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आरजीपीवी में गड़बड़ियों के बाद कुलपति पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू, राजभवन ने किया ऐलान

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में लंबे समय से चल रहे विवादों और गड़बड़ियों के आरोपों के बाद अब नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। राजभवन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार कुलपति पद के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 10 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। दरअसल, आरजीपीवी हाल के वर्षों में लगातार विवादों में रहा है। विश्वविद्यालय के प्रशासन, वित्तीय लेनदेन और शैक्षणिक प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इन्हीं आरोपों के बीच हाल ही में कुलपति ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद से विश्वविद्यालय का प्रशासन अस्थायी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहा है। मूल्यांकन प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों आपत्तियां आई थीं सामने दरअसल, कुलपति के खिलाफ विश्वविद्यालय की आंतरिक कार्यप्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आई थीं। छात्र संगठनों ने इन मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया था। बढ़ते दबाव और विवाद की स्थिति को देखते हुए कुलपति ने पद छोड़ना उचित समझा। इसके बाद उच्च स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि नए कुलपति की नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की जाए। सरकार और राजभवन दोनों ही बेहद सतर्क गौरतलब है कि आरजीपीवी प्रदेश का सबसे बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय है, जिससे सैकड़ों इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थान जुड़े हुए हैं। ऐसे में कुलपति की नियुक्ति को लेकर सरकार और राजभवन दोनों ही बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि नए कुलपति के सामने विश्वविद्यालय की छवि सुधारने, प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी। चार वर्ष का होगा कुलपति का कार्यकाल राजभवन की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि कुलपति की नियुक्ति राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम 1998 के तहत गठित चयन समिति की अनुशंसा पर राज्यपाल द्वारा की जाएगी। नियुक्त कुलपति का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से चार वर्ष का होगा।अधिसूचना के मुताबिक कुलपति विश्वविद्यालय का सर्वोच्च शैक्षणिक और प्रशासनिक अधिकारी होगा। ऐसे में अभ्यर्थी से उच्च कोटि की शैक्षणिक योग्यता, मजबूत प्रशासनिक अनुभव, सत्यनिष्ठा, नैतिकता और संस्थागत प्रतिबद्धता की अपेक्षा की गई है। साथ ही, अभ्यर्थी का प्रौद्योगिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित और ख्यातिप्राप्त होना अनिवार्य बताया गया है। आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में होगी पूरी आवेदन के साथ उम्मीदवार को अपने शैक्षणिक, प्रशासनिक और शोध करियर का विस्तृत विवरण देना होगा। इसके अलावा यह घोषणा भी अनिवार्य होगी कि अभ्यर्थी के विरुद्ध लोकायुक्त, आर्थिक अपराध शाखा या किसी अन्य एजेंसी में किसी प्रकार की जांच या आपराधिक मामला लंबित नहीं है। वर्तमान में सेवा में कार्यरत अभ्यर्थियों को अपने नियुक्तिकर्ता से यह प्रमाण पत्र भी देना होगा कि उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित नहीं है। आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा, जबकि दूसरे चरण में ऑनलाइन आवेदन की प्रति, जीवनवृत्त और सभी आवश्यक दस्तावेज पंजीकृत या स्पीड पोस्ट के माध्यम से राजभवन भेजने होंगे। बिना ऑनलाइन आवेदन के प्राप्त किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किए जाने की बात अधिसूचना में साफ तौर पर कही गई है।  

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बढ़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, जांच की मांग तेज

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में पिछले पाँच वर्षों के वित्तीय लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय की वर्ष 2019–20 से 2023–24 तक की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने और अनियमितताओं की CBI जांच की मांग की गई है। ज्ञापन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा सौंपा गया है। ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और वित्तीय लेन-देन में बड़े पैमाने पर आरोप सामने आए हैं। उठाए गए प्रमुख मुद्दे – छात्रों से जुड़े कोष के दुरुपयोग की आशंका। – बिना अधिकृत आदेश के भारी वित्तीय लेन-देन। – कई बैंक खातों और एफडी के रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियाँ। – एफडी समय से पहले तुड़वाने और राशि के स्थानांतरण का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं। – बैंक द्वारा पेनल्टी काटे जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं। – 100 करोड़ रुपए से अधिक के कॉरपस फंड के उपलब्ध न होने का आरोप। – वित्तीय लेन-देन पर इंटरनल कंट्रोल और SOP जैसी व्यवस्था प्रभावी नहीं रही। मुख्य मांगें 1. पांच वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक की जाए। 2. सभी आर्थिक अनियमितताओं की CBI से विस्तृत जांच कराई जाए। 3. विश्वविद्यालय में धारा 54 लागू कर प्रशासनिक प्रबंधन राज्य शासन के अधीन किया जाए। 4. संचालन सुचारू रखने के लिए विश्वविद्यालय को तीन क्षेत्रों में विभाजित करने का सुझाव भी दिया गया है।  

