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पुलिस महकमे में प्रमोशन की लहर: 1997–2000 बैच के PPS अफसरों को IPS बनने की हरी झंडी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से अधिक पुलिस अधिकारियों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश के दो दर्जन से अधिक पीपीएस अधिकारी के प्रमोशन को मंजूरी मिल गई है। ये सभी पुलिस अफसर जल्द ही आईपीएस बनेंगे। नई दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग में गुरुवार को पीपीएस अधिकारियों के प्रमोशन के लिए डीपीसी की बैठक हुई। बैठक में वर्ष 1997,1998,1999 और 2000 बैच के अफसरों की पदोन्नति को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद यूपी पुलिस के इन पीपीएस अफसरों में खुशी की लहर में है। आपको बता दें कि नई दिल्ली स्थित यूपीएससी ऑफिस में गुरुवार को पुलिस की हाई लेवल मीटिंग हुई। विभागीय डीपीसी की एक बैठक हुई। बताया जा रहा है कि इसमें डीजीपी राजीव कृष्ण भी पर मौजूद थे। बैठक में कुल 30 पीपीएस अधिकारियों को आईपीएस कैडर में प्रमोट करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। अब इसके बाद राज्य सरकार के नोटिफिकेशन का इंतजार है। इसके बाद ये सभी अधिकारी आईपीएस हो जाएंगे। इस सूची में इन अफसरों के नाम इस लिस्ट में यूपी पुलिस के कई दिग्गज और तेजतर्रार अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें सुरेश चंद्र रावत, शोएब इकबाल, राहुल मिठास, आलोक कुमार शर्मा, राजकुमार-प्रथम, महेश सिंह अत्री, विनीत भटनागर, जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, शशि शेखर सिंह, कुलदीप सिंह-प्रथम, ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद, हरेंद्र प्रताप यादव, वंश राज सिंह यादव, डॉ. कृष्णा गोपाल, मधुबन कुमार सिंह कपिल देव सिंह, बलवंत कुमार चौधरी, राहुल श्रीवास्तव, राजेश कुमार पांडे-प्रथम, प्रीति बाला गुप्ता, विकास चंद्र त्रिपाठी, पूर्णेन्दु सिंह, हरेंद्र कुमार, मार्तंड प्रकाश सिंह, अभय नाथ त्रिपाठी, पवित्र मोहन त्रिपाठी, देवेश कुमार शर्मा, प्रशांत कुमार प्रसाद, डा. अरविंद कुमार व सिद्धार्थ वर्मा प्रमुख हैं। 53 पीसीएस अधिकारियों का बढ़ा ग्रेड पे उधर, उत्तर प्रदेश के 53 पीसीएस अफसराें के लिए भी अच्छी खबर है। योगी सरकार ने इन अफसरों को बड़ी खुशखबरी दी है। प्रदेश के 53 पीसीएस अधिकारियों को 5 साल की सेवा पूरी होने के बाद 5400 ग्रेड पे से 6600 ग्रेड पे दिया गया है। इन अधिकारियों को 1 जून बढ़े हुए ग्रेड पे का लाभ मिलेगा। ये अधिकारी मौजूदा समय में एसडीएम के पद पर तैनात है।

सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से होगी पदोन्नति, नई नियमावली 2026 जारी

रांची  झारखंड सरकार ने चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य में कार्यरत हजारों ग्रुप ‘घ’ कर्मियों को ग्रुप ‘ग’ के पदों पर प्रोन्नति का अवसर मिलेगा. इस निर्णय से लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों में खुशी की लहर है. यह कदम कर्मचारियों के करियर विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. किन पदों पर मिलेगी प्रोन्नति नए प्रावधान के तहत चतुर्थ वर्गीय कर्मियों को निम्न वर्गीय लिपिक (एलडीसी) के पद पर प्रोन्नत किया जाएगा. वहीं, सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों को कनीय सचिवालय सहायक के पद पर पदोन्नति का लाभ मिलेगा. इससे कर्मचारियों को बेहतर जिम्मेदारी और कार्यक्षेत्र मिलेगा. साथ ही, उनके वेतन और पद की गरिमा में भी वृद्धि होगी. सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से होगा चयन सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पदोन्नति सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से दी जाएगी. यह परीक्षा पूरी तरह से ऑनलाइन आयोजित होगी, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके. कुल रिक्त पदों के 15 प्रतिशत हिस्से पर इस परीक्षा के जरिए प्रोन्नति दी जाएगी. इससे योग्य और सक्षम कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. नई नियमावली 2026 जारी कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने ‘सीमित प्रतियोगिता ऑनलाइन परीक्षा नियमावली 2026’ जारी कर दी है. इस नियमावली में प्रोन्नति से संबंधित सभी दिशा-निर्देश और पात्रता मानदंड तय किए गए हैं. साथ ही परीक्षा के पैटर्न और प्रक्रिया की भी स्पष्ट जानकारी दी गई है, ताकि उम्मीदवार पहले से तैयारी कर सकें. शैक्षणिक योग्यता क्या होगी प्रोन्नति के लिए अलग-अलग पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है. कनीय सचिवालय सहायक बनने के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक की डिग्री अनिवार्य होगी. वहीं, समाहरणालय और अन्य कार्यालयों में कनीय लिपिक के पद के लिए इंटरमीडिएट या 10+2 पास होना जरूरी होगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पदोन्नति के बाद कर्मचारी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकें. कर्मचारियों को मिलेगा करियर ग्रोथ का अवसर इस फैसले से चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को अपने करियर में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर मिलेगा. लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह निर्णय उत्साहवर्धक साबित होगा. इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी सुधार आएगा. पारदर्शिता और दक्षता पर जोर ऑनलाइन परीक्षा और स्पष्ट नियमावली के जरिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है. इससे भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाएं कम होंगी. साथ ही योग्य कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, जो राज्य की प्रशासनिक दक्षता को और मजबूत करेगा.