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मध्य प्रदेश में रजिस्ट्री शुल्क महंगा होने वाला है, मनमाने रेट बढ़ाने की योजना

भोपाल  मध्य प्रदेश में रजिस्ट्री के लिए जमीनों के रेट तय करने के लिए बनाई जा रही कलेक्टर गाइडलाइन में इस बार भी कोई तय फॉर्मूला नहीं बनाया गया है। मनमाने रेट बढ़ाने की तैयारी चल रही है। इस बार 10 से 30 फीसदी तक रेट बढ़ाने की तैयारी है। सरकार गाइडलाइन के साथ लागू किए जाने वाले उपबंधों में भी कोई बदलाव नहीं कर रही है। इससे खासतौर पर कृषि भूमि की रजिस्ट्री डेढ़ गुना से ज्यादा दर पर की जा रही है। जबकि प्रॉपर्टी के वास्तविक गुण, लैंड-यूज, सड़क की चौड़ाई, लोकेशन, सुविधाओं और टाइटल-क्वालिटी आदि को आधार बनाकर रेट तय होना चाहिए। गाइडलाइन पर फिर से आपत्तियां और सुझाव आना शुरू हो गए हैं। उज्जैन में प्रॉपर्टी लेना होगा और महंगा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी कलेक्टर गाइड लाइन के तहत प्रॉपर्टी रेट बढ़ाने की तैयारी है। जिला मुल्यांकन समिति की बैठक में कई लोकेशन पर दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। पिछले प्रस्तावों में जिले की करीब 91 लोकेशन्स पर रेट बढ़ाने की बात सामने आई थी। करीब 60 लोकेशन ऐसी थीं जिन के रेट 10-20 फीसदी तक बढ़ाए गए। वहीं 21 लोकेशन पर 20-30 प्रतिशत तक महंगाई बढ़ी थी। वहीं कुछ स्थानों पर 30 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव शामिल था।  बताया जा रहा है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण की त्रिवेणी की और शिप्रा विहार योजनाओं समेत कई नई कॉलोनियों के रेट बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव पर आपत्तियां और सुझाव मिलने के बाद इसे केंद्रीय मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा। 74 हजार लोकेशन के सर्वे के बाद नई कलेक्टर गाइडलाइन की कवायद शुरू प्रदेश में जमीन और मकानों की कीमतों को नए सिरे से तय करने की कवायद तेज हो गई है। राजस्व और पंजीयन विभाग ने प्रदेश की करीब 74 हजार लोकेशन का विस्तृत सर्वे पूरा कर लिया है, जिसके आधार पर नई कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव जल्द ही जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में चर्चा के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलते ही 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में नई प्रॉपर्टी दरें लागू कर दी जाएंगी। जहां ज्यादा कीमत पर रजिस्ट्री, वहीं बढ़ेंगी दरें जानकारी के अनुसार प्रदेश में कुल सवा लाख से अधिक लोकेशन हैं, लेकिन इनमें से लगभग 74 हजार लोकेशन ऐसी हैं जहां नियमित रूप से प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री होती है। इन्हीं स्थानों पर पंजीयन और राजस्व अधिकारियों ने संपदा-2 सॉफ्टवेयर, एआई तकनीक और अन्य माध्यमों से सर्वे किया है। सर्वे में यह आकलन किया गया कि किन क्षेत्रों में मौजूदा गाइडलाइन से अधिक कीमत पर रजिस्ट्रियां हो रही हैं। भोपाल की 500 से ज्यादा लोकेशन पर हाई रेट रजिस्ट्री राजधानी भोपाल में करीब 3 हजार लोकेशन का सर्वे किया गया, जिनमें से एक हजार से अधिक स्थानों पर प्रॉपर्टी लेनदेन हो रहा है। इनमें करीब 500 से ज्यादा लोकेशन ऐसी पाई गईं, जहां वर्तमान कलेक्टर दरों से अधिक कीमत पर रजिस्ट्री की गई है। इन्हीं क्षेत्रों को चिह्नित कर आकलन किया जा रहा है, ताकि नई गाइडलाइन में यथार्थ के अनुरूप दरें तय की जा सकें।  

धान खरीदी के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर किसान पंजीयन अनिवार्य, 31 अक्टूबर अंतिम तिथि

एग्रीस्टैक पोर्टल से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-1030 पर कर सकते हैं संपर्क रायपुर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी हेतु किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य किया गया है। एग्रीस्टैक पोर्टल से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-1030 पर संपर्क किया जा सकता है। खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने जानकारी दी कि एग्रीस्टैक पोर्टल भारत सरकार द्वारा विकसित एक यूनिफाइड एग्रीकल्चर डेटाबेस है, जिसमें किसानों का भूमि एवं आधार लिंक्ड पंजीयन किया जाता है। पंजीकरण उपरांत किसानों को एक यूनिक फार्मर आईडी (Unique Farmer ID) प्राप्त होती है। यह आधार लिंक्ड डेटाबेस शासन की विभिन्न योजनाओं के लाभ केवल वास्तविक पात्र किसानों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के तहत किसानों को सीधे भुगतान किया जाता है। अतः शासन की मंशा है कि सभी पात्र किसान सुशासन एवं पारदर्शिता के साथ इस योजना का वास्तविक लाभ प्राप्त करें। एग्रीस्टैक में आधार-आधारित पंजीयन और ई-केवाईसी की व्यवस्था से संपूर्ण प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता, सटीकता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित होगा। गत वर्ष राज्य के 25.49 लाख किसानों ने धान विक्रय किया था। वर्तमान वर्ष में अब तक 21.47 लाख किसानों ने एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण कर लिया है। शेष किसान अपने निकटतम सहकारी समिति या निर्धारित केंद्र में जाकर 31 अक्टूबर 2025 तक अपना पंजीयन करा सकते हैं। इस संबंध में सभी समितियों और जिला कलेक्टरों को पूर्व में आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि एग्रीस्टैक पोर्टल डिजिटल क्रांति की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी, सटीक और किसान हितैषी बनाएगा। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष राज्य के 20 हजार ग्रामों में से 13 हजार 879 ग्रामों में डिजिटल क्रॉप सर्वे किया गया है। इस डिजिटल क्रॉप सर्वे और मैनुअल गिरदावरी की रिपोर्टों का 2 से 14 अक्टूबर 2025 तक ग्राम सभाओं में पठन किया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक पंचायत में मुनादी कर सूचना दी गई है और सर्वे सूची का पंचायत भवनों में प्रदर्शन (चस्पा) भी किया गया है। इस कार्यवाही की सतत निगरानी जिला कलेक्टर, खाद्य अधिकारियों तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जा रही है। यह पहल “डिजिटल एग्रीकल्चर और गुड गवर्नेंस” की दिशा में राज्य का एक सशक्त और दूरदर्शी कदम है।