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हरियाणा में 22 HPS अफसरों के होंगे प्रोमोशन

चंडीगढ़. हरियाणा पुलिस सेवा (एच.पी.एस.) के अधिकारियों के लिए जल्द खुशखबरी आने वाली है। लंबे इंतजार के बाद, हरियाणा सरकार ने 22 एच.पी.एस. अधिकारियों को आई.पी.एस. रैंक पर प्रोमोट करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस बीच 2002 बैच के एच.सी.एस. अफसरों को राहत मिली है, जिन्हें प्रोवीजनल तौर पर आई.ए.एस. में प्रोमोट किया गया था। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा इन अधिकारियों को इंटेग्रिटी सर्टिफिकेट जारी किए जाने के साथ ही सालों से अटका प्रोमोशन का रास्ता साफ हो गया है। अब राज्य सरकार जल्द ही इन नामों का पैनल यू.पी.एस.सी. को भेजने जा रही है। इन एच.पी.एस. अधिकारियों को मिले सर्टिफिकेटः मुख्य सचिव की ओर से जिन एच.पी.एस. अफसरों को ये सर्टिफिकेट दिए हैं, उनमें मुकेश कुमार, ध्यान सिंह पूनिया, धर्मवीर सिंह, चलजिंद्र सिंह, जयबीर सिंह, कुशाल सिंह, राज कुमार वालिया, ताहिर हुसैन, सिंह, नरेंद्र सिंह, रविंद्र कुमार, राजेश कुमार, ममता खर्च, रविंद्र विजय सिंह, सिद्धार्थ ढांडा, करण गोयल, संदीप कुमार, पूनम, भारती डवास, अमित दहिया, ऊषा देवी और जितेंद्र गहलावत शामिल हैं। 2 वर्ष पहले प्रोमोशन पर फंसा था पेंच दरअसल दो साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में 13 एच. पी. एस. के प्रोमोशन की फाइल की मंजूरी मिली थी, लेकिन गृह विभाग की ओर से एच.पी.एस. अफसरों के प्रोमोशन की तैयार की गई फाइल को तत्कालीन मुख्य सचिव ने आपत्ति जताते हुए वापस भेज दिया था। उस समय कई एच.पी.एस. अफसरों की एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट (ए.सी.आर.) ही पूरी नहीं थी, इसके कारण उनके इंटेग्रिटी सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ था। 2002 बैच के एच.सी.एस. अफसरों को भी राहत 2002 बैच के एच.सी.एस. अफसरों को राहत हरियाणा सरकार के 2002 बैच के उन एच.सी. एस. अफसरों को कैट से राहत मिली है, जिन्हें प्रोवीजनल तौर पर आई.ए.एस. में प्रोमोट किया गया था। यू.पी.एस.सी. ने पिछले साल इन अफसरों के नामों पर विचार किया था और लंबित केस के कारण उनका नाम प्रोवीजनल लिस्ट में शामिल किया गया था। अब केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने हरियाणा सिविल सेवा के आठ अधिकारियों को अंतरिम राहत प्रदान की है, जिनकी भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति 2002 के भर्ती मामले में कथित संलिप्तता के कारण रुकी हुई है। कैट ने 27 जनवरी को पारित अपने नवीनतम आदेश में, न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया कि उसकी पूर्व अंतरिम सुरक्षा 27 अप्रैल, 2026 तक जारी रहेगी, जिससे चयन सूची रद्द नहीं होगी। जिन आठ अधिकारियों को राहत मिली है, उनमें जगदीप ढांडा, सरिता मलिक, कमलेश भादू, कुलधीर सिंह, वत्सल वशिष्ठ, जग निवास, वीना हुडा और सुरेंद्र सिंह-1 का नाम शामिल हैं।

आरक्षण प्रमोशन केस: पक्ष प्रस्तुत किया गया, अगली सुनवाई 6 जनवरी निर्धारित

जबलपुर  मप्र हाईकोर्ट में प्रदेश के कर्मचारियों को प्रमोशन मामले में याचिकाकर्ता और सरकार के द्वारा अपना पक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने हस्तक्षेपकर्ताओं को अपना पक्ष प्रस्तुत करने निर्देश दिये हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित की गई है। गौरतलब है कि भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी और अन्य तरफ से दायर याचिकाओं में मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2002 के नियमों को हाईकोर्ट के द्वारा समाप्त किया जा चुका है। इसके विरुद्ध मप्र शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी लंबित है। इसके बावजूद मप्र शासन ने महज नाम मात्र का शाब्दिक परिवर्तन कर पूर्व के नियम लागू कर दिये है। याचिका पर गुरुवार को सुनवाई दौरान सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने दलील दी कि नियम बनाने के पहले सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुरूप बनाई गई है। नियम बनाते समय क्वांटिफायर डाटा का परीक्षण तथा कर्मचारियों की प्रशासनिक क्षमता का आकलन भी किया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कमेटी गठित कर कैडर वॉइस डाटा का परीक्षण करने के बाद पद आरक्षित किये गये हैं। शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, अतिरिक्त महाधिवक्ता नीलेश यादव, जान्हवी पंडित और धीरेंद्र सिंह परमार भी उपस्थित हुए। वहीं सरकार की दलीलों के पहले याचिकाकर्ताओं की ओर से सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व का डाटा भी पेश किया गया है। उनकी तरफ से दलील दी गयी कि आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को अधिक प्रमोशन दिए गए हैं, जिस कारण एससी और एसटी वर्ग के कर्मचारी ऊंचे पदों पर पदस्थ हैं। अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों को कम या देरी प्रमोशन दिये गये। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किये। 

कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर! हाई कोर्ट ने प्रमोशन और पेंशन लाभ का रास्ता किया साफ

कैथल  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कैथल जिले के पुलिस कर्मचारियों के पक्ष में बड़ा आदेश सुनाते हुए रोहतक रेंज द्वारा जारी सीनियरिटी और प्रमोशन से जुड़े विवादित आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि कैथल पुलिसकर्मियों की वरिष्ठता और प्रमोशन का निर्णय केवल करनाल रेंज कर सकता है। इस फैसले से कैथल के करीब 70 पुलिस कर्मचारियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जिनमें एएसआई और एसआई रैंक के अधिकारी शामिल हैं। इनमें से कुछ कर्मचारी अब सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। मामला सब-इंस्पेक्टर मोहिंदर सिंह और अन्य कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता कर्मवीर सिंह बनयाना ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल वर्ष 2004 से 2008 के बीच कैथल जिले में हेड कांस्टेबल के रूप में कन्फर्म हुए थे। जबकि उनके जूनियर साथियों को वर्ष 2009 से 2011 के बीच करनाल और पानीपत में कन्फर्म किया गया था। इसके बावजूद 2019 में रोहतक रेंज ने सीनियरिटी सूची बदलते हुए जूनियर्स को सीनियर बना दिया और उन्हें एंटीडेटेड प्रमोशन भी दे दिए। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि नियमों के मुताबिक हेड कांस्टेबल तक की सीनियरिटी जिला स्तर पर तय होती है, जबकि एएसआई और एसआई की सीनियरिटी रेंज स्तर पर होती है। ऐसे में कैथल, करनाल और पानीपत के कर्मचारियों की वरिष्ठता और प्रमोशन का फैसला केवल करनाल रेंज कर सकता था। रोहतक रेंज को इसमें हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं था क्योंकि 29-9-2011 में करनाल रेंज के गठन के बाद जिला करनाल, पानीपत और कैथल के पुलिस कर्मियों के बारे में कोई भी निर्णय लेने का अधिकार केवल करनाल रेंज के पास ही है रोहतक रेंज के पास नहीं है। न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि रोहतक रेंज का आदेश पूरी तरह गलत था। अदालत ने इस आदेश को रद्द करते हुए कहा कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हरियाणा स्वयं या किसी अन्य अधिकारी को नियुक्त कर तीन माह में उचित आदेश जारी करें। इस फैसले से कैथल जिले के एएसआई और एसआई रैंक के लगभग 70 पुलिस कर्मचारियों को प्रमोशन, वेतनमान और पेंशन लाभ मिलेगा। चूंकि इनमें से कुछ कर्मचारी अब रिटायर हो चुके हैं, इसलिए उन्हें भी एरियर और पेंशन लाभ का फायदा मिल सकेगा। कैथल पुलिस लाइन और थानों में तैनात कर्मचारियों ने हाईकोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह फैसला न केवल वर्षों से लंबित उनके हक की बहाली है बल्कि इससे उनका मनोबल भी ऊँचा होगा। कर्मचारी संगठनों ने भी अदालत के इस निर्णय को ऐतिहासिक करार देते हुए सरकार से अपील की है कि आदेश का पालन समय पर और बिना देरी के किया जाए। हाईकोर्ट का यह आदेश केवल कैथल पुलिसकर्मियों पर लागू होगा। इससे यह भी साफ हो गया है कि सीनियरिटी और प्रमोशन को लेकर भविष्य में किसी अन्य रेंज को कैथल के कर्मचारियों के मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होगा।

हाईकोर्ट में मिली चुनौती के चलते एक बार फिर अधिकारी, कर्मचारियों में ओहदा बढ़‌ने की नौ साल बाद जागी उम्मीदों पर अघोषित ठहराव की स्थिति

भोपाल  सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को पदोन्नति देने के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक कर ली है। लोक निर्माण विभाग, वाणिज्यिक कर और निर्वाचन आयोग भी कुछ वर्गों के लिए अलग-अलग बैठकें कर चुका है। निर्वाचन में प्रमोशन आदेश भी जारी हुए। स्कूल शिक्षा जैसे कई विभागों ने सहमति लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। उधर जिन विभागों में शासकीय सेवकों की गोपनीय चरित्रावली (सीआर) पूरी करने संबंधी प्रक्रिया अधूरी थी, उनमें भी अतिरिक्त काम हो रहे हैं। इस बीच हाईकोर्ट में मामले को सपाक्स वर्ग के कर्मचारियों की ओर से मिली चुनौती के चलते एक बार फिर अधिकारी, कर्मचारियों में ओहदा बढ़‌ने की नौ साल बाद जागी उम्मीदों पर अघोषित ठहराव की स्थिति बन गई है।  30 जुलाई तक नहीं आया फैसला तो…. 30 जुलाई तक यही हाल रहे तो तब तक बगैर प्रमोशन के 1500 से ज्यादा अधिकारी, कर्मचारी रिटायर हो जाएंगे। इसके पहले एक से डेढ़ लाख इसी तरह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जब तक कोर्ट से निर्णय नहीं हो जाता तब तक मंत्रालय से लेकर जिला स्तर तक पदोन्नति दिए जाने को लेकर शुरु हुई सीआर लिखने, पदोन्नति के लिए शासकीय सेवकों से सहमति लिए जाने, विभागों में डीपीसी की बैठकें करने जैसी सभी कार्रवाई पर ठहराव की स्थिति बननी तय है। कर्मचारी घोषित तौर पर तो अब कुछ नहीं कह रहे, लेकिन सपाक्स, अजाक्स के पदाधिकारी एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। 31 जुलाई है डेडलाइन सभी विभागों को पहले चरण के तहत 31 जुलाई तक पदोन्नति देना है। मुख्य सचिव (सीएस) ने जून के अंत में बैठक ली थी। निर्देश एसीएस, पीएस, सचिव व विभागाध्यक्षों को दिए थे। यह भी कहा था कि प्रमोशन संबंधी जितने प्रकरण निपट जाएं, उतने निपटा लें। शेष शासकीय सेवकों के लिए सितंबर-अक्टूबर में बैठकें करें। सरकार ने नौ साल से लंबित पदोन्नति संबंधी मामलों में तेजी लाने के लिए इस वर्ष दो बार डीपीसी करने का निर्णय लिया है। आमतौर पर अगले वित्तीय वर्ष से वर्ष में एक बार ही डीपीसी होगी। इस वर्ष सभी विभागों में पहली डीपीसी की संबंधी प्रक्रिया 31 जुलाई तक पूरी करनी है। कब क्या हुआ     08 अप्रैल 2025 : सीएम ने पहली बार पदोन्नति की घोषणा की।     27 मई 2025 : सीएम ने दोहराया कि पदोन्नति जल्द देंगे।     10 जून 2025 : कैबिनेट में पदोन्नति नियम के प्रस्ताव पर चर्चा।     17 जून 2025 : कैबिनेट में पदोन्नति नियम के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।     19 जून 2025 : अधिसूचना जारी।     26 जून 2025 : मुख्य सचिव ने 31 जुलाई की डेडलाइन तय की।