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रामायण का नया सरप्राइज: 02 अप्रैल को रिवील होगा ‘राम’ का लुक

मुंबई,  फिल्मकार नमित मल्होत्रा की आने वाली फिल्म रामायण की अगली झलक ‘राम’ 02 अप्रैल को रिवील होगी। रामायण 2026 की सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली फिल्मों में से एक है, जिसे एक भव्य सिनेमाई स्पेक्टेकल के रूप में ग्लोबल स्तर पर बनाया जा रहा है। नितेश तिवारी के निर्देशन में और नमित मल्होत्रा के प्रोडक्शन में बन रही यह दो भागों में आने वाली महाकाव्य फिल्म दुनिया भर के बेहतरीन क्रिएटिव टैलेंट को साथ लेकर एक ऐतिहासिक सिनेमाई इवेंट बनने की तैयारी में है। इसी उत्साह को और बढ़ाते हुए नमित मल्होत्रा ने 27 मार्च को मनाई जा रही राम नवमी के शुभ अवसर पर अपने सोशल मीडिया पर एक बेहद पर्सनल नोट शेयर किया, जिसमें उन्होंने रामायण के इस सफर के पीछे की कहानी बताई और साथ ही एक बड़ा अपडेट भी रिवील किया। पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने लिखा,शुभ राम नवमी।यह एक ऐसी कहानी है जो हम सभी की है, और जो भी कदम हम उठा रहे हैं, वह पूरी जिम्मेदारी, श्रद्धा और समर्पण के साथ उठाया गया है, जिससे हमारी अपनी रामायण को उसकी सच्ची भावना और भव्यता के साथ पूरी ईमानदारी से जीवंत किया जा सके।हम अगली झलक ‘राम’ को 02 अप्रैल को, हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर शेयर करने के लिए उत्सुक हैं, जहां हम अपने कई सालों की मेहनत को एक भव्य वर्ल्ड रिवील के जरिए फैंस के साथ साझा करेंगे और इस खास पल को पूरी दुनिया में सेलिब्रेट करेंगे।आपके प्यार, विश्वास और धैर्य के लिए धन्यवाद।” फिल्म रामायण ने रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे, साई पल्लवी सीता के किरदार में होंगी, रॉकिंग स्टार यश दमदार रावण के रूप में दिखेंगे, सनी देओल शक्तिशाली हनुमान बनेंगे और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका निभाएंगे। नितेश तिवारी के निर्देशन में और नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज द्वारा, आठ बार ऑस्कर जीत चुकी डीएनइजी और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स के साथ मिलकर बनाई जा रही रामायण को एक पाथब्रेकिंग सिनेमाई स्पेक्टेकल के रूप में देखा जा रहा है। यह दो भागों में आने वाली फिल्म दुनियाभर में आईमैक्स पर रिलीज होगी, जिसमें पहला पार्ट दिवाली 2026 और दूसरा पार्ट दिवाली 2027 में रिलीज होगा।  

जब अंगद बना चुनौती: रामायण के उस मुस्लिम एक्टर की कहानी, जिसने रावण की लंका हिला दी

मुंबई रामानंद सागर का पौराणिक धारावाहिक 'रामायण' जब कोविड में दोबारा टीवी पर आया तो इसने हलचल मचा दी। इसके पुनः प्रसारण के बाद से ही यह धारावाहिक कई कारणों से खबरों में आ गया। हाई टीआरपी से लेकर महिला सशक्तिकरण, शारीरिक शक्ति और कई सारी चीजें, सोशल मीडिया पर ढेर सारे मीम्स शेयर किए गए। 1980 और 1990 के दशक में दूरदर्शन सबसे बड़े टीवी चैनलों में से एक था। यह चैनल अपने पौराणिक शोज के लिए काफी प्रसिद्ध हुआ – रामानंद सागर की रामायण उनमें से एक थी, जिसे जनता ने खूब पसंद किया। उस समय, इसके लीड एक्टर्स बहुत फेमस थे। हालांकि, समय बीतने और नई पीढ़ियों के आने के साथ, वे धीरे-धीरे गुमनामी में खो गए। इन्हीं में से एक थे अंगद का किरदार निभाने वाले एक्टर बशीर खान। आज हम एक ऐसे अभिनेता की बात करेंगे, जिन्होंने रामानंद सागर की मशहूर टीवी सीरियल में अंगद का किरदार निभाया था। उनका नाम बशीर खान है। सीरियल में बाली और तारा के बेटे अंगद के दमदार किरदार से उन्हें खूब प्रसिद्धि मिली। अंगद के रूप में उनका एक सीन आज भी दर्शकों को याद है, जब वे रावण के दरबार में मजबूती से खड़े हो गए और किसी को भी उन्हें हिलाने की हिम्मत नहीं थी। पूरा सीन उनके दृढ़ संकल्प, शक्ति और व्यक्तित्व को दिखाता है। वीरेंद्र सहवाग ने की थी तारीफ कोविड के वक्त भी एक एपिसोड में अंगद का वह सीन दिखाया गया जिसमें रावण उनका पैर हिलाने की कोशिश करता है लेकिन असफल हो जाता है। इस सीन ने लोगों को इस किरदार की खूब तारीफ करने पर मजबूर कर दिया। यहां तक कि पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने भी ये फोटो शेयर करते हुए कहा था कि यहीं से उन्हें अपनी बल्लेबाजी की प्रेरणा मिली। उन्होंने लिखा, 'तो यहीं से मुझे अपनी बल्लेबाजी की प्रेरणा मिली 🙂 पैर हिलाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। #अंगद जी रॉक्स' 'महाभारत' और 'श्री कृष्ण' में भी किया काम 'रामायण' के अलावा, बशीर खान ने बी.आर. चोपड़ा की 'महाभारत' (1988) और 'श्री कृष्ण' (1993) जैसे क्लासिक पौराणिक शोज में भी अभिनय किया। उनकी एक्टिंग ने भारतीय टेलीविजन पर अमिट छाप छोड़ी और दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। बशीर खान गुमनामी में खोए बशीर खान ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत रामानंद सागर के उस समय के फेमस शो 'विक्रम बेताल' से की थी। हालांकि, उन्हें असली पहचान रामायण में अंगद के किरदार को निभाने के बाद मिली, जिसे आज भी कई लोग इस क्लासिक शो में उनके योगदान के लिए याद करते हैं। लेकिन आज वो गुमनामी में खो गए हैं और अब उन्हें रोल्स ऑफर नहीं होते हैं।

जब हनुमान जी बने लक्ष्य: बाण चलाने से पहले भरत को क्यों हुआ था भय?

रामायण के कई प्रसंग हमें जीवन की बड़ी सीख देते हैं. ऐसा ही एक प्रसंग तब आता है जब लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए हनुमान जी पूरा द्रोणागिरि पर्वत उठाकर लंका ले जा रहे थे. इस दौरान जब वे अयोध्या के ऊपर से गुजरे, तो भरत के साथ उनका एक छोटा सा टकराव हुआ. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भरत ने हनुमान जी को मारने के लिए मारक बाण का इस्तेमाल क्यों नहीं किया था? आइए जानते हैं. जब अयोध्या के आसमान में छाया अंधेरा युद्ध भूमि में लक्ष्मण जी मूर्छित थे और सूर्योदय से पहले संजीवनी बूटी पहुंचानी जरूरी थी. हनुमान जी विशाल पर्वत लेकर वायु मार्ग से तेजी से उड़ रहे थे. जब वे अयोध्या के ऊपर से निकले, तो उनकी विशाल परछाईं को देखकर भरत को लगा कि शायद कोई मायावी राक्षस अयोध्या पर हमला करने या उसे नष्ट करने के लिए कोई पहाड़ ले जा रहा है. क्यों चलाया बिना फल वाला बाण? भरत एक कुशल योद्धा थे, वे चाहते तो एक ही बाण में उस संकट को समाप्त कर सकते थे. लेकिन उन्होंने हनुमान जी पर बिना नोक वाला बाण चलाया, जिसे सायक भी कहा जाता है. इसके पीछे दो मुख्य कारण थे. भरत को पूरी तरह यकीन नहीं था कि उड़ने वाला कोई शत्रु ही है. उन्हें लगा कि अगर वह कोई मित्र हुआ, तो घातक बाण चलाने से अनर्थ हो जाएगा. राजा दशरथ ने बचपन में भरत को एक शिक्षा दी थी. दशरथ ने अनजाने में शब्दभेदी बाण चलाकर श्रवण कुमार की हत्या कर दी थी, क्योंकि उन्हें लगा था कि कोई जंगली जानवर पानी पी रहा है. उस एक गलती ने पूरे रघुवंश को पुत्र वियोग का श्राप और दुख दिया था. दशरथ ने भरत को समझाया था बेटा, जब तक तुम्हारी शंका पूरी तरह दूर न हो जाए तब तक कभी भी प्राणघातक बाण मत चलाना. राम नाम ने बचा लिया अनर्थ जैसे ही भरत का बाण हनुमान जी को लगा, वे राम-राम जपते हुए नीचे गिर पड़े. राम का नाम सुनते ही भरत हैरत में पड़ गए. वे दौड़कर हनुमान जी के पास पहुंचे और उनसे क्षमा मांगी. जब उन्हें पता चला कि यह पवनपुत्र हनुमान हैं और वे उनके प्रिय भाई राम के काम के लिए जा रहे हैं, तो भरत की आंखों में आंसू आ गए. भरत ने अपने विवेक और पिता के अनुभव से सीख लेकर एक बहुत बड़े पाप को होने से रोक लिया. अगर उस दिन भरत घातक बाण चलाते, तो शायद लक्ष्मण के प्राण बचाना असंभव हो जाता.