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पटना से गया, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और राजगीर के लिए चलेगी रैपिड रेल: सीएम का ऐलान

 पटना बिहार में आने वाले समय में रैपिड रेल का जाल बिछने वाला है। राजधानी पटना से गयाजी, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और राजगीर जैसे शहरों को हाईस्पीड ट्रेन से जोड़ा जाएगा। इन शहरों के बीच रोजाना सफर करने वाले कामकाजी लोगों एवं अन्य सभी वर्ग के यात्रियों को सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को इस बारे में घोषणा की। उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की बात कही है। सीएम सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर पटना में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद बिहार में रेलवे का नेटवर्क मजबूत हो रहा है। राज्य के लगभग सभी रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं। अब भारत सरकार ने कहा है कि यहां रैपिड रेल चलाई जाएंगी। पटना से 4 शहरों के लिए चलेगी रैपिड रेल मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अभी पटना से गयाजी जाने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है। सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी कि रैपिड रेल से यह यह सफर 40 मिनट से भी कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रेन से पटना और मुजफ्फरपुर के बीच का सफर भी दो से ढाई घंटे में पूरा होता है, उससे कम समय में रोड से लोग पहुंच जाते हैं। इन शहरों को भी रैपिड रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा नालंदा जिले का राजगीर टूरिस्ट हब के रूप में विकसित हो रहा है। बेगूसराय भी राज्य का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र हो गया है। पटना से राजगीर और बेगूसराय के लिए भी आने वाले समय में रैपिड रेल चलेंगी। सीएम ने दावा किया कि इन शहरों का भी राजधानी से सफर 40 मिनट के अंदर ही पूरा होगा। उन्होंने कहा कि रैपिड रेल को मेट्रो और रोड नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा। पटना से जयनगर के बीच चल रही नमो भारत अभी पटना से जयनगर के बीच नमो भारत ट्रेन चलाई जा रही है। इसकी शुरुआत पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले की गई थी। सप्ताह में 6 दिन चलने वाली यह ट्रेन बाढ़, मोकामा, बरौनी, समस्तीपुर, दरभंगा, सकरी और मधुबनी स्टेशन पर रुकती है। हालांकि, 266 किलोमीटर की दूरी यह लगभग पौने 6 घंटे में पूरी करती है। इसकी औसत स्पीड 46 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह ट्रेन पूरी तरह से वातानुकूलित है और यात्री बिना रिजर्वेशन के सामान्य टिकट पर इस में यात्रा कर सकते हैं। ट्रेन की बाहरी बनावट वंदे भारत ट्रेन जैसी है। रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को ध्यान में रखते हुए इसे शुरू किया गया था।

160 km/h की रफ्तार, 40 मिनट में मेरठ‑दिल्ली: रैपिड रेल से बढ़ेगा यात्रा का रोमांच, पीएम देंगे सौगात

मेरठ  मेरठ और एनसीआर के लिए 22 फरवरी का दिन ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नमो भारत रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो को जनता को समर्पित करेंगे। इससे दिल्ली से मेरठ के बीच सफर का समय घटकर लगभग 40 मिनट रह जाएगा। शुक्रवार को एनसीआरटीसी ने मीडिया के लिए विशेष ट्रायल रन आयोजित किया। सराय काले खां से दोपहर 12 बजे रवाना हुई नमो भारत ट्रेन ने 160 किमी प्रति घंटा की अधिकतम रफ्तार से दौड़ते हुए मात्र 39 मिनट में बेगमपुल स्टेशन तक का सफर तय किया। यह सफर नॉन-स्टॉप रहा। स्टॉपेज के साथ 55 मिनट में दिल्ली टू मेरठ सामान्य संचालन के दौरान ट्रेन प्रत्येक स्टेशन पर लगभग एक मिनट के ठहराव के साथ करीब 55 मिनट में दिल्ली से मेरठ पहुंचेगी। ट्रायल के दौरान नमो भारत ने सराय काले खां से गाजियाबाद की दूरी लगभग 15 मिनट में पार की और फिर अगले 15 मिनट में मेरठ साउथ पहुंच गई। वहां से कुछ ही मिनटों में शताब्दीनगर को पार करते हुए बेगमपुल स्टेशन पहुंच गई। इस तेज रफ्तार और समयबद्ध संचालन से रोजाना दिल्ली-गाजियाबाद आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। ट्रायल के दौरान 120 की स्पीड से दौड़ी मेरठ मेट्रो बेगमपुल स्टेशन का दृश्य बेहद आकर्षक रहा। जमीन से लगभग 70 मीटर नीचे बने इस अंडरग्राउंड स्टेशन पर एक ओर नमो भारत खड़ी थी तो सामने मेरठ मेट्रो इंटरचेंज के लिए तैयार दिखाई दी। फ्लोरोसेंट ग्रीन, ब्लू और ऑरेंज थीम वाली तीन कोच की मेरठ मेट्रो 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार तक पहुंचने में सक्षम है। बेगमपुल से मेरठ साउथ तक का सफर मेट्रो से करीब 10 मिनट में पूरा होगा। बिजली बचाने का रोल मॉडल बनेगी रैपिड रेल मेरठ साउथ से नमो भारत के जरिए सात स्टेशनों को पार कर सीधे आनंद विहार तक पहुंचा जा सकेगा। आनंद विहार आरआरटीएस स्टेशन, आईएसबीटी और मेट्रो स्टेशन आपस में जुड़े हुए हैं, जिससे यात्रियों को निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी। 82 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है। स्टेशन और डिपो की छतों पर सौर पैनल लगाए गए हैं, जिनसे 15 मेगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है। वर्तमान में 5.5 मेगावॉट ऊर्जा तैयार की जा रही है। भविष्य में 110 मेगावॉट का कैप्टिव सोलर प्लांट स्थापित किया जाएगा, जो कुल बिजली जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा करेगा। इससे हर वर्ष करीब 1.77 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। पर्यावरण संतुलन की मिसाल बनेंगे स्टेशन साहिबाबाद और गुलधर स्टेशन देश के पहले ऐसे स्टेशन हैं जिन्हें आईजीबीएस नेट जीरो एनर्जी (ऑपरेशन) रेटिंग प्राप्त हुई है। इन स्टेशनों पर जितनी बिजली खपत होती है, उतनी ही सौर ऊर्जा से उत्पादन कर ग्रिड को वापस भेज दी जाती है। साथ ही, पूरे कॉरिडोर में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की गई है, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। नमो भारत और मेरठ मेट्रो के संचालन से न केवल यात्रा समय कम होगा, बल्कि यह परियोजना आधुनिक, तेज और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन का नया मॉडल भी बनेगी।