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बिना पंजीकरण प्रचार पर सीजीरेरा की सख्त कार्रवाई

बिना पंजीकरण प्रचार पर सीजीरेरा की सख्त कार्रवाई “डेला रेसकोर्स एंड इंटरनेशनल पोलो क्लब” प्रोजेक्ट पर क्रय-विक्रय व पंजीयन पर अंतरिम रोक रायपुर छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (सीजीरेरा) ने बिना पंजीकरण रियल एस्टेट परियोजना के प्रचार-प्रसार के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए “डेला रेसकोर्स एंड इंटरनेशनल पोलो क्लब” परियोजना पर क्रय-विक्रय एवं पंजीयन पर अंतरिम (प्रारंभिक) रोक लगा दी है। प्राधिकरण द्वारा प्रकरण क्रमांक एसएम-यूआरपी-2026-03599 में संज्ञान लेते हुए पाया गया कि नया रायपुर के सेक्टर-37 स्थित लगभग 55 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित उक्त परियोजना के प्रमोटर द्वारा रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 3 का उल्लंघन किया गया है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित प्रमोटर ने बिना रेरा पंजीकरण प्राप्त किए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर परियोजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया और आम नागरिकों को बुकिंग के लिए आमंत्रित किया। यह कृत्य अधिनियम के स्पष्ट प्रावधानों के विपरीत है, जिसके अनुसार बिना पंजीकरण किसी भी रियल एस्टेट परियोजना का विज्ञापन, विपणन या विक्रय प्रतिबंधित है। सीजीरेरा द्वारा नियमित निगरानी के दौरान उक्त विज्ञापन संज्ञान में आने पर प्रकरण दर्ज किया गया। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया उल्लंघन प्रमाणित पाए जाने पर प्राधिकरण ने अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए परियोजना से संबंधित सभी प्रकार के भूखंड, मकान एवं इकाइयों के क्रय-विक्रय और पंजीयन पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश जारी किया है। इस संबंध में जिला पंजीयक एवं उप-पंजीयक, रायपुर को निर्देशित किया गया है कि उक्त परियोजना से जुड़े किसी भी विक्रय विलेख का पंजीयन आगामी आदेश तक स्वीकार न किया जाए और आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। प्राधिकरण ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि किसी भी रियल एस्टेट परियोजना में निवेश करने से पहले उसकी रेरा पंजीयन स्थिति की जांच अवश्य करें, ताकि किसी भी प्रकार के वित्तीय या कानूनी जोखिम से बचा जा सके।

रेरा की सख्त कार्रवाई भोपाल में, एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी पर हुई बड़ी कार्यवाही

भोपाल में रेरा की बड़ी कार्रवाई — एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर भी गिरी गाज बिल्डर हर्षवर्धन दीक्षित और गौरव शर्मा पर ₹10,000 प्रतिमाह क्षतिपूर्ति, ₹50,000 मानसिक क्षति मुआवज़ा और ₹5,000 प्रकरण व्यय का आदेश भोपाल  राजधानी भोपाल में रियल एस्टेट के नाम पर ग्राहकों से ठगी और मनमानी करने वाले बिल्डरों पर अब रेरा का डंडा चलने लगा है।मध्यप्रदेश रेरा (RERA) ने एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के संचालक हर्षवर्धन दीक्षित और गौरव शर्मा पर शुभ बिजनेस ज़ोन, रासलाखेड़ी, वार्ड नंबर 78, भानपुर प्रोजेक्ट में ग्राहकों को समय पर पजेशन न देने के मामले में सख़्त कार्रवाई की है। रेरा ने अपने आदेश में कंपनी को निर्देश दिया है कि ग्राहकों को दुकान का पजेशन देने तक ₹10,000 प्रतिमाह क्षतिपूर्ति राशि दी जाए, साथ ही ₹50,000 मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए मुआवज़ा और ₹5,000 प्रकरण व्यय का भुगतान किया जाए।  ग्राहकों के आरोप — करोड़ों लेकर न दुकान दी, न जवाब ग्राहक आरती भटेले, जयश्री बोराना, प्रेमलता, सीबा अख्तर, दयाराम पवार और सुरेश वर्मा ने रेरा और पुलिस कमिश्नर कार्यालय भोपाल में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया कि एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बिल्डर हर्षवर्धन दीक्षित और गौरव शर्मा ने दुकानों की बुकिंग के नाम पर करोड़ों रुपये लिए लेकिन न तो तय समय पर निर्माण पूरा किया और न ही पजेशन दिया। ग्राहकों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें धमकाया गया और मानसिक उत्पीड़न किया गया।  रेरा का सख़्त रुख — “अब खेल खत्म, जवाबदेही तय होगी” रेरा ने मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डरों की लापरवाही को “स्पष्ट धोखाधड़ी और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन” बताया। प्राधिकरण ने कहा कि ग्राहकों की गाढ़ी कमाई से इस तरह खिलवाड़ करने वाले बिल्डरों को अब बख्शा नहीं जाएगा। “रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही तय करने का समय आ गया है। अब निवेशकों को ठगने वालों को हर कदम पर जवाब देना होगा।”   शुभ बिजनेस ज़ोन बना विवाद का केंद्र भानपुर क्षेत्र का यह कमर्शियल प्रोजेक्ट लंबे समय से विवादों में रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने बड़े-बड़े दावे कर दुकानों की बुकिंग की थी, लेकिन निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। कई निवेशक अब भी अपनी मेहनत की कमाई फँसी होने से परेशान हैं।  आदेश का प्रभाव — प्रदेश के बिल्डरों के लिए चेतावनी रेरा की यह कार्रवाई पूरे मध्यप्रदेश के बिल्डरों के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है। अब यदि कोई बिल्डर तय समय पर पजेशन नहीं देता या ग्राहकों से मनमानी करता है, तो उसके खिलाफ आर्थिक और कानूनी कार्रवाई तय है।  सारांश में —     •    कंपनी: एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड     •    प्रोजेक्ट: शुभ बिजनेस ज़ोन, रासलाखेड़ी, वार्ड नंबर 78, भानपुर, भोपाल     •    बिल्डर: हर्षवर्धन दीक्षित एवं गौरव शर्मा     •    शिकायतकर्ता: आरती भटेले, जयश्री बोराना, प्रेमलता, सीबा अख्तर, दयाराम पवार, सुरेश वर्मा     •    रेरा आदेश:     •    ₹12,000 प्रति माह क्षतिपूर्ति     •    ₹50,000 मानसिक एवं शारीरिक क्षति मुआवज़ा     •    ₹5,000 प्रकरण व्यय भोपाल में रेरा की यह सख़्त कार्रवाई उन बिल्डरों के लिए सीधा संदेश है जो निवेशकों की गाढ़ी कमाई को अपनी जागीर समझ बैठे हैं। अब हर परियोजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता ही एकमात्र रास्ता है — वरना एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह हर लापरवाह बिल्डर को रेरा के शिकंजे में आना तय है।

RERA :बीते 7 वर्षों में 136 प्रकरणों पर स्वतः संज्ञान लेकर की गई कार्यवाही

रायपुर, छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण ने राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक कड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने ऐसे 106 प्रोजेक्ट्स की पहचान की है जो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से स्वीकृत होने के बावजूद अब तक रेरा अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं हुए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन प्रोजेक्ट्स का निर्माण अथवा विक्रय कार्य बिना वैधानिक रेरा पंजीकरण के किया जा रहा था, जो कि न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों के लिए भी अत्यंत नुकसानदेह है। प्राधिकरण ने इन सभी प्रोजेक्ट्स के प्रमोटरों को नोटिस जारी करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि रेरा अधिनियम, 2016 का पालन सुनिश्चित करना प्रत्येक प्रमोटर की जिम्मेदारी है। प्राधिकरण ने जानकारी दी है कि पिछले सात वर्षों में 136 प्रोजेक्ट्स के विरुद्ध स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही की गई है, जिनमें प्रमोटरों द्वारा बिना पंजीकरण कार्य संचालित किया गया था। रेरा अधिनियम के अनुसार, बिना पंजीकरण प्रोजेक्ट संचालित करने पर पंजीकरण शुल्क का 400 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क और परियोजना लागत का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। रेरा अधिनियम की यही विशेषता है कि वह न केवल उपभोक्ताओं को सुरक्षित निवेश का वातावरण देता है, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और समयबद्धता भी सुनिश्चित करता है। सीजी रेरा ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की संपत्ति जैसे फ्लैट, प्लॉट, विला या व्यावसायिक इकाई खरीदने से पहले यह अवश्य जांच लें कि संबंधित परियोजना रेरा में पंजीकृत है या नहीं। इसके लिए  https://rera.cgstate.gov.in/ पोर्टल पर जाकर परियोजना की पंजीकरण स्थिति की जांच की जा सकती है। वहीं, प्रमोटरों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी परियोजनाओं को विधिवत रजिस्ट्रेशन कराएं ताकि किसी प्रकार की शास्ति या कानूनी कार्यवाही से बचा जा सके। प्राधिकरण का उद्देश्य स्पष्ट है कि वह उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना चाहता है और अनियमित एवं अराजक प्रोजेक्ट्स पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। घर खरीदने से पहले रेरा पंजीयन की पुष्टि अवश्य करें, इसी संदेश के साथ सीजी रेरा ने जिम्मेदार नागरिकों और ईमानदार डेवलपर्स से सहयोग की अपील की है।