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10 घंटे की यातना: कोहरे में फंसी राजधानी एक्सप्रेस, यात्रियों को मिली सिर्फ एक कटोरी खिचड़ी

नई दिल्ली देश भर में भीषण ठंड का कहर जारी है। सड़कों पर सुबह-शाम कोहरा छाया रहता है। कोहरे की वजह से उड़ानें भी रद्द हो रही हैं। उधर, ट्रेनें भी अपने निर्धारित समय से लेट पहुंच रही है। वहीं, रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस बीते शुक्रवार को साढ़े दस घंटे देर से दिल्ली पहुंची। रेलवे की ओर से यात्रियों को दी गई सिर्फ एक कटोरी खिचड़ी रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस बीते शुक्रवार को साढ़े दस घंटे देर से रात पौने दस बजे दिल्ली पहुंची जबकि, दिल्ली पहुंचने का इसका निर्धारित समय दिन के 11 बजे है। बता दें कि भले ही कोहरे की वजह से रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस लेट हुई, लेकिन इसमें यात्रियों का क्या कसूर है कि जो रेलवे की ओर से उन्हें सिर्फ एक कटोरी खिचड़ी दी गई। लंबी दूरी की अन्य ट्रेनें भी घंटों लेट रांची से दिल्ली जा रहे दंपति ने बताया कि साढ़े दस घंटे में मात्र एक बार रेलवे की ओर से एक कटोरी खिचड़ी दी गई। उसके बाद बच्चे भूख से बिलबिलाते रहे, लेकिन पैंट्री स्टाफ ने कहा कि ट्रेन में अब न तो पीने का पानी है और न ही खाने का कोई सामान। वहीं, लंबी दूरी की अन्य ट्रेनें भी घंटों विलंब से चल रही हैं।  

रेल हादसा: राजधानी एक्सप्रेस से टकराने से 8 हाथियों की मौत, पटरी से उतरे 5 डिब्बे

जमुनामुख असम के जमुनामुख के सानरोजा इलाके में एक भयानक रेल हादसा शुक्रवार तड़के करीब 2 बजे हुआ, जिसने न केवल लोगों को हिला कर रख दिया बल्कि वन्यजीवन के लिए भी गंभीर संकट पैदा कर दिया। खबर है कि सैरांग से नई दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन अचानक हाथियों के एक झुंड से टकरा गई। हादसे का विवरण घटना स्थल से मिली जानकारी के अनुसार ट्रेन का इंजन और पांच डिब्बे पटरी से उतर गए। इस दर्दनाक दुर्घटना में 8 हाथियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कुछ हाथियों के घायल होने की भी आशंका जताई जा रही है। यह झुंड रेलवे ट्रैक पार कर रहा था, जिससे ट्रेन और हाथियों की टक्कर हुई। यातायात पर असर इस हादसे के बाद रेल मार्ग पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। कई ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि कुछ का मार्ग बदलकर परिचालन किया जा रहा है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों और उनके परिजनों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है ताकि प्रभावित लोगों को समय पर जानकारी मिल सके। राहत और बचाव कार्य रेलवे और राज्य प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य तेजी से जारी है। मौके पर रेलवे और वन विभाग की टीमें सक्रिय हैं, ताकि घायल हाथियों और ट्रेन यात्रियों की सहायता सुनिश्चित की जा सके। वन्यजीवन और सुरक्षा पर चिंता इस हादसे ने न केवल यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठाया है, बल्कि वन्यजीवन और मानव-संरक्षण क्षेत्र के बीच संतुलन पर भी गंभीर चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे ट्रैक और हाथियों के आवास क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।