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अब मेडिकल स्टोर होंगे हाई-टेक: QR कोड स्कैन करते ही कर सकेंगे शिकायत दर्ज

नई दिल्ली जल्द ही भारत के सभी रिटेल और होलसेल फॉर्मेसी की दुकान पर लोगों को एक खास क्यूआर कोड और टोल फ्री नंबर लगा दिखेगा। ये दवाई ऑर्डर करने या फिर पेमेंट करने के लिए नहीं बल्कि दवाईयों से होने वाले नुकसान की रिपोर्ट करने के लिए है। स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वालों के लिए सरकार एक नई सुविधा लाई है। अब वे अपने फोन से किसी भी दवाई से होने वाले नुकसान की शिकायत कर पाएंगे। देश भर के केमिस्टों पर जल्द लोगों को एक खास QR कोड लगा दिखेगा। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के दवा लाइसेंसिंग अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सभी रिटेल और होलसेल फार्मेसी में एक खास क्विक रिस्पांस (QR) कोड और टोल-फ्री नंबर लगावाएं। इस QR कोड और टोल-फ्री नंबर के जरिए लोग अपने स्मार्टफोन से ही दवाईयों से होने वाले साइड इफेक्ट्स की रिपोर्ट कर सकते हैं। CDSCO ने कहा कि इस कदम से आम लोगों और हेल्थ प्रोफेशनल को भारत के स्वदेशी PvPI एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए, दवाओं के प्रभाव और एडवर्स ड्रग रिएक्शन की आसानी से रिपोर्ट करने में मदद मिलेगी। आइये, पूरी खबर जानते हैं। 16वीं वर्किंग ग्रुप मीटिंग के दौरान लिया गया था फैसला आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जून, 2025 में फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया की 16वीं वर्किंग ग्रुप मीटिंग के दौरान यह फैसला लिया गया था। इसका मतलब है कि QR कोड को स्कैन करके, ग्राहक और हेल्थ प्रोफेशनल किसी भी एडवर्स ड्रग रिएक्शन जैसे रैशेज, चक्कर आना, सूजन, मतली या और गंभीर समस्याएं की सीधी रिपोर्ट ADRMS (एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम) में कर सकते हैं। हर रिटेल और होलसेल फार्मेसी पर लगेगा QR Code CDSCO के सर्कुलर के मुताबिक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी दवा लाइसेंसिंग अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि देश भर की हर रिटेल और होलसेल फार्मेसी में एक ऐसी जगह यह खास QR कोड लगा हो, जहां से वह सबको दिखे। ये टोल फ्री नंबर भी होगा उपलब्ध इसके अलावा, सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि इस QR कोड के साथ फार्मेसी स्टोर पर 1800-180-3024 टोल-फ्री नंबर भी साफ तौर पर दिखाया जाना चाहिए। सर्कुलर में आगे अनुरोध किया गया है कि अपने अधिकार क्षेत्र में इन निर्देशों को तुरंत लागू करने के लिए कार्रवाई शुरू करें। कृपया सभी लाइसेंस धारकों के बीच प्रचार सुनिश्चित करें और दवा सुरक्षा को बढ़ावा देने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। क्या होगा फायदा? इस नए सिस्टम की मदद से कोई भी आसानी से दवा से होने वाले हानिकारक प्रभाव के बारे में रिपोर्ट कर पाएगा। पहले, कई लोग दवाई से होने वाले साइड इफेक्ट्स को अनदेखा कर देते थे या वे रिपोर्ट करने का तरीका नहीं जानते थे। अब, बस एक स्मार्टफोन से एक QR कोड स्कैन करके या टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके, वे अपनी चिंताएं सीधे सिस्टम तक पहुंचा सकते हैं। यह जानकारी दवा कंपनियों और नियामकों को दवाओं की सुरक्षा पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कार्रवाई करने में मदद करेगी। मरीजों और दवा बनाने वालों दोनों के लिए है सही यह पहल भारत में दवा सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुनिश्चित करेगा कि दवाओं के किसी भी संभावित खतरे को जल्दी पहचाना जा सके और उस पर कार्रवाई की जा सके। इससे न केवल मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि दवाओं के विकास और उपयोग में भी सुधार होगा। यह कदम भारत को दवा सुरक्षा के मामले में एक मजबूत देश बनाने की दिशा में एक अहम योगदान देगा।

अब आम जन सीधे तौर पर पुलिस से संवाद स्थापित कर सकेगी, प्रदेश के सभी थानों में लगेंगे QR कोड, स्कैन कर दे सकेंगे प्रतिक्रिया

भोपाल  प्रदेशभर के थानों में आम जनता अब पुलिसकर्मियों के व्यवहार और थाने के अनुभव पर सीधे ऑनलाइन फीडबैक दे सकेगी। इसके लिए थानों में QR कोड लगाए जाएंगे, जिन्हें स्कैन कर नागरिक अपने अनुभव साझा कर सकेंगे। पुलिस मुख्यालय से जारी आदेश के मुताबिक, थानों में किसी खुले स्थान पर क्यूआर कोड लगाया जाएगा। शिकायतकर्ता या कोई भी आम नागरिक इसे स्कैन कर यह बता सकेगा कि थाने में उसके साथ कैसा व्यवहार हुआ। पुलिस अधिकारी या कर्मियों ने समस्या ठीक से सुनी या नहीं, इसका भी जिक्र फीडबैक में किया जा सकेगा। नर्मदापुरम में तैयारियां शुरू नर्मदापुरम एसपी डॉ. गुरकरण सिंह ने बताया कि जिले के सभी 19 थानों और पुलिस चौकियों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। प्रत्येक स्थान पर फीडबैक स्कैन बारकोड लगाया जाएगा। गूगल या एनआईसी से लिंक होगा फॉर्म QR कोड स्कैन करने के बाद फीडबैक फॉर्म खुल जाएगा, जिसे गूगल या एनआईसी पोर्टल के माध्यम से तैयार किया जाएगा। यह फॉर्म वरिष्ठ अधिकारियों की ई-मेल आईडी से लिंक रहेगा ताकि तत्काल निगरानी हो सके। बेहतर कार्य, 2 थानों को सर्टिफिकेट बेहतर पुलिसिंग, संसाधनों का अच्छे से उपयोग करने पर तेजाजी नगर और राजेंद्र नगर थाने को आइएसओ सर्टिफिकेट मिला है। यह सर्टिफिकेट डीजीपी ने संबंधित थानों के अधिकारियों को देकर बधाई दी। वहीं महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारी, कर्मचारी को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। उक्त फीडबैक क्यूआर कोड के संबंध में जानकारी देते हुए डीजीपी महोदय ने बताया कि, ये क्यू आर कोड शहर के प्रत्येक थानो पर लगाएं जाएगें, जहां पर जनता का पुलिस से सीधा संवाद होता है। आम नागरिक अपनी समस्याओं व शिकायत लेकर थाने पर आता है तो पुलिस का उसके साथ कैसा व्यवहार है तथा उसकी समस्या पर पुलिस ने क्या कार्यवाही करी और आवेदक पुलिस की कार्यप्रणाली से संतुष्ट है या असंतुष्ट है आदि के संबंध में अपनी राय को उक्त क्यूआर कोड को स्कैन कर अपना फीडबैक दे सकता है। आमजन द्वारा दिए गये फीडबैक वरिष्ठ अधिकारियों व कार्यालय में स्थित मॉनिटरिंग सेल में जाएगा, जिस पर उक्त फीडबैक के आधार पर कार्यवाही की जावेगी। आम नागरिकगण अपना फीडबैक देकर पुलिस की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। इसी प्रकार आमजन के हितों व उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, बेहतर पुलिसिंग व संसाधनों का अच्छे से उपयोग कर, कार्यप्रणाली को और अच्छा करने के फलस्वरूप इदौर पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस थाना तेजाजी नगर व राजेन्द्र नगर को ISO 9001:2015 का सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। जिस पर डीजीपी श्री कैलाश मकवाना जी द्वारा उक्त सर्टिफिकेट संबंधित थानों व अधिकारियों को समर्पित करते हुए, सभी को बधाई दी और इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान कर, ऐसे ही पूर्ण लगन व मेहनत से बेहतर पुलिसिंग करने के लिये सदैव प्रयासरत् रहने के लिये प्रेरित किया। इस पहल से पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम जनता की प्रतिक्रिया सीधे अधिकारियों तक पहुंचेगी।