रैगिंग रोकने के लिए सख्ती, आरजीपीवी में स्थापित होगी स्थायी पुलिस चौकी

भोपाल  अक्सर अपराध पर नियंत्रण के लिए शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में पुलिस चौकी बनाई जाती है, लेकिन अब राजधानी के एक विश्वविद्यालय में रैगिंग पर रोकथाम के लिए पुलिस की चौकसी बढ़ाई जाएगी। भोपाल का राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में रैगिंग व मारपीट जैसे विवादों का गढ़ बनते जा रहा है। पिछले साल सात मामले यूजी की रैगिंग हेल्पलाइन में दर्ज हुए हैं। वहीं इस साल अब तक आठ माह में आठ से अधिक मामले दर्ज हो गए। इस पर अंकुश लगाने के लिए आरजीपीवी के कुलगुरु ने पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर विवि में पुलिस चौकी बनाने के लिए कहा है।साथ ही विवि ने यूजीसी से रैगिंग के रोकथाम के लिए जारी की गई गाइडलाइन को हर जगह चस्पा किया जा रहा है।साथ ही कनिष्ठ व वरिष्ठ विद्यार्थियों को रैगिंग में शामिल होने पर उसके दुष्परिणाम को समझाया जा रहा है। इस साल राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय(एनएलआइयू) में दो अौर बरकतउल्लाह विवि में चार मामले सामने आए हैं। राजधानी के शैक्षणिक संस्थानों में बीते आठ माह में करीब 15 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। विद्यार्थियों को अलग-अलग छात्रावास में रखा जाए यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को छात्रावास में इस सत्र से जूनियर और सीनियर विद्यार्थियों को अलग-अलग रखने के लिए निर्देश दिए हैं। विश्वविद्यालयों ने इसका पालन भी इस सत्र से करना शुरू कर दिया है। आरजीपीवी, बीयू, एनएलआइयू व मैनिट सभी संस्थानों में जूनियर को अलग छात्रावास में रखा जा रहा है। आरजीपीवी विद्यार्थियों को दंडित भी कर रहा है। इसके अलावा सभी विद्यार्थियों से एंटी-रैगिंग की अंडरटेकिंग लेकर जमा कराया जा रहा है। इन संस्थानों में हाल में हुई रैगिंग की घटनाएं     आरजीपीवी में 24 जुलाई को जूनियर छात्र के साथ मारपीट हुई। आरोपित विद्यार्थियों पर कार्रवाई की गई।     दो अगस्त को आरजीपीवी के यूआइटी और छात्रावास के विद्यार्थियों के बीच विवाद हिंसक हुआ।छह विद्यार्थियों को छात्रावास से निष्कासित किया गया।     आठ सितंबर को जूनियर छात्राओं प्रथम वर्ष की छात्राओं के साथ रैगिंग किया।मामले में दो छात्राओं को छात्रावास से निष्कासित और तीन छात्राओं पर अर्थ दंड लगाया गया।     बीयू के छात्रावास में 20 जुलाई को जूनियर को शराब पिलाकर कैबरे डांस कराया गया।आरोपिताें को छात्रावास से निष्कासित किया गया।     एनएलआइयू में बीते 15 दिन के अंदर दूसरी बार मारपीट और रैगिंग की घटनाएं हुई हैं।दोनों मामलों में संस्थान की एंटी रैगिंग कमेटी ने कोई कार्यवाही नहीं की है। यह भी है रैगिंग     विद्यार्थी को रंग-रूप या पहनावे पर टिप्पणी कर प्रताड़ित करना     नस्ल, पारिवारिक पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति, क्षेत्रीयता, भाषा या जाति को लेकर अपमानित करना     मौखिक रूप से अपमान करना, सामाजिक बहिष्कार का डर पैदा करना भी रैगिंग     वॉट्सएप ग्रुप बनाना भी रैगिंग मानी जाएगी     जूनियर को धमकाने पर भी कार्यवाही की जाएगी।     किसी भी तरह का शारीरिक या मानसिक तनाव भी रैगिंग है। रैगिंग करने पर यह मिलेगी सजा     कक्षा में उपस्थित होने और शैक्षिक अधिकारियों से निलंबन।     छात्रवृत्ति सहित अन्य लाभों से वंचित किया जाएगा।     किसी टेस्ट या परीक्षा सहित अन्य मूल्यांकन प्रक्रिया से अनुपस्थित किया जाएगा।     रिजल्ट रोका जाएगा।     छात्रावास से निष्कासित कर प्रवेश भी रद किया जाएगा।     संस्था से चार सत्रों तक के लिए निष्कासन करना। यहां करें शिकायत     यूजीसी का टोल फ्री नंबर 1800-180-5522     कुलगुरु का फोन नंबर- 0755-2742001     कुलसचिव का फोन नंबर- 0755-2734913,2734913     फैक्स नंबर-0755-2742006, ईमेल आईडी-registrar@rgtu.net     अधिष्ठाता छात्र कल्याण फोन नंबर-2678870, ईमेल आईडी-dsw@rgtu.net रात में हॉस्टल में किसी को नहीं मिलेगा प्रवेश     रैगिंग की घटनाओं पर रोकने के लिए रात में छात्रावाओं व परिसर सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। फ्लाइंग स्क्वायड छात्रावासों की गतिविधियों पर नजर रखने और निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। छात्रावास में रात में किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा। – सुधीर भदौरिया, डायरेक्टर, यूआईटी आरजीपीवी दो-दो घंटे की शिफ्ट में निरीक्षण करेगें     एंटी रैगिंग कमेटी की ओर से वरिष्ठ विद्यार्थियों को रैगिंग के दुष्परिणाम समझाए जा रहे हैं। छात्रावास में रात को दो-दो घंटे की शिफ्ट में टीम निरीक्षण करेगी। – डॉ. शैलेंद्र जैन, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, मैनिट  

