, लेकिन अब पावरकॉम ने इस 50 एकड़ ज़मीन को बेचने के लिए हरी झंडी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, यह फ़ैसला पावरकॉम के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने 28 जनवरी को अपनी 121वीं मीटिंग में लिया। यह फ़ैसला कई दशक पहले बनी ओ.यू.वी.जी.एल. (खाली सरकारी जमीनों का सर्वोत्तम इस्तेमाल) स्कीम के तहत लिया गया है और यह ज़मीन 80:20 पॉलिसी के तहत ट्रांसफर की गई है। पावरकॉम की इस मीटिंग में मिली मंज़ूरी के मुताबिक गांव बडूंगर में इस जमीन से 66 KV बिजली की लाइनें और 11 KVLT लाइनें और ट्रांसफ़ॉर्मर हटाने का खर्च पुड्डा उठाएगा। इससे पहले पटियाला की बडूंगर साइट में 68.92 एकड़ जमीन की पहचान की गई थी, जिससे 213.92 करोड़ की इनकम होने का अनुमान था। इससे पहले बठिंडा की थर्मल कॉलोनी में जमीन पर फ़ैसला हो गया था और करीब 91 एकड़ जमीन खाली करवाना भी शुरू कर दिया गया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि पंजाब सरकार ने पांच बड़े शहरों में 15 जरूरी प्रॉपर्टी की पहचान की है, जिनसे करीब तीन हजार करोड़ की इनकम का अनुमान है, जिसमें से 50 फीसदी प्रॉपर्टी पावरकॉम की है। पटियाला की बडूंगर साइट का एजेंडा पिछली मीटिंग में टाल दिया गया था, लेकिन 28 जनवरी की मीटिंग में इसे हरी झंडी दे दी गई है।