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जयपुर में ‘अमृत महोत्सव उद्घोष’ के दौरान विधानसभा का नया प्रतीक चिह्न हुआ जारी

जयपुर राजस्थान विधानसभा ने अपने 75वें स्थापना वर्ष के ऐतिहासिक मौके पर अपनी एक नई और अनूठी पहचान दुनिया के सामने पेश की है। जयपुर में आयोजित 'अमृत महोत्सव उद्घोष' कार्यक्रम के दौरान विधानसभा के नवनिर्मित आधिकारिक प्रतीक चिह्न का विमोचन किया गया और साथ ही विधानसभा परिसर के विभिन्न ऐतिहासिक द्वारों का नामकरण भी किया गया। इस समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। नए लोगो में खेजड़ी और ऊंट को मिला स्थान राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की कल्पना से तैयार इस नए प्रतीक चिह्न में राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। नए लोगो में दो सबसे खास तत्वों को शामिल किया गया है, जो पूरे मरुस्थल का सम्मान हैं। राजस्थान के कल्पवृक्ष खेजड़ी को लोगो में किया शामिल राज्य वृक्ष 'खेजड़ी' कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हरा-भरा रहने और जीवन को बनाए रखने की क्षमता का प्रतीक है। ग्रामीण जीवन और पर्यावरण संतुलन की रीढ़ माने जाने वाले इस वृक्ष को लोगो में शामिल कर राज्य की पर्यावरणीय विरासत को सलाम किया गया है। रेगिस्तान का जहाज ऊंट भी लोगो में शामिल राज्य पशु ऊंट मरुधरा की जीवटता, अटूट धैर्य और मजबूती से आगे बढ़ने के स्वभाव को दर्शाता है। यह राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का सबसे मजबूत स्तंभ है। ऊंट सदियों से राजस्थान के शूरवीरों और राजा-महाराजाओं का न केवल युद्ध के मैदान में विश्वसनीय साथी रहा है, बल्कि मरुधरा के व्यापारिक कारवानों की मुख्य जीवनरेखा भी रहा है। बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने विश्व प्रसिद्ध 'गंगा रिसाला' का गठन किया था, जिसने प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वैश्विक स्तर पर अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया। 1913 का इतिहास और नेहरू की 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' का जिक्र समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने राजस्थान की प्राचीन लोकतांत्रिक जड़ों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत में लोकतंत्र नया नहीं है। पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रसिद्ध किताब 'The Discovery of India' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में प्राचीन काल से ही लोकतांत्रिक परंपराएं मौजूद रही हैं। राज्यपाल ने एक बेहद दिलचस्प ऐतिहासिक तथ्य साझा करते हुए बताया कि आजादी से बहुत पहले, साल 1913 में ही बीकानेर रियासत में 'प्रतिनिधि सभा' हुआ करती थी, जहां बाकायदा बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराया जाता था।

बजट और सरकारी खर्च पर रहेगी पैनी नजर, जनलेखा और प्राक्कलन समितियों में पक्ष-विपक्ष के दिग्गजों को मिली जगह

जयपुर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने चार प्रमुख वित्तीय समितियों का गठन किया है। इनमें जनलेखा समिति, प्राक्कलन समिति ‘क’, प्राक्कलन समिति ‘ख’ और राजकीय उपक्रम समिति शामिल हैं। इन सभी समितियों का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक रहेगा। जनलेखा समिति में अनिता भदेल, अर्जुन लाल जीनगर, प्रमोद जैन “भाया”, डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, अजय सिंह, रामकेश, चन्द्रभान सिंह चौहान, डॉ. सुरेश धाकड़, रफीक खान, रोहित बौहरा, गुरुवीर सिंह और गोपाल शर्मा को सदस्य बनाया गया है। प्राक्कलन समिति ‘क’ में प्रताप सिंह सिंघवी, शांति धारीवाल, समाराम, हरेंद्र मिर्धा, छोटूसिंह, अर्जुन लाल, जीवाराम चौधरी, सुरेश मोदी, अमित चाचाण, मनोज कुमार (सादुलपुर) और विश्वराज सिंह मेवाड़ को शामिल किया गया है। प्राक्कलन समिति ‘ख’ में पुष्पेंद्र सिंह, शंकरसिंह रावत, गोविंद सिंह डोटासरा, हमीर सिंह भायल, पब्बाराम विश्नोई, समरजीत सिंह, मनोज कुमार (सुजानगढ़), अमीन कागजी, डॉ. सुभाष गर्ग और अरुण चौधरी को सदस्य नियुक्त किया गया है। वहीं राजकीय उपक्रम समिति में डॉ. दयाराम परमार, श्रवण कुमार, संजीव कुमार, हरिमोहन शर्मा, रीटा चौधरी, यूनुस खान, गोपाल लाल शर्मा, शत्रुधन गौतम, गोरधन, ललित मीना, अनिल कुमार शर्मा और डॉ. शैलेश सिंह को सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। इस समितियों के क्या काम होते हैं- 1. जनलेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC)     सरकार के खर्च की जांच करती है     CAG (कैग) की रिपोर्टों की समीक्षा करती है     यह देखती है कि पैसा नियमों के अनुसार खर्च हुआ या नहीं     गड़बड़ी मिलने पर जवाबदेही तय करती है 2. प्राक्कलन समिति ‘क’ और ‘ख’ (Estimates Committees)     सरकारी विभागों के बजट (अनुमान) की जांच करती हैं     यह सुझाव देती हैं कि खर्च कैसे कम और प्रभावी हो सकता है     योजनाओं की उपयोगिता और कार्यक्षमता का मूल्यांकन करती हैं     सरकार को सुधार के लिए सिफारिशें देती हैं       3. राजकीय उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings)     सरकारी कंपनियों और उपक्रमों के कामकाज की समीक्षा करती है     उनके वित्तीय प्रदर्शन और प्रबंधन की जांच करती है     घाटे या अनियमितताओं पर सवाल उठाती है     सुधार और बेहतर संचालन के सुझाव देती है  

राजस्थान विधानसभा में उठा सीमावर्ती जर्जर सड़कों का ‘मुद्दा’

जयपुर. राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान सरहदी जिले बाड़मेर की सड़कों की खस्ताहाली का मुद्दा छाया रहा। निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर जिले, विशेषकर अपने विधानसभा क्षेत्र शिव की सड़कों की मरम्मत और निर्माण को लेकर राज्य सरकार को घेरा। इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य करवा रही है और बाड़मेर की सड़कों का विशेष परीक्षण करवाया जाएगा। वर्तमान स्थिति पर माँगा जवाब विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर की ग्रामीण सड़कों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि आखिर कब तक सीमावर्ती क्षेत्र के लोग गड्ढों भरी सड़कों पर चलने को मजबूर रहेंगे? भाटी ने बाड़मेर जिले में सड़कों की मरम्मत के लिए प्रस्तावित कार्यों और उनकी वर्तमान स्थिति पर जवाब माँगा। '17 में से 7 कार्य पूरे, बाकी प्रगति पर' विधायक भाटी के सवाल का लिखित और मौखिक जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बाड़मेर की सड़कों का पूरा कच्चा चिट्ठा सदन के सामने रखा। उन्होंने बताया कि पिछले साल प्रति विधानसभा क्षेत्र 15 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के कार्य स्वीकृत किए गए थे। बाड़मेर में कुल 17 सड़कों के कार्य प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें से 7 कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं। शेष कार्य वर्तमान में प्रगति पर हैं और उन्हें समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। बाड़मेर की सड़कों का होगा नया 'परीक्षण' रविंद्र सिंह भाटी ने जब अधूरी सड़कों और खराब गुणवत्ता का मुद्दा उठाया, तो उपमुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि भाटी द्वारा उठाए गए मुद्दों का विभाग द्वारा परीक्षण (Verification) करवाया जाएगा। दिया कुमारी ने स्पष्ट किया कि जहाँ भी सड़क निर्माण की तकनीकी आवश्यकता होगी और जहाँ परीक्षण में सड़कें बदहाल पाई जाएंगी, वहां सरकार प्राथमिकता से बजट आवंटित कर नई सड़कें बनाएगी। सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए विशेष विजन सदन में दिया कुमारी ने यह भी संकेत दिया कि पश्चिमी राजस्थान और सीमावर्ती जिले जैसे बाड़मेर और जैसलमेर, सरकार की 'विकसित राजस्थान' रणनीति का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से सड़कों का मजबूत होना अनिवार्य है। जहाँ सड़कें टूटी हैं, उन्हें सुधारने के लिए भी विभाग कार्ययोजना बना रहा है। 'युवा जोश' और 'अनुभव' की जुगलबंदी ! सदन में रविंद्र सिंह भाटी के सवाल पूछने के अंदाज और दिया कुमारी के धैर्यपूर्ण जवाब ने सभी का ध्यान खींचा। जहाँ एक ओर युवा विधायक अपने क्षेत्र की जनता की आवाज बन रहे थे, वहीं उपमुख्यमंत्री सरकार की ओर से विकास का रोडमैप रख रही थीं। दिया कुमारी ने आश्वस्त किया कि विकास कार्यों में किसी भी विधायक के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और बाड़मेर की सड़कों की सूरत जल्द बदली जाएगी।