सेपरेट हॉस्टल फॉर फ्रेशर्स: RGPV ने सीनियर्स-जूनियर्स को अलग-अलग आवास में रखा

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) ने वरिष्ठ और कनिष्ठ विद्यार्थियों के बीच रैगिंग और मारपीट की बढ़ती घटनाओं को देखेते हुए इस सत्र से एक नई पहल की है। इस बार कनिष्ठ विद्यार्थियों को अलग छात्रावास में रखा जाएगा। इसके अलावा इस बार मेरिट के आधार पर नवप्रवेशित विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटित किया जाएगा। अब किसी भी छात्र संगठन की सिफारिश पर छात्रावास आवंटित नहीं होंगे। इसके अलावा सख्त नियम भी बनाए गए हैं। विवि प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि छात्र राजनीति, संगठनात्मक दबाव या किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव से छात्रावास आवंटन नहीं होगा यह निर्णय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और अनुशासित माहौल को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। बता दें, कि प्रदेश में सबसे अधिक आरजीपीवी में रैगिंग और मारपीट की घटनाएं यूजीसी की एंटी रैगिंग कमेटी में दर्ज हुई है। पुराने छात्रावास आवंटन को किया गया निरस्त विश्वविद्यालय ने सभी पुराने छात्रावास आवंटन को पूरी तरह निरस्त कर दिसंबर 2024 की परीक्षा में प्राप्त मेरिट और मध्यप्रदेश शासन की आरक्षण नीति के आधार पर नए सिरे से रूम आवंटन की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें लिए द्वितीय, तृतीय और अंतिम वर्ष के बालक छात्रावास के लिए 690 और कन्या छात्रावास के लिए 510 आवेदन प्राप्त हुए हैं। विद्यार्थी भी इस नई व्यवस्था समर्थन कर रहे हैं। इस बार विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रावास उन्हीं को मिलेंगे जो वास्तव में अध्ययनरत और पात्र हैं।इसके लिए न केवल आवेदकों की कक्षा व मेरिट आधारित पात्रता तय की जा रही है, बल्कि आवंटन को अस्थायी (प्रोविजनल) रूप में रखा गया है। नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अलग छात्रावास विश्वविद्यालय परिसर में कुल पांच छात्रावासों में लगभग 1460 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था है, जबकि नवप्रवेषित 1200 समेत चार वर्षों के कुल 4500 छात्र-छात्राएं हैं।इस कारण प्रबंधन ने इस बार आवंटन मेरिट के आधार पर करने का निर्णय लिया है। इसमें नवप्रवेशित विद्यार्थियों को अलग छात्रावास में रखा जाएगा। छात्रों के लिए यह व्यवस्था इसमें लड़कों को चंद्रशेखर आजाद छात्रावास में करीब 270 और भास्कराचार्य में 135 छात्रों को कमरे आवंटित किए गए हैं। वहीं लगभग 450 लड़कियों के लिए रानी अहिल्याबाई छात्रावास आवंटित किया गया है। छात्राओं के लिए लक्ष्मीबाई छात्रावास नर्धारित वहीं द्वितीय, तृतीय और अंतिम वर्ष के 370 छात्रों के लिए एपीजे अब्दुल कलाम छात्रावास और 230 छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई छात्रावास निर्धारित किए गए हैं। इसे लेकर प्रो. एस.एस भदौरिया, संचालक, यूआईटी, आरजीपीवी यह ने बताया कि यह व्यवस्था विवि में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है। 1200 आवेदन मिले है, नियमों और मेरिट के आधार पर रूम आवंटित किए जा रहे हैं।