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मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने वाली हैं, 74 हजार लोकेशन की नई गाइडलाइन जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही लोगों के लिए जमीन और मकान खरीदना भी मंहगा होने जा रहा है. राजस्व और पंजीयन विभाग ने प्रदेश के करीब 74 हजार लोकेशन का विस्तृत सर्वे पूरा कर नई कलेक्टर गाइडलाइन का मसौदा तैयार कर लिया है. यह गाइडलाइन 1 अप्रैल 2026 से लागू की जाएगी. हालांकि अब इस प्रस्ताव को पहले उप जिला मूल्यांकन समिति, फिर जिला मूल्यांकन समिति में चर्चा के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा जाएगा. वहां से अंतिम स्वीकृति मिलते ही नई दरें प्रभावी हो जाएंगी. कलेक्टर गाइड लाइन में पहली बार एआई का प्रयोग इस बार कलेक्टर गाइडलाइन के तहत दर निर्धारण की प्रक्रिया पारंपरिक तरीके से बिलकुल अलग और हाईटेक बनाई गई है. पंजीयन विभाग ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट इमेजरी का सहारा लिया है. एमपी इलेक्ट्रानिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के सहयोग से जिलों की एक साल पुरानी और वर्तमान सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया गया. इससे यह स्पष्ट हुआ कि बीते एक वर्ष में किन क्षेत्रों में नया विकास हुआ है. सैटेलाइट इमेज के जरिए यह चिह्नित किया गया कि जहां पहले खाली जमीन थी, वहां अब प्लाटिंग, कॉलोनी, सड़क या व्यावसायिक निर्माण तो नहीं हो गया. जिन स्थानों पर तेजी से विकास हुआ है. डायवर्सन के डेटा का किया गया व्यापक विश्लेषण नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से कृषि भूमि के आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में हुए डायवर्सन का डेटा लिया गया है. जिन क्षेत्रों में कृषि भूमि का स्वरूप बदल चुका है और विकास कार्य शुरू हो गए हैं, वहां अब कृषि दरों के बजाय प्लाट के अनुरूप दरें तय की जाएंगी. कृषि विभाग से भी भूमि उपयोग से जुड़ी जानकारी लेकर क्रास वेरिफिकेशन किया गया है. इससे जमीन की दरें वास्तविक बाजार मूल्य के ज्यादा करीब तय करने का दावा किया जा रहा है. भोपाल सहित प्रदेशभर में प्राइम लोकेशन पर बढ़ोत्तरी अधिकारियों के अनुसार भोपाल की करीब 500 लोकेशन सहित प्रदेश के कई प्रमुख शहरों और ग्रामीण-शहरी सीमावर्ती इलाकों में दरों में बढ़ोतरी संभावित है. खासतौर पर उन क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है, जहां बाजार में प्रापर्टी का वास्तविक सौदा गाइडलाइन से अधिक कीमत पर हो रहा है. चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 55 जिलों के 60 हजार स्थानों पर औसतन 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी. तकनीकी सर्वे में यह सामने आया था कि कई क्षेत्रों में सुविधाओं और निर्माण गतिविधियों के कारण जमीन का बाजार भाव पहले से कहीं अधिक हो चुका है. कलेक्टर गाइड लाइन में एआई के प्रयोग से यह होगा लाभ राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एआई द्वारा किए गए सर्वे और सैटेलाइट इमेज के आधार पर कलेक्टर गाइडलाइन के निर्धारण से कई फायदे होंगे. इससे जहां अंडरवैल्यू रजिस्ट्रियों पर रोक लग सकेगी, वहीं नई गाइडलाइन लागू होने के बाद बाजार मूल्य के अनुरूप ही दरें तय होंगी. कृषि से आवासीय या व्यावसायिक बनी जमीन का सटीक मूल्यांकन किया जाएगा. वहीं कम कीमत दिखाकर होने वाली रजिस्ट्रियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा. इससे राज्य के राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी. साथ ही सभी जिलों में एक समान और वैज्ञानिक पद्धति से दर निर्धारण संभव होगा. केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की स्वीकृति के बाद होगी लागू मध्य प्रदेश पंजीयन विभाग के महानिरीक्षक अमित तोमर ने बताया कि "नई कलेक्टर गाइडलाइन का मसौदा तैयार किया जा रहा है. जल्द ही संबंधित समितियों की बैठक बुलाकर प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा. केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की स्वीकृति के बाद 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में नई दरें लागू कर दी जाएगी. तोमर ने बताया कि नई व्यवस्था से जहां पारदर्शिता बढ़ने का दावा किया जा रहा है, वहीं आम खरीदारों और निवेशकों के लिए प्रापर्टी सौदे पहले से महंगे हो सकते हैं.

इंदौर में रियल एस्टेट गतिविधियों में तेजी, विजयनगर और बायपास में रजिस्ट्री में उछाल

 इंदौर  शहर में रियल एस्टेट गतिविधियां लगातार गति पकड़ रही हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में संपत्ति की खरीदी-बिक्री का रुझान बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 2.28 प्रतिशत बढ़ा है। इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान विजय नगर स्थित इंदौर-3 पंजीयन कार्यालय का रहा, जहां पंजीयन में 16.51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यहां वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में 4320 अधिक दस्तावेज पंजीकृत हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार विजय नगर, बायपास और देवास नाका क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की खरीदी-बिक्री बढ़ी है। दस्तावेजों के पंजीयन में इजाफा इंदौर जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में अप्रैल से दिसंबर तक नौ माह की अवधि में पंजीयन कार्यालयों में कुल 1 लाख 26 हजार 328 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष इसी अवधि में 1 लाख 23 हजार 512 दस्तावेज दर्ज हुए थे। इस तरह कुल 2816 दस्तावेज अधिक पंजीकृत हुए। हालांकि, दस्तावेज पंजीयन बढ़ने के बावजूद राजस्व लक्ष्य हासिल करने में विभाग पीछे रहा। राजस्व संग्रहण और वार्षिक लक्ष्य इंदौर पंजीयन कार्यालय को 3500 करोड़ रुपये का वार्षिक लक्ष्य दिया गया था, जिसमें नौ माह में 2328 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया जाना था। लेकिन अब तक विभाग केवल 1730 करोड़ रुपये ही एकत्र कर सका है। फिर भी यह राशि वर्ष 2024 की समान अवधि में जुटाए गए 1659 करोड़ रुपये से अधिक है। पंजीयन कार्यालयवार आंकड़ों पर नजर डालें तो नौ माह में इंदौर-4 कार्यालय में सर्वाधिक 34,632 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि सबसे अधिक राजस्व 479.08 करोड़ रुपये इंदौर-3 कार्यालय से प्राप्त हुआ। पुराने क्षेत्रों में मांग कमजोर मोती तबेला स्थित पंजीयन कार्यालय में दस्तावेज पंजीयन में 15.30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो शहर के कुछ पुराने क्षेत्रों में संपत्तियों की मांग कमजोर होने का संकेत देती